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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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You are here: Home / Archives for vinod verma poems

vinod verma poems

है तो नववर्ष।

Kmsraj51 की कलम से…..

Hai Tho Nav Varsh | है तो नववर्ष।

देशी का राग रटते रहो
पर देशी महीनों के नाम तो कहो
फिर अंग्रेजी क्या देशी क्या
है तो नववर्ष …….

वर्ष भर दिनांक में गिनती करते
प्रविष्टे कितने ये भी नहीं जानते
फिर अंग्रेजी क्या देशी क्या
है तो नववर्ष …….

सारा रिकॉर्ड दिनांक में लिखा जाता
कहीं प्रविष्टे का नाम तक नहीं आता
फिर अंग्रेजी क्या देशी क्या
है तो नववर्ष …….

देवनागरी का ज्ञान तक नहीं
जहां देखो रोमन अंक हैं वहीं
फिर अंग्रेजी क्या देशी क्या
है तो नववर्ष …….

कब मंगसर तो कब पौष आते
सिर्फ संडे, मंडे और जनवरी,
फरवरी ही याद कर पाते
फिर अंग्रेजी क्या देशी क्या
है तो नववर्ष …….

नई पीढ़ी को सिर्फ अंग्रेजी ज्ञान बांटते
अपनी संस्कृति से रूबरू नहीं करवाते
फिर अंग्रेजी क्या देशी क्या
है तो नववर्ष …….

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता समाज में व्याप्त उस विरोधाभास को उजागर करती है, जहाँ लोग दिखावे के तौर पर देशीपन और संस्कृति की बात तो करते हैं, लेकिन अपने ही परंपरागत ज्ञान से अनभिज्ञ रहते हैं। कवि बताता है कि लोग वर्षभर तारीख़ों की गिनती तो करते हैं, पर भारतीय पंचांग की प्रविष्टि, देशी महीनों के नाम, और देवनागरी लिपि का ज्ञान तक नहीं रखते।

    अंग्रेज़ी कैलेंडर, रोमन अंकों और संडे–मंडे, जनवरी–फरवरी तक सीमित सोच ने हमारी सांस्कृतिक पहचान को पीछे धकेल दिया है। नई पीढ़ी को केवल अंग्रेज़ी शिक्षा दी जा रही है, जबकि उन्हें अपनी भाषा, लिपि और परंपरा से परिचित नहीं कराया जा रहा।

    कवि इसी विडंबना पर प्रश्न उठाता है कि जब हम अपनी संस्कृति को जानते ही नहीं, तो फिर अंग्रेज़ी नया साल हो या देशी नववर्ष — दोनों में अंतर ही क्या रह जाता है। कविता आत्ममंथन और सांस्कृतिक चेतना जगाने का संदेश देती है।

—————

यह कविता (है तो नववर्ष।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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Filed Under: 2026 - KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: hai tho nav varsh poem in hindi, Hindi Poems, vinod verma poems, अंग्रेजी कैलेंडर बनाम भारतीय पंचांग कविता, देवनागरी, देसी परंपरा, नई पीढ़ी और भारतीय संस्कृति कविता, नववर्ष कविता, पंचांग, भारतीय नववर्ष, भारतीय नववर्ष और संस्कृति पर हिंदी कविता, भारतीय परंपरा और नववर्ष कविता, भारतीय संस्कृति, विनोद वर्मा, सांस्कृतिक चेतना, हिंदी कविता, हिंदी कविता नववर्ष पर अर्थ सहित, है तो नववर्ष, है तो नववर्ष कविता हिंदी में

मोह।

Kmsraj51 की कलम से…..

Moh | मोह।

“मोह से मुक्ति ही सच्चे सुख और शांति का मार्ग है।”

मोह और भ्रम पर कविता | सुख–दुःख का कारण बना मोह

मोह भ्रम है पालता
खोने का डर है दिखाता ।
हर वक्त करीब करीब रहते
कहीं खो न जाए बस यही है कहते।

सबसे दूर हो जाते
पर मन की चाह पर काबू नहीं पाते।
डरावना सा मुहाल बना रहता
दूरी बढ़े तो खोने का डर है लगता।

जिसकी चाह मन में पालते
बस उसी के साथ की तमन्ना जताते।
विवेक बस में नहीं हो पाता
वही दुःख का कारण बन जाता।

मन स्वार्थ से भरा होता
फिर क्या चिंता और बेचैनी ही पाता।

मोह जहां जहां है पलता
वहीं गलतफहमियों का जन्म है होता।
इस जाल से बाहर जो है निकलता
उसका जीवन ख़ुशी ख़ुशी है बीतता।

