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भोला शरण प्रसाद जी की कविताएं

गणतंत्र दिवस समारोह।

Kmsraj51 की कलम से…..

Republic Day Celebrations – गणतंत्र दिवस समारोह।

आओ झूमे, नाचे, जश्न मनाएं,
गणतंत्र दिवस आया है।
जिरादेई की धरती पर लिया जनम,
डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को कोटी कोटी नमन।
कलम के पुजारी ने संभाली कमान,
संविधान समिती के स्थाई अध्यक्ष बने।
देश को दिया नया संविधान।

भारत मां के सपूत प्रेम बिहारी रायजादा,
संविधान लिखने का लिया प्रण।
हर पन्ने पर नाम है अंकित,
समर्पण किया हर क्षण।
अधर में लटका हुआ था,
भारत की जनता का ख्वाब।
कई सपूत आगे आए,
ऐसे उभरे मानो खिलता हुआ गुलाब।

स्वतंत्र भारत की सांसों में,
नए जीवन का संचार किया।
ओजपूर्ण विचार धारा से,
जनता को जागृत किया।
अनेकता में एकता की भारत भूमी पर,
संविधान लाकर एकता का शंखनाद किया।

राष्ट्रभक्ति की ज्योति जलाकर,
जन – जन में प्रकाश भरे।
भारत तुम्हारा ऋणी रहेगा,
चारो ओर गुणगान करेगा।
नभ में चांद, सूरज जैसा,
हर रोज तुम्हारी यशगान करेगा।

२६ जनवरी १९५० का दिन था महान,
अंबेडकर जी ने,
राजेंद्र बाबू से हस्ताक्षर करवाई।
हर चेहरे पर आई रौनक,
नए संविधान ने समानता लाई।
बहुत नाम गुमनाम है,
सबको “भोला” का सत सत नमन।

अमर हैं आप सभी,
रचकर भारतीय संविधान।
नया संविधान लागू कर,
भारत में नया इतिहास रच दिया।
खून बहाकर आजादी पाने वाले,
हर सपूत के सपनों को सच कर दिया।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150 / नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

—————

  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — 26 जनवरी 1950 ईस्वी को भारत का संविधान भारतीय संविधान की प्रस्तावना के तहत भारत में विधिवत लागू किया गया। इस दिन से भारत एक पूर्ण गणतंत्र राष्ट्र बन गया। इसलिए इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस संविधान को तैयार करने में 2 वर्ष 11 माह और 18 दिन का समय लगा था। भारतीय संविधान को अपने हाथों से लिखने वाले श्री प्रेम बिहारी नारायण रायजादा जी थे। गणतंत्र दिवस समारोह महान राष्ट्रीय नेता, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती 23 जनवरी को शुरू होकर 30 जनवरी को शहीद दिवस पर समाप्‍त होने के साथ सप्ताह भर चलेगा। यह समारोह आईएनए के दिग्गजों, स्वतंत्रता के लिए बलिदान देने वाले लोगों और आदिवासी समुदायों को श्रद्धांजलि होगी जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया था।

—————

यह कविता (गणतंत्र दिवस समारोह।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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दर्द ए दिल।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ दर्द ए दिल। ♦

क्यूं पूछते हो मेरी खैरियत,
इस मतलबी जमाने में,
तेरी तारीफ़ सुना है हर जुबां से।
बड़े उस्ताद हो नश्तर चुभाने में,
कभी गूंजती थी किलकारी,
मेरे घर _आँगन में।

आपस की अदावत ने,
घर को सुनसान ओ श्मशान बना दिया।
कैसी फितरत हो गई पढ़े-लिखे इंसान की,
गुलजार गुलशन का गुल खिल न पाया,
नफ़रत की आड़ में पतझड़ बना दिया।

जो खेलते थे मेरी गोद में, मुंह बिना दांत के
मेरी आंखो में आंसू देकर रुलाते रहते हैं।
रिश्तों को मरते देख नहीं सकता,
आंसू पोंछ कर रिश्ता निभाते रहते हैं।

पैसे का गुरुर उन्हें अंधा बना दिया,
जिनके मुंह में खिलाते थे रोटी का टुकड़ा।
मेरी छोटी-छोटी बात को राई का पहाड़ बना दिया।
जो कभी दिल से करते एहतराम,
बिना सच्चाई जाने, लाल आंखें दिखा दिया।

