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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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लाल सिंह वर्मा

एक सफर।

Kmsraj51 की कलम से…..

A Journey | एक सफर।

माया और भटकन पर एकांकी | लक्ष्य, भ्रम और वर्तमान यथार्थ

“मंज़िल की राह में माया का मोह, लक्ष्य को भटका देता है।”

एक लड़का माधव अपने घर से किसी जरूरी कार्य हेतु सुबह-सुबह वाली एक बस से निकल पड़ता है वह कार्य जैसे उसकी जिंदगी का अहम हिस्सा होता है जिससे वह बहुत बड़े पद पर पहुंच सकता है। लेकिन बीच में उसे एक अपने अन्य साथी से मिलना है। उस बस से उतर कर एक छोटे से कस्बे में उसका वह साथी उस समय कमरा लेकर रहता है जो कि माधव के घर से तीस किलोमीटर के आसपास है। दोस्त से मिलकर माधव अपने गंतव्य तक पहुचने के लिए फिर सड़क तक पहुंचना चाहता है जहाँ से उसे बस मिल सके और अपने कार्य को पूर्ण कर सके। धीरे – धीरे वह पैदल चलने लगा पगडंडी में आगे जाकर रास्ता भटक गया लेकिन आगे जाकर कुछ राहगीरों से रास्ता पूछने लगा राहगीर रास्ता बता ही रहे थे कि अचानक उसकी नजर पीछे खड़ी एक सुन्दर नवयुवती पर पड़ी जो झट से बोल पड़ी कि मुझे भी उसी बस तक जाना है उसकी भी कोई परीक्षा है। यह सुनकर माधव मन ही मन खुश हुआ और युवती से उसका नाम पूछने लगा युवती ने अपना नाम माया बताया दोनों की आँखों में बहुत खुशी थी और वार्तालाप करते हुए आगे बढ़े। थोड़ी दूर आगे जाकर माधव को माया अपने बैग से 2 लड्डू निकालकर खाने को देती है चूंकि वह खुद भी खा रही थी।

दोनों में बहुत गहरी दोस्ती हो जाती है। एक दूसरे पर विश्वास करने लगते है। आगे उसी रास्ते में एक बाबा का आश्रम पड़ता है जिसने बहुत सारे कुत्ते पाल रखे है चुकी बाबा बहुत प्रसिद्ध हैं उसने कुत्ते पालने के लिए नौकर भी रखा है लेकिन नौकर किसी दूसरे काम में व्यस्त है। तब तक माया और माधव आश्रम से आधा किलोमीटर दूर थे कि सारे कुत्ते उनकी तरफ दौड़ने लगे। माया ने माधव को बता दिया कि वह रोज यहाँ से गुजरती है माधव को कुत्तों से डरने की जरूरत नहीं है। ऐक छोटी सी छड़ी माधव के हाथ दे देती हैं तब तक सारे कुत्ते उनके समीप आ जाते है माया आगे खड़ी और पीछे डरा हुआ माधव लेकिन लड़की के विश्वास ने उसे हिम्मत दी थी पंद्रह, बीस कुत्ते कुछ छोटे कुछ बड़े माया को चारो तरफ से घेरे थे वह उनको पुचकारते हुए शांत कराने लगी थी कि उनमें से ऐक बड़ा कुत्ता माधव की और बढ़ा पहले कुत्तों के डर से माधव घबराया था पर माया के कहने पर चुप खड़ा रहा लेकिन उस कुत्ते ने माधव को पीठ से काटना शुरू किया। डर के मारे नौजवान ने दोनों हाथों से कुत्ते को पकड़ लिया और पूरी ताकत से अपने नीचे दबोच लिया। माया आगे बाकी कुत्तों को सम्भाल ही रही थी उधर माधव की पीठ से खून बह रहा था लेकिन उसे मालूम नहीं था। तब तक बाबा और उनका नौकर वहाँ पहुँच जाते हैं और वह देखते है कि माधव ने एक कुत्ते को दबोच कर घायल कर दिया हैं जो कि जुर्म है क्योंकि दोनों आश्रम की सीमा से होकर गुजर रहे थे। माया अपनी सफाई देते वहाँ से तुरन्त निकलने लगती हैं उसकी बस और परीक्षा का समय निकला जा रहा था लेकिन माधव बेचारा फंस जाता है और वह आश्रम के बाबा और उनके नौकर से उलझ जाता है, काफी समय बीतने के बाद किसी तरह वह वहाँ से छूट जाता हैं लेकिन फिर रास्ता वीराने जंगल में भटक जाता है वह अपनी माया को फिर ढूंढना चाहता हैं जो उसे उसकी मंजिल तक ले चले लेकिन अब माया बहुत दूर जा चुकी है और माधव रास्ते मे ही भटक रहा हैं। वर्तमान परिवेश के संदर्भ में एकांकी।

