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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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विवेक कुमार

बाल विवाह – एक अभिशाप।

Kmsraj51 की कलम से…..

Baal Vivaah Ek Abhishaap | बाल विवाह – एक अभिशाप।

बाल विवाह के खिलाफ कविता | बेटी की आवाज़, समाज के नाम संदेश

“बेटी बोझ नहीं, भविष्य है — उसे सपने पूरे करने का अधिकार दो।”

बेटी ने पूछा बापू से —
“इतनी ब्याह की क्या जल्दी?”
थोड़ी तो बढ़ जाने दो,
अभी तो मैं नादान हूँ,
थोड़ी तो ढल जाने दो।
अनजान डगर पर चलने से पहले,
जीवन को तो समझ लेने दो।

अभी तो बचपन भी न जिया,
थोड़ा तो जी जाने दो।
खेलों की किलकारी बाकी है,
किताबों से दोस्ती बाकी है,
सपनों की उड़ान अधूरी है,
आँखों में आस अभी बाकी है।

माँग में सिंदूर भरने से पहले,
हाथों में कलम थमा लेने दो,
घर की ज़िम्मेदारी से पहले,
मुझे खुद को पहचान लेने दो।

मैं बोझ नहीं, उम्मीद हूँ पापा,
कल का उजाला हूँ पापा,
आज अगर मुरझा दी गई,
तो कैसे खिल पाऊँ पापा?

कुड़वी रस्मों की बेड़ियाँ,
मेरे पाँव से हटा लेने दो,
बेटी हूँ, इंसान हूँ मैं,
मुझे भी जीने का हक़ दो पापा।

जो आज पढ़ेगी, वही कल
घर को रोशन करेगी,
अधपकी उम्र में ब्याही गई
किस्मत से ही हारेगी।

इस अभिशाप से समाज को
आज ही बचा लेने दो,
बेटी को बेटी रहने दो,
उसे जबरन बहू मत बन जाने दो।

बापू, मेरी एक बात सुन लो —
ये परंपरा नहीं, अपराध है,
जो कलियों को रौंद दे,
वो संस्कृति नहीं, अभिशाप है।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता बेटी की पीड़ा, चेतना और अधिकारों की सशक्त अभिव्यक्ति है। बेटी अपने पिता से कम उम्र में विवाह न करने की विनती करती है और कहती है कि वह अभी जीवन, शिक्षा और अपने सपनों को समझना चाहती है। वह बताती है कि बचपन, खेल, पढ़ाई और आत्म-परिचय अभी अधूरे हैं, जिन्हें पूरा करने का उसे अवसर मिलना चाहिए।

    कविता में बेटी स्वयं को बोझ नहीं, बल्कि भविष्य की उम्मीद और उजाले के रूप में प्रस्तुत करती है। वह समाज की कड़वी परंपराओं और बाल विवाह जैसी प्रथाओं को अपराध और अभिशाप बताती है। कवि का संदेश स्पष्ट है कि बेटी को पढ़ने, जीने और स्वयं निर्णय लेने का अधिकार मिलना चाहिए, क्योंकि शिक्षित बेटी ही परिवार और समाज को उज्ज्वल बना सकती है।

—————

यह कविता (बाल विवाह – एक अभिशाप।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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क्या बदलाव लायेगा नया साल।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kya Badlaav Layega Naya Saal | क्या बदलाव लायेगा नया साल।

नववर्ष 2026 पर प्रेरणादायक हिंदी कविता | उम्मीद और बदलाव

बीते को भुलाना, नए को अपनाना,
जो खोया उसका रोना, पाए पर इतराना,
अच्छाई से दोस्ती, बुराई से घबड़ाना,
खट्टी मीठी यादों का बीता सफर सुहाना,

यादों के झरोखों से बज रहा तराना,
गजब फलसफा है मेरे भाई,
जेहन में मेरे पुनः एक बात दोहराई,
अधूरी आस क्या इस वर्ष होगी पास,

नववर्ष के आगमन ने ज्यों ही खुशियां फैलाई,
तभी एक बार फिर उद्गार उमड़ आई,
2026, क्या बदलाव है लाई?
क्या सच्चाई की जीत और बेईमानी की होगी हार,

ईर्ष्या द्वेष मिटाकर भाईचारे का सपना होगा साकार,
क्या बेरोजगारी मिटेगी, रोजगार मिलेगी,
अमन चैन से भरी जिंदगी कटेगी,
कभी दिलासा कभी डर का छाया साया,

उम्मीदों ने मुझे हौसला है दिलाया,
डर को है झुकाना, हिम्मत को बढ़ाना,
शिक्षा, स्वच्छता और
सामाजिक कार्य को अपनाना,
इस मंत्र को कभी न भुलाना,

यही बात जन-जन को है समझाना,
बदलाव को है अपने देश में लाना,
नववर्ष में यही गीत गुनगुनाना।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता बीते वर्ष की स्मृतियों, अनुभवों और सीख को आत्मसात करते हुए नववर्ष से जुड़ी आशाओं और आत्ममंथन को अभिव्यक्त करती है। कवि कहता है कि जीवन में बीते दुख-सुख, हार-जीत, अच्छाई-बुराई सभी का अपना महत्व होता है, जिनसे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। यादों की खट्टी-मीठी अनुभूतियाँ मन में नए प्रश्न और नई उम्मीदें जगाती हैं।

    नववर्ष 2026 के आगमन पर कवि समाज और देश में सकारात्मक बदलाव की कामना करता है—सच्चाई की जीत, बेईमानी की हार, ईर्ष्या-द्वेष का अंत और भाईचारे का विस्तार। बेरोजगारी के समाप्त होने, रोजगार बढ़ने और अमन-चैन से भरे जीवन की आकांक्षा व्यक्त की गई है।

    कविता का संदेश है कि डर को परे रखकर हिम्मत बढ़ाई जाए और शिक्षा, स्वच्छता व सामाजिक कार्यों को अपनाकर देश में वास्तविक परिवर्तन लाया जाए। अंततः यह कविता नववर्ष को केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मसुधार और सामाजिक जिम्मेदारी का संकल्प बनाने का आह्वान करती है।

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यह कविता (क्या बदलाव लायेगा नया साल।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

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ज्ञान की ज्योत जगा दे मां।

Kmsraj51 की कलम से…..

Gyan Ki Jyot Jaga De Maa | ज्ञान की ज्योत जगा दे मां।

Mother Hansvahini is requested to fill his empty dictionary and remove the darkness of ignorance.

हे मां शारदे,
वीणावादिनी मां,
ज्ञान की देवी,
ज्ञान की ज्योत जगा दे मां,
मैं हूं तुच्छ अज्ञानी,
मुझे ज्ञान का मार्ग दिखा दे मां।

हे मां हंसवाहिनी,
अंधकार निवारणी,
मेरा शब्दकोश है खाली,
भर दे तू इसे बजाकर ताली,
मुझ तुच्छ अज्ञानी को,
ज्ञान की ज्योत जगा दे मां।

हे मां बागेश्वरी,
तू बजाती सुरों की बांसुरी,
मेरे कलम की लेखनी को दे धार,
लेखनी आपसे, आप सबके द्वार,
मुझ तुच्छ अज्ञानी को,
ज्ञान की ज्योत जगा दे मां।

हे मां भारती,
ज्ञान सबमें तू ही भरती,
तमस दूर हो हृदय हमारे,
आशा और विश्वास तुम्हारे,
मुझ तुच्छ अज्ञानी को,
ज्ञान की ज्योत जगा दे मां।

हे मां ज्ञानदा,
आंखों पर पड़े न मेरे परदा,
मां मेरी कविता में तू,
भर दे वीणा की झंकार,
मुझ तुच्छ अज्ञानी को,
ज्ञान की ज्योत जगा दे मां।

