• Skip to main content
  • Skip to primary sidebar
  • Skip to footer
  • HOME
  • ABOUT
    • Authors Intro
  • QUOTES
  • POETRY
    • ग़ज़ल व शायरी
  • STORIES
  • निबंध व जीवनी
  • Health Tips
  • CAREER DEVELOPMENT
  • EXAM TIPS
  • योग व ध्यान
  • Privacy Policy
  • CONTACT US
  • Disclaimer

KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

Check out Namecheap’s best Promotions!

You are here: Home / Archives for सुशीला देवी जी की रचनाएँ

सुशीला देवी जी की रचनाएँ

आखिर हँसी लौट ही आई!

Kmsraj51 की कलम से…..

Aakhir Hansi Laut Hee Aai | आखिर हँसी लौट ही आई!

हर समय चेहरे पर मुस्कान लिए वो सभी को खुशी बांटती फिरती।
पर ये क्या? आज उसकी हँसी पर किसने ग्रहण लगाया?

वो काम तो सब कर रही थी पर उसकी आवाज़ की खनक कुछ ऐसे गायब थी जैसे किसी ने पायल से घुंघरुओं की छम-छम छीन ली हो। घर में किसी सदस्य से भी उसकी अनबन हुई क्या? पर नही ऐसा नही लगता क्योंकि सभी सदस्यों के सामने तो वो प्यार व अपनेपन से पेश आ रही थी। लेकिन उसकी निगाहें हर वक्त किसी चीज को तलाश करती नज़र आ रही थी।जब देखो तभी वो अपने काम को निबटा कर ऐसे कुछ ढूंढती नजर आती जैसे कोई बहुत ही कीमती चीज उसकी आँखों से ओझल हो गयी हो, पर समझ नही आ रहा था क्या…..?

अब उसका हर रोज का काम हो गया था कि समय मिलते ही कभी अलमारी, कभी बेड, कभी दराज में तो कभी ड्रैसिंग को खोलकर सारा सामान बार-बार करीने से सजा रही थी। पता नही ? ऐसा क्या कीमती सामान खो गया? जो उसकी होठों की हँसी ले गया और उसकी आँखों की चमक भी।

दिन पर दिन बीते जा रहे थे और ऐसा लग रहा था कि उसकी आशा भी उसे हर बार निराशा का ही जवाब दे रही थी। अब उसकी शारीरिक हालत में बुखार ने भी सोने पर सुहागा कर दिया था। एक बात और परिवार का कोई भी सदस्य उसको कुछ नही कह रहा था बस हँसी में इतनी बात जरूर कह देते याद करो कहाँ पर रखा था? तुमने उस वस्तु को। और इस प्रकार की बात भी उसके सीने में तीर की तरह लगती…… वह सोचने पर विवश हो जाती कि अब उसकी याददाश्त (स्मरण-शक्ति) धीरे-धीरे मध्यम हो गयी क्या? और हो भी क्यूँ ना, सबकी जरूरतों को पूरा करने के लिए उसने खुद को काम की रेल जो बनाया था!

पर उसको तो पता था कि उम्मीद पर दुनिया कायम है, इसलिए हर रोज वो घर के मंदिर में दिल की खुशी के लिए नतमस्तक होती। कई दिनों के बाद एक बार फिर उसने आशा का दामन थामे अपनी अर्जी अपने इष्टदेव को लगा ही दी। पर अब उसको लगाए हुए भी तीन दिन बीत ही गए थे। घर में तो सब सामान्य व्यवहार था क्योंकि वो तो अपना हर फर्ज लग्न से निभा रही थी।

चौथे दिन इसी उधेड़बुन में उसने फिर एक बार अपनी अलमारी को टटोलना शुरू किया तब सामान को इधर-उधर करते हुए अचानक ही उसकी आवाज़ से घर में वो खुशी की खनक पैदा हुई जो कितने दिनों से खो गयी थी, क्योंकि उसको वो अपने सोने के कंगनों का बॉक्स मिल चुका था, जिसने उसकी रात की नींद और दिन का चैन गायब कर दिया था। वो खुशी का बॉक्स जिसे अलमारी ने चुपके से अपने कोने में छिपाकर उसका हरपल इम्तिहान लिया था और ऐसा लग रहा था जैसे आज उसने ही उसको पास कर दिया हो।

कितने कीमती होते हैं एक औरत के लिए उसके आभूषण बिल्कुल उसके गुणों की ही तरह। आज वो अपने परिवार के सदस्यों के साथ इतनी ही प्रसन्नता का अनुभव कर रही थी जितना कि उन आभूषणों के घर आने पर थी।

उसकी आध्यात्मिकता ने एकदम से उसका सिर भगवान के सजदे में झुका दिया। ऐसा लग रहा था जैसे आँखों में वही चमक लिए उसकी आवाज की खनक से घर का हर कोना-कोना खुशी से भर गया हो।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लघुकथा के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — क्योंकि उसको वो अपने सोने के कंगनों का बॉक्स मिल चुका था, जिसने उसकी रात की नींद और दिन का चैन गायब कर दिया था। कितने कीमती होते हैं एक औरत के लिए उसके आभूषण बिल्कुल उसके गुणों की ही तरह। आज वो अपने परिवार के सदस्यों के साथ इतनी ही प्रसन्नता का अनुभव कर रही थी जितना कि उन आभूषणों के घर आने पर थी। उसकी आध्यात्मिकता ने एकदम से उसका सिर भगवान के सजदे में झुका दिया। ऐसा लग रहा था जैसे आँखों में वही चमक लिए उसकी आवाज की खनक से घर का हर कोना-कोना खुशी से भर गया हो।

—————

यह लघुकथा (आखिर हँसी लौट ही आई!) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लघुकथा सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari, etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिन्दी साहित्य Tagged With: aakhir hansi laut hee aai, sushila devi, sushila devi articles, आखिर हँसी लौट ही आई, आखिर हँसी लौट ही आई - लघु कथा, आखिर हँसी लौट ही आई - सुशीला देवी, ज्ञानवर्धक लघु कथा, प्रेरक लघु कथाएं, प्रेरणादायक कहानी छोटी सी, प्रेरणादायक लघु कहानी, मार्मिक लघु कथा, रोचक लघु कहानी, लघुकथा, सुशीला देवी, सुशीला देवी जी की रचनाएँ, हिंदी में लघुकथा

गाँव का जीवन।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ गाँव का जीवन। ♦

गाँव की गजब हरियाली के वाह! क्या कहने।
उसी हरियाली में दिल के भाव आज दे बहने।

कहीं पर गाय-भैंसों के छप्परे घास-फूस के।
कहीं पर ओस बन मोती चमके दूब के।

कहीं पर कपड़े की गुड़िया, मिट्टी के घर बनाते बच्चें।
जो दिल के जितने भोले उतने ही होते सच्चे।

कहीं पर चौपाल में, नुक्कड़ पर हुक्का गुड़गुड़ाए।
भाईचारे में बड़े-बूढ़े बातों ही बातों में खिलखिलाए।

पशु संग पक्षियों से भी अनोखा प्रेम नजर आता।
इनको अपने जैसा ही केवल उदार दिल भाता।

कभी कुत्ते की रोटी, तो पहली रोटी गाय को दी जाए।
चिड़िया, कबूतर को भी वो बाजरा बिखराए।

भोर होने पर हर राह चलते को राम-राम भूले न कहना।
सागर न बनने की चाह केवल शांत नदी जैसा बहना।

थोड़ी जरुरतें, न बड़ी दिल में कोई रखे चाह।
आवभगत इतनी कि मेहमान के मुख से निकले वाह।

हर आंगन में जो होती थोड़ी सी कच्ची जगह।
धनिया, पालक, मैथी बोने की मिल जाती वजह।

हर बेकार पड़ी चीज को, उपयोग करने का हुनर आए।
नई-पुरानी में अंतर न दिखे, इस कदर उसको सजाए।

सम्मान आज भी उन भोली आंखों में नजर आए।
आज भी नई नवेली दुल्हन घूंघट में शरमाए।

खेत-खलिहानों से लेकर दिलों में पनपती है हरियाली रिश्तों की।
आज भी संस्कृति, तहजीब को जिंदा रखे बात उन फरिश्तों की।

कुछ दौर जमाने का यहां आकर क्यूं न ठहर जाए।
जहां हर दौर जिंदगी का खिलखिलाता ही नज़र आए।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — गाँव का जीवन शांत और शुद्ध माना जाता है क्योंकि आज भी गाँवों में लोग प्रकृति के अधिक निकट होते है। हालांकि, इनके जीवन में चुनौतियां भी अधिक होती है। गाँव के लोग ह्रदय से सीधे सच्चे और पवित्र होते हैं। गाँव के लोग ईमानदार और अतिथि सत्कार करने वाले होते है। गाँव का जीवन बाह्य आडम्बर और छल-कपट से दूर होता हैं। सादा जीवन और उच्च विचार की झलक गाँवों में ही देखने को मिलती है वे कृत्रिम साधनों से ज्यादातर दूर ही रहते हैं। गाँव का जीवन शांतिदायक होता है । यहाँ के लोग शहरी लोगों की तरह निरंतर भाग-दौड़ में नहीं लगे रहते हैं । यहाँ के लोग सुबह जल्दी जगते हैं तथा रात में जल्दी सो जाते हैं । यहाँ की वायु महानगरों की वायु की तरह अत्यधिक प्रदूषित नहीं होती। गांव में ना सिर्फ खुली और स्वच्छ हवा है, अपितु मोटरसाइकिल और अन्य वाहनों के कम होने के कारण भी प्रदूषण कम है। हमारे गांवों में बड़े-बड़े खेत खलिहान होने की वजह से वहां का वातावरण खुला व प्रदूषण मुक्त रहता है। आज भी घर में जब रोटी बनती है तो पहली रोटी गाय को और लास्ट रोटी पालतू कुत्ते को दी जाती है। आज भी गाँवो में आपस में मिलने पर राम-राम और राधे-राधे बोला जाता है।

—————

यह कविता (गाँव का जीवन।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari, etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: Hindi Poems, poem on village in hindi, poem on village life, sushila devi, sushila devi poems, village life, कवयित्री सुशीला देवी की कविताएं, गाँव का जीवन, गाँव का जीवन - सुशीला देवी, गाँव की जिंदगी पर कविता, गाँव की याद, गाँव पर कविता, गांव पर कविता इन हिंदी, मेरा गांव, सुशीला देवी, सुशीला देवी जी की रचनाएँ

बारिश का सबसे अलग और अद्भुत रूप।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बारिश का सबसे अलग और अद्भुत रूप। ♦

सावन के आते ही सबको बारिश का सुहाना रूप याद आता है जो मन में छुपे हुए प्रेम के उदगार, विरह की तपिश, बचपन के लड़कपन को उजागर करता है। प्रकृति भी हर ओर से पुकार करती नजर आती है। सब जीवों के नव संचार के लिए ये धरती पर अवतरित होती है। पर इस सुहाने और जीवनदायी मौसम के पीछे एक शब्द का कड़वा सच छिपा है जो उच्चवर्ग को छोड़ बाकी हम सभी ने बहुत नजदीक से देखा है और इसके दुख भी सहा है।

बारिश के आते ही टप-टप टपकती बूंदों से तड़-तड़ की आवाज़ से तेज होना सबको अच्छा लगता है। क्योंकि प्यासी धरती की प्यास बुझती है और सारी हरी-भरी वनस्पति नहाई हुई अति सुंदर लगती है, पर जब यही बरसना लगातार दो या तीन दिन हो तो आम आदमी के लिए ये बाहर तो क्या घर में ही एक माहौल ले आता है जब दिन-रात इसकी आहट से ही दिल घबराहट से भर जाता है जी।

और जब ये आता है तो अकेले बिल्कुल नही आता साथ में अपने परिवार को ले आता है जैसे कई पीढ़ियों का आगमन हम सब के घर में हो गया।

अब तो आप सभी को उसकी आहट आ ही गयी होगी। जी बिल्कुल सही पहचान गए आप सभी। क्योंकि हम सभी इसके दुख से भली-भांति परिचित है। क्योंकि हमारी चैन की नींद को न जाने कितनी बार इसने खराब किया है। कितनी बार इस टपके ने हमारे बाहर पहनने के कपड़ों पर भी बदनुमा दाग दिया।

कितनी बार इससे बचने के लिए रसोई के सारे छोटे-बड़े बर्तन कमरे में आये।कितनी बार इसने भरी बारिश में हम छत पर चढ़ाए।

एक बार तो ऐसा भी वर्ष आया था जब इतनी बारिश हुई कि कच्ची पक्की छतों ने सबने एक सुर में ही टपकना शुरू कर दिया था। अब तो सभी ने इस टपके का दर्द महसूस किया।

इस टपके का दर्द किसी भी दुख से बड़ा।
इसका आना तो ऐसे लगे जैसे कोई डंडा लेकर पीछे हो पड़ा॥

लगातार बारिश का ये रूप अनोखा और घर के अंदर ही दुख ऐसा देने वाला जो हर वर्ष बारिश के आने से पहले स्वतः ही अपना रूप दिखा जाता है। एक बात तो बारिश का हर रूप अपने आप में ही अलग ही है।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — सावन की बारिश जब भी आती सब तरफ खुशियाँ ही खुशियाँ ले आती। सावन के आते ही सबको बारिश का सुहाना रूप याद आता है जो मन में छुपे हुए प्रेम के उदगार, विरह की तपिश, बचपन के लड़कपन को उजागर करता है। प्रकृति भी हर ओर से पुकार करती नजर आती है। सब जीवों के नव संचार के लिए ये धरती पर अवतरित होती है। पर इस सुहाने और जीवनदायी मौसम के पीछे एक शब्द का कड़वा सच छिपा है जो उच्चवर्ग को छोड़ बाकी हम सभी ने बहुत नजदीक से देखा है और इसके दुख भी सहा है। बारिश के आते ही टप-टप टपकती बूंदों से तड़-तड़ की आवाज़ से तेज होना सबको अच्छा लगता है। पर जब यही बरसना लगातार दो या तीन दिन हो तो आम आदमी के लिए ये बाहर तो क्या घर में ही एक माहौल ले आता है जब दिन-रात इसकी आहट से ही दिल घबराहट से भर जाता है जी।

—————

यह लेख (बारिश का सबसे अलग और अद्भुत रूप।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari Etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____

Filed Under: 2022-KMSRAJ51 की कलम से, सुशीला देवी जी की रचनाएँ।, हिन्दी साहित्य Tagged With: Essay on Sawan in Hindi, Sawan Essay in Hindi, Sawan Month Essay in Hindi, sushila devi, sushila devi articles, बारिश का सबसे अलग और अद्भुत रूप, सावन ऋतु पर निबंध, सावन का महीना पर निबंध, सावन पर निबंध, सावन पर निबंध हिंदी मे, सुशीला देवी, सुशीला देवी जी की रचनाएँ

दोहरी मानसिकता।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ दोहरी मानसिकता। ♦