करता हूं गुजारिश आपसे,
न परेशान कीजिए न हैरान कीजिए।
कुछ दिन जीने दो खुदा के वास्ते,
सुन लो दर्द ए दिल मेरी,
मुस्कुरा कर छोड़ दीजिए।

बड़े तास्सुफ की बात है,
उन्सीयत का नमोनिशान नहीं।
हवाख्वाह को लोग भूल गए,
दिल में उल्फत का अरमान नहीं।
तेरे लव पे रहे तबस्सुम,
मांगता रहा दुआ सुबह शाम।

इफलाह के बदले गर मिली इफ्तरा,
तेरी हर दुआ कबूल हो,
मुझे मंजूर हर अंजाम,
दिल से दुआ है मेरी,
तू सदा रहे आबाद।
तुझे कभी न “भोला” याद आए,
कितनी भी वक्त गुजरे,
मेरी फूरकत के बाद।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150/नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

—————

  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस संसार में जननी-जनक व जन्मभूमि के लिए जो सम्मान था वो आजकल के पीढ़ी में कही गुम सा हो गया है। पैसे का गुरुर उन्हें इस क़दर अंधा बना दिया की जिनके मुंह में खिलाते थे रोटी का टुकड़ा। मेरी छोटी-छोटी बात को राई का पहाड़ बना दिया आज। जो कभी दिल से करते एहतराम, बिना सच्चाई जाने, आज लाल आंखें दिखा दिया तुमने अपने जननी-जनक पर। जननी-जनक रिश्तों को मरते देख नहीं सकते, आंसू पोंछ कर रिश्ता निभाते रहते हैं। इस संसार में एक माता-पिता ही है जो सदैव ही अपने बच्चों को सुखी और प्रसन्न देखता चाहते है। इसलिए जननी-जनक व जन्मभूमि का सदैव ही दिल से सम्मान करे, वर्ना अंतिम समय में पछतावे के अलावा कुछ बचेगा नहीं आपके पास।

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यह कविता (दर्द ए दिल।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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भक्त की अभिलाषा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ भक्त की अभिलाषा। ♦

खुशी से वास्ता नहीं,
मुश्किलों से गहरा लगाव है।
मेरी जिंदगी कभी तपती दोपहरी,
कभी घनी छांव है।

अपनों ने दिए बेहिसाब दर्द,
मेरी कराहती वेदना की अपनी घाव है।
शब्द हुए अपाहिज,
दर्द से लथपथ पांव है।

रूह तक झुलस चूका हूं,
अपनों ने जलाए वही अलाव है।
पतझड़ के मौसम में जुर्रत नहीं,
बहार की ख्वाइश कैसे करूं।

आंखें नम हैं मेरी हे प्रभु,
लव पे तबस्सुम की ख्वाइस कैसे करूं।
इतना आसान नहीं मेरे लिए,
गुजरी बातों को भूल जाएं।

जिस राह पर चलूं मेरे प्रभु,
मेरे हिस्से में कंकड़।
अपनों के लिए फूल बन जाए।
एक स्वर गूंजता मार दूंगा,
क्यूं यही शोर सब ओर है।

समाज भ्रष्ट या फिर कमजोर है,
हे शिवशम्भू, कृष्णकन्हैया,
मां लक्ष्मी, चित्रगुप्त,।
मैं हूं निर्बल,,,
अब मेरी भी विनती सुन लो,
मंदिर-मंदिर माथा टेका,
पर कहीं भी मिली नहीं।

तुम्हारे दर्शन बिन प्रभु,
लगता है मन कहीं नहीं।
आश लगाए बैठा हूं,
माता, जगत पिता संग आयेगी,
बहुतेरे भक्त हैं तेरे,
दुःख हर कर, गले जरूर लगाएगी।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150/नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

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  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — एक सच्चा भक्त सदैव ही मानव कल्याण के लिए प्रभु से प्रार्थना करता है, वह अपने लिए कभी भी कुछ नहीं मांगता है। वह सदैव ही सभी के लिए सुख ही सुख की कामना करता है प्रभु से, चाहे दुनिया वाले या उसके अपने कितना भी उसे तकलीफ़ दे। मानव जीवन में उतार-चढ़ाव तो लगा ही रहता है, इसका मतलब ये नहीं की अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए किसी को भी तकलीफ़ दिया जाएं। एक बात सदैव ही याद रखें – विकर्म का फल सदैव ही तकलीफ़ देने वाला ही होगा, अच्छे कर्मों का फल देर से भले ही मिले लेकिन आपके लिए सुखदायी होता है। इसलिए अच्छे कर्म करे, मानवता को शर्मशार करने वाले कोई भी कर्म ना करें।

