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“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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You are here: Home / Archives for नंदिता शर्मा जी

नंदिता शर्मा जी

आज के युग में बच्चों को पढ़ाने के तरीके।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ आज के युग में बच्चों को पढ़ाने के तरीके। ♦

या » — आज के दौर में बच्चों को पढ़ाने के 11 तरीके।

वर्तमान समय में कुछ सीखने और कुछ नया कर जाने के लिए पढ़ाई बहुत आवश्यक है। लेकिन कुछ बच्चे पढ़ाई को लेकर परेशान रहते हैं, वे पढ़ाई से दूर भागते हैं, किताबें, नोटबुक आदि उनके लिए समस्या बन जाती है, उन्हें पढ़ना अच्छा नहीं लगता। ऐसी स्थिति में शिक्षक और अभिभावक दोनों की ही बच्चों की शिक्षा में भूमिका और भी महत्वपूर्ण बन जाती है।

ऑनलाइन शिक्षा —

आज कोरोना महामारी के साथ ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा मिला है, इसमें शिक्षक बच्चों को पढ़ाने हेतु अपनी कक्षा को रूचिपूर्ण बनाने के लिए प्रयासरत रहते हैं, जबकि अभिभावकों के लिए इस समय बच्चों को पढ़ाना काफी चुनौतीपूर्ण होता है।

लेकिन फिर भी आज के प्रतियोगिताओं से भरे युग में बच्चों के लिए पढ़ाई नितांत आवश्यक है।

शिक्षक द्वारा बच्चों को पढ़ाने के लिए निम्न तरीके प्रयोग में लाये जा सकते हैं —

  1. प्रस्तुति को आनंद से भरपूर रखें — यदि हम बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रेजेंटेशन तैयार करते हैं तो उसमें कुछ मज़ेदार जोड़ सकते हैं। बच्चों से सम्बंधित वास्तविक तथ्य, कहानी आदि जोड़कर प्रस्तुति को अधिक आनंददायक बनाया जा सकता है।
  2. परस्पर संवादात्मक कालांश बनाने की कोशिश करें — कक्षा में विषय को पढ़ाने के लिए सेशन को इंटरेक्टिव रखना अच्छे परिणाम दे सकता है क्योंकि इसके द्वारा बच्चों को भी अपने विचार रखने के अवसर प्राप्त हो सकेंगे।
  3. किताबी ज्ञान का दबाव न बनाएं — बच्चों को केवल किताब द्वारा शिक्षा देने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। इससे बच्चे को पढ़ाई नीरस लगने लगती है और वे पढ़ाई से कटते चले जाते हैं।
  4. पढ़ाई को मजेदार बनाकर प्रस्तुत करें — आजकल विभिन्न प्रकार की ऐप से प्रश्नोत्तरी आदि का निर्माण करके समबन्धित विषय बच्चों को समझाया जा सकता है। कुछ चित्र बनाकर उन पर लिखने को दिया जा सकता है। इसी तरह से अन्य गतिविधियाँ कराकर उनके विचारों को जान सकते हैं।
  5. बच्चों के प्रयास को सराहें — शिक्षक को चाहिए कि वे बच्चों द्वारा किये गए प्रयास को समझते हुए उनकी सराहना करें।

अभिभावकों द्वारा बच्चों को पढ़ाने के तरीके —

बच्चों को सिखाने के क्षेत्र में शिक्षक के साथ – साथ अभिभावक की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। देखा जाए तो अभिभावक ही बच्चों के प्रथम गुरु हैं, घर ही उनकी प्रथम पाठशाला है, ऐसी स्थिति में बच्चों के जीवन में अभिभावक का योगदान और भी महत्वपूर्ण बन जाता है। अतः उन्हें पढ़ाने के लिए कुछ कारगर उपाय हो सकते है जैसे —

