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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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Girl

जज्बे को सलामः 21 साल की उम्र में जीत लिए 186 मेडल ~ Slamः determination to win 186 medals at the age of 21 !!

kmsraj51 की कलम से …..
PEN KMSRAJ51-PEN

==> 21 साल की उम्र में जीत लिए 186 मेडल

pooja-chaurasiPooja-Chaurasi

परिवार में बहनें बेहतर दोस्त होती हैं, लेकिन मेरी बहन तो फरिश्ता है। इसलिए इस वुमन डे पर मैं अपनी बहन पूजा चौरसिया का नाम नॉमिनेट करना चाहता हूं। जो इंटरनेशनल टाइटल जीतने वाली पहली भारतीय महिला ट्रायएथलीट है। पूजा के खेल सफर की शुरुआत सन 2002 में स्वीमिंग से हुई। उस समय उसकी उम्र मात्र 9 साल थी। बचपन से ही पूजा का सपना गोल्ड मेडल जीतने का था। उसके जुनून और प्रयासों को देखते हुए इंडियन ट्रायथलान फेडरेशन (आईटीएफ) ने उसे ट्रायथलान जूनियर स्क्वैड कैंप 2004 के लिए सेलेक्ट किया।

ट्रायथलान एक ऐसी दौड़ स्पर्धा है, जिसमें प्रतियोगी को एक के बाद एक होने वाली तीनों प्रतियोगिताओं – तैराकी, साइकिलिंग और दौड़ में हिस्सा लेना होता है। पूजा हमेशा से ही ट्रायथलान में हिस्सा लेने की इच्छुक थी, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण यह संभव नहीं हो सका। दरसअल खेल के ये तीनों प्रारूपों की तैयारियों में काफी खर्च आता है।

सन 2006 में जब उसने नेशनल एक्वाथलन चैंपियनशिप में बड़ी लीड के साथ गोल्ड मेडल जीता तो आईटीएफ ने उसे ट्रायथलान में हिस्सा लेने का मौका दिया। पूजा की किस्मत ने इस अवसर पर उसका साथ दिया। हालांकि, ट्रॉयथलान प्रतियोगिता के लिए उसकी प्रैक्टिस ठीक नहीं थी। साइक्लिंग के लिए उसके पास बाइक भी नहीं थी। लेकिन उसने एक किराए की साधारण सी साइकिल से ट्रायथलान में पहला गोल्ड मेडल जीतते हुए सबको चौंकाकर रख दिया।

पूजा के इस हैरतअंगेज परफॉरमेंस को देखते हुए दो महीने बाद ही गुजरात स्टेट ट्रॉयथलान एसोसिएशन से उसे सन 2007 में असम में आयोजित होने वाले 33वें नेशनल गेम्स में भाग लेने का मौका दिया।

नेशनल गेम्स की तैयारी के लिए हमने उसे 10 हजार रुपए एक साइकिल खरीद कर दी। असम में अन्य प्रतियोगी उसकी साधारण सी साइकिल को देखकर उसका खूब मजाक उड़ाया करते थे। क्योंकि उनके पास अंतरराष्ट्रीय स्तर की एक से बढ़कर एक महंगी साइकिल थीं, जिनकी कीमत 1.5 लाख रुपए से भी ऊपर की थी। यह सब देखकर पूजा शुरुआत में अपसेट भी होने लगी थी। अंतत: उसने सारी बातों को दरकिनार करते हुए अपना मन प्रैक्टिस में लगाया। वह जानती थी कि ईश्वर कोशिश करने वालों को ही सफलता प्रदान करता है। पूजा ने यहां भी इतिहास रचते हुए गोल्ड मेडल जीतकर सबको आश्चर्यचकित कर दिया।

यह गौरव न सिर्फ पूजा को प्राप्त हुआ, बल्कि गुजरात राज्य के इतिहास में भी पहला मौका था, जब वहां के किसी प्रतियोगी ने ट्रॉयथलान में पहला गोल्ड मेडल अपने नाम किया था।

इन सफलताओं के बाद आईटीएफ ने चीन में आयोजित होने वाले एशियन चैंपियनशिप के लिए पूजा का सेलेक्शन किया। इसके बाद पूजा ने कई अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में हिस्सा लिया और देश के लिए अनेकों मेडल्स भी जीते।

हालांकि, उसके पास अंतरराष्ट्रीय स्टैंडर्ड की साइकिल नहीं थी, जिसके चलते उसे अनेकों जगह परेशानियों का सामना भी करना पड़ा। इसी बीच गुजरात के एक स्थानीय बिजनेसमैन राजन शाह ने पूजा के लिए स्पेशल बाइक खरीदने में मदद की। पूजा की उपलब्धियों को देखते हुए सन् 2009 में राजन शाह व गुजरात सरकार की मदद से पूजा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्टैंडर्ड की साइकिल खरीदी गई।

मैं जब भी अपनी रोजमर्रा की जिंदगी से ऊब जाता था या कभी निराश होता तो पूजा ही मुझे प्रोत्साहित करती। ट्रॉयथलान स्पर्धा के लिए रोजाना की 6 घंटों की प्रैक्टिस के बाद भी वह मेरे और अपनी एमएससी की पढ़ाई के लिए समय निकाल लिया करती है।

