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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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poet poonam gupta

हमारे संस्कार हमारी धरोहर।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ हमारे संस्कार हमारी धरोहर। ♦

हमारी संस्कार हमारी धरोहर ही हमारा गौरव है,
इससे ही हमारी पहचान और अस्तित्व है।

हमारे संस्कार ही हमारे आदर्श और गुणों की खान है,
रीत रिवाज और संस्कार ही परिवार की पहचान है।

नीति, धर्म, परोपकार ही हमारे झलकते संस्कार है,
बचपन से मृत्यु तक साथ संस्कार रहते है।

सभी पर्व, त्यौहारों पर पूवर्जों के बनायें नियम भी संस्कार है,
जिन्हें मिलते अच्छे संस्कार वो सबसे अच्छा इंसान है।

सोलह संस्कार, मानव के जीवन में होते है,
वैदिक हमारे संस्कार मृत्युपरान्त भी होते है।

संस्कार ही हमारी आन, बान और सम्मान है,
संस्कार ही सनातन धर्म का मूल आधार है।

ऋषि मुनियों के बनायें हुए हमारे संस्कार और नियम है,
जो हमको सिखाते सही राह पर चलना है।

संस्कार हमारे लिए शिरोधार्य और अमूल धरोहर है,
जो बने हमारे हित और भवसागर से तारने के लिए है।

ये पवित्र गंगाजल के समान और इनमें गुण बहुत सारे है,
हमारे संस्कार हमारी धरोहर विश्व की पहचान है।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

—————

  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — सनातन धर्म में संस्कारों का विशेष महत्व है। इनका उद्देश्य शरीर, मन और मस्तिष्क की शुद्धि और उनको बलवान करना है जिससे मनुष्य समाज में अपनी भूमिका आदर्श रूप मे निभा सके। संस्कार का अर्थ होता है-परिमार्जन-शुद्धीकरण। हमारे कार्य-व्यवहार, आचरण के पीछे हमारे संस्कार ही तो होते हैं। जन्म से लेकर मृत्यु तक व्यक्ति के सोलह (16) संस्कारों में शामिल हैं: गर्भाधान संस्कार, पुंसवन, सीमांतोयंत्रन, जातकर्म, नामकरण, निष्क्रमण, अन्नप्राशन, चूड़ाकर्म, कर्णवेध, विद्यारम्भ, उपनयन, वेदारम्भ, केशान्त, समावर्तन विवाह सरकार, अंत्येष्टि।

—————

यह कविता (हमारे संस्कार हमारी धरोहर।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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नवरात्रि।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ नवरात्रि। ♦

आया नवरात्रि का त्यौहार,
घर-घर में घट स्थापना हो रही है।
सजा माता का दरबार,
माता की पूजा अर्चना हो रही है।

सिंह पर सवार माता आयी,
भक्तों की सुनने पुकार।
छायी चारों तरफ खुशियां,
आयी मंदिरों में हो रही जय जयकार।

जो भी आता माँ के द्वार,
भक्ति श्रद्धा से शीश नवाता।
खाली झोली भरती माता,
मन चाहें मुरादें पाता।

माँ की महिमा को सबने गाया,
दुर्गा माँ ने पार लगाया।
माँ के चरणों में सुख,
समृद्धि, प्रेम का वरदान पाया।

कर लो माँ की नवरुपों में पूजा,
अर्चन भक्ति का उत्सव आया।
संसार मे माँ से बढ़कर,
कोई नहीं और पाया।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — आज हम बात कर रहे हैं हमारे देश के सनातन धर्म (हिन्दू धर्म) द्वारा मनाये जाने वाले नवरात्रि त्यौहार की, इस त्यौहार को बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। नवरात्रि में लोग 9 दिन व्रत रखते हैं और आखिरी दिन मां की पूजा करके नौ कन्याओं को भोजन कराते हैं। यह त्यौहार अलग-अलग जगह पर अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। काफी जगह इस दिन लोग गरबा और डांडिया भी खेलते हैं। यह त्यौहार असत्य पर सत्य की जीत को दर्शाता है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि साल में दो बार मनाया जाता है। नवरात्रि नौ दिनों के लिए निरंतर चलता है जिसमे देवी माँ के अलग-अलग स्वरूपों की लोग भक्ति और निष्ठा के साथ पूजा करते है। भारत में नवरात्रि अलग-अलग राज्यों में विभिन्न तरीको और विधियों के संग मनाई जाती है।

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यह कविता (नवरात्रि।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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भारत मेरा देश।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ भारत मेरा देश। ♦

देश हमारा हिंदुस्तान,
हमें जान से प्यारा है।
तिंरगा हमारी शान है,
ये हिंदुस्तान हमारा है।

कृष्ण राम तुलसी जैसे,
महापुरुषो की तपोभूमि।
धन्य है माटी हिंदुस्तान की,
ये हिंदुस्तान हमारा है।

सुभाष, भगत, गांधी जैसे,
वीर और निडर सपूत दिए।
सीने पर गोली खाकर,
ये आजादी दिलवायी हमें।
शहीद हुए वीर जहाँ पर,
ये मेरा हिंदुस्तान है।

सरहद पर बैठे सीना ताने,
दुश्मन के आगे सर न झुकाए।
बैठे है देश के रक्षक बनकर,
ऐसे वीरो को सलाम है,
ये मेरा हिंदुस्तान है।

यहां सब रहते मिलजुलकर,
एकता भाई चारे की मिसाल है।
गुरुग्रंथ साहिब गीता और कुरान है,
सारे विश्व मे मेरा भारत महान है।

सत्य अहिसा प्रेम का ये,
विश्व शांति का दूत है।
सबसे प्यारा सबसे निराला,
ये मेरा हिंदुस्तान है।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — तिरंगा है यह खिलौना नहीं, हर रंग का लहदा भाव निराला है । शौर्य, वीरता, शान्ति, समृद्धि, मध्य चक्र प्रतीक समय का डाला है। यहां के बच्चों के अंदर जन्म से ही वीर रस भरा होता है, जिसे बस निखारने की जरूरत होती हैं। भारत का शौर्य अद्भुत व बहुत ही अनुपम हैं, दुश्मन का संस्कार भी करें अदब से गर तोड़े दम। पीठ पर कभी भी न करें वार यहाँ के वीर जवान। यह धरती है उन वीरों की जो देश पर होते है सदैव ही कुर्बान। तहे दिल से नमन है माँ भारती के हर उन शूरवीर सपूतों को जिनके बलिदान के बदले हमे आज़ादी मिली। जो आये थे यहां व्यापार करने, व्यापार के बहाने हमे अपना गुलाम बनाकर खूब मनमानी किया। उन्होंने हम पर बहुत ही निर्दयता पूर्वक अत्याचार किया, और हमें खूब लुटा। हमें कभी भी नहीं भूलना चाहिए उन शूरवीर सपूतों के बलिदान को, जिनके बलिदान के बदले हमे आज़ादी मिली। शत-शत नमन है उन वीर सपूतों की जननी को जिन्होंने अपने लाल को माँ भारती की रक्षा के लिए ख़ुशी – ख़ुशी समर्पित किया। जय हिन्द – जय भारत।

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यह कविता (भारत मेरा देश।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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माँ मेरी प्यारी माँ।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ माँ मेरी प्यारी माँ। ♦

मेरी प्यारी माँ भगवान की अनमोल कृति है,
मेरी प्यारी माँ प्यार और त्याग की मूर्ति है।

