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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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You are here: Home / Archives for विनोद वर्मा की कविताएं

विनोद वर्मा की कविताएं

मित्र।

Kmsraj51 की कलम से…..

Dost or friends | मित्र।

👉 सच्ची मित्रता पर कविता – निश्छल प्रेम और अपनत्व का सुंदर बंधन

✨“जहां निश्छल प्रेम खिलता है, वहीं सच्ची मित्रता जन्म लेती है। पढ़िए अपनत्व और विश्वास से भरी यह कविता ✨

निश्छल प्रेम जहां है मिलता
वहीं मित्रता रूपी फूल है खिलता।
हरदम अपनत्व जताता
मुसीबत में सबसे पहले याद आता।

कभी भी आंखें मैली नहीं करता
याद आए हाजरी भी जरूर भरता।
दिल से ये रिश्ता है बनता
कभी भी दिमाग दरम्यान नहीं आता।

जब भी मित्रता को देखता
कृष्ण सुदामा की याद जरूर दिलाता।
पद ,प्रतिष्ठा सब भूल जाता
मित्र जब भी नजर है आता।

जब मित्र कोई है बनता
जात, धर्म,उंच नीच नहीं देखता।
मित्रता है एक ऐसा उपहार
नहीं पहुंचता हर किसी के द्वार।

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — मित्रता एक ऐसा अनमोल रिश्ता है जो जीवन के हर सुख-दुख में हमारे साथ खड़ा रहता है। सच्चा मित्र वही होता है जो बिना किसी स्वार्थ के हमारे चेहरे की मुस्कान लौटाने का प्रयास करे। कृष्ण-सुदामा जैसी मित्रता आज भी आदर्श मानी जाती है, क्योंकि उसमें प्रेम, सम्मान और निष्ठा का अद्भुत संगम था। इसलिए जीवन में यदि एक सच्चा मित्र मिल जाए, तो समझिए भगवान का दिया सबसे बड़ा उपहार मिल गया।

    👉 यह कविता सच्ची मित्रता और निश्छल प्रेम की भावना को दर्शाती है। जानिए कैसे सच्चा मित्र हर परिस्थिति में साथ देता है और क्यों मित्रता जीवन का सबसे अनमोल उपहार मानी जाती है।

  • ✨“जहां निश्छल प्रेम खिलता है, वहीं सच्ची मित्रता जन्म लेती है।” ✨
    ✨ “सच्ची मित्रता वही जो बिना स्वार्थ के साथ निभे” ✨
    ✨ “मित्रता एक ऐसा रिश्ता जो दिल से बनता है, दिमाग से नहीं।” ✨

—————

यह कविता (मित्र।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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आखिर क्यों।

Kmsraj51 की कलम से…..

Aakhir Kyon | आखिर क्यों।

“मां-बाप की सेवा: संतान का सर्वोच्च कर्तव्य | एक भावनात्मक कविता और जीवन संदेश”

पहले संतान होने के लिए रोते
होने पर उन्हें पाल पोस कर बड़ा करते।

अपना पेट भूखा रख लेते
संतान की ख्वाहिशें पूरी करते।

संस्कार भी उनमें खूब भरते
पर समय के साथ उन्हें भी वे है हरते।

मां बाप जैसे जैसे बुढ़ापे की ओर चलते
संतान के तेवर भी हौले हौले हैं बदलते।

कोई अपने को संभाल लेते
मां बाप को अपने साथ है रखते।

कईयों ने खुद को बदला इस क़दर
मां बाप ठोकरें खाने लगे दर दर।

बुढ़ापे से दुखी कोई आत्महत्या कर लेते
तो कोई वृद्धाश्रम को चले जाते।

पूत कपूत हो गया तो क्या
लक्ष्मी रुपी बहू ने अपना फर्ज क्यों नहीं निभाया।

बहू भी तो उन्हें मम्मी पापा है बोलती
फिर उन्हें वृद्धाश्रम जाने से क्यों नहीं रोकती।

मां बाप जीवन में मिलते हैं एक बार
इनकी सेवा बिन नहीं होगा कभी उद्धार।

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — माता-पिता हमारे जीवन के सबसे बड़े वरदान होते हैं। उन्होंने हमें न केवल जन्म दिया, बल्कि जीवन की हर मुश्किल में हमारा साथ निभाया। आज जब वे बुढ़ापे में सहारे की उम्मीद करते हैं, तो हमारा कर्तव्य है कि हम उनका सम्मान और सेवा करें। आधुनिक जीवन की व्यस्तता और स्वार्थ ने जहां रिश्तों की गहराई को कमजोर किया है, वहीं यह याद रखना जरूरी है कि मां-बाप की सेवा ही सच्ची भक्ति है। वृद्धाश्रम उनका स्थान नहीं, बल्कि उनके बच्चों के हृदय होने चाहिए। अगर हर संतान यह सोच ले कि अपने माता-पिता की देखभाल करना उसका सबसे बड़ा धर्म है, तो समाज में प्रेम, संस्कार और मानवीयता कभी खत्म नहीं होगी।

