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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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kavi bhola sharan prasad poems

दर्द – ए – कश्मीर।

Kmsraj51 की कलम से…..

Dard-E-Kashmir | दर्द – ए – कश्मीर।

क्यूँ मारा बेगुनाहों को,
वो तो तेरे मेहमान थे,
जिनकी मदद से घर चलता था,
किसी को गाड़ी पे घुमाया,
किसी को खाना खिलाया।

कुछ तो तेरे होटल में ठहरे थे,
कुछ को तुमने घोड़े पे घुमाया,
जिसके घर के दिये से रौशन था तेरा घर,
उस दिये को तुमने किस बेरहमी से बुझाया,
हर कोई कुछ तुम्हें देने आया।

कुछ नहीं तुमसे लेना था,
मांगी थी मोहब्बत,
तुमने बदले में गोलियाँ बरसाया,
छुट्टी मनाने वालों को,
इस जहां से विदा कर दिया।

किसी का पिता छीना, किसी का पुत्र,
किसी का सुहाग मिटाया,
किसी अजनबी का घर उजाड़ने में मजा आया,
तेरा फैसला होगा खुदा के सामने।

तुमने कलमा पढ़वा या, बंदूक दिखाया,
सबने सिर झुका दिया,
तुझे हैवान कहूँ या कहूँ शैतान,
तुम खुद सजा पाओगे,
ये देश है वीर-जवानों का,
जिसे कहते हैं हिंदुस्तान।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150 / नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

—————

  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता निर्दोष लोगों पर हुए क्रूर आतंकी हमलों की मार्मिक कहानी बयान करती है। कवि आतंकियों से सवाल करता है कि उन्होंने उन मासूम लोगों को क्यों मारा, जो उनके मेहमान थे, जिनकी मदद से उनका व्यापार चलता था। कुछ पर्यटक उनके होटल में रुके थे, कुछ ने उनके घोड़ों की सवारी की, और कुछ ने उनकी सेवाओं का लाभ उठाया, लेकिन बदले में उन्हें मौत मिली। कवि इस अमानवीय कृत्य की निंदा करते हुए बताता है कि आतंकवादियों ने उन मासूम लोगों को निशाना बनाया, जो केवल प्यार और शांति की तलाश में आए थे। उन्होंने किसी का पिता, किसी का पुत्र, किसी का सुहाग छीन लिया और निर्दोषों के घर उजाड़ दिए। आखिर में, कवि यह चेतावनी देता है कि इन पापों का न्याय अवश्य होगा, और आतंकवादी खुदा के सामने सजा पाएंगे। भारत जैसे वीर और साहसी देश में ऐसी बर्बरता के लिए कोई जगह नहीं है, और अंततः सत्य की विजय होगी।

—————

यह कविता (दर्द – ए – कश्मीर।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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Filed Under: 2025 - KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: kavi bhola sharan prasad poems, दर्द - ए - कश्मीर, दर्द - ए - कश्मीर - भोला शरण प्रसाद, भोला शरण प्रसाद, भोला शरण प्रसाद जी की कविताएं

कन्या पूजन।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kanya Poojan | कन्या पूजन।

Kanyā Pūjā or Kumārī Pūjā, is a Hindu holy ritual, carried out especially on the Ashtami (eighth day) and Navami (ninth day) of the Navaratri festival.

अधर्मी से भरा हुआ संसार,
दिखावा क्यूँ करता जालिम इंसान?
चाहे हो दुर्गा पूजा या हो कन्या पूजन,
नहीं मिले किसी अधर्मी को यह अधिकार।

होती है बलात्कार, अपहरण, हत्या,
बता दे कोई, क्या है बच्चियों का कसूर?
खिलती कलियों को मसल देना,
हैवानों, ये तेरा कैसा दस्तूर?

