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Essay on Martyrs Day India

शहीद दिवस।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ शहीद दिवस। ♦

भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव भारत के सच्चे क्रांतिकारी थे देश प्रेम की खातिर हँसते – हँसते अपने प्राण दे दिए। 23 मार्च को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। शहीद भगत सिंह जी का जन्म 28 सितंबर 1907 में भारत के गाँव बंगा जिला लायलपुर में हुआ था।

देशप्रेम की भावना बचपन से ही थी चंद्रशेखर आजाद व पार्टी के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर के “नाैजवान भारत सभा” का गठन किया भारत की स्वतंत्रता के लिए अभूतपूर्व साहस के साथ मिलकर ब्रिटिश सरकार का मुकाबला किया, लाहौर में बनी सेंडर्स की हत्या। उसके बाद दिल्ली की केन्द्रीय संसद में बम विस्फोट करके आंदोलन को आगे बढ़ाया उन्होंने असेम्बली में बम फेंक कर भागने से मना कर दिया। इसके परिणाम स्वरूप अंग्रेज सरकार ने 23 मार्च 1931 को अन्य साथियों के साथ फाँसी पर लटका दिया भगत सिंह को एक सच्चे क्रांतिकारी के रूप में याद किया जाता है।

सुखदेव जी का जन्म 15 मई 1907 को भारत के लुधियाना के एक गाँव में हुआ। इनका पूरा नाम सुखदेव थापर था देश की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। अंग्रेजों के अत्याचारों से आहत देशवासियों के लिए कुछ करने का जज्बे की भावना से सुखदेव ने अंग्रेजों को मिलने के लिए मजबूर कर दिया और भारत को अंग्रेजों के चुंगल से मुक्त करने का प्रण लिया।

सुखदेव ने प्रसिद्ध क्रांतिकारीयो के साथ मिलकर “नाैजवान भारत सभा” का गठन किया कई गतिविधि जैसे 1929 में जेल की भूख हड़ताल में सक्रिय भूमिका निभाई। सब साथियों ने मिलकर 8 अप्रैल 1929 को सेंट्रल असेंबली में बम विस्फोट के कारण सुखदेव और उनके सहयोगियों को गिरफ़्तार कर अपराधो का दोषी ठहराकर फैसले के रूप में मौत की सजा सुनाई।

क्रांतिकारी राजगुरू का जन्म 24 अगस्त 1908 में भारत के महाराष्ट्र राज्य पुणे जिले में खेड़े गाँव मे हुआ। इनका पूरा नाम शिवराम हरिराजगुरु था। चंद्रशेखर आजाद से इतने प्रभावित हुए कि उनकी पार्टी हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी से तत्काल जुड़ गए। राजगुरु एक अच्छे निशानेबाज थे। 19 दिसम्बर 1928 को अपने साथियों के साथ मिलकर अंग्रेज पुलिस ऑफिसर जे.पी सांडर्स की हत्या की थी। इसके बाद 8 अप्रैल 1929 को दिल्ली में सेंट्रल असेम्बली में हमला करने में राजगुरु का बड़ा का हाथ था। उनको पकड़ने के लिये पुणे जाते समय इनको गिरफ्तार किया गया; इन्हें भी भगतसिंह, सुखदेव के साथ 23 मार्च 1931 को फाँसी पर लटका दिया गया।

भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव भारत के सच्चे देशभक्त थे। जिन्होंने अपनी देशभक्ति को अपने प्राणों से भी अधिक महत्व दिया। 23 मार्च 1931 को हँसते – हँसते न्यौछावर करने वाले सभी क्रांतिकारयो को शहीद दिवस के रूप में याद किया जाता है। यह दिवस देश के प्रति सम्मान और भारतीय होने का गौरव का अनुभव कराता है यह दिवस श्रद्धांजलि का दिवस है।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — भारत के तीन महान स्वतंत्रता सेनानियों को याद करने के लिए पूरे देश में हर वर्ष 23 मार्च को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन लोग स्वतंत्रता सेनानियों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को श्रद्धांजलि देते हैं, जिन्होंने भारत की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। यह दिवस देश के प्रति सम्मान और भारतीय होने का गौरव का अनुभव कराता है यह दिवस श्रद्धांजलि का दिवस है।

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यह लेख (शहीद दिवस।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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