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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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vijaylaxmi

श्राद्ध विधान।

Kmsraj51 की कलम से…..

Shraddha Ritual | श्राद्ध विधान।

With faith one gets good children, longevity, health, immense wealth and desired things.श्रद्धया दीयते यस्मात् तच्छादम्॥

भावार्थ : श्रद्धा से श्रेष्ठ संतान, आयु, आरोग्य, अतुल ऐश्वर्य और इच्छित वस्तुओं की प्राप्ति होती है।

व्याख्या : वेदों अनुसार इससे पितृऋण चुकता होता है। पुराणों के अनुसार श्रद्धायुक्त होकर श्राद्धकर्म करने से पितृगण ही तृप्त नