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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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seema ranga indra articles

शक्तिशाली बनना है तुझे मेरी लाडो।

Kmsraj51 की कलम से…..

Shaktishali Banna Hai Tujhe Meri Laado | शक्तिशाली बनना है तुझे मेरी लाडो।

Women empowerment refers to making women powerful to make them capable of deciding for themselves.हम अपनी बेटियों को फूल की तरह, तितली की तरह नाजुक बनाते जा रहे हैं। क्योंकि हम सब अपनी लाड-दुलारी से बेहद प्यार करते हैं और चाहते हैं कि उसे हमारे सामने रहते हुए एक भी कष्ट ना सहन करना पड़े। अच्छी बात है परंतु आज के समाज को देखते हुए सही नहीं है। कुछ समय पीछे चले जाए तो पहले की मां बेटी को तमाम काम सिखा देती थी। ऐसा नहीं कि बेटियां पढ़ती नहीं थी। पढ़ाई के साथ-साथ घर का काम करना भी उन्हें बचपन से सिखाया जाता था।

गांव की बेटियां

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि लड़कियां अपने घर का सारा काम करके पढ़ने जाती थी। गांव में तो यह अब भी जारी है, कुछ घरों को छोड़कर। क्योंकि उनकी मां को पशुओं के साथ घर की जिम्मेदारी निभानी होती है। गांव में तो ज्यादातर को दूसरे गांव में पढ़ने जाना पड़ता है। सुबह जल्दी उठना घर के काम में मां का हाथ बंटाना उन्हें शुरू से सिखाया जाता है।

ऐसा नहीं है सिर्फ बेटियों से काम करवाया जाता है लड़कों को भी बहुत सारे काम करवाए जाते हैं। समय के साथ-साथ लोगों की सोच भी बदलती जा रही है। अब अगर कोई मां कुछ करवाना भी चाहती है तो पिताजी आकर बोलेंगे नहीं मेरी बेटी काम नहीं करेगी। तुम किस लिए हो। जिसे तुम यह सब कह रहे हो क्या वह किसी की बेटी नहीं है। बोलते हैं यह तो सिर्फ पढ़ेंगी, अच्छी बात है पढ़ना बहुत जरूरी है। परन्तु कुछ काम सीखने में भला क्या बुराई है।

मेरे पापा अक्सर कहते थे बेटा चाहे कुछ भी काम मत सीखना पर खाना बनाना जरूर सीखना, और उन्होंने हमें सिखाया भी। ऐसा नहीं कि सिर्फ हम बहनों को बल्कि भाईयों को भी खाना बनाना सिखाया है। और उनका कहना बिल्कुल सही था जब हम बाहर पढ़ने गए तो खाना बनाने में कोई दिक्कत भी नहीं आई। घर पर आराम से खाना बनाकर खाते थे उससे पैसे तो बचते थे साथ में शुद्ध खाना मिल जाता था। कई मां लड़की को कुछ भी नहीं करने देती। टेबल पर चाय, नाश्ता सब कुछ दे देती है सोचती है कि पढ़ लिखकर नौकरी लग जाएगी।

पढ़ाई के साथ-साथ…

पर ये सही नहीं है पढ़ाई के साथ-साथ उसकी योग क्लास, कराटे क्लास भी लगाएं। उसे मजबूत बनाएं। ताकि आवश्यकता पड़ने पर सब काम आए। क्योंकि उसे आगे भविष्य में जाकर अकेले भी रहना पड़ेगा और देर रात को भी घर आना पड़ेगा तो उसका पढ़ाई के साथ-साथ अपने शरीर को मजबूत करना बेहद जरूरी है।

चाहकर भी मां-बाप उसके साथ नहीं रह सकते। कभी ना कभी तो उसे अकेला रहना ही पड़ेगा। अगर आप सोच रहे हैं बाहर खा सकती हैं तो रोज-रोज बाहर का खाना नहीं खा सकते। सोचते हो कि कोई भी खाना बनाने वाली मिल जाएगी, आप सभी ने कोरोना काल में देख लिया होगा। वक्त का भला किसे पता है। दुनिया बड़ी तेजी से बदलती जा रही है सिर्फ पढाई से काम नहीं चलेगा। अपनी बिटिया को स्वावलंबी बनाना होगा। उसे समाजिक बनाना भी होगा ताकि बाहर निकल कर उसे समझ आ जाए दुनिया में क्या चल रहा है।

सभी प्यारी मां और बेटियों को समर्पित मेरी चंद पंक्तियां…

मेरी लाडो तू हमारी जान है,
मेरी घर की शान है।
तू मेरे घर की रौनक है,
तुझसे महकता संसार है।
बेटी खुश है तो घर के
सभी सदस्य खुश हैं।
उसे ताकतवर बनाना,
हमारा फर्ज है,
और हम पढ़ाई के साथ साथ
जुड़े-कराटे और अपने
पैरों पर खड़ा भी करेंगे।

♦ सीमा रंगा इन्द्रा जी – हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस लेख में लिखा गया है कि बेटियों को सिर्फ नाजुक और पढ़ाई में ही ध्यान देने की बजाय, उन्हें विभिन्न कौशल भी सीखाना चाहिए। लेखिका के पापा ने उन्हें खाना बनाने की कौशल सिखाया और उन्हें समझाया कि स्वावलंबी बनना महत्वपूर्ण है। उनका मत है कि बेटियों को पढ़ाई के साथ-साथ अपने शारीरिक और सामाजिक कौशल भी विकसित करना चाहिए, ताकि वे आगे जाकर समस्याओं का समाधान कर सकें और स्वतंत्र रूप से जीवन जी सकें।

—————

यह लेख (शक्तिशाली बनना है तुझे मेरी लाडो।) “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख, कवितायें व कहानी सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं, कहानी और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम सीमा रंगा इंद्रा है। मेरी शिक्षा बी एड, एम. ए. हिंदी। व्यवसाय – लेखिका, प्रेरक वक्ता व कवयित्री। प्रकाशन – सतरंगी कविताएं, देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं व लेख, दैनिक भास्कर, दैनिक भास्कर बाल पत्रिका, अमर उजाला, संडे रिपोर्टर, दिव्य शक्ति टाइम्स ऑफ़ डेजर्ट, कोल्डफीरर, प्रवासी संदेश, वूमेन एक्सप्रेस, इंदौर समाचार लोकांतर, वूमेन एक्सप्रेस सीमांत रक्षक युगपक्ष, रेड हैंडेड, मालवा हेराल्ड, टीम मंथन, उत्कर्ष मेल काव्य संगम पत्रिका, मातृत्व पत्रिका, कोलकाता से प्रकाशित दैनिक पत्रिका, सुभाषित पत्रिका शब्दों की आत्मा पत्रिका, अकोदिया सम्राट दिव्या पंचायत, खबर वाहिनी, समतावादी मासिक पत्रिका, सर्वण दर्पण पत्रिका, मेरी कलम पूजा पत्रिका, सुवासित पत्रिका, 249 कविता के लेखक कहानियां प्रकाशित देश के अलग-अलग समाचार पत्रों में समय-समय पर।

सम्मान पत्र -180 ऑनलाइन सम्मान पत्र, चार बार BSF से सम्मानित, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर सोसायटी से सम्मानित, नेहरू युवा केंद्र बाड़मेर से सम्मानित, शुभम संस्थान और विश्वास सेवा संस्थान द्वारा सम्मानित, प्रज्ञा क्लासेस बाड़मेर द्वारा, आकाशवाणी से लगातार काव्य पाठ, सम्मानित, बीएसएफ में वेलफेयर के कार्यों को सुचारु रुप से चलाने हेतु सम्मानित। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, प्रेसिडेंट ग्लोबल चेकर अवार्ड।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिन्दी साहित्य Tagged With: Mahila Sashaktikaran Par Nibandh, Seema Ranga Indra, seema ranga indra articles, Women Empowerment Essay, महिला सशक्तिकरण पर निबंध, महिला सशक्तिकरण पर निबंध 500 शब्दों में, शक्तिशाली बनना है तुझे मेरी लाडो - सीमा रंगा इन्द्रा, सीमा रंगा इन्द्रा, सीमा रंगा इन्द्रा जी की रचनाएँ

एकमात्र हिंदी ही हमारी भाषा हो।

Kmsraj51 की कलम से…..

