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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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You are here: Home / Archives for पूनम गुप्ता की कविताएं

पूनम गुप्ता की कविताएं

समय।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ समय। ♦

समय कहता मैं तुम्हारे साथ हूँ,
समय की चाल निरन्तर चलती है।

यह पल में अनेक रूप बदलता,
दुख दर्द और सुख का साथी बनता।

रोज अपने नए रंग, रूप दिखाता,
सब इसकी मर्जी से चलता।

अपना हर पल का महत्व बताता,
ये कभी रुकता नहीं थकता नहीं।

बस निरतंर ही चलता जाता हूँ,
इसके महत्व को अगर समझोगे।

जीवन में अपने लक्ष्य हासिल करोगे,
सारे काम समय पर ही होते।

चाहे हम कितने भी उत्त्सुक हो,
होगा काम समय के आने पर ही।

इसलिए समय के महत्व को समझे,
समय कहता मैं तुम्हारे साथ हूँ।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

—————

  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — एक बात सदैव ही – याद रखें ….. समय का प्रबंधन वास्तव में जीवन का प्रबंधन है। यह दरअसल घटनाओं के क्रम को नियंत्रित करना है। समय का प्रबंधन का अर्थ है, इस बात पर नियंत्रण करना कि आप अगला कार्य कौन सा करेंगे, और आप हमेशा अपना कार्य चुनने के लिए स्वतंत्र होते हैं। महत्वपूर्ण और महत्वहीन के बीच विकल्प चुनने कि आपकी काबिलियत, जिंदगी और काम-धंधे में आपकी सफलता तय करने वाली अहम कुंजी हैं। असरदार और उत्पादक लोग खुद को इस बात के लिए अनुशासित कर लेते हैं कि वे सबसे महत्वपूर्ण कार्य से ही दिन कि शुरुआत करें। मैं हूँ समय बता देता हूं, किसी के लिए भी मैं नहीं रुकता हूँ। वक़्त कभी नहीं रुकता सदैव चलता रहता है। कभी खुशी दे जाता है, तो कभी ग़म। “किसी महत्वपूर्ण कार्य को शुरू और पूरा करने के बारे में सोचने भर से ही आप प्रेरित हो जाते हैं। इससे आपको टालमटोल छोड़ने में मदद मिलती हैं।”

—————

यह कविता (समय।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

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आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____Copyright ©Kmsraj51.com  All Rights Reserved.____

Filed Under: 2022-KMSRAJ51 की कलम से, पूनम गुप्ता जी की कविताएं।, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: author poonam gupta, Poem On Time in Hindi, poet poonam gupta, पूनम गुप्ता की कविताएं, वक्त पर हिंदी कविता, समय रुकता नहीं कविता

बसंत बहार।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बसंत बहार। ♦

आयी देखो बसंत बहार,
खिली खिली सुहानी धूप।
सबका ह्रदय खिल खिल जाए,
सूरज किरणें पड़ती है धरा पर।

पीली फसलों को लहराए,
चारों और बसंत इठलाये।
प्रकृति भी अनेक रंग दिखाये,
आयी बसंत बहार मस्तानी।

पेड़ पर भी नये पत्तो का हुआ सर्जन,
भवरे भी फूलों पर मंडराए।
कोयल भी मीठी तान सुनाए,
बसंत अपने रंग रूप दिखाये।

सब तरफ हरियाली छाए।
नदियां, झरना कल कल बहता जाए।

शीत भी जैसे कम हो जाए,
पीला पीला रंग ओढे प्रकृति।
खेतों में छाए पीली सरसों।
देखकर सब मंत्र मुग्ध हुए।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

—————

  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — वसंत ऋतु में प्रकृति की सुंदरता देखते ही बनती है। क्या फूल, क्या भवरो का फूलों पर मंडराना, क्या पतझड़ के बाद नए पत्तो का आना, पक्षियों का यूँ मस्त चहचहाना चारों ओर खुशिया ही खुशिया। आयी देखो बसंत बहार, खिली खिली सुहानी धूप। इस वसंत ऋतु में प्रकृति के साथ साथ सबका ह्रदय खिल खिल जाए, सूरज किरणें पड़ती है धरा पर। कोयल भी अपनी मीठी तान सुनाए, बसंत अपने रंग रूप दिखाये। सब तरफ हरियाली छा जाये। नदियां, झरना भी कल कल बहता जाए।

—————

यह कविता (बसंत बहार।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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बहू या बेटी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बहू या बेटी। ♦

बहू को बेटी समझा जाये,
तो क्या इसमें गलत है।
जब माँ पिता के घर से आई,
वह एक अंजान घर में।

आकर वों नये लोंगो के,
बीच आकर जीवन की,
नयी शुरुआत करती है।
सारे परिवार की पसंद,
नापसंद का ख्याल रखती है।

किसको कब किस चीज,
की जरूरत या तकलीफ है।
सबके लिए वो त्याग करती है,
फिर हम उसको बहू मानते है।

बहू को अगर बेटी मान ले,
तो उसको कभी अपने घर,
की कभी याद नहीं आएगी।
और उसका मान भी बढ़ेगा।

उसको भी अहसास होगा,
वो भी गर्व से कह सकती है,
मैं घर की बहू नहीं बेटी हूँ।
बहू को बेटी समझा जाये,
यह रीति भी नयी होंगी।

तुम पराये घर से आयीं हो,
क्या समझोगी हमारा दुख।
यह कहकर चुप कराया जाता है।
बहु को बेटी समझ कर देखो,
वो भी किसी की बेटी है।

हम उसको माँ सा प्रेम देगें,
वो भी आपको माँ मानेगी।
आपका कहना भी सुनेंगी,
बहु से बेटी बनने में देर न लगेगी।

आपके मान सम्मान को रखेगी,
बहु को भी बेटी सा प्रेम मिले।
फिर क्यो पीहर की याद करें,
जो भी परेशानी हो उसको,
सासू माँ को ही बताएगी।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

—————

  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — बहू को बेटी समझा जाये, तो क्या इसमें गलत है। विवाह के बाद जब माँ पिता के घर से आई, वह एक अंजान घर में। सभी नये लोंगो के बीच आकर जीवन की नयी शुरुआत करती है वह, परिवार के सभी सदस्यों के पसंद – नापसंद का सदैव ही ख्याल रखती है वह। सभी के सुख के लिए तकलीफ सहती त्याग करती वह। बहू को जब हम बेटी मान ले, तो उसको कभी भी अपने घर की याद नहीं आएगी, और उसका मन भी लगा रहेगा। उसको भी अच्छा लगेगा, वो भी गर्व से कह सकती है, मैं इस घर की बहू नहीं बेटी हूँ। जब हम उसको माँ सा प्रेम देगें, वो भी आपको माँ मानेगी। आपका कहना भी सुनेंगी, बहु से बेटी बनने में देर न लगेगी। सदैव ही आपके मान सम्मान का ख्याल रखेगी, बहु को भी बेटी सा प्रेम जब मिले, फिर क्यो पीहर की याद करें। जो भी परेशानी हो उसको, सासू माँ को ही बताएगी।

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यह कविता (बहू या बेटी।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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