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यह कविता (भक्त की अभिलाषा।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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जरूरत।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ जरूरत। ♦

मेरे दोस्त, तुम्हारी नजरें गर पाक है,
तो कसम खुदा की, पर्दे की जरूरत नहीं।
काले – काले बादल को गर बरसना है,
तो उसे गरजने की जरूरत नहीं।

बेइंतहां मुहब्बत करते हो अगर,
तो इज़हार क्यूं नहीं करते।
मेरे दोस्त मुहब्बत छुपाए नहीं छुपती,
इसे छुपाने की जरूरत क्या है।

चाहे रहो भौंरा या गिद्ध बन जाओ,
गर तेरे खून में फितरत है शिकार करने की,
तो इस सैयाद को डरने की जरूरत क्या है।
तुम्हारी आंखें ही काफी हैं रमजा के लिए,
बोलने की जरूरत क्या है।

मैं तेरी ख़ामोशी समझता हूं, मेरे दोस्त,
कुछ भी बोलने की जरूरत क्या है।
सच बोलना और लिखना मेरी फितरत है बुरी,
अंजाम से डरता नहीं, कभी विचार करता नहीं।

नाज़ है तुझपे, तेरे जैसा होशियार तो नहीं,
रहता हूं जमीन पर, पर जमींदार नहीं।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150/नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

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  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — सच्चा प्यार एक-दूसरे के लिए एक मजबूत, गहरा और स्थायी स्नेह है। यह किसी के लिए गर्मजोशी और देखभाल की भावना है, और उन्हें खुश करने की इच्छा है। सच्चे प्यार में आपसी सम्मान, विश्वास और निस्वार्थता की भावना के साथ-साथ एक-दूसरे के लिए त्याग करने की इच्छा शामिल है। यह एक ऐसा प्यार है जो बिना शर्त है, जिसका अर्थ है कि यह एक-दूसरे के कार्यों या भावनाओं पर निर्भर नहीं है, बल्कि स्वतंत्र रूप से और बिना शर्त के दिया जाता है। सच्चा प्यार एक दुर्लभ और खास चीज है, और यह उन लोगों के लिए बहुत खुशी और खुशी ला सकता है जो इसका अनुभव दिलसे करते हैं।

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नव वर्ष समारोह 2023

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ नव वर्ष समारोह – 2023 ♦

हम गरीबों के लिए क्या नया साल साहब,
दो वक्त की रोटी के लिए हो गई सुबह से शाम साहब।
मेरे होठों की मुस्कान सबको दिखती है,
मगर दिल का जख्म किसी को दिखती नहीं।

मेरी आंखों से निकले आंसू सबको दिखती है,
मेरी आंसूओं में छिपा दर्द किसी को दिखती नहीं।
इंसान मैं भी हूं, मेरे दिल में है एक अरमान,
नए साल के जश्न में देखूं , सबके चेहरे पे मुस्कान।

तोहफा देने के काबिल नहीं,
पैसा हो जेब में दुनिया सुहानी लगती है।
दौलत में है इतनी ताकत, मिट जाती है दूरियां,
सारी दुनिया अपनी लगती है।

इल्तज़ा है खुदा से, मिटा दो सारी दूरियां,
ना कोई अमीर ना कोई गरीब, ना हो कोई मजबूरियां।
धरती ही जन्नत बन जाए,
शफ़त पे हो तबस्सुम, उल्फत के तराने।

गले से गले मिलें, जो भी आएं नया साल मनाने,
गया दिसंबर, जनवरी आई, नए साल की सबको बधाई।
हैं बख्ताबर, भारत देश की माटी पाई,
सभी देश वासियों को मेरी तरफ से नए साल की हार्दिक बधाई।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150/नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

