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“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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Motivational Quotes in Hindi !!

कबीर दास जी के दोहे।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT-Oct-14-1

Sant-Kabir-kmsraj51
कबीर दास जी के दोहे।

कबीर दास जी के दोहे।

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय,
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।

अर्थ : जब मैं इस संसार में बुराई खोजने चला तो मुझे कोई बुरा न मिला. जब मैंने अपने मन में झाँक कर देखा तो पाया कि मुझसे बुरा कोई नहीं है.

—

पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय,
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।

अर्थ : बड़ी बड़ी पुस्तकें पढ़ कर संसार में कितने ही लोग मृत्यु के द्वार पहुँच गए, पर सभी विद्वान न हो सके. कबीर मानते हैं कि यदि कोई प्रेम या प्यार के केवल ढाई अक्षर ही अच्छी तरह पढ़ ले, अर्थात प्यार का वास्तविक रूप पहचान ले तो वही सच्चा ज्ञानी होगा.

—

साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय,
सार-सार को गहि रहै, थोथा देई उड़ाय।

अर्थ : इस संसार में ऐसे सज्जनों की जरूरत है जैसे अनाज साफ़ करने वाला सूप होता है. जो सार्थक को बचा लेंगे और निरर्थक को उड़ा देंगे.

—

तिनका कबहुँ ना निन्दिये, जो पाँवन तर होय,
कबहुँ उड़ी आँखिन पड़े, तो पीर घनेरी होय।

अर्थ : कबीर कहते हैं कि एक छोटे से तिनके की भी कभी निंदा न करो जो तुम्हारे पांवों के नीचे दब जाता है. यदि कभी वह तिनका उड़कर आँख में आ गिरे तो कितनी गहरी पीड़ा होती है !

—

धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय,
माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय।

अर्थ : मन में धीरज रखने से सब कुछ होता है. अगर कोई माली किसी पेड़ को सौ घड़े पानी से सींचने लगे तब भी फल तो ऋतु  आने पर ही लगेगा !

—

माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर,
कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर।

अर्थ : कोई व्यक्ति लम्बे समय तक हाथ में लेकर मोती की माला तो घुमाता है, पर उसके मन का भाव नहीं बदलता, उसके मन की हलचल शांत नहीं होती. कबीर की ऐसे व्यक्ति को सलाह है कि हाथ की इस माला को फेरना छोड़ कर मन के मोतियों को बदलो या  फेरो.

—

जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिये ज्ञान,
मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान।

अर्थ : सज्जन की जाति न पूछ कर उसके ज्ञान को समझना चाहिए. तलवार का मूल्य होता है न कि उसकी मयान का – उसे ढकने वाले खोल का.

—

दोस पराए देखि करि, चला हसन्त हसन्त,
अपने याद न आवई, जिनका आदि न अंत।

अर्थ : यह मनुष्य का स्वभाव है कि जब वह  दूसरों के दोष देख कर हंसता है, तब उसे अपने दोष याद नहीं आते जिनका न आदि है न अंत.

—

जिन खोजा तिन पाइया, गहरे पानी पैठ,
मैं बपुरा बूडन डरा, रहा किनारे बैठ।

अर्थ : जो प्रयत्न करते हैं, वे कुछ न कुछ वैसे ही पा ही लेते  हैं जैसे कोई मेहनत करने वाला गोताखोर गहरे पानी में जाता है और कुछ ले कर आता है. लेकिन कुछ बेचारे लोग ऐसे भी होते हैं जो डूबने के भय से किनारे पर ही बैठे रह जाते हैं और कुछ नहीं पाते.

—

बोली एक अनमोल है, जो कोई बोलै जानि,
हिये तराजू तौलि के, तब मुख बाहर आनि।

अर्थ : यदि कोई सही तरीके से बोलना जानता है तो उसे पता है कि वाणी एक अमूल्य रत्न है। इसलिए वह ह्रदय के तराजू में तोलकर ही उसे मुंह से बाहर आने देता है.

—

अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप,
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।

अर्थ : न तो अधिक बोलना अच्छा है, न ही जरूरत से ज्यादा चुप रहना ही ठीक है. जैसे बहुत अधिक वर्षा भी अच्छी नहीं और बहुत अधिक धूप भी अच्छी नहीं है.

—

निंदक नियरे राखिए, ऑंगन कुटी छवाय,
बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय।

अर्थ : जो हमारी निंदा करता है, उसे अपने अधिकाधिक पास ही रखना चाहिए। वह तो बिना साबुन और पानी के हमारी कमियां बता कर हमारे स्वभाव को साफ़ करता है.

—

दुर्लभ मानुष जन्म है, देह न बारम्बार,
तरुवर ज्यों पत्ता झड़े, बहुरि न लागे डार।

अर्थ : इस संसार में मनुष्य का जन्म मुश्किल से मिलता है. यह मानव शरीर उसी तरह बार-बार नहीं मिलता जैसे वृक्ष से पत्ता  झड़ जाए तो दोबारा डाल पर नहीं
लगता.

—

कबीरा खड़ा बाज़ार में, मांगे सबकी खैर,
ना काहू से दोस्ती,न काहू से बैर.

अर्थ : इस संसार में आकर कबीर अपने जीवन में बस यही चाहते हैं कि सबका भला हो और संसार में यदि किसी से दोस्ती नहीं तो दुश्मनी भी न हो !

—

हिन्दू कहें मोहि राम पियारा, तुर्क कहें रहमाना,
आपस में दोउ लड़ी-लड़ी  मुए, मरम न कोउ जाना।

अर्थ : कबीर कहते हैं कि हिन्दू राम के भक्त हैं और तुर्क (मुस्लिम) को रहमान प्यारा है. इसी बात पर दोनों लड़-लड़ कर मौत के मुंह में जा पहुंचे, तब भी दोनों में से कोई सच को न जान पाया।

—

 

कहत सुनत सब दिन गए, उरझि न सुरझ्या मन.                                                                                             

कही कबीर चेत्या नहीं, अजहूँ सो पहला दिन.

अर्थ : कहते सुनते सब दिन निकल गए, पर यह मन उलझ कर न सुलझ पाया. कबीर कहते हैं कि अब भी यह मन होश में नहीं आता. आज भी इसकी अवस्था पहले दिन के समान ही है.

—

कबीर लहरि समंद की, मोती बिखरे आई.                                                                                                         

बगुला भेद न जानई, हंसा चुनी-चुनी खाई.

अर्थ : कबीर कहते हैं कि समुद्र की लहर में मोती आकर बिखर गए. बगुला उनका भेद नहीं जानता, परन्तु हंस उन्हें चुन-चुन कर खा रहा है. इसका अर्थ यह है कि किसी भी वस्तु का महत्व जानकार ही जानता है।

—

जब गुण को गाहक मिले, तब गुण लाख बिकाई.                                                                                             

जब गुण को गाहक नहीं, तब कौड़ी बदले जाई.

अर्थ : कबीर कहते हैं कि जब गुण को परखने वाला गाहक मिल जाता है तो  गुण की कीमत होती है. पर जब ऐसा गाहक नहीं मिलता, तब गुण कौड़ी के भाव चला जाता है.

—

कबीर कहा गरबियो, काल गहे कर केस.                                                                                                     
ना जाने कहाँ मारिसी, कै घर कै परदेस. 

अर्थ : कबीर कहते हैं कि हे मानव ! तू क्या गर्व करता है? काल अपने हाथों में तेरे केश पकड़े हुए है. मालूम नहीं, वह घर या परदेश में, कहाँ पर तुझे मार डाले.

—

पानी केरा बुदबुदा, अस मानुस की जात.                                                                                                

एक दिना छिप जाएगा,ज्यों तारा परभात.

अर्थ : कबीर का कथन है कि जैसे पानी के बुलबुले, इसी प्रकार मनुष्य का शरीर क्षणभंगुर है।जैसे प्रभात होते ही तारे छिप जाते हैं, वैसे ही ये देह भी एक दिन नष्ट हो जाएगी.

