Q. A. W. – KMSRAJ51 – Ep.- 3rd / 16-April-2017

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ Q. A. W. ~ KMSRAJ51 ϒ

ओम गंग गणपतये नमः 

श्री गणेश मंत्र ~

ऊँ वक्रतुण्ड़ महाकाय सूर्य कोटि समप्रभं।
निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा।।

Q. 1 .⇒  जीवन में कभी – कभी ऐसी परिस्थिति आ जाती हैं जब समझ में नहीं आता की क्या करें ?
                                                                  या
            जीवन में कई बार ऐसी परिस्थिति आ जाती हैं जब समझ में ही नहीं आता कि क्या करूं या क्या ना करूं, ऐसे समय में अपने Mind काे कैसे Setup करें ?
                                                                                                         -श्वेता तिवारी, ग्वालियर (मध्य प्रदेश)

                                                                                                         -मधुलिका शर्मा, हरिद्वार, (उत्तराखंड)

A. 1 .⇒  सभी मनुष्यों के जीवन में एक नहीं, कई बार ऐसी परिस्थिति आती हैं जब समझ में ही नहीं आता की क्या उचित है, और क्या अनुचित हैं, अर्थांत – क्या करना सही है, या क्या करना गलत है या या यू कहें कि right or wrong में भेद नहीं कर पाते।

जब भी जीवन में ऐसी परिस्थिति आये – अपने Mind को कुछ इस तरह से खुराक दें …..

  • मानव शरीर काे चलाने वाली शक्ति काे Soul (आत्मा, प्राण, जी, जीव, रूहकहते हैं। आत्मा कि तीन मुख्य शक्तियां हैं … मन, बुद्धी व संस्कार। मन सोचने व बुद्धी निर्णय करने का कार्य करती है, और बुद्धी जाे निर्णय करती है शरीर कि कर्मेंद्रिया उसी अनुसार कार्य करती हैं, और शरीर कि कर्मेंद्रियाें के द्वारा जाे कार्य हाेता हैं वही संस्कार के रुप में Soul के अंदर रिकॉर्ड हाेता रहता हैं।
  • किसी भी इंसान का माइंड(Mind) काेई भी बात ज्यादातर चित्र(Image) Form में सोचता हैं, इसलिए अपने लक्ष्य का चित्र व महत्वपूर्ण कार्य का जर्नल(नाेटबुक या डायरी) Hard और Soft दोनों प्रारूप में रखें तथा Daily Base पर अपने अवचेतन मन काे याद दिलाये सुबह उठते ही व रात्रि में साेने से पहले।
  • चाहे बहुत ज्यादा महापापी आत्मा हाे या बहुत ज्यादा पुण्य आत्मा हाे, जब भी काेई कर्म करने का विचार मन में आता है – हर मनुष्य कि आत्मा अंदर से आवाज़ देती है कि यह करना सही है या यह करना गलत हैं, और कुछ माइक्रो सेकंड्स के अंतराल में ही द्वितीय आवाज़ भी आ जाती हैं।
  • जब भी जीवन में “ऐसी परिस्थिति आये, जब समझ में ही नहीं आये कि क्या करूं या क्या ना करूं” ताे आत्मा के अंदर से आने वाली पहली आवाज़ का अनुसरण करें, अर्थांत – आत्मा कि पहली आवाज़ काे सुने और उसी के अनुसार ही कार्य करें … आपकाे जीवन में सदैव ही सफलता मिलेंगी।
  • ज्यादातर मनुष्य आत्मा के अंदर से आने वाली द्वितीय आवाज़ का अनुसरण करते हैं, इसी कारण “क्या करूं या क्या ना करूं” कि समझ भी खाे देते हैं। जिस वजह से सदैव असफल हाेते हैं।
  • आत्मा के अंदर से आने वाली इसी पहली आवाज़ काे कई लाेग “दिल का आवाज़” भी कहते हैं। या बहुत सारे लाेग इसे अंदर की पहली आवाज़, अंदर की आवाज़ भी कहते हैं।
  • अपने मन को सदैव ही सकारात्मक विचारों का खुराक दें, अपने आप को हमेशा अच्छे कार्यों में व्यस्त रखें। जिससे फालतू के कार्यों में आपके समय की बर्बादी नहीं हाेगी।