ग़र बेटा कुल दीपक,
तो बेटी बाप का गुरूर है।
आज न तो कल नाम रौशन कर,
इतिहास रचती जरूर है।
जो मन के रावण को मार सके,
राम वही बन पाएगा।

सीता को रावण के चंगुल से दूजा कौन बचाएगा?
नर में रावण बसता, शूर्पणखा नारी में,
आओ मन के रावण को, खुद ही मार भगाएं।
शूर्पणखा न बने कोई,
ऐसी अमृत वाणी बोलें और सिखाएं।

आ न, बान, शान की खातिर,
बच्चियों को मौत के घाट उतारते हैं।
इज्जत, ऊंच- नीच, धर्म के नाम पर,
ऑनर किलिंग करते हैं।
समाज भूखा है अधिकार का,
क्यूँ करते हैं लोग दिखावे का?
कन्या पूजन तो ढोंग और बहाना है।

रावण दहन तो हो गया,
दुर्योधन जांघों को ठोक रहा।
जब बेटियों को दहेज के खातिर जलाना है,
क्यूं करते कन्या पूजन, जिसे कल जलाना है?
दहेज के लोभी से पूछो,
यह हकीकत या अफ़साना है?

कन्या पूजन गर करते हो?
नारी का करो दिल से सम्मान।
वचन दो कन्याओं को,
कभी न होगा उनका अपमान।
राम, कृष्ण बनकर, पापियों से,
इस धरती को मुक्त कराना है।
सभी बेटियाँ रहे सुरक्षित,
सोचो, कन्याओं को कैसे बचाना है?

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150 / नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

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  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में कन्या पूजन एक हिन्दू धार्मिक परंपरागत आचार है जो भारतीय समाज में प्रचलित है। इसे नवरात्रि के दौरान, विशेषकर नवमी तिथि को, कन्या-कुमारिकाओं की पूजा के रूप में किया जाता है। इस पर्व में कन्या-कुमारिकाओं की पूजा करने का उद्देश्य देवी दुर्गा की शक्ति को महसूस करना और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना होता है। कविता में बेटियों के प्रति आत्मविश्वास बढ़ाने का आग्रह किया गया है और यह बताया गया है कि शक्तिशाली स्त्री समाज में सुरक्षित रह सकती है और बदलाव की ओर कदम बढ़ा सकती है। इसके अलावा, इसके माध्यम से समाज को अधर्म और अनैतिकता के खिलाफ उत्तरदाता बनाने की अपील की गई है।

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यह कविता (कन्या पूजन।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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वेदना।

Kmsraj51 की कलम से…..

Pain | वेदना।

एक दिन ऐसा आएगा, हम तो चले जायेंगे।
कुछ को छोड़, सभी को याद बहुत आयेंगे।

ढूढ़ने वाले ढूंढते रहेंगे, पर हमें कहीं न ढूंढ पायेंगे।
ये मुराद कभी पूरी न होगी, कहीं भी न मिल पायेंगे।

मेरे सभी अजीज, अपनी दुनिया में मस्त रहेंगे।
हम किसी दूसरी दुनिया में खो जायेंगे।

कोई न रोक पायेगा, आने वाले आते रहेंगे।
जो आया इस जहां में, मुक़र्रर वक़्त पर जाते रहेंगे।

“भोला” का पथ सत्कर्म है, जीवन का यही मर्म है।
आना – जाना लगा रहेगा, यही कुदरत का क्रम है।

इससे मुक्ति मिल जायेगा, फिजूल वो भ्रम है।
भगवान के घर में, गुनाहगारों की शिनाख्त बाकी है।

थोड़ी इबादत राम, कृष्ण, चित्रगुप्त की कर लूं।
तू भी जा अब मस्जिद में, अज़ान तेरी बाकी है।

जाना हैं दोनों को भगवान के पास, तुझे भी मुझे भी।
गुज़ारिश है बन्दगी कर, जो साँसे बाकी है।

मिलना है ग़र प्रभु से, तो चलना है नेकी की राह पर।
आहत न हो कोई दिल, इसे अख़लाक़ कहते हैं।

मग फिरत के बाद, जन्नत मिल जाये।
इसे खुशकिस्मती, वो इत्तफाक कहते हैं।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150 / नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

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  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — अन्‍य जीवों की तरह मनुष्य के प्राण संकट में नहीं होते तभी यह जीवन प्रभु स्मरण और भजन के लिए अनुकूल है। पर जीवों की वेदना से भी बड़ी वेदना मानव जन्म में तब होती है जब हम प्रभु के बनने का सुअवसर भी गवां देते है फालतू के कार्यों की वजह से। मानव जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते है, कभी भी एक जैसा समय लम्बे समय तक नहीं रहता हैं।

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यह कविता (वेदना।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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समर्पण।

Kmsraj51 की कलम से…..