♦ लाल सिंह वर्मा जी – जिला – सिरमौर, हिमाचल प्रदेश ♦

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• Conclusion •

  • “लाल सिंह वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस एकांकी के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह एकांकी वर्तमान सामाजिक परिवेश और मानवीय मनोवृत्तियों को प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत करता है। कथा का नायक माधव अपने जीवन के एक महत्वपूर्ण लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सुबह बस से निकलता है। रास्ते में वह एक मित्र से मिलने के कारण बस बदलता है और आगे का मार्ग पैदल तय करते हुए रास्ता भटक जाता है। इसी दौरान उसकी मुलाकात माया नामक एक नवयुवती से होती है, जिसे भी परीक्षा देने जाना है। दोनों के बीच सहज बातचीत से विश्वास और मित्रता का भाव उत्पन्न होता है।

    यात्रा के दौरान बाबा के आश्रम के पास कुत्तों का सामना होता है। माया के भरोसे माधव भय पर काबू पाने का प्रयास करता है, किंतु एक कुत्ते के काट लेने से स्थिति गंभीर हो जाती है। बाबा और उनके नौकर के आने पर माधव को दोषी ठहरा दिया जाता है, जबकि माया अपनी परीक्षा के कारण आगे निकल जाती है। इस घटना के बाद माधव अकेला, घायल और दिशाहीन रह जाता है।

    एकांकी यह संकेत देती है कि जीवन में क्षणिक भरोसा, भ्रम और परिस्थितियाँ कभी-कभी व्यक्ति को उसके लक्ष्य से भटका देती हैं। माया यहाँ केवल एक पात्र नहीं, बल्कि आकर्षण, मोह और भ्रम का प्रतीक भी है, जो मंज़िल तक पहुँचने के बजाय नायक को रास्ते में ही भटका देती है।

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यह एकांकी (एक सफर।) “लाल सिंह वर्मा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं लाल सिंह वर्मा सुपुत्र श्री भिन्दर सिंह, गांव – खाड़ी, पोस्ट ऑफिस – खड़काहँ, तहसील – शिलाई, जिला – सिरमौर, हिमाचल प्रदेश का निवासी हूँ। मैं एक शिक्षक हूं, शिक्षा विभाग में भाषा अध्यापक के पद पर कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है, हिंदी भाषा से सम्बन्धित साहित्यिक विधाओं में रचनाएं लिखना तथा विशेष रूप से सांस्कृतिक, आध्यात्मिक व मानवीय मूल्यों से सम्बन्धित रचनाओं का अध्ययन करना पसंद है। इस Platform (KMSRAJ51.COM) के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

शैक्षिक योग्यता – J.B.T, BEd., MA in English and MA in Hindi, हिंदी विषय में राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण की है। अध्यापक पात्रता परीक्षा L.T., J.B.T., TGT पास की है। केंद्र विश्वविद्यालय PHD• (पीएचड•) प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की है।

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©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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Filed Under: 2026 - KMSRAJ51 की कलम से, हिन्दी साहित्य Tagged With: lal singh verma, एकांकी, एकांकी सारांश, एकांकी सारांश हिंदी, जीवन और भ्रम, प्रतीकात्मक एकांकी, मानव मनोविज्ञान, माया प्रतीक, लक्ष्य और भटकाव, लक्ष्य से भटकाव, लाल सिंह वर्मा, वर्तमान परिवेश एकांकी, वर्तमान परिवेश पर एकांकी, समकालीन एकांकी, समकालीन हिंदी नाटक, सामाजिक यथार्थ, हिंदी एकांकी, हिंदी नाटक

बोलता पेड़।

Kmsraj51 की कलम से…..