Let Hindi Be Our Only Language | एकमात्र हिंदी ही हमारी भाषा हो।

The national language empowers the soul of the entire nation. Let Hindi be our only language.हिंदी ही एकमात्र ऐसी भाषा है जो हमारे पूरे भारत में बोली और समझी जाती है। चाहे हमारे बच्चे कितनी भी अंग्रेजी या किसी और भाषा को सीख ले परंतु वार्तालाप तो हिंदी में ही करते हैं। क्योंकि हमारी जड़े तो हिंदी में ही हैं, जो बात हमारी मातृभाषा में है वह बात किसी और भाषा में कहां? हमारे सिनेमा जगत को ही देख लीजिए हिंदी भाषा में अलग-अलग राज्यों में हजारों फिल्में बनती है। क्योंकि सिनेमा जगत को यह बात अच्छे से पता है कि अगर फिल्म को सुपरहिट करना है तो हिंदी एकमात्र ऐसी भाषा है जो उनकी फिल्म को आगे ले जाएगी। जिसे परिवार के सभी सदस्य सुन सकते हैं, बोल सकते हैं, लिख सकते हैं। फिर दूसरी भाषा क्यों?

मेरा मकसद किसी दूसरी भाषा को गलत बताना नहीं है। बस अपनी भाषा के बारे में अवगत कराना है। विदेशों में हिंदी को पढ़ाने-लिखाने की कक्षाएं लगती हैं। बहुत सारे विदेशी लोग भारत में सिर्फ और सिर्फ हिंदी सीखने के लिए ही आते हैं और भारतीय संस्कृति को अपना रहे हैं। जब अमेरिका से डोनाल्ड ट्रंप भारत आए थे तो उन्होंने नमस्ते! बोल कर सबके दिलों में अलग पहचान बना ली थी।

हिंदी भाषा का रुतबा है…

यह हमारी हिंदी भाषा का रुतबा है कि अमेरिका के लोग भी इसे सम्मान के साथ बोलते हैं। वह किसी और भाषा में कहां है। अखबार हो या टीवी जगत हो हर स्थान पर हिंदी छाई रहती है। हमारे देश माननीय प्रधानमंत्री जी भी हमेशा अपने भाषण हिंदी भाषा में देते हैं। उसी का नतीजा है कि उनका इतना रूतबा है। हिंदी आम बोलचाल की भाषा है, जिसे पढ़ें लिखे लोग तो समझते हैं। आम नागरिक भी आसानी से समझ जाता है।

यह ऐसी भाषा है जो सभी भाषाओं के शब्दों को आसानी से अपने अंदर समा लेती है जैसे टी वी, रेल हजारों ऐसे हैं विदेशी शब्द है जो हिंदी में आए हुए हैं। हमारी हिंदी भाषा भी माँ की तरह जो सबका मान-सम्मान कर देती है और हमेशा करती रहेगी।

मां की ममता की प्यारी है,
प्राचीन से भी प्राचीन है।
समाया जिसने प्यार सबके लिए,
वह हमारी हिंदी भाषा,
विदेशों तक जिसका डंका बाजे।

हमें गर्व है हिंदी भाषा पर…

अगर हर जगह हिंदी भाषा का प्रयोग होने लगा तो इससे आम नागरिक को बहुत फायदा होगा। ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी आसानी से अपनी बात को हर क्षेत्र तक पहुंचा सकतें हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में हिंदी भाषा का ही प्रयोग होता है। उनकी पहुंच भी हर जगह हो जाएगी। इसलिए हिंदी भाषा की प्रसिद्धि दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। भारत देश में ही नहीं अपितु विदेशों में भी हिंदी का परचम लहरा रहा है। हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी भी हर जगह पर हिंदी भाषा का ही प्रयोग करते हैं। हमें गर्व है कि दुनिया का बड़ा हिस्सा हिंदी भाषा का प्रयोग करता है।

♦ सीमा रंगा इन्द्रा जी – हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस लेख में हिंदी भाषा के महत्व को बताया गया है। लेखिका के अनुसार, हिंदी हमारे देश भारत में एकमात्र भाषा है जो पूरे देश में बोली और समझी जाती है। हिंदी भाषा का महत्व यहाँ पर उजागर किया गया है कि चाहे कोई भी अन्य भाषा सीख ले, लेकिन वार्तालाप को हम हिंदी में ही करते हैं क्योंकि हमारी मातृभाषा हिंदी है। हिंदी के माध्यम से हमारा संवाद हमारी संस्कृति और भाषा के साथ जुड़ा रहता है। हिंदी भाषा विश्वभर में अपना महत्व साबित कर चुकी है, खासकर सिनेमा जगत में। हिंदी में बनी फिल्में विभिन्न राज्यों में प्रसिद्ध होती हैं और हिंदी भाषा का प्रयोग किया जाता है। हिंदी भाषा का प्रचार और प्रसार बढ़ाने से हमारे देश का संवाद और सम्पूर्ण समाज में समृद्धि हो सकती है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने इसलिए हिंदी के महत्व को स्थापित किया और यह संदेश दिया कि हमें अपनी भाषा का सम्मान करना चाहिए।

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यह लेख (एकमात्र हिंदी ही हमारी भाषा हो।) “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख, कवितायें व कहानी सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं, कहानी और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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गांव से पलायन का जिम्मेदार कौन?

