• Skip to main content
  • Skip to primary sidebar
  • Skip to footer
  • HOME
  • ABOUT
    • Authors Intro
  • QUOTES
  • POETRY
    • ग़ज़ल व शायरी
  • STORIES
  • निबंध व जीवनी
  • Health Tips
  • CAREER DEVELOPMENT
  • EXAM TIPS
  • योग व ध्यान
  • Privacy Policy
  • CONTACT US
  • Disclaimer

KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

Check out Namecheap’s best Promotions!

You are here: Home / Archives for धरती माँ पर कविता इन हिंदी

धरती माँ पर कविता इन हिंदी

गीतों का हार।

Kmsraj51 की कलम से…..

Geeton Ka Haar | गीतों का हार।

सप्त रंगों से सजी धरती के,
कण-कण में गीतों का हार।
सात सुरों के तानों में बजता,
विहंगिणी विक्षोभ का तार।

सप्त दिवसों की सजी चौक पर,
चंद्र रजनी का सुंदर गात।
साँझ सकारी सज कर खोली,
स्वप्न सुनहली गुलाबों की प्रात।

चरण-पाद धरने को पथ पर,
फैला दिये हैं पुष्प-किरण के हार।
विहान की सिंदूरी लालिमा ने,
बिछा दिये हैं मेघ अपार।

कंठों की कोकिल में सजी,
सुर लहरी की मधुर तान।
धवल जूही की पहन चादर,
मृदुल चाँदनी आई सान।

दुर्वा की तूलिका में बसी,
नील गगन की घनसार।
दो शरासर आँक लूंगा,
भू-धरा पर हैं कितने गद्दार।

सुनने की शक्ति दो मुझको,
देखूँ कितने पीत-कुसुम सुकुमार।
पंखुड़ियों के दो वलय वृन्त मुझे,
खोजूँ कितने श्वेत कलिका के हार।

स्वर्ण शिखा के माथे पर दो,
तिलक कुंकुम चंदन के डाल।
अरुण सारथी से पूँछ लूंगा,
शंभुभूषण मामा के भाल।

छाई अँखियन में घटा काली,
उर में प्रणय की प्यास।
श्वांसों में भर दूंगा मलय समीर,
अधरों पर पूर्ण उच्छवास।

चंद्र पर अब लहरायेगा झंडा,
हृदय पर नागिन डोलेंगे।
जो कहते थे पिछड़ा हमको
छाती पीट-पीटकर रोयेंगे।

बंकिम धन्वा पर चढ़ा दूँगा,
कर कुसुम से तीर खींचूंगा।
मदहोश यौवन की नागों पर,
सुंदरता की जंजीर पहना दूँगा।

करुँगा सृजित कल्पित जग को,
उसे बनाऊँगा तुम्हारा आवास।
थोड़ी-सी धरती होगी,
पूरा – पूरा होगा उसमें आकाश।

विचरता मन छानता रहता,
स्वप्न निखिल संसार।
कुछ-कुछ नया लाते,
जिससे कर सकूँ तेरा श्रृंगार।

कुश के अंकुर कभी,
बौरे सिंधुकेशर के फूल।
कमल के पराग कभी,
थोड़े-थोड़े केतकी के धूल।

उतरते सूरज की वधु,
लाली लाज उपनाम।
सिमटी चंद्रिका के अंकों में,
सखी निशा को मान।

निहारती अपलक अपरिचित को,
उर्वशी वल्लभ की ओर।
दिव्य अप्सरा की अँखियों में,
मादकता निहारे चक्षु कोर।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

—————

यह कविता (गीतों का हार।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख/दोहे सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

—————

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: chandrayaan 3 पर कविता, poem on earth in hindi, Satish Shekhar Srivastava 'Parimal', गीतों का हार, गीतों का हार - सतीश शेखर श्रीवास्तव परिमल, धरती माँ पर कविता इन हिंदी, धरती माँ पर शायरी, पृथ्वी पर्यावरण पर कविता, सतीश शेखर श्रीवास्तव - परिमल

धरती पर ही।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ धरती पर ही। ♦

धधक रही है विश्व धारा आज, ज्वालाओं सी बैर – विकारों से।
अराजकताएं है कहीं फैली तो, कहीं जल रही है भ्रष्टाचारों से।

अम्बर का सब पानी बुझा न सके, कहां ठंडक चांद सितारों से?
यह नस – नस में फैली नफरत कैसे, हो सकेगी दूर सरकारों से?

