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हिंदी दिवस पर कविता

हिंदी मेरा अभिमान।

Kmsraj51 की कलम से…..

Hindi Mera Abhiman | हिंदी मेरा अभिमान।

Hindi Diwas is a celebration of India's cultural diversity and unity.

हम सब भारतवासी हैं,
करते हैं अपनी मातृभाषा से प्यार,
उत्तर हो या हो दक्षिण
चाहे हो फिर पूर्व पश्चिम,
सारे लोग हो जाओ तैयार।
पूर्ण रूप से अपनाएं हिंदी को,
आओ हिंदी से करें हम प्यार।

बनाए हिंदी को आमजन की भाषा,
पढ़ाएं हिंदी लिखाएं हिंदी।
हर कार्यालय में बनाएं अनिवार्य हिंदी,
बने विश्व विधाता फिर अपनी प्यारी हिंदी।

आओ खुले मंच से करें अब ये ऐलान,
हिंदी का प्रयोग हो सभी जगह अनिवार्य।
हिंदी को पूर्ण रूप से मिले ये राष्ट्र सम्मान,
हिंदी मेरी जान है, पहचान है, है मेरा अभिमान।

प्रारंभिक स्तर से करो मिश्रण,
निज भाषा में हिंदी के शब्दों का।
फिर देखो कमाल हिंदी राष्ट्रभाषा का,
कैसे एकता बनी रहेगी अपने वतन में।
ना होगी किसी को कोई समस्या,
किसी की बात समझने में।

है हिंदी मेरा अभिमान,
है इससे मेरा मान सम्मान।
आओ करें और अधिक प्रयास,
करें हिंदी का प्रचार प्रसार और गुणगान।
है हिंदी मेरा अभिमान,
इसी से है हम सब का मान सम्मान।

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवि इस कविता में हिंदी भाषा के महत्व को बता रहे हैं। वे कह रहे हैं कि हम सभी भारतीय हैं और हमें अपनी मातृभाषा, यानी हिंदी, से प्यार करना चाहिए। कवि के अनुसार, हिंदी को अपनाना और बढ़ावा देना हम सभी की जिम्मेदारी है। हिंदी को आम जनता की भाषा बनाना चाहिए, और सभी को हिंदी पढ़ना और लिखना चाहिए। कवि का आग्रह है कि हिंदी का प्रयोग सभी जगह अनिवार्य बनना चाहिए, ताकि हिंदी को राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो। कवि इसके साथ ही यह भी कहते हैं कि हमें हिंदी के शब्दों का अपनी निजी भाषा में मिश्रण करना चाहिए, ताकि सभी लोग इसे समझ सकें और एकता का आदान-प्रदान हो सके। हिंदी को अपना अभिमान मानने का आग्रह किया गया है, और इसका प्रचार-प्रसार करने का भी संदेश दिया गया है।

—————

यह कविता (हिंदी मेरा अभिमान।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, लघु कथा, सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल है। साहित्यिक नाम — डॉ• जय अनजान है। माता का नाम — श्रीमती कमला देवी महलवाल और पिता का नाम — श्री सुंदर राम महलवाल है। शिक्षा — पी• एच• डी•(गणित), एम• फिल•, बी• एड•। व्यवसाय — सहायक प्रोफेसर। धर्म पत्नी — श्रीमती संतोष महलवाल और संतान – शानवी एवम् रिशित।

