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भारतीय नववर्ष

है तो नववर्ष।

Kmsraj51 की कलम से…..

Hai Tho Nav Varsh | है तो नववर्ष।

देशी का राग रटते रहो
पर देशी महीनों के नाम तो कहो
फिर अंग्रेजी क्या देशी क्या
है तो नववर्ष …….

वर्ष भर दिनांक में गिनती करते
प्रविष्टे कितने ये भी नहीं जानते
फिर अंग्रेजी क्या देशी क्या
है तो नववर्ष …….

सारा रिकॉर्ड दिनांक में लिखा जाता
कहीं प्रविष्टे का नाम तक नहीं आता
फिर अंग्रेजी क्या देशी क्या
है तो नववर्ष …….

देवनागरी का ज्ञान तक नहीं
जहां देखो रोमन अंक हैं वहीं
फिर अंग्रेजी क्या देशी क्या
है तो नववर्ष …….

कब मंगसर तो कब पौष आते
सिर्फ संडे, मंडे और जनवरी,
फरवरी ही याद कर पाते
फिर अंग्रेजी क्या देशी क्या
है तो नववर्ष …….

नई पीढ़ी को सिर्फ अंग्रेजी ज्ञान बांटते
अपनी संस्कृति से रूबरू नहीं करवाते
फिर अंग्रेजी क्या देशी क्या
है तो नववर्ष …….

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता समाज में व्याप्त उस विरोधाभास को उजागर करती है, जहाँ लोग दिखावे के तौर पर देशीपन और संस्कृति की बात तो करते हैं, लेकिन अपने ही परंपरागत ज्ञान से अनभिज्ञ रहते हैं। कवि बताता है कि लोग वर्षभर तारीख़ों की गिनती तो करते हैं, पर भारतीय पंचांग की प्रविष्टि, देशी महीनों के नाम, और देवनागरी लिपि का ज्ञान तक नहीं रखते।

    अंग्रेज़ी कैलेंडर, रोमन अंकों और संडे–मंडे, जनवरी–फरवरी तक सीमित सोच ने हमारी सांस्कृतिक पहचान को पीछे धकेल दिया है। नई पीढ़ी को केवल अंग्रेज़ी शिक्षा दी जा रही है, जबकि उन्हें अपनी भाषा, लिपि और परंपरा से परिचित नहीं कराया जा रहा।

    कवि इसी विडंबना पर प्रश्न उठाता है कि जब हम अपनी संस्कृति को जानते ही नहीं, तो फिर अंग्रेज़ी नया साल हो या देशी नववर्ष — दोनों में अंतर ही क्या रह जाता है। कविता आत्ममंथन और सांस्कृतिक चेतना जगाने का संदेश देती है।

—————

यह कविता (है तो नववर्ष।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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