Bolta Ped | बोलता पेड़।

Talking Tree

इन अशियानों को देखने,
क्यों मैं यहाँ खड़ा रहा?
मैं भलाई करता गया,
पर आँखों में अड़ा रहा।

आशियानों के महारशय,
धीरे– 2 खीजने लगे।
पानी इसका बन्द कर दो,
जड़े सीमेन्ट से सींचने लगे।

मैं भी धुन का पक्का हूँ,
अपने आप टस से मस न हुआ।
चाहे मेरी जड़े काटते,
चाहे देते तेजाब का धूआँ।

तब मेरे तरू साथि हँसे,
ये महाज्ञानी खूब तुम्हें पालेंगे।
जड़े तुम्हारी खोखली करके,
फिर यहाँ से टालेंगे।

ऋण था मुझ पर इस धरती माँ का,
इसको फिर मैं छोड़ न पाया।
चारों तरफ आशियानें बने,
मैं बीच में बहुत छटपटाया।

अधिकार नहीं था उनको,
मुझे इस तरह कुचल जाने का।
लानत है तुम्हारी दौलत पर,
काम किसी के आ न सके।
जीवन दायी वायु देते,
उसको भी न बचा सके।

तुम्हारी यही साजिश रही,
जद मे तुम भी आएंगे।
चालाकी से मुझे नष्ट करो,
पर एक दिन बहुत पछताएंगे।

बड़े गौर से सोचता हूँ,
कितना खुदगर्ज इंसान है।
सूखा हूं बीच में इनके,
क्या इनकी यही पहचान है?

♦ लाल सिंह वर्मा जी – जिला – सिरमौर, हिमाचल प्रदेश ♦

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• Conclusion •

  • “लाल सिंह वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — आज का इंसान कितना स्वार्थी हो गया है, जीवनदायी पेड़ को भी अपने स्वार्थ के लिए काटता चला जा रहा हैं। हर जगह कंक्रीट से ढक दे रहा है, पेड़ों को दबाता चला जा रहा है। इन पेड़ों से हमे शुद्ध हवा, ऑक्सीजन, लकड़ी, व इनकी पत्तिया तक मिलती है जो हमारे जीवन की बहुत सारी समस्याओं का समाधान करती है। मानव को ये पेड़ सदैव से ही कुछ न कुछ दिया ही है, फिर भी इनकी रक्षा करने की जगह पर इनका विनाश किया जा रहा है बहुत ही बेरहमी से। हे मानव ये भूल ना जाना की एक दिन तुम बहुत ज्यादा पछताओगे, जो इन पेड़ों को इसी तरह से काटते रहे। अभी भी समय है सुधर जाओ और कोशिश करो की प्रत्येक वर्ष एक नया पेड़ जरूर लगाओ और उस पेड़ का तब तक देख भाल करो जब तक वह पेड़ अपना ख़ुराक खुद ना लेने लगे।

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यह कविता (बोलता पेड़।) “लाल सिंह वर्मा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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मैं लाल सिंह वर्मा सुपुत्र श्री भिन्दर सिंह, गांव – खाड़ी, पोस्ट ऑफिस – खड़काहँ, तहसील – शिलाई, जिला – सिरमौर, हिमाचल प्रदेश का निवासी हूँ। मैं एक शिक्षक हूं, शिक्षा विभाग में भाषा अध्यापक के पद पर कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है, हिंदी भाषा से सम्बन्धित साहित्यिक विधाओं में रचनाएं लिखना तथा विशेष रूप से सांस्कृतिक, आध्यात्मिक व मानवीय मूल्यों से सम्बन्धित रचनाओं का अध्ययन करना पसंद है। इस Platform (KMSRAJ51.COM) के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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लोहारी नहीं डूबा।

Kmsraj51 की कलम से…..

Lohari Nahin Dooba | लोहारी नहीं डूबा।

लोहारी नहीं डूबा, डूबी हमारी यादें सारी,
बचपन में जहाँ खेले कूदे, आपस मे थी सब मे यारी।
नफरत का नामोनिशान न था, न बेईमानी न मक्कारी,
गाँव था मेरा स्वर्ग समान, जहाँ थे पचासों मकान।

भलाई, ईमानदारी के तराजू थे, न थी कोई मतलबी दुकान,
बच्चे, बूढे़ और जवान, करते एक दूजे का सम्मान।
शहरों की अन्धेरी होड़ मे, चारो तरफ है मारामारी,
लोहारी नहीं डूबा, डूबी हमारी यादें सारी।

जिस गाँव की गलियों मे, लुका छुपि का खेल खेलते,
दादा-दादी हुक्का पीते, और हुक्के के अंगारे जलते।
हुक्के की आवाज को, हम बडे़ चाव से सुनते,
कभी उनकी लाठी खींचते, कभी उनके बालों को धुनते।

हमें कभी एहसास भी न था कि ऐसा मंजर आएगा,
हम भोले ग्रामीणों का, सुख चैन ले जाएगा।
कितना रोते कितना विलखते, कोई नही था सुनने वाला,
भगवान से प्रार्थना करते, रक्षा करो हे ऊपर वाला।
जब सरकार के आकाओं ने, किया एक फरमान जारी,
अपनी यादें समेट लो, अब करो तुम जाने की तैयारी,
लोहारी नहीं डूबा है, डूबी है यादें हमारी।

हे लोकतंत्र के ठेकेदारों, हम कहा जाएगें,
अपने प्यारे गाँव को, अब कहा से लाएगे।
कितने बडे़ खरीद्दार हो? हमारी यादों को भी खरीद पाओगे,
जिन यादों में बचपन पला है, उनको कैसे लौटाओगे?