हे मां वाग्देवी,
मुझे दे सद्बुद्धि,
भेंट करूं तुझे कलम पुष्प से,
गूंथे हुए सब हार,
मुझ तुच्छ अज्ञानी को,
मां ज्ञान की ज्योत जगा देना।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता मां सरस्वती की वंदना करते हुए ज्ञान और बुद्धि की प्रार्थना करती है। कवि मां शारदा से निवेदन करता है कि वह अपनी वीणा के मधुर स्वर से उसे ज्ञान का प्रकाश प्रदान करें, क्योंकि वह अज्ञानी और तुच्छ है। मां हंसवाहिनी से आग्रह किया गया है कि वह उसके खाली शब्दकोश को भर दें और अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करें। मां बागेश्वरी से कवि अपनी लेखनी को धार देने की प्रार्थना करता है ताकि वह सभी तक ज्ञान का प्रकाश पहुंचा सके। मां भारती से अनुरोध किया गया है कि वह सभी के हृदय से अज्ञान का तमस (अंधकार) दूर करें और आशा तथा विश्वास का संचार करें। मां ज्ञानदा से कवि यह विनती करता है कि उसकी आंखों पर अज्ञान का कोई पर्दा न पड़े और उसकी कविता में वीणा की झंकार भर जाए। अंत में, मां वाग्देवी से वह सद्बुद्धि की कामना करता है और अपनी कविता को एक पुष्पहार के रूप में अर्पित करने की इच्छा व्यक्त करता है। संपूर्ण कविता ज्ञान प्राप्ति की प्रार्थना और मां सरस्वती की स्तुति में समर्पित है।

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यह कविता (ज्ञान की ज्योत जगा दे मां।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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बज गया जीत का डंका।

Kmsraj51 की कलम से…..

Baj Gaya Jeet Ka Danka | बज गया जीत का डंका।

In that period a savior emerged from Madwan, the drowning man found a straw and the boat crossed the sea. The trumpet of victory was sounded.

बज गया, आज जीत का डंका,
जलने वाली है, भ्रष्टाचार की लंका।
फिर हुआ कलयुग में कृष्णावतार,
बंशी की धुन से तिरहुत का हुआ नैया पार।
शिक्षकों की बात अब सड़क से सदन तक,
पहुंचाने आए सूबे के कर्णधार रखकर सबकुछ ताक।

जीत नहीं स्वाभिमान की जंग छिड़ी है,
जुल्म ढाने वालों की होनी किरकिरी है।
कहा जाता शिक्षक समाज का दर्पण होता,
मगर यहां उसे ही है सताया जाता।
याद कीजिए वो दिन जब हम शिक्षामित्र हुआ करते थे,
वेतन के लिए मुखिया जी की जी हुजूरी किया करते थे।

उस दौर में उदय हुआ मड़वन से एक तारणहार,
डूबते को मिला तिनके का साथ हुआ बेड़ा पार।
शिक्षामित्र से नियोजित बने लिए हाथ में हाथ,
संघर्ष का कारवां आगे बढ़ा।
जुझारू अग्रदर्शी बंशी की बजी धुन,
मिला चाइनीज वेतनमान ताना बाना बुन।

जिसके बारे में सोचा न था उसे दिलाया,
शिक्षकों को वेतनमान का स्वाद चखाया।
पूर्ण वेतनमान की चली लंबी लड़ाई के थे सूत्रधार,
मोगैंबो के खौफ से सब थे सन्न लगाई दहाड़ पाया पार।
विखंडित शिक्षक समाज को लाया एक मंच,
शिक्षकों की एकता पर जिसने कसा तंज,
बंशीधर का पड़ा उसपर तगड़ा पंच।

