Kmsraj51 की कलम से…..

Yoga Day – 2026 | योग दिवस – 2026

योग का जन्मदाता जिसे माना जाता
भारत देश वो है कहलाता।
ऋषि मुनियों की देन माना जाता
पतंजलि इसका पिता कहलाता।
आत्मा को परमात्मा से है मिलाता
ज्ञान की ज्योति भी है जलाता।
रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता
मन को भी वश में करना सिखाता।
असाध्य रोग जब है लगते
योग की ओर फिर दौड़े दौड़े चलते।
अपरिचित थी दुनिया इसके गुणों से
लोकप्रियता बढ़ रही है वर्ष 2014 से।
अनेक संस्थान इसके आसन है सिखाते
फिर लोग इन्हें अपने जीवन में हैं अपनाते।
आज एक और योग दिवस आया
बहुतों ने एक दिन के लिए योग अपनाया।
फोटो खिंचवाया जहां चाह वहां चिपकाया
फिर पूरा वर्ष भर इससे किनारा बनाया।
योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं
औरों को भी इसके गुणों की महत्ता बताएं।
♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦
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- “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है —
यह कविता योग के महत्व, इतिहास और वर्तमान स्थिति को सरल शब्दों में प्रस्तुत करती है। कवि बताते हैं कि भारत योग की जन्मभूमि है और महर्षि पतंजलि को योग का जनक माना जाता है। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने तथा ज्ञान और आत्मिक जागृति का मार्ग भी है।
कविता में योग के स्वास्थ्य लाभों का वर्णन किया गया है। योग रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, मन को नियंत्रित करना सिखाता है और अनेक शारीरिक एवं मानसिक समस्याओं से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है। कवि यह भी बताते हैं कि जब लोग गंभीर रोगों से ग्रस्त होते हैं, तब वे योग की ओर आकर्षित होते हैं।
आगे कवि योग की बढ़ती वैश्विक लोकप्रियता का उल्लेख करते हुए कहते हैं कि वर्ष 2014 के बाद इसकी पहचान और व्यापक हुई है। अनेक संस्थान लोगों को योग का प्रशिक्षण दे रहे हैं और लोग इसे अपने जीवन में अपना रहे हैं।
अंत में कवि केवल योग दिवस पर औपचारिकता निभाने की प्रवृत्ति पर व्यंग्य करते हैं। वे संदेश देते हैं कि योग को एक दिन तक सीमित न रखकर अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए तथा इसके लाभों की जानकारी दूसरों तक भी पहुंचानी चाहिए।
मुख्य संदेश:
योग स्वस्थ शरीर, शांत मन और आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम है। इसे केवल योग दिवस पर नहीं, बल्कि नियमित रूप से जीवन में अपनाना चाहिए।
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यह कविता (योग दिवस – 2026) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।
आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—
मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।
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