“प्रकृति का एक बहुत ही कारगर नियम है, यदि मिट्टी में काेई बीज न बाेया जाये ताे प्रकृति उस मिट्टी काे घास-फूस से भर देती है।”

  • बिल्कुल यही नियम इंसान के दिमाग पर भी लागू होता हैं। अगर इंसान का दिमाग व मन अच्छे विचाराें से नहीं भरा जाये ताे उसमें नकारात्मक विचार स्वचालित रूप से अपना जगह बना लेते है और इंसान चिंताग्रस्त हाे जाता है, तथा उसे समझ में ही नहीं आता कि क्या करूं या क्या ना करूं। एक कहावत भी है –

“खाली मन शैतान का घर हाेता है।”

  • अच्छे works में जब अपने आपकाे busy रखेगें ताे, फालतू विचार साेचने का time ही नहीं हाेगा। “जहा तक हाे सके सदैव ही अपने मन काे अच्छे विचाराें से भरें।”
  • अपना संग सकारात्मक लोगों के साथ रखें। ऐसे लोगों से दोस्ती रखें जो सदैव ही सकारात्मक सोचते है। नकारात्मक सोच रखने वालों से जितना हो सके दूरी बनाकर रखें।

Q. 2 .⇒  ८०/२० (80/20) का नियम क्या हैं ?( What are the rules of 80/20? )
                                                     या
                                ८०/२० (80/20) के नियम को अपने जीवन में कैसे लागू करें ?
                                             ( How to apply the rule of 80/20 in your life? )
                                                    स्मृती सिंह, सूरत (गुजरात), भूमिका भट्टाचार्य, कोलकाता (पश्चिम बंगाल),
                                                                        ♦ लवली मिश्रा, पटना (बिहार),  राहुल गर्ग, चंडीगढ़,

