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“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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Best Hindi Quotes

कबीर दास जी के दोहे।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT-Oct-14-1

Sant-Kabir-kmsraj51
कबीर दास जी के दोहे।

कबीर दास जी के दोहे।

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय,
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।

अर्थ : जब मैं इस संसार में बुराई खोजने चला तो मुझे कोई बुरा न मिला. जब मैंने अपने मन में झाँक कर देखा तो पाया कि मुझसे बुरा कोई नहीं है.

—

पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय,
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।

अर्थ : बड़ी बड़ी पुस्तकें पढ़ कर संसार में कितने ही लोग मृत्यु के द्वार पहुँच गए, पर सभी विद्वान न हो सके. कबीर मानते हैं कि यदि कोई प्रेम या प्यार के केवल ढाई अक्षर ही अच्छी तरह पढ़ ले, अर्थात प्यार का वास्तविक रूप पहचान ले तो वही सच्चा ज्ञानी होगा.

—

साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय,
सार-सार को गहि रहै, थोथा देई उड़ाय।

अर्थ : इस संसार में ऐसे सज्जनों की जरूरत है जैसे अनाज साफ़ करने वाला सूप होता है. जो सार्थक को बचा लेंगे और निरर्थक को उड़ा देंगे.

—

तिनका कबहुँ ना निन्दिये, जो पाँवन तर होय,
कबहुँ उड़ी आँखिन पड़े, तो पीर घनेरी होय।

अर्थ : कबीर कहते हैं कि एक छोटे से तिनके की भी कभी निंदा न करो जो तुम्हारे पांवों के नीचे दब जाता है. यदि कभी वह तिनका उड़कर आँख में आ गिरे तो कितनी गहरी पीड़ा होती है !

—

धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय,
माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय।

अर्थ : मन में धीरज रखने से सब कुछ होता है. अगर कोई माली किसी पेड़ को सौ घड़े पानी से सींचने लगे तब भी फल तो ऋतु  आने पर ही लगेगा !

—

माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर,
कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर।

अर्थ : कोई व्यक्ति लम्बे समय तक हाथ में लेकर मोती की माला तो घुमाता है, पर उसके मन का भाव नहीं बदलता, उसके मन की हलचल शांत नहीं होती. कबीर की ऐसे व्यक्ति को सलाह है कि हाथ की इस माला को फेरना छोड़ कर मन के मोतियों को बदलो या  फेरो.

—

जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिये ज्ञान,
मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान।

अर्थ : सज्जन की जाति न पूछ कर उसके ज्ञान को समझना चाहिए. तलवार का मूल्य होता है न कि उसकी मयान का – उसे ढकने वाले खोल का.

—

दोस पराए देखि करि, चला हसन्त हसन्त,
अपने याद न आवई, जिनका आदि न अंत।

अर्थ : यह मनुष्य का स्वभाव है कि जब वह  दूसरों के दोष देख कर हंसता है, तब उसे अपने दोष याद नहीं आते जिनका न आदि है न अंत.

—

जिन खोजा तिन पाइया, गहरे पानी पैठ,
मैं बपुरा बूडन डरा, रहा किनारे बैठ।

अर्थ : जो प्रयत्न करते हैं, वे कुछ न कुछ वैसे ही पा ही लेते  हैं जैसे कोई मेहनत करने वाला गोताखोर गहरे पानी में जाता है और कुछ ले कर आता है. लेकिन कुछ बेचारे लोग ऐसे भी होते हैं जो डूबने के भय से किनारे पर ही बैठे रह जाते हैं और कुछ नहीं पाते.

—

बोली एक अनमोल है, जो कोई बोलै जानि,
हिये तराजू तौलि के, तब मुख बाहर आनि।

अर्थ : यदि कोई सही तरीके से बोलना जानता है तो उसे पता है कि वाणी एक अमूल्य रत्न है। इसलिए वह ह्रदय के तराजू में तोलकर ही उसे मुंह से बाहर आने देता है.

—

अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप,
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।

अर्थ : न तो अधिक बोलना अच्छा है, न ही जरूरत से ज्यादा चुप रहना ही ठीक है. जैसे बहुत अधिक वर्षा भी अच्छी नहीं और बहुत अधिक धूप भी अच्छी नहीं है.

—

निंदक नियरे राखिए, ऑंगन कुटी छवाय,
बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय।

अर्थ : जो हमारी निंदा करता है, उसे अपने अधिकाधिक पास ही रखना चाहिए। वह तो बिना साबुन और पानी के हमारी कमियां बता कर हमारे स्वभाव को साफ़ करता है.

—

दुर्लभ मानुष जन्म है, देह न बारम्बार,
तरुवर ज्यों पत्ता झड़े, बहुरि न लागे डार।

अर्थ : इस संसार में मनुष्य का जन्म मुश्किल से मिलता है. यह मानव शरीर उसी तरह बार-बार नहीं मिलता जैसे वृक्ष से पत्ता  झड़ जाए तो दोबारा डाल पर नहीं
लगता.

—

कबीरा खड़ा बाज़ार में, मांगे सबकी खैर,
ना काहू से दोस्ती,न काहू से बैर.

अर्थ : इस संसार में आकर कबीर अपने जीवन में बस यही चाहते हैं कि सबका भला हो और संसार में यदि किसी से दोस्ती नहीं तो दुश्मनी भी न हो !

—

हिन्दू कहें मोहि राम पियारा, तुर्क कहें रहमाना,
आपस में दोउ लड़ी-लड़ी  मुए, मरम न कोउ जाना।

अर्थ : कबीर कहते हैं कि हिन्दू राम के भक्त हैं और तुर्क (मुस्लिम) को रहमान प्यारा है. इसी बात पर दोनों लड़-लड़ कर मौत के मुंह में जा पहुंचे, तब भी दोनों में से कोई सच को न जान पाया।

—

 

कहत सुनत सब दिन गए, उरझि न सुरझ्या मन.                                                                                             

कही कबीर चेत्या नहीं, अजहूँ सो पहला दिन.

अर्थ : कहते सुनते सब दिन निकल गए, पर यह मन उलझ कर न सुलझ पाया. कबीर कहते हैं कि अब भी यह मन होश में नहीं आता. आज भी इसकी अवस्था पहले दिन के समान ही है.

—

कबीर लहरि समंद की, मोती बिखरे आई.                                                                                                         

बगुला भेद न जानई, हंसा चुनी-चुनी खाई.

अर्थ : कबीर कहते हैं कि समुद्र की लहर में मोती आकर बिखर गए. बगुला उनका भेद नहीं जानता, परन्तु हंस उन्हें चुन-चुन कर खा रहा है. इसका अर्थ यह है कि किसी भी वस्तु का महत्व जानकार ही जानता है।

—

जब गुण को गाहक मिले, तब गुण लाख बिकाई.                                                                                             

जब गुण को गाहक नहीं, तब कौड़ी बदले जाई.

अर्थ : कबीर कहते हैं कि जब गुण को परखने वाला गाहक मिल जाता है तो  गुण की कीमत होती है. पर जब ऐसा गाहक नहीं मिलता, तब गुण कौड़ी के भाव चला जाता है.

—

कबीर कहा गरबियो, काल गहे कर केस.                                                                                                     
ना जाने कहाँ मारिसी, कै घर कै परदेस. 

अर्थ : कबीर कहते हैं कि हे मानव ! तू क्या गर्व करता है? काल अपने हाथों में तेरे केश पकड़े हुए है. मालूम नहीं, वह घर या परदेश में, कहाँ पर तुझे मार डाले.

—

पानी केरा बुदबुदा, अस मानुस की जात.                                                                                                

एक दिना छिप जाएगा,ज्यों तारा परभात.

अर्थ : कबीर का कथन है कि जैसे पानी के बुलबुले, इसी प्रकार मनुष्य का शरीर क्षणभंगुर है।जैसे प्रभात होते ही तारे छिप जाते हैं, वैसे ही ये देह भी एक दिन नष्ट हो जाएगी.