  • रुचियां — लेखक, समीक्षक, आलोचक, लघुकथा, फीचर डेस्क, भ्रमण, कथाकार, व्यंग्यात्मक लेख।
  • लेखन भाषाएं — हिंदी, पहाड़ी (कहलूरी, कांगड़ी, मंडयाली) अंग्रेजी।
  • लिखित रचनाएं — हिंदी(50), पहाड़ी(50), अंग्रेजी(10)।
  • प्रेरणा स्त्रोत — माता एवम हालात।
  • पदभार निर्वहन — कार्यकारिणी सदस्य कल्याण कला मंच बिलासपुर, लेखक संघ बिलासपुर, सह सचिव राष्ट्रीय कवि संगम बिलासपुर इकाई, ज्वाइंट फाइनेंस सेक्रेटरी हिमाचल मलखंभ एसोसिएशन, सदस्य मंजूषा सहायता केंद्र।
  • सम्मान प्राप्त — श्रेष्ठ रचनाकार(देवभूमि हिम साहित्य मंच) — 2022
  • कल्याण शरद शिरोमणि सम्मान(कल्याण कला मंच) — 2022
  • काले बाबा उत्कृष्ट लेखक सम्मान — 2022
  • व्यास गौरव सम्मान — 2022
  • रक्त सेवा सम्मान (नेहा मानव सोसायटी)।
  • शारदा साहित्य संगम सम्मान — 2022
  • विशेष — 17 बार रक्तदान।
  • देश, प्रदेश के अग्रणी समाचार पत्रों एवम पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: Dr. Jai Mahalwal, Hindi Mera Abhiman, कविता, डॉ• जय महलवाल, हिंदी दिवस पर कविता, हिंदी मेरा अभिमान, हिंदी मेरा अभिमान - डॉ• जय महलवाल, हिन्दी-कविता

प्यारी हिंदी।

Kmsraj51 की कलम से…..

Pyari Hindi | प्यारी हिंदी।

Hindi Day is celebrated in India to commemorate the date 14 September 1949 on which a compromise was reached—during the drafting of the Constitution of India—on the languages that were to have official status in the Republic of India.

भारतवासियों के जुबान की मिठास है ये।
अपनेपन में एक प्यारा सा अहसास है ये।

हमारी सभ्यता की एक परिचायक है।
यही तो हमारी संस्कृति की संवाहक है।

ये तो देती, हर रिश्ते को इतना मान है।
फिर क्यूँ हो रहा, हर जगह अपमान है।

ये हिंदी तो दिलों को, बहुत प्यारी होती थी।
अपने लोगों की बोली ही, न्यारी होती थी।

पता ही नही लग पाया कि, कब हमसे ये जुदा हो गयी।
आओं, खुद में झांके, कि क्यूँ ये हमसे खफा हो गयी?

हमने किस भाषा के मोहपाश में खुद को बांध लिया।
क्यूँ, इस का प्रिय स्थान किसी और को दे ही दिया।

हिंदी-भाषी लोगों को वंदन करने का, समय आ गया।
फिर हमसब में धीरे-धीरे, हिंदी का मोह समा गया।

ये भाषा तो इतनी सहज, सरल होती,
अपना कर इसको जीवन जाता फूल सा खिल।
अपनी हिंदी जैसा इस जहां में और कोई नहीं काबिल।

हमारी हिंदी अपनी है, हमको बहुत ही प्यारी है।
जिसने अपनाया इसको, इसने उसकी ही तकदीर सँवारी है।

सदैव ममत्व लुटाने वाली, हम तो रहेंगे सदैव तेरे ही आभारी।
तू ही थी, तू ही है, बस जन्नत हमारी।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में कवयित्री हिंदी भाषा की महत्ता और महत्व को बयां कर रही हैं। वे कह रही हैं कि हिंदी भाषा भारतवासियों की जुबान की मिठास है और इसमें एक प्यारा सा अहसास होता है। हिंदी भाषा हमारी सभ्यता की पहचान है और हमारी संस्कृति का संरक्षक है। इसके बावजूद, कवयित्री यह सोचती हैं कि हिंदी का अपमान क्यों हो रहा है और इसे छोड़ने के लिए हमने किसी और भाषा के मोहपाश में अपने को बांध लिया है। कवयित्री का संदेश है कि हमें अपनी हिंदी को महत्व देना चाहिए और इसे अपने जीवन में सजीव रूप से अपनाना चाहिए। इसके माध्यम से हम अपनी भाषा का सम्मान करेंगे और उसे अपनी तकदीर सँवारेंगे। क्योंकि हिंदी हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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यह कविता (प्यारी हिंदी।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
    {International Internship University and Swarn Bharat Parivar}
  • Teacher’s Icon Award — 2023
  • राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान — 2021
  • सावित्रीबाई फुले ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड — 2022
  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शक्ति संचेतना अवार्ड — 2022
  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
  • 50 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित (राष्ट्रीय स्तर पर)।
  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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हिन्दी हिन्द का गौरव है।

Kmsraj51 की कलम से…..

