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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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सीमा रंगा इन्द्रा

शक्तिशाली बनना है तुझे मेरी लाडो।

Kmsraj51 की कलम से…..

Shaktishali Banna Hai Tujhe Meri Laado | शक्तिशाली बनना है तुझे मेरी लाडो।

Women empowerment refers to making women powerful to make them capable of deciding for themselves.हम अपनी बेटियों को फूल की तरह, तितली की तरह नाजुक बनाते जा रहे हैं। क्योंकि हम सब अपनी लाड-दुलारी से बेहद प्यार करते हैं और चाहते हैं कि उसे हमारे सामने रहते हुए एक भी कष्ट ना सहन करना पड़े। अच्छी बात है परंतु आज के समाज को देखते हुए सही नहीं है। कुछ समय पीछे चले जाए तो पहले की मां बेटी को तमाम काम सिखा देती थी। ऐसा नहीं कि बेटियां पढ़ती नहीं थी। पढ़ाई के साथ-साथ घर का काम करना भी उन्हें बचपन से सिखाया जाता था।

गांव की बेटियां

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि लड़कियां अपने घर का सारा काम करके पढ़ने जाती थी। गांव में तो यह अब भी जारी है, कुछ घरों को छोड़कर। क्योंकि उनकी मां को पशुओं के साथ घर की जिम्मेदारी निभानी होती है। गांव में तो ज्यादातर को दूसरे गांव में पढ़ने जाना पड़ता है। सुबह जल्दी उठना घर के काम में मां का हाथ बंटाना उन्हें शुरू से सिखाया जाता है।

ऐसा नहीं है सिर्फ बेटियों से काम करवाया जाता है लड़कों को भी बहुत सारे काम करवाए जाते हैं। समय के साथ-साथ लोगों की सोच भी बदलती जा रही है। अब अगर कोई मां कुछ करवाना भी चाहती है तो पिताजी आकर बोलेंगे नहीं मेरी बेटी काम नहीं करेगी। तुम किस लिए हो। जिसे तुम यह सब कह रहे हो क्या वह किसी की बेटी नहीं है। बोलते हैं यह तो सिर्फ पढ़ेंगी, अच्छी बात है पढ़ना बहुत जरूरी है। परन्तु कुछ काम सीखने में भला क्या बुराई है।

मेरे पापा अक्सर कहते थे बेटा चाहे कुछ भी काम मत सीखना पर खाना बनाना जरूर सीखना, और उन्होंने हमें सिखाया भी। ऐसा नहीं कि सिर्फ हम बहनों को बल्कि भाईयों को भी खाना बनाना सिखाया है। और उनका कहना बिल्कुल सही था जब हम बाहर पढ़ने गए तो खाना बनाने में कोई दिक्कत भी नहीं आई। घर पर आराम से खाना बनाकर खाते थे उससे पैसे तो बचते थे साथ में शुद्ध खाना मिल जाता था। कई मां लड़की को कुछ भी नहीं करने देती। टेबल पर चाय, नाश्ता सब कुछ दे देती है सोचती है कि पढ़ लिखकर नौकरी लग जाएगी।

पढ़ाई के साथ-साथ…

पर ये सही नहीं है पढ़ाई के साथ-साथ उसकी योग क्लास, कराटे क्लास भी लगाएं। उसे मजबूत बनाएं। ताकि आवश्यकता पड़ने पर सब काम आए। क्योंकि उसे आगे भविष्य में जाकर अकेले भी रहना पड़ेगा और देर रात को भी घर आना पड़ेगा तो उसका पढ़ाई के साथ-साथ अपने शरीर को मजबूत करना बेहद जरूरी है।

चाहकर भी मां-बाप उसके साथ नहीं रह सकते। कभी ना कभी तो उसे अकेला रहना ही पड़ेगा। अगर आप सोच रहे हैं बाहर खा सकती हैं तो रोज-रोज बाहर का खाना नहीं खा सकते। सोचते हो कि कोई भी खाना बनाने वाली मिल जाएगी, आप सभी ने कोरोना काल में देख लिया होगा। वक्त का भला किसे पता है। दुनिया बड़ी तेजी से बदलती जा रही है सिर्फ पढाई से काम नहीं चलेगा। अपनी बिटिया को स्वावलंबी बनाना होगा। उसे समाजिक बनाना भी होगा ताकि बाहर निकल कर उसे समझ आ जाए दुनिया में क्या चल रहा है।

सभी प्यारी मां और बेटियों को समर्पित मेरी चंद पंक्तियां…

मेरी लाडो तू हमारी जान है,
मेरी घर की शान है।
तू मेरे घर की रौनक है,
तुझसे महकता संसार है।
बेटी खुश है तो घर के
सभी सदस्य खुश हैं।
उसे ताकतवर बनाना,
हमारा फर्ज है,
और हम पढ़ाई के साथ साथ
जुड़े-कराटे और अपने
पैरों पर खड़ा भी करेंगे।

♦ सीमा रंगा इन्द्रा जी – हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस लेख में लिखा गया है कि बेटियों को सिर्फ नाजुक और पढ़ाई में ही ध्यान देने की बजाय, उन्हें विभिन्न कौशल भी सीखाना चाहिए। लेखिका के पापा ने उन्हें खाना बनाने की कौशल सिखाया और उन्हें समझाया कि स्वावलंबी बनना महत्वपूर्ण है। उनका मत है कि बेटियों को पढ़ाई के साथ-साथ अपने शारीरिक और सामाजिक कौशल भी विकसित करना चाहिए, ताकि वे आगे जाकर समस्याओं का समाधान कर सकें और स्वतंत्र रूप से जीवन जी सकें।

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यह लेख (शक्तिशाली बनना है तुझे मेरी लाडो।) “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख, कवितायें व कहानी सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं, कहानी और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम सीमा रंगा इंद्रा है। मेरी शिक्षा बी एड, एम. ए. हिंदी। व्यवसाय – लेखिका, प्रेरक वक्ता व कवयित्री। प्रकाशन – सतरंगी कविताएं, देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं व लेख, दैनिक भास्कर, दैनिक भास्कर बाल पत्रिका, अमर उजाला, संडे रिपोर्टर, दिव्य शक्ति टाइम्स ऑफ़ डेजर्ट, कोल्डफीरर, प्रवासी संदेश, वूमेन एक्सप्रेस, इंदौर समाचार लोकांतर, वूमेन एक्सप्रेस सीमांत रक्षक युगपक्ष, रेड हैंडेड, मालवा हेराल्ड, टीम मंथन, उत्कर्ष मेल काव्य संगम पत्रिका, मातृत्व पत्रिका, कोलकाता से प्रकाशित दैनिक पत्रिका, सुभाषित पत्रिका शब्दों की आत्मा पत्रिका, अकोदिया सम्राट दिव्या पंचायत, खबर वाहिनी, समतावादी मासिक पत्रिका, सर्वण दर्पण पत्रिका, मेरी कलम पूजा पत्रिका, सुवासित पत्रिका, 249 कविता के लेखक कहानियां प्रकाशित देश के अलग-अलग समाचार पत्रों में समय-समय पर।

सम्मान पत्र -180 ऑनलाइन सम्मान पत्र, चार बार BSF से सम्मानित, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर सोसायटी से सम्मानित, नेहरू युवा केंद्र बाड़मेर से सम्मानित, शुभम संस्थान और विश्वास सेवा संस्थान द्वारा सम्मानित, प्रज्ञा क्लासेस बाड़मेर द्वारा, आकाशवाणी से लगातार काव्य पाठ, सम्मानित, बीएसएफ में वेलफेयर के कार्यों को सुचारु रुप से चलाने हेतु सम्मानित। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, प्रेसिडेंट ग्लोबल चेकर अवार्ड।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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फौजी की राखी।

Kmsraj51 की कलम से…..

Soldier’s Rakhi | फौजी की राखी।

आज रमा पहली बार अकेले पंजाब से अपने भाई को राखी बांधने जा रही है। शादी के बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब रमा अकेली सफर कर रही है, हर बार राखी पर अपने पति अमित के साथ अपने मायके जाती थी। परंतु इस बार अमित को किसी जरूरी कार्य के लिए बाहर जाना पड़ा तो रमा को अकेले ही सफर, करना पड़ा। ट्रेन अपने तय समय 9:00 अमृतसर स्टेशन पर पहुंच गई। अमित ने रमा को बिठा दिया क्योंकि उसे भी उसी दिन निकलना था और जाते-जाते बोल दिया घर पहुंचते ही फोन कर देना रमा डरी सहमी खिड़की के बगल वाली सीट पर बैठी बस अमित को ही देखे जा रही थी और मन में ढेरों, सवाल थे?

उसके साथ में एक नन्ही सी 2 साल की अपनी बेटी स्नेहा भी थी। अमित के पास इतना वक्त नहीं था कि ट्रेन चलने का इंतजार करें। अमित बिठाते ही तुरंत निकल गया कुछ समय के पश्चात ट्रेन ने अपनी रफ्तार पकड़ी और चलते-चलते जब काफी देर हो गई तो रमा तो अमित के ख्यालों में ही खोई हुई थी। एकदम से उसका ध्यान गया कि जिस बोगी में उसकी टिकट है उसमें सिर्फ एक बूढ़ी अम्मा और रमा ही बैठी है और बाकी सारी बोगी में फौजी लोग बैठे हुए थे और सभी फौजी लोग बड़े खुश थे। एक दूसरे के साथ हंसी मजाक कर रहे थे।

रमा को डर लगने लगा उसे लगा जैसे कि वह बहुत अकेली है। अगले स्टेशन पर बूढ़ी अम्मा भी उतर गई अब तो रमा की जैसे जान ही निकल गई। हड़बड़ाहट में जोर-जोर की सांसे ले रही थी बार-बार कभी खिड़की की तरफ कभी अपनी बेटी की तरफ देख रही थी और यह भी देख रही थी कि उसे कौन-कौन देख रहा है। सामने वाले भी बीच-बीच में उसकी तरफ देख रहे थे। फिर उन सभी के बीच में से एक फौजी उठकर रमा की तरफ आया रमा का तो जैसे दिल ही बैठ गया जैसे ही वह फौजी रमा के पास आया उसने रमा के सिर पर हाथ रखा और बोला बहन तुम घबराओ मत। मैं देश का जवान हूं मेरा फर्ज सिर्फ इतना नहीं है कि मैं देश की सरहद की रखवाली करूं।

हम जवान 24 घंटे ड्यूटी पर तैनात रहते हैं आप चिंता ना करें आप यहां पर अपने भाइयों के साथ बिल्कुल सुरक्षित हैं। आराम से बैठे और अगर आपको बेचैनी महसूस हो रही है तो आप मेरे पास फोन है अपने घर वालों से बात भी कर सकती हो। रमा ने हल्के से मुस्कुराते, हुए कहा नहीं भैया कोई बात नहीं बस दो-तीन घंटे की बात है मेरा स्टेशन आ ही जाएगा। रमा को बस थोड़ा सा अच्छा लगा और फौजी भाई ने दूसरे फौजी भाइयों को पता नहीं जाकर क्या बोला कि सभी चुप होकर अपनी-अपनी सीट पर बैठ गए और जैसे ही स्टेशन आया तो उन्होंने रमा को नीचे उतारने में उसकी मदद की और अपने फोन से फोन भी करवाया कि आप अपने भाई से बात करें और बता दे की ट्रेन पहुंचने वाली है रमा उनका धन्यवाद करती और उनकी तरफ भी देखती ही जा रही थी और मन ही मन बहुत मुस्कुरा रही थी और जाते-जाते अपने सभी फौजी भाइयों को उसने बैग में से राखी निकालकर उनके हाथ में थमाते हुए बोली लो मेरी तो आज ही राखी पहले दिन ही बन गई। सभी फौजी भाई बहुत ही भावुक हो गए और उन्होंने बताया बहन हम तो बहुत कम ही रक्षाबंधन पर छुट्टी जा पाते हैं।

अभी हम ड्यूटी के सिलसिले में ही कहीं जा रहे हैं तू हमें हाथ में क्यों थमा रही है।हमारी कलाई पर ही राखी बांध देगी तो हमें बहुत अच्छा लगेगा। रमा ने रोते-रोते सभी भाइयों की कलाई पर राखी बांधी। सभी फौजी भाई बहुत खुश थे क्योंकि सभी को राखी जो मिल गई थी और उसके साथ एक प्यारी बहन भी।

ऐसे हैं मेरे देश के जवान! जय हिंद! जय भारत – जय जवान!