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

मोह कैसे दुःख का कारण बनता है

जब किसी एक व्यक्ति या भावना से अत्यधिक जुड़ाव हो जाता है, तब दूरी असहनीय लगने लगती है। यही आसक्ति मानसिक तनाव और रिश्तों में टकराव को जन्म देती है।

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  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में मोह  को एक भ्रम के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो मन में किसी को खो देने का निरंतर भय पैदा करता है। व्यक्ति हर समय अपने प्रिय के पास रहना चाहता है और दूरी बढ़ने पर बेचैनी व असुरक्षा महसूस करता है। चाह इतनी प्रबल हो जाती है कि विवेक पर नियंत्रण नहीं रह पाता और वही चाह आगे चलकर दुःख का कारण बनती है।

    कविता यह भी बताती है कि मोह स्वार्थ को जन्म देता है, जिससे चिंता, डर और मानसिक अशांति बढ़ती है। जहां मोह पनपता है, वहीं गलतफहमियाँ जन्म लेती हैं और रिश्तों में तनाव आता है। अंत में कवि संदेश देता है कि जो व्यक्ति इस मोह-जाल से मुक्त हो जाता है, उसका जीवन शांत, संतुलित और प्रसन्नता से भर जाता है।

    👉 कविता में मोह को भ्रम और दुःख का कारण बताया गया है। मोह से खोने का डर, चिंता और गलतफहमियाँ जन्म लेती हैं। विवेक कमजोर पड़ जाता है और मन अशांत रहता है। जो व्यक्ति मोह से मुक्त हो जाता है, उसका जीवन सुख और शांति से भर जाता है।

    👉 मोह को समझना और उससे ऊपर उठना ही सच्चे सुख की कुंजी है। यह कविता हमें भावनाओं पर नियंत्रण और विवेकपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा देती है।          👉 मोह मनुष्य के जीवन में सबसे सूक्ष्म लेकिन प्रभावशाली भावनाओं में से एक है। यह प्रेम के रूप में प्रवेश करता है, लेकिन धीरे-धीरे भय, स्वार्थ और मानसिक अशांति का कारण बन जाता है। यह कविता मोह के इसी भ्रम और उससे मुक्ति के आध्यात्मिक संदेश को सरल शब्दों में प्रस्तुत करती है।

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यह कविता (मोह।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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ठंडी व्यार।

Kmsraj51 की कलम से…..

Cold Weather | ठंडी व्यार।

सर्दी के आगमन पर कविता | ठंडी हवाओं और मौसम की सुंदरता

ठंडी ठंडी व्यार अब ये अहसास है करवाती,
सर्दी के मौसम का आगमन है जताती।
सुबह-शाम की ठंड ठिठुरन है बढ़ाती,
पर दिनभर की धूप ठंड दूर है भगाती।

हल्के गर्म कपड़े भी ओढ़ लिए अब,
न जाने बरखा की ठंडी फूहारें आएगी कब।
वो बर्फ के फाहे न जाने गिरेंगे कब,
सर्दी की खूबसूरती और बढ़ेगी तब।

बाजार में मूंगफली, गचक व रेवड़ियां रौनक लाई,
घर पर चूल्हे की कीमत भी बढ़ने को आई।
हवा में खुश्की व ठंडक को है पाया,
तभी तो रजाई ओढ़ने को मन कर आया।

पंछी भी ठिठुरन महसूस करते,
धूप खिलने पर ही दाना चुगने निकलते।
अब तो सूखी ठंड से निजात मिले,
ताकि वो मुरझाए फूल भी खुशी से खिले।

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में सर्दी के आगमन और उससे जुड़े प्राकृतिक तथा दैनिक जीवन के अनुभवों को सुंदर ढंग से चित्रित किया गया है। ठंडी हवाएँ और सुबह-शाम की बढ़ती ठिठुरन जहाँ ठंड का अहसास कराती हैं, वहीं दिन की धूप थोड़ी राहत देती है। लोग हल्के गर्म कपड़े पहनने लगे हैं और मौसम में नमी के साथ-साथ खुश्की भी महसूस होने लगी है।
    👉 कविता में सर्दी के खास प्रतीक—मूंगफली, गजक, रेवड़ी, चूल्हे की गर्माहट और रजाई की cozy भावना—को दिल से महसूस कराया गया है। पंछियों की दिनभर धूप का इंतज़ार और मुरझाए फूलों के फिर से खिलने की आशा भी मौसम के बदलाव को दर्शाती है। कुल मिलाकर, कविता सर्दी की सुंदरता, उसकी चुनौतियों और उससे मिलने वाली छोटी-छोटी खुशियों को संवेदनशीलता से बताती है।

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यह कविता (ठंडी व्यार।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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रिश्तों को निभाना सीखो।

Kmsraj51 की कलम से…..