—

हाड़ जलै ज्यूं लाकड़ी, केस जलै ज्यूं घास.                                                                                               

सब तन जलता देखि करि, भया कबीर उदास.

अर्थ : यह नश्वर मानव देह अंत समय में लकड़ी की तरह जलती है और केश घास की तरह जल उठते हैं. सम्पूर्ण शरीर को इस तरह जलता देख, इस अंत पर कबीर का मन उदासी से भर जाता है. —

—

जो उग्या सो अन्तबै, फूल्या सो कुमलाहीं।                                                                                              

जो चिनिया सो ढही पड़े, जो आया सो जाहीं।

अर्थ : इस संसार का नियम यही है कि जो उदय हुआ है,वह अस्त होगा। जो विकसित हुआ है वह मुरझा जाएगा. जो चिना गया है वह गिर पड़ेगा और जो आया है वह जाएगा.

—

झूठे सुख को सुख कहे, मानत है मन मोद.                                                                                                

खलक चबैना काल का, कुछ मुंह में कुछ गोद.

अर्थ : कबीर कहते हैं कि अरे जीव ! तू झूठे सुख को सुख कहता है और मन में प्रसन्न होता है? देख यह सारा संसार मृत्यु के लिए उस भोजन के समान है, जो कुछ तो उसके मुंह में है और कुछ गोद में खाने के लिए रखा है.

—

ऐसा कोई ना मिले, हमको दे उपदेस.                                                                                                      

भौ सागर में डूबता, कर गहि काढै केस.

अर्थ : कबीर संसारी जनों के लिए दुखित होते हुए कहते हैं कि इन्हें कोई ऐसा पथप्रदर्शक न  मिला जो उपदेश देता और संसार सागर में डूबते हुए इन प्राणियों को अपने हाथों से केश पकड़ कर निकाल लेता.

—

संत ना छाडै संतई, जो कोटिक मिले असंत                                                                                                     

चन्दन भुवंगा बैठिया,  तऊ सीतलता न तजंत।

अर्थ : सज्जन को चाहे करोड़ों दुष्ट पुरुष मिलें फिर भी वह अपने भले स्वभाव को नहीं छोड़ता. चन्दन के पेड़ से सांप लिपटे रहते हैं, पर वह अपनी शीतलता नहीं छोड़ता.

—

कबीर तन पंछी भया, जहां मन तहां उडी जाइ.                                                                                          

 जो जैसी संगती कर, सो तैसा ही फल पाइ.

अर्थ : कबीर कहते हैं कि संसारी व्यक्ति का शरीर पक्षी बन गया है और जहां उसका मन होता है, शरीर उड़कर वहीं पहुँच जाता है। सच है कि जो जैसा साथ करता है, वह वैसा ही फल पाता है.

—

तन को जोगी सब करें, मन को बिरला कोई.                                                                                        

सब सिद्धि सहजे पाइए, जे मन जोगी होइ.

अर्थ : शरीर में भगवे वस्त्र धारण करना सरल है, पर मन को योगी बनाना बिरले ही व्यक्तियों का काम है य़दि मन योगी हो जाए तो सारी सिद्धियाँ सहज ही प्राप्त हो जाती हैं.

—

कबीर सो धन संचे, जो आगे को होय.                                                                                                        

सीस चढ़ाए पोटली, ले जात न देख्यो कोय.

अर्थ : कबीर कहते हैं कि उस धन को इकट्ठा करो जो भविष्य में काम आए. सर पर धन की गठरी बाँध कर ले जाते तो किसी को नहीं देखा.

—

माया मुई न मन मुआ, मरी मरी गया सरीर.                                                                                       

आसा त्रिसना न मुई, यों कही गए कबीर .

अर्थ : कबीर कहते हैं कि संसार में रहते हुए न माया मरती है न मन. शरीर न जाने कितनी बार मर चुका पर मनुष्य की आशा और तृष्णा कभी नहीं मरती, कबीर ऐसा कई बार कह चुके हैं.

—

मन हीं मनोरथ छांड़ी दे, तेरा किया न होई.                                                                                                

पानी में घिव निकसे, तो रूखा खाए न कोई.