सृष्टि का आधार मेरी प्यारी माँ है।
प्रकृति का अनुपम तोहफा माँ होती है।

माँ की आँचल छाया में हम सकूँन पाते है,
माँ शक्ति का अवतार और रूप है।

ममता और प्यार की अनवरत धारा,
मेरी प्यारी माँ है स्नेह और कोमल स्पर्श से थपकी।

देती मेरी प्यारी माँ है,
माँ ही हमें संघर्षों से लड़ना सिखाती है।

माँ हम आपके ऋणी है आपने हमें जन्म दिया है,
पाल पोसकर पढ़ाया, लिखाया, संस्कार दिए है।

माँ तुम रूप हो भगवान का जिसने ह्दय में स्थान दिया,
मेरी प्यारी माँ मातृत्व की अनमोल धरोहर है।

माँ जैसा अटूट रिश्ता संसार मे कोई नहीं है,
माँ के चरणों मे हम वंदन और अर्चन करते है।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — माता शब्द में ‘मा’ का अर्थ है ममतामयी तथा ‘ता’ का अर्थ है तारक अर्थात तारनेवाली। माँ इस संसार रूपी भंवर से रक्षा करनेवाली होती है। माँ के स्मरण मात्र से ही एक भावभीनी सुगंध से मन का हर कोना-कोना महक उठता है, सुवासित हो उठता है। माँ के समान कोई भी प्रिय नहीं होता। माँ के कई रूप हैं – वह जननी है मातृ शक्ति है, अम्मा, माई भी है तो आई भी हैं। माँ का महत्व जीवन में क्या हैं उनसे पूछो जिनकी माँ नही हैं।

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यह कविता (माँ मेरी प्यारी माँ।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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बेखबर जिंदगी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बेखबर जिंदगी। ♦

जिंदगी के रंग भी बदलते है,
कभी हम बेखबर जिंदगी से,
अनजान सफर की ओर चल देते है।
जिंदगी में कभी ख़ुशी कभी गम।

जीवन की राह में कभी सहज होते,
हर पल खुशी हो यह जरूरी नहीं।
दुख भी जिंदगी का रूप ही है,
जिंदगी में जो चाहा वो मिले,
ये भी कोई जरूरी नहीं है।

जिंदगी भी एक किताब होती,
जिनके पन्ने हम पढ़ पाते।
कब क्या कैसे होगा घटित,
सबको खबर होती बेखबर जिंदगी की।

खाली हाथ आये जीवन में,
खाली ही हाथ जाना भी है।
फिर क्यो हम भागदौड़ में लग रहे,
कुछ अच्छे कर्म करे जीवन में।

जो हमेशा हमें याद करें,
मोह में बांधकर जिंदगी को।
दुख दर्द को इस पीड़ा को सहते है,
अन्त समय मे जिंदगी बेखबर होती है।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — जो कर्म इंसान करता है वहीं कर्म उसके नाम को इस संसार में जीवित रखते है। इस संसार में सभी खाली हाथ ही आये थे और खाली हाथ ही जाना भी हैं, तो जब तक जीवन हैं अच्छे कार्य ही करें। सदैव ही आपकी यही कोशिश हो की आपकी वजह से कभी भी किसी को किसी भी तरह की कोई तक़लीफ़ न हो। जहां तक हो सके लोगों की मदद करते चले और अच्छा सोचे व अच्छा कार्य करें। एक बात मेरी याद रखें — जिंदगी में किसी से भी स्नेह रखें मोह नहीं, क्योकि जहां मोह होता है वहां बंधन होता है और वही बंधन आपको दर्द देता है। श्रीमद्भागवत गीता के अठारहवें अध्याय में है की “नष्टो मोहः स्मृतिर्लब्धा” अर्थात: जब तक इंसान मोह को नहीं त्यागता है तब तक उसे सुख और सद्गति नहीं मिलती हैं।

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यह कविता (बेखबर जिंदगी।) “पूनम गुप्ता जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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वीर देश हमारा हिंदुस्तान।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ वीर देश हमारा हिंदुस्तान। ♦