—

हाड़ जलै ज्यूं लाकड़ी, केस जलै ज्यूं घास.                                                                                               

सब तन जलता देखि करि, भया कबीर उदास.

अर्थ : यह नश्वर मानव देह अंत समय में लकड़ी की तरह जलती है और केश घास की तरह जल उठते हैं. सम्पूर्ण शरीर को इस तरह जलता देख, इस अंत पर कबीर का मन उदासी से भर जाता है. —

—

जो उग्या सो अन्तबै, फूल्या सो कुमलाहीं।                                                                                              

जो चिनिया सो ढही पड़े, जो आया सो जाहीं।

अर्थ : इस संसार का नियम यही है कि जो उदय हुआ है,वह अस्त होगा। जो विकसित हुआ है वह मुरझा जाएगा. जो चिना गया है वह गिर पड़ेगा और जो आया है वह जाएगा.

—

झूठे सुख को सुख कहे, मानत है मन मोद.                                                                                                

खलक चबैना काल का, कुछ मुंह में कुछ गोद.

अर्थ : कबीर कहते हैं कि अरे जीव ! तू झूठे सुख को सुख कहता है और मन में प्रसन्न होता है? देख यह सारा संसार मृत्यु के लिए उस भोजन के समान है, जो कुछ तो उसके मुंह में है और कुछ गोद में खाने के लिए रखा है.

—

ऐसा कोई ना मिले, हमको दे उपदेस.                                                                                                      

भौ सागर में डूबता, कर गहि काढै केस.

अर्थ : कबीर संसारी जनों के लिए दुखित होते हुए कहते हैं कि इन्हें कोई ऐसा पथप्रदर्शक न  मिला जो उपदेश देता और संसार सागर में डूबते हुए इन प्राणियों को अपने हाथों से केश पकड़ कर निकाल लेता.

—

संत ना छाडै संतई, जो कोटिक मिले असंत                                                                                                     

चन्दन भुवंगा बैठिया,  तऊ सीतलता न तजंत।

अर्थ : सज्जन को चाहे करोड़ों दुष्ट पुरुष मिलें फिर भी वह अपने भले स्वभाव को नहीं छोड़ता. चन्दन के पेड़ से सांप लिपटे रहते हैं, पर वह अपनी शीतलता नहीं छोड़ता.

—

कबीर तन पंछी भया, जहां मन तहां उडी जाइ.                                                                                          

 जो जैसी संगती कर, सो तैसा ही फल पाइ.

अर्थ : कबीर कहते हैं कि संसारी व्यक्ति का शरीर पक्षी बन गया है और जहां उसका मन होता है, शरीर उड़कर वहीं पहुँच जाता है। सच है कि जो जैसा साथ करता है, वह वैसा ही फल पाता है.

—

तन को जोगी सब करें, मन को बिरला कोई.                                                                                        

सब सिद्धि सहजे पाइए, जे मन जोगी होइ.

अर्थ : शरीर में भगवे वस्त्र धारण करना सरल है, पर मन को योगी बनाना बिरले ही व्यक्तियों का काम है य़दि मन योगी हो जाए तो सारी सिद्धियाँ सहज ही प्राप्त हो जाती हैं.

—

कबीर सो धन संचे, जो आगे को होय.                                                                                                        

सीस चढ़ाए पोटली, ले जात न देख्यो कोय.

अर्थ : कबीर कहते हैं कि उस धन को इकट्ठा करो जो भविष्य में काम आए. सर पर धन की गठरी बाँध कर ले जाते तो किसी को नहीं देखा.

—

माया मुई न मन मुआ, मरी मरी गया सरीर.                                                                                       

आसा त्रिसना न मुई, यों कही गए कबीर .

अर्थ : कबीर कहते हैं कि संसार में रहते हुए न माया मरती है न मन. शरीर न जाने कितनी बार मर चुका पर मनुष्य की आशा और तृष्णा कभी नहीं मरती, कबीर ऐसा कई बार कह चुके हैं.

—

मन हीं मनोरथ छांड़ी दे, तेरा किया न होई.                                                                                                

पानी में घिव निकसे, तो रूखा खाए न कोई.