  1. परीक्षा से अधिक सीखने पर बल दें — बच्चे के अंदर ये डर पैदा न होने दे कि परीक्षा है और उन्हें दिन रात पढ़ना होगा। इसके स्थान पर उन्हें कहें कि तुम्हारा सीखना अधिक ज़रूरी है। इससे बच्चों को सीखने की प्रेरणा मिलेगी और वे अपने आप ही परीक्षा के लिए तैयार हो सकेंगे।
  2. परिणाम से अधिक प्रयास कराने की चर्चा करें — अभिभावकों को कभी भी बच्चे के परीक्षा परिणाम को बच्चों पर हावी नहीं होने देना चाहिए कि तुम्हारे परीक्षा में इतने प्रतिशत अंक अवश्य आने ही चाहिए। ऐसा करने से बच्चे पर अतिरिक्त दबाव आ सकता है। इसके स्थान पर उन्हें प्रयास/कोशिश करने को कहें। परिणाम अपने आप बेहतर होंगे।
  3. बच्चे के साथ प्यार से पेश आएं — बच्चे को मारना या धमकाना नहीं चाहिए। उन्हें प्यार से समझाना चाहिए।
  4. लेखन अभ्यास पर ध्यान केंद्रित करें — हम अक्सर सोचते हैं कि हमारे बच्चे ने आज क्या पढ़ा है ? हम भूल जाते है कि उसके लेखन अभ्यास की स्थिति क्या है ? अतः हमें उसका लेखन अभ्यास भी कराना चाहिए।
  5. पढ़ाई के साथ-साथ अन्य गतिविधियां भी कराएं — माता-पिता को चाहिए कि कुछ समय पढ़ाई के अतिरिक्त बच्चों की पसंद के कार्यकलाप को स्थान दे। जैसे – नृत्य, गिटार, संगीत, चित्रकला आदि। इससे बच्चों को कार्य करने के लिए एक नई ऊर्जा मिलेगी।
  6. भरपूर नींद दिलाएं — आज जहाँ स्क्रीन पर बच्चे अधिक पढ़ाई कर रहे हैं तो कहीं न कहीं वे शारीरिक और मानसिक रूप से इससे प्रभावित होते हैं। उन्हें भरपूर नींद लेने के लिए कहें।
  7. जिज्ञासा को शांत करें — बच्चे का स्वभाव चंचल होता है। वह एक ही प्रश्न को बार- बार पूछ सकता है, उस पर झुँझलाएं नहीं अपितु उसकी जिज्ञासा शांत कर उसकी समस्या का समाधान करें।
  8. पाठ को रोचक बनाकर पढ़ाएं — कविता, खिलौने, मॉडल, चार्ट आदि के माध्यम से बच्चों को पढ़ाकर उन्हें अच्छे से समझाया जा सकता है।
  9. अनुकूल स्थिति होने पर घूमने जाएँ — बच्चों को कई बार सुनने से अधिक देखकर बातें समझने में सरलता होती है, अतः पार्क, बगीचे आदि में उनका भ्रमण कराएं।
  10. बच्चे का मनोबल बढ़ाएं — बच्चे को समय-समय पर प्रोत्साहन की आवश्यकता होती है। उनका हौसला बढ़ाते रहे। उनके मनोबल को बिल्कुल भी टूटने न दें।
  11. बच्चों की पीठ थपथपाएँ — बच्चों के अच्छे कार्य पर उनकी प्रशंसा अवश्य करें। तारीफ़ के रूप में उनकी पीठ थपथपाई जा सकती है।

अतः कुछ बातों को ध्यान में रखकर बच्चों को सही तरीके से समझाकर उचित परिणाम प्राप्त किये जा सकते हैं।

♦ नंदिता शर्मा जी। – नोएडा, उत्तर प्रदेश ♦

♦ अध्यापिका – बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, नोएडा, उत्तर प्रदेश ♦

लेखिका नंदिता शर्मा जी अभी अध्यापिका के पद पर कार्यरत है — बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, नोएडा, उत्तर प्रदेश में। नंदिता शर्मा जी KMSRAJ51.COM की सीनियर लेखक टीम पैनल की सदस्य भी है। (Nandita Sharma Ji, is also a member of the Senior Writers Team Panel of KMSRAJ51.COM.)