आज के युग में एक ऐसी दोहरी मानसिकता ने बहुत इंसानों के दिल में इस प्रकार से घर कर लिया है ऐसा लगता है मानों ये इसी प्रकार से इस धरती पर जन्में हो, और ये प्रवृति इंसान समय मिलते ही दिखाने लगते हैं। इसका जीता जागता उदाहरण हमें अपने बच्चों के मुख से भी सुनने को मिल जाता है जब वो बोलते है कि मेरा भाई प्राइवेट स्कूल में है और हम बहनें सरकारी स्कूल में।

जब अभिभावक-अध्यापक मीटिंग में उनसे इस बारें में कोई चर्चा होती है तो वो हँसते हुए इस बात को कहते है कि जी एक लड़का है इसलिए वहाँ पर पढ़ा रहें हैं और जब हम पूछते है कि आपकी बेटियों की पढ़ाई यहाँ पर कैसी है तब वो कहते हैं कि बहुत अच्छी पढ़ाई होती है यहाँ भी। आजकल तो सरकारी स्कूलों में अच्छी पढ़ाई होती है। कई बार तो वो तुलनात्मक स्थिति में ये भी कह देते है कि बेटियाँ अच्छा काम कर रही है।

फिर समझ में नही आता कि फिर भी माता-पिता का ये भेदभाव क्यूँ।

घर में एक साथ रहने वाले बेटा-बेटी के साथ ये अलगाव की स्थिति घर से ही पैदा हो जाती है। जो लड़कियों के बालमन पर कई बार ऐसी छाप छोड़ देती है जो चाह कर भी जिंदगी भर दूर नही होती। क्योंकि हमें अक्सर इस प्रकार के बच्चों के कोमल दिल से ऐसे भाव देखने सुनने को मिलते है जो हम शिक्षकों को भी दुख देने में पीछे नही रह पाते।

खासकर वो पूरा वर्ष पढ़ाई संबंधी चीजें कॉपी, पेंसिल, रबड़ व नए बैग, टिफ़िन और बोतल के लिए झूझते दिखाई देते है जैसे भाई की ही पुरानी बोतल में पूरा साल काम चलाना या कॉपी के पिछले पन्नों पर लिखा मिटाकर काम करना। इस प्रकार की बहुत सी बातें हमें अपनी कक्षाओं में देखने को मिलती है जिससे माता-पिता की दोहरी मानसिकता दिखाई दे जाती। इसका सबसे ज्यादा उदाहरण हमारे सरकारी विद्यालयों में मिलता है जो कि एक कड़वा सच है। आखिरी में दसवीं, बारहवीं तक आते-आते लड़कियाँ ही टॉप करती है हर वर्ष।

क्योंकि एक सरकारी अध्यापक के लिए तो कक्षा का हर छात्र-छात्रा एक समान है। इसलिए उनमें किसी प्रकार भेदभाव किए बिना ही उनको एक समान शिक्षा मिलती है।

अंत में वे बेटियाँ ही माता-पिता की शान बनती है जिनको सरकारी विद्यालयों में ये सोच कर दाखिला दिलवाते है कि इन पर पैसा तो खर्च करना नहीं होगा बल्कि कुछ न कुछ इनसे हासिल ही होता है। पर ये अपनी योग्यता से हर बार सिद्ध कर ही देती है कि लड़कियाँ कभी भी पीछे नही रही बल्कि उन्होंने हर जगह ही सफलता का परचम लहराया। सही तो सार्थक कथन इन बेटियों के लिये:—

हम हर हाल में अपने माता-पिता का नाम रोशन कर जाएगी।
देखोगे जिधर भी बेटियाँ ही सफलता का परचम लहराएगी।।
एक शिक्षिका की कलम से…
(श्रीमती सुशीला देवी – जे.बी.टी.अध्यापिका करनाल हरियाणा)

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — आखिर कब तक समाज में ये दोहरी मानसिकता चलता रहेगा लड़कियों के लिए। आखिर क्यों लड़कियों को लड़को के बराबर सबकुछ नहीं दिया जा रहा है, क्यों उनको दोयम दर्जे का प्यार और सबकुछ दिया जा रहा है आज भी समाज में, क्या यही मानसिक विकास है? प्राचीन समय में भारत के हर स्थान की नारी स्वतंत्र थी, महिलाओं पर किसी भी प्रकार का कोई प्रतिबन्ध नहीं था। महिलाएं यज्ञों और अनुष्ठानों में भी भाग लेती थी। मध्य युग में धीरे-धीरे समय बदलने के साथ पुरुष ने अपने अहम भाव के कारण नारी को निम्न स्थान दिया। आज फिर से नारी समाज में प्रतिष्ठित और सम्मानित हो रही है अपने अद्भुद समझ व अच्छे ज्ञान व प्रतिभा के प्रदर्शन के दम पर। अक्सर यह देखा गया है— अंत में वे बेटियाँ ही माता-पिता की शान बनती है जिनको सरकारी विद्यालयों में ये सोच कर दाखिला दिलवाते है कि इन पर पैसा तो खर्च करना नहीं होगा बल्कि कुछ न कुछ इनसे हासिल ही होता है। पर ये अपनी योग्यता से हर बार सिद्ध कर ही देती है कि लड़कियाँ कभी भी पीछे नही रही बल्कि उन्होंने हर जगह ही सफलता का परचम लहराया।

—————

यह लेख (दोहरी मानसिकता।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari Etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____

Filed Under: 2022-KMSRAJ51 की कलम से, सुशीला देवी जी की रचनाएँ।, हिन्दी साहित्य Tagged With: Essay on girl in India in Hindi, Essay on Women in India in Hindi, sushila devi, sushila devi articles, दोहरी मानसिकता, दोहरी मानसिकता क्या कारण है, नारी कब तक दोहरी मानसिकता का बोझ ढोती रहेगी, नारी का महत्व पर निबंध, नारी पर निबंध, निबंध भारतीय समाज में नारी का स्थान, भारतीय नारी पर निबंध लिखें, महिला पर निबंध, समाज में नारी का स्थान, सुशीला देवी, सुशीला देवी जी की रचनाएँ

एक नजर इन पर भी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ एक नजर इन पर भी। ♦

प्रकृति प्रेमियों के चेहरे पर खुशी झलकती है मानसून के आते ही। क्योंकि इसके आते ही उनका पौधा रोपण का कार्य शुरू हो जाता है।

अति प्रेरणादायी बात होती है जब सभी पौधा-रोपण पर कार्य शुरू हो जाता है। लेकिन इस मानसून से पहले एक विशेष बात पर ध्यान देना चाहिए वो है सड़क के दोनों ओर लगे हुए पेड़ों का सूखा होना।

अगर हम किसी भी सड़क पर चल रहें हैं तो हम सब अगर ध्यानपूर्वक देखे तो अगर सौ पेड़ लगे हो तो उसमें कम से कम पांच या दस पेड़ लगभग इस प्रकार होते है जो या तो पूरी तरह से दीमक लगने से या अन्य किसी कारण से सूख चुके होते हैं कि हल्की हवा से ही वो गिर कर सड़क के रास्ते अवरोधक बन जाते हैं।

कई बार तो आँधी आने पर इतने बड़े हादसे को अंजाम दे देते है कि इनका गिरना इंसान की जान पर जोखिम बन सकता है। तो मानसून के आने से पहले या समय-समय पर इनकी कटाई को सुनिश्चित करना होगा ताकि इनके गिरने से कोई भी जान-माल की हानि न हो।

अगर इन सूखे और खोखले पेड़ों को समय पर हटा दिया जाए तो एक तो बड़े हादसों से बचा जा सकता है और दूसरा उनके स्थान पर नया पौधा रोपण किया जा सके।