Samarpan | समर्पण।

जब रोते हुए आए संसार में,
कलेजे का टुकड़ा समझ, माँ ने गोद में उठाया।
माँ ने चलना सिखाया, नया जीवन दिया।
सासु माँ भी कम नहीं, जीवन साथी दिया।

माँ ने मुस्करा कर दिल जीतना सिखाया,
सास ने समाज में उठना बैठना सिखाया।
माँ ने रोटी बनाना सिखाया,
सास ने घर चलाना सिखाया।

जन्म के समय कोमल कली थी,
माँ ने अपने आंचल में छुपाकर सम्भाला।
सास ने अपनी ज़मीन पर विशाल पेड़ बनाया,
माँ ने मुस्कान का मतलब बताया।

सास ने विपत्ति में भी मुस्करा कर जीना सिखाया,
माँ की तुलना ईश्वर से करूँ, सास भी गुरु समान है।
किसी का भी निरादर मानवता का अपमान है,
जब भी रोई बचपन में, माँ ने मुझे गले लगाया।

माँ की छवि सास में देखी,
जब सिसकती हुई बहू को ससुराल में पहली बार,
बेटी की तरह गले लगाया, यही दस्तूर है।
सासू माँ ने याद दिलाया, सास बनी माँ,
बहु को बेटी मानकर, बुढ़ापे में कुछ न चलेगी,
बहु साथ निभाएगी अपनी माँ जानकर।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150 / नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

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  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — माँ ने मुस्करा कर दिल जीतना सिखाया, सास ने समाज में उठना बैठना सिखाया। माँ ने रोटी बनाना सिखाया, सास ने घर चलाना सिखाया। जन्म के समय कोमल कली थी, माँ ने अपने आंचल में छुपाकर सम्भाला। सास ने अपनी ज़मीन पर विशाल पेड़ बनाया, माँ ने मुस्कान का मतलब बताया। सास ने विपत्ति में भी मुस्करा कर जीना सिखाया, माँ की तुलना ईश्वर से करूँ, सास भी गुरु समान है। किसी का भी निरादर मानवता का अपमान है। माँ वह है जो हमें जन्म देती है, यहीं कारण है कि संसार में हर जीवनदायनी वस्तु को माँ की संज्ञा दी गयी है। यदि हमारे जीवन के शुरुआती समय में कोई हमारे सुख-दुख में हमारा साथी होता है तो वह हमारी माँ ही होती है। माँ हमें कभी इस बात का एहसास नही होने देती की संकट के घड़ी में हम अकेले हैं। बहू के साथ सासू मां का रिश्ता थोड़ा मीठा, तो थोड़ा तीखा होता है। मैं बहुत खुशनसीब हूँ की मुझे मेरी सासु माँ मेरी माँ जैसी ही मिली। मुझे बहुत बार ये अहसास होता है कि ये बात तो मेरी मम्मी भी ऐसी ही कहती थी, ये काम तो मेरी मम्मी भी ऐसे ही करती थी। मुझे मेरी सास में माँ का प्रतिबिम्ब ही नज़र आता है। मैं भगवान् से यही प्रार्थना करती हूँ की मेरी सास जैसी सास हर लड़की को मिले। कुछ महिलाएं अपनी सास को “माँ” कहती हैं क्योंकि वे उसके बहुत करीब महसूस करती हैं।

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यह कविता (समर्पण।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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स्वागत विक्रम संवत 2080

Kmsraj51 की कलम से…..