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  • “नंदिता शर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, इस कारगर लेख में लेखिका ने बताया है की बच्चों को सिखाने के क्षेत्र में शिक्षक के साथ – साथ अभिभावक की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। देखा जाए तो अभिभावक ही बच्चों के प्रथम गुरु हैं, घर ही उनकी प्रथम पाठशाला है, ऐसी स्थिति में बच्चों के जीवन में अभिभावक का योगदान और भी महत्वपूर्ण बन जाता है। लेख के हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। छोटे – छोटे बदलाव है पर काफी कारगर है, हर एक शिक्षक और अभिभावक व शिक्षार्थी को इस विषय में गंभीरता से साेचने कि जरुरत हैं।

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यह लेख (आज के युग में बच्चों को पढ़ाने के तरीके।) “नंदिता शर्मा जी।“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे। हम दिल से आभारी हैं नंदिता शर्मा जी के “आज के युग में बच्चों को पढ़ाने के तरीके।” विषय पर हिन्दी में Article साझा करने के लिए।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

 

 

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छोटे बच्चों को पढ़ाने का आसान तरीका।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

♦ छोटे बच्चों को पढ़ाने का आसान तरीका। ♦

⇒ Easy way to teach Small children.

`या`  – छोटे बच्चों को पढ़ाने हेतु आवश्यक बातें।

Or – बच्चों को पढ़ाने का सही तरीका।

kids-ko-padane-ka-saral-tarika-hindi-kmsraj51.pngसर्वप्रथम बच्चा अपने परिवार से सीखता है। माता पिता अपने बच्चे के प्रथम शिक्षक होते है। वही उन्हें सबसे पहले अच्छे बुरे, सही गलत से अवगत कराते हैं। लेकिन आज की भागदौड़, कार्यस्थल पर काम के दबाव आदि के होने से जीवन बहुत व्यस्त हो गया है, और इसी व्यस्तता के चलते शायद माता-पिता बच्चे की तरफ पूर्ण रूपेण ध्यान नहीं दे पाते। जिसके कारण बच्चों को कुछ असुविधा हो सकती है। परन्तु यदि माता-पिता आदर्श माता-पिता की भूमिका अदा करें तो अपने बच्चे के रोल मॉडल बनकर उनकी न केवल पढ़ाई बल्कि सम्पूर्ण व्यक्तित्व को निखार सकते हैं।

बच्चे की पढ़ाई में माता पिता की भूमिका।

• Role of parents in child‘s studies

निः संदेह माता-पिता बच्चे के प्रथम गुरु हैं। अपने बच्चे को न केवल पढ़ाना बल्कि उनकी परवरिश की पूरी ज़िम्मेदारी उन्हीं पर है। अतः बच्चे को पढ़ाते समय कुछ बातों पर ध्यान देना ज़रूरी है।

⇒ माता-पिता का संयमी होना – Be sober parents

माता-पिता को अपने अंदर धैर्यता का विकास करना होगा। धैर्य ही केवल बच्चे को सही ढंग से सीखा सकता है क्योंकि बार-बार की डाँट-फटकार बच्चे के अंदर डर पैदा करती है जो कि कदापि सही नहीं है।

⇒ पढ़ाई का दबाव न बनाएं – Do not pressure study

माता -पिता को चाहिए कि वे बच्चे पर पढ़ाई को लेकर कोई दबाव न डाले बल्कि सुनियोजित ढंग से पढ़ाएं या फिर थोड़ा-थोड़ा समझाकर कहानी, कविता आदि के रूप में कराएं। गिनती (अंक) आदि को कविता के रूप में लें जैसे – एक-दो – चलो मुंह धो लाे, तीन-चार – हो जाओ तैयार आदि।

⇒ उम्र के अनुसार पठन कार्य – Reading according to age

यदि बात दो-चार वर्ष के बच्चे की हो तो माता-पिता को चाहिए की वे पठन कार्य हेतु तस्वीरों वाली किताब का चुनाव करें। अल्फाबेट्स के लिए वीडियो आदि की सहायता ले सकते हैं।

  • प्रथम गुरु माता।  ….. जरूर पढ़े।

⇒ हफ्ते-दस दिन में घूमने का कार्यक्रम – In a Week or ten days roaming program

बच्चे के अंदर बोरियत काे कम करने के लिए उन्हें घूमने ले जाया जा सकता है, उन्हें आस-पास की चीज़ें दिखा कर उनके विषय में बात की जा सकती है। जिससे उनके मन के अंदर की बोरियत खत्म होगी, और वह प्रसन्न चित्त होंगे।