Rishton Ko Nibhana Sikho | रिश्तों को निभाना सीखो।

रिश्तों की अहमियत पर कविता | गलतफहमियां और संबंधों का मूल्य

रिश्तों को निभाना सीखो,
गलतफहमी के धागे मत खींचो।
जहां जहां गलतफहमियां है बढ़ी,
वहां वहां रिश्तों में दीवार हुई है खड़ी।

रिश्ते बनना भी है एक संयोग,
गर रहोगे कोसते तो भोगना पड़ेगा वियोग।
रिश्ते बनते यहीं निभाने भी पड़ते यहीं,
कहीं फलते फूलते तो बर्बादी नजर आती कहीं।

कोई रिश्ता जन्मों जन्मान्तरों तक बनाता,
तो कोई एक जन्म भी नहीं निभाता।
रिश्तों में आपसी समझ चाहिए जरूरी,
निभाने में न समझे मजबूरी।

कहीं रिश्ते तार तार भी होते,
तो कहीं कत्ल की सजा तक है भोगते।
मतलब के जो रिश्ते हैं बनते,
ज्यादा देर नहीं है वो टिकते।

जब से मनुष्य तरक्की की राह पर है चला,
उसके मन में रंजिश का दानव है पला।
यही दानव उसे उकसाता, विवश करता,
फिर क्या वही होता जो रिश्ता नहीं चाहता।

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में रिश्तों की महत्ता और उन्हें निभाने की कला को समझाया गया है। कवि कहता है कि गलतफहमियों को बढ़ाने से रिश्तों के बीच दूरी और दीवारें पैदा हो जाती हैं। रिश्ते संयोग से बनते हैं, लेकिन उन्हें निभाना प्रयास, धैर्य और समझदारी से होता है। कई रिश्ते लंबे समय तक चलते हैं, जबकि कुछ लोग एक जन्म का रिश्ता भी नहीं निभा पाते। कविता यह संदेश देती है कि रिश्तों में मजबूरी नहीं, बल्कि आपसी समझ और भावनात्मक जुड़ाव होना चाहिए।

    👉 जहां रिश्ते स्वार्थ पर टिके होते हैं, वे जल्दी टूट जाते हैं, लेकिन जहां प्रेम, धैर्य और संवेदना होती है, वहां रिश्ते मजबूत बनते हैं। कवि आधुनिक समय की ओर संकेत करते हुए कहता है कि तरक्की के साथ मनुष्य के भीतर रंजिश, अहंकार और स्वार्थ बढ़ गया है, जिससे रिश्तों में दूरी और टूटन बढ़ रही है। इसलिए रिश्तों को समझकर, धैर्य और प्रेम से निभाना आवश्यक है।

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यह कविता (रिश्तों को निभाना सीखो।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मित्र।

Kmsraj51 की कलम से…..

Dost or friends | मित्र।

👉 सच्ची मित्रता पर कविता – निश्छल प्रेम और अपनत्व का सुंदर बंधन

✨“जहां निश्छल प्रेम खिलता है, वहीं सच्ची मित्रता जन्म लेती है। पढ़िए अपनत्व और विश्वास से भरी यह कविता ✨

निश्छल प्रेम जहां है मिलता
वहीं मित्रता रूपी फूल है खिलता।
हरदम अपनत्व जताता
मुसीबत में सबसे पहले याद आता।

कभी भी आंखें मैली नहीं करता
याद आए हाजरी भी जरूर भरता।
दिल से ये रिश्ता है बनता
कभी भी दिमाग दरम्यान नहीं आता।

जब भी मित्रता को देखता
कृष्ण सुदामा की याद जरूर दिलाता।
पद ,प्रतिष्ठा सब भूल जाता
मित्र जब भी नजर है आता।

जब मित्र कोई है बनता
जात, धर्म,उंच नीच नहीं देखता।
मित्रता है एक ऐसा उपहार
नहीं पहुंचता हर किसी के द्वार।

