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साहित्यकार की भूमिका

साहित्य – साहित्य की विशेषताएं।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ साहित्य – साहित्य की विशेषताएं। ♦

साहित्य समाज का हित करने वाला,
विश्व के कल्याण की भावना रखता।
अपनी संस्कृति का पहचान कराता,
समाज का सुंदर दर्पण बनके आता॥

सत्यों की निरंतर खुद ध्यान करता रहता,
सांस्कृतिक धरोहर के रूप में पलता।
समाज का प्रतिबिंब हुआ वह आता,
समंदर सी गहराई वह अंदर रखता॥

विविध भाषाओं के माध्यम से समाज,
की घुटने बचाने का प्रयास करता॥

भक्ति कालीन साहित्य आता और,
पावन धरा पर ही अवतरित होता।
समाज की सामाजिक विषमता को,
समूल नष्ट करने का प्रयत्न करता॥

रीति कालीन साहित्य जीवन की,
सरसता से ओत प्रोत करता है।
रीतिकालीन साहित्य किसी बंधन में,
बंध कर नहीं, रहना चाहता है॥

साहित्य समाज का आईना होता है,
वाचिक – लिखित रूप साहित्य होता।
साहित्य को मनोरंजन का ही केवल,
साधन नहीं माना जा सकता है॥

सबसे पुराना साहित्य वाचिक ही है,
जो आदिभाषी भाषाओं में मिलता है।
यह पाखंड की कटुता से दूर ले जाता,
सदाचार का मूल तत्व समझाता है॥

स्त्री और गृहस्थ जीवन के मोक्ष द्वार खोलता,
लोग साहित्य की ओर आकृष्ट होते हैं।
साहित्य में, भोग में निर्माण की भावना होती,
सिद्धों का सिद्धांत पक्ष सहज कहलाता है॥

सिद्ध अशिक्षित और हीन जाति से होते हैं,
विडम्बना, नारी का उपभोग करते हैं।
सिद्ध साहित्य, हिंदी साहित्य में महत्त्व रखता है,
संप्रदाय के सिद्धांतों से साहित्य का निर्माण करता है॥

साहित्य मौलिक लेखन की प्रेरणा देता,
मातृभाषा का परिपूर्ण महत्त्व बताता।
तार्किक और गंभीर शैली समझाता,
अलौकिक ज्ञान की अनुभूति कराता॥

साहित्य विविध रूपों से प्राकृतिक छवि दर्शाता,
रहस्यमयी युक्तियों की गुत्थी सुलझाता॥

साहित्य में अनुभूति और भावबेग मूल तत्व है,
भावबेग का चित्रण आनंद प्रदान करता है।
वास्तव में ही आनंद ही साहित्य का उद्देश्य,
सौंदर्य की तरफ आकृष्ट करना – काव्य उद्देश्य॥

आनंद की सृष्टि के मूल में साहित्यकार है,
साहित्यकार की आत्माभिव्यक्ति की शक्ति है।
साहित्य के मूल में साहित्यकार के आत्मा की आवाज,
सच्चाई और संपूर्णता के अनुपात से विद्यमान है॥

कुशल साहित्य साहित्यकार को आनंदित करता है,
और फिर पाठक को भी आनंद प्राप्त होता है॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

Note: — वाचिक = बोलकर समझाना।

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — युग चाहे कोई भी हो, साहित्य की जरूरत सदैव ही बना रहेगा। अच्छे साहित्य से ही अच्छे समाज का निर्माण होता है, और एक अच्छे समाज से एक अच्छे राष्ट्र का निर्माण होता हैं। साहित्य भूत, वर्तमान और भविष्य तो बताता ही हैं साथ में — कला, संस्कृति, गुणों, तार्किक और गंभीर शैली को भी समझाता है। अच्छा साहित्य विविध रूपों से प्राकृतिक छवि दर्शाता, अलौकिक ज्ञान की अनुभूति कराता, रहस्यमयी युक्तियों की गुत्थी को भी सरलता पूर्वक सुलझाता।

—————

sukhmangal-singh-ji-kmsraj51.png

यह कविता (साहित्य – साहित्य की विशेषताएं।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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