ईर्ष्या, द्वेष, वैमनस्यी आग से, हर देश है दुनियां में जुलस रहा।
कहीं जाति, धर्म के झगड़े हैं, कहीं आवाम सत्ता से उलझ रहा।

खतरे में आज है समूची दुनियां, न के महज एक मानव प्राणी।
आतंकवाद कहीं दमन की नीति, हर देश की देखो एक कहानी।

रोग – शोक और महामारी, भ्रष्टाचार से मानवता सब भूल गए।
नकली जीवन, झूठ फरेबी, सच्चे तो मशाल से ढूंढने को ही रहे।

भाई – भाई का बैरी बना है, बाप – बेटों में भी तो आज दरारें हैं।
बहनों के साथ भी निभती कहां? पति – पत्नी में भी तकरारें हैं।

अध्यात्म से होती दूर यह दुनियां, जल रही है दहकते अंगारों सी।
अध्यात्म की पावन जलधारा ही, धो सकेगी मैल ये विकारों की।

पर लोग कहां सुनते बात यहां अब, ज्ञान, ध्यान व संस्कारों की।
होड़ लगी है सब में तो बस, कैसे कृपा मैं पा सकूं सरकारों की।

धन से बड़ा तो कुछ नहीं लगता, आज दुनियां में देखो लोगों को।
लालसा बढ़ी कि, भोग ले धरती पर ही, स्वर्ग के सारे भोगों को।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से वर्तमान समय में धरती पर पर क्या – क्या हालात हो गए है, इंसानियत किस दिशा में जा रही है कुछ पता नही किसी को। वर्तमान समय में पृथ्वी पर अनियंत्रित बिखरे हालात का सुंदर मनोरम वर्णन किया है।

—————

यह कविता (धरती पर ही।) “हेमराज ठाकुर जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Idहै:kmsraj51@hotmail.com.पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

cymt-kmsraj51

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

 

 

____Copyright ©Kmsraj51.com  All Rights Reserved.____

Filed Under: 2021-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता, हेमराज ठाकुर जी की कविताये। Tagged With: hemraj thakur, hemraj thakur poems, kavi hemraj thakur, poem on earth day in hindi, small poem on earth in hindi, World Environment Day Hindi Kavita On Nature, कोरोना और पर्यावरण पर कविता, कोरोना का कहर, कोरोना वायरस का क़हर, धरती बचाओ पर कविता, धरती माँ पर कविता इन हिंदी, पृथ्वी पर कविता, प्रकृति के लिए लिखी गयीं हिंदी कविताएं, प्रकृति संरक्षण पर कविता, विश्व पृथ्वी दिवस पर कविता, हिंदी में पृथ्वी पर कविता, हेमराज ठाकुर जी की कविताये

Primary Sidebar

Recent Posts

  • निरर्थक रील्स की आरी – गुमराह होती नारी।
  • बात वक्त की।
  • तिरंगा का करें सम्मान।
  • एक सफर।
  • बाल विवाह – एक अभिशाप।
  • क्या बदलाव लायेगा नया साल।
  • है तो नववर्ष।
  • मोह।
  • अपना धर्म सबसे उत्तम।
  • ठंडी व्यार।
  • रिश्तों को निभाना सीखो।
  • तंत्र, मंत्र और तत्व ज्ञान में अंतर।
  • मित्र।
  • आखिर क्यों।
  • समय।
  • काले बादल।
  • सुबह का संदेश।

KMSRAJ51: Motivational Speaker

https://www.youtube.com/watch?v=0XYeLGPGmII

BEST OF KMSRAJ51.COM

निरर्थक रील्स की आरी – गुमराह होती नारी।

बात वक्त की।

तिरंगा का करें सम्मान।

एक सफर।

बाल विवाह – एक अभिशाप।

क्या बदलाव लायेगा नया साल।

है तो नववर्ष।

मोह।

अपना धर्म सबसे उत्तम।

ठंडी व्यार।

रिश्तों को निभाना सीखो।

Footer

Protected by Copyscape

KMSRAJ51

DMCA.com Protection Status

Disclaimer

Copyright © 2013 - 2026 KMSRAJ51.COM - All Rights Reserved. KMSRAJ51® is a registered trademark.