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नवरात्रि पर कविता : शक्ति पूजन

ब्रह्मचारिणी माता।

Kmsraj51 की कलम से…..

Brahmacharini Mata | ब्रह्मचारिणी माता।

“ब्रह्मचारिणी”

लाल रंग अति प्रिय माता को,
चीनी का भोग लगाते हैं।
तप की चारणी ब्रह्मचारिणी में
तप से ध्यान लगाए हैं॥

शास्त्र ज्ञान सर्वज्ञ संपन्न मां,
गुड़हल – कमल दल चढ़ाते हैं।
दूध युक्त चीजों का भोग,
घी – कपूर से दीपक जलाते हैं॥

श्रद्धा सुमन अर्पित करते,
ब्रह्मचारिणी की आरती पढ़ते हैं।
वर्षों शिव भक्ति में लगे,
विल्व पत्र केवल मां खाती थी॥

आंधी गर्मी बहुत थी झेलीं,
तप में मां का कोई न शानी है।
श्वेत वस्त्र में लपेट शरीर को
सृष्टि में सक्षम ऊर्जा भरती हैं॥

एक हाथ में अष्टदल माला,
दूजे में कमंडल धारण करती हैं।
आंतरिक शक्ति विस्तार करती,
पथ विचलित नहीं करने वाली हैं॥

जो शक्ति आराधना करे मन से,
उसके कठिन काम बन जाते हैं।
माता से कृपा आशीष मिलने पर,
बड़े संकट दूर भाग जाते हैं॥

नारद जी के उपदेश से माता,
कठिन तपस्या खुद कर डाली थी।
तप से मिलेंगे भोला शंकर,
मिलने वाली उसने मन में ठानी थी॥

पूर्व जन्म में दक्ष की पुत्री,
हवन कुंड में कूद शरीर गवाई हैं।
दूजे जन्म में ब्रह्मचारिणी रूप,
धर कर माता शक्ति स्वरूपा आई है॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — माँ दुर्गाजी का यह दूसरा स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनन्तफल देने वाला है। इनकी उपासना से मनुष्य में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है। जीवन के कठिन संघर्षों में भी उसका मन कर्तव्य-पथ से विचलित नहीं होता। माँ ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से उसे सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है। प्रात: स्नान के बाद मां ब्रह्मचारिणी की मूर्ति स्थापित करें। फिर उनकी पूजा करें, मां ब्रह्मचारिणी को अक्षत्, फूल, कुमकुम, गंध, धूप, दीप, नैवेद्य, फल आदि चढ़ाते हैं। यदि संभव हो तो आप उनको चमेली के फूलों की माला अर्पित करें।

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sukhmangal-singh-ji-kmsraj51.png

यह कविता (ब्रह्मचारिणी माता।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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माँ तेरी प्रीत निराली।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ माँ तेरी प्रीत निराली। ♦

अम्बे माँ, सदैव तेरी ही प्रीत की डोरी से बँधी रहूँ।
तेरे दिव्य अनुपम दर्शनों के अथाह सागर में बहूँ॥

तेरे आशीष के अमृतधारा से, ये प्यास बुझती रहे।
नैनों को तृप्त करने वाली, तेरी सलोनी सूरत सजती रहे॥

माँ, सदैव तेरा ही रूप सजा रहे, मेरे दिल के दर्पण में।
जिन्दगी में सर्वस्व तूही है, परम् आनंद है, तेरा तुझें समर्पण में॥

माँ तुझे और तेरे साकार रूप के चरणों में सब कुछ न्यौछावर।
अर्ज बस यही, ताउम्र इस नाचीज़ को लगाये रखना अपने दर॥

माँ, तेरा दुलार हमें इस कदर दीवाना कर गया।
तेरा प्रेम हमें बस इतना ही मस्ताना कर गया॥

कोई क्या कहेगा, नही होती अब इस बात की फिक्र।
अब हर कर्म में होता, बस एक तेरे नाम का जिक्र॥

जैसे मदमस्त हो, शमां के पास आकर परवाना।
कदम-कदम पर तेरे आशीष के शुकराने में, झूमें दिल मस्ताना॥

तेरी पावन वाणी से आशीष निकले, वो पूरा हो जाता है।
तेरे वरहस्त के वरों से ये जीवन सफल हो जाता है॥

हे जगदाती माँ!
तेरी कृपादृष्टि की छत्रछाया में सदैव हमारा बसेरा हो।
हे जगदाती तेरे नाम की ज्योति से, मेरा हर सवेरा हो॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — आज हम बात कर रहे हैं हमारे देश के सनातन धर्म (हिन्दू धर्म) द्वारा मनाये जाने वाले नवरात्रि त्यौहार की, इस त्यौहार को बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। नवरात्रि में लोग 9 दिन व्रत रखते हैं और आखिरी दिन मां की पूजा करके नौ कन्याओं को भोजन कराते हैं। यह त्यौहार अलग-अलग जगह पर अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। काफी जगह इस दिन लोग गरबा और डांडिया भी खेलते हैं। यह त्यौहार असत्य पर सत्य की जीत को दर्शाता है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि साल में दो बार मनाया जाता है। नवरात्रि नौ दिनों के लिए निरंतर चलता है जिसमे देवी माँ के अलग-अलग स्वरूपों की लोग भक्ति और निष्ठा के साथ पूजा करते है। भारत में नवरात्रि अलग-अलग राज्यों में विभिन्न तरीको और विधियों के संग मनाई जाती है।

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यह कविता (माँ तेरी प्रीत निराली।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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नवरात्रि।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ नवरात्रि। ♦

आया नवरात्रि का त्यौहार,
घर-घर में घट स्थापना हो रही है।
सजा माता का दरबार,
माता की पूजा अर्चना हो रही है।

सिंह पर सवार माता आयी,
भक्तों की सुनने पुकार।
छायी चारों तरफ खुशियां,
आयी मंदिरों में हो रही जय जयकार।

जो भी आता माँ के द्वार,
भक्ति श्रद्धा से शीश नवाता।
खाली झोली भरती माता,
मन चाहें मुरादें पाता।

माँ की महिमा को सबने गाया,
दुर्गा माँ ने पार लगाया।
माँ के चरणों में सुख,
समृद्धि, प्रेम का वरदान पाया।

कर लो माँ की नवरुपों में पूजा,
अर्चन भक्ति का उत्सव आया।
संसार मे माँ से बढ़कर,
कोई नहीं और पाया।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — आज हम बात कर रहे हैं हमारे देश के सनातन धर्म (हिन्दू धर्म) द्वारा मनाये जाने वाले नवरात्रि त्यौहार की, इस त्यौहार को बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। नवरात्रि में लोग 9 दिन व्रत रखते हैं और आखिरी दिन मां की पूजा करके नौ कन्याओं को भोजन कराते हैं। यह त्यौहार अलग-अलग जगह पर अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। काफी जगह इस दिन लोग गरबा और डांडिया भी खेलते हैं। यह त्यौहार असत्य पर सत्य की जीत को दर्शाता है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि साल में दो बार मनाया जाता है। नवरात्रि नौ दिनों के लिए निरंतर चलता है जिसमे देवी माँ के अलग-अलग स्वरूपों की लोग भक्ति और निष्ठा के साथ पूजा करते है। भारत में नवरात्रि अलग-अलग राज्यों में विभिन्न तरीको और विधियों के संग मनाई जाती है।

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यह कविता (नवरात्रि।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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