Hindi Hind Ka Gaurav Hai | हिन्दी हिन्द का गौरव है।

हिन्दी हैं हम हिंदुस्तानी, न कि अंग्रेजों की संताने हैं।
हिन्दी सीखो, हिन्दी लिखो, अंग्रेजी आखर बेगाने हैं।

हिन्दी हिन्द का गौरव है, हिन्दी से सबकी पहचाने हैं।
हिन्दी छोड़ के अंग्रेजी में, क्या लाल, फन्नेखा बनाने हैं?

मां की ममता, पिता की क्षमता, है हिन्दी के दरीखाने में।
फिर भी न जाने क्यों होड़ लगी है, अंग्रेजी की जमाने में?

सदियों का ज्ञान छुपा है, हिन्दी की पढ़ाई – लिखाई में।
हम है कि लगे पड़े हैं, नित दिन अंग्रेजी की ही बड़ाई में।

लग जाओ अभी भी आओ, हिन्दी की पढ़ाई लिखाई में।
वरना फिर तो वक्त लगेगा, हुए नुकसान की भरपाई में।

मां के दूध से भूख न मिटे, क्या मिटेगी मौंसी के पिलाने से?
दूध का बिगड़ा फिर कहां सुधरेगा, दाल रोटी के खिलाने से।

अंग्रेजी आज की जरूरत है जी, कुछ न होगा हिले बहाने से।
घर को बिगड़ने के बाद क्या होगा, फिर रूठी बहु मनाने से?

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में हिन्दी भाषा के महत्व को उजागर किया गया है। लेखक ने अंग्रेजी भाषा के प्रति लोगों के मनोबल की कमी को दिखाया है और हिन्दी के महत्व की बढ़ती हुई आवश्यकता पर चिंता व्यक्त की है। कविता में हिन्दी की महत्वपूर्ण भूमिका और उसके लोगों के जीवन में क्यों बनी रहनी चाहिए, इसे प्रकट किया गया है। व्यक्ति को हिन्दी भाषा के प्रति समर्पित रहने की आवश्यकता को उत्कृष्ट ढंग से प्रस्तुत किया गया है, जिससे वह आगामी भविष्य के लिए भी अपनी मातृभाषा का सम्मान कर सके।

—————

यह कविता (हिन्दी हिन्द का गौरव है।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: hemraj thakur, hemraj thakur poems, hindi diwas par kavita, poem on hindi language in hindi, मातृभाषा हिंदी पर कविता', हिंदी दिवस पर कविता, हिंदी दिवस पर कविता हिंदी में, हिंदी भाषा पर छोटी सी कविता, हिन्दी हिन्द का गौरव है, हिन्दी हिन्द का गौरव है - हेमराज ठाकुर, हेमराज ठाकुर, हेमराज ठाकुर की कविताएं

हिन्दी का हित चाहने वालों को।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ हिन्दी का हित चाहने वालों को। ♦

राष्ट्र का गौरव शोभित करने को,
फिर से हमको क्या लड़ना होगा?
राष्ट्र भाषा के सम्मानित पद पर,
शासित हिन्दी को करना होगा।

अमृत महोत्सव आजादी का भी,
मनाकर क्यों हम बस शर्मिंदा हैं?
दिला न सके जो न्याय मां को तो,
फिर हम बेटे भी काहे को जिन्दा है?

जुर्म हुए हैं और जलालत सही है,
दशकों से भारत में मां हिन्दी ने।
कभी अफगानी अंग्रेजी ने कुचला,
कभी अपमानित किया है सिंधी ने।

जापान में जापानी, चीन में चीनी,
तो भारत में हिन्दी राष्ट्र की भाषा हो।
भारत बने फिर विश्वगुरु, जो सोचा है,
हिन्दी ही पूर्ण करेगी इस आशा को।

मशाल जलाते हैं मिलकर के आओ,
हिन्दी के सम्मान, प्रचार – प्रसार की।
राष्ट्र भाषा का दर्जा दिलाने के खातिर,
आओ कुछ मदद लेते है सरकार की।