A. 2 .⇒  इस नियम (80/20) के अनुसार …..

  • आपकी 20 प्रतिशत गतिविधियाँ 80 प्रतिशत Results देगी। (Your 20 percent of activities will give 80 percent results.)
  • आपके 20 प्रतिशत ग्राहक 80 प्रतिशत विक्री करवायेंगे। (20% of your customers will be selling 80%.)
  • आपके २० प्रतिशत प्रोडक्ट्स ८० प्रतिशत मुनाफा दिलवायेंगे। (20% of your products will get 80% profit.)
  • आपके 20 प्रतिशत कार्य 80 प्रतिशत मूल्य बढ़ायेगें आदि। (Your 20 percent work will increase 80 percent of the price etc.)
  • इसका मतलब ये है कि अगर आपकी सूची में कुल 10 कार्य हैं; ताे उनमे से Only 2 (दाे) कार्य बाकी सबसे पांच से दस गुना ज्यादा मूल्यवान होगा। (This means that if you have 10 tasks in your list; Only two of them will be worth five to ten times more valuable.)
  • वैसे यह नियम(८०/२०) तो इस संसार के आदि से ही हैं। (This rule (80/20) is from the beginning of this world.)
  • लेकिन वर्तमान समय में इस नियम (80/20) काे कलमबध्य किया “इतालवी अर्थशास्त्री विल्फ्रे़डाे पैरेटाे” ने 1895 में इस नियम के बारे में विस्तार से लिखा था। इसीलिए इस नियम काे “पैरेटाे नियम” या “पैरेटाे सिद्धांत” भी कहते हैं। (But in the present time, this rule (80/20) was compiled by the “Italian economist Vilfredo Pareto” wrote in 1895 detailed about this rule. That’s why this rule is also called “Pareto rules” or “Pareto theory”.)
  • यह 80/20 का नियम “समय और जीवन प्रबंधन” के लिए बहुत ही बड़ा सहायक नियम हैं। (This rule of 80/20 is very helpful rules for “time and life management”.)
  • पैरेटाे ने गाैर किया कि उनके समाज में लाेग स्वाभाविक रूप से दाे धड़ाें में विभाजित हैं। (Pareto insisted that people in their society are naturally divided into right-wing groups.)एक धड़ा था, “महत्वपूर्ण अल्पमत” (vital few), जाे पैसे और प्रभाव के संदर्भ में शीर्षस्थ 20 प्रतिशत में आते थे। (There was a clause, “significant minority” (vital few) used to come in the top 20 percent in terms of money and effect.)…. दूसरा था – “तुच्छ बहुमत” जाे निचले 80 प्रतिशत में आते थे। बाद में उन्हें पता चला कि यही नियम लगभग सारी आर्थिक गतिविधियाें की बुनियाद भी है।कार्याें कि संख्या के बजाय, कार्याें के महत्त्व काे समझे – यहा मैं एक दिलचस्प Research (खाेज या अनुसंधान) के बारे में बताना चाहता हूँ। दस कार्याें में से हर एक काे पुरा करने में लगभग समान समय लगता हैं। आपके कार्य करने कि आदताें की वजह से केवल एक-दाे कार्य बाकी किसी भी कार्य की तुलना में पाँच से दस गुना ज्यादा मूल्य का याेगदान देंगे।अपने महत्वपूर्ण १० कार्यों की एक लिस्ट तैयार करें। – ज्यादातर दस कार्यों की लिस्ट में से आप देखेंगे की एक कार्य बाकी नाै कार्यों से ज्यादा मूल्यवान हाेता हैं। बस जरुरत यही है कि इसी एक मूल्यवान कार्य काे सबसे पहले कर लेना चाहिए। क्या आप अंदाजा लगा सकते है कि आम आदमी ज्यादातर किस कार्य में सबसे ज्यादा टालमटाेल करता है ? दुःखद सच्चाई यह हैं कि ज्यादातर लाेग उन शीर्षस्थ १० से २०% कार्यों में टालमटाेल करते है, जाे सबसे मूल्यवान और महत्त्वपूर्ण हाेते हैं-“महत्त्वपूर्ण अल्पमत”।
    इसके बजाय वे न्यूनतम महत्त्व के ८०% कार्यों (“तुच्छ बहुमत”) – में व्यस्त रहते है, जाे परिणामाें में बहुत कम याेगदान देते हैं।उपलब्धियों पर नहीं गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करें – (Focus on activities not on achievements ) – आप ऐसे लाेगाें काे अक्सर देखते है, जाे दिन भर व्यस्त नज़र आते हैं, लेकिन इसके बावजूद बहुत कम हासिल कर पाते हैं – कारण स्पष्ट है। वे ऐसे कार्य करने में व्यस्त रहते है, जिनका मूल्य कम हाेता हैं। इस दाैरान वे उन एक-दाे कार्याें में टालमटाेल करते है, जिन्हें अगर जल्द से जल्द और अच्छी तरह पुरा कर लिया जाए – ताे इससे उनकी कंपनियों और कैरियर में सच्चा बड़ा फर्क पड़ेगा।दिन के सबसे मूल्यवान कार्य अक्सर सबसे मुश्किल और जटिल हाेते हैं। लेकिन इन्हें कुशलता से पूरा करने के पुरस्कार और फायदे भी जबरदस्त हाेेते है। इसलिए आपकाे यह संकल्प लेना चाहिए कि निचले ८०% कार्य तब तक नहीं करेंगे, जब तक कि २०% कार्य बचे हाे।

    कार्य शुरू करने से पहले हमेशा खुद से पुछें “यह मेरे शीर्षस्थ २०% कार्याें में आता है या फिर निचले ८०% कार्याें में ? याद रखें – “छोटे कार्यों को सबसे पहले करने के प्रलोभन से बचें”।

    आप बार-बार जाे भी करने का विकल्प चुनते हैं, वह अंत में एक आदत बन जाता है, जिसे छाेड़ना मुश्किल हाेता है। अगर आप अपना दिन महत्वहीन कार्याें से शुरू करने का विकल्प चुनते है – ताे जल्दी ही आपकाे हमेशा महत्वहीन कार्याें से दिन शुरू करने की आदत पड़ जाएगी। यह ऐसी आदत नहीं है – जिसे डालना या कायम रखना चाहिए।

    किसी महत्त्वपूर्ण कार्य काे शुरू करना उसका सबसे मुश्किल हिस्सा हाेता है। एक बार जब आप काेई सचमुच मूल्यवान कार्य शुरू कर देते है, – ताे स्वभाविक रूप से अापकाे आगे कार्य करते रहने कि प्रेरणा मिलेगी। आपके दिमाग का एक हिस्सा उन महत्त्वपूर्ण कार्याें में व्यस्त रहना चाहता हैं, जिनसे सचमुच फ़र्क पड़ता है। अपने दिमाग के इस हिस्से को लगातार पाेषण देते रहें।

    ॰ मैं सदैव ही एक बात कहता हुँ कि – “अगर अपने लक्ष्य काे प्राप्त करना चाहते है ताे स्वयं काे प्रेरित करें”।~Kmsraj51

    किसी महत्त्वपूर्ण कार्य काे शुरू और पुरा करने के बारे में सोचने भर से ही आप प्रेरित हाे जाते हैं। इससे आपकाे टालमटाेल छाेड़ने में मदद मिलती है। सच ताे यह है कि किसी महत्त्वपूर्ण कार्य काे पुरा करने के लिए भी अक्सर उतने ही समय की जरुरत हाेती है, जितनी कि महत्वहीन कार्य काे करने के लिए फर्क यह है कि महत्त्वपूर्ण कार्य पूरा करने के बाद आपकाे गर्व और संतुष्टि का ज़बरदस्त एहसास हाेता है। बहरहाल जब आप उतना ही समय और ऊर्जा खर्च करके काेई मूल्यहीन या महत्वहीन कार्य पूरा करते हैं – ताे आपकाे बहुत कम संतुष्टि मिलती है या ज़रा भी नहीं मिलती।

  1. Time Management (समय प्रबंधन) वास्तव में जीवन का प्रबंधन हैं, स्वयं का प्रबंधन हैं। यह दरअसल घटनाओं के क्रम को नियंत्रित करना हैं। समय प्रबंधन का अर्थ है – इस बात पर नियंत्रण करना कि आप अगला कार्य काैन सा करेंगे, और आप सदैव अपना अगला कार्य चुनने के लिए स्वतंत्र होते हैं। महत्वपूर्ण और महत्वहीन के बीच विकल्प चुनने कि आपकी काबिलियत जिंदगी और काम धंधे में     आपकी सफलता तय करने वाली अहम् कुंजी हैं।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

 

सब बँधे है स्वार्थ के धागे से।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ सब बँधे है स्वार्थ के धागे से। ϒ

कोई किसी का सच्चा-
हमसफ़र नही।

सब बँधे है स्वार्थ के धागे से।
ना रख कोई उम्मीद जमाने से।

कि कोई तूझे ख़ुशियाँ देगा।
कोई साथ आता नही कोई-
साथ जाता नही।

ढूँढ ले अपना रास्ता खुद ही।
जीवन मे आगे बढने के लिये।

मिलेगी तुझे खुशियाँ जीवन मे,
खुद ही प्रयास करने से।

¤~≈~¤

इंसान ख्वाईशो से बंधा एक परिंदा है।
जो उम्मीदों से ही घायल है और उम्मीदों पर ही ज़िंदा है॥

©- विमल गांधी। 

Vimal Gandhi-kmsraj51

विमल गांधी जी।

हम दिल से आभारी हैं विमल गांधी जी के प्रेरणादायक हिन्दी कविता साझा करने के लिए।

विमल गांधी जी के लिए मेरे विचार: 

“विमल गांधी जी” की कविताआे के हर एक शब्द में अलाैकिक सार भरा हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। कविताऐं छोटी और सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन कविताओं काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

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* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

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* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

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 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

 

रिश्तों का असली मतलब क्या है।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ रिश्तों का असली मतलब क्या है। ϒ

रिश्तों का असली मतलब क्या है।
आपस मे प्यार विश्वास और …
एक दूसरे का साथ।

जिस रिश्ते में अपना मतलब हो।
स्वार्थ हो …
एक दूसरे पर विश्वास ना हो।

ऐसे रिश्ते रिश्ते नही होते वह …
सिर्फ नाम के रिश्ते हाेते है।

¤~≈~¤

निभाकर रिश्ते नाते बहुत, अब निभाते नही।
अब तो निभाते है उसी से, जो रिश्ता बेनाम है।
लेकिन वो बंधा है सिर्फ प्रेम के धागों से॥