अर्थ : मनुष्य मात्र को समझाते हुए कबीर कहते हैं कि मन की इच्छाएं छोड़ दो , उन्हें तुम अपने बूते पर पूर्ण नहीं कर सकते। यदि पानी से घी निकल आए, तो रूखी रोटी कोई न खाएगा.

– संत कबीर दास जी की जीवनी – 

कबीर एक ऐसी शख्शियत जिसने कभी शास्त्र नही पढा फिर भी ज्ञानियों की श्रेणीं में सर्वोपरी। कबीर, एक ऐसा नाम जिसे फकीर भी कह सकते हैं और समाज सुधारक भी ।

मित्रों, कबीर भले ही छोटा सा एक नाम हो पर ये भारत की वो आत्मा है जिसने रूढियों और कर्मकाडों से मुक्त भारत की रचना की है। कबीर वो पहचान है जिन्होने, जाति-वर्ग की दिवार को गिराकर एक अद्भुत संसार की कल्पना की।

मानवतावादी व्यवहारिक धर्म को बढावा देने वाले कबीर दास जी का इस दुनिया में प्रवेश भी अदभुत प्रसंग के साथ हुआ। माना जाता है कि उनका जन्म  सन् 1398 में ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन वाराणसी के निकट लहराता नामक स्थान पर हुआ था । उस दिन नीमा नीरू संग ब्याह कर डोली में बनारस जा रही थीं, बनारस के पास एक सरोवर पर कुछ विश्राम के लिये वो लोग रुके थे। अचानक नीमा को किसी बच्चे के रोने की आवाज आई वो आवाज की दिशा में आगे बढी। नीमा ने सरोवर में देखा कि एक बालक कमल पुष्प में लिपटा हुआ रो रहा है। निमा ने जैसे ही बच्चा गोद में लिया वो चुप हो गया। नीरू ने उसे साथ घर ले चलने को कहा किन्तु नीमा के मन में ये प्रश्न उठा कि परिजनों को क्या जवाब देंगे। परन्तु बच्चे के स्पर्श से धर्म, अर्थात कर्तव्य बोध जीता और बच्चे पर गहराया संकट टल गया। बच्चा बकरी का दूध पी कर बङा हुआ। छः माह का समय बीतने के बाद बच्चे का नामकरण संस्कार हुआ। नीरू ने बच्चे का नाम कबीर रखा किन्तु कई लोगों को इस नाम पर एतराज था क्योंकि उनका कहना था कि, कबीर का मतलब होता है महान तो एक जुलाहे का बेटा महान कैसे हो सकता है? नीरू पर इसका कोई असर न हुआ और बच्चे का नाम कबीर ही रहने दिया। ये कहना अतिश्योक्ति न होगी कि अनजाने में ही सही बचपन में दिया नाम बालक के बङे होने पर सार्थक हो गया। बच्चे की किलकारियाँ नीरू और नीमा के मन को मोह लेतीं। अभावों के बावजूद नीरू और नीमा बहुत खुशी-खुशी जीवन यापन करने लगे।

कबीर को बचपन से ही साधु संगति बहुत प्रिय थी। कपङा बुनने का पैतृक व्यवसाय वो आजीवन करते रहे। बाह्य आडम्बरों के विरोधी कबीर निराकार ब्रह्म की उपासना पर जोर देते हैं। बाल्यकाल से ही कबीर के चमत्कारिक व्यक्तित्व की आभा हर तरफ फैलने लगी थी। कहते हैं- उनके बालपन में काशी में एकबार जलन रोग फैल गया था। उन्होने रास्ते से गुजर रही बुढी महिला की देह पर धूल डालकर उसकी जलन दूर कर दी थी।

कबीर का बचपन बहुत सी जङताओं एवं रूढीयों से जूझते हुए बीत रहा था। उस दौरान ये सोच प्रबल थी कि इंसान अमीर है तो अच्छा है। बङे रसूख वाला है तो बेहतर है। कोई गरीब है तो उसे इंसान ही न माना जाये। आदमी और आदमी के बीच फर्क साफ नजर आता था। कानून और धर्म की आङ में रसूखों द्वारा गरीबों एवं निम्नजाती के लोगों का शोषण होता था। वे सदैव सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध थे और इसे कैसे दूर किया जाये इसी विचार में रहते थे।