अर्थ : मनुष्य मात्र को समझाते हुए कबीर कहते हैं कि मन की इच्छाएं छोड़ दो , उन्हें तुम अपने बूते पर पूर्ण नहीं कर सकते। यदि पानी से घी निकल आए, तो रूखी रोटी कोई न खाएगा.

– संत कबीर दास जी की जीवनी – 

कबीर एक ऐसी शख्शियत जिसने कभी शास्त्र नही पढा फिर भी ज्ञानियों की श्रेणीं में सर्वोपरी। कबीर, एक ऐसा नाम जिसे फकीर भी कह सकते हैं और समाज सुधारक भी ।

मित्रों, कबीर भले ही छोटा सा एक नाम हो पर ये भारत की वो आत्मा है जिसने रूढियों और कर्मकाडों से मुक्त भारत की रचना की है। कबीर वो पहचान है जिन्होने, जाति-वर्ग की दिवार को गिराकर एक अद्भुत संसार की कल्पना की।

मानवतावादी व्यवहारिक धर्म को बढावा देने वाले कबीर दास जी का इस दुनिया में प्रवेश भी अदभुत प्रसंग के साथ हुआ। माना जाता है कि उनका जन्म  सन् 1398 में ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन वाराणसी के निकट लहराता नामक स्थान पर हुआ था । उस दिन नीमा नीरू संग ब्याह कर डोली में बनारस जा रही थीं, बनारस के पास एक सरोवर पर कुछ विश्राम के लिये वो लोग रुके थे। अचानक नीमा को किसी बच्चे के रोने की आवाज आई वो आवाज की दिशा में आगे बढी। नीमा ने सरोवर में देखा कि एक बालक कमल पुष्प में लिपटा हुआ रो रहा है। निमा ने जैसे ही बच्चा गोद में लिया वो चुप हो गया। नीरू ने उसे साथ घर ले चलने को कहा किन्तु नीमा के मन में ये प्रश्न उठा कि परिजनों को क्या जवाब देंगे। परन्तु बच्चे के स्पर्श से धर्म, अर्थात कर्तव्य बोध जीता और बच्चे पर गहराया संकट टल गया। बच्चा बकरी का दूध पी कर बङा हुआ। छः माह का समय बीतने के बाद बच्चे का नामकरण संस्कार हुआ। नीरू ने बच्चे का नाम कबीर रखा किन्तु कई लोगों को इस नाम पर एतराज था क्योंकि उनका कहना था कि, कबीर का मतलब होता है महान तो एक जुलाहे का बेटा महान कैसे हो सकता है? नीरू पर इसका कोई असर न हुआ और बच्चे का नाम कबीर ही रहने दिया। ये कहना अतिश्योक्ति न होगी कि अनजाने में ही सही बचपन में दिया नाम बालक के बङे होने पर सार्थक हो गया। बच्चे की किलकारियाँ नीरू और नीमा के मन को मोह लेतीं। अभावों के बावजूद नीरू और नीमा बहुत खुशी-खुशी जीवन यापन करने लगे।

कबीर को बचपन से ही साधु संगति बहुत प्रिय थी। कपङा बुनने का पैतृक व्यवसाय वो आजीवन करते रहे। बाह्य आडम्बरों के विरोधी कबीर निराकार ब्रह्म की उपासना पर जोर देते हैं। बाल्यकाल से ही कबीर के चमत्कारिक व्यक्तित्व की आभा हर तरफ फैलने लगी थी। कहते हैं- उनके बालपन में काशी में एकबार जलन रोग फैल गया था। उन्होने रास्ते से गुजर रही बुढी महिला की देह पर धूल डालकर उसकी जलन दूर कर दी थी।

कबीर का बचपन बहुत सी जङताओं एवं रूढीयों से जूझते हुए बीत रहा था। उस दौरान ये सोच प्रबल थी कि इंसान अमीर है तो अच्छा है। बङे रसूख वाला है तो बेहतर है। कोई गरीब है तो उसे इंसान ही न माना जाये। आदमी और आदमी के बीच फर्क साफ नजर आता था। कानून और धर्म की आङ में रसूखों द्वारा गरीबों एवं निम्नजाती के लोगों का शोषण होता था। वे सदैव सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध थे और इसे कैसे दूर किया जाये इसी विचार में रहते थे।