क्या कसूर था भोले गाँव का? जो तुमने ये सिला दिया,
सभी लोगों की यादों को, पानी मे क्यों मिला दिया?
जो तुमने आँकलन किया यह नहीं थी अभिलाषा हमारी,
लोहारी नहीं डूबा है, डूबी है आत्मा हमारी।
लोहारी नहीं डूबा है, डूबी है तमन्नाऐं हमारी,
लोहारी नहीं डूबा है, डूबी है जन्म भूमि, मातृ भूमि हमारी।

लोहारी तथा इस प्रकार से पीड़ित ग्रामीणों को समर्पित कविता।

♦ लाल सिंह वर्मा जी – जिला – सिरमौर, हिमाचल प्रदेश ♦

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• Conclusion •

  • “लाल सिंह वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — दो पल ठहर कर मन-मन से अब गुफ्तगू करने लगा। कितना निर्मल व पवित्र सुखमय जीवन था पहले गांव वालो का, वह जीवन आजकल के शहर के चकाचौध में कहां गुम सा हो गया हैं, आया बनावटी भूचाल, कुछ ऐसा की सब कुछ तहस-नहस कर गया। वह बचपन की यादे व सुख चैन यादों में सदैव के लिए फीड सा हो गया। जब कोरोना आया चारों तरफ अपना कोहराम मचाया सब कुछ तहस नहस करके, सभी के जीवन को प्रभावित किया। किसी को एहसास भी न था कि ऐसा मंजर आएगा, हम भोले ग्रामीणों का, सुख चैन ले जाएगा।

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यह कविता (लोहारी नहीं डूबा।) “लाल सिंह वर्मा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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मन के मीत।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ मन के मीत। ♦

वो भी रहम की दवा रखते है,
इस भोले मन ने यह मान लिया।
हवा के झोंके की तरह हम मिले,
पर शिद्दत से पहचान लिया।

दो पल ठहर कर मन-मन से,
गुफ्तगू करने लगा।
मासूमियत देखकर भी,
मन बहम से भरने लगा।

लेता दवा अपने मर्ज की,
बात-बात से तनती गई।
मर्ज और दवा की,
आपस मे ठनती गई।

हम भी नेक इंसान है,
जख्म फिर भी पलते रहे।
खुशियों की इस सौदेबाजी से,
लोग हमसे जलते गए।

आया बनावटी भूचाल,
सब कुछ तहस-नहस कर गया।
ईरादा था सब खण्डहर करने का,
पर मन मे दवा और मर्ज का,
कौना दबकर रह गया।

♦ लाल सिंह वर्मा जी – जिला – सिरमौर, हिमाचल प्रदेश ♦

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• Conclusion •

  • “लाल सिंह वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — दो पल ठहर कर मन-मन से अब गुफ्तगू करने लगा। मासूमियत देखकर भी न जाने क्यों मन बहम से भरने लगा। आया बनावटी भूचाल, कुछ ऐसा की सब कुछ तहस-नहस कर गया। ईरादा था सब खण्डहर करने का पर मन मे दवा और मर्ज का कौना कही दबकर रह गया। कर्मों के उपरांत, परोपकारी बनने, दान पुण्य को नियमित करने से ही मानव तन मिलता है। जब परमात्मा ने हमें सर्वश्रेष्ठ जीव बना कर धरा पर भेजा है तो यह हमारा नैतिक कर्तव्य बनता है कि हमें इंसानियत का भाव रखते हुए सर्व जीव कल्याण के लिए कार्य करना चाहिए।