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — मित्रता एक ऐसा अनमोल रिश्ता है जो जीवन के हर सुख-दुख में हमारे साथ खड़ा रहता है। सच्चा मित्र वही होता है जो बिना किसी स्वार्थ के हमारे चेहरे की मुस्कान लौटाने का प्रयास करे। कृष्ण-सुदामा जैसी मित्रता आज भी आदर्श मानी जाती है, क्योंकि उसमें प्रेम, सम्मान और निष्ठा का अद्भुत संगम था। इसलिए जीवन में यदि एक सच्चा मित्र मिल जाए, तो समझिए भगवान का दिया सबसे बड़ा उपहार मिल गया।

    👉 यह कविता सच्ची मित्रता और निश्छल प्रेम की भावना को दर्शाती है। जानिए कैसे सच्चा मित्र हर परिस्थिति में साथ देता है और क्यों मित्रता जीवन का सबसे अनमोल उपहार मानी जाती है।

  • ✨“जहां निश्छल प्रेम खिलता है, वहीं सच्ची मित्रता जन्म लेती है।” ✨
    ✨ “सच्ची मित्रता वही जो बिना स्वार्थ के साथ निभे” ✨
    ✨ “मित्रता एक ऐसा रिश्ता जो दिल से बनता है, दिमाग से नहीं।” ✨

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यह कविता (मित्र।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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आखिर क्यों।

Kmsraj51 की कलम से…..

Aakhir Kyon | आखिर क्यों।

“मां-बाप की सेवा: संतान का सर्वोच्च कर्तव्य | एक भावनात्मक कविता और जीवन संदेश”

पहले संतान होने के लिए रोते
होने पर उन्हें पाल पोस कर बड़ा करते।

अपना पेट भूखा रख लेते
संतान की ख्वाहिशें पूरी करते।

संस्कार भी उनमें खूब भरते
पर समय के साथ उन्हें भी वे है हरते।

मां बाप जैसे जैसे बुढ़ापे की ओर चलते
संतान के तेवर भी हौले हौले हैं बदलते।

कोई अपने को संभाल लेते
मां बाप को अपने साथ है रखते।

कईयों ने खुद को बदला इस क़दर
मां बाप ठोकरें खाने लगे दर दर।

बुढ़ापे से दुखी कोई आत्महत्या कर लेते
तो कोई वृद्धाश्रम को चले जाते।

पूत कपूत हो गया तो क्या
लक्ष्मी रुपी बहू ने अपना फर्ज क्यों नहीं निभाया।

बहू भी तो उन्हें मम्मी पापा है बोलती
फिर उन्हें वृद्धाश्रम जाने से क्यों नहीं रोकती।

मां बाप जीवन में मिलते हैं एक बार
इनकी सेवा बिन नहीं होगा कभी उद्धार।

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — माता-पिता हमारे जीवन के सबसे बड़े वरदान होते हैं। उन्होंने हमें न केवल जन्म दिया, बल्कि जीवन की हर मुश्किल में हमारा साथ निभाया। आज जब वे बुढ़ापे में सहारे की उम्मीद करते हैं, तो हमारा कर्तव्य है कि हम उनका सम्मान और सेवा करें। आधुनिक जीवन की व्यस्तता और स्वार्थ ने जहां रिश्तों की गहराई को कमजोर किया है, वहीं यह याद रखना जरूरी है कि मां-बाप की सेवा ही सच्ची भक्ति है। वृद्धाश्रम उनका स्थान नहीं, बल्कि उनके बच्चों के हृदय होने चाहिए। अगर हर संतान यह सोच ले कि अपने माता-पिता की देखभाल करना उसका सबसे बड़ा धर्म है, तो समाज में प्रेम, संस्कार और मानवीयता कभी खत्म नहीं होगी।

—————

यह कविता (आखिर क्यों।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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समय।

Kmsraj51 की कलम से…..

Time | समय।

समय पर कविता: जीवन का सबसे कीमती खज़ाना – एक प्रेरणादायक हिंदी कविता

समय — जो हर किसी के जीवन का सबसे बड़ा शिक्षक है। यह किसी के लिए नहीं रुकता, न धनवान के लिए, न निर्धन के लिए। जो इसे पहचान लेता है, वही सफलता की राह पर आगे बढ़ता है, और जो इसे व्यर्थ गंवा देता है, वह पछतावे में जीवन बिताता है। प्रस्तुत है एक भावनात्मक और प्रेरणादायक कविता जो हमें याद दिलाती है कि हर पल अनमोल है, और इसे संजोना ही जीवन की सच्ची साधना है।

