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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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You are here: Home / Archives for author Satish Shekhar Srivastava ‘Parimal’

author Satish Shekhar Srivastava 'Parimal'

सृजनहार माँ और गुरु।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ सृजनहार माँ और गुरु। ♦

ब्रह्मांड की दो अनुपम कृति,
इक जननी तो इक गुरू दोनों हैं सृजनहार।

श्रद्धा विश्वास भक्ति और समर्पण की मिसाल,
आकार संस्कार से बांधे धर्म-कर्म के सृजनहार।

शक्ति सामर्थ्य सदृश्य संसार,
साकार पारब्रह्म के समान।

ज्ञान विद्या जीवंतता कल्याण,
परम पद आलंभ के चर-सर्वशक्तिमान।

ज्योति सद्वृत्ति नीरद गान,
अनन्य अद्भुत माधुर्य का मिश्रित वरदान।

अध्येता सम-जड़ता अविदित दर्प कुसुम समान,
गुरू सूक्तद्रष्टा धात्री जगदम्बिका समान।

प्रदीप्त आत्मज्ञान की कान्ति-सौरभ गान,
गुरू और मातु हैं दृग उर्वी पुष्कर समान।

हम थे निर्बुद्धि मुर्च्छित मृण प्रस्तर समान,
परस प्राप्ति जब मिली हम हुये आकृति समान।

मातु और गुरू हैं उदधि उर्मि अमर्त्य वसुंधरा समान,
शत-शत नमन है इन्हें, जो हैं रत्नगर्भा अंबुनिधि व्योम समान।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी — जिला–सिंगरौली , मध्य प्रदेश ♦

—————

  • “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल`“ जी ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — इस संसार में माँ और गुरु की जगह कोई भी नही ले सकता। जहां माँ जन्म देने के साथ साथ प्रथम गुरु है और सदैव ही अपने बच्चे के सर्वागीण विकास के लिए तत्पर रहती है। वही एक सच्चा गुरु उसे सदैव ही सन्मार्ग पर चलकर मर्यादा पुरुषोत्तम ज्ञान व ध्यान से भरपूर जीवन जीने की कला सीखाता है। माँ और गुरु सदैव ही जीवन के हर क्षेत्र में वृद्धि चाहते है, उन्नत और प्रगतिशील जीवन के सूत्रधार है दोनों।

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यह कविता (सृजनहार माँ और गुरु।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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Filed Under: 2021-KMSRAJ51 की कलम से, सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी की कविताये।, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: author Satish Shekhar Srivastava 'Parimal', poet Satish Shekhar Srivastava 'Parimal', Satish Shekhar Srivastava 'Parimal' poems, कवि‍ताएँ, गुरु के लिए दो शब्द, गुरु के लिए सुविचार, गुरु के लिए स्टेटस, गुरु पर कविता हिंदी में, गुरु पर कोटेशन, माँ के लिए कुछ शब्द, माँ पर कविता, माँ पर कविता और शायरी, सतीश शेखर श्रीवास्तव - परिमल, सृजनहार माँ और गुरु

तनया।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ तनया। ♦

तनया (बेटी)

निकाय का आधार है तनया,
आत्मज की पहचान है तनया।
जगत जननी की जान है तनया,
बेटियों का सर्वनाम है तनया।

धर्म की रूपरेखा है तनया,
संस्कृति की प्रथम जान है तनया।
सृष्टि का आधार है तनया,
माँ की अनुपम कृति है तनया।

समाज की डोर है तनया,
संस्कृति की धरोहर है तनया।
नंदिनी उपनाम है तनया,
ब्रहाण्ड की गति है तनया।

उत्पत्ति की आधार है तनया,
परिवार का जीवन है तनया।
गेह की रीति-रिवाज है तनया,
माता-पिता की दुलार है तनया।

भाई का अभिमान है तनया,
हर हंसी-खुशी के सरगम का,
रूप है तनया।
मातृभूमि की छाप है तनया,
परिवार का दंभ है तनया।

कलम कागज और दवात है तनया,
हर लेखक का आधार है तनया।
लेखन का लेख है तनया,
संसार का प्यार है तनया।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी — जिला–सिंगरौली , मध्य प्रदेश ♦

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  • “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल`“ जी ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — बेटियां शक्ति, प्रेम, करुणा, ममता की वह चुलबुली चिड़िया सी चहकती, फूल सी महकती मुस्कुराती, राजकुमारी सबकी प्यारी लाड़ली – दुलारी, सबका सदैव ही ध्यान रखने वाली। ईश्वर द्वारा मानव जाती के लिए प्रदान की गई अनमोल शक्तिपुंज हैं। जो हर रूप में प्रेम और सहयोग के लिए तैयार रहती है।

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यह कविता (तनया।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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राष्ट्रभाषा हिन्दी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ राष्ट्रभाषा हिन्दी। ♦

ऊसर होती जमीन को, पुनः जीवन देना चाहिये;
जाती हुई भाषा को, पुनः स्थापित करना चाहिये।

आज के परिवेश में, हिन्दी का होता अपमान;
अंग्रेजियत का हो रहा बोलबाला, हिंदी को कर दरकिनार।

मिठास भरी जिसमें, जहर का नाम दे रहे;
मधुरता जिसके शब्दों में, कड़वाहट उसमें घोल रहे।

पृष्ठिभूमि जिसने बनाई, उसकी नींव हिला रहे;
सम्पूर्ण जगत में, सभ्यता संस्कृति को रखा है।

आज तक जन – जन तक, हृदय की गहराई तक बसी;
पर निगाहों से उतारी गई, भाषा हिन्दुस्तान की।

हिन्दी सम्मान है, हिन्दी अभिमान है;
हिन्दी स्वाभिमान है, भारत की जान है।

भरतखण्ड की संस्कृति है, संस्कारों की जननी है;
आत्मा जग की, विश्व भाषा की माँ है।

विश्वास जगत जनार्दन की, एक डोर में सबको है बांधती;
हर भाषा को सगी बहन समझे, भरी-पूरी हों सभी बोलियां।

यही कामना हिंदी है, यही साधना हिंदी है;
सौतन विदेशी भाषा न बने, महारानी हमारी हिन्दी ही रहे।

आन हमारी है, शान हमारी है हिन्दी;
चेतना हमारी है हिन्दी, वाणी का शुभ वरदान है हिन्दी।

वर्तनी हमारी है हिंदी, व्याकरण हमारी है हिन्दी;
संस्कृति हमारी है हिंदी, आचरण हमारी है हिन्दी।

वेदना हमारी है हिंदी, गान हमारी है हिन्दी;
आत्मा हमारी है हिन्दी, भावना का साज़ है हिन्दी।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी — जिला–सिंगरौली , मध्य प्रदेश ♦

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ज़रूर पढ़ें — शिक्षक की महानता।

  • “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल`“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — अंग्रेजो से आजादी के इतने वर्षों बाद भी हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा की मान्यता आधिकारिक रूप से क्यों दर्ज नही हुआ, हिंदी को उसका सम्मान क्यों नहीं मिला? हिन्दी राष्ट्रभाषा के महत्व, गुणों और प्रभाव को बताया है। हिन्दी हर भारतीय के दिल से निकलने वाली भाषा हैं। हिन्दी भाषा दिल को दिल से जोड़ने का कार्य करती है। एकलौती हिन्दी भाषा ही है जिसमे अपनापन है दुनिया की किसी भी अन्य भाषा अपनापन का स्थान नहीं।

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यह कविता (राष्ट्रभाषा हिन्दी।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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