Kmsraj51 की कलम से…..
आखिरी खत-
यह खत है
एसएमएस के युग में
इसीलिए संभवत: अंतिम हो/
खत
उस पागल हवा के नाम
जो तुम्हारे नगमे सुनाती थी
और कहती थी
ख़तों जितनी हो
इस दुनिया की उम्र/
उस खुशबू के नाम
जो अब तक कहती है मैं हूं/
लगता है गलत था कि खत कभी
मरते नहीं
भटकते नहीं
उलझते नहीं
अटकते नहीं/
मैं हैरत लिए पूछ रहा हूं
कोई मुझे
एसएमएस की उम्र बताए
जो छोटा होकर भी खतों को निगल गया/
खतरे हैं कई
कुछ बौनों ने आदमकदों को नेपथ्य में धकेल दिया
कुछ बहरों ने सुरों को किया है तसदीक/
कहना हवाओं से
मैं फिर आऊंगा
इस बार नहीं कहा जा सका सबसे सब कुछ/
नदिया से कहना बहती रहे/
समंदर से कहना
पहाड़ याद करता है/
बादलों को देना
धूप में तपती भाषा का पता/
बावड़ी से कहना
अगली बार ऐसे नहीं आऊंगा
साथ होंगे मजबूत हाथ
तब झाडि़यां नहीं बावड़ी होगी/
कोयल से कहना
कोई सुने न सुने
गाती रहे
ठीक वैसे
जैसे बांसुरी चुप नहीं बैठती/
भीड़ से घबराई बच्ची को कहना
रास्ता भीड़ से ही निकलता है/
कहना मां से
बेटे इतने भी बुरे नहीं होते
तपती धरती पर ठिठुर रहे हैं संबंध/
भाइयों से कहना
बाजू मजबूरी नहीं, जरूरी होते हैं/
इस सदी में
बड़ा चाहिए बाजार
लेकिन
परिवार
त्योहार
विचार
आहार
व्यवहार
सब छोटे हों एसएमएस की तरह/
खतों की तफसील
नहीं है
युग की रफ्तार की मांग/
मरते हुए खतों की आखिरी बात याद रखना
भाषाविदों से कहना
व्याकरण को गंगाजी को न सौंप देना
उसकी जरूरत हो्गी फिर एक दिन/
समाजशास्त्रियों से कहना
अभी बैठे रहें
रात बीतते ही
अकेलेपन से ठिठुरे लोग आएंगे
उनके लिए रख लेना
संबंधों का थोड़ा सा ताप
मुक्त करने में समय लेता है कोई भी शाप
-नवनीत शर्मा
Post share by: नवनीत शर्मा
I am grateful to नवनीत शर्मा for sharing this inspirational poetry with KMSRAJ51. Thanks a lot for a bright future.
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Kmsraj51 की कलम से …..
Coming soon book (जल्द ही आ रहा किताब) …..
“तू ना हो निराश कभी मन से”
“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” –Kmsraj51