पल पल बीतता जाए
ये समय है कभी किसी
के बस में न आए।

न कोई अपना न कोई पराया
जिसने अपना समझा वही
वश में कर पाया।

दिन रात चलता रहता
कभी किसी का इंतजार
नहीं करता।

कब सुबह हुई कब हो गई शाम
ये समय है इसके नहीं चुका
पाएंगें दाम।

धनी निर्धन का नहीं
कोई मलाल
धनी वही जिसने लिया
इसे सम्भाल।

कब पैदा हुए, कब हुए जवान
कब जवानी ढली
कब आया बुढ़ापा
चेत नहीं पाया इंसान।

पछतावे बिन नहीं कोई
विकल्प
व्यर्थ न गंवाएं,लें
आज ही ये संकल्प।

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • Conclusion : “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — समय एक ऐसी धारा है जो कभी रुकती नहीं — यह निरंतर आगे बढ़ती रहती है। यह हमें अवसर भी देती है और परीक्षा भी लेती है। जो व्यक्ति समय का सम्मान करता है, वह जीवन में हर मुकाम हासिल कर सकता है। इस कविता का सार यही है कि हर क्षण का सदुपयोग करें, वर्तमान को जीएं और भविष्य को बेहतर बनाएं।

    याद रखें — “समय को जीतने वाला ही सच्चा विजेता होता है।”

—————

यह कविता (समय।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्रीमती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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काले बादल।

Kmsraj51 की कलम से…..

Dark Clouds | काले बादल।

काले बादल कहाँ से तुम हो आते
अब तो कारनामे तुम्हारे छुपाए नहीं जाते।

बेवक्त, बेमौसम तुम हो नीर बरसाते
सड़क, मोहल्ला, गली सब जलमग्न हो जाते।

नदी नाले अपनी सीमा को भूल जाते
कहीं न कहीं आपदा का कहर जरूर बरपाते।

बच्चा, बूढ़ा नौजवान इसकी भेंट है चढ़ जाते
तो कहीं पशु भी अपने को बचा नहीं पाते।

बरसते बादल तो कई वर्षों से हैं देखे
अबकी बार जो बरसे नहीं मिले कहीं ऐसे लेखे।

तीन महीने लगातार तुम रहे बरसते
बिन तुम्हारे एक दिन देखने को रहे तरसते।

बरसात को एकदम सर्दी से जोड़ दिया
तुम्हें याद नहीं रहा कि किसान ने
अभी खेतों से अनाज इकट्ठा नहीं है किया।

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवि ने इस कविता में अत्यधिक वर्षा और उसके दुष्परिणामों को मार्मिक रूप से प्रस्तुत किया है। वह काले बादलों से प्रश्न करता है कि वे अब क्यों बेमौसम और बेवक्त वर्षा करने लगे हैं। उनकी अनियंत्रित बारिश से सड़कें, मोहल्ले और नालियां जलमग्न हो जाती हैं, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। कवि बताता है कि ऐसी बारिश में बच्चे, बूढ़े, नौजवान और पशु तक संकट में पड़ जाते हैं, और हर जगह आपदा का कहर दिखाई देता है। पहले भी बारिश होती थी, पर अबकी बार की वर्षा अत्यधिक और असामान्य रही, जो लगातार तीन महीनों तक थमी नहीं।
  • अंत में कवि व्यंग्यात्मक लहजे में कहता है कि इस बारिश ने मौसम के क्रम को भी बिगाड़ दिया, क्योंकि बारिश खत्म होते ही सर्दी शुरू हो गई, जबकि किसान अभी अपने खेतों से अनाज इकट्ठा भी नहीं कर पाया था।

    यह कविता प्रकृति के असंतुलन और जलवायु परिवर्तन के खतरों पर चेतावनी देती है।

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यह कविता (काले बादल।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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सुबह का संदेश।

Kmsraj51 की कलम से…..

