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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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2026 - KMSRAJ51 की कलम से

बात वक्त की।

Kmsraj51 की कलम से…..

Baat Waqt Ki | बात वक्त की।

ये लगे हैं बुझाने लौ चिरागों की जलने से पहले ही,
फिर मचा रहे हैं शोर कि चिराग जलते क्यों नहीं हैं?
अंधेरा तो छटा नहीं फिर चिरागों का क्या फायदा?
पर हिम्मत तो देखिए इनकी साहब!
हर अमावस को करते हैं पूनम का वायदा।

क्या फायदा दीवारें खड़ी करने से,
तूफान आ जाने के बाद।
अब समेटने का नाटक कर रहे हैं,
जब आंधियां सब उड़ाकर ले गई।

यूं नहीं कहते हैं बुजुर्ग ,
कि नालियां साफ आसमा में निकाला करो।
बेकार है कुरेदना उन्हें भारी बरसात आने के बाद।
उर्वरकों से फैलते, फलते – फूलते हैं पौधे सभी,
पर कुछ भी असर नहीं करती है बेमौसमी खाद।

हर बात वक्त की ही होती है अच्छी साहब,
बेवक्ता तो भोजन भी जहर बन जाता है।
आज का दौर हो गया है कुछ ऐसा हजूर,
अपना अजीज भी मौके पर जहर उगलवाता है।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता समय की महत्ता और अवसर चूकने के दुष्परिणामों पर केंद्रित है। कवि उन लोगों की आलोचना करते हैं जो समस्याओं को समय रहते हल करने के बजाय पहले ही उम्मीदों की लौ बुझा देते हैं और बाद में शोर मचाते हैं कि प्रकाश क्यों नहीं हुआ।

    कवि बताते हैं कि जब अंधेरा छंटा ही नहीं, तो चिराग जलाने का लाभ भी नहीं मिलता, फिर भी लोग हर अमावस्या को पूर्णिमा का वादा करते रहते हैं। यह उन झूठे आश्वासनों का प्रतीक है जो बिना वास्तविक प्रयास के दिए जाते हैं।

    आगे कविता समझाती है कि तूफान के बाद दीवारें खड़ी करना या बाढ़ के बाद नालियां साफ करना व्यर्थ है। अर्थात, काम हमेशा सही समय पर ही प्रभावी होता है; देर से किया गया प्रयास अक्सर निष्फल रहता है।

    कवि यह भी कहते हैं कि हर कार्य का अपना उचित समय होता है—जैसे बेमौसम खाद का पौधों पर असर नहीं होता, वैसे ही अनुचित समय पर किया गया कार्य परिणाम नहीं देता।

    अंततः कविता वर्तमान समाज की विडंबना दिखाती है कि समय पर साथ देने के बजाय अपने ही लोग अवसर आने पर हानि पहुंचाते हैं। संदेश यह है कि जीवन में सफलता और संबंधों की स्थिरता के लिए समय की समझ, सही निर्णय और समय पर कार्य करना अत्यंत आवश्यक है।

—————

यह कविता (बात वक्त की।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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Filed Under: 2026 - KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: hemraj thakur, hemraj thakur poems, samay ki kimat poem in hindi, samay par kavita, short poem on time in hindi, कविता हिंदी में, बात वक़्त की, बात वक़्त की कविता हिंदी में, हेमराज ठाकुर, हेमराज ठाकुर जी की कविताएं

तिरंगा का करें सम्मान।

Kmsraj51 की कलम से…..

Tiranga Ka Kare Samman | तिरंगा का करें सम्मान।

“तिरंगा हमारी पहचान, शहीदों की अमर निशानी और भारत की शान।”

तिरंगा है भारत की शान,
इसमें बसती देश की जान।
केसरिया कहता साहस–त्याग,
श्वेत सिखाता सत्य–ज्ञान।

हरा रंग हरियाली बोले,
खेत–खलिहान, वन–उपवन डोले।
अशोक चक्र हर पल सिखाए,
रुकना नहीं, आगे ही बढ़ना बोले।

इस ध्वज तले सोई कुर्बानी,
हर धागे में अमर कहानी।
वीरों ने हँसकर प्राण दिए,
तब पाई हमने ये आज़ादी।

ना झुके कभी ये आन–बान,
ना होने दें इसका अपमान।
हर घर में हो इसका आदर,
हर दिल में बसे इसका मान।