⇒ खिलौने/किताबों का प्रयोग – Toys/use of books

आजकल बाज़ार में ऐसे खिलौने आते हैं जिनके माध्यम से पढाना आसान हो गया है। ऐसी श्रृंखला में कुछ किताबे भी ली जा सकती हैं।

⇒ अत्यधिक डांटने से दूर रहे – Stay away from excessive scolding

बच्चे को बहुत अधिक डांटना सही नहीं है। थोड़ी बहुत डाँट बच्चे को सीखने के लिए आवश्यक है परन्तु बहुत अधिक बच्चे में डर उत्पन्न करती है और बच्चा पढ़ाई से कटाव महसूस करने लगता है।

⇒ सवालों के जवाब दें – Answer the questions

छोटे बच्चे अक्सर ढेर सारे सवाल पूछते हैं। एक प्रश्न के बाद उनके कई अन्य प्रश्न तैयार रहते हैं। खीझ खा कर और परेशान होकर माता-पिता उन्हें टालने लगते हैं। इस अवस्था को उत्पन्न न होने दें। बल्कि उनकी बातों का जवाब दें।

⇒ खेलने के अवसर – Play opportunities

बच्चों को घर में कैद करके न रखे। उन्हें अन्य बच्चों के साथ खेलने का मौका दें क्योंकि बच्चा अपने साथ के बच्चों से भी काफी कुछ सीखता है।

⇒ गृहकार्य अवश्य कराएं – Make sure – Homework do it

बच्चे को गृहकार्य अवश्य कराना चाहिए। न केवल इतना ही बल्कि स्कूल में कराये गए कार्य की घर में पुनरावृति से अच्छे परिणाम प्राप्त किये जा सकते हैं।

⇒ इंटरनेट की मदद – Internet help

आजकल बच्चों को पढ़ाने के लिए इंटरनेट की सहायता ली जा सकती है जिसमें बच्चों को मनोरंजन भी प्राप्त होता है और पढ़ाई भी की जा सकती है।

⇒ पढ़ाई का समय निर्धारित करें – Set study time

हर समय बच्चे को पढ़ाने की आदत माता-पिता को अपने अंदर विकसित नहीं होने देनी चाहिए। एक शेड्यूल बनाएं और उसी के आधार पर कार्य करवाएं।

⇒ बच्चे को समझे – Understand the child

बच्चे को समझने का प्रयास करें कि वह किस प्रकार चीज़ों को ग्रहण करता है? _ देखकर, सुनकर या अभ्यास से। उसी के आधार पर पढ़ाई को अंजाम दें।

⇒ टीवी का प्रयोग कम – Less use of TV

टीवी का प्रयोग एक सीमा तक होना चाहिए। नहीं तो इसका प्रभाव बच्चे की पढ़ाई पर पड़ सकता है। (TV should be used to a limit. Otherwise, it can affect the child’s education.).

⇒ माता-पिता स्वयं कुछ नया सीखें – Parents learn something new

बच्चों को पढ़ाने के लिए सबसे आवश्यक है कि माता-पिता कुछ नया सीखने की कोशिश करें। तत्पश्चात उसी को लेकर अपने बच्चे को कुछ नया सीखने के लिए प्रेरित करें।

  • परीक्षा के डर से कैसे पाएं छुटकारा? ….. जरूर पढ़े।

—•—

♦ बच्चे की पढ़ाई में शिक्षक की भूमिका।

⇒ Role of teacher in child’s studies

बच्चों की पढ़ाई में जिस प्रकार माता-पिता की भूमिका महत्वपूर्ण है, उसी प्रकार शिक्षक भी अपना योगदान दे सकते हैं क्योंकि अच्छा शिक्षक ही बच्चों का भविष्य बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है। उसकी भूमिका को कुछ इस तरह लिया जा सकता है —

⇒ छात्रों को पढ़ने के लिए तैयार करना – Preparing students for reading

सबसे पहले शिक्षक को चाहिए कि वह ऐसा वातावरण बनाएं जिससे कि बच्चे पढ़ने के लिए तैयार होकर पाठ को बेहतर ढंग से समझ सके। (First of all, the teacher should prepare such an environment so that the children can understand the text better by getting ready to read.).

⇒ पिछले दिन के कार्य का पुनरावलोकन करवाएं – Get a review of the previous day’s work

इससे बच्चे को ज्ञानार्जन में सहायता मिलती है और उसका ज्ञान मजबूत और परिपक्व होता है। (This helps the child in learning and his knowledge is strong and mature.).