ये मात्र जीत नहीं आगाज है,
अभी तो शुरुआत है अंजाम का इंतजार है।
ये जीत नहीं मिशाल है आलाधिकारियों के लिए काल है,
बज गया आज जीत का डंका,
जलने वाली है भ्रष्टाचार की लंका।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

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• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है —कविता में शिक्षक समाज के संघर्ष और उनकी जीत का वर्णन किया गया है। भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ लड़ाई को रावण की लंका के जलने से तुलना की गई है। शिक्षक समुदाय को जागरूक और संगठित करने में एक नेता, जिसे “मड़वन से तारणहार” कहा गया है, की भूमिका महत्वपूर्ण मानी गई है। इस संघर्ष में शिक्षकों को उनकी मेहनत का उचित वेतनमान और सम्मान दिलाने की दिशा में कई सफलताएं हासिल की गईं। कविता शिक्षक समुदाय की एकता, उनकी संघर्षशीलता और उनके अधिकारों की प्राप्ति की कहानी बयां करती है। यह जीत सिर्फ एक शुरुआत है, और इसे अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक बताया गया है। कविता अंततः यह संदेश देती है कि शिक्षक समाज जब संगठित होकर प्रयास करता है, तो वह बदलाव और जीत का परचम लहरा सकता है।

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यह कविता (बज गया जीत का डंका।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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तमस मिटाएं चलो दीप जलाएं।

Kmsraj51 की कलम से…..

Tamas Mitaye Chalo Deep Jalaye | तमस मिटाएं चलो दीप जलाएं।

spread fragrance all around, gather courage and fight back, sharpen all skills, drive away fear from the mind, remove darkness, let's light a lamp.

आओ चलो चले दीप जलाएं,
काले अंधियारे को दूर भगाएं,
संग चले और घुलमिल जाएं,
मन के मैल को आज मिटाएं,
नकारात्मकता को परे हटाएं ,
तमस मिटाएं चलो दीप जलाएं।

अज्ञानता से ज्ञान की ओर,
खुशबू फैलाएं चहुंओर,
कर साहस और प्रतिकार,
तेज करे सब कौशल धार,
डर को मन से दूर भगाएं,
तमस मिटाएं चलो दीप जलाएं।

बुराई से लड़े अच्छाई पर चले,
असत्य से हटे सत्य संग पले,
ईर्ष्या द्वेष घृणा सब भुलाए,
भाईचारा का पाठ पढ़ाएं,
हर तरफ खुशियां महकाएं,
तमस मिटाएं चलो दीप जलाएं।

भक्त प्रहलाद की पावन पुकार,
सुनकर आएं विष्णु नरसिंह अवतार,
होलिका, हिरण्यकश्यप का हुआ सर्वनाश,
पाप का हुआ नाश पुण्य बना खास,
जीवन में इस सबक को अपनाएं,
तमस मिटाएं चलो दीप जलाएं।

हर घर सब मिलकर दीप जलाएं,
दरिद्रता भगाएं लक्ष्मी जी बुलाएं,
अज्ञानता जाए सरस्वती जी आएं,
मन में अपने लिए एक दीप जलाएं,
बच्चे बड़े इको फ्रेंडली दिवाली मनाएं,
तमस मिटाएं चलो दीप जलाएं।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

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• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कविता में दीप जलाने के माध्यम से जीवन में सकारात्मकता, प्रेम, ज्ञान और अच्छाई का संदेश दिया गया है। यह अंधकार (अज्ञानता, बुराई, नकारात्मकता) को दूर करने और ज्ञान, साहस, सत्य, और भाईचारे की ओर बढ़ने की प्रेरणा देती है। कविता में पौराणिक कथाओं का भी संदर्भ है, जैसे प्रहलाद और नरसिंह अवतार की कथा, जो अच्छाई की जीत और बुराई के नाश का प्रतीक है। यह सबक देती है कि हर किसी को अपने जीवन में अच्छाई को अपनाना चाहिए और मन में सकारात्मक दीप जलाना चाहिए। अंत में, पर्यावरण का ध्यान रखते हुए, इको-फ्रेंडली दिवाली मनाने का संदेश भी दिया गया है।

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यह कविता (तमस मिटाएं चलो दीप जलाएं।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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मेरा चांद मुझे आया है नजर।

Kmsraj51 की कलम से…..