आओ आज ये प्रण हम ठानें,
तन–मन से इसे पहचानें।
कर्म, सेवा, सत्य के पथ पर,
चलकर भारत को महान बनाएं।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता तिरंगे के गौरव, महत्व और देशभक्ति की भावना को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करती है। कवि बताता है कि तिरंगा भारत की शान और आत्मा का प्रतीक है। इसके तीनों रंग साहस, त्याग, सत्य, ज्ञान और हरियाली जैसे मूल्यों का संदेश देते हैं। अशोक चक्र निरंतर आगे बढ़ते रहने और प्रगति का प्रतीक है।कविता में यह भी दर्शाया गया है कि तिरंगे में वीर शहीदों की कुर्बानियाँ और आज़ादी की अमर गाथाएँ समाई हुई हैं। हमें इस ध्वज का सम्मान बनाए रखना चाहिए और कभी इसका अपमान नहीं होने देना चाहिए। अंत में कवि सभी को सत्य, सेवा और कर्म के मार्ग पर चलकर देश को महान बनाने का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है।

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यह कविता (तिरंगा का करें सम्मान।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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एक सफर।

Kmsraj51 की कलम से…..

A Journey | एक सफर।

माया और भटकन पर एकांकी | लक्ष्य, भ्रम और वर्तमान यथार्थ

“मंज़िल की राह में माया का मोह, लक्ष्य को भटका देता है।”

एक लड़का माधव अपने घर से किसी जरूरी कार्य हेतु सुबह-सुबह वाली एक बस से निकल पड़ता है वह कार्य जैसे उसकी जिंदगी का अहम हिस्सा होता है जिससे वह बहुत बड़े पद पर पहुंच सकता है। लेकिन बीच में उसे एक अपने अन्य साथी से मिलना है। उस बस से उतर कर एक छोटे से कस्बे में उसका वह साथी उस समय कमरा लेकर रहता है जो कि माधव के घर से तीस किलोमीटर के आसपास है। दोस्त से मिलकर माधव अपने गंतव्य तक पहुचने के लिए फिर सड़क तक पहुंचना चाहता है जहाँ से उसे बस मिल सके और अपने कार्य को पूर्ण कर सके। धीरे – धीरे वह पैदल चलने लगा पगडंडी में आगे जाकर रास्ता भटक गया लेकिन आगे जाकर कुछ राहगीरों से रास्ता पूछने लगा राहगीर रास्ता बता ही रहे थे कि अचानक उसकी नजर पीछे खड़ी एक सुन्दर नवयुवती पर पड़ी जो झट से बोल पड़ी कि मुझे भी उसी बस तक जाना है उसकी भी कोई परीक्षा है। यह सुनकर माधव मन ही मन खुश हुआ और युवती से उसका नाम पूछने लगा युवती ने अपना नाम माया बताया दोनों की आँखों में बहुत खुशी थी और वार्तालाप करते हुए आगे बढ़े। थोड़ी दूर आगे जाकर माधव को माया अपने बैग से 2 लड्डू निकालकर खाने को देती है चूंकि वह खुद भी खा रही थी।

दोनों में बहुत गहरी दोस्ती हो जाती है। एक दूसरे पर विश्वास करने लगते है। आगे उसी रास्ते में एक बाबा का आश्रम पड़ता है जिसने बहुत सारे कुत्ते पाल रखे है चुकी बाबा बहुत प्रसिद्ध हैं उसने कुत्ते पालने के लिए नौकर भी रखा है लेकिन नौकर किसी दूसरे काम में व्यस्त है। तब तक माया और माधव आश्रम से आधा किलोमीटर दूर थे कि सारे कुत्ते उनकी तरफ दौड़ने लगे। माया ने माधव को बता दिया कि वह रोज यहाँ से गुजरती है माधव को कुत्तों से डरने की जरूरत नहीं है। ऐक छोटी सी छड़ी माधव के हाथ दे देती हैं तब तक सारे कुत्ते उनके समीप आ जाते है माया आगे खड़ी और पीछे डरा हुआ माधव लेकिन लड़की के विश्वास ने उसे हिम्मत दी थी पंद्रह, बीस कुत्ते कुछ छोटे कुछ बड़े माया को चारो तरफ से घेरे थे वह उनको पुचकारते हुए शांत कराने लगी थी कि उनमें से ऐक बड़ा कुत्ता माधव की और बढ़ा पहले कुत्तों के डर से माधव घबराया था पर माया के कहने पर चुप खड़ा रहा लेकिन उस कुत्ते ने माधव को पीठ से काटना शुरू किया। डर के मारे नौजवान ने दोनों हाथों से कुत्ते को पकड़ लिया और पूरी ताकत से अपने नीचे दबोच लिया। माया आगे बाकी कुत्तों को सम्भाल ही रही थी उधर माधव की पीठ से खून बह रहा था लेकिन उसे मालूम नहीं था। तब तक बाबा और उनका नौकर वहाँ पहुँच जाते हैं और वह देखते है कि माधव ने एक कुत्ते को दबोच कर घायल कर दिया हैं जो कि जुर्म है क्योंकि दोनों आश्रम की सीमा से होकर गुजर रहे थे। माया अपनी सफाई देते वहाँ से तुरन्त निकलने लगती हैं उसकी बस और परीक्षा का समय निकला जा रहा था लेकिन माधव बेचारा फंस जाता है और वह आश्रम के बाबा और उनके नौकर से उलझ जाता है, काफी समय बीतने के बाद किसी तरह वह वहाँ से छूट जाता हैं लेकिन फिर रास्ता वीराने जंगल में भटक जाता है वह अपनी माया को फिर ढूंढना चाहता हैं जो उसे उसकी मंजिल तक ले चले लेकिन अब माया बहुत दूर जा चुकी है और माधव रास्ते मे ही भटक रहा हैं। वर्तमान परिवेश के संदर्भ में एकांकी।