Kmsraj51 की कलम से…..

Gaanv Se Palaayan Ka Jimmedaar Kaun? | गांव से पलायन का जिम्मेदार कौन?

गांव की आबादी आज घटती जा रही है। गांव के लोग शहरों की तरफ रुख़ कर रहे हैं। इसका कारण सबका अपना-अपना मत होगा। परंतु बेरोजगारी और सुविधाओं की कमी से गांव वाले ना चाहते हुए भी अपना घर छोड़ कर शहर के छोटे-छोटे कमरों में रहने को मजबूर हैं। क्योंकि हमारे गांव में बिजली, पानी, शिक्षा, रोजगार नहीं है। मैं सभी गांव की बात नहीं कर रही। परंतु बहुत गांवों में यह समस्या मौजूद है। शहरों का विकास तेजी से हो रहा है और गांव में जाकर देखो, शिक्षा के नाम पर एक प्राइमरी या हाई स्कूल। वह भी सभी गांव में नहीं है। आगे बेचारे गरीब बच्चे कहां जाए पढ़ने? गांव के बच्चों को पढ़ने के लिए बहुत सारी समस्याओं से गुजरना पड़ता है।

यातायात — गांव में यातायात की सुविधा नहीं होती कैसे जाए पढ़ने के लिए बाहर। उनके पास दो विकल्प होते हैं या तो पढ़ाई छोड़ दे या फिर अपना गांव छोड़ शहर में पढ़ने जाएं। जिनके पास सुविधाएं हैं वे आसानी से शहर पढ़ने चले जाते हैं। पर जो गरीब है वह कैसे जाए पढ़ने के लिए। इसी कारण वह पीछे रह जाता। उसकी पढ़ाई छूट जाती है।

बिजली — बिजली की समस्या सबसे बड़ा कारण है अब चाहे कोई लाख दावे करे कि गांव-गांव तक बिजली पहुंची है गांव तक बिजली की तारें जरूर पहुंची है। परंतु गांव में पूरा दिन, पूरी रात बिजली नहीं रहती। गांव में घंटों का समय तय रहता है फिर उसके बाद लाइट कट जाती है। गांव के बच्चों को घर के कामों के साथ-साथ खेती-बाड़ी के कामों में हाथ भी बंटाना होता है।

पानी — पानी गांव में बहुत कम आता है प्रतिदिन तो आता नहीं दो या 3 दिन बाद आता है। किसी-किसी गांव में तो पानी की और भी गंभीर समस्याएं हैं। सुविधाओं की कमी के साथ-साथ ग्रामीण छात्रों को पानी की कमी को भी झेलना पड़ता है।

रोजगार — गांव में रोजगार के साधनों की बहुत कमी है अगर सरकार चाहे तो तीन-चार गांव के बीच कोई फैक्ट्री है या किसी भी तरह का काम लगा सकती है। जिससे गांव के युवाओं को अपना घर ना छोड़ना पड़े और उन्हें आसानी से रोजगार मिल जाए।जिससे उन्हें अपना घर परिवार भी नहीं छोड़ना पड़े और गांव से युवाओं का पलायन भी रुक जाएगा। ऐसा कोई नहीं होगा जो सारी सुख-सुविधाओं के होते हुए अपने घर, गांव को छोड़कर बाहर जाए।

इंटरनेट — हमसभी जानते है की आजकल ज्यादातर सभी कार्य ऑनलाइन इंटरनेट पर होता है, आज भी गावों में इंटरनेट की सुविधा ना पहुंचने के कारण, गांव के युथ (बच्चों) को मज़बूरी में शहर की तरफ भागना पड़ता है। अगर गावों में अच्छी अनलिमिटेड ब्रॉडबैंड इंटरनेट की सुविधा पहुंच जाए तो, बेरोजगार गांव के बच्चे भी कुछ ऑनलाइन कार्य कर कमा सके। वर्तमान सरकार को गांव में जल्द से जल्द अच्छी अनलिमिटेड ब्रॉडबैंड इंटरनेट की सुविधा पहुँचाना चाहिए।

सड़के — अगर गांव की सड़कें, स्कूल और कॉलेज बना दिया जाए तो ग्रामीण बच्चे कदापि भी शहर की तरफ नहीं जाएंगे। बिजली की अच्छी सुविधा दे दी जाए जब शहर की सड़कों पर दोनों तरफ पेड़ पौधे लगा रखे तो गांव में क्यों नहीं? शहर में हर 5 मिनट के अंतराल पर एक पार्क मिल जाएगा क्या गांव के बच्चों को पार्क नहीं चाहिए।

जब ग्रामीण बच्चों को सुविधाएं कम मिलती है तो प्रतियोगी परीक्षाओं में बच्चों को एक सम्मान परीक्षा क्यों ? शहर में रोजगार के अवसर उपलब्ध है परंतु ग्रामीण लोगों को यह सुविधा से वंचित रखा था। जब तक ग्रामीण इलाकों में सुविधाएं नहीं होंगी तब तक हमारा देश कैसे तरक्की कर सकता है।

♦ सीमा रंगा इन्द्रा जी – हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इंटरनेट, यातायात, बिजली, पानी, रोजगार, सड़के इत्यादि इस तरह की मुलभुत सुविधाएं का ना होना गांव के बच्चों की तरक्की को फुल स्टॉप लगा देता है। जब ग्रामीण बच्चों को सुविधाएं कम मिलती है तो प्रतियोगी परीक्षाओं में बच्चों को एक सम्मान परीक्षा क्यों ? शहर में रोजगार के अवसर उपलब्ध है परंतु ग्रामीण लोगों को यह सुविधा से वंचित रखा था। जब तक ग्रामीण इलाकों में सुविधाएं नहीं होंगी तब तक हमारा देश कैसे तरक्की कर सकता है।

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यह लेख (गांव से पलायन का जिम्मेदार कौन?) “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख, कवितायें व कहानी सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं, कहानी और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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हर बार अंदाजा सही नहीं होता।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ हर बार अंदाजा सही नहीं होता। ♦

ट्रेन अपनी स्पीड से चली जा रही थी। परन्तु रमा की टिकट कन्फर्म नहीं हुई थी, परन्तु उनका जाना बहुत जरूरी था इसलिए रमा अपने तीन बच्चों के साथ बिना टिकट कन्फर्म ही ट्रेन में चढ़ गए थे। सोचे हो ही जाएगी, पर बैठने के बाद पता चला टिकट कन्फर्म नहीं हुई। टीटी ने उन्हें सीट पर बैठने को कहा, जैसे ही बैठे एक महिला ने कहा ये हमारी सीट है बड़े ही रोब से। बेचारी को कुछ राहत मिली ही थी। उसे क्या पता था कि उसकी खुशी बस कुछ ही पल की थी। एक आस लगाए टकटकी लगाए उसी महिला को बार-बार इस उम्मीद में निहार रही थी कि शायद वह अपनी एक सीट हमें दे-दें क्योंकि उसके दो बच्चे थे और एक बच्चा लगभग 4 साल का था। उसकी मां ने उसे पास ही अपनी सीट पर सुला रखा था। पर उन्होंने चार सीट बुक करवा रखी थी।

3 सीटों पर ही बैठे थे चौथी सीट खाली थी। रमा ने जैसा सोचा था ऐसा कुछ नहीं हुआ उस महिला ने उसकी तरफ मुड़ के देखा भी नहीं, उसी की बगल वाली सीट पर एक आदमी काफी देर से रमा को घूरे जा रहा था। रमा बार-बार उसे देखकर अपनी नजरें झुका मन ही मन बुदबुदा रही थी। कैसा आदमी है कब से घूरे जा रहा है शर्म नहीं आती है ऐसे लोग बुरे ही होते हैं। क्योंकि वह आदमी देखने में ऐसा लग रहा था शायद कई दिन से नहाया नहीं था। उसके कपड़े भी बहुत मैले- कुचैले थे। ऐसा करते-करते ट्रेन ने कब गति पकड़ ली और रात्रि का समय कब हो गया रमा को आभास ही नहीं हुआ।

वह आदमी अपनी सीट से उठकर आया और बोला बहन जी आप मेरी सीट पर आकर बैठ जाए। आप ऐसे कब तक बच्चों का हाथ पकड़े खड़ी रहेंगी। रमा का तो जैसे खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा था और वह धन्यवाद करते हुए शर्म के मारे गर्दन नीचे किए हुए और अपने तीनों बच्चों को सीट पर बैठा दिया और खुद भी बैठ गई।

आदमी ट्रेन के दरवाजे पर जाकर खड़ा हो गया। रमा लगातार उसे ही देखे जा रही थी। जैसे-जैसे ट्रेन अपनी रफ्तार पकड़ती जा रही थी रमा के अंदर भी प्रश्नों का भूचाल आ रहा था। मन ही मन सोच रही थी कि मैंने इनके कपड़ों को देखकर और इनके हाल को देखकर अंदाजा लगा लिया था कि यह कोई अपराधी प्रवृत्ति का आदमी है, परंतु मेरा अंदाजा बिल्कुल गलत निकला और मुझे अब अपनी सोच पर बहुत शर्म आ रही है। आज जब भी रमा को ट्रेन यात्रा की याद आती है तो हर बार रमा यही सोचती है कि हर बार हमारा अंदाजा सही नहीं होता।

♦ सीमा रंगा इन्द्रा जी – हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — जरुरी नही की हर बार आपका अंदाज़ा सही ही हो, कभी भी किसी के चेहरे और हावभाव को देखकर तुरंत उसके प्रति अपना नकारात्मक विचार नहीं बना लेना चाहिए। पहले सच्चाई के तह तक जाए और दिलसे सोचकर अपना विचार बनाएं। जैसे-जैसे ट्रेन अपनी रफ्तार पकड़ती जा रही थी रमा के अंदर भी प्रश्नों का भूचाल आ रहा था। मन ही मन सोच रही थी कि मैंने इनके कपड़ों को देखकर और इनके हाल को देखकर अंदाजा लगा लिया था कि यह कोई अपराधी प्रवृत्ति का आदमी है, परंतु मेरा अंदाजा बिल्कुल गलत निकला और मुझे अब अपनी सोच पर बहुत शर्म आ रही है। आज जब भी रमा को ट्रेन यात्रा की याद आती है तो हर बार रमा यही सोचती है कि हर बार हमारा अंदाजा सही नहीं होता।

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यह लेख (हर बार अंदाजा सही नहीं होता।) “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख, कवितायें व कहानी सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं, कहानी और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम सीमा रंगा इंद्रा है। मेरी शिक्षा बी एड, एम. ए. हिंदी। व्यवसाय – लेखिका, प्रेरक वक्ता व कवयित्री। प्रकाशन – सतरंगी कविताएं, देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं व लेख, दैनिक भास्कर, दैनिक भास्कर बाल पत्रिका, अमर उजाला, संडे रिपोर्टर, दिव्य शक्ति टाइम्स ऑफ़ डेजर्ट, कोल्डफीरर, प्रवासी संदेश, वूमेन एक्सप्रेस, इंदौर समाचार लोकांतर, वूमेन एक्सप्रेस सीमांत रक्षक युगपक्ष, रेड हैंडेड, मालवा हेराल्ड, टीम मंथन, उत्कर्ष मेल काव्य संगम पत्रिका, मातृत्व पत्रिका, कोलकाता से प्रकाशित दैनिक पत्रिका, सुभाषित पत्रिका शब्दों की आत्मा पत्रिका, अकोदिया सम्राट दिव्या पंचायत, खबर वाहिनी, समतावादी मासिक पत्रिका, सर्वण दर्पण पत्रिका, मेरी कलम पूजा पत्रिका, सुवासित पत्रिका, 249 कविता के लेखक कहानियां प्रकाशित देश के अलग-अलग समाचार पत्रों में समय-समय पर।

सम्मान पत्र -180 ऑनलाइन सम्मान पत्र, चार बार BSF से सम्मानित, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर सोसायटी से सम्मानित, नेहरू युवा केंद्र बाड़मेर से सम्मानित, शुभम संस्थान और विश्वास सेवा संस्थान द्वारा सम्मानित, प्रज्ञा क्लासेस बाड़मेर द्वारा, आकाशवाणी से लगातार काव्य पाठ, सम्मानित, बीएसएफ में वेलफेयर के कार्यों को सुचारु रुप से चलाने हेतु सम्मानित। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, प्रेसिडेंट ग्लोबल चेकर अवार्ड।

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