⇒ पाठ पढ़ते समय बच्चों को समझने में मदद करें – Helping kids understand the lesson

पढ़ाते समय बच्चों को समझने की कोशिश करें कि उन्हें पाठ ठीक से समझ आ रहा है या नहीं? (When teaching, try to understand the children that they understand the text properly or not?).

⇒ समझ की जांच – Comprehension check

यह जानने का प्रयत्न करें की बच्चों ने कितना समझा है और उसी के आधार पर आगे बढ़ें। (Try to know how much the children have understood and go ahead on the basis of that.).

⇒ बच्चों की जिज्ञासा शांत करें – Calm the curiosity of the children

शिक्षक को चाहिए कि वे बच्चों के बार-बार के प्रश्नों से परेशान न हों, क्योंकि यदि उन्हें टाला या डांटा गया तो अगली बार वे प्रश्न पूछेंगे ही नहीं और सीखने की प्रक्रिया कम हो जायेगी। (The teacher should not be disturbed by the repeated questions of children, because if they are avoided or scolded then they will not ask questions next time and the process of learning will be reduced.).

⇒ अच्छे उत्तर पर प्रशंसा करें या शाबाशी दे – Appreciate or applaud the good answer

ऐसा करके भी बच्चों को अच्छी शिक्षा दी जा सकती है। इसलिए जब भी कोई बच्चा किसी भी प्रश्न का सही उत्तर दे तो – अवश्य प्रशंसा करें या शाबाशी दे। इससे बच्चों के अंदर पढ़ने का उमंग-उत्साह बना रहता है, उनका पढ़ने में मन लगता है। (By doing this, children can be given good education. Therefore, whenever a child responds correctly to any question – be sure to praise or give thanks. It keeps the excitement of reading inside the children, they feel like reading them.).

⇒ धैर्य का गुण विक्षित करें – Keep the qualities of patience

माता-पिता की तरह शिक्षक का भी संयमी होना बहुत आवश्यक है। यह गुण बच्चे को सिखाने में काफी मददगार होता है। ज़रूरत से अधिक बच्चों को डांटना नहीं चाहिए।

अतः माता -पिता और शिक्षक यदि उपरोक्त कुछ बातों को अपने स्वभाव में ले आएं तो निश्चित रूप से बच्चों को पढ़ाना काफी सरल हो सकता है।

♦ नंदिता शर्मा जी। (नोएडा, उत्तर प्रदेश) ♦

हम दिल से आभारी हैं नंदिता शर्मा जी के “छोटे बच्चों को पढ़ाने का आसान तरीका।” विषय पर हिन्दी में Article साझा करने के लिए।

नंदिता शर्मा जी के लिए मेरे विचार:

♣ “नंदिता शर्मा जी” ने “छोटे बच्चों को पढ़ाने का आसान तरीका।” विषय पर कितना सरल सुंदर-शिक्षाप्रद व अनुकरणीय वर्णन किया हैं। बहुत ही कारगर सरल सुझाव बताया है, जो की हर किसी Small kids Student के लिए फायदेमंद है। यह सुझाव सभी छोटे बच्चों के लिए कारगर है। अगर आप इन छोटी-छोटी सुझावों का पालन करेंगे तो अवश्य ही सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। नंदिता शर्मा जी द्वारा सुझाये गए – इन छोटी-छोटी सुझावों का पालन करके आप छोटे बच्चों के अंदर बेहतर भविष्य का बीजा रोपण करेंगे, और बच्चों का भविष्य उज्जवल होगा।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

 

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प्यार ही सर्वोपरि है।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ प्यार ही सर्वोपरि है। ϒ

Love is paramount-kmsraj51

 

प्यार ही सर्वोपरि है – एक बार गोपाल बहुत परेशान था। उसके घर में शांति नहीं थी। सभी एक दूसरे से लड़ते झगड़ते रहते थे। एक दूसरे को  दोषी ठहराते थे और अंत में भगवान् पर भी दोषारोपण करते -“कि भगवान् तूने हमे क्यों जन्म दिया ? या फिर तुम सबकुछ देखते रहते हो और आनंद उठाते हो।”

एक दिन गोपाल ने कहा – “आज शाम को छः  बजे  सभी घर के आँगन में जमा होंगे, लड़ाई झगड़ा करते हुए तो हमने काफी समय बिताया है पर आज हम कहीं घूमने जाएंगे।”

घूमने की बात सुनकर सभी राजी हो गए। शाम के छः बजे तो सभी आँगन में इकट्ठे हो गए। सभी जानने के लिए उत्सुक थे कि आखिर घूमने कहाँ चलेंगे?

