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एक सफर।

Kmsraj51 की कलम से…..

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    • A Journey | एक सफर।
      • माया और भटकन पर एकांकी | लक्ष्य, भ्रम और वर्तमान यथार्थ
      • “मंज़िल की राह में माया का मोह, लक्ष्य को भटका देता है।”
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A Journey | एक सफर।

माया और भटकन पर एकांकी | लक्ष्य, भ्रम और वर्तमान यथार्थ

“मंज़िल की राह में माया का मोह, लक्ष्य को भटका देता है।”

एक लड़का माधव अपने घर से किसी जरूरी कार्य हेतु सुबह-सुबह वाली एक बस से निकल पड़ता है वह कार्य जैसे उसकी जिंदगी का अहम हिस्सा होता है जिससे वह बहुत बड़े पद पर पहुंच सकता है। लेकिन बीच में उसे एक अपने अन्य साथी से मिलना है। उस बस से उतर कर एक छोटे से कस्बे में उसका वह साथी उस समय कमरा लेकर रहता है जो कि माधव के घर से तीस किलोमीटर के आसपास है। दोस्त से मिलकर माधव अपने गंतव्य तक पहुचने के लिए फिर सड़क तक पहुंचना चाहता है जहाँ से उसे बस मिल सके और अपने कार्य को पूर्ण कर सके। धीरे – धीरे वह पैदल चलने लगा पगडंडी में आगे जाकर रास्ता भटक गया लेकिन आगे जाकर कुछ राहगीरों से रास्ता पूछने लगा राहगीर रास्ता बता ही रहे थे कि अचानक उसकी नजर पीछे खड़ी एक सुन्दर नवयुवती पर पड़ी जो झट से बोल पड़ी कि मुझे भी उसी बस तक जाना है उसकी भी कोई परीक्षा है। यह सुनकर माधव मन ही मन खुश हुआ और युवती से उसका नाम पूछने लगा युवती ने अपना नाम माया बताया दोनों की आँखों में बहुत खुशी थी और वार्तालाप करते हुए आगे बढ़े। थोड़ी दूर आगे जाकर माधव को माया अपने बैग से 2 लड्डू निकालकर खाने को देती है चूंकि वह खुद भी खा रही थी।

दोनों में बहुत गहरी दोस्ती हो जाती है। एक दूसरे पर विश्वास करने लगते है। आगे उसी रास्ते में एक बाबा का आश्रम पड़ता है जिसने बहुत सारे कुत्ते पाल रखे है चुकी बाबा बहुत प्रसिद्ध हैं उसने कुत्ते पालने के लिए नौकर भी रखा है लेकिन नौकर किसी दूसरे काम में व्यस्त है। तब तक माया और माधव आश्रम से आधा किलोमीटर दूर थे कि सारे कुत्ते उनकी तरफ दौड़ने लगे। माया ने माधव को बता दिया कि वह रोज यहाँ से गुजरती है माधव को कुत्तों से डरने की जरूरत नहीं है। ऐक छोटी सी छड़ी माधव के हाथ दे देती हैं तब तक सारे कुत्ते उनके समीप आ जाते है माया आगे खड़ी और पीछे डरा हुआ माधव लेकिन लड़की के विश्वास ने उसे हिम्मत दी थी पंद्रह, बीस कुत्ते कुछ छोटे कुछ बड़े माया को चारो तरफ से घेरे थे वह उनको पुचकारते हुए शांत कराने लगी थी कि उनमें से ऐक बड़ा कुत्ता माधव की और बढ़ा पहले कुत्तों के डर से माधव घबराया था पर माया के कहने पर चुप खड़ा रहा लेकिन उस कुत्ते ने माधव को पीठ से काटना शुरू किया। डर के मारे नौजवान ने दोनों हाथों से कुत्ते को पकड़ लिया और पूरी ताकत से अपने नीचे दबोच लिया। माया आगे बाकी कुत्तों को सम्भाल ही रही थी उधर माधव की पीठ से खून बह रहा था लेकिन उसे मालूम नहीं था। तब तक बाबा और उनका नौकर वहाँ पहुँच जाते हैं और वह देखते है कि माधव ने एक कुत्ते को दबोच कर घायल कर दिया हैं जो कि जुर्म है क्योंकि दोनों आश्रम की सीमा से होकर गुजर रहे थे। माया अपनी सफाई देते वहाँ से तुरन्त निकलने लगती हैं उसकी बस और परीक्षा का समय निकला जा रहा था लेकिन माधव बेचारा फंस जाता है और वह आश्रम के बाबा और उनके नौकर से उलझ जाता है, काफी समय बीतने के बाद किसी तरह वह वहाँ से छूट जाता हैं लेकिन फिर रास्ता वीराने जंगल में भटक जाता है वह अपनी माया को फिर ढूंढना चाहता हैं जो उसे उसकी मंजिल तक ले चले लेकिन अब माया बहुत दूर जा चुकी है और माधव रास्ते मे ही भटक रहा हैं। वर्तमान परिवेश के संदर्भ में एकांकी।