सूखे और खोखले पेड़ न बने हादसे का कारण कोई।
समयानुसार कटाई कर उनकी जगह नई पौध बोई।

मानसून के बाद तो इनकी जड़ो की मिट्टी स्वतः ही जगह छोड़ देती है, और कहीं सड़क पर अवरोधक के रूप में कहीं पर बिजली की तारों को तोड़ते दिखाई देते हैं। इसलिए समय रहते ही इनके प्रति जागरूकता प्रशासन और आम व्यक्ति को भी दिखानी होगी, ताकि इनसे होने वाली अनहोनी को टाला जा सके।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — वर्षा ऋतू के समय सड़क के किनारे पेड़ लगाए जरूर, लेकिन पेड़ लगाना ही काफी नहीं है। उसका अच्छे से देखरेख व कटाई-छटाई मानसून आने से पहले हो जाये तो कोई भी अनहोनी न हो, किसी तरह का कोई हादसा (दुर्घटना) न हो। इस कार्य के लिए इससे जुड़े सरकारी विभाग व समाज के लोगों को जागरूक रहना होगा, और जिससे जितना हो सके सभी को मदद भी करना चाहिए। हम सभी भलीभांति जानते है की पेड़ भी धरती माता के बेटे हैं और हम इंसानो के सच्चे व अच्छे मित्र भी हैं। वृक्षों से हमें फल, सब्जियां, बीज, लकड़ियां, इत्यादि प्राप्त होते है। लकड़ी से हमे फर्नीचर, कागज़, गोंद, इत्यादि वस्तुएँ प्राप्त हो जाती हैं। इसके अलावा अनेको पेड़ों व पौधों से बहुत सारी औषधियां तैयार की जाती है, जो हमारे शरीर से संबंधित कई प्रकार के हानिकारक रोगों का उपचार करने में हमारी मदद करती है।

—————

यह लेख (एक नजर इन पर भी।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____

Filed Under: 2022-KMSRAJ51 की कलम से, सुशीला देवी जी की रचनाएँ।, हिन्दी साहित्य Tagged With: articles by sushila devi, Essay on Tree Plantation in Hindi, planting tree par nibandh in hindi, sushila devi, sushila devi articles, वृक्षारोपण, वृक्षारोपण के महत्व पर निबंध, वृक्षारोपण के लाभ पर निबंध, वृक्षारोपण पर निबंध, सुशीला देवी, सुशीला देवी जी की रचनाएँ

Primary Sidebar

Recent Posts

  • निरर्थक रील्स की आरी – गुमराह होती नारी।
  • बात वक्त की।
  • तिरंगा का करें सम्मान।
  • एक सफर।
  • बाल विवाह – एक अभिशाप।
  • क्या बदलाव लायेगा नया साल।
  • है तो नववर्ष।
  • मोह।
  • अपना धर्म सबसे उत्तम।
  • ठंडी व्यार।
  • रिश्तों को निभाना सीखो।
  • तंत्र, मंत्र और तत्व ज्ञान में अंतर।
  • मित्र।
  • आखिर क्यों।
  • समय।
  • काले बादल।
  • सुबह का संदेश।

KMSRAJ51: Motivational Speaker

https://www.youtube.com/watch?v=0XYeLGPGmII

BEST OF KMSRAJ51.COM

निरर्थक रील्स की आरी – गुमराह होती नारी।

बात वक्त की।

तिरंगा का करें सम्मान।

एक सफर।

बाल विवाह – एक अभिशाप।

क्या बदलाव लायेगा नया साल।

है तो नववर्ष।

मोह।

अपना धर्म सबसे उत्तम।

ठंडी व्यार।

रिश्तों को निभाना सीखो।

Footer

Protected by Copyscape

KMSRAJ51

DMCA.com Protection Status

Disclaimer

Copyright © 2013 - 2026 KMSRAJ51.COM - All Rights Reserved. KMSRAJ51® is a registered trademark.