Subah Ka Sandesh | सुबह का संदेश।

सुबह सुबह की एक
आदत सी लग गई
अपनों को संदेश भेजना
बस यही मन में घर कर गई।

अपना जो समझते वो जबाब
भी देते
कुशल क्षेम भी पूछ लेते।

कुछ इसे पढ़ना मात्र
औपचारिकता समझते
संदेश पढ़कर
चुपचाप बैठ है जाते।

कई तो
संदेश रोज पढ़ते
पर जबाब
एक दिन नहीं देते।

अगर कोई
अपना समझकर रोज
याद है करता
उसको याद भरा संदेश
भेजने से कुछ नहीं घटता।

दोस्तों ज़िन्दग़ी
बड़ी लम्बी नहीं
अपनों की याद आ है
जाती गर मन में हो अपनापन कहीं।

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवि ने इस कविता में अपनों के प्रति सच्चे संबंधों और भावनात्मक जुड़ाव को अभिव्यक्त किया है। वह कहता है कि हर सुबह अपने प्रियजनों को संदेश भेजना उसकी एक प्यारी आदत बन गई है। कुछ लोग इस संदेश का उत्तर देकर स्नेह और अपनापन जताते हैं, जबकि कुछ लोग इसे सिर्फ औपचारिकता मानकर अनदेखा कर देते हैं। कवि इस व्यवहार से निराश नहीं होता, बल्कि यह संदेश देता है कि अगर कोई सच्चे मन से याद करता है, तो उसे संदेश भेजने से कुछ नहीं घटता, क्योंकि अपनों को याद करना और उन्हें स्नेह जताना ही जीवन का असली अर्थ है।
  • अंकविता के अंत में कवि कहता है कि ज़िन्दगी बहुत लंबी नहीं होती, इसलिए जब मन में अपनापन हो, तो उसे व्यक्त करने में देर नहीं करनी चाहिए — यही सच्चे रिश्तों की खूबसूरती है।

—————

यह कविता (सुबह का संदेश।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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दीपों का त्योहार।

Kmsraj51 की कलम से…..

Festival of Lights | दीपों का त्योहार।

दीपों का त्योहार दीपावली है आई
सबके मन में खुशियां है छाई।
घर को रंग रोगन कर होती है तैयारी
इससे घर की शोभा लगती है न्यारी।

दो दिन पहले धनतेरस है आती
कोई नई वस्तु भी खरीदी है जाती।
मिट्टी के दीपक सबको है भाते
जगमग जगमग जलकर घर की शोभा है बढ़ाते।

पटाखे फूलझड़ियां व आतिशबाजी खूब है चलते
आसमान को रंग बिरंगी रोशनी से है भरते।
रिश्तेदार व मित्रों को मेहमान है बुलाते
मिलजुलकर खुशियां खूब है मनाते।

घर पर पारम्परिक पकवान है बनाते
मिठाईयां भी एक दूसरे को खूब है बांटते।
दिनभर बधाई संदेशों का आना जाना लगा रहता
कोई हैपी दिवाली तो कोई शुभ दीपावली है कहता।

रात को मां लक्ष्मी की पूजा भी है होती
जलती रहती है मां की अखंड ज्योति।
भगवान् राम चौदह वर्ष बाद अयोध्या लौटे थे आज
उनकी पितृ भक्ति और भातृ प्रेम पर हमें है नाज़।

रात का दृश्य बड़ा मनमोहक है लगता
घर, गांव, शहर दुल्हन सा है सजता।
खुशियों का त्योहार है खूब खुशियां मनाओ
आपसी प्रेम भाव भी खूब बढ़ाओ।

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता दीपावली के पावन पर्व की खुशियों, परंपराओं और सांस्कृतिक महत्ता का सुंदर चित्रण करती है। इसमें बताया गया है कि दीपावली के आगमन पर लोगों के मन में उल्लास छा जाता है। घरों की सफाई, रंगाई-पुताई और सजावट से वातावरण नया और पवित्र हो उठता है। धनतेरस के दिन लोग नई वस्तुएं खरीदते हैं और मिट्टी के दीपक जलाकर अपने घरों को रोशनी से भर देते हैं। पटाखे, फूलझड़ियाँ और आतिशबाज़ी से आसमान रंग-बिरंगा हो जाता है। रिश्तेदारों और मित्रों के साथ मिलजुलकर मिठाइयाँ बांटने, शुभकामनाएँ देने और खुशियाँ मनाने का यह त्योहार लोगों को एकता और प्रेम का संदेश देता है। रात को माँ लक्ष्मी की पूजा की जाती है और उनकी अखंड ज्योति से घर में समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। यह भी स्मरण कराया गया है कि इसी दिन भगवान राम चौदह वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे, इसलिए यह पर्व सत्य, निष्ठा और परिवार-प्रेम का प्रतीक है।
  • अंत में, कवि ने संदेश दिया है कि दीपावली केवल दीपों का त्योहार नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, एकता और खुशियों को बाँटने का अवसर है — जिससे जीवन में उजाला, सुख और सद्भावना बनी रहे।

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यह कविता (दीपों का त्योहार।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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