देश हमारा हिंदुस्तान,
हमें जान से प्यारा है।
तिंरगा हमारी शान है,
ये हिंदुस्तान हमारा है।

कृष्ण राम तुलसी जैसे,
महापुरुषों की तपोभूमि।
धन्य है माटी हिंदुस्तान की,
ये हिंदुस्तान हमारा है।

सुभाष भगत राजगुरु जैसे,
वीर और निडर सपूत दिए।
सीने पर गोली खाकर वीरो ने,
ये आजादी हमे दिलवायी है।

शहीद हुए वीर जहाँ पर,
ये मेरा हिंदुस्तान है।
सरहद पर बैठे सीना ताने,
दुश्मन के आगे सर न झुकाए।

बैठे है देश के रक्षक बनकर,
ऐसे वीरो को सलाम है।
ये मेरा हिंदुस्तान है,
यहां सब रहते मिलजुलकर।

एकता भाई चारे की मिसाल है।
गुरु ग्रंथ साहिब गीता और कुरान है।

सारे विश्व मे मेरा भारत महान है।
सत्य अहिसा प्रेम का ये,
विश्व शांति का दूत है।
सबसे प्यारा सबसे निराला,
ये मेरा हिंदुस्तान है।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — भारत को महापुरुषों की धरती भी कहा जाता है। यहां पर ऋषि-मुनियों ने जन्म लिया, जिन्होंने वेदों का गान किया तथा उपनिषद् और पुराणों की रचना भी की, यहां श्रीकृष्ण का जन्म हुआ जिन्होंने गीता का ज्ञान देकर विश्व को कर्म का पाठ पढ़ाया। यहीं पर भगवान राम का जन्म हुआ था, जिन्होंने न्यायपूर्ण शासन का आदर्श स्थापित किया। यहीं पर महावीर और बुद्ध ने अवतार लिया जिन्होंने मानव को अहिंसा की शिक्षा दी। यहां पर बड़े-बड़े प्रतापी सम्राट अशोक, चन्द्रगुप्त मौर्य, विक्रमादित्य, महाराणा प्रताप, पृथ्वीराज चौहान, वीर शिवाजी महाराज आदि हुए जिनका नाम विश्व भर में व्याप्त है। लहराए तिरंगा प्यारा जिसकी शान में, गर्व से सिर ऊँचा हो जिसके सम्मान में। मैं रहता वीरों के देश हिंदुस्तान में। यही एकता की परिभाषा हिंदुस्तान में।

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यह कविता (वीर देश हमारा हिंदुस्तान।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ® ———–

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यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

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समय।

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♦ समय। ♦

समय कहता मैं तुम्हारे साथ हूँ,
समय की चाल निरन्तर चलती है।

यह पल में अनेक रूप बदलता,
दुख दर्द और सुख का साथी बनता।

रोज अपने नए रंग, रूप दिखाता,
सब इसकी मर्जी से चलता।

अपना हर पल का महत्व बताता,
ये कभी रुकता नहीं थकता नहीं।

बस निरतंर ही चलता जाता हूँ,
इसके महत्व को अगर समझोगे।

जीवन में अपने लक्ष्य हासिल करोगे,
सारे काम समय पर ही होते।

चाहे हम कितने भी उत्त्सुक हो,
होगा काम समय के आने पर ही।

इसलिए समय के महत्व को समझे,
समय कहता मैं तुम्हारे साथ हूँ।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