एक बार किसी ने बताया कि संत रामानंद स्वामी ने सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ लङाई छेङ रखी है। कबीर उनसे मिलने निकल पङे किन्तु उनके आश्रम पहुँचकर पता चला कि वे मुसलमानों से नही मिलते। कबीर ने हार नही मानी और पंचगंगा घाट पर रात के अंतिम पहर पर पहुँच गये और सीढी पर लेट गये। उन्हे पता था कि संत रामानंद प्रातः गंगा स्नान को आते हैं। प्रातः जब स्वामी जी जैसे ही स्नान के लिये सीढी उतर रहे थे उनका पैर कबीर के सीने से टकरा गया। राम-राम कहकर स्वामी जी अपना पैर पीछे खींच लिये तब कबीर खङे होकर उन्हे प्रणाम किये। संत ने पूछा आप कौन? कबीर ने उत्तर दिया आपका शिष्य कबीर। संत ने पुनः प्रश्न किया कि मैने कब शिष्य बनाया? कबीर ने विनम्रता से उत्तर दिया कि अभी-अभी जब आपने राम-राम कहा मैने उसे अपना गुरुमंत्र बना लिया। संत रामदास कबीर की विनम्रता से बहुत प्रभावित हुए और उन्हे अपना शिष्य बना लिये। कबीर को स्वामी जी ने सभी संस्कारों का बोध कराया और ज्ञान की गंगा में डुबकी लगवा दी।

कबीर पर गुरू का रंग इस तरह चढा कि उन्होने गुरू के सम्मान में कहा है,

सब धरती कागज करू, लेखनी सब वनराज।
सात समुंद्र की मसि करु, गुरु गुंण लिखा न जाए।।
यह तन विष की बेलरी, गुरु अमृत की खान।
शीश दियो जो गुरु मिले, तो भी सस्ता जान।।

ये कहना अतिश्योक्ति नही है कि जीवन में गुरू के महत्व का वर्णन कबीर दास जी ने अपने दोहों में पूरी आत्मियता से किया है। कबीर मुसलमान होते हुए भी कभी मांस को हाँथ नही लगाया । कबीर जाँति-पाँति और ऊँच-नीच के बंधनो से परे फक्कङ, अलमस्त और क्रांतिदर्शी थे। उन्होने रमता जोगी और बहता पानी की कल्पना को साकार किया।
कबीर का व्यक्तित्व अनुकरणीय है। वे हर तरह की कुरीतियों का विरोध करते हैं। वे साधु-संतो और सूफी-फकीरों की संगत तो करते हैं लेकिन धर्म के ठेकेदारों से दूर रहते हैं। उनका कहना है कि-

हिंदू बरत एकादशी साधे दूध सिंघाङा सेती।
अन्न को त्यागे मन को न हटके पारण करे सगौती।।
दिन को रोजा रहत है, राति हनत है गाय।
यहां खून वै वंदगी, क्यों कर खुशी खोदाय।।

जीव हिंसा न करने और मांसाहार के पीछे कबीर का तर्क बहुत महत्वपूर्ण है। वे मानते हैं कि दया, हिंसा और प्रेम का मार्ग एक है। यदि हम किसी भी तरह की तृष्णां और लालसा पूरी करने के लिये हिंसा करेंगे तो, घृणां और हिंसा का ही जन्म होगा। बेजुबान जानवर के प्रति या मानव का शोषण करने वाले व्यक्ति कबीर के लिये सदैव निंदनीय थे।

कबीर सांसारिक जिम्मेवारियों से कभी दूर नही हुए। उनकी पत्नी का नाम लोई था, पुत्र कमाल और पुत्री कमाली। वे पारिवारिक रिश्तों को भी भलीभाँति निभाए। जीवन-यापन हेतु ताउम्र अपना पैतृक कार्य अर्थात जुलाहे का काम करते रहे।

