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Nirarthak Reels Ki Aari – Gumraah Hoti Nari
| निरर्थक रील्स की आरी – गुमराह होती नारी।

क्षणिक ताली, क्षणिक चमक, क्षणभंगुर सम्मान।
चरित्र दीर्घकालिक है, वही सच्ची पहचान॥
दर्पण जग का देख कर, मत मापो निज मोल।
भीतर की जो ज्योति है, वही अमूल्य अनमोल॥
♦ वेदस्मृति ‘कृती‘ जी – पुणे, महाराष्ट्र ♦
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- “वेदस्मृति ‘कृती‘ जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कटु सत्य लेख में समझाने की कोशिश की है — यह कटु सत्य लेख जब आत्मसम्मान की कीमत पर अपनी नारी अस्त्वमिता को तार-तार करके त्वरित लाइक्स और क्षणिक प्रसिद्धि लक्ष्य बन जाए, तब सावधान होने की आवश्यकता है। डिजिटल मंच अवसर भी हैं और परीक्षा भी। हर व्यक्ति को यह समझना होगा कि आभासी प्रशंसा वास्तविक सम्मान नहीं होती। आत्ममूल्य बाहरी स्वीकृति पर नहीं, भीतर की गरिमा पर आधारित होना चाहिए। दर्शकों को भी विवेक रखना चाहिए—जो सामग्री मन, संस्कार और दृष्टि को नीचे गिराए, उससे दूरी बनाना ही बुद्धिमत्ता है। आज का डिजिटल मंच अवसर भी है और आकर्षण का जाल भी। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है, पर आत्म-अभिव्यक्ति और प्रदर्शन के बीच की महीन रेखा पहचानना भी उतना ही आवश्यक है। जब बाहरी स्वीकृति ही आत्ममूल्यांकन का आधार बन जाती है, तब व्यक्ति अनजाने में स्वयं को दूसरों की दृष्टि के हवाले कर देता है। गरिमामय जीवन का अर्थ दमन नहीं, बल्कि सजग चयन है। जो सामग्री मन को क्षणिक उत्तेजना दे पर भीतर की प्रतिष्ठा को कम करे, उससे दूरी बनाना ही विवेक है। हमें न तो कठोर निर्णय देना है, न ही आँखें मूँद लेनी हैं—बल्कि युवाओं को यह समझाना है कि सच्चा आकर्षण व्यक्तित्व, प्रतिभा और चरित्र से जन्म लेता है, न कि केवल दृश्य प्रभाव से।
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यह कटु सत्य लेख ( निरर्थक रील्स की आरी – गुमराह होती नारी। ) ” वेदस्मृति ‘कृती‘ जी “ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी मुक्तक/कवितायें/गीत/दोहे/लेख/आलेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी दोहे/कविताओं और लेख से आने वाली नई पीढ़ी और जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए।
साहित्यिक नाम : वेदस्मृति ‘कृती’
शिक्षा : एम. ए. ( अँग्रेजी साहित्य )
बी.एड. ( फ़िज़िकल )
आई• आई• टी• शिक्षिका (प्राइवेट कोचिंग क्लासेज़)
लेखिका, कहानीकार, कवियित्री, समीक्षक, (सभी विधाओं में लेखन) अनुवादक, समाज सेविका।
अध्यक्ष : “सिद्धि एक उम्मीद महिला साहित्यिक समूह”
प्रदेश अध्यक्ष : अखिल भारतीय साहित्य सदन (महाराष्ट्र इकाई )
राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान बिहार प्रान्त की महिला प्रकोष्ठ,
श्री संस्था चैरिटेबल ट्रस्ट : प्रदेश प्रतिनिधि ( महाराष्ट्र )
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी परिषद में – सह संगठन मंत्री, मुंबई ज़िला, महाराष्ट्र
हिन्दी और अँग्रेजी दोनों विधाओं में स्वतंत्र लेखन।
अनेक प्रतिष्ठित हिन्दी/अँग्रेजी पत्र – पत्रिकाओं में नियमित रचनाएँ प्रकाशित।
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इन धर्मों में कहीं धार्मिक कट्टरता है, तो कहीं एकेश्वरवाद। कहीं अपने धर्म को न मानने वालों को जिहाद का शिकार बनाने की प्रवृति है, तो कहीं मिशनरी प्रचारकों के माध्यम से आर्थिक प्रलोभन में धर्मांतरण करवा कर अपने धर्म का विस्तार करने की प्रबल ईच्छा। लेकिन हिन्दू धर्म ही दुनियां का एक मात्र ऐसा धर्म है, जिसमें न धार्मिक प्रचार और विस्तार के लिए आर्थिक प्रलोभन दिया जाता है और न ही तो कोई जिहाद ही की जाती है। यह एक खुला आवाह्न है और खुला प्रचार है। इस धर्म में किसी के साथ धर्म परिवर्तन के लिए कोई जोर जबरदस्ती, प्रलोभनात्मकता या चालाकी नहीं की जाती। जिसे यह धर्म आचारों से, विचारों से या व्यवहारों से अच्छा लगता है। वह इसे अपना सकता है। हिन्दू धर्म दुनियां का इकलौता देश है, जिसमें :-
यह Article (अपना धर्म सबसे उत्तम।)
बहुतायत लोगों की यह धारणा होती है कि तंत्र, मंत्र और तत्व ज्ञान — ये तीनों एक ही विषय के अलग- अलग नाम हैं पर विषय एक ही है। किंतु वास्तव में ऐसा नहीं है। अध्यात्म-विज्ञान की दृष्टि से देखें तो ये तीनों अलग-अलग पड़ाव हैं। प्रत्येक का अपना क्षेत्र, उद्देश्य और लक्ष्य है। इन्हें क्रमवार समझना आवश्यक है :-




यह दोहा छन्द (माता के नौ रूप।) 
शिवाजी महाराज ने अपने जीवन में कई महत्वपूर्ण युद्ध लड़े, जिनमें से कुछ प्रमुख युद्ध निम्नलिखित हैं:







