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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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डॉ• जय महलवाल

मेरे राम आए हैं।

Kmsraj51 की कलम से…..

Mere Ram Aae Hain | मेरे राम आए हैं।

He is the seventh and one of the most popular avatars of Vishnu. In Rama-centric traditions of Hinduism, he is considered the Supreme Being. Rama.

कण –कण में देखो,
भगवान श्री राम समाए हैं।
सबके मन देखो,
दर्शन के लिए ललचाए हैं।
बहुत वर्षों बाद देखो ,
आई है आज शुभ घड़ी,
देखो देखो अयोध्या में ,
आज फिर मेरे राम आए हैं।

गली गली सजी है,
आज फूलों से,
महक उठा है,
चमन – चमन,
दूर-दूर से दर्शन करने,
श्री राम लला के,
देखो आज ,
हम भी अयोध्या आए हैं।

जन-जन के मन में ,
राम बसते आए हैं।
सबके बिगड़े कामों को,
श्री राम बनाते आए हैं।
धन्य हो गया आज हर,
एक जनमानस,
देखो-देखो अयोध्या में,
आज फिर मेरे राम आए हैं।

दुल्हन जैसे सज गई है,
आज अयोध्या नगरी।
खुशियों से भरी हुई जैसे,
छलक गई है गगरी।
रोम रोम पुलकित ,
हो उठा है आज,
देखो – देखो अयोध्या में,
आज फिर मेरे राम आए हैं।

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में कवि भगवान श्री राम के आगमन का जो दृश्य चित्रित कर रहे हैं, उसे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं से भरा हुआ है। वे कह रहे हैं कि भगवान श्री राम सभी के हृदय में हैं और उनके दर्शन के लिए सभी लोग बेहद उत्कृष्ट भावनाओं से प्रेरित हैं। कवि आगे बढ़ते हैं और बताते हैं कि बहुत वर्षों के बाद फिर से एक शुभ घड़ी आई है, और आज अयोध्या में भगवान राम फिर से अपने भक्तों के बीच आए हैं। उनके आगमन से पूरा नगर सज गया है, हर गली-मोहल्ले में फूलों से भरा हुआ है। लोग दूर-दूर से आकर श्री राम लला के दर्शन करने के लिए उत्कृष्ट भावनाओं में लिपटे हैं और खुशी से भरे हुए हैं। कवि ने इस कविता के माध्यम से भक्ति, सांस्कृतिक समृद्धि, और समर्पण की भावनाएं सुंदरता से चित्रित की हैं, और व्यक्ति को अपने आत्मा की शुद्धि और धार्मिक अनुष्ठान की दिशा में प्रेरित करती हैं।

—————

यह कविता (मेरे राम आए हैं।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, लघु कथा, सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल है। साहित्यिक नाम — डॉ• जय अनजान है। माता का नाम — श्रीमती कमला देवी महलवाल और पिता का नाम — श्री सुंदर राम महलवाल है। शिक्षा — पी• एच• डी•(गणित), एम• फिल•, बी• एड•। व्यवसाय — सहायक प्रोफेसर। धर्म पत्नी — श्रीमती संतोष महलवाल और संतान – शानवी एवम् रिशित।

  • रुचियां — लेखक, समीक्षक, आलोचक, लघुकथा, फीचर डेस्क, भ्रमण, कथाकार, व्यंग्यात्मक लेख।
  • लेखन भाषाएं — हिंदी, पहाड़ी (कहलूरी, कांगड़ी, मंडयाली) अंग्रेजी।
  • लिखित रचनाएं — हिंदी(50), पहाड़ी(50), अंग्रेजी(10)।
  • प्रेरणा स्त्रोत — माता एवम हालात।
  • पदभार निर्वहन — कार्यकारिणी सदस्य कल्याण कला मंच बिलासपुर, लेखक संघ बिलासपुर, सह सचिव राष्ट्रीय कवि संगम बिलासपुर इकाई, ज्वाइंट फाइनेंस सेक्रेटरी हिमाचल मलखंभ एसोसिएशन, सदस्य मंजूषा सहायता केंद्र।
  • सम्मान प्राप्त — श्रेष्ठ रचनाकार(देवभूमि हिम साहित्य मंच) — 2022
  • कल्याण शरद शिरोमणि सम्मान(कल्याण कला मंच) — 2022
  • काले बाबा उत्कृष्ट लेखक सम्मान — 2022
  • व्यास गौरव सम्मान — 2022
  • रक्त सेवा सम्मान (नेहा मानव सोसायटी)।
  • शारदा साहित्य संगम सम्मान — 2022
  • विशेष — 17 बार रक्तदान।
  • देश, प्रदेश के अग्रणी समाचार पत्रों एवम पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।

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©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari, etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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झांसी वाली रानी।

Kmsraj51 की कलम से…..

Jhansi Wali Queen | झांसी वाली रानी।

Lakshmi Bai was rani (queen) of Jhansi. During the Indian Mutiny of 1857–58, she rapidly organized her troops and assumed charge of the rebels in the Bundelkhand region.

19 नवंबर को जन्म हुआ था,
वाराणसी तब धन्य हुआ था।
लक्ष्मीबाई आई थी उस दिन धरा पर,
अपना हिंदोस्तान तब कृतज्ञ हुआ था।

हुई सगाई वीरांगना की झांसी में,
छोटी सी वो मनु बनके आई झांसी की रानी थी।
बहादुर इतनी थी कि कहते सब वो तो मर्दानी थी,
हिंदोस्तान को जिस पर गर्व रहेगा वो तो झांसी वाली रानी थी।

राजवंशों के सिंहासन डोल उठे थे,
जब उसने अपनी भृकुटी तानी थी।
उसकी वीरता का लोहा था माना उन सब ने,
सच में ही वो झांसी वाली रानी थी।

अपनी वीरता से उसने लौ जगाई वो आज़ादी की दीवानी थी,
तब जाके सबने आज़ादी की कीमत पहचानी थी।
हर हिंदोस्तानी हतप्रभ था देख उसकी जो कहानी थी,
वाह क्या खूब वीरांगना थी वो जो झांसी वाली रानी थी।

1857 में अलख जगाई वो तलवार पुरानी थी,
बुंदेलों के मुंह से सबने सुनी वो कहानी थी।
विद्रोह करके अंग्रेजों को नाकों चने चबवाए जिसने,
आज़ादी की दीवानी थी वो जो झांसी वाली रानी थी।

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की वीरता और स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका का सुंदर चित्रण किया गया है। यह कविता उनके जन्म, बचपन, विवाह, और स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका पर ध्यान केंद्रित है। कुल मिलाकर, यह कविता झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की महानता और उनके समर्पण को अद्वितीयता के साथ प्रस्तुत करती है।

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यह कविता (झांसी वाली रानी।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, लघु कथा, सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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हिंदी मेरा अभिमान।

Kmsraj51 की कलम से…..

Hindi Mera Abhiman | हिंदी मेरा अभिमान।

Hindi Diwas is a celebration of India's cultural diversity and unity.

हम सब भारतवासी हैं,
करते हैं अपनी मातृभाषा से प्यार,
उत्तर हो या हो दक्षिण
चाहे हो फिर पूर्व पश्चिम,
सारे लोग हो जाओ तैयार।
पूर्ण रूप से अपनाएं हिंदी को,
आओ हिंदी से करें हम प्यार।

बनाए हिंदी को आमजन की भाषा,
पढ़ाएं हिंदी लिखाएं हिंदी।
हर कार्यालय में बनाएं अनिवार्य हिंदी,
बने विश्व विधाता फिर अपनी प्यारी हिंदी।

आओ खुले मंच से करें अब ये ऐलान,
हिंदी का प्रयोग हो सभी जगह अनिवार्य।
हिंदी को पूर्ण रूप से मिले ये राष्ट्र सम्मान,
हिंदी मेरी जान है, पहचान है, है मेरा अभिमान।

प्रारंभिक स्तर से करो मिश्रण,
निज भाषा में हिंदी के शब्दों का।
फिर देखो कमाल हिंदी राष्ट्रभाषा का,
कैसे एकता बनी रहेगी अपने वतन में।
ना होगी किसी को कोई समस्या,
किसी की बात समझने में।

है हिंदी मेरा अभिमान,
है इससे मेरा मान सम्मान।
आओ करें और अधिक प्रयास,
करें हिंदी का प्रचार प्रसार और गुणगान।
है हिंदी मेरा अभिमान,
इसी से है हम सब का मान सम्मान।

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवि इस कविता में हिंदी भाषा के महत्व को बता रहे हैं। वे कह रहे हैं कि हम सभी भारतीय हैं और हमें अपनी मातृभाषा, यानी हिंदी, से प्यार करना चाहिए। कवि के अनुसार, हिंदी को अपनाना और बढ़ावा देना हम सभी की जिम्मेदारी है। हिंदी को आम जनता की भाषा बनाना चाहिए, और सभी को हिंदी पढ़ना और लिखना चाहिए। कवि का आग्रह है कि हिंदी का प्रयोग सभी जगह अनिवार्य बनना चाहिए, ताकि हिंदी को राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो। कवि इसके साथ ही यह भी कहते हैं कि हमें हिंदी के शब्दों का अपनी निजी भाषा में मिश्रण करना चाहिए, ताकि सभी लोग इसे समझ सकें और एकता का आदान-प्रदान हो सके। हिंदी को अपना अभिमान मानने का आग्रह किया गया है, और इसका प्रचार-प्रसार करने का भी संदेश दिया गया है।

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यह कविता (हिंदी मेरा अभिमान।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, लघु कथा, सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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कृष्ण लीला।

Kmsraj51 की कलम से…..

Krishna Leela | कृष्ण लीला।

कैसे – कैसे लीला रचाता है,
नटखट कान्हा देखो कैसे मुस्कुराता है।
पैरों में घुंघरू बांध देखो कैसे इतराता है,
गोपियों को देखो कैसे,
प्यारी – प्यारी मुरली सुनाता है।

मुरली की धुन पर देखो,
गोपियों को कैसे-कैसे नचाता है।
सिर पर देखो कैसे,
प्यारा सा मोर पंख लगाता है।
दूध दही का इतना दीवाना,
देखो कैसे-कैसे मटकी फोड़ने आता है।

वृंदावन की गलियां देखो,
कैसे – कैसे अपने भक्तों का मन बहलाता है।
अपने मैया से करता है इतना प्यार,
उसकी डांट खाने से देखो,
बिल्कुल भी नहीं घबराता है।
नटखट कान्हा देखो,
कैसे – कैसे अपनी लीला रचाता है।

गोवर्धन पर्वत को देखो कैसे,
अपनी उंगली पर उठाता है।
अपनी बाल लीला से देखो,
कैसे पूतना को हराता है।
देखो इस संसार में कैसे
अपनी लीला रचाता है।

कंस मामा का वध करके,
देखो सारे लोगों को कैसे,
उसके अत्याचारों से बचाता है।
अर्जुन का सारथी बन के,
देखो कैसे महाभारत के,
युद्ध में कौरवों को हराता है।

कैसे-कैसे देखो दुनिया को,
गीता का उपदेश पढाता है।
कृष्ण कन्हैया देखो,
कैसे-कैसे अपनी लीला रचाता है।
आज सारा जग देखो कैसे,
जन्माष्टमी धूमधाम से मानता है।

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कविता में कान्हा (श्रीकृष्ण) की बाल लीलाओं के वर्णन के साथ, उनके भक्ति और लोगों के प्रति उनकी अनुराग भावना को प्रकट करते हुए लिखा गया है। कान्हा के अद्भुत और मनमोहक व्यवहार का चित्रण किया गया है, जो उनके भक्तों को खुशी और प्रेम में लिपटा देता है। काव्य में उनकी आलोकिक शक्तियों और लीलाओं का अद्वितीय चित्रण किया गया है, जिससे उनका दिव्य और भगवान के रूप में अवतरण का महत्व प्रकट होता है। इसके अलावा, काव्य में भक्ति, प्रेम, और धार्मिक संदेश को भी दर्शाया गया है, जिससे यह कविता भगवान के जन्म दिन (जन्माष्टमी) के उपलक्ष्य में धूमधाम से मनाने की भावना को प्रकट करती है।

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यह कविता (कृष्ण लीला।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, लघु कथा, सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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हम है चंद्रमा वाले।

Kmsraj51 की कलम से…..

Hum Hai Chandrama Wale | हम है चंद्रमा वाले।

चंदा मामा हम आ गए,
भारतवासी छा गए।
हमारे वैज्ञानिक सारी
दुनिया को भा गए।

हम उन चार देशों में भी थे,
जो चंद्रमा पर गए थे।
हम संसार के उस देश के,
गौरवशाली नागरिक हैं,
जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर,
सबसे पहले पहुंचे है।

जापान, रूस, चीन,
अमेरिका देखते ही रह गए।
अब दुनिया को,
रहस्यों से अवगत कराएंगे।

भारत का परचम और
ग्रहों पर भी लहराएंगे।
दुनिया वाले,
देखते ही रह जायेंगे।

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में व्यक्त किया गया है कि चंद्रमा के स्पेस मिशन के माध्यम से भारतवासियों ने अपने वैज्ञानिक और तकनीकी योगदान के साथ दुनिया के स्तर पर अपनी महत्वपूर्ण पहचान बनाई है। वे चार देशों को संदर्भित कर रहे हैं, जो चंद्रमा पर मानव अभियान का आयोजन कर रहे हैं। हम संसार के उस देश के गौरवशाली नागरिक हैं, जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सबसे पहले पहुंचे है। कविता का समापन भारत के वैज्ञानिक प्रगति को और उनके अंतरिक्ष मिशन को संकेतित करता है, जो दुनिया भर के लोगों की नजरों में होगा।

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यह कविता (हम है चंद्रमा वाले।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, लघु कथा, सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल है। साहित्यिक नाम — डॉ• जय अनजान है। माता का नाम — श्रीमती कमला देवी महलवाल और पिता का नाम — श्री सुंदर राम महलवाल है। शिक्षा — पी• एच• डी•(गणित), एम• फिल•, बी• एड•। व्यवसाय — सहायक प्रोफेसर। धर्म पत्नी — श्रीमती संतोष महलवाल और संतान – शानवी एवम् रिशित।

  • रुचियां — लेखक, समीक्षक, आलोचक, लघुकथा, फीचर डेस्क, भ्रमण, कथाकार, व्यंग्यात्मक लेख।
  • लेखन भाषाएं — हिंदी, पहाड़ी (कहलूरी, कांगड़ी, मंडयाली) अंग्रेजी।
  • लिखित रचनाएं — हिंदी(50), पहाड़ी(50), अंग्रेजी(10)।
  • प्रेरणा स्त्रोत — माता एवम हालात।
  • पदभार निर्वहन — कार्यकारिणी सदस्य कल्याण कला मंच बिलासपुर, लेखक संघ बिलासपुर, सह सचिव राष्ट्रीय कवि संगम बिलासपुर इकाई, ज्वाइंट फाइनेंस सेक्रेटरी हिमाचल मलखंभ एसोसिएशन, सदस्य मंजूषा सहायता केंद्र।
  • सम्मान प्राप्त — श्रेष्ठ रचनाकार(देवभूमि हिम साहित्य मंच) — 2022
  • कल्याण शरद शिरोमणि सम्मान(कल्याण कला मंच) — 2022
  • काले बाबा उत्कृष्ट लेखक सम्मान — 2022
  • व्यास गौरव सम्मान — 2022
  • रक्त सेवा सम्मान (नेहा मानव सोसायटी)।
  • शारदा साहित्य संगम सम्मान — 2022
  • विशेष — 17 बार रक्तदान।
  • देश, प्रदेश के अग्रणी समाचार पत्रों एवम पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।

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मैं हिमाचल हूं।

Kmsraj51 की कलम से…..

Main Himachal Hoon | मैं हिमाचल हूं।

मैं हिमाचल हूं,
हिमालय का सरताज हूं।
मैं टूटूंगा नहीं,
कितनी भी मुसीबत,
आ जाए मुझ पर,
मैं झुकूंगा नहीं।

मैं हिमाचल हूं…….
आखिर कितना खोखला करोगे मुझे,
कितनी मेरी अंतरात्मा को कटोचोगे,
कितने जख्म दोगे मुझे,
सब सहन करके फिर उठूंगा मैं।

मैं हिमाचल हूं…….
शिमला मनाली को
कितना कंक्रीट बनाओगे,
पैसों के चक्कर में
खुद को ही नुकसान पहुंचाओगे,
क्यूं कुदरत को बेबस कराते हो,
पर्यावरण का नुकसान कराते हो,
भोली भाली जनता के,
आशियानों को क्यों उजड़वाते हो,
मानव तुम अपनी,
करतूत से क्यों बाज़ नही आते हो,
अपने इस हिमाचल में,
फिर कैसे तुम सभ्य मानव कहलाते हो?

मैं हिमाचल हूं…….
हिमालय का सरताज हूं।
सब लोगों के प्यार का मोहताज हूं,
अपनी अनूठी प्राकृतिक छठा के लिए,
जाना जाता बेबाक हूं।

मैं हिमाचल हूं…….
मैं झुकूंगा नहीं।
अगर किसी ने मुझको बेवजह कुरेदा,
तो मैं विनाश करने से रुकूंगा नहीं।

मैं हिमाचल हूं…….
मैं शिव के सिर का ताज़ हूं।
अगर कोई मेरा सिंहासन डोलेगा,
तो फिर मानव त्राहिमाम त्राहिमाम बोलेगा।
चाहे हो फिर शिमला की शिवबौड़ी,
या मंडी का पंचवक्तावर,
अपने पास से तांडव रचाऊंगा।
पानी से ऐसी गंगा बहाऊंगा,
सारी सृष्टि को साथ ले जाऊंगा।

मैं हिमाचल हूं…….
मैं झुकूंगा नहीं।
मैं रुकूंगा नही,
मैं ठार नही ठानूंगा।
मैं रार नही मानूंगा,
हिम का मैं आंचल हूं,
मैं हिमाचल हूं।

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता “मैं हिमाचल हूं” के रूप में हिमाचल प्रदेश की सुंदरता, प्राकृतिक सौंदर्य और साहित्यिक रूपरेखा का सुरुवातीकरण करती है। कविता के व्यक्तिगत व्याख्यानों के माध्यम से कवि हिमाचल प्रदेश की महत्वपूर्ण बातों को स्पष्ट करते हैं। कवि यहां बताते हैं कि वे हिमाचल प्रदेश के हैं, जिन्हें हिमालय का सर्वोत्तम अंश कह सकते हैं। उनका इरादा है कि वे कितनी भी मुश्किलों का सामना करने के बावजूद, किसी भी परिस्थिति में झुकने का नाम नहीं लेंगे। कवि के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि व्यक्ति को हिमाचल प्रदेश की सुन्दरता का सच्चा संदर्भ समझना चाहिए और उसे अपने कार्यों में इसका सही रूप से पालन करना चाहिए। कवि यह भी दिखाते हैं कि पर्यावरण के साथ कैसे सच्चा संबंध बनाया जा सकता है और उसके प्रति किसी के व्यवहार का क्या प्रभाव हो सकता है। इस कविता में कवि अपने प्राकृतिक धरोहर, अपनी मानवीयता और अपने जीवन के मूल्यों को प्रकट करते हैं। उनकी भावनाओं और विचारों के माध्यम से व्यक्ति को यह बताने का प्रयास किया जाता है कि हिमाचल प्रदेश की अनूठी पहचान क्या है और उसकी महत्वपूर्णता क्या है। कुल मिलाकर, “यह कविता हिमाचल प्रदेश के सौंदर्य, अद्भुतता और विविधता को महसूस करने का एक माध्यम है, साथ ही साहित्यिक दृष्टिकोण से भी यह एक महत्वपूर्ण कविता है।”

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यह कविता (मैं हिमाचल हूं।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, लघु कथा, सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मेरा नाम लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल है। साहित्यिक नाम — डॉ• जय अनजान है। माता का नाम — श्रीमती कमला देवी महलवाल और पिता का नाम — श्री सुंदर राम महलवाल है। शिक्षा — पी• एच• डी•(गणित), एम• फिल•, बी• एड•। व्यवसाय — सहायक प्रोफेसर। धर्म पत्नी — श्रीमती संतोष महलवाल और संतान – शानवी एवम् रिशित।

  • रुचियां — लेखक, समीक्षक, आलोचक, लघुकथा, फीचर डेस्क, भ्रमण, कथाकार, व्यंग्यात्मक लेख।
  • लेखन भाषाएं — हिंदी, पहाड़ी (कहलूरी, कांगड़ी, मंडयाली) अंग्रेजी।
  • लिखित रचनाएं — हिंदी(50), पहाड़ी(50), अंग्रेजी(10)।
  • प्रेरणा स्त्रोत — माता एवम हालात।
  • पदभार निर्वहन — कार्यकारिणी सदस्य कल्याण कला मंच बिलासपुर, लेखक संघ बिलासपुर, सह सचिव राष्ट्रीय कवि संगम बिलासपुर इकाई, ज्वाइंट फाइनेंस सेक्रेटरी हिमाचल मलखंभ एसोसिएशन, सदस्य मंजूषा सहायता केंद्र।
  • सम्मान प्राप्त — श्रेष्ठ रचनाकार(देवभूमि हिम साहित्य मंच) — 2022
  • कल्याण शरद शिरोमणि सम्मान(कल्याण कला मंच) — 2022
  • काले बाबा उत्कृष्ट लेखक सम्मान — 2022
  • व्यास गौरव सम्मान — 2022
  • रक्त सेवा सम्मान (नेहा मानव सोसायटी)।
  • शारदा साहित्य संगम सम्मान — 2022
  • विशेष — 17 बार रक्तदान।
  • देश, प्रदेश के अग्रणी समाचार पत्रों एवम पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।

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दौर।

Kmsraj51 की कलम से…..