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  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — क्या नया साल 2023 सभी के लिए खुशियाँ लेकर आएगा? या फिर गरीबों के लिए नए साल का कोई मतलब नहीं। नया साल केवल अमीरों के चोचले है। क्या केवल तारिक बदलेगा या फिर ये नया साल सभी के लिए खुशियों का सौगात लेकर आएगा? आओ हमसब मिलकर ये संकल्प ले इस नए साल 2023 में खूब मेहनत करेंगे और नए भारत के ग्रोथ में सहयोग करेंगे, जरूरतमंदों की मदद करेंगे। सभी देशवासियों को मेरी तरफ से नए साल की हार्दिक बधाई।

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यह कविता (नव वर्ष समारोह – 2023) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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भूखा इंसान।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ भूखा इंसान। ♦

चाहे हो किसी की सरकार,
ना खुश हो ना तू नाज़ कर।
गर हो भारत मां के सच्चे सपूत,
तहे दिल से भूखों का इलाज कर।

वो होंगे कितने बेशर्म,
जो दबा कर रखे हैं संपत्ति करोड़ों की।
गर हो तुम सच्चे सपूत,
भ्रष्टचारियों के खिलाफ़ आवाज़ बुलन्द कर।

ऐसे कानून का ईजाद कर,
छीन न पाए कोई गरीबों की रोटियां।
फिर तू जो चाहे तेरी मर्जी,
जनता जनार्धन पर आजीवन राज कर।

गरीबों की कोइ सुनता नहीं,
उनके लिए लड़ते लड़ते खुद हो गए अमीर।
जनता है भोली भाली,
इनको बताओ और इंकलाब का आगाज़ कर।

कोइ नहीं बांटता मुफ्त में रेवड़ी,
आत्मसम्मान से कैसा सौदा,
झूठी रेवड़ी से इंकार कर।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150/नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

—————

  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — नेता लोग झूठा वादा कर जीत जाते है और गरीबों की कोइ सुनता भी नहीं, उनके लिए लड़ते-लड़ते खुद हो गए अमीर सभी नेता लोग। क्यों नहीं किसी ऐसे कानून का ईजाद करें की कोई भी छीन न पाए कोई गरीबों की रोटियां। फिर तू जो चाहे तेरी मर्जी, जनता जनार्दन पर आजीवन राज कर। बेचारी जनता है भोली भाली, इनको बताओ और इंकलाब का आगाज़ कर, इन्हे अपनी वास्तविक शक्ति से अवगत कराएं। एक बात सदैव ही याद रखें – कोई भी आपको इस संसार में मुफ्त में कुछ भी नहीं देता, उसका कुछ न कुछ स्वार्थ छीपा ही रहता है। गर हो भारत मां के सच्चे सपूत, तहे दिल से भूखों का इलाज कर तू। जरा सोचो वो होंगे कितने बेशर्म, जो दबा कर रखे हैं संपत्ति करोड़ों की। गर हो तुम सच्चे सपूत, भ्रष्टचारियों के खिलाफ़ आवाज़ बुलन्द कर, और उन्हें उनके कर्मों की सजा दे जल्द से जल्द।

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यह कविता (भूखा इंसान।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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शिक्षक की महिमा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ शिक्षक की महिमा। ♦

कांटों में उलझा हुआ है,
मेरे दिल का ख्वाब।
बच्चा है हर आंगन का,
खिलता हुआ गुलाब।

कभी न भूलो अपना काम,
जग में तुझे करना है नाम।
जब भी आए संकट तुझको,
लेना तुम प्रभु का नाम।

मैं रोता हुआ गया,
विद्यालय के प्रांगण में।
बहुत बच्चे बिलख रहे थे,
मैंडम, सर दौड़े आए,
लेलिया अपने आलिंगन में।

घुटनों से रेंगते-रेंगते,
कब पैरों पर खड़ा हुआ।
शिक्षक-शिक्षिका के,
ममता की छांव में,
न जाने कब बड़ा हुआ।

कोई अभियन्ता, कोई नेता,
कोई बना अधिकारी।
कोई डाक्टर कोई सैनिक,
तो कोई बना कर्मचारी।

जो लोहे को कनक बनाया,
वो सम्मान कभी न पाया।
जिसकी दानिशमंदी ने,
सबको अब्बल बना दिया।

आज विवश हो कर सर झुकाता है,
जिसकी शिक्षा ने सबको मानव बना दिया।
बार-बार नमन है गुरु चरणों में,
मुझे काबिल बनाने के लिए।