♦ सीमा रंगा इन्द्रा जी – हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — रमा को अकेले सफर करते समय डर और अनिश्चितता महसूस होने लगती है। उनकी सारी चिंताएँ और सवाल वो ही होते हैं जो एक व्यक्ति अकेले सफर करते समय महसूस करता है। अगले स्टेशन पर अम्मा भी उतर जाती है और रमा के डर और बेचैनी को महसूस करती है। बोगी में बाकी यात्री फौजी होते हैं और वे सभी खुशी-खुशी अपने दोस्तों के साथ मजाक करते हैं। एक दिन एक फौजी रमा के पास आकर उन्हें साहस देता है कि वह डरने की बजाय आराम से यात्रा करें, क्योंकि उनका फर्ज सिर्फ सीमा की रक्षा ही नहीं होता, बल्कि देश की बहनों की भी रक्षा होती है। आखिरकार, सभी फौजी भाइयों के साथ मिलकर रमा अपने भाइयों के लिए राखी बांधती है और वे सभी एक परिवार की भावना से जुड़ जाते हैं। इस कहानी से स्पष्ट होता है कि देश के जवान की सबसे बड़ी प्राथमिकता देश और सामाजिक हित है और उनकी उपस्थिति हमें सुरक्षित महसूस कराती है।

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यह लेख (फौजी की राखी।) “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख, कवितायें व कहानी सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं, कहानी और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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योग करो।

Kmsraj51 की कलम से…..

Yog Karo | योग करो।

भगवान शिव से जिसकी शुरुआत हुई,
हितकारी बन विश्व में फैला हुआ है।

करो तुम शुरुआत आज से ही,
सभी बीमारियों का तोड़ योग है।

महंगाई के युग में सस्ता एक साधन,
प्राचीन पद्धति योग जिसका नाम है।

करके योग रहो तुम सदा निरोग,
ना खर्चा, ना कोई नुकसान है।

योग स्वस्थ रहना हमें सिखाता,
योग फुर्तीला शरीर बनाता है।

मोटापा डरकर इससे भागता,
चमकाता हमारी काया है।

आज से ही शुरुआत तुम करो,
खुशियां जीवन में लाता है।

♦ सीमा रंगा इन्द्रा जी – हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — हर रोज़ सुबह के समय योग करने के फायदे अनमोल है – यह हमारी पहली सांस को पुन: चक्रित करता है। योग का अभ्यास करने से शरीर किक-स्टार्ट होता है। ह्रदय रोग से बचाव करता है योग। दिमाग सदैव ही रहता है एक्टिव। बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता। योग के द्वारा सांसों को साध कर परमानन्द की अनुभूति किया जा सकता है। तन और मन को निरोग रखने के लिए प्रतिदिन योग करे।

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यह कविता (योग करो।) “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख, कवितायें व कहानी सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं, कहानी और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम सीमा रंगा इंद्रा है। मेरी शिक्षा बी एड, एम. ए. हिंदी। व्यवसाय – लेखिका, प्रेरक वक्ता व कवयित्री। प्रकाशन – सतरंगी कविताएं, देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं व लेख, दैनिक भास्कर, दैनिक भास्कर बाल पत्रिका, अमर उजाला, संडे रिपोर्टर, दिव्य शक्ति टाइम्स ऑफ़ डेजर्ट, कोल्डफीरर, प्रवासी संदेश, वूमेन एक्सप्रेस, इंदौर समाचार लोकांतर, वूमेन एक्सप्रेस सीमांत रक्षक युगपक्ष, रेड हैंडेड, मालवा हेराल्ड, टीम मंथन, उत्कर्ष मेल काव्य संगम पत्रिका, मातृत्व पत्रिका, कोलकाता से प्रकाशित दैनिक पत्रिका, सुभाषित पत्रिका शब्दों की आत्मा पत्रिका, अकोदिया सम्राट दिव्या पंचायत, खबर वाहिनी, समतावादी मासिक पत्रिका, सर्वण दर्पण पत्रिका, मेरी कलम पूजा पत्रिका, सुवासित पत्रिका, 249 कविता के लेखक कहानियां प्रकाशित देश के अलग-अलग समाचार पत्रों में समय-समय पर।

सम्मान पत्र -180 ऑनलाइन सम्मान पत्र, चार बार BSF से सम्मानित, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर सोसायटी से सम्मानित, नेहरू युवा केंद्र बाड़मेर से सम्मानित, शुभम संस्थान और विश्वास सेवा संस्थान द्वारा सम्मानित, प्रज्ञा क्लासेस बाड़मेर द्वारा, आकाशवाणी से लगातार काव्य पाठ, सम्मानित, बीएसएफ में वेलफेयर के कार्यों को सुचारु रुप से चलाने हेतु सम्मानित। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, प्रेसिडेंट ग्लोबल चेकर अवार्ड।

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डॉ भीमराव अम्बेडकर।

Kmsraj51 की कलम से…..