♦ लाल सिंह वर्मा जी – जिला – सिरमौर, हिमाचल प्रदेश ♦

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• Conclusion •

  • “लाल सिंह वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस एकांकी के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह एकांकी वर्तमान सामाजिक परिवेश और मानवीय मनोवृत्तियों को प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत करता है। कथा का नायक माधव अपने जीवन के एक महत्वपूर्ण लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सुबह बस से निकलता है। रास्ते में वह एक मित्र से मिलने के कारण बस बदलता है और आगे का मार्ग पैदल तय करते हुए रास्ता भटक जाता है। इसी दौरान उसकी मुलाकात माया नामक एक नवयुवती से होती है, जिसे भी परीक्षा देने जाना है। दोनों के बीच सहज बातचीत से विश्वास और मित्रता का भाव उत्पन्न होता है।

    यात्रा के दौरान बाबा के आश्रम के पास कुत्तों का सामना होता है। माया के भरोसे माधव भय पर काबू पाने का प्रयास करता है, किंतु एक कुत्ते के काट लेने से स्थिति गंभीर हो जाती है। बाबा और उनके नौकर के आने पर माधव को दोषी ठहरा दिया जाता है, जबकि माया अपनी परीक्षा के कारण आगे निकल जाती है। इस घटना के बाद माधव अकेला, घायल और दिशाहीन रह जाता है।

    एकांकी यह संकेत देती है कि जीवन में क्षणिक भरोसा, भ्रम और परिस्थितियाँ कभी-कभी व्यक्ति को उसके लक्ष्य से भटका देती हैं। माया यहाँ केवल एक पात्र नहीं, बल्कि आकर्षण, मोह और भ्रम का प्रतीक भी है, जो मंज़िल तक पहुँचने के बजाय नायक को रास्ते में ही भटका देती है।

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यह एकांकी (एक सफर।) “लाल सिंह वर्मा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं लाल सिंह वर्मा सुपुत्र श्री भिन्दर सिंह, गांव – खाड़ी, पोस्ट ऑफिस – खड़काहँ, तहसील – शिलाई, जिला – सिरमौर, हिमाचल प्रदेश का निवासी हूँ। मैं एक शिक्षक हूं, शिक्षा विभाग में भाषा अध्यापक के पद पर कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है, हिंदी भाषा से सम्बन्धित साहित्यिक विधाओं में रचनाएं लिखना तथा विशेष रूप से सांस्कृतिक, आध्यात्मिक व मानवीय मूल्यों से सम्बन्धित रचनाओं का अध्ययन करना पसंद है। इस Platform (KMSRAJ51.COM) के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

शैक्षिक योग्यता – J.B.T, BEd., MA in English and MA in Hindi, हिंदी विषय में राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण की है। अध्यापक पात्रता परीक्षा L.T., J.B.T., TGT पास की है। केंद्र विश्वविद्यालय PHD• (पीएचड•) प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की है।

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आप सभी का प्रिय दोस्त

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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बाल विवाह – एक अभिशाप।

Kmsraj51 की कलम से…..