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यह कविता (आखिर क्यों।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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समय।

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Time | समय।

समय पर कविता: जीवन का सबसे कीमती खज़ाना – एक प्रेरणादायक हिंदी कविता

समय — जो हर किसी के जीवन का सबसे बड़ा शिक्षक है। यह किसी के लिए नहीं रुकता, न धनवान के लिए, न निर्धन के लिए। जो इसे पहचान लेता है, वही सफलता की राह पर आगे बढ़ता है, और जो इसे व्यर्थ गंवा देता है, वह पछतावे में जीवन बिताता है। प्रस्तुत है एक भावनात्मक और प्रेरणादायक कविता जो हमें याद दिलाती है कि हर पल अनमोल है, और इसे संजोना ही जीवन की सच्ची साधना है।

पल पल बीतता जाए
ये समय है कभी किसी
के बस में न आए।

न कोई अपना न कोई पराया
जिसने अपना समझा वही
वश में कर पाया।

दिन रात चलता रहता
कभी किसी का इंतजार
नहीं करता।

कब सुबह हुई कब हो गई शाम
ये समय है इसके नहीं चुका
पाएंगें दाम।

धनी निर्धन का नहीं
कोई मलाल
धनी वही जिसने लिया
इसे सम्भाल।

कब पैदा हुए, कब हुए जवान
कब जवानी ढली
कब आया बुढ़ापा
चेत नहीं पाया इंसान।

पछतावे बिन नहीं कोई
विकल्प
व्यर्थ न गंवाएं,लें
आज ही ये संकल्प।

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • Conclusion : “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — समय एक ऐसी धारा है जो कभी रुकती नहीं — यह निरंतर आगे बढ़ती रहती है। यह हमें अवसर भी देती है और परीक्षा भी लेती है। जो व्यक्ति समय का सम्मान करता है, वह जीवन में हर मुकाम हासिल कर सकता है। इस कविता का सार यही है कि हर क्षण का सदुपयोग करें, वर्तमान को जीएं और भविष्य को बेहतर बनाएं।

    याद रखें — “समय को जीतने वाला ही सच्चा विजेता होता है।”

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यह कविता (समय।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्रीमती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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काले बादल।

Kmsraj51 की कलम से…..

Dark Clouds | काले बादल।

काले बादल कहाँ से तुम हो आते
अब तो कारनामे तुम्हारे छुपाए नहीं जाते।

बेवक्त, बेमौसम तुम हो नीर बरसाते
सड़क, मोहल्ला, गली सब जलमग्न हो जाते।

नदी नाले अपनी सीमा को भूल जाते
कहीं न कहीं आपदा का कहर जरूर बरपाते।

बच्चा, बूढ़ा नौजवान इसकी भेंट है चढ़ जाते
तो कहीं पशु भी अपने को बचा नहीं पाते।

बरसते बादल तो कई वर्षों से हैं देखे
अबकी बार जो बरसे नहीं मिले कहीं ऐसे लेखे।

तीन महीने लगातार तुम रहे बरसते
बिन तुम्हारे एक दिन देखने को रहे तरसते।

बरसात को एकदम सर्दी से जोड़ दिया
तुम्हें याद नहीं रहा कि किसान ने
अभी खेतों से अनाज इकट्ठा नहीं है किया।

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवि ने इस कविता में अत्यधिक वर्षा और उसके दुष्परिणामों को मार्मिक रूप से प्रस्तुत किया है। वह काले बादलों से प्रश्न करता है कि वे अब क्यों बेमौसम और बेवक्त वर्षा करने लगे हैं। उनकी अनियंत्रित बारिश से सड़कें, मोहल्ले और नालियां जलमग्न हो जाती हैं, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। कवि बताता है कि ऐसी बारिश में बच्चे, बूढ़े, नौजवान और पशु तक संकट में पड़ जाते हैं, और हर जगह आपदा का कहर दिखाई देता है। पहले भी बारिश होती थी, पर अबकी बार की वर्षा अत्यधिक और असामान्य रही, जो लगातार तीन महीनों तक थमी नहीं।
  • अंत में कवि व्यंग्यात्मक लहजे में कहता है कि इस बारिश ने मौसम के क्रम को भी बिगाड़ दिया, क्योंकि बारिश खत्म होते ही सर्दी शुरू हो गई, जबकि किसान अभी अपने खेतों से अनाज इकट्ठा भी नहीं कर पाया था।

    यह कविता प्रकृति के असंतुलन और जलवायु परिवर्तन के खतरों पर चेतावनी देती है।

—————

यह कविता (काले बादल।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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सुबह का संदेश।

Kmsraj51 की कलम से…..

Subah Ka Sandesh | सुबह का संदेश।

सुबह सुबह की एक
आदत सी लग गई
अपनों को संदेश भेजना
बस यही मन में घर कर गई।

अपना जो समझते वो जबाब
भी देते
कुशल क्षेम भी पूछ लेते।

कुछ इसे पढ़ना मात्र
औपचारिकता समझते
संदेश पढ़कर
चुपचाप बैठ है जाते।

कई तो
संदेश रोज पढ़ते
पर जबाब
एक दिन नहीं देते।

अगर कोई
अपना समझकर रोज
याद है करता
उसको याद भरा संदेश
भेजने से कुछ नहीं घटता।

दोस्तों ज़िन्दग़ी
बड़ी लम्बी नहीं
अपनों की याद आ है
जाती गर मन में हो अपनापन कहीं।

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  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवि ने इस कविता में अपनों के प्रति सच्चे संबंधों और भावनात्मक जुड़ाव को अभिव्यक्त किया है। वह कहता है कि हर सुबह अपने प्रियजनों को संदेश भेजना उसकी एक प्यारी आदत बन गई है। कुछ लोग इस संदेश का उत्तर देकर स्नेह और अपनापन जताते हैं, जबकि कुछ लोग इसे सिर्फ औपचारिकता मानकर अनदेखा कर देते हैं। कवि इस व्यवहार से निराश नहीं होता, बल्कि यह संदेश देता है कि अगर कोई सच्चे मन से याद करता है, तो उसे संदेश भेजने से कुछ नहीं घटता, क्योंकि अपनों को याद करना और उन्हें स्नेह जताना ही जीवन का असली अर्थ है।
  • अंकविता के अंत में कवि कहता है कि ज़िन्दगी बहुत लंबी नहीं होती, इसलिए जब मन में अपनापन हो, तो उसे व्यक्त करने में देर नहीं करनी चाहिए — यही सच्चे रिश्तों की खूबसूरती है।

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यह कविता (सुबह का संदेश।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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हिन्दी भाषा।

Kmsraj51 की कलम से…..

Hindi Bhasha | हिन्दी भाषा।

Hindi Day is celebrated in India to commemorate the date 14 September 1949 on which a compromise was reached—during the drafting of the Constitution of India—on the languages that were to have official status in the Republic of India.

जो हिन्दी भाषा से नहीं होगा परिचित।
उसके लिए नहीं है हमारे पास कोई इज्जत।
हैलो हाय कहने वालो एक बार फिर सुन लो।
अपने मन में हिन्दी भाषा के विचार बुन लो।

हमने सुना था कि बच्चों को हिन्दी भाषा पढ़ाई जाती है।
मगर आज पैदा होते ही विदेशी भाषा सिखाई जाती है।
विदेशी भाषा पढ़ने वालों ने कर दिया एक नया काम।
थोड़ी बहुत हिन्दी भाषा बोलने वालों का जीना हो गया हराम।

आज हिन्दी भाषा का नहीं है उतना स्थान।
फिर भी लोगों के दिल में है कुछ अरमान।
आज विदेशों में भी लोग हिन्दी बोला करते हैं।
फिर हम हिन्दी बोलने से क्यों शरमाते है।

♦ विनोद वर्मा जी / जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कविता में लेखक हिन्दी भाषा के महत्व को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहे हैं। वे इसके लिए यह कह रहे हैं कि हिन्दी भाषा को बढ़ावा देना आवश्यक है, और लोगों को यह बदलाव लाने के लिए अपने मन में हिन्दी के विचार बुनने की आवश्यकता है। कविता में यह भी कहा गया है कि विदेशी भाषा की पढ़ाई के बावजूद हिन्दी भाषा के प्रति लोगों की आकर्षण और समर्थन बढ़ गए हैं, और इसका सबसे बड़ा उदाहरण है कि अब विदेशों में भी लोग हिन्दी बोलते हैं, जबकि भारत में ही हिन्दी का महत्व कम हो गया है। आखिर में, कविता लोगों को हिन्दी का समर्थन देने की ओर प्रोत्साहित कर रही है और उन्हें शरम करने की जरूरत नहीं है।

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यह कविता (हिन्दी भाषा।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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चंद्र विजय।

Kmsraj51 की कलम से…..

Chandra Vijay | चंद्र विजय।

आज विक्रम चंद्रमा पर,
सुरक्षित उतर आया।
भारत का चंद्रयान मिशन 3
सफल हो पाया।

जिस मिशन को पूरा करने में,
बड़ी-बड़ी शक्तियां रही असफल।
भारतीय वैज्ञानिकों ने आज तिरंगा,
फहराकर किया सफल।

चंद्रमा के अब
भारत जान पाएगा राज।
खुशियों का माहौल
बना है पुरे भारत में आज।

♦ विनोद वर्मा जी / जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में व्यक्त किया गया है कि चंद्रमा के स्पेस मिशन के माध्यम से भारतवासियों ने अपने वैज्ञानिक और तकनीकी योगदान के साथ दुनिया के स्तर पर अपनी महत्वपूर्ण पहचान बनाई है। वे चार देशों को संदर्भित कर रहे हैं, जो चंद्रमा पर मानव अभियान का आयोजन कर रहे हैं। हम संसार के उस देश के गौरवशाली नागरिक हैं, जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सबसे पहले पहुंचे है। कविता का समापन भारत के वैज्ञानिक प्रगति को और उनके अंतरिक्ष मिशन को संकेतित करता है, जो दुनिया भर के लोगों की नजरों में होगा।

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