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यह कविता (मन के मीत।) “लाल सिंह वर्मा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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मैं लाल सिंह वर्मा सुपुत्र श्री भिन्दर सिंह, गांव – खाड़ी, पोस्ट ऑफिस – खड़काहँ, तहसील – शिलाई, जिला – सिरमौर, हिमाचल प्रदेश का निवासी हूँ। मैं एक शिक्षक हूं, शिक्षा विभाग में भाषा अध्यापक के पद पर कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है, हिंदी भाषा से सम्बन्धित साहित्यिक विधाओं में रचनाएं लिखना तथा विशेष रूप से सांस्कृतिक, आध्यात्मिक व मानवीय मूल्यों से सम्बन्धित रचनाओं का अध्ययन करना पसंद है। इस Platform (KMSRAJ51.COM) के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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Filed Under: 2022-KMSRAJ51 की कलम से, लाल सिंह वर्मा जी की कविताएं।, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: lal singh verma, Man Ke Upar Kavita Hindi Mein, poet lal singh verma poems, जीवन जीने की प्रेरणा देने वाली कविता, प्रेरणादायक कविता, प्रेरणादायक कविता - मन के मीत, मन के मीत, मन के मीत - kmsraj51, मन के मीत - लाल सिंह वर्मा, मन पर कविता, मन पर कविता - मन के मीत, मानव जीवन का महत्व, मानव जीवन पर कविता, लाल सिंह वर्मा, लाल सिंह वर्मा की कविताएं, संघर्षमय जीवन पर कविता

मन की कुंठा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ मन की कुंठा। ♦

ज्यों राख के ढेर में,
ज्वाला छुपी शान्त पड़ी है।
त्यों राहो की उलझनें,
मोड़-मोड़ पर छुपी खड़ी है।

आने दो बाहर,
हृदय की कुठां को।
खुली हवा में मन को,
विचरण करने दो।

मंजर अगर अभी है,
रूकावटों का।
फिर भी आशा की ज्योति से,
जीवन की सुखमय घड़ी है।

मत देखो घनघोर,
हृदय के अन्धेरो को।
स्वार्थ, भौतिकता, निर्लज्जा,
व विनाश के सपेरों को।

छुपा नही है अभी उम्मीदों का सूरज,
बिना अस्तित्व के बादलो मे।
युद्ध, महंगाई, बेरोजगारी तथा,
डकैती के दलालों में।

जागो नवयुवकों,
अपनी ऊर्जा का संचार करो।
लेष मात्र है ये उलझनें,
भारत का पुनः उद्धार करो।

सुभाष, भगत तथा आजाद,
कभी न डग में विचलित हुए।
नहीं चुनी राहें आसान,
तभी तो दिलों में अमर हुए।

समय गवाही जरूर देगा,
ईमानदारी व सत्य के…
मार्ग पर चलने की।
बदलेगी जरूर ये तस्वीर,
तू तमन्ना तो रख बदलने की।

मिलकर काफिला आगे बढे़गा,
तभी इस युद्ध को जीत पाएंगे।
सर्वस्व न्योछावर करके देखो,
तभी सच्चे सिपाही कहलाएगें।

♦ लाल सिंह वर्मा जी – जिला – सिरमौर, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

• Conclusion •

  • “लाल सिंह वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — आजकल के नवयुवकों को क्या हो गया है, किसी को भी भारतीय संस्कृति, संस्कार व सभ्यता का रक्षा करना अपना दायित्व नहीं लगता आखिर क्यों? अब भी समय है जागो नवयुवकों, अपनी ऊर्जा का संचार करो। लेष मात्र है ये उलझनें, भारत का पुनः उद्धार करो। नशे के चंगुल से बाहर निकल कर भारत के नवनिर्माण में भागीदार बनो। इतिहास गवाह है सुभाष, भगत तथा आजाद, कभी न डग में विचलित हुए। कभी नहीं चुनी राहें आसान, तभी तो दिलों में अमर हुए सदैव के लिए। याद रखना तू समय गवाही जरूर देगा, ईमानदारी व सत्य के… मार्ग पर चलने की। बहुत ही जल्द बदलेगी जरूर ये तस्वीर, तू तमन्ना तो रख बदलने की। जब मिलकर काफिला आगे बढे़गा, तभी इस युद्ध को जीत पाएंगे। सर्वस्व न्योछावर करके देखो माँ भर्ती पर तभी सच्चे सिपाही कहलाएगें।