Mera Chand Mujhe Aaya Hai Nazar | मेरा चांद मुझे आया है नजर।

she starts her fast by staying without water, she pleads to Karva Mata, may my beloved live a thousand or two thousand years, don't make me wait anymore, just show me your face. I have seen my moon.

कब आओगे,
कर रही इंतजार,
नैना हो रही लाचार,
सज संवर कर बैठी तैयार,
सजाकर माथे पर बिंदिया,
साथ में गले का हार,
रचा रखी हाथों में मेहंदी,
बस कर रही एक पुकार,
कब आओगे?

जिसका है इंतजार,
हर सुहागिन जिसकी करती आस,
दिल में बसा राखी विश्वास,
निर्जला रह, करती व्रत की शुरुआत,
करवा माता से लगाती गुहार,
पिया की उम्र हो हजार दो हजार,
अब न तरसाओ,
जरा दर्श तो दिखलाओ।

तेरे दीदार में मन हो रहा अधीर,
अब तो आ जाओ,
नयनों की प्यास बुझाओ,
पूरी कर दो मेरी आस,
आ जाओ मेरे पास।

क्यों रूठकर बैठे हो,
कहां छुपकर बैठे हो,
आ जाओ भी एक बार,
पुकार सुन,
शायद चांद को आई रहम,
जिस चांद का कर रही थी इंतजार,
वो चांद मुझे आया है नजर।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता एक सुहागन के इंतजार और प्रेम की गहराई को दर्शाती है। कविता में वह अपने पति के आगमन की प्रतीक्षा कर रही है, सज-धजकर तैयार बैठी है, माथे पर बिंदी और हाथों में मेहंदी रचाई है। उसका मन व्याकुल है, और वह लगातार अपने पति के लौटने की पुकार कर रही है। करवा चौथ के व्रत में वह निर्जला रहकर, करवा माता से अपने पति की लंबी उम्र की कामना कर रही है।वह पति से रूठने या छुपने का कारण पूछती है, और उसे अपनी ओर आकर्षित करने के लिए पुकारती है। अंत में, उसे प्रतीक्षा में राहत मिलती है जब वह चांद को देखती है, जिसका उसे लंबे समय से इंतजार था।

—————

यह कविता (मेरा चांद मुझे आया है नजर।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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गांधीगिरी अपनाओ।

Kmsraj51 की कलम से…..

Gandhigiri Apanao | गांधीगिरी अपनाओ।

A graphic representation featuring the word "Gandhi" repeated multiple times, highlighting its cultural and historical importance.

अहिंसा
की हो बात,
स्वतंत्रता
की मिले सौगात,
सादगी
जिसकी पहचान,
सत्य
जिसका कमान,
बापू
तुम हो महान।

सत्याग्रह
जिसकी शक्ति,
गांधी
थे वो व्यक्ति,
निडरता
जिससे मिला न्याय,
ब्रह्मचर्य
तालु पर नियंत्रण पाए,
बापू
इसीलिए महान कहलाए।

धोती
जिसकी पहचान,
लाठी
शास्त्र समान,
कर्मठता
ब्रह्म का वरदान,
सरलता
जीवन को बनाए आसान,
बापू
तुम्हीं हो राष्ट्र का सम्मान।

आज का दौड़
भ्रष्टाचार,
मन का गौर
गलत विचार,
सत्य का नाश
बना लाश,
माहौल का विनाश
बन गया दास,
फिर कैसे होगा विकास?