गोपाल ने कहा – “मैंने गाडी बुलाई है, उसी में बैठ कर चलेंगे।” तभी दो तीन रिक्शा आ गयी। फिर से झगड़ा शुरू हो गया। खैर समझाने पर वो सब रिक्शा में बैठ गए। लेकिन रिक्शा में बैठते ही मुंह सुकोड़ने लगे और भगवान् को ताने देना शुरू -“हे भगवान् ! कहाँ फंसा दिया? कहाँ घूमने जाएंगे ? “मंदिर घूमने आये हैं क्या हम ?

“हाँ क्यों नहीं ? अभी सभी तो भगवान् को याद  कर रहे थे। चलो इन्ही से पूछ लेते हैं—- ” – गोपाल ने कहा।

मुंह बनाकर सभी मंदिर में गए – गोपाल ने कहा “देखो – हम सब भगवान् से बहुत कुछ मांगते हैं, अपना दुःख दर्द इन्हें बताते हैं। कभी कभी गुस्से में इन्हें बहुत कुछ कह भी देते हैं पर कभी सोचा है कि ये तो भगवान् हैं परंतु वो जीव भी जो इनके संपर्क में है कितनी सादगी, प्रेम, सहनशीलता और शान्ति के साथ रहते हैं जो आवश्यक रूप से एक दूसरे के शत्रु होते हैं, यहाँ उनमें भी मित्रता है फिर तुम लोग तो भाई बहिन हो।”

बच्चों  की समझ में कुछ न आया तब गोपाल ने कहा -“शिवजी का वाहन – नंदी बैल, माता जी का वाहन – शेर, अर्थात – शेर बैल का शत्रु  होता है। शिवजी के गले का अलंकार / गहना -सांप, कार्तिकेय का वाहन – मोर, अर्थात मोर सांप का शत्रु होता है लेकिन कभी सुना है इन्हें आपस में झगड़ते हुए ?”

बच्चों ने कहा – “नहीं ये सब एक दूसरे के शत्रु नहीं बल्कि ये तो भगवान् का परिवार है।”

सीख:- गोपाल ने कहा – “ठीक कहा तुमने कि ये भगवान् का परिवार है पर हम भी तो उन्ही की संतान हैं और फिर तुम सब भी तो भाई बहन हो शत्रु नहीं। जब प्रकृति अनुरूप शत्रुता होने के बाद भी कुछ प्राणी प्रेम करना नहीं भूलते तो फिर मित्रता भाव प्रकृति होने पर हम एक दूसरे के शत्रु क्यों बन जाते हैं?”

सभी को गोपाल की बात अच्छी लगी, सभी ने मिलकर कहा – “प्यार ही सर्वोपरि है।” तभी से वो सभी लोग घर में शांतिपूर्वक और प्रेम से रहने लगे।

©- नंदिता शर्मा जी। (नोएडा, उत्तर प्रदेश)®

Nandita-Kmsraj51
नंदिता शर्मा जी।

हम दिल से आभारी हैं नंदिता शर्मा जी के “प्रेरणादायक कहानी – प्यार ही सर्वोपरि है।” हिन्दी में साझा करने के लिए।

नंदिता शर्मा जी के लिए मेरे विचार: 

♣ “नंदिता शर्मा जी” ने Love is paramount (“♥ प्यार ही सर्वोपरि है। ♥“) का कितना सुंदर-रमणीय वर्णन कहानी के माध्यम से किया हैं। जिसके हर एक शब्दों में सकारात्मक ऊर्जा रूपी अलाैकिक सार भरा हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन कहानियों काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

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© आप सभी का प्रिय दोस्त ®

Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
of,,  http://kmsraj51.com/

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

∗ निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

* क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

* KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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नन्हे बालक की अभिलाषा।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ नन्हे बालक की अभिलाषा। ϒ

