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“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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Diwali Poem In Hindi

तमस मिटाएं चलो दीप जलाएं।

Kmsraj51 की कलम से…..

Tamas Mitaye Chalo Deep Jalaye | तमस मिटाएं चलो दीप जलाएं।

spread fragrance all around, gather courage and fight back, sharpen all skills, drive away fear from the mind, remove darkness, let's light a lamp.

आओ चलो चले दीप जलाएं,
काले अंधियारे को दूर भगाएं,
संग चले और घुलमिल जाएं,
मन के मैल को आज मिटाएं,
नकारात्मकता को परे हटाएं ,
तमस मिटाएं चलो दीप जलाएं।

अज्ञानता से ज्ञान की ओर,
खुशबू फैलाएं चहुंओर,
कर साहस और प्रतिकार,
तेज करे सब कौशल धार,
डर को मन से दूर भगाएं,
तमस मिटाएं चलो दीप जलाएं।

बुराई से लड़े अच्छाई पर चले,
असत्य से हटे सत्य संग पले,
ईर्ष्या द्वेष घृणा सब भुलाए,
भाईचारा का पाठ पढ़ाएं,
हर तरफ खुशियां महकाएं,
तमस मिटाएं चलो दीप जलाएं।

भक्त प्रहलाद की पावन पुकार,
सुनकर आएं विष्णु नरसिंह अवतार,
होलिका, हिरण्यकश्यप का हुआ सर्वनाश,
पाप का हुआ नाश पुण्य बना खास,
जीवन में इस सबक को अपनाएं,
तमस मिटाएं चलो दीप जलाएं।

हर घर सब मिलकर दीप जलाएं,
दरिद्रता भगाएं लक्ष्मी जी बुलाएं,
अज्ञानता जाए सरस्वती जी आएं,
मन में अपने लिए एक दीप जलाएं,
बच्चे बड़े इको फ्रेंडली दिवाली मनाएं,
तमस मिटाएं चलो दीप जलाएं।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कविता में दीप जलाने के माध्यम से जीवन में सकारात्मकता, प्रेम, ज्ञान और अच्छाई का संदेश दिया गया है। यह अंधकार (अज्ञानता, बुराई, नकारात्मकता) को दूर करने और ज्ञान, साहस, सत्य, और भाईचारे की ओर बढ़ने की प्रेरणा देती है। कविता में पौराणिक कथाओं का भी संदर्भ है, जैसे प्रहलाद और नरसिंह अवतार की कथा, जो अच्छाई की जीत और बुराई के नाश का प्रतीक है। यह सबक देती है कि हर किसी को अपने जीवन में अच्छाई को अपनाना चाहिए और मन में सकारात्मक दीप जलाना चाहिए। अंत में, पर्यावरण का ध्यान रखते हुए, इको-फ्रेंडली दिवाली मनाने का संदेश भी दिया गया है।

—————

यह कविता (तमस मिटाएं चलो दीप जलाएं।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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Filed Under: 2024-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: Diwali Poem In Hindi, tamas mitaye chalo deep jalaye, तमस मिटाएं चलो दीप जलाएं, तमस मिटाएं चलो दीप जलाएं - विवेक कुमार, दिवाली पर कविता, दिवाली पर छोटी सी कविता, दीपावली पर कविता, विवेक कुमार, विवेक कुमार जी की कविताएं

दीपावली : पुकार।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ दीपावली : पुकार। ♦

दीपशिखा की वर्तिका समिध रहा तेल,
घृत से पूजन करें, कुल की परंपरा माता का अभिषेक।

लोक परंपरा में रही मृतिका की बनी में,
मदार की बाती रखे सरसों तेल से फिर प्रज्वलित करें।

कडुआ अनुभव रहा तम ने घेरा डाला जीवन,
इस बार मिटा दो मैया अगला साल न हो ऐसा।

कडुवे तेल से दीप जलाऊं लो कर लो स्वीकार,
मेरे जीवन का अंधेरा हटा दो अबकी बार।

बहुत लड़ चुका हूं गर्दिश से अब न लड़ पाऊंगा,
आया हूं शरण तिहारी आर्तनाद मेरी तू ले इस बार सुन।

बीत गये दिन बहुत सारे अब तो कृपा कर दे,
भोग लगा रहा मैया आस तुझ पर लगाया है।

अंधकार मिटा दे, कुछ तो इतना दे… दे,
भूखा हूं मैं मैया प्यास मेरी मिटा दे।

बस आँचल का प्यार अपना दे… दे,
तेरी कृपा से जी उठुंगा अपना मान दे… दे।

घी के दिये में तुझे पुकारूं हे नाथ कृपा इतना कीजिये,
विघ्न मेरे सारे हर लीजिये चंगा मुझे कर दीजिए।

विनायक कहलाते आप हैं शिव सुत कहलाते,
माँ लक्ष्मी के साथ आप सदा विराजते।

मुझ दीन-हीन पर अपनी कृपा-दृष्टि रखिये,
आप के संग बसे धर्मराज चित्रगुप्त से मेरी ओर दृष्टि फिराइये।

इस दीपावली आप सब से मैं भी दीप-भोग लगाईये।
इस बालक की ओर अपनी कृपा थोड़ी रखिये।

मैं अगले बरस लगाऊंगा मोदक संग ले आऊंगा,
दीपक के संग-संग अपनी खुशी भी चरणों में चढ़ाऊंगा।

ध्यान दें: मृतिका की बनी = मिट्टी का दिया

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी — जिला–सिंगरौली , मध्य प्रदेश ♦

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  • “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल`“ जी ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — दीपावली महापर्व पर माँ लक्ष्मी और गणपति का आह्वान किया है। दीपावली पर माता रानी को दीप भोग लगाऊ, मुझ दीन-हीन पर अपनी कृपा-दृष्टि रखिये माँ। हे मैया मेरी अरदास सुन ले, बस आँचल का प्यार अपना दे-दे, तेरी कृपा से जी उठुंगा अपना मान दे-दे। घी के दिये में तुझे पुकारूं हे नाथ कृपा इतना कीजिये, विघ्न मेरे सारे हर लीजिये चंगा मुझे कर दीजिए। शुभ दीपावली आत्मिक साधना के लिए सबसे सर्वोत्तम दिन होता है, इस दिन हम सभी को अपने आत्मिक उत्थान के लिए सच्चे मन से साधना करना चाहिए।

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यह कविता (दीपावली : पुकार।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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