—————

  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — एक बात सदैव ही – याद रखें ….. समय का प्रबंधन वास्तव में जीवन का प्रबंधन है। यह दरअसल घटनाओं के क्रम को नियंत्रित करना है। समय का प्रबंधन का अर्थ है, इस बात पर नियंत्रण करना कि आप अगला कार्य कौन सा करेंगे, और आप हमेशा अपना कार्य चुनने के लिए स्वतंत्र होते हैं। महत्वपूर्ण और महत्वहीन के बीच विकल्प चुनने कि आपकी काबिलियत, जिंदगी और काम-धंधे में आपकी सफलता तय करने वाली अहम कुंजी हैं। असरदार और उत्पादक लोग खुद को इस बात के लिए अनुशासित कर लेते हैं कि वे सबसे महत्वपूर्ण कार्य से ही दिन कि शुरुआत करें। मैं हूँ समय बता देता हूं, किसी के लिए भी मैं नहीं रुकता हूँ। वक़्त कभी नहीं रुकता सदैव चलता रहता है। कभी खुशी दे जाता है, तो कभी ग़म। “किसी महत्वपूर्ण कार्य को शुरू और पूरा करने के बारे में सोचने भर से ही आप प्रेरित हो जाते हैं। इससे आपको टालमटोल छोड़ने में मदद मिलती हैं।”

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यह कविता (समय।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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बसंत बहार।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बसंत बहार। ♦

आयी देखो बसंत बहार,
खिली खिली सुहानी धूप।
सबका ह्रदय खिल खिल जाए,
सूरज किरणें पड़ती है धरा पर।

पीली फसलों को लहराए,
चारों और बसंत इठलाये।
प्रकृति भी अनेक रंग दिखाये,
आयी बसंत बहार मस्तानी।

पेड़ पर भी नये पत्तो का हुआ सर्जन,
भवरे भी फूलों पर मंडराए।
कोयल भी मीठी तान सुनाए,
बसंत अपने रंग रूप दिखाये।

सब तरफ हरियाली छाए।
नदियां, झरना कल कल बहता जाए।

शीत भी जैसे कम हो जाए,
पीला पीला रंग ओढे प्रकृति।
खेतों में छाए पीली सरसों।
देखकर सब मंत्र मुग्ध हुए।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — वसंत ऋतु में प्रकृति की सुंदरता देखते ही बनती है। क्या फूल, क्या भवरो का फूलों पर मंडराना, क्या पतझड़ के बाद नए पत्तो का आना, पक्षियों का यूँ मस्त चहचहाना चारों ओर खुशिया ही खुशिया। आयी देखो बसंत बहार, खिली खिली सुहानी धूप। इस वसंत ऋतु में प्रकृति के साथ साथ सबका ह्रदय खिल खिल जाए, सूरज किरणें पड़ती है धरा पर। कोयल भी अपनी मीठी तान सुनाए, बसंत अपने रंग रूप दिखाये। सब तरफ हरियाली छा जाये। नदियां, झरना भी कल कल बहता जाए।

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यह कविता (बसंत बहार।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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बहू या बेटी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बहू या बेटी। ♦

बहू को बेटी समझा जाये,
तो क्या इसमें गलत है।
जब माँ पिता के घर से आई,
वह एक अंजान घर में।

आकर वों नये लोंगो के,
बीच आकर जीवन की,
नयी शुरुआत करती है।
सारे परिवार की पसंद,
नापसंद का ख्याल रखती है।

किसको कब किस चीज,
की जरूरत या तकलीफ है।
सबके लिए वो त्याग करती है,
फिर हम उसको बहू मानते है।

बहू को अगर बेटी मान ले,
तो उसको कभी अपने घर,
की कभी याद नहीं आएगी।
और उसका मान भी बढ़ेगा।

उसको भी अहसास होगा,
वो भी गर्व से कह सकती है,
मैं घर की बहू नहीं बेटी हूँ।
बहू को बेटी समझा जाये,
यह रीति भी नयी होंगी।

तुम पराये घर से आयीं हो,
क्या समझोगी हमारा दुख।
यह कहकर चुप कराया जाता है।
बहु को बेटी समझ कर देखो,
वो भी किसी की बेटी है।

हम उसको माँ सा प्रेम देगें,
वो भी आपको माँ मानेगी।
आपका कहना भी सुनेंगी,
बहु से बेटी बनने में देर न लगेगी।