कबीर घुमक्ङ संत थे अतः उनकी भाषा सधुक्कङी कहलाती है। कबीर की वांणी बहुरंगी है। कबीर ने किसी ग्रन्थ की रचना नही की। अपने को कवि घोषित करना उनका उद्देश्य भी न था। उनकी मृत्यु के पश्चात उनके शिष्यों ने उनके उपदेशों का संकलन किया जो ‘बीजक’ नाम से जाना जाता है। इस ग्रन्थ के तीन भाग हैं, ‘साखी’, ‘सबद’ और ‘रमैनी’। कबीर के उपदेशों में जीवन की दार्शनिकता की झलक दिखती है। गुरू-महिमा, ईश्वर महिमा, सतसंग महिमा और माया का फेर आदि का सुन्दर वर्णन मिलता है। उनके काव्य में यमक, उत्प्रेक्षा, रूपक, अनुप्रास आदि अलंकारों का सुन्दर समावेश दिखता है। भाषा में सभी आवश्यक सूत्र होने के कारण हजारी प्रसाद दिव्वेदी कबीर को “भाषा का डिक्टेटर” कहते हैं। कबीर का मूल मंत्र था,

“मैं कहता आँखन देखी, तू कहता कागद की लेखिन”।

कबीर की साखियों में सच्चे गुरू का ज्ञान मिलता है। संक्षेप में कहा जा सकता है कि कबीर के काव्य का सर्वाधिक महत्व धार्मिक एवं सामाजिक एकता और भक्ती का संदेश देने में है।

कबीर दास जी का अवसान भी जन्म की तरह रहस्यवादी है। आजीवन काशी में रहने के बावजूद अन्त समय सन् 1518 के करीब मगहर चले गये थे क्योंकि वे कुछ भ्रान्तियों को दूर करना चाहते थे। काशी के लिये कहा जाता था कि यहाँ पर मरने से स्वर्ग मिलता है तथा मगहर में मृत्यु पर नरक। उनकी मृत्यु के पश्चात हिन्दु अपने धर्म के अनुसार उनका अंतिम संस्कार करना चाहते थे और मुसलमान अपने धर्मानुसार विवाद की स्थिती में एक अजीब घटना घटी उनके पार्थिव शरीर पर से चादर हट गई और वहाँ कुछ फूल पङे थे जिसे दोनों समुदायों ने आपस में बाँट लिया। कबीर की अहमियत और उनके महत्व को जायसी ने अपनी रचना में बहुत ही आतमियता से परिलाक्षित किया है।

ना नारद तब रोई पुकारा एक जुलाहे सौ मैं हारा।
प्रेम तन्तु नित ताना तनाई, जप तप साधि सैकरा भराई।।

 

मित्रों, ये कहना अतिश्योक्ति न होगी की कबीर विचित्र नहीं हैं सामान्य हैं किन्तु इसी साघारणपन में अति विशिष्ट हैं। हिन्दी साहित्य के इतिहास में कबीर जैसा व्यक्तित्व कोई नही है।

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नेपोलियन बोनापार्ट के उद्धरण-हिन्दी में।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT-Oct-14-3

नेपोलियन बोनापार्ट के अनमोल विचार।

Image

Name

Napoleon Bonaparte / नेपोलियन बोनापार्ट

Born

15 August 1769, Ajaccio, Corsica

Died

  5 May 1821 (aged 51), Longwood, Saint Helena, British   Empire
Nationality French
Work Area Warfare ,Politics
Achievement Known for his role in French Revolution

Quote 1 : A Constitution should be short and obscure.

In Hindi: संविधान छोटा और अस्पष्ट होना चाहिए।

Napoleon Bonaparte  नेपोलियन बोनापार्ट

Quote 2 : A leader is a dealer in hope.

In Hindi: एक लीडर आशा का व्यापारी होता है।

Napoleon Bonaparte  नेपोलियन बोनापार्ट

Quote 3 : A man cannot become an atheist merely by wishing it.

In Hindi: कोई व्यक्ति सिर्फ चाह कर नास्तिक नहीं बन सकता।

Napoleon Bonaparte  नेपोलियन बोनापार्ट

Quote 4 : A man will fight harder for his interests than for his rights.

In Hindi: कोई व्यक्ति अपने अधिकारों से ज्यादा अपने हितों के लिए लडेगा।

Napoleon Bonaparte  नेपोलियन बोनापार्ट

Quote 5 : A picture is worth a thousand words.

In Hindi: एक तस्वीर हज़ार शब्दों के बराबर होती है।

Napoleon Bonaparte  नेपोलियन बोनापार्ट

Quote 6: A soldier will fight long and hard for a bit of colored ribbon.

In Hindi: एक सिपाही एक रंगीन रिबन के लिए दिलो जान से लडेगा।

Napoleon Bonaparte  नेपोलियन बोनापार्ट

Quote 7 : A throne is only a bench covered with velvet.

In Hindi: एक सिंघासन महज मखमल से ढंकी एक बेंच है।

 Napoleon Bonaparte  नेपोलियन बोनापार्ट

Quote 8 : A true man hates no one.

 In Hindi: एक सच्चा आदमी किसी से नफरत नहीं करता।

Napoleon Bonaparte  नेपोलियन बोनापार्ट

Quote 9 : Ability is nothing without opportunity.

In Hindi: अवसर के बिना काबिलियत कुछ भी नहीं है।

 Napoleon Bonaparte  नेपोलियन बोनापार्ट

Quote 10 : Among those who dislike oppression are many who like to oppress.

 In Hindi: उनमे से जो अत्याचार नहीं पसंद करते , कई ऐसे होते हैं जो अत्याचारी होते हैं।

 Napoleon Bonaparte  नेपोलियन बोनापार्ट

Quote 11 : All religions have been made by men.

 In Hindi: सारे धर्म इंसानों द्वारा बनाये गए हैं।

 Napoleon Bonaparte  नेपोलियन बोनापार्ट

Quote 12 : An army marches on its stomach.

In Hindi: एक सेना अपने पेट के बल पर आगे बढती है।

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Quote 13 : Death is nothing, but to live defeated and inglorious is to die daily.

 In Hindi: मौत कुछ भी नहीं है , लेकिन हार कर और लज्जित होकर जीना रोज़ मरने के बराबर है।

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Quote 14 : Doctors will have more lives to answer for in the next world than even we generals.

In Hindi: अगली दुनिया में हम सेनापतियों से ज्यादा चिकित्सकों को लोगों की जिंदगियों के लिए जवाब देना होगा।

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Quote 15 : England is a nation of shopkeepers.

In Hindi: इंग्लैंड दुकानदारों का देश है।

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Quote 16 : Four hostile newspapers are more to be feared than a thousand bayonets.

In Hindi: हज़ार छूरों की तुलना में चार विरोधी अखबारों से अधिक डरना चाहिए।

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Quote 17 : France has more need of me than I have need of France.

In Hindi: जितनी मुझे फ्रांस की ज़रुरत नहीं है उससे ज्यदा फ्रांस को मेरी ज़रुरत है।

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Quote 18 : He who fears being conquered is sure of defeat.

In Hindi: जिसे जीत लिए जाने का भय होता है उसकी हार निश्चित होती है।

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Quote 19 : He who knows how to flatter also knows how to slander.

In Hindi: वो जो प्रशंशा करना जानता है, अपमानित करना भी जानता है।

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Quote 20 : History is a set of lies agreed upon.

In Hindi: इतिहास सहमती से किया गया झूठ का संग्रह है।

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Quote 21 : I am sometimes a fox and sometimes a lion. The whole secret of government lies in knowing when to be the one or the other.

In Hindi: मैं कभी लोमड़ी बनता हूँ तो कभी शेर. शाशन का पूरा रहस्य ये जानने में है कि कब क्या बनना है।

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Quote 22 : I can no longer obey; I have tasted command, and I cannot give it up.

In Hindi: अब मैं आज्ञा का पालन नहीं कर सकता , मैंने आज्ञा देने का स्वाद चखा है , और मैं इसे छोड़ नहीं सकता।

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Quote 23 : I made all my generals out of mud.

In Hindi: मैंने अपने सभी सेनापति कीचड से बनाये हैं।

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Quote 24 : If you want a thing done well, do it yourself.

In Hindi: अगर आप चाहते हैं कि कोई चीज अच्छे से हो तो उसे खुद कीजिये।

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Quote 25 : Imagination rules the world.

In Hindi: कल्पना दुनिया पे शाशन करती है।

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Quote 26 : Impossible is a word to be found only in the dictionary of fools.

In Hindi: असंभव शब्द सिर्फ बेवकूफों के शब्दकोष में पाया जाता है।

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Quote 27 : In politics stupidity is not a handicap.

In Hindi: राजनीति में मूर्खता एक बाधा नहीं है।

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Quote 28 : In politics… never retreat, never retract… never admit a mistake.

In Hindi: राजनीति में कभी पीछे ना हटें , कभी अपने शब्द वापस ना लें…और कभी अपनी गलती ना मानें।

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Quote 29 : It is the cause, not the death, that makes the martyr.

In Hindi: ये कारण है , ना कि मौत ,जो किसी को शहीद बनाता है।

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Quote 30 : It requires more courage to suffer than to die.

In Hindi: मरने की तुलना में कष्ट सहने के लिए ज्यादा साहस चाहिए होता है।

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Quote 31 : Men are more easily governed through their vices than through their virtues.

In Hindi: आदमी अपनी अच्छाइयों से ज्यादा अपनी बुराइयों द्वारा आसानी से शाशित होता है।

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Quote 32 : Never interrupt your enemy when he is making a mistake.

In Hindi: कभी भी जब आपका शत्रु कोई गलती कर रहा हो तो उसके काम में बाधा मत डालिए।

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Quote 33 : Power is my mistress. I have worked too hard at her conquest to allow anyone to take her away from me.

In Hindi: ताकत मेरी रखैल है . मैंने उसे पाने के लिए इतनी मेहनत की है कि कोई उसे मुझसे छीन नहीं सकता।

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Quote 34 : Religion is excellent stuff for keeping common people quiet.

In Hindi: धर्म आम लोगों को शांत रखने का एक उत्कृष्ट साधन है।

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Quote 35 : Riches do not consist in the possession of treasures, but in the use made of them.

In Hindi: सम्पन्नता धन के कब्जे मैं नहीं उसके उपयोग में है।

 Napoleon Bonaparte  नेपोलियन बोनापार्ट

Quote 36 : Soldiers generally win battles; generals get credit for them.

In Hindi: आमतौर पर सिपाही लड़ाइयाँ  जीतते हैं; सेनापति उसका श्रेय ले जाते हैं।

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Quote 37 : The best way to keep one’s word is not to give it.

In Hindi: अपने वचन को निभाने का सबसे अच्छा तरीका है कि वचन ही ना दें।

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Quote 38 : The surest way to remain poor is to be an honest man.

In Hindi: निर्धन रहने का एक पक्का तरीका है कि ईमानदार रहिये।

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Quote 39 : The word impossible is not in my dictionary.

In Hindi: मेरे शब्दकोष में असंभव शब्द नहीं है।

 Napoleon Bonaparte  नेपोलियन बोनापार्ट

Quote 40 : Throw off your worries when you throw off your clothes at night.

In Hindi: जब रात को आप अपने कपडे फेंकते हैं तो उसी वक़्त अपनी चिंताओं को भी फेंक दीजिये।

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Quote 41 : To do all that one is able to do, is to be a man; to do all that one would like to do, is to be a god.

In Hindi: वो सब कुछ करना जो आप कर सकते हैं , इंसान होना है; वो सब कुछ करना जो आप करना चाहते हैं , भगवान् होना है।

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Quote 42 : Victory belongs to the most persevering.

In Hindi: जीत उसे मिलती है जो सबसे दृढ रहता है।

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Quote 43 : War is the business of barbarians.

In Hindi: युद्ध असभ्यों का व्यापार है।

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नोट- Post inspired by AKC (http://www.achhikhabar.com/), 

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