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श्रावण या सावन माह भगवान शिव को समर्पित है

पावन बेला।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ पावन बेला। ♦

सोमवार की आज ये अति शुभ बेला आई।
हर्षित हो आई आज सूरज की तरुणाई॥

जल-दूध अभिषेक ने शिवलिंग की गाथा सुनाई।
श्रावण माह के सोमवार को हर-हर महादेव की गूंज आई॥

यंत्र और मंत्र दोनो ने मिलकर भोलेबाबा को पुकार लगाई।
सब मंगलमय कर दो जन-जन के ह्रदय ने आवाज लगाई॥

इस श्रावण माह में सबकी झोली खुशियों से भर देना।
अवगुणों का विष पी अमृतमयी गुणों का वर देना॥

हे शम्भू, पधारों इस धरा पर स्वागत करें हम तेरा।
इस माह में तेरी ही धुन में बीतेगा तेरे भक्तों का साँझ-सवेरा॥

रहें हमेशा गले में तेरे सर्पों की माला।
सावन में तेरा पूजन करें जीवन में उजाला॥

हर दिशा में गूंजेंगे बम-बम भोले के जयकारे।
सच्चे ह्रदय से तुझें याद करने वाले सबकाज संवारे॥

भोलेनाथ तू तो है दया, करुणा का सागर।
असुर भी तेरी पूजा करें तो उसको भी दे वर॥

इंद्रदेव भी नतमस्तक होकर जो जल बरसाए।
तेरी जटाओं में बसी गंगा मैया उसको शीतलता दे जाए॥

हे! शिवशंभु हे! शंकर हे! जटाधारी, हे त्रिनेत्रधारी।
श्रावण मास में सुन लेना अपने भक्तों की पुकार सारी॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — सावन के महीने में अत्यधिक वर्षा होती है, इसीलिए यह समय भगवान शंकर का प्रिय महीना होता है। ऐसा कहा जाता है कि इस महीने में जो भी भक्त सच्चे मन से व पूरी लगन के साथ भगवान शंकर की पूजा करता है, उनकी सभी मनोकामना पूर्ण होती है। इस महीने में सबसे अधिक त्यौहार आते हैं और हिंदुओं के हिसाब से उन त्योहारों को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। जावालोप निषद में उल्लिखित है कि रुद्राक्ष शिव के आंसू हैं। इनका तृतीय उ‌र्ध्व नेत्र व बाईं आंखों की संयुक्त शक्ति का प्रतीक है। डमरू ज्ञान का उद्गाता है। शिव का एक नाम त्रिलोचन भी है। शिवजी मृत्युन्जय हैं। इनकी पूजा मृत्यु और काल को पराजित करती है। अयोध्या में सरयूतट पर नागेश्वरनाथ मंदिर सावन मास में भक्तों से परिपूर्ण रहता है। सोमवार के दिन शिव आराधना करने पर चंद्रमा से आने वाली तरंगें मन को शांत बनाती हैं। कांवड़ शिव पूजा का एक स्वरूप है। गंगा या पवित्र नदियों सरयू आदि से जल भरकर शिव पर अभिषेक करने से परात्पर शिव के साथ विहार होता है। कांवड़ से ज्ञान की उच्चता का प्रतिपादन होता है।

—————

यह कविता (पावन बेला।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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