Welcome Vikram Samvat 2080 | स्वागत विक्रम संवत 2080

भगवान चित्रगुप्त अवतरित हुए आज ही के दिन,
चित्र से बना चैत्र, बदला साल वो दिन।
नए साल में प्रवेश करने जा रहे हैं,
पुरानी यादों को दिल में जकड़े हुए,
नए वर्ष, चैत्र प्रतिपदा का स्वागत करने जा रहे हैं।

फिर से नए वर्ष में प्रवेश करने जा रहे हैं,
बुरी यादों को भूलाकर,
लेके संकल्प कामयाबी का।
कलम की ताकत आजमाने जा रहे हैं,
एक नए वर्ष में प्रवेश करने जा रहे हैं।

सिखा बहुत कुछ पुराने वर्षों से,
टूटा नहीं हौसला, दिल में है उमंग।
फिर नए वर्ष का अभिनंदन करने जा रहे हैं,
हम नए वर्ष में प्रवेश करने जा रहे हैं।

नया सवेरा लाएगा, नया साथी,
नए सपने, नई राहें, सब कुछ होगा नया – नया।
अब न निकलेंगी आहें,
हर नव प्रभात में होगी, खुशियों की बौछारें।
उस प्रभात का दीदार करने जा रहे हैं,
हम सभी नए साल में प्रवेश करने जा रहे हैं।

माता के जयकारा से गूंज रहा सारा घर द्वार,
ऐसा दिन बार – बार आए, लाए खुशियां अपार।
सिंह पर सवार मैया को हर घर में बुला रहे हैं,
फिर नए साल में प्रवेश करने जा रहे हैं।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150 / नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

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  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — आत्मिक प्रेम, निस्वार्थ स्नेह, करुणा व मानवता का पवित्र महापर्व ‘विक्रम संवत’ हैं। विक्रम-संवत के अनुसार नव वर्ष का आरंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होता है। ‘विक्रम संवत’ अत्यंत प्राचीन संवत है। भारत के सांस्कृतिक इतिहास की दृष्टि से सर्वाधिक लोकप्रिय राष्ट्रीय संवत ‘विक्रम संवत’ ही है। ‘विक्रम संवत’ के उद्भव एवं प्रयोग के विषय में विद्वानों में मतभेद है। मान्यता है कि सम्राट विक्रमादित्य ने ईसा पूर्व ५७ में इसका प्रचलन आरम्भ कराया था। फ़ारसी ग्रंथ ‘कलितौ दिमनः’ में पंचतंत्र का एक पद्य ‘शशिदिवाकरयोर्ग्रहपीडनम्’ का भाव उद्धृत है। विद्वानों ने सामान्यतः ‘कृत संवत’ को ‘विक्रम संवत’ का पूर्ववर्ती माना है। विक्रम संवत :​​ विक्रम संवत में सभी का समावेश है।

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यह कविता (स्वागत विक्रम संवत 2080) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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दर्द ए दिल।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ दर्द ए दिल। ♦

क्यूं पूछते हो मेरी खैरियत,
इस मतलबी जमाने में,
तेरी तारीफ़ सुना है हर जुबां से।
बड़े उस्ताद हो नश्तर चुभाने में,
कभी गूंजती थी किलकारी,
मेरे घर _आँगन में।

आपस की अदावत ने,
घर को सुनसान ओ श्मशान बना दिया।
कैसी फितरत हो गई पढ़े-लिखे इंसान की,
गुलजार गुलशन का गुल खिल न पाया,
नफ़रत की आड़ में पतझड़ बना दिया।

जो खेलते थे मेरी गोद में, मुंह बिना दांत के
मेरी आंखो में आंसू देकर रुलाते रहते हैं।
रिश्तों को मरते देख नहीं सकता,
आंसू पोंछ कर रिश्ता निभाते रहते हैं।

पैसे का गुरुर उन्हें अंधा बना दिया,
जिनके मुंह में खिलाते थे रोटी का टुकड़ा।
मेरी छोटी-छोटी बात को राई का पहाड़ बना दिया।
जो कभी दिल से करते एहतराम,
बिना सच्चाई जाने, लाल आंखें दिखा दिया।

करता हूं गुजारिश आपसे,
न परेशान कीजिए न हैरान कीजिए।
कुछ दिन जीने दो खुदा के वास्ते,
सुन लो दर्द ए दिल मेरी,
मुस्कुरा कर छोड़ दीजिए।

बड़े तास्सुफ की बात है,
उन्सीयत का नमोनिशान नहीं।
हवाख्वाह को लोग भूल गए,
दिल में उल्फत का अरमान नहीं।
तेरे लव पे रहे तबस्सुम,
मांगता रहा दुआ सुबह शाम।