©- विमल गांधी। 

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विमल गांधी जी।

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विमल गांधी जी के लिए मेरे विचार: 

“विमल गांधी जी” की कविताआे के हर एक शब्द में अलाैकिक सार भरा हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। कविताऐं छोटी और सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन कविताओं काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

 

Q. A. W. – KMSRAJ51 – Ep.- 2st / 09-April-2017

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ Q. A. W. ~ KMSRAJ51 ϒ

ओम गंग गणपतये नमः 

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ऊँ वक्रतुण्ड़ महाकाय सूर्य कोटि समप्रभं।
निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा।।

Q. 1 . ⇒ चिन्ता मुक्त कैसे हो ?
                           या
               चिन्ता से बाहर कैसे निकले ?     या
               चिन्ता मुक्त होने का सहज formula क्या हैं ?
                                                                      -सपना राजवंशी, जयपुर (राजस्थान)
                                                                            -नेहा कपूर, औरंगाबाद (महाराष्ट्र)

A. 1 . ⇒ सबसे पहले यह समझ ले कि चिंता क्यों होती हैं ? चिंता का मुख्य कारण है only अपनी कमजोरियों को देखना। आज की पीढ़ी की सबसे बड़ी problem है कि वह only अपनी कमजोरियों को देखते है। चिन्ता करना किसी भी problem का solution (समाधान) नहीं। कभी भी चिन्ता करने से काेई काम अच्छा नहीं हाेता। चिन्ता मुक्त बनने के लिए आपकाे सर्वप्रथम स्वयं पर व स्वयं के आंतरिक स्ट्रांग Power काे समझना और उस पर पूर्ण विश्वास करना हाेगा। अपने स्ट्रांग Power की एक लिस्ट तैयार करें। 

अपने स्ट्रांग  Power की लिस्ट में वह सबकुछ शामिल करें, जिसमें आप बेस्ट हैं। सदैव ही अपने स्ट्रांग Power के बारे में ही सोचे। जितना ज्यादा हो सके, अपने आपको अच्छे कार्यों में व्यस्त रखें।

“प्रकृति का एक बहुत ही कारगर नियम है, यदि मिट्टी में काेई बीज न बाेया जाये ताे प्रकृति उस मिट्टी काे घास-फूस से भर देती है।”

बिल्कुल यही नियम इंसान के दिमाग पर भी लागू होता हैं। अगर इंसान का दिमाग व मन अच्छे विचाराें से नहीं भरा जाये ताे उसमें नकारात्मक विचार स्वचालित रूप से अपना जगह बना लेते है और इंसान चिंताग्रस्त हाे जाता है। एक कहावत भी है –

“खाली मन शैतान का घर हाेता है।”

अच्छे works में जब अपने आपकाे busy रखेगें ताे, फालतू विचार साेचने का time ही नहीं हाेगा। “जहा तक हाे सके सदैव ही अपने मन काे अच्छे विचाराें से भरें।”

अपना संग सकारात्मक लोगों के साथ रखें। ऐसे लोगों से दोस्ती रखें जो सदैव ही सकारात्मक सोचते है। नकारात्मक सोच रखने वालों से जितना हो सके दूरी बनाकर रखें।

दोस्तों – एक कहावत है –

“एक गंदी मछली पूरे तालाब को गंदा कर देती है।”

जरुरत है उस गंदी मछली काे तालाब से बाहर निकालने की। न कि तालाब काे बार-बार साफ करने की। ठिक इसी तरह अगर आपका दोस्ताना नकारात्मक साेच रखने वालाे से है ताे, … “जरुरत है कि उनसे दूरी बना ले, न कि उन्हें बार-बार समझाने कि काेशिश करें।”