Baal Vivaah Ek Abhishaap | बाल विवाह – एक अभिशाप।

बाल विवाह के खिलाफ कविता | बेटी की आवाज़, समाज के नाम संदेश

“बेटी बोझ नहीं, भविष्य है — उसे सपने पूरे करने का अधिकार दो।”

बेटी ने पूछा बापू से —
“इतनी ब्याह की क्या जल्दी?”
थोड़ी तो बढ़ जाने दो,
अभी तो मैं नादान हूँ,
थोड़ी तो ढल जाने दो।
अनजान डगर पर चलने से पहले,
जीवन को तो समझ लेने दो।

अभी तो बचपन भी न जिया,
थोड़ा तो जी जाने दो।
खेलों की किलकारी बाकी है,
किताबों से दोस्ती बाकी है,
सपनों की उड़ान अधूरी है,
आँखों में आस अभी बाकी है।

माँग में सिंदूर भरने से पहले,
हाथों में कलम थमा लेने दो,
घर की ज़िम्मेदारी से पहले,
मुझे खुद को पहचान लेने दो।

मैं बोझ नहीं, उम्मीद हूँ पापा,
कल का उजाला हूँ पापा,
आज अगर मुरझा दी गई,
तो कैसे खिल पाऊँ पापा?

कुड़वी रस्मों की बेड़ियाँ,
मेरे पाँव से हटा लेने दो,
बेटी हूँ, इंसान हूँ मैं,
मुझे भी जीने का हक़ दो पापा।

जो आज पढ़ेगी, वही कल
घर को रोशन करेगी,
अधपकी उम्र में ब्याही गई
किस्मत से ही हारेगी।

इस अभिशाप से समाज को
आज ही बचा लेने दो,
बेटी को बेटी रहने दो,
उसे जबरन बहू मत बन जाने दो।

बापू, मेरी एक बात सुन लो —
ये परंपरा नहीं, अपराध है,
जो कलियों को रौंद दे,
वो संस्कृति नहीं, अभिशाप है।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता बेटी की पीड़ा, चेतना और अधिकारों की सशक्त अभिव्यक्ति है। बेटी अपने पिता से कम उम्र में विवाह न करने की विनती करती है और कहती है कि वह अभी जीवन, शिक्षा और अपने सपनों को समझना चाहती है। वह बताती है कि बचपन, खेल, पढ़ाई और आत्म-परिचय अभी अधूरे हैं, जिन्हें पूरा करने का उसे अवसर मिलना चाहिए।

    कविता में बेटी स्वयं को बोझ नहीं, बल्कि भविष्य की उम्मीद और उजाले के रूप में प्रस्तुत करती है। वह समाज की कड़वी परंपराओं और बाल विवाह जैसी प्रथाओं को अपराध और अभिशाप बताती है। कवि का संदेश स्पष्ट है कि बेटी को पढ़ने, जीने और स्वयं निर्णय लेने का अधिकार मिलना चाहिए, क्योंकि शिक्षित बेटी ही परिवार और समाज को उज्ज्वल बना सकती है।

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यह कविता (बाल विवाह – एक अभिशाप।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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क्या बदलाव लायेगा नया साल।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kya Badlaav Layega Naya Saal | क्या बदलाव लायेगा नया साल।

नववर्ष 2026 पर प्रेरणादायक हिंदी कविता | उम्मीद और बदलाव

बीते को भुलाना, नए को अपनाना,
जो खोया उसका रोना, पाए पर इतराना,
अच्छाई से दोस्ती, बुराई से घबड़ाना,
खट्टी मीठी यादों का बीता सफर सुहाना,

यादों के झरोखों से बज रहा तराना,
गजब फलसफा है मेरे भाई,
जेहन में मेरे पुनः एक बात दोहराई,
अधूरी आस क्या इस वर्ष होगी पास,

नववर्ष के आगमन ने ज्यों ही खुशियां फैलाई,
तभी एक बार फिर उद्गार उमड़ आई,
2026, क्या बदलाव है लाई?
क्या सच्चाई की जीत और बेईमानी की होगी हार,

ईर्ष्या द्वेष मिटाकर भाईचारे का सपना होगा साकार,
क्या बेरोजगारी मिटेगी, रोजगार मिलेगी,
अमन चैन से भरी जिंदगी कटेगी,
कभी दिलासा कभी डर का छाया साया,