आ जाओ
फिर एक बार,
बदलेगी
दिशाएं चार,
सत्य
पसारेगा पैर,
हिंसा
की अब तो खैर,
बापू
आ जाओ करने सैर।

सोच
मन की बदलो,
बोल
मीठे ही बोलो,
सद्भावना
दिल से जोड़ो,
अहिंसा
का दामन न छोड़ो,
गांधीगिरी
से अब नाता जोड़ो।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता का सारांश है कि महात्मा गांधी (बापू) को महानता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। अहिंसा, सत्य, और सादगी उनके जीवन के महत्वपूर्ण सिद्धांत थे। सत्याग्रह और ब्रह्मचर्य से उन्होंने निडरता और आत्म-नियंत्रण का प्रदर्शन किया, और इसी कारण उन्हें महान माना गया। उनकी पहचान धोती, लाठी और सरल जीवन शैली से होती थी, जो उन्हें राष्ट्र का सम्मानित व्यक्ति बनाती है। कवि आज के भ्रष्ट और हिंसक माहौल की ओर इशारा करते हुए कहते हैं कि गांधी जी के विचार और सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं। वे आह्वान करते हैं कि हम गांधीगिरी (गांधी के विचारों) से जुड़ें, मन को शुद्ध करें, और अहिंसा, सत्य, और सद्भावना का पालन करें ताकि समाज में बदलाव आ सके।

—————

यह कविता (गांधीगिरी अपनाओ।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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मैं हूं हिंदी।

Kmsraj51 की कलम से…..

Main Hoon Hindi | मैं हूं हिंदी।

I am the sharp edge of words, maybe I am the base? I am the source of soul and unity, I am the propagator of the country's culture, I teach the lessons of Tatsam Tadbhav, I decorate the alphabet. I am Hindi.

मैं हूं हिंदी,
कहने के लिए,
आपकी बिंदी,
सर का ताज हूं,
राज-काज का साधन,
भाषा की अभिव्यक्ति हूं।

पतंगों की डोर संग,
भावनाओं की उड़ान हूं,
देश की आन, बान-शान,
एकता की बुनियाद हूं,
अक्षर का कराती हूं ज्ञान,
ईश्वर ने जो दिया है वरदान।

शब्दों की तीखी धार हूं,
शायद मैं ही आधार हूं?
आत्मा एवं एकता का सूत्रधार,
देश की संस्कृति का प्रचारक हूं,
तत्सम तद्भव का पाठ पढ़ाती,
वर्णमाला का साज सजाती।

बापू ने जिसे किया वरण,
महादेवी वर्मा ने दिया शरण,
जो सबके दिलों को जोड़ती,
सबके अरमानों को घोलती,
फिर भी एक बात,
जो मेरे मन को है कचोटती।

जिससे है देश का मान,
जो है राष्ट्र की पहचान,
फिर क्यूं हो रहा उसका अपमान,
मिट रही मेरी मिली पहचान,
मेरे अस्तित्व पर ही लग रहा ग्रहण।

जिसे संविधान ने है अपनाया,
फिर दूसरी भाषा ने,
लोगों के दिलों में जगह कैसे बनाया?

अब क्या होगा मेरे भाई?
क्या फिर मिल सकेगी?
मेरी पुरानी खोई पहचान,
क्या मिल पाएंगे?
खोए सभी ओहदे तमाम।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवि ने हिंदी भाषा को एक जीवंत रूप में प्रस्तुत किया है, जिसमें हिंदी स्वयं अपनी कहानी बता रही है। हिंदी कहती है कि वह न केवल अभिव्यक्ति का साधन है, बल्कि राष्ट्र की आन, बान, और शान का प्रतीक है। यह भाषा भावनाओं को उड़ान देती है, एकता की नींव रखती है, और देश की संस्कृति का प्रचार करती है। हिंदी को बापू और महादेवी वर्मा ने अपनाया, और यह भाषा सभी को जोड़ती है। लेकिन हिंदी यह भी कहती है कि वर्तमान में उसका अपमान हो रहा है और उसकी पहचान धुंधली पड़ रही है। वह प्रश्न करती है कि जब उसे संविधान ने अपनाया है, तो दूसरी भाषाओं ने लोगों के दिलों में जगह कैसे बना ली। कविता के अंत में हिंदी अपनी पुरानी खोई हुई पहचान और सम्मान को वापस पाने की उम्मीद करती है, और अपने अस्तित्व को बचाने के लिए चिंतित है।

—————

यह कविता (मैं हूं हिंदी।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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हिंदी का मान बढ़ाएंगे।

Kmsraj51 की कलम से…..