मैं तो राह में पड़ा कंकड़ था,
कोटी-कोटी नमन,
मुझको हीरा बनाने के लिए।
मैं सीधा-साधा “भोला” – भाला,
सबकी नजरों में अच्छा हूँ।

चाहे मैं कुछ भी बन जाऊँ,
मैं आज भी आपका बच्चा हूँ।
गुरु – शिष्य का नाता देखो,
पिता – पुत्र से कहीं महान।

कली को आपने फूल बनाया,
महक उठा सारा हिन्दुस्तान।
गुरु बिन ज्ञान कोई न पाया,
अनुभव की आप हो खान।

शिष्य देखता प्यासी नजरों से,
गुरु होते अमृत की खान।
माँ शारदा, भगवान चित्रगुप्त से,
पहले वंदन, करता हूँ गुरु चरणों में।

कैसे लिखूं महिमा उनकी,
अभिलाषा है मेरी,
हाथ हो गुरु का,
जब शीश हो गुरु चरणों में।

कलम में वो ताकत है,
जो तलवार में नहीं होती।
कई सिकन्दर डूब गये,
वक्त के चक्कर में।
झोपड़ी जैसी रौनक,
दरबार में नहीं होती।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150/नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

—————

  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — “गुरु समान दाता नहीं, याचक शीष समान। तीन लोक की सम्पदा, सो गुरु दीन्ही दान॥” भावार्थ:- “गुरु के समान कोई दाता नहीं और शिष्य के सदृश याचक नहीं। त्रिलोक की सम्पत्ति से भी बढ़कर ज्ञान-दान गुरु ने दे दिया।” गुरु और पारस – पत्थर में अन्तर है, यह सब सन्त जानते हैं। पारस तो लोहे को सोना बनाता है, परन्तु गुरु शिष्य को अपने समान महान बना लेता है। गुरु कुम्हार है और शिष्य घड़ा है। गुरु ही हैं जो भीतर से हाथ का सहारा देकर, बाहर से चोट मार-मारकर और गढ़-गढ़ कर शिष्य की बुराई को निकालते हैं।

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यह कविता (शिक्षक की महिमा।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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आतंकवाद।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ आतंकवाद। ♦

आओ साथ मनाऐं ईद और होली,
क्यूं चलाते हो अपनों पर गोली।
गोली का जवाब सदभाव नहीं हो सकता,
हत्या करने वालों के लिए,
अहिंसा का प्रस्ताव हो नहीं सकता।

नाग कभी शांति का बीज बो, नहीं हो सकता,
लाख दूध पिलाओं भेड़िया शाकाहारी हो नहीं सकता।
इतिहास गवाह है हत्यारी बन्दूको ने,
कभी तर्पण नहीं किया,
आतंकवाद ने आज तक समर्पण नहीं किया।

गर शांति चाहिए कश्मीर की वैली में,
कलेजा ठोक कर उत्तर देना सिखो।
इजरायल की शैली में आतंकवाद तो,
कुचला जाता है, पत्थर दिल बनकर,
देखलिया अंजाम रहम दिल बनकर।

निर्दोष का खून बहाना छोड़े,
ना किसी का आशियाना तोड़े।
भटके हुए नौजवानों को राह पर लाना होगा
उजड़े हुए चमन को, फिर से जन्नत बनाना होगा।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150/नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

—————

  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — शांति चाहिए कश्मीर की वैली में, कलेजा ठोक कर उत्तर देना सिखो। इजरायल की शैली में आतंकवाद तो, कुचला जाता है, पत्थर दिल बनकर, देखलिया अंजाम रहम दिल बनकर। ये कड़वा है मगर सत्य है आतंकवाद का कोई भी नियम व कानून नहीं होता है वो केवल अपनी माँगों को ही पूरा करने के लिये सरकार के ऊपर दबाव बनाने के साथ ही आतंक को हर जगह फैलाने के लिये निर्दोष लोगों के समूह या समाज पर हमला करते रहते हैं। उनकी माँगे बेहद खास व खतरनाक होती है, जो वो चाहते हैं केवल उसी को पूरा कराते हैं किसी भी कीमत पर। ये आतंकवाद मानव जाति के लिये बहुत ही बड़ा खतरा है।

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यह कविता (आतंकवाद।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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