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महागौरी पर कविता

नवरात्रि।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ नवरात्रि। ♦

आया नवरात्रि का त्यौहार,
घर-घर में घट स्थापना हो रही है।
सजा माता का दरबार,
माता की पूजा अर्चना हो रही है।

सिंह पर सवार माता आयी,
भक्तों की सुनने पुकार।
छायी चारों तरफ खुशियां,
आयी मंदिरों में हो रही जय जयकार।

जो भी आता माँ के द्वार,
भक्ति श्रद्धा से शीश नवाता।
खाली झोली भरती माता,
मन चाहें मुरादें पाता।

माँ की महिमा को सबने गाया,
दुर्गा माँ ने पार लगाया।
माँ के चरणों में सुख,
समृद्धि, प्रेम का वरदान पाया।

कर लो माँ की नवरुपों में पूजा,
अर्चन भक्ति का उत्सव आया।
संसार मे माँ से बढ़कर,
कोई नहीं और पाया।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

—————

  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — आज हम बात कर रहे हैं हमारे देश के सनातन धर्म (हिन्दू धर्म) द्वारा मनाये जाने वाले नवरात्रि त्यौहार की, इस त्यौहार को बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। नवरात्रि में लोग 9 दिन व्रत रखते हैं और आखिरी दिन मां की पूजा करके नौ कन्याओं को भोजन कराते हैं। यह त्यौहार अलग-अलग जगह पर अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। काफी जगह इस दिन लोग गरबा और डांडिया भी खेलते हैं। यह त्यौहार असत्य पर सत्य की जीत को दर्शाता है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि साल में दो बार मनाया जाता है। नवरात्रि नौ दिनों के लिए निरंतर चलता है जिसमे देवी माँ के अलग-अलग स्वरूपों की लोग भक्ति और निष्ठा के साथ पूजा करते है। भारत में नवरात्रि अलग-अलग राज्यों में विभिन्न तरीको और विधियों के संग मनाई जाती है।

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यह कविता (नवरात्रि।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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शक्ति स्वरूपा माँ जगदम्बा तेरी जय हो।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ शक्ति स्वरूपा माँ जगदम्बा तेरी जय हो। ♦

शक्ति स्वरूपा माँ जगदम्बा तेरी जय हो।
आया नवरात्र, मईया के सज गया दरबार है,
हर्षित हो रहा मन है, खिल उठा संसार है।
सजा है दरबार चलो अब, मईया के द्वार है,
नव रूपों में होगा अब, मातारानी का दीदार है॥

महिषासुर संहारनी, अष्ट भुजाओं वाली शक्ति स्वरूपा,
माँ जगदम्बा का, होता जय जयकार है॥

माँ पार्वती के नव रूपों को, कहते नवदुर्गा है,
विघ्न विनाशनी माँ तेरी, महिमा अपरम्पार है।
सृष्टि पर जब आए संकट, मां स्वयं आ जाती है,
दुष्टों का कर संहार, संकट दूर भागती है॥

माँ जगदम्बा को जग करता, हरदम हर पल याद है,
शक्ति स्वरूपा माँ जगदम्बा का, होता जय जयकार है॥

माँ के नव रूपों का वर्णन करना, बड़ा ही मुश्किल काम है,
हर रूपों में उनकी महिमा का, होता अपना ही मान है।
पहले स्वरूप शैल पुत्री से, जग को परमात्मा का कराती दीदार है,
शिला, भू, समीर, अग्नि, नभ में, माँ करती स्वयं वास है,
शक्ति स्वरूपा माँ जगदम्बा का, होता जय जयकार है॥

दूसरे रूप ब्रह्मचारिणी से, जग में चेतना जगाती है,
तीसरे रूप चंद्रघंटा से, वाणी का साज सजाती है।
चौथे रूप कूष्मांडा से, नर नारी में गर्भ की शक्ति भरती है,
पंचम रूप स्कंदमाता में, पुत्रवती माँ का दर्श दिखाती है।
शक्ति स्वरूपा माँ जगदम्बा का, होता जय जयकार है॥

षष्ठ रूप कात्यायनी में भगवती कन्या की, बनी मात पिता है,
सप्तम रूप कालरात्रि से सब जड़ चेतन को, काल के गाल का देती संदेश है।
अष्टम रूप में माँ जगदम्बा, महागौरी के गौर वर्ण दर्शाती है।
नौवें रूप से माँ अपने साधक का ज्ञान से, परम सिद्धि का गुर सिखलाती है।
शक्ति स्वरूपा माँ जगदम्बा का, होता जय जयकार है॥

जग कल्याणी माँ, तू ही जग की पालनहार है,
हम सभी मानव जन पर, तेरा ही उपकार है।
विवेक करता विनती माँ से, यही बारंबार है,
अमन चैन हो इस धरा पर, ऐसी दरस दिखा जा मां।
जीवनदायनी करुणा बरसाने वाली माँ, सदा तेरी जय हो॥

हर दिल में तेरा ही वास है, तेरी महिमा अपरम्पार है,
शक्ति स्वरूपा माँ जगदम्बा का होता जय जयकार है॥

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

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• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — शक्ति स्वरूपा माँ जगदम्बा के नव रूपों, गुणों और शक्तियों का मनोरम सुन्दर वर्णन किया है। माँ जगदम्बा हर स्वरूप में, सदैव ही अपने भक्तों का कल्याण करती है। पाप नाशक, ध्यान पूर्वक जो भी पूजन करता शक्ति स्वरूपा माँ जगदम्बा देवी का, जीवन उसका सुखदायी हो जाता। शक्ति स्वरूपा माँ जगदम्बा देवी है बहुत ही दयालु अपने भक्तों पर सदैव ही माँ है बलिहारी। सच्चे मन से जो भी इंसान माँ के इस रूप का पूजन व भजन करता उसे जल्द ही सुख, समृद्धि ज्ञान – शक्ति भरपूर मिलता। आओ हम सब सच्चे मन से शक्ति स्वरूपा माँ जगदम्बा देवी का पूजन व भजन करें।

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यह कविता (शक्ति स्वरूपा माँ जगदम्बा तेरी जय हो।) “विवेक कुमार जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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