Dr. Bhimrao Ambedkar | डॉ भीमराव अम्बेडकर।

बुद्धि से तेज,
विचारों से श्रेष्ठ,
ज्ञान में ज्ञानी।

सहनशीलता की मिशाल,
जला दी जिसने अलख ज्ञान की,
आओ करें नमन उस महान ज्ञानी को।

किताब, कलम को बना ढाल,
छा गए जो महान,
करोड़ों दिलों पर जिसका राज।

रख नारी को संग,
दिला कर महिलाओं को,
शिक्षा का अधिकार,
बने नारी रक्षक।

गरीबों वंचितों को दिया उठा,
समानता का पढ़ाया पाठ,
सहकर कठोर यातनाएं।

रख शिक्षा को आगे,
आम से बने खास,
लिख दिया जिसने संविधान।

कहलाए वे…
डॉक्टर भीमराव अंबेडकर,
नमन मातृभूमि के लाल को।

♦ सीमा रंगा इन्द्रा जी – हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — डॉ भीमराव अम्बेडकर एक महान देशभक्त , न्याय के पुजारी , शिक्षाविद और दलितों के मसीहा थे। भारत के संविधान के निर्माता के रूप में देश भर में वो प्रसिद्ध है। अम्बेडकर का प्रारंभिक जीवन और शिक्षा संघर्षपूर्ण रहा , उन्हें छुआछूत , ऊंच नीच आदि का बचपन से ही सामना करना पड़ा। भीमराव रामजी अम्बेडकर , (जन्म 14 अप्रैल, 1891, महू, भारत- मृत्यु 6 दिसंबर, 1956, नई दिल्ली), दलितों के नेता (अनुसूचित जाति; पूर्व में अछूत कहलाते थे) और भारत सरकार के कानून मंत्री (1947-51)। भारत के इतिहास में महानतम नेताओं में से एक थे बाबा साहेब भीमराव रामजी अम्बेडकर। उन्हें भारतीय संविधान का जनक माना जाता है।

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यह कविता (डॉ भीमराव अम्बेडकर।) “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख, कवितायें व कहानी सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं, कहानी और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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हे नारी तू।

Kmsraj51 की कलम से…..

Hey Nari Tu | हे नारी तू।

हे! नारी तू उठ जा,
विजयपथ पर।
जीत का परचम लहरा जा,
तू मत डर।
आंधी की तरह बढ़ आगे,
डटी रहो,
जीवन रथ पर।

अरमानों को मत दबा,
रख बाजुओं पर भार अपना।
चल पड़, निकल ले,
उठा ले खुद को।
राहों में मिलेंगे,
टेढ़े- मेढ़े रास्ते।
मत डरना, मत रुकना,
डटी रहना पथ पर।

मंजिल की कुछ दूरी पर,
होगी तू डांवाडोल जरूर।
फिर ऊर्जा से भर जाना,
रास्ता अब नजदीक है।
पथ पर पहुंचेगी,
ठोकरे होंगी हजारों सीमा।
ठोकरों को मार ठोकर,
बढ़ जाना विजय की ओर।

परचम जीत का लहरा देना,
मर्दानी तू , दुर्गा रूप में खड़ी रहना।
सिंह पर हो सवार,
डटी रहना विजय रथ पर।
लहरा देना जीत का परचम,
है नारी तू डटना यूं ही।

♦ सीमा रंगा इन्द्रा जी – हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — नारी तू नारायणी है, माँ दुर्गा का रूप है, तुझमें सब शक्तिया निहित है, सर्व शक्ति संपन्न है तू। जीवन में कैसी भी बिपरीत परिस्थितियां आ जाएं तू कभी भी घबराना नहीं, तू डटी रहना बिना डरे, बिना थके, तेरी जीत निश्चित है देवी क्योकि – माँ आदिशक्ति की अपार शक्ति है तुझमें। ये भारत देश शक्ति सम्पन्न देवियों का है, इस धरा पर महान देवियों का जन्म सदैव से ही होता आया है। नारी अपने जिम्मेदारियों को निभाती है और कठिन परिस्थितियों में अपने शक्ति का परिचय देती हुयी नज़र आती है। देश में कई महिलाओं ने विभिन्न क्षेत्र में अपने साहस और सूझ बुझ का परिचय दिया है।

—————

यह कविता (हे नारी तू।) “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख, कवितायें व कहानी सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं, कहानी और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम सीमा रंगा इंद्रा है। मेरी शिक्षा बी एड, एम. ए. हिंदी। व्यवसाय – लेखिका, प्रेरक वक्ता व कवयित्री। प्रकाशन – सतरंगी कविताएं, देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं व लेख, दैनिक भास्कर, दैनिक भास्कर बाल पत्रिका, अमर उजाला, संडे रिपोर्टर, दिव्य शक्ति टाइम्स ऑफ़ डेजर्ट, कोल्डफीरर, प्रवासी संदेश, वूमेन एक्सप्रेस, इंदौर समाचार लोकांतर, वूमेन एक्सप्रेस सीमांत रक्षक युगपक्ष, रेड हैंडेड, मालवा हेराल्ड, टीम मंथन, उत्कर्ष मेल काव्य संगम पत्रिका, मातृत्व पत्रिका, कोलकाता से प्रकाशित दैनिक पत्रिका, सुभाषित पत्रिका शब्दों की आत्मा पत्रिका, अकोदिया सम्राट दिव्या पंचायत, खबर वाहिनी, समतावादी मासिक पत्रिका, सर्वण दर्पण पत्रिका, मेरी कलम पूजा पत्रिका, सुवासित पत्रिका, 249 कविता के लेखक कहानियां प्रकाशित देश के अलग-अलग समाचार पत्रों में समय-समय पर।

सम्मान पत्र -180 ऑनलाइन सम्मान पत्र, चार बार BSF से सम्मानित, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर सोसायटी से सम्मानित, नेहरू युवा केंद्र बाड़मेर से सम्मानित, शुभम संस्थान और विश्वास सेवा संस्थान द्वारा सम्मानित, प्रज्ञा क्लासेस बाड़मेर द्वारा, आकाशवाणी से लगातार काव्य पाठ, सम्मानित, बीएसएफ में वेलफेयर के कार्यों को सुचारु रुप से चलाने हेतु सम्मानित। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, प्रेसिडेंट ग्लोबल चेकर अवार्ड।

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©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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हम बेवफा नहीं।

Kmsraj51 की कलम से…..