♦ लाल सिंह वर्मा जी – जिला – सिरमौर, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

• Conclusion •

  • “लाल सिंह वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस एकांकी के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह एकांकी वर्तमान सामाजिक परिवेश और मानवीय मनोवृत्तियों को प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत करता है। कथा का नायक माधव अपने जीवन के एक महत्वपूर्ण लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सुबह बस से निकलता है। रास्ते में वह एक मित्र से मिलने के कारण बस बदलता है और आगे का मार्ग पैदल तय करते हुए रास्ता भटक जाता है। इसी दौरान उसकी मुलाकात माया नामक एक नवयुवती से होती है, जिसे भी परीक्षा देने जाना है। दोनों के बीच सहज बातचीत से विश्वास और मित्रता का भाव उत्पन्न होता है।

    यात्रा के दौरान बाबा के आश्रम के पास कुत्तों का सामना होता है। माया के भरोसे माधव भय पर काबू पाने का प्रयास करता है, किंतु एक कुत्ते के काट लेने से स्थिति गंभीर हो जाती है। बाबा और उनके नौकर के आने पर माधव को दोषी ठहरा दिया जाता है, जबकि माया अपनी परीक्षा के कारण आगे निकल जाती है। इस घटना के बाद माधव अकेला, घायल और दिशाहीन रह जाता है।

    एकांकी यह संकेत देती है कि जीवन में क्षणिक भरोसा, भ्रम और परिस्थितियाँ कभी-कभी व्यक्ति को उसके लक्ष्य से भटका देती हैं। माया यहाँ केवल एक पात्र नहीं, बल्कि आकर्षण, मोह और भ्रम का प्रतीक भी है, जो मंज़िल तक पहुँचने के बजाय नायक को रास्ते में ही भटका देती है।

—————

यह एकांकी (एक सफर।) “लाल सिंह वर्मा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं लाल सिंह वर्मा सुपुत्र श्री भिन्दर सिंह, गांव – खाड़ी, पोस्ट ऑफिस – खड़काहँ, तहसील – शिलाई, जिला – सिरमौर, हिमाचल प्रदेश का निवासी हूँ। मैं एक शिक्षक हूं, शिक्षा विभाग में भाषा अध्यापक के पद पर कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है, हिंदी भाषा से सम्बन्धित साहित्यिक विधाओं में रचनाएं लिखना तथा विशेष रूप से सांस्कृतिक, आध्यात्मिक व मानवीय मूल्यों से सम्बन्धित रचनाओं का अध्ययन करना पसंद है। इस Platform (KMSRAJ51.COM) के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

शैक्षिक योग्यता – J.B.T, BEd., MA in English and MA in Hindi, हिंदी विषय में राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण की है। अध्यापक पात्रता परीक्षा L.T., J.B.T., TGT पास की है। केंद्र विश्वविद्यालय PHD• (पीएचड•) प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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