Daur | दौर।

वो छब्बीस थी,
और अब इंतजार सताईस का था।
वो दौर मौज मस्ती का था,
और अब ये दौर ज़ोर अजमाइश का था।

कहतें है इंतजार का फल मीठा होता है,
जो होता है वो ठीक ही होता है।
दिल यहां से जाने को भी नही कर रहा है,
पर एक वो भी है जो हमें बुला रहा है।

वो दौर अपनी मन मर्जी का था,
जब दो को वहां जाना हुआ था।
ये दौर उत्सुकता वाला है,
जब एक को यहां आना हुआ है।

ये दौर – दौर की बात है,
हर दौर का अपना मज़ा है।
हम हर दौर को गौर से जीते हैं,
बस यूं समझिए हम वो है जो,
पानी को भी अमृत समझ के पीते हैं।

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — जीवन के हर दौर में उतार-चढ़ाव आते रहते है, जब शरीर ऊर्जावान हो, तब सिर्फ सोचते ही न रहे, अच्छे कार्य करते रहे। उतावलेपन में कभी भी गलत कार्य ना करे। “कहतें है इंतजार का फल मीठा होता है” अगर आपके कर्म अच्छे है तो देर से ही सही आपको शांतिमय ख़ुशी मिलेगी। एक बात याद रखें की कोई भी दौर सदैव नही रहेगा, दौर बदलते रहेंगे, इसलिए कभी भी चिंतित व निराश होकर बैठ ना जाना, रुक ना जाना। जय माता दी!

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यह कविता (दौर।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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  • रुचियां — लेखक, समीक्षक, आलोचक, लघुकथा, फीचर डेस्क, भ्रमण, कथाकार, व्यंग्यात्मक लेख।
  • लेखन भाषाएं — हिंदी, पहाड़ी (कहलूरी, कांगड़ी, मंडयाली) अंग्रेजी।
  • लिखित रचनाएं — हिंदी(50), पहाड़ी(50), अंग्रेजी(10)।
  • प्रेरणा स्त्रोत — माता एवम हालात।
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पहाड़ी कबता।

Kmsraj51 की कलम से…..

Pahadi Kabata | पहाड़ी कबता।

हिमाचल मेरा देवताओं की धरती,
इंसानियत यहां के लोगों की कभी नहीं मरती।

जब लोगों ने की प्रकृति से ऐसी छेड़छाड़,
देखो आ गई हिमाचल में भी बाढ़।

उज्जड़ गए लोगों के ऐसे घर द्वार,
पड़ी प्रकृति की देखो ये कैसी मार।

अमीर गरीब का भेद हुआ खत्म,
सैलाब ने सब कुछ कर दिया भस्म।

लगे करने अब बाढ़ प्रभावितों की सेवा,
जय भी कहता है जरूर मिलेगा उनको जीवन में मेवा।

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — हिमाचल आदिकाल से ही देवताओं की धरती है, इंसानियत यहां के लोगों की कभी भी नहीं मरती है। जब-जब इंसान ने की प्रकृति से ऐसी छेड़छाड़ की है तब-तब देखो आ गई हिमाचल में भी भयानक बाढ़। उज्जड़ गए लोगों के ऐसे घर द्वार सब बेचारे बेघर हुए, पड़ी प्रकृति की देखो ये कैसी मार। इस प्राकृतिक आपदा के बाद अमीर गरीब का भेद हुआ खत्म, सैलाब ने सब कुछ कर दिया भस्म। जो भी बाढ़ प्रभावितों की सेवा करता, जय भी कहता है जरूर मिलेगा उनको जीवन में उनके कर्म का अच्छा मेवा। जय माता दी!

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यह कविता (पहाड़ी कबता।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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  • रुचियां — लेखक, समीक्षक, आलोचक, लघुकथा, फीचर डेस्क, भ्रमण, कथाकार, व्यंग्यात्मक लेख।
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आफत की बारिश।

Kmsraj51 की कलम से…..