Ham Bewafa Nahin | हम बेवफा नहीं।

त्याग देते तुझे, भाग जाते हम भी,
पर दिल जो तुम्हारे पास हमारा है।

बन फरेबी, लेक सारा झूठ का,
महान बनते, पर कसम तुम्हारी जो खाई।

रूसवा हम भी कर देते गलियारों में,
पर हर सांचे पर लिखा नाम तुम्हारा है।

बदल तो हम भी लेते तुम्हें औरों से,
उसे पर चित में बैठा, निकालते नहीं।

जुबां, निगाहें, तन दे दिया तुम्हें,
भल्ला पराई चीजें बांटता कौन है?

लेकर चंद पैसे लगा देते मोल हम भी,
मेरे लिए अनमोल रिश्ता जो तुम्हारा है।

लग जाते हमें भी हसीन शहर में कई,
पर नैन देखना ही नहीं चाहते औरों को।

पीछे से आवाज हमें भी मारी थी किसी ने,
पर कमबख्त कर्ण सिर्फ सुनते तुम्हारी आवाज है।

♦ सीमा रंगा इन्द्रा जी – हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — त्याग देते तुझे, भाग जाते हम भी कहीं पर दिल जो तुम्हारे पास हमारा है। बन फरेबी यूँ, लेक सारा झूठ का, महान बनते, पर कसम तुम्हारी जो खाई हैं हमने। रूसवा हम भी कर देते गलियारों में,पर हर सांचे पर लिखा नाम तुम्हारा जो लिखा है। बदल तो हम भी लेते तुम्हें औरों से, उसे पर चित में बैठा, निकालते नहीं, ये हमारे संस्कार नहीं। सब कुछ तो दिया तुम्हे, जुबां, निगाहें, तन दे दिया तुम्हें, भल्ला पराई चीजें बांटता कौन है? जरा सोचो – लेकर चंद पैसे लगा देते मोल हम भी, मगर मेरे लिए अनमोल रिश्ता जो तुम्हारा है। लग जाते हमें भी हसीन शहर में कई, पर मेरे नैन कभी देखना ही नहीं चाहते औरों को। पीछे से आवाज हमें भी मारी थी किसी ने, पर कमबख्त कर्ण सिर्फ सुनते तुम्हारी ही आवाज है।

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यह कविता (हम बेवफा नहीं।) “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख, कवितायें व कहानी सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं, कहानी और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम सीमा रंगा इंद्रा है। मेरी शिक्षा बी एड, एम. ए. हिंदी। व्यवसाय – लेखिका, प्रेरक वक्ता व कवयित्री। प्रकाशन – सतरंगी कविताएं, देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं व लेख, दैनिक भास्कर, दैनिक भास्कर बाल पत्रिका, अमर उजाला, संडे रिपोर्टर, दिव्य शक्ति टाइम्स ऑफ़ डेजर्ट, कोल्डफीरर, प्रवासी संदेश, वूमेन एक्सप्रेस, इंदौर समाचार लोकांतर, वूमेन एक्सप्रेस सीमांत रक्षक युगपक्ष, रेड हैंडेड, मालवा हेराल्ड, टीम मंथन, उत्कर्ष मेल काव्य संगम पत्रिका, मातृत्व पत्रिका, कोलकाता से प्रकाशित दैनिक पत्रिका, सुभाषित पत्रिका शब्दों की आत्मा पत्रिका, अकोदिया सम्राट दिव्या पंचायत, खबर वाहिनी, समतावादी मासिक पत्रिका, सर्वण दर्पण पत्रिका, मेरी कलम पूजा पत्रिका, सुवासित पत्रिका, 249 कविता के लेखक कहानियां प्रकाशित देश के अलग-अलग समाचार पत्रों में समय-समय पर।

सम्मान पत्र -180 ऑनलाइन सम्मान पत्र, चार बार BSF से सम्मानित, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर सोसायटी से सम्मानित, नेहरू युवा केंद्र बाड़मेर से सम्मानित, शुभम संस्थान और विश्वास सेवा संस्थान द्वारा सम्मानित, प्रज्ञा क्लासेस बाड़मेर द्वारा, आकाशवाणी से लगातार काव्य पाठ, सम्मानित, बीएसएफ में वेलफेयर के कार्यों को सुचारु रुप से चलाने हेतु सम्मानित। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, प्रेसिडेंट ग्लोबल चेकर अवार्ड।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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राज बताते नहीं।

Kmsraj51 की कलम से…..

Raaj Bataate Nahin | राज बताते नहीं।

प्रेम पत्र सभी को दिखाते नहीं,
हाथों से लिखी भावनाएं मिटाते नहीं।

भेजा था चित्र सभी को दिखाते नहीं,
खोलते चूमा जिसे बटुए से हटाते नहीं।

मन की बेचैनी को यूं जताते नहीं,
ओ राज था राज को बताते नहीं।

महीने गुजारे इंतजार में सबको दिखाते नहीं,
रात भर बातें की थी तन्हाई को दिखाते नहीं।

पेड़, झरने, पानी, बर्फ छोड़ कागज निहारते नहीं,
वादियों के बीच में महबूबा-महबूबा चिल्लाते नहीं।

90 दिन में हर एक दिन यूं काटते नहीं,
बचे बस दिन कुछ, यह आश लगाते नहीं।

छुट्टी की खुशी में भागे-भागे यू आते नहीं,
बचा हर पल को यूं खुद को परेशान करते नहीं।