Hindi Ka Maan Badhayenge | हिंदी का मान बढ़ाएंगे।

The poet tells that Hindi is the language that is learned from the mother and gets respect all over the world.

जो भाषा मां से सीखी जाती,
जग में सबका मान बढ़ाती,
एकता का प्रतीक बन जाती,
उसकी गाथा जन-जन को बतलाएंगे,
उस हिंदी का मान बढ़ाएंगे।

हिंदी की बिंदी जिसके भाल,
प्रकृति भी बिन पूछें न चलती चाल,
संस्कृति की जिससे होती पहचान,
उसकी गाथा जन-जन को बतलाएंगे,
उस हिंदी का मान बढ़ाएंगे।

हिंदी ही है सुर संगीत और तान,
इसीलिए मेरा देश कहलाता महान,
सरल सौम्य स्वभाव है जिनका,
उसकी गाथा जन-जन को बतलाएंगे,
उस हिंदी का मान बढ़ाएंगे।

जो है देश की आन बान और शान,
जिससे बढ़ता है देश का मान,
जिस भाषा पर हमसभी को है नाज,
उसकी गाथा जन-जन को बतलाएंगे,
उस हिंदी का मान बढ़ाएंगे।

अक्षर से अक्षर का ज्ञान कराती,
उच्चारण में जिसके स्पष्टता है होती,
जो प्रभावमयी और गतिशील है होती,
उसकी गाथा जन-जन को बतलाएंगे,
उस हिंदी का मान बढ़ाएंगे।

हिंदी हिंदुस्तान की पहचान है,
इस हिंदी के बिना जीवन वीरान है,
जिससे ही मिला जग में सम्मान है,
वो कोई और नहीं हिंदी हिंदुस्तान हैं,
उस हिंदी का मान बढ़ाएंगे।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता हिंदी भाषा के महत्व और गौरव को दर्शाती है। कवि बताता है कि हिंदी वह भाषा है जो मां से सीखी जाती है और पूरे संसार में सम्मान दिलाती है। यह एकता का प्रतीक बनती है और लोगों को जोड़ने का काम करती है। हिंदी हमारी संस्कृति और पहचान का स्रोत है, और इसके बिना जीवन अधूरा है। यह सरल, सौम्य, और स्पष्ट भाषा है जो हमारे देश की आन, बान और शान है। इस कविता के माध्यम से कवि यह प्रतिज्ञा करता है कि वह जन-जन तक हिंदी की महानता को पहुंचाएगा और हिंदी का मान बढ़ाएगा।

—————

यह कविता (हिंदी का मान बढ़ाएंगे।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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हमारे शिक्षक महान।

Kmsraj51 की कलम से…..

Hamare Shikshak Mahan | हमारे शिक्षक महान।

The one who sacrificed his body and soul, O great teacher, none other than he, makes the path of students easy, perhaps he got divine blessings.