  • सदैव अपना दोस्ताना – सकारात्मक सोच रखने वालों से करें।
  • अपनी सोच व कर्म को सदैव ही सकारात्मक रखें।
  • सदैव अपने internal स्ट्रांग power काे देखें।
  • Life में एक बार जो गलती हो जाए उसे दूबारा रिवाइज न करें।
  • जीवन भर अपने पढ़ने व सीखने की आदत काे बनाये रखें। अर्थांत – इंसान काे सदैव ही सीखने के प्रति जागरूक रहना चाहिए।
  • याद रखें – कभी भी काेई ज्ञान बुरा नहीं हाेता, हा इंसान बुरे हाे सकते हैं(अपने बुरे कर्माें कि वजह से)।
  • “इस संसार में ज्ञान के जितने भी स्रोत है या जितने भी ज्ञान के भंड़ार available है, सब अच्छें कार्याें के लिए है।”
  • वह ताे शैतानी(राक्षसी) साेच रखने वाले इंसानाे द्वारा गलत इस्तेमाल की वजह से लोगों काे समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
  • चिन्ता मुक्त होने के लिए मन काे शांत रखें। मन काे शांत रखने का तरिका है – मैडिटेशन(ध्यान), व सत्य का ज्ञान। अपने स्व शक्तियों का ज्ञान। मन काे शांत रखने के लिए, जीवन में ज्ञान व ध्यान का हाेना बहुत जरूरी हैं।

अशांत मन उचित निर्णय लेने की क्षमता काे खत्म(खाे) कर देता हैं।
~Kmsraj51

Q. 2 . ⇒  क्या इंसान का पुनर्जन्म इंसान के रूप में ही होता हैं या किसी अन्य योनि में?     `या`
            क्या काेई भी Soul(आत्मा) सदैव ही पुरुष शरीर और स्त्री शरीर काे ही धारण करती है, या कभी पुरुषकभी स्त्री शरीर ?                                                           `या`
            क्या काेई भी आत्मा जन्म और मृत्यु के चक्र से सदैव के लिए मुक्त हाे जाती हैं ?     `या`
            इंसान काे उसके कर्माें का भाेगदंड़ उसके इसी जन्म में मिलता है या अन्य जन्म में भी कर्माें का भाेगदंड़ मिलता है ?
                                                                                               -मधु शर्मा, देहरादून – (उत्तराखंड)
                                                                                                -स्मिता सिंह राजपूत, बिकानेर – (राजस्थान)
                                                                                                -स्नेहा घोष, कोलकाता – (पश्चिम बंगाल)
                                                                                                -आशीष पुरी, पुरी – (ओडिशा)

A. 2 . ⇒  इंसान सदैव ही इंसान के रूप में ही जन्म लेता हैं, कभी भी किसी अन्य योनि में उसका जन्म नहीं हाेता। “पूरे विश्व में आजतक जितने भी Rebirth के वास्तविक केस के रिसर्च सामने आये है, एक भी ऐसी आत्मा(soul) नहीं जिनका किसी अन्य योनि में जन्म हुँआ हाे। इस बात काे अब Science(विज्ञान) भी – प्रूफ कर चुकी हैं।”

  • जरा गहराई से साेचे “यदि किसी आत्मा काे अपने कर्माें का भाेगदंड़ भाेगने के लिए, किसी अन्य योनि में जन्म लेना हाेता ताे फिर – जब कोई बच्चा गर्भ में ही मर जाता है ताे, जन्म लेने से पहले ही ऐसा काैन सा बुरा कर्म कर दिया जाे गर्भ में ही मर गया।
  • क्यों कोई बच्चा जन्म से ही गर्भ में ही अंधा, बहरा, गुगां, लंगड़ा या शारीरिक रूप से पूर्ण विकलांग हाेता है ताे,  जन्म लेने से पहले ही या जन्मते ही ऐसा काैन सा पाप कर्म कर दिया जाे उसे ऐसी सजा मिली।

“जबकी सभी के बीच एक झूठा भ्रम पैदा कर दिया गया है कि बहुत ही सत्यकर्माें या अच्छें कर्माें के बाद ही मनुष्य तन मिलता हैं।”