हिन्दी का हित चाहने वालों को अब,
मिलकर एक तो यारों होना ही होगा।
नहीं तो विदेशी भाषाओं का भार हमें,
सदियों तक यूं ही निरंतर ढोना होगा।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवि हम सभी से पूछते हैं: राष्ट्र का गौरव शोभित करने को, फिर से हमको क्या लड़ना होगा? राष्ट्र भाषा के सम्मानित पद पर, शासित हिन्दी को करना होगा। अमृत महोत्सव आजादी का भी, मनाकर क्यों हम बस शर्मिंदा हैं? दिला न सके जो न्याय मां को तो, फिर हम बेटे भी काहे को जिन्दा है? जापान में जापानी, चीन में चीनी, तो भारत में हिन्दी राष्ट्र की भाषा हो। तब भारत बने फिर विश्वगुरु, जो सोचा है, हिन्दी ही पूर्ण करेगी इस आशा को। हिन्दी का हित चाहने वाले सभी उम्र के साथियों से आग्रह है की “मशाल जलाते हैं मिलकर के आओ, हिन्दी के सम्मान, प्रचार – प्रसार की। राष्ट्र भाषा का दर्जा दिलाने के खातिर, आओ कुछ मदद लेते है सरकार की। विशेषताओं से भरे भाषा का, प्रसार जो होना चाहिए हुआ नहीं। आओ हमसब मिलकर करें प्रचार, हिंदी का करें खूब विस्तार। तब मिलेगा इसे वाजिब हक और सम्मान, हिंदी मेरी जान, हम इस पर कुर्बान।

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यह कविता (हिन्दी का हित चाहने वालों को।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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हिंदी मेरी जान।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ हिंदी मेरी जान। ♦

अभिव्यक्ति का माध्यम है हिन्दी,
दिल में प्रेम जगाती हिंदी।
जीवन सरस बनाती हिंदी,
हिंदी से ही है हमारी शान।
हिंदी ही हमारा अभिमान,
हिंदी मेरी जान, हम इस पर कुर्बान।

हिंदी से होती हमारी पहचान,
इससे बढ़ता राष्ट्र का मान।
हर क्षेत्र में अपना सिक्का जमाती,
लोगों के मन को है लुभाती।
भाव का करती संचार,
हिंदी मेरी जान, हम इस पर कुर्बान।

जो पूरे राष्ट्र को एकसुत्री धागा में है जोड़,
वो मजबूत डोर है हिंदी।
जन-जन की भाषा है हिंदी,
प्रेम भाईचारे का प्रतीक है हिंदी।
इतना बेमिसाल, जिसकी पहचान,
हिंदी मेरी जान, हम इस पर कुर्बान।

विशेषताओं से भरे भाषा का,
प्रसार जो होना चाहिए हुआ नहीं।
आओ मिलकर करें प्रचार,
हिंदी का करें खूब विस्तार।
मिलेगा इसे वाजिब हक और सम्मान,
हिंदी मेरी जान, हम इस पर कुर्बान।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — अभिव्यक्ति का माध्यम है हिन्दी, दिल में सदैव ही प्रेम जगाती हिंदी, जीवन सरस बनाती हिंदी, हिंदी से ही है हमारी शान। हिंदी ही हमारा अभिमान, वह हिंदी मेरी जान है, हम इस पर कुर्बान। जो पूरे राष्ट्र को एकसुत्री धागा में है जोड़ती वो मजबूत डोर है हिंदी। जन-जन की भाषा है हिंदी, प्रेम भाईचारे का प्रतीक है हिंदी। इतना बेमिसाल, जिसकी पहचान, वह हिंदी मेरी जान। विशेषताओं से भरे भाषा का, प्रसार जो होना चाहिए हुआ नहीं। आओ हमसब मिलकर करें प्रचार, हिंदी का करें खूब विस्तार। तब मिलेगा इसे वाजिब हक और सम्मान, हिंदी मेरी जान, हम इस पर कुर्बान। 14 सितंबर, 1949 को संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकार किया। पहला हिंदी दिवस 14 सितंबर, 1953 को मनाया गया था।

—————

यह कविता (हिंदी मेरी जान।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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हिंदी दिवस की शुभकामनाएं।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ हिंदी के सिंहासन पर। ϒ