—————

यह कविता (मन की कुंठा।) “लाल सिंह वर्मा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं लाल सिंह वर्मा सुपुत्र श्री भिन्दर सिंह, गांव – खाड़ी, पोस्ट ऑफिस – खड़काहँ, तहसील – शिलाई, जिला – सिरमौर, हिमाचल प्रदेश का निवासी हूँ। मैं एक शिक्षक हूं, शिक्षा विभाग में भाषा अध्यापक के पद पर कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है, हिंदी भाषा से सम्बन्धित साहित्यिक विधाओं में रचनाएं लिखना तथा विशेष रूप से सांस्कृतिक, आध्यात्मिक व मानवीय मूल्यों से सम्बन्धित रचनाओं का अध्ययन करना पसंद है। इस Platform (KMSRAJ51.COM) के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

शैक्षिक योग्यता – J.B.T, BEd., MA in English and MA in Hindi, हिंदी विषय में राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण की है। अध्यापक पात्रता परीक्षा L.T., J.B.T., TGT पास की है। केंद्र विश्वविद्यालय PHD• (पीएचड•) प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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गाँव की व्यथा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ गाँव की व्यथा। ♦

लोग थे मेरे भोले भाले,
लोग थे मेरे भोले भाले।
लाखो संकट सहन किए,
मानव को मानवता मे रहने दिए,
कभी ना हुए ओ मन के काले।

चका चौध की इस दुनिया को,
शांति उनकी रास न आई।
कई अंधेरों ने आगे आकर,
उलटी उनको राह दिखाई।

देश से विदेश गए कुछ,
गाँव से प्रदेश गए कुछ।
लगी भनक जब चका चौध की,
अपनों को ही मानने लगे तुच्छ।

पर औकात क्या थी,
उनकी ऐसा करने की।
अगर जागरूक सरकारी तंत्र होता,
उन भोले ग्रामीणों के लिए,
इनके पास उन्नति का मंत्र होता।

भेज दिया गाँव को ढूंढने,
एक पतली सी सड़क को।
हाफ़्ती हाफ़्ती गाँव पहुंची,
बची कसर पूरी करने को।

आना था उसे वर्षो पहले,
बड़ी उलझनों से आज आई।
ग्रामीण संस्कृति को आँख दिखाकर,
फिर वह सभ्य कहलाई।

उदय होता…
सम्पूर्ण सनातनता का।
यदि गाँव का पूर्ण उदय होता,
रखते लाज मेरे संरक्षण की।
हाल न आज ऐसा होता,
लोग थे मेरे भोले भाले,
लोग थे मेरे भोले भाले।

♥ गाँव को समर्पित कविता। ♥

♦ लाल सिंह वर्मा जी – जिला – सिरमौर, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

• Conclusion •

  • “लाल सिंह वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — देश से विदेश गए कुछ, गाँव से प्रदेश गए कुछ। आखिर क्यों आजकल के बच्चें गांव से शहर को जाकर वहां की लगी भनक जब चका चौध की अपना सुध-बुध खोकर गांव वालों को व अपनों को ही मानने लगे तुच्छ। पर औकात क्या थी, उनकी ऐसा करने की। अगर जागरूक सरकारी तंत्र होता तो उन भोले ग्रामीणों के लिए, इनके पास भी उन्नति का मंत्र होता। गांव भी उन्नति से सराबोर होता। अभी कुछ समय पहले जब कोरोना आया था तो सभी को अपना गांव ही याद आया सभी बचने के लिए गांव भागकर आये। उदय होता… सम्पूर्ण सनातनता का, यदि गाँव का पूर्ण उदय होता। रखते लाज मेरे संरक्षण की हाल न आज ऐसा होता। गांव के लोग थे मेरे भोले भाले। एक बात याद रखना – आज भी गांव में इंसानियत जीवित है, ताज़ी हवा व खानपान सात्विक है, सभी मिल जुलकर प्रेम से रहते है, मुसीबत में एक दूसरे के काम आते है। जब जब तुम तकलीफ में रहोगे तुम्हे अपना गांव ही याद आएगा।

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यह कविता (गाँव की व्यथा।) “लाल सिंह वर्मा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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मैं लाल सिंह वर्मा सुपुत्र श्री भिन्दर सिंह, गांव – खाड़ी, पोस्ट ऑफिस – खड़काहँ, तहसील – शिलाई, जिला – सिरमौर, हिमाचल प्रदेश का निवासी हूँ। मैं एक शिक्षक हूं, शिक्षा विभाग में भाषा अध्यापक के पद पर कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है, हिंदी भाषा से सम्बन्धित साहित्यिक विधाओं में रचनाएं लिखना तथा विशेष रूप से सांस्कृतिक, आध्यात्मिक व मानवीय मूल्यों से सम्बन्धित रचनाओं का अध्ययन करना पसंद है। इस Platform (KMSRAJ51.COM) के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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