Rain Of Disaster | आफत की बारिश।

हिमाचल की प्राकृतिक,
शान है देखो कितनी निराली।
अरे ओ मानव तूने यहां भी,
ये कैसी साजिश रच डाली।

बना – बना के बड़ी – बड़ी इमारतें,
सब नदी नालों की राहें रोक डाली।
तभी तो हो रही ये आफत की बारिश आज,
त्राहि – त्राहि कर रहा मेरा शिमला,
मंडी, कुल्लू हो या फिर हो मनाली।

क्यों कर रहे हो पहाड़ों से,
छेड़छाड़।
बना – बना के सुरंगे,
सारी ज़मीन खोखली कर डाली।

अभी तो रुक जाओ,
बीस साल बाद देखना मेरा प्रकोप।
जब बह जायेंगे सारे भवन,
बनकर कंकड़ पत्थर।
तो फिर मनाना सिर पर,
दोनों हाथ रखकर तुम शोक।

अभी भी संभल जाओ,
मत बिगाड़ो संतुलन पहाड़ों में।
है तुम सब से मेरी भी ये गुजारिश,
वरना हर साल ऐसे ही आती,
रहेगी ये आफत की बारिश।

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — “हिमाचल की प्राकृतिक शान है देखो कितनी निराली। अरे ओ मानव तूने यहां भी, ये कैसी साजिश रच डाली।” चारों तरफ पानी पानी, हर तरफ तबाही ही तबाही है। जो अपने आवेश में सबकुछ, ख़त्म करने पर अड़ी है। पर आज उसे भी अपना, अस्तित्व बचाने की पड़ी है। आफत की बारिश से हुई तबाही का मंजर अभी भी खौफनाक नजर आता है। बादल फटने की वजह से आसमान से जब अचानक तबाही बरसने लगे तो लोग हक्का-बक्का रह गए। जब तक वे संभलने या सुरक्षित स्थानों में जाने का प्रयास करते, तब तक मूसलाधार बारिश का कहर अपनी चरम पर पहुँच चुका था। “हे मानव अभी भी संभल जाओ और मत बिगाड़ो संतुलन पहाड़ों में, है तुम सब से मेरी भी ये गुजारिश, वरना हर साल ऐसे ही आती रहेगी ये आफत की बारिश।” जय माता दी!

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यह कविता (आफत की बारिश।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मेरा नाम लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल है। साहित्यिक नाम — डॉ• जय अनजान है। माता का नाम — श्रीमती कमला देवी महलवाल और पिता का नाम — श्री सुंदर राम महलवाल है। शिक्षा — पी• एच• डी•(गणित), एम• फिल•, बी• एड•। व्यवसाय — सहायक प्रोफेसर। धर्म पत्नी — श्रीमती संतोष महलवाल और संतान – शानवी एवम् रिशित।

  • रुचियां — लेखक, समीक्षक, आलोचक, लघुकथा, फीचर डेस्क, भ्रमण, कथाकार, व्यंग्यात्मक लेख।
  • लेखन भाषाएं — हिंदी, पहाड़ी (कहलूरी, कांगड़ी, मंडयाली) अंग्रेजी।
  • लिखित रचनाएं — हिंदी(50), पहाड़ी(50), अंग्रेजी(10)।
  • प्रेरणा स्त्रोत — माता एवम हालात।
  • पदभार निर्वहन — कार्यकारिणी सदस्य कल्याण कला मंच बिलासपुर, लेखक संघ बिलासपुर, सह सचिव राष्ट्रीय कवि संगम बिलासपुर इकाई, ज्वाइंट फाइनेंस सेक्रेटरी हिमाचल मलखंभ एसोसिएशन, सदस्य मंजूषा सहायता केंद्र।
  • सम्मान प्राप्त — श्रेष्ठ रचनाकार(देवभूमि हिम साहित्य मंच) — 2022
  • कल्याण शरद शिरोमणि सम्मान(कल्याण कला मंच) — 2022
  • काले बाबा उत्कृष्ट लेखक सम्मान — 2022
  • व्यास गौरव सम्मान — 2022
  • रक्त सेवा सम्मान (नेहा मानव सोसायटी)।
  • शारदा साहित्य संगम सम्मान — 2022
  • विशेष — 17 बार रक्तदान।
  • देश, प्रदेश के अग्रणी समाचार पत्रों एवम पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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