तन मन जिसने लिए कुर्बान,
ओ कोई और नहीं शिक्षक महान,
छात्रों की राह करते आसान,
शायद मिला उन्हें ईश्वरीय वरदान।

सुबह की पहली किरणों के साथ,
छात्रों का टेंशन लेते अपने माथ,
नित्य नए-नए ज्ञान का करते संचार,
छात्रों को सिखलाते सुंदर विचार।

कक्षा से पहले तैयार करते लेशन प्लान,
ताकि बच्चों को दे सटीक ज्ञान,
हर छात्र पर रहता उनका ध्यान,
जब दे रहे हो शिक्षा और ज्ञान।

छात्रों के लिए उनका ये समर्पण,
अरमान भी जिनका हो अर्पण,
छात्रों की सफलता से जो हो उत्साहित,
हमेशा जिन्हें करते रहते प्रोत्साहित।

जिनका सर्वस्व जीवन छात्रों पर हो समर्पित,
उन शिक्षकों को मेरा चन्द शब्द अर्पित,
जिन्हें न रहता अपनी निजी जीवन का भान,
जो अरमानों को छात्रों के लिए करते कुर्बान।

अपनी खुशी का भी न रखते ध्यान,
हर पल छात्रों का जो करते गुणगान,
वो कोई और नहीं हमारे शिक्षक महान,
सच्चाई की जो पाठ पठाते।

धैर्य, क्षमा, करुणा का भाव जागते,
हम नौसिखों को बाज बनाते,
नभ में उड़ना वही सिखाते,
शिष्टाचार की राह दिखाते।

मर्यादा का पाठ पढ़ाते,
सामाजिकता का दर्श दिखाते,
परिस्थितियों से लड़ना सिखलाते,
दूसरे की सफलता पर जो खुश हो जाते।

सच्चे शिक्षक की भूमिका बखूबी निभाते,
जिनका सर्वस्व जीवन छात्रों के लिए अर्पण,
उनके लिए मेरा कोटि कोटि वंदन,
जिनके कार्यों से जग में मिलता मान और सम्मान।

ओ कोई और नहीं हमारे शिक्षक महान,
शिक्षक दिवस पर ही नहीं हर पल करें वंदन,
चलो करें मिलकर उनका वंदन अभिनंदन।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

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• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवि शिक्षक के महान व्यक्तित्व और उनके समर्पण की सराहना कर रहे हैं। शिक्षक अपने तन-मन से छात्रों के लिए समर्पित रहते हैं और उनके जीवन को आसान बनाते हैं। वे न केवल ज्ञान का संचार करते हैं बल्कि छात्रों को सही विचार और मार्गदर्शन देते हैं। शिक्षक प्रत्येक छात्र पर विशेष ध्यान देते हैं और उनकी सफलता के लिए लगातार प्रोत्साहित करते हैं।शिक्षक अपने निजी जीवन की परवाह किए बिना, छात्रों के भविष्य को संवारने में लगे रहते हैं। वे धैर्य, क्षमा, और करुणा जैसे गुणों का विकास करते हैं और छात्रों को जीवन की चुनौतियों से निपटना सिखाते हैं। शिक्षक न केवल शैक्षणिक ज्ञान देते हैं, बल्कि शिष्टाचार, मर्यादा और सामाजिकता का भी पाठ पढ़ाते हैं।कवि इस कविता के माध्यम से शिक्षकों के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हुए उन्हें वंदन और अभिनंदन करते हैं, क्योंकि उनके योगदान से समाज में मान-सम्मान और सही मार्गदर्शन मिलता है।

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यह कविता (हमारे शिक्षक महान।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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  • मोह।
  • अपना धर्म सबसे उत्तम।
  • ठंडी व्यार।
  • रिश्तों को निभाना सीखो।
  • तंत्र, मंत्र और तत्व ज्ञान में अंतर।
  • मित्र।
  • आखिर क्यों।
  • समय।
  • काले बादल।
  • सुबह का संदेश।

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निरर्थक रील्स की आरी – गुमराह होती नारी।

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तिरंगा का करें सम्मान।

एक सफर।

बाल विवाह – एक अभिशाप।

क्या बदलाव लायेगा नया साल।

है तो नववर्ष।

मोह।

अपना धर्म सबसे उत्तम।

ठंडी व्यार।

रिश्तों को निभाना सीखो।

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