एक बार किसी ने बताया कि संत रामानंद स्वामी ने सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ लङाई छेङ रखी है। कबीर उनसे मिलने निकल पङे किन्तु उनके आश्रम पहुँचकर पता चला कि वे मुसलमानों से नही मिलते। कबीर ने हार नही मानी और पंचगंगा घाट पर रात के अंतिम पहर पर पहुँच गये और सीढी पर लेट गये। उन्हे पता था कि संत रामानंद प्रातः गंगा स्नान को आते हैं। प्रातः जब स्वामी जी जैसे ही स्नान के लिये सीढी उतर रहे थे उनका पैर कबीर के सीने से टकरा गया। राम-राम कहकर स्वामी जी अपना पैर पीछे खींच लिये तब कबीर खङे होकर उन्हे प्रणाम किये। संत ने पूछा आप कौन? कबीर ने उत्तर दिया आपका शिष्य कबीर। संत ने पुनः प्रश्न किया कि मैने कब शिष्य बनाया? कबीर ने विनम्रता से उत्तर दिया कि अभी-अभी जब आपने राम-राम कहा मैने उसे अपना गुरुमंत्र बना लिया। संत रामदास कबीर की विनम्रता से बहुत प्रभावित हुए और उन्हे अपना शिष्य बना लिये। कबीर को स्वामी जी ने सभी संस्कारों का बोध कराया और ज्ञान की गंगा में डुबकी लगवा दी।

कबीर पर गुरू का रंग इस तरह चढा कि उन्होने गुरू के सम्मान में कहा है,

सब धरती कागज करू, लेखनी सब वनराज।
सात समुंद्र की मसि करु, गुरु गुंण लिखा न जाए।।
यह तन विष की बेलरी, गुरु अमृत की खान।
शीश दियो जो गुरु मिले, तो भी सस्ता जान।।

ये कहना अतिश्योक्ति नही है कि जीवन में गुरू के महत्व का वर्णन कबीर दास जी ने अपने दोहों में पूरी आत्मियता से किया है। कबीर मुसलमान होते हुए भी कभी मांस को हाँथ नही लगाया । कबीर जाँति-पाँति और ऊँच-नीच के बंधनो से परे फक्कङ, अलमस्त और क्रांतिदर्शी थे। उन्होने रमता जोगी और बहता पानी की कल्पना को साकार किया।
कबीर का व्यक्तित्व अनुकरणीय है। वे हर तरह की कुरीतियों का विरोध करते हैं। वे साधु-संतो और सूफी-फकीरों की संगत तो करते हैं लेकिन धर्म के ठेकेदारों से दूर रहते हैं। उनका कहना है कि-

हिंदू बरत एकादशी साधे दूध सिंघाङा सेती।
अन्न को त्यागे मन को न हटके पारण करे सगौती।।
दिन को रोजा रहत है, राति हनत है गाय।
यहां खून वै वंदगी, क्यों कर खुशी खोदाय।।

जीव हिंसा न करने और मांसाहार के पीछे कबीर का तर्क बहुत महत्वपूर्ण है। वे मानते हैं कि दया, हिंसा और प्रेम का मार्ग एक है। यदि हम किसी भी तरह की तृष्णां और लालसा पूरी करने के लिये हिंसा करेंगे तो, घृणां और हिंसा का ही जन्म होगा। बेजुबान जानवर के प्रति या मानव का शोषण करने वाले व्यक्ति कबीर के लिये सदैव निंदनीय थे।

कबीर सांसारिक जिम्मेवारियों से कभी दूर नही हुए। उनकी पत्नी का नाम लोई था, पुत्र कमाल और पुत्री कमाली। वे पारिवारिक रिश्तों को भी भलीभाँति निभाए। जीवन-यापन हेतु ताउम्र अपना पैतृक कार्य अर्थात जुलाहे का काम करते रहे।

कबीर घुमक्ङ संत थे अतः उनकी भाषा सधुक्कङी कहलाती है। कबीर की वांणी बहुरंगी है। कबीर ने किसी ग्रन्थ की रचना नही की। अपने को कवि घोषित करना उनका उद्देश्य भी न था। उनकी मृत्यु के पश्चात उनके शिष्यों ने उनके उपदेशों का संकलन किया जो ‘बीजक’ नाम से जाना जाता है। इस ग्रन्थ के तीन भाग हैं, ‘साखी’, ‘सबद’ और ‘रमैनी’। कबीर के उपदेशों में जीवन की दार्शनिकता की झलक दिखती है। गुरू-महिमा, ईश्वर महिमा, सतसंग महिमा और माया का फेर आदि का सुन्दर वर्णन मिलता है। उनके काव्य में यमक, उत्प्रेक्षा, रूपक, अनुप्रास आदि अलंकारों का सुन्दर समावेश दिखता है। भाषा में सभी आवश्यक सूत्र होने के कारण हजारी प्रसाद दिव्वेदी कबीर को “भाषा का डिक्टेटर” कहते हैं। कबीर का मूल मंत्र था,

“मैं कहता आँखन देखी, तू कहता कागद की लेखिन”।

कबीर की साखियों में सच्चे गुरू का ज्ञान मिलता है। संक्षेप में कहा जा सकता है कि कबीर के काव्य का सर्वाधिक महत्व धार्मिक एवं सामाजिक एकता और भक्ती का संदेश देने में है।

कबीर दास जी का अवसान भी जन्म की तरह रहस्यवादी है। आजीवन काशी में रहने के बावजूद अन्त समय सन् 1518 के करीब मगहर चले गये थे क्योंकि वे कुछ भ्रान्तियों को दूर करना चाहते थे। काशी के लिये कहा जाता था कि यहाँ पर मरने से स्वर्ग मिलता है तथा मगहर में मृत्यु पर नरक। उनकी मृत्यु के पश्चात हिन्दु अपने धर्म के अनुसार उनका अंतिम संस्कार करना चाहते थे और मुसलमान अपने धर्मानुसार विवाद की स्थिती में एक अजीब घटना घटी उनके पार्थिव शरीर पर से चादर हट गई और वहाँ कुछ फूल पङे थे जिसे दोनों समुदायों ने आपस में बाँट लिया। कबीर की अहमियत और उनके महत्व को जायसी ने अपनी रचना में बहुत ही आतमियता से परिलाक्षित किया है।

ना नारद तब रोई पुकारा एक जुलाहे सौ मैं हारा।
प्रेम तन्तु नित ताना तनाई, जप तप साधि सैकरा भराई।।

 

मित्रों, ये कहना अतिश्योक्ति न होगी की कबीर विचित्र नहीं हैं सामान्य हैं किन्तु इसी साघारणपन में अति विशिष्ट हैं। हिन्दी साहित्य के इतिहास में कबीर जैसा व्यक्तित्व कोई नही है।

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शांति पर महान व्यक्तियों के विचार।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

शांति पर महान व्यक्तियों के विचार।

Quote 1: A people free to choose will always choose peace.

In Hindi: जो लोग चुनाव करने के लिए स्वतंत्र हैं वो हमेशा शांति का चुनाव करेंगे।

Ronald Reagan रोनाल्ड रीगन 

Quote 2: An eye for an eye only ends up making the whole world blind.

In Hindi: आँख के बदले में आँख पूरे विश्व को अँधा बना देगी।

Mahatma Gandhi  महात्मा गाँधी

Quote 3: Even peace may be purchased at too high a price.

In Hindi: शायद शांति को भी बहुत ऊँची कीमत पर खरीदा जा सकता है।

Benjamin Franklin बेंजामिन फ्रैंकलिन

Quote 4: I believe in the religion of Islam. I believe in Allah and peace.

In Hindi: मैं इस्लाम में यकीन रखता हूँ। मैं अल्लाह और अमन में यकीन करता हूँ।

Muhammad Ali मुहम्मद अली 

Quote 5: I dream of an Africa which is in peace with itself.

In Hindi: मैं एक ऐसे अफ्रीका का स्वप्न देखता हूँ, जो स्वयम में शांत हो।

Nelson Mandela नेल्सन मंडेला 

Quote 6: If we have no peace, it is because we have forgotten that we belong to each other.

In Hindi: अगर कहीं शांति नहीं है, तो इसकी वजह ये है कि हम भूल चुके हैं कि हम एक-दूसरे के हैं।

Mother Teresa मदर टेरेसा 

Quote 7: If you want to make peace with your enemy, you have to work with your enemy. Then he becomes your partner.

In Hindi: यदि आप अपने दुश्मन के साथ शांति चाहते हैं, तो आपको उसके साथ काम करना होगा। तब वो आपका साथी बन जाएगा।

Nelson Mandela नेल्सन मंडेला 

Quote 8: It is an unfortunate fact that we can secure peace only by preparing for war.

In Hindi: यह एक दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य है, कि हम शांति को केवल युद्ध के लिए तैयार रह कर सुरक्षित कर सकते हैं।

John F. Kennedy जॉन ऍफ़. केनेडी 

Quote 9: It is madness for sheep to talk peace with a wolf.

In Hindi: एक भेड़िये के साथ शांति की बात करना भेंड के लिए पागलपन है।

Thomas Fuller थोमस फूलर 

Quote 10: Let there be work, bread, water and salt for all.

In Hindi: सभी के लिए काम, रोटी, पानी और नमक हो।

Nelson Mandela नेल्सन मंडेला 

Quote 11: Nobody can bring you peace but yourself.

In Hindi: सिवाय आपके कोई भी आपको चैन नहीं दे सकता।

Ralph Waldo Emerson राल्फ वाल्डो एमर्सन 

Quote 12: Peace and justice are two sides of the same coin.

In Hindi: शांति और न्याय एक ही सिक्के के दो पहलू  हैं।

Dwight D. Eisenhower ड्वाईट डी. आइजेन्होवर 

Quote 13: Peace begins with a smile.

In Hindi: शांति की शुरआत मुस्कराहट के साथ होती है।

Mother Teresa मदर टेरेसा 

Quote 14: Peace cannot be achieved through violence, it can only be attained through understanding.

In Hindi: हिंसा से शांति नहीं प्राप्त की जा सकती है, यह सिर्फ समझ के माध्यम से मिल सकती है।

Ralph Waldo Emerson राल्फ वाल्डो एमर्सन 

Quote 15: Peace is a journey of a thousand miles and it must be taken one step at a time.

In Hindi: शांति हज़ार मील का सफ़र है, और इसे एक बार में एक कदम बढ़कर तय किया जाना चाहिए।

Lyndon B. Johnson लिंडन बी.जोंसन

Quote 16: People always make war when they say they love peace.

In Hindi: लोग हमेशा युद्ध करते हैं, जब वो कहते हैं कि उन्हें शांति प्रिय है।

David Herbert Lawrence डेविड हर्बर्ट लारेंस 

Quote 17: We make war that we may live in peace.

In Hindi: हम इसलिए युद्ध करते हैं, कि हम शांति से रह सकें।

Aristotle अरस्तु 

Quote 18: Every goal, every action, every thought, every feeling one experiences, whether it be consciously or unconsciously known, is an attempt to increase one’s level of peace of mind.

In Hindi: प्रत्येक लक्ष्य, प्रत्येक कार्य, प्रत्येक विचार, प्रत्येक भावना, चाहे वह चेतन या अवचेतन रूप में ज्ञात हो, मानसिक शांति बढाने की दिशा में एक प्रयास है।

Sydney Madwed सिडनी मैडवेड 

Quote 19: He that would live in peace and at ease must not speak all he knows or all he sees.

In Hindi: वह जो शांति और चैन से रहना चाहता है उसे हर वो चीज नहीं बोलनी चाहिए जो वो जानता या देखता है।

Benjamin Franklin बेंजामिन फ्रैंकलिन 

Quote 20: I don’t know whether war is an interlude during peace, or peace an interlude during war.

In Hindi: मैं नहीं जानता कि युद्ध शांति के बीच का अंतराल है या शांति युद्ध के बीच का।

Georges Clemenceau जोर्ज्स क्लेमेंसिऊ

Quote 21: It isn’t enough to talk about peace. One must believe in it. And it isn’t enough to believe in it. One must work at it.

In Hindi: सिर्फ शांति के बारे में बात करना पर्याप्त नहीं है। उसमे यकीन भी करना होगा। और सिर्फ यकीन करना पर्याप्त नहीं है। उसपे काम भी करना होगा।

Eleanor Roosevelt एलेनोर रूजवेल्ट

 Quote 22: Nonviolence is the first article of my faith. It is also the last article of my creed.

In Hindi: अहिंसा मेरे विश्वास की पहली वस्तु है। यह मेरे मत की आखिरी वस्तु भी है।

Mahatma Gandhi महात्मा गाँधी 

Quote 23: One cannot subdue a man by holding back his hands. Lasting peace comes not from force.

In Hindi: कोई किसी का हाथ पीछे पकड़कर वश में नहीं कर सकता. स्थाई शांति बल से नहीं आती है।

David Borenstein डेविड बोरेन्स्टीन

Quote 24: Peace is not only better than war, but infinitely more arduous.

In Hindi: शांति यद्ध से सिर्फ बेहतर नहीं है, बल्कि कहीं अधिक कठिन भी है।

George Bernard Shaw जोर्ज बर्नार्ड शा

Quote 25: Peace is rarely denied to the peaceful.

In Hindi: शांति शायद ही कभी शांतिपूर्ण व्यक्ति को नहीं दी जाती।

Friedrich Schiller फ्रेडरिक शीलर 

Quote 26: Peace is the first thing the angels sang.

In Hindi: शांति पहली चीज  है जो फरिश्तों ने गाई।

John Keble जॉन केबले 

Quote 27: Peace is when time doesn’t matter as it passes by.

In Hindi: शांति तब है जब समय के बीतने से फर्क नहीं पड़ता।

Maria Schell मारिया शेल 

Quote 28: Power to the peaceful!

In Hindi: शांतिपूर्ण को सत्ता दो।

Michael Franti मिशेल फ्रंटि 

Quote 29: The real and lasting victories are those of peace, and not of war.

In Hindi: वास्तविक और स्थाई जीत शांति की होती है, युद्ध की नहीं।

Ralph Waldo Emerson राल्फ वाल्डो एमर्सन 

Quote 30: Those who make peaceful revolution impossible will make violent revolution inevitable.

In Hindi: जो शांतिपूर्ण क्रांति को असंभव बना देते हैं वो हिंसक क्रांति को अपरिहार्य बना देंगे।

John F. Kennedy जॉन ऍफ़ केनेडी 

Quote 31: War will never cease until babies begin to come into the world with larger cerebrums and smaller adrenal glands.

In Hindi: युद्ध तब तक नही बंद होंगे जब तक इस दुनिया में बच्चे बड़े दिमाग और छोटे एड्रीनल ग्लैंड के साथ नहीं आना शुरू होंगे।

H. L. Mencken एच. एल. मेंकेन

Quote 32: You cannot find peace by avoiding life.

In Hindi: जीवन को टाल कर आप शांति नहीं पा सकते।

Virginia Woolf वर्जिनिया वूल्फ 

Quote 33: You don’t have to have fought in a war to love peace.

In Hindi: शांति से प्रेम करने के लिए आपको युद्ध में लड़ा हुआ होना ज़रूरी नहीं है।

Geraldine Ferraro गेरेल्डाइन फेर्रारो 

Quote 34: Peace is its own reward.

In Hindi: शांति  अपने आप में ईनाम है।

Mahatma Gandhi महत्मा गाँधी 

Note:- Post inspired by AKC(http://www.achhikhabar.com/), I am greatful to AKC & My dear friend Mr. Gopal Mishra. For more Quotes visit at: http://www.achhikhabar.com/

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In English

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