मैं बालक नन्हा सा।
छोटी सी अभिलाषा।

कहता हूँ बस बात यही –
कभी बनूँ मैं धूप, कभी तो –
बन जाऊं मैं छाँव कभी –
वर्षा बन खेतों में बरसूं।
ग्रीष्म बनूँ तो फल पकवाऊं।

Desire-Kmsraj51

फूल बनाओ मुझको गर तो –
खिल खिल कर बगिया महकाऊँ।
पादप बन कर अपने फल दूँ।
झुकना भी सबको सिखलाऊँ।

सूरज बन कर दे दूँ रोशनी।
चंदा की ठंडक बिखराऊँ।

पापा जैसा मुझे बना दो।
ज्ञान का फिर मैं ढेर लगा दूँ।

माता बनकर प्यार को बांटूँ।
जीवन अपना सफल बना दूँ।

मैं बालक नन्हा सा।
कर दो पूरी अभिलाषा।
कर दो पूरी अभिलाषा॥

©- नंदिता शर्मा जी। (नोएडा, उत्तर प्रदेश)®

Nandita-Kmsraj51
नंदिता शर्मा जी।

हम दिल से आभारी हैं नंदिता शर्मा जी के “प्रेरणादायक कविता – नन्हे बालक कि अभिलाषा।” हिन्दी में साझा करने के लिए।

नंदिता शर्मा जी के लिए मेरे विचार: 

♣ “नंदिता शर्मा जी” ने “♥ नन्हे बालक की अभिलाषा ♥“ का कितना सुंदर-रमणीय वर्णन किया हैं। जिसके हर एक शब्दों में सकारात्मक ऊर्जा रूपी अलाैकिक सार भरा हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन कविताओं काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

पढ़ें – विमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

∗ निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

* क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

* KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

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चलो चलें रथ यात्रा में।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ चलो चलें रथ यात्रा में। ϒ

‘या’
♦ जगन्नाथ पुरी – रथयात्रा। ♦

श्री जगन्नाथ रथ यात्रा-kmsraj51

शुक्ल पक्ष आषाढ़ द्वितीय।
रथयात्रा त्योहार अद्वितीय।

चलो चलें रथयात्रा में।
पुरी में लोग बड़ी मात्रा में।

जगन्नाथ के मंदिर से।
भाई बहन वो सुन्दर से।

जगन्नाथ, बलभद्र हैं वो।
बहन सुभद्रा संग में जो।

मुख्य मंदिर के बाहर।
रथ खड़े हैं तीनों आकर।

कृष्ण के रथ में सोलह चक्के।
चौदह हैं बलभद्र के रथ में।
बहन के रथ में बारह चक्के॥

रथ को खींचों।
बैठो न थक के।

मौसी के घर जाएंगे।
मंदिर (गुंडिचा )हो आएंगे।

नौ दिन वहां बिताएंगे।
लौट के फिर आ जाएंगे।

बहुड़ा जात्रा नाम है इसका।
नाम सुनो अब कृष्ण के रथ का।

नंदिघोषा, कपिलध्वजा।
गरुड़ध्वजा भी कहते हैं।

लाल रंग और पीला रंग।
शोभा खूब बढ़ाते हैं।

तालध्वजा रथ सुन्दर सुन्दर।
भाई बलभद्र बैठे ऊपर।

नंगलध्वजा भी कहते हैं।
बच्चे, बूढ़े और सभी।

गीत उन्हीं के गाते हैं।
रंग-लाल, नीला और हरा।

ये त्योहार है खुशियों भरा।
देवदलन रथ आता है।

बहन सुभद्रा बैठी है।
कपड़ों के रंग काले-लाल।

दो सौ आठ किलो सोना।
तीनों पर ही सजता है।

खूब मनोहर सुन्दर झांकी।
कीमत इसकी कोई न आंकी।

दृश्य मन को भाता है।
एक झलक तो पा लूँ अब।

विचार यही बस आता है।

चलो चलें रथ यात्रा में।
पुरी में लोग बड़ी मात्रा में॥

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नंदिता शर्मा जी।

हम दिल से आभारी हैं नंदिता शर्मा जी के “प्रेरणादायक कविता – जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा।” हिन्दी में साझा करने के लिए।

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