अब तक पूजा 4 अंतरराष्ट्रीय, 28 राष्ट्रीय स्तर के मेडल्स के साथ 186 मेडल्स जीत चुकी है। इस दौरान उसने जीवन में कई बार जानलेवा खतरों का भी सामना किया और कई बार घायल भी हुई, लेकिन उसने कभी भी उम्मीद नहीं छोड़ी। उसके जीवन में अनेकों बाधाएं आईं, लेकिन वे उसे कमजोर नहीं कर सकीं। इसलिए इस वुमन डे पर मैं अपनी बहन को दिल से बधाई देता हूं। मुझे उसका भाई होने का गर्व है।

note::- This post source by : http://www.bhaskar.com/article-hf/WD-pooja-chaurasi-story-for-woman-pride-award-4539919-NOR.html


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Google has installed the country’s first head-eyed daughter ~ देश की पहली बेटी जिसे गूगल ने बिठाया सिर आंखों पर !!

::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..
KMS-2014-51

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** देश की पहली बेटी जिसे गूगल ने बिठाया सिर आंखों पर **

shisthi


भले ही कुछ लोगों में बेटियों के प्रति मानसिकता नहीं बदली हो, लेकिन इसमें कोई दोराए नहीं कि बेटियों ने ही देश का नाम रोशन किया है। एक ऐसी ही बेटी है जिन्होंने करिश्मा कर दिखाया है। 15 साल की उम्र में सृष्टि गूगल साइंस फेयर में टॉप-15 में जगह बनाने वाली पहली भारतीय छात्रा हैं। उनकी इस कामयाबी पर ना केवल पूरे देश को नाज है बल्कि इस बेटी ने लड़के और लड़कियों के प्रति भेदभाव रखने वालों को भी करारा जवाब दिया है।

देश में जहां बेटियों के लिए कई लोगों की सोच नहीं बदली वहीं मोहली की इस बेटी ने वो कर दिखाया जिस पर पूरे देश को नाज है। सृष्टि ने गूगल साइंस फेयर-2013 में दुनिया के 15 प्रतिभाशाली छात्रों में शामिल हुईं। ये पहला मौका था जब देश की किसी बेटी ने यह मुकाम हासिल किया।


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एक तकनीक ने हासिल कराया ये मुकाम

पंजाब में मोहाली के मिलेनियम स्कूल की 11वीं कक्षा की छात्रा सृष्टि अस्थाना को भी शायद नहीं पता था कि डिटर्जेंट वॉटर को ग्रीन टेक्नीक से ट्रीट करने का उसका प्रोजेक्ट उसे यह मुकाम दिलाएगा। सृष्टि को इस रिसर्च के बारे में तब ख्याल आया जब वो स्कूल ट्रिप के दौरान लुधियाना के टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज गईं और वहां पर डाई वॉटर से पर्यावरण को हो रहे नुकसान को देखा।


वैज्ञानिक बनने का है सपना

वहीं से इंडस्ट्रियल वेस्ट से निकले बेकार डिटर्जेंट वॉटर को इको-फ्रेंडली विकल्प के रूप में बदलने के लिए ग्रीन सॉल्यूशन का विचार शुरू हुआ। पंजाब पुलिस के आईजी एसके अस्थाना की बेटी सृष्टि बड़ी होकर वैज्ञानिक बनना चाहती है।


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एक साल दिन-रात मेहनत करने पर मिली सफलता

सृष्टि ने इस प्रोजेक्ट को चुनौती के तौर पर लिया उसने सैकड़ों रिसर्च पेपर पढ़े, अपने टीचर्स की मदद ली साथ ही कई-कई घंटे लैब में बिताए। करीब एक साल तक दिन-रात मेहनत के बाद आखिरकार उसे अपने प्रोजेक्ट में सफलता मिली। जैसे ही सृष्टि को स्कूल से खबर मिली कि गूगल साइंस फेयर शुरू होने वाला है तो उन्होंने ऑन लाइन फॉर्म जमा कर दिया। इस प्रतियोगिता में 13 से 18 साल तक के स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया।


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अब सपना आईआईटियन बनने का

15 साल की सृष्टि ने अपने पैरेंट्स और टीचर्स के सपोर्ट से इस मुकाम को हासिल किया है। उनके पैर भले ही जमीन पर हैं लेकिन इरादे आसमान पर। सृष्टि ने इससे पहले भी कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं वो पिछले साल एनटीएसई स्कॉलर बनीं तो एक गर्ल चाइल्ड को अडॉप्ट किया। कोचिंग इंस्टीट्यूट से उसे 20 हजार रुपये स्कॉलरशिप मिलती है जिससे वो एक और गर्ल चाइल्ड की पढ़ाई स्पॉन्सर करेगी। सृष्टि की सपना अब आईआईटियन बनने का है। सृष्टि ने आज ना सिर्फ अपने माता-पिता बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है।


::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..
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