उम्मीदों ने मुझे हौसला है दिलाया,
डर को है झुकाना, हिम्मत को बढ़ाना,
शिक्षा, स्वच्छता और
सामाजिक कार्य को अपनाना,
इस मंत्र को कभी न भुलाना,

यही बात जन-जन को है समझाना,
बदलाव को है अपने देश में लाना,
नववर्ष में यही गीत गुनगुनाना।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

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• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता बीते वर्ष की स्मृतियों, अनुभवों और सीख को आत्मसात करते हुए नववर्ष से जुड़ी आशाओं और आत्ममंथन को अभिव्यक्त करती है। कवि कहता है कि जीवन में बीते दुख-सुख, हार-जीत, अच्छाई-बुराई सभी का अपना महत्व होता है, जिनसे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। यादों की खट्टी-मीठी अनुभूतियाँ मन में नए प्रश्न और नई उम्मीदें जगाती हैं।

    नववर्ष 2026 के आगमन पर कवि समाज और देश में सकारात्मक बदलाव की कामना करता है—सच्चाई की जीत, बेईमानी की हार, ईर्ष्या-द्वेष का अंत और भाईचारे का विस्तार। बेरोजगारी के समाप्त होने, रोजगार बढ़ने और अमन-चैन से भरे जीवन की आकांक्षा व्यक्त की गई है।

    कविता का संदेश है कि डर को परे रखकर हिम्मत बढ़ाई जाए और शिक्षा, स्वच्छता व सामाजिक कार्यों को अपनाकर देश में वास्तविक परिवर्तन लाया जाए। अंततः यह कविता नववर्ष को केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मसुधार और सामाजिक जिम्मेदारी का संकल्प बनाने का आह्वान करती है।

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यह कविता (क्या बदलाव लायेगा नया साल।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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है तो नववर्ष।

Kmsraj51 की कलम से…..

Hai Tho Nav Varsh | है तो नववर्ष।

देशी का राग रटते रहो
पर देशी महीनों के नाम तो कहो
फिर अंग्रेजी क्या देशी क्या
है तो नववर्ष …….

वर्ष भर दिनांक में गिनती करते
प्रविष्टे कितने ये भी नहीं जानते
फिर अंग्रेजी क्या देशी क्या
है तो नववर्ष …….

सारा रिकॉर्ड दिनांक में लिखा जाता
कहीं प्रविष्टे का नाम तक नहीं आता
फिर अंग्रेजी क्या देशी क्या
है तो नववर्ष …….

देवनागरी का ज्ञान तक नहीं
जहां देखो रोमन अंक हैं वहीं
फिर अंग्रेजी क्या देशी क्या
है तो नववर्ष …….

कब मंगसर तो कब पौष आते
सिर्फ संडे, मंडे और जनवरी,
फरवरी ही याद कर पाते
फिर अंग्रेजी क्या देशी क्या
है तो नववर्ष …….

नई पीढ़ी को सिर्फ अंग्रेजी ज्ञान बांटते
अपनी संस्कृति से रूबरू नहीं करवाते
फिर अंग्रेजी क्या देशी क्या
है तो नववर्ष …….

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता समाज में व्याप्त उस विरोधाभास को उजागर करती है, जहाँ लोग दिखावे के तौर पर देशीपन और संस्कृति की बात तो करते हैं, लेकिन अपने ही परंपरागत ज्ञान से अनभिज्ञ रहते हैं। कवि बताता है कि लोग वर्षभर तारीख़ों की गिनती तो करते हैं, पर भारतीय पंचांग की प्रविष्टि, देशी महीनों के नाम, और देवनागरी लिपि का ज्ञान तक नहीं रखते।

    अंग्रेज़ी कैलेंडर, रोमन अंकों और संडे–मंडे, जनवरी–फरवरी तक सीमित सोच ने हमारी सांस्कृतिक पहचान को पीछे धकेल दिया है। नई पीढ़ी को केवल अंग्रेज़ी शिक्षा दी जा रही है, जबकि उन्हें अपनी भाषा, लिपि और परंपरा से परिचित नहीं कराया जा रहा।

    कवि इसी विडंबना पर प्रश्न उठाता है कि जब हम अपनी संस्कृति को जानते ही नहीं, तो फिर अंग्रेज़ी नया साल हो या देशी नववर्ष — दोनों में अंतर ही क्या रह जाता है। कविता आत्ममंथन और सांस्कृतिक चेतना जगाने का संदेश देती है।

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यह कविता (है तो नववर्ष।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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