आ कर जाने की तिथि बताते नहीं,
खुशी में यूं जाना है रोज बताते नहीं।

जाते वक्त मुरझाया चेहरा दिखाते नहीं,
पी आंसू नकली हंसी इन्द्रा हंसते नहीं।

हर बार छोड़ सीमा को यूं जाते नहीं,
जिम्मेदारियों का बहाना हर बार बनाते नहीं।

♦ सीमा रंगा इन्द्रा जी – हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — आपसी दिल से लिखा हुआ प्रेम पत्र सभी को दिखाते नहीं, हाथों से लिखी भावनाएं कभी मिटाते नहीं। भेजा था चित्र सभी को दिखाते नहीं, खोलते चूमा जिसे बटुए से कभी हटाते नहीं। ओ मन की बेचैनी को यूं जताते नहीं, ओ राज था राज को बताते नहीं। किस क़दर महीने गुजारे इंतजार में सबको दिखाते नहीं, यूँ रात भर बातें की थी तन्हाई को कभी भी दिखाते नहीं। खूबसूरत वादियों के बीच में यूँ महबूबा-महबूबा चिल्लाते नहीं। कभी भी आ कर जाने की तिथि बताते नहीं, खुशी में यूं जाना है हर रोज बताते नहीं। जाते वक्त अपना मुरझाया चेहरा दिखाते नहीं, पी आंसू नकली हंसी इन्द्रा हंसते नहीं। हर बार छोड़ सीमा को यूं जाते नहीं, जिम्मेदारियों का बहाना हर बार बनाते नहीं।

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यह कविता (राज बताते नहीं।) “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख, कवितायें व कहानी सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं, कहानी और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम सीमा रंगा इंद्रा है। मेरी शिक्षा बी एड, एम. ए. हिंदी। व्यवसाय – लेखिका, प्रेरक वक्ता व कवयित्री। प्रकाशन – सतरंगी कविताएं, देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं व लेख, दैनिक भास्कर, दैनिक भास्कर बाल पत्रिका, अमर उजाला, संडे रिपोर्टर, दिव्य शक्ति टाइम्स ऑफ़ डेजर्ट, कोल्डफीरर, प्रवासी संदेश, वूमेन एक्सप्रेस, इंदौर समाचार लोकांतर, वूमेन एक्सप्रेस सीमांत रक्षक युगपक्ष, रेड हैंडेड, मालवा हेराल्ड, टीम मंथन, उत्कर्ष मेल काव्य संगम पत्रिका, मातृत्व पत्रिका, कोलकाता से प्रकाशित दैनिक पत्रिका, सुभाषित पत्रिका शब्दों की आत्मा पत्रिका, अकोदिया सम्राट दिव्या पंचायत, खबर वाहिनी, समतावादी मासिक पत्रिका, सर्वण दर्पण पत्रिका, मेरी कलम पूजा पत्रिका, सुवासित पत्रिका, 249 कविता के लेखक कहानियां प्रकाशित देश के अलग-अलग समाचार पत्रों में समय-समय पर।

सम्मान पत्र -180 ऑनलाइन सम्मान पत्र, चार बार BSF से सम्मानित, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर सोसायटी से सम्मानित, नेहरू युवा केंद्र बाड़मेर से सम्मानित, शुभम संस्थान और विश्वास सेवा संस्थान द्वारा सम्मानित, प्रज्ञा क्लासेस बाड़मेर द्वारा, आकाशवाणी से लगातार काव्य पाठ, सम्मानित, बीएसएफ में वेलफेयर के कार्यों को सुचारु रुप से चलाने हेतु सम्मानित। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, प्रेसिडेंट ग्लोबल चेकर अवार्ड।

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गांव से पलायन का जिम्मेदार कौन?

Kmsraj51 की कलम से…..

Gaanv Se Palaayan Ka Jimmedaar Kaun? | गांव से पलायन का जिम्मेदार कौन?

गांव की आबादी आज घटती जा रही है। गांव के लोग शहरों की तरफ रुख़ कर रहे हैं। इसका कारण सबका अपना-अपना मत होगा। परंतु बेरोजगारी और सुविधाओं की कमी से गांव वाले ना चाहते हुए भी अपना घर छोड़ कर शहर के छोटे-छोटे कमरों में रहने को मजबूर हैं। क्योंकि हमारे गांव में बिजली, पानी, शिक्षा, रोजगार नहीं है। मैं सभी गांव की बात नहीं कर रही। परंतु बहुत गांवों में यह समस्या मौजूद है। शहरों का विकास तेजी से हो रहा है और गांव में जाकर देखो, शिक्षा के नाम पर एक प्राइमरी या हाई स्कूल। वह भी सभी गांव में नहीं है। आगे बेचारे गरीब बच्चे कहां जाए पढ़ने? गांव के बच्चों को पढ़ने के लिए बहुत सारी समस्याओं से गुजरना पड़ता है।

यातायात — गांव में यातायात की सुविधा नहीं होती कैसे जाए पढ़ने के लिए बाहर। उनके पास दो विकल्प होते हैं या तो पढ़ाई छोड़ दे या फिर अपना गांव छोड़ शहर में पढ़ने जाएं। जिनके पास सुविधाएं हैं वे आसानी से शहर पढ़ने चले जाते हैं। पर जो गरीब है वह कैसे जाए पढ़ने के लिए। इसी कारण वह पीछे रह जाता। उसकी पढ़ाई छूट जाती है।

बिजली — बिजली की समस्या सबसे बड़ा कारण है अब चाहे कोई लाख दावे करे कि गांव-गांव तक बिजली पहुंची है गांव तक बिजली की तारें जरूर पहुंची है। परंतु गांव में पूरा दिन, पूरी रात बिजली नहीं रहती। गांव में घंटों का समय तय रहता है फिर उसके बाद लाइट कट जाती है। गांव के बच्चों को घर के कामों के साथ-साथ खेती-बाड़ी के कामों में हाथ भी बंटाना होता है।

पानी — पानी गांव में बहुत कम आता है प्रतिदिन तो आता नहीं दो या 3 दिन बाद आता है। किसी-किसी गांव में तो पानी की और भी गंभीर समस्याएं हैं। सुविधाओं की कमी के साथ-साथ ग्रामीण छात्रों को पानी की कमी को भी झेलना पड़ता है।

रोजगार — गांव में रोजगार के साधनों की बहुत कमी है अगर सरकार चाहे तो तीन-चार गांव के बीच कोई फैक्ट्री है या किसी भी तरह का काम लगा सकती है। जिससे गांव के युवाओं को अपना घर ना छोड़ना पड़े और उन्हें आसानी से रोजगार मिल जाए।जिससे उन्हें अपना घर परिवार भी नहीं छोड़ना पड़े और गांव से युवाओं का पलायन भी रुक जाएगा। ऐसा कोई नहीं होगा जो सारी सुख-सुविधाओं के होते हुए अपने घर, गांव को छोड़कर बाहर जाए।

इंटरनेट — हमसभी जानते है की आजकल ज्यादातर सभी कार्य ऑनलाइन इंटरनेट पर होता है, आज भी गावों में इंटरनेट की सुविधा ना पहुंचने के कारण, गांव के युथ (बच्चों) को मज़बूरी में शहर की तरफ भागना पड़ता है। अगर गावों में अच्छी अनलिमिटेड ब्रॉडबैंड इंटरनेट की सुविधा पहुंच जाए तो, बेरोजगार गांव के बच्चे भी कुछ ऑनलाइन कार्य कर कमा सके। वर्तमान सरकार को गांव में जल्द से जल्द अच्छी अनलिमिटेड ब्रॉडबैंड इंटरनेट की सुविधा पहुँचाना चाहिए।

सड़के — अगर गांव की सड़कें, स्कूल और कॉलेज बना दिया जाए तो ग्रामीण बच्चे कदापि भी शहर की तरफ नहीं जाएंगे। बिजली की अच्छी सुविधा दे दी जाए जब शहर की सड़कों पर दोनों तरफ पेड़ पौधे लगा रखे तो गांव में क्यों नहीं? शहर में हर 5 मिनट के अंतराल पर एक पार्क मिल जाएगा क्या गांव के बच्चों को पार्क नहीं चाहिए।

जब ग्रामीण बच्चों को सुविधाएं कम मिलती है तो प्रतियोगी परीक्षाओं में बच्चों को एक सम्मान परीक्षा क्यों ? शहर में रोजगार के अवसर उपलब्ध है परंतु ग्रामीण लोगों को यह सुविधा से वंचित रखा था। जब तक ग्रामीण इलाकों में सुविधाएं नहीं होंगी तब तक हमारा देश कैसे तरक्की कर सकता है।

♦ सीमा रंगा इन्द्रा जी – हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इंटरनेट, यातायात, बिजली, पानी, रोजगार, सड़के इत्यादि इस तरह की मुलभुत सुविधाएं का ना होना गांव के बच्चों की तरक्की को फुल स्टॉप लगा देता है। जब ग्रामीण बच्चों को सुविधाएं कम मिलती है तो प्रतियोगी परीक्षाओं में बच्चों को एक सम्मान परीक्षा क्यों ? शहर में रोजगार के अवसर उपलब्ध है परंतु ग्रामीण लोगों को यह सुविधा से वंचित रखा था। जब तक ग्रामीण इलाकों में सुविधाएं नहीं होंगी तब तक हमारा देश कैसे तरक्की कर सकता है।

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यह लेख (गांव से पलायन का जिम्मेदार कौन?) “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख, कवितायें व कहानी सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं, कहानी और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम सीमा रंगा इंद्रा है। मेरी शिक्षा बी एड, एम. ए. हिंदी। व्यवसाय – लेखिका, प्रेरक वक्ता व कवयित्री। प्रकाशन – सतरंगी कविताएं, देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं व लेख, दैनिक भास्कर, दैनिक भास्कर बाल पत्रिका, अमर उजाला, संडे रिपोर्टर, दिव्य शक्ति टाइम्स ऑफ़ डेजर्ट, कोल्डफीरर, प्रवासी संदेश, वूमेन एक्सप्रेस, इंदौर समाचार लोकांतर, वूमेन एक्सप्रेस सीमांत रक्षक युगपक्ष, रेड हैंडेड, मालवा हेराल्ड, टीम मंथन, उत्कर्ष मेल काव्य संगम पत्रिका, मातृत्व पत्रिका, कोलकाता से प्रकाशित दैनिक पत्रिका, सुभाषित पत्रिका शब्दों की आत्मा पत्रिका, अकोदिया सम्राट दिव्या पंचायत, खबर वाहिनी, समतावादी मासिक पत्रिका, सर्वण दर्पण पत्रिका, मेरी कलम पूजा पत्रिका, सुवासित पत्रिका, 249 कविता के लेखक कहानियां प्रकाशित देश के अलग-अलग समाचार पत्रों में समय-समय पर।

सम्मान पत्र -180 ऑनलाइन सम्मान पत्र, चार बार BSF से सम्मानित, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर सोसायटी से सम्मानित, नेहरू युवा केंद्र बाड़मेर से सम्मानित, शुभम संस्थान और विश्वास सेवा संस्थान द्वारा सम्मानित, प्रज्ञा क्लासेस बाड़मेर द्वारा, आकाशवाणी से लगातार काव्य पाठ, सम्मानित, बीएसएफ में वेलफेयर के कार्यों को सुचारु रुप से चलाने हेतु सम्मानित। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, प्रेसिडेंट ग्लोबल चेकर अवार्ड।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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शिव शंभू।

Kmsraj51 की कलम से…..

Shiva Shambhu | शिव शंभू।

शिव शंभू हितकारी महादेव,
जटाओं में समा गंगा गले में रख नाग।

चले विषधारी हरने कष्ट जगत के,
अनोखी छवि देखते सभी इनकी।

ना रह पाता अछूता आराधना से इनकी,
नाम भोले भंडारी पल में जाते मान।

सावन में बजते ढोल बजाते शंख,
पूजन करते शिवलिंग पर नर – नार।

ओंकारेश्वर कष्टनिवारक विषधारी हरते कष्ट,
देख ना पाते तड़प लालायित रहते करने मदद।

देखो जरा, लगा भस्म बाबा नंगे पांव,
आए हरने कष्ट भक्तों के, संग पार्वती मैया।

विष अपना, रख सर्प, लगा भस्म,
उठा डमरू, ले त्रिशूल निकल पड़े नागेश्वर।

♦ सीमा रंगा इन्द्रा जी – हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — महाशिवरात्र‍ि भगवान भोलेनाथ की आराधना का ही पर्व है, जब धर्मप्रेमी लोग महादेव का विधि-विधान के साथ पूजन-अर्चन करते हैं और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस दिन शिव मंदिरों में बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ती है, जो शिव के दर्शन-पूजन कर खुद को सौभाग्यशाली मानते है। भक्तों के सब संकट हरते शिव ही महाकाल है। शिव ही संहार करते शिव शक्ति का रूप है। कोटि कोटि वंदन करूँ शिव ही तारणहार है।