आपके मान सम्मान को रखेगी,
बहु को भी बेटी सा प्रेम मिले।
फिर क्यो पीहर की याद करें,
जो भी परेशानी हो उसको,
सासू माँ को ही बताएगी।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — बहू को बेटी समझा जाये, तो क्या इसमें गलत है। विवाह के बाद जब माँ पिता के घर से आई, वह एक अंजान घर में। सभी नये लोंगो के बीच आकर जीवन की नयी शुरुआत करती है वह, परिवार के सभी सदस्यों के पसंद – नापसंद का सदैव ही ख्याल रखती है वह। सभी के सुख के लिए तकलीफ सहती त्याग करती वह। बहू को जब हम बेटी मान ले, तो उसको कभी भी अपने घर की याद नहीं आएगी, और उसका मन भी लगा रहेगा। उसको भी अच्छा लगेगा, वो भी गर्व से कह सकती है, मैं इस घर की बहू नहीं बेटी हूँ। जब हम उसको माँ सा प्रेम देगें, वो भी आपको माँ मानेगी। आपका कहना भी सुनेंगी, बहु से बेटी बनने में देर न लगेगी। सदैव ही आपके मान सम्मान का ख्याल रखेगी, बहु को भी बेटी सा प्रेम जब मिले, फिर क्यो पीहर की याद करें। जो भी परेशानी हो उसको, सासू माँ को ही बताएगी।

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यह कविता (बहू या बेटी।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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ईश्वर।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ ईश्वर। ♦

जीवन तुमने दिया है प्रभु,
गिरेंगे तो संभालो तुम्हीं।
पथ अगर भटक जाए कोई,
तो सही डगर दिखायो तुम्हीं।

नेक राह पर काटे उगाए कोई,
उसको गलत सही बताओगे तुम्हीं।
आपने दिया जीवन मानव का,
इसको मावन सेवा में लगाने का।

मार्गदर्शन भी कराओगे तुम्हीं,
किस पथ किस रूप में मदद मांगे।
कोई हो संदेह तो दूर करोगे तुम्हीं,
कोई दुख दर्द में हों प्रभु।

उसको देना अपनी दया,
आप ही करुणा बरसाने वाले।
जीवन भी हमारा आपके लिए,
जो चाहे वो बना दो हमें।

हम बहती नदिया के किनारे,
जहाँ देगे आप ही सहारा।
आप ही दुनियां के रखवाले,
सबको एक नजर से देखने वाले।

आप ही दुनियां के पालनहार,
दुख और कष्ट से उबारने वाले।
चरणों मे कोटि कोटि वंदन,
सब प्रभु की महिमा गाते है।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह जीवन प्रभु का दिया हुआ है, हे प्रभु जब भी हम गिरेंगे तो संभालो तुम्हीं। जीवन में कभी अगर पथ भटक जाए कोई, तो सही मार्ग दिखायो तुम्हीं। सत्य व अच्छे के साथ अगर कोई बुरा करे तो, उसका फल उन्हें देना तुम्हीं। आपने दिया है जीवन मानव तन का, इसको मावन सेवा में ही लगाना है। हे प्रभु जीवन के हर मोड़ पर चाहे सुख हो या दुख दर्द, सदैव मार्गदर्शन करते रहना तुम्हीं। आप ही करुणा बरसाने वाले, करुणा के सागर, ये जीवन भी हमारा आपके लिए जो चाहे वो बना दो हमें। इस संसार रूपी बहती नदिया के किनारे हम, जहाँ देगे आप ही सहारा प्रभु। आप ही दुनियां के रखवाले है, सबको एक नजर से देखने वाले है। आप ही इस दुनियां के पालनहार हो प्रभु, सदैव ही दुख और कष्ट से उबारने वाले। हे प्रभु आपके चरणों मे कोटि कोटि वंदन।

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यह कविता (ईश्वर।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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