  • मनुष्य सदैव ही मनुष्य तन में ही जन्म लेता हैं। जन्मते ही किसी भी बच्चे ने काेई बुरा कर्म नहीं किया, जिसकी वजह से वह जन्म से ही अंधा, बहरा, गुगां, लंगड़ा इत्यादि हुआ। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उसने पिछले जन्म में कर्म(बुरे कर्म) किए थे। जिसकी वजह से उसका ऐसा जन्म हुआ, या जन्म लेने से पहले ही मर गया।
  • किसी भी मनुष्य की आत्मा में सदैव ही तीन सूक्ष्म शक्तियाँ निहित हाेती हैं। जो सदैव ही आत्मा के साथ पुनर्जन्म होने पर भी साथ ही जाती हैं। वह तीन सूक्ष्म शक्तियाँ हैं मन, बुद्धि व संस्कार।
  • मन सोचने का कार्य करता हैं।
  • बुद्धि निर्णय करने का कार्य करता हैं।
  • मन के द्वारा साेचे जाने के बाद बुद्धि जाे निर्णय लेती हैं, शरीर कि कर्मेंद्रिया उसी तरह कर्म करती है, और कर्मेंद्रियाें द्वारा जाे कर्म हाेता है वही संस्कार के रूप में आत्मा के अंदर रिकॉर्ड हाेता रहता हैं। इसी रिकॉर्ड काे संस्कार कहते है, और इसी संस्कार के अनुसार ही अगला जन्म हाेता हैं।
  • हर तीन जन्म के बाद पुरुष शरीर धारण करने वाली आत्मा, स्त्री शरीर काे धारण करती हैं। अर्थांत – तीन जन्म पुरुष शरीर, उसके बाद तीन जन्म स्त्री शरीर काे धारण करती है, यही चक्र सदैव ही चलता रहता हैं।
  • इंसान का सदैव ही पुनर्जन्म होता हैं।
  • काेई भी आत्मा जन्म-मरण के चक्र से सदैव के लिए मुक्त नहीं हाे सकती। हा यदि बहुत अच्छें कर्म है, बहुत ही पुण्य आत्मा हैं। साधना(ध्यान) के दाैरान कैवल्य कि स्थिति में मुक्त हाेने की तीव्र इच्छा हाे ताे – वह आत्मा कुछ समय के लिए जन्म नहीं लेती हैं। वह आत्मा कुछ समय के लिए परमधाम(ब्रह्मलोक) में रहती है।
  • किसी भी इंसान का यदि पुण्य का खाता बहुत ज्यादा है ताे – उसे इसी जन्म में उसके सारे कर्माें के सारे भाेगदंड़ नहीं मिलेगे। जब उसके पुण्य का खाता क्षिण होगा तब ही उस का भाेगदंड़ मिलता हैं। इंसान काे उसके बुरे कर्माें का भाेगदंड़ उसके पुण्य के खाते की वजह से कुछ समय के लिए टल जाता हैं। बहुत ज्यादा पुण्य का खाता है ताे – उसे थाेड़ा सा समय मिल जाता हैं। लेकिन भाेगदंड़ मिलेगा जरुर।

~Kmsraj51

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

 

उत्साह से दोस्ती करे।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ उत्साह से दोस्ती करे। ϒ

उत्साह से दोस्ती करे।
उत्साह को जीवन मे बढाये।

बोरियत अपने आप उड़-
जायेगी …

जैसे उजाले के आते ही,
अंधेरा भाग जाता है।

वैसे ही उत्साह को देख-
निराशा उत्पन्न करने वाले …
पहलू दिखने बन्द हो जायेगे॥

¤~≈~¤

जब जब जिंदगी में आया कठिनाइयों का मेला।
– हमने याद किया सिर्फ माँ को –
माँ ने जब जब मुस्कुरा कर देखा हमें…
तब तब कठिनाइयों से लड़ने का हौसला आ गया॥

©- विमल गांधी। 

Vimal Gandhi-kmsraj51

विमल गांधी जी।

हम दिल से आभारी हैं विमल गांधी जी के प्रेरणादायक हिन्दी कविता साझा करने के लिए।

विमल गांधी जी के लिए मेरे विचार: 

“विमल गांधी जी” की कविताआे के हर एक शब्द में अलाैकिक सार भरा हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। कविताऐं छोटी और सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन कविताओं काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

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* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

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 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

 

सुबह की हवाओं में।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ सुबह की हवाओं में। ϒ