मेरे प्यारे दोस्तों व प्यारे पाठकों आप सभी काे हिंदी दिवस की शुभकामनाएं।

हिन्दी दिवस प्रत्येक वर्ष 14 सितम्बर को मनाया जाता है।

14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया कि हिन्दी ही भारत की राजभाषा होगी।

kmsraj51-hindi-diwas-14-sep

हिन्दी दूर है हिन्दूस्तान से, नाम के लिये है राष्ट्र भाषा।
शायद हम भूल गये हैं, राष्ट्र भाषा की परिभाषा।

अरब में सुनाई देती है अरबी, बोलते हैं जापान में जापानी।
चाइना में चाइनीज़, इरान में इरानी, नहीं बोलते हैं हिन्दी हिन्दूस्तानी।

जहाँ हिन्दी बोली जाती है, वो बहुत कम ही स्थान है।
हिन्दी के सिंहासन पर, अंग्रेजी विराजमान है।

दूध पीते बच्चों को, अंग्रेजी यहां सिखाते हैं।
हिन्दी सीख कर क्या बनेगा, बच्चों को समझाते हैं।

भारतीयों के मुख पर तो, अंग्रेजी ही छाई है।
हिन्दी के शब्दों की तो बस केवल परछाई है।

हिन्दी का निज देश में, हो रहा अपमान है।
हिन्दी के सिंहासन पर, अन्ग्रेजी विराजमान है।

हमारी जननी आज घर से, बहुत दूर हो गयी है।
वेदनायें है दिल में उसके, उदास बैठी रो रही है।

उम्मीद है उसे बहुत जल्द, भारतेंदू कोई आयेगा।
उसे अपने घर ले जाकर, खोया सम्मान दिलायेगा।

शुक्ल प्रशाद और गुप्त, पुकारती कई नाम है।
हिन्दी के सिंहासन पर, अंग्रेजी विराजमान है।

पुरा हुआ मैकाले का स्वप्न, बहुत ही आसानी से।
लगता है भारतीय अंग्रेज रूचि विचार और वाणी से।

नहीं जानेंगे अगर हम अपनी भाषा, अपना इतिहास क्या जानेंगे।
अपनी संस्कृति सभ्यता, को कैसे हम मानेंगे।

प्रेमचन्द को हम भूल गये, शैक्सपियर का ध्यान है।
हिन्दी के सिंहासन पर, अंग्रेजी विराजमान है।

हिन्दी हमारी जननी है, इस के महत्व को जानो।
छिपा है इस में अलौकिक ज्ञान, उस ज्ञान को पहचानो।

सूर तुलसी ने इसे संवारा मीरा ने किया शृंगार।
देवों की भाषा है ये, अलौकिक है इस का संसार।

अनन्त है इस का सागर, इस में लिखे वेद पुराण है।
हिन्दी के सिंहासन पर, अंग्रेजी विराजमान है।

राष्ट्र की प्रगति के लिये, हिन्दी को अपनाना होगा।
हिन्दी देश की बिन्दी है, सब को ये समझाना होगा।

वो दिन न जाने कब आयेगा, जब हिन्दी होगी हर मुख पर।
हिन्दी सब की भाषा होगी, रहेंगे सब मिल-झुलकर।

वो दिन अब आने वाला है, ये मेरा ऐलान है।
हिन्दी के सिंहासन पर, अंग्रेजी विराजमान है।

© कुलदीप ठाकुर ~ रोहरू, हिमाचल प्रदेश ®

Blog of Kuldeep : kuldeepkikavita.blogspot.in/

Kuldeep Thakur

कृपा करना मां हाटेशवरी रक्षा करना सदा मेरी। मेरा ये नशवर जीवन, महकाए सदा औरों का उपवन, हृदय में रहे सदा देश प्रेम, करूं सदा मैं काम नेक, फूल हूं या शूल हूं मैं, मैं खुद भी नहीं जानता। मेरा देश हिंदूस्तान है जो सभ्यता सब से महान है, दिखाती है गीता पथ, ये मिला मुझे वर्दान है। मुझे वेदों का उपहार मिला है, मां हाटेशवरी से प्यार मिला है, मेरे आदर्श श्री राम हैं, कंठ में शिव नाम है, विवेका नंद का धर्म है मेरा, यही मेरी पहचान है।

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© आप सभी का प्रिय दोस्त ®

Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
of,,  http://kmsraj51.com/

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

∗ निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

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∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

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* KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

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* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

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