इफलाह के बदले गर मिली इफ्तरा,
तेरी हर दुआ कबूल हो,
मुझे मंजूर हर अंजाम,
दिल से दुआ है मेरी,
तू सदा रहे आबाद।
तुझे कभी न “भोला” याद आए,
कितनी भी वक्त गुजरे,
मेरी फूरकत के बाद।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150/नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

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  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस संसार में जननी-जनक व जन्मभूमि के लिए जो सम्मान था वो आजकल के पीढ़ी में कही गुम सा हो गया है। पैसे का गुरुर उन्हें इस क़दर अंधा बना दिया की जिनके मुंह में खिलाते थे रोटी का टुकड़ा। मेरी छोटी-छोटी बात को राई का पहाड़ बना दिया आज। जो कभी दिल से करते एहतराम, बिना सच्चाई जाने, आज लाल आंखें दिखा दिया तुमने अपने जननी-जनक पर। जननी-जनक रिश्तों को मरते देख नहीं सकते, आंसू पोंछ कर रिश्ता निभाते रहते हैं। इस संसार में एक माता-पिता ही है जो सदैव ही अपने बच्चों को सुखी और प्रसन्न देखता चाहते है। इसलिए जननी-जनक व जन्मभूमि का सदैव ही दिल से सम्मान करे, वर्ना अंतिम समय में पछतावे के अलावा कुछ बचेगा नहीं आपके पास।

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यह कविता (दर्द ए दिल।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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भक्त की अभिलाषा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ भक्त की अभिलाषा। ♦

खुशी से वास्ता नहीं,
मुश्किलों से गहरा लगाव है।
मेरी जिंदगी कभी तपती दोपहरी,
कभी घनी छांव है।

अपनों ने दिए बेहिसाब दर्द,
मेरी कराहती वेदना की अपनी घाव है।
शब्द हुए अपाहिज,
दर्द से लथपथ पांव है।

रूह तक झुलस चूका हूं,
अपनों ने जलाए वही अलाव है।
पतझड़ के मौसम में जुर्रत नहीं,
बहार की ख्वाइश कैसे करूं।

आंखें नम हैं मेरी हे प्रभु,
लव पे तबस्सुम की ख्वाइस कैसे करूं।
इतना आसान नहीं मेरे लिए,
गुजरी बातों को भूल जाएं।

जिस राह पर चलूं मेरे प्रभु,
मेरे हिस्से में कंकड़।
अपनों के लिए फूल बन जाए।
एक स्वर गूंजता मार दूंगा,
क्यूं यही शोर सब ओर है।

समाज भ्रष्ट या फिर कमजोर है,
हे शिवशम्भू, कृष्णकन्हैया,
मां लक्ष्मी, चित्रगुप्त,।
मैं हूं निर्बल,,,
अब मेरी भी विनती सुन लो,
मंदिर-मंदिर माथा टेका,
पर कहीं भी मिली नहीं।

तुम्हारे दर्शन बिन प्रभु,
लगता है मन कहीं नहीं।
आश लगाए बैठा हूं,
माता, जगत पिता संग आयेगी,
बहुतेरे भक्त हैं तेरे,
दुःख हर कर, गले जरूर लगाएगी।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150/नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

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  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — एक सच्चा भक्त सदैव ही मानव कल्याण के लिए प्रभु से प्रार्थना करता है, वह अपने लिए कभी भी कुछ नहीं मांगता है। वह सदैव ही सभी के लिए सुख ही सुख की कामना करता है प्रभु से, चाहे दुनिया वाले या उसके अपने कितना भी उसे तकलीफ़ दे। मानव जीवन में उतार-चढ़ाव तो लगा ही रहता है, इसका मतलब ये नहीं की अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए किसी को भी तकलीफ़ दिया जाएं। एक बात सदैव ही याद रखें – विकर्म का फल सदैव ही तकलीफ़ देने वाला ही होगा, अच्छे कर्मों का फल देर से भले ही मिले लेकिन आपके लिए सुखदायी होता है। इसलिए अच्छे कर्म करे, मानवता को शर्मशार करने वाले कोई भी कर्म ना करें।

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मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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