सुबह की हवाओं में कोई सन्देश है।
दिन की शुरुआत का नया आदेश है।

कमजोर नहीं पड़ना ये पक्षियां कह रही है।
तेरे कदम में जज्बा और जोश है।

नदियों को छेड़ती हवाओं के झोंकों सेे।
प्रेम में भी थोड़ी नोक-झोंक है।

बसंत की ये सुबह-
पीली सरसों पीली धूप।

खेतों में खिली हरियाली।
धरती की ये नई रूप।

सब तुम्हे पूछते है…
क्या आज तुम इंसान हो।

तो काम करो।
अपने लिए ही नही-
सबके लिए प्रतिमान बनों॥

©- रवि रंजन पाण्डेय। ¤ औरंगाबाद (बिहार) 

kmsraj51-rrp2016

हम दिल से आभारी हैं “रवि रंजन पाण्डेय जी” के प्रेरणादायक हिन्दी कविता साझा करने के लिए।

About – Ravi Ranjan Pandey(जर्नलिस्ट एवम् शोधार्थी।) : 

“रवि रंजन पाण्डेय जी” फ़िलहाल भूगोल विषय में यू.जी.सी., जे.आर.एफ के तहत पटना विश्वविद्यालय में शोध कार्य कर रहे है। इन्हे लेखन का शाैक भी है। इनके लेखन में कविता, कहानी व उपन्यास सम्मिलित हैं। रवि रंजन पाण्डेय जी के लेखन समय-समय पर अनेक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हाेते रहते है। इनकी कविताएं सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य है। जाे भी इंसान इन कविताओं काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

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क्या करें – क्या ना करें।

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* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

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समय – इस दुनिया के पन्ने में तू रोल मॉडल बन जायेगा।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ समय – इस दुनिया के पन्ने में तू रोल मॉडल बन जायेगा। ϒ

समय…………
किसने सोचा है किसने समझा है।
एक अनसमझा एहसास।
अनबुझी पहेली॥

जब तक नजर टिके निकल जाये।
जाते हुए यादों का गम दे जाये॥

समय…………….
लोगों को एहसास नहीं।
क्या खोया क्या पाया।

क्या साया भी कभी अपना बन पाया।
क्यू अनजान पहेलियों मे उलझा हूं।
क्यूं आज भी न समाज को समझा हूं॥

समय…………
समझने का प्रयास करो समझ आयेगी।
सम्मान करो! रास्ता दिखलायेगी।
अनुशासित बनो मंजिल मिलेगी।
जो भी फिर चाहो कली खिलेगी॥

समय……………..
सही गलत की पहचान।
गलतफहमियो मे फसा इंसान।
अपनो को ठुकराता है।
दूर को पास बुलाता है।
यह अनसुलझी पहेली बन जाती है।
और जीवन भर तड़पाती है॥

समय……………
एक बार तुझे उठना होगा।
जीवन में दौड़ लगाने को।
इस सोची समझी साजिश से।
अपने को पार यूं पाने को॥

ना कष्ट कोई आयेगा फिर।
ये मेरा तुझसे वादा है।
तूं एक बार तो देख जरा।
कुछ ऐसा मेरा इरादा है॥

हर कठिनाई को तोड़ के तूं-
अपना परचम लहरायेगा।
और इस दुनियां के पन्ने में-
तूं रोल माडल बन जायेगा॥

©- अशोक सिह, – आजमगढ़, उत्तर प्रदेश। 

ashok-singh-kmsraj51

हम दिल से आभारी हैं अशोक सिह जी के प्रेरणादायक हिन्दी कविता साझा करने के लिए।

About Ashok Singh – अशोक जी के शब्दाें में – अभी मैं IAS की तैयारी कर रहा हूँ। दिल मे समाज सेवा की लौ जलाये हुए कुछ बेहतर करने को प्रयासरत हूँ और अपना सत प्रतिशत देने को तत्पर। मेरा HOBBY कविताएं लिखना , दक्षिण भारत की फिल्में देखना, क्रिकेट खेलना ,समाज से जुङे रहना, संगीत सुनना(खासकर पुराने) शामिल है।

अशोक सिह जी के लिए मेरे विचार: 

“अशोक सिह जी” की कविताआे के हर एक शब्द में प्राकृतिक सौंदर्य का अलाैकिक सार भरा हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। कविताऐं छोटी और सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन कविताओं काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

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KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

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