—————

यह कविता (शिव शंभू।) “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख, कवितायें व कहानी सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं, कहानी और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम सीमा रंगा इंद्रा है। मेरी शिक्षा बी एड, एम. ए. हिंदी। व्यवसाय – लेखिका, प्रेरक वक्ता व कवयित्री। प्रकाशन – सतरंगी कविताएं, देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं व लेख, दैनिक भास्कर, दैनिक भास्कर बाल पत्रिका, अमर उजाला, संडे रिपोर्टर, दिव्य शक्ति टाइम्स ऑफ़ डेजर्ट, कोल्डफीरर, प्रवासी संदेश, वूमेन एक्सप्रेस, इंदौर समाचार लोकांतर, वूमेन एक्सप्रेस सीमांत रक्षक युगपक्ष, रेड हैंडेड, मालवा हेराल्ड, टीम मंथन, उत्कर्ष मेल काव्य संगम पत्रिका, मातृत्व पत्रिका, कोलकाता से प्रकाशित दैनिक पत्रिका, सुभाषित पत्रिका शब्दों की आत्मा पत्रिका, अकोदिया सम्राट दिव्या पंचायत, खबर वाहिनी, समतावादी मासिक पत्रिका, सर्वण दर्पण पत्रिका, मेरी कलम पूजा पत्रिका, सुवासित पत्रिका, 249 कविता के लेखक कहानियां प्रकाशित देश के अलग-अलग समाचार पत्रों में समय-समय पर।

सम्मान पत्र -180 ऑनलाइन सम्मान पत्र, चार बार BSF से सम्मानित, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर सोसायटी से सम्मानित, नेहरू युवा केंद्र बाड़मेर से सम्मानित, शुभम संस्थान और विश्वास सेवा संस्थान द्वारा सम्मानित, प्रज्ञा क्लासेस बाड़मेर द्वारा, आकाशवाणी से लगातार काव्य पाठ, सम्मानित, बीएसएफ में वेलफेयर के कार्यों को सुचारु रुप से चलाने हेतु सम्मानित। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, प्रेसिडेंट ग्लोबल चेकर अवार्ड।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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पछतावा।

Kmsraj51 की कलम से…..

Regret | पछतावा।

मान ले बात मात-पिता की,
आज बारी तेरी आई।

पढ़ ले, निखार ले खुद को,
वक्त को जानने की बारी आई।

उठ प्रातः कर मेहनत पूरा दिन,
समय का सदुपयोग की बारी आई।

भूल जा मस्ती, शरारतें, त्याग निंद्रा,
उज्जवल भविष्य करने की बारी आई।

कम वक्त है पास तुम्हारे,
नसीहतें मानने की बारी आई।

नहीं रहेंगे तुझे कहने वाले एक दिन,
तड़पाएगा वक्त, समझने की बारी आई।

अकेला रह जाएगा इस दुनिया में,
आज संभलने की बारी आई।

कहीं पछताता ना रह जाए सीमा,
आज वक्त को जानने की बारी आई।

♦ सीमा रंगा इन्द्रा जी – हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस संसार में केवल माता-पिता ही अपने बच्चे को सदैव ही खुश, आगे बढ़ता व खुद हारकर भी अपने बच्चे को जीतता हुआ देखना चाहते है। इसलिए माता-पिता सदैव ही नसीहत देते रहते है हमे, जिससे हम कभी कोई गलती ना करें और अपने जीवन को सार्थक बनाने के लिए समय से सोये व जगे तथा अच्छे से पढ़ाई करें व खूब मेहनत कर जीवन में आगे बढ़े। भूल जाओ मस्ती व शरारतें, त्याग दो निंद्रा अपना उज्जवल भविष्य बनाने का यही समय है। यह न भूलो की कम वक्त है अब पास तुम्हारे, नसीहतें मानने की बारी आई। ये याद रखना – नहीं रहेंगे तुझे कुछ कहने वाले एक दिन, तब तड़पाएगा वक्त तुम्हें अब भी समझ लो वर्ना और अकेला रह जाओगे इस दुनिया में फिर खूब पछतावोगे।

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यह कविता (पछतावा।) “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख, कवितायें व कहानी सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं, कहानी और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मेरा नाम सीमा रंगा इंद्रा है। मेरी शिक्षा बी एड, एम. ए. हिंदी। व्यवसाय – लेखिका, प्रेरक वक्ता व कवयित्री। प्रकाशन – सतरंगी कविताएं, देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं व लेख, दैनिक भास्कर, दैनिक भास्कर बाल पत्रिका, अमर उजाला, संडे रिपोर्टर, दिव्य शक्ति टाइम्स ऑफ़ डेजर्ट, कोल्डफीरर, प्रवासी संदेश, वूमेन एक्सप्रेस, इंदौर समाचार लोकांतर, वूमेन एक्सप्रेस सीमांत रक्षक युगपक्ष, रेड हैंडेड, मालवा हेराल्ड, टीम मंथन, उत्कर्ष मेल काव्य संगम पत्रिका, मातृत्व पत्रिका, कोलकाता से प्रकाशित दैनिक पत्रिका, सुभाषित पत्रिका शब्दों की आत्मा पत्रिका, अकोदिया सम्राट दिव्या पंचायत, खबर वाहिनी, समतावादी मासिक पत्रिका, सर्वण दर्पण पत्रिका, मेरी कलम पूजा पत्रिका, सुवासित पत्रिका, 249 कविता के लेखक कहानियां प्रकाशित देश के अलग-अलग समाचार पत्रों में समय-समय पर।

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