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“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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चलो चलें रथ यात्रा में।

चलो चलें रथ यात्रा में।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ चलो चलें रथ यात्रा में। ϒ

‘या’
♦ जगन्नाथ पुरी – रथयात्रा। ♦

श्री जगन्नाथ रथ यात्रा-kmsraj51

शुक्ल पक्ष आषाढ़ द्वितीय।
रथयात्रा त्योहार अद्वितीय।

चलो चलें रथयात्रा में।
पुरी में लोग बड़ी मात्रा में।

जगन्नाथ के मंदिर से।
भाई बहन वो सुन्दर से।

जगन्नाथ, बलभद्र हैं वो।
बहन सुभद्रा संग में जो।

मुख्य मंदिर के बाहर।
रथ खड़े हैं तीनों आकर।

कृष्ण के रथ में सोलह चक्के।
चौदह हैं बलभद्र के रथ में।
बहन के रथ में बारह चक्के॥

रथ को खींचों।
बैठो न थक के।

मौसी के घर जाएंगे।
मंदिर (गुंडिचा )हो आएंगे।

नौ दिन वहां बिताएंगे।
लौट के फिर आ जाएंगे।

बहुड़ा जात्रा नाम है इसका।
नाम सुनो अब कृष्ण के रथ का।

नंदिघोषा, कपिलध्वजा।
गरुड़ध्वजा भी कहते हैं।

लाल रंग और पीला रंग।
शोभा खूब बढ़ाते हैं।

तालध्वजा रथ सुन्दर सुन्दर।
भाई बलभद्र बैठे ऊपर।

नंगलध्वजा भी कहते हैं।
बच्चे, बूढ़े और सभी।

गीत उन्हीं के गाते हैं।
रंग-लाल, नीला और हरा।

ये त्योहार है खुशियों भरा।
देवदलन रथ आता है।

बहन सुभद्रा बैठी है।
कपड़ों के रंग काले-लाल।

दो सौ आठ किलो सोना।
तीनों पर ही सजता है।

खूब मनोहर सुन्दर झांकी।
कीमत इसकी कोई न आंकी।

दृश्य मन को भाता है।
एक झलक तो पा लूँ अब।

विचार यही बस आता है।

चलो चलें रथ यात्रा में।
पुरी में लोग बड़ी मात्रा में॥

©- नंदिता शर्मा जी। (नोएडा, उत्तर प्रदेश)®

Nandita-Kmsraj51
नंदिता शर्मा जी।

हम दिल से आभारी हैं नंदिता शर्मा जी के “प्रेरणादायक कविता – जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा।” हिन्दी में साझा करने के लिए।

नंदिता शर्मा जी के लिए मेरे विचार: 

♣ “नंदिता शर्मा जी” ने “♥ जगन्नाथ पुरी-रथ यात्रा ♥“ का कितना सुंदर-रमणीय वर्णन किया हैं। जिसके हर एक शब्दों में सकारात्मक ऊर्जा रूपी अलाैकिक सार भरा हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन कविताओं काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

पढ़ें – विमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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© आप सभी का प्रिय दोस्त ®

Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
of,,  http://kmsraj51.com/

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

———– © Best of Luck ® ———–

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Also mail me ID: cymtkmsraj51@hotmail.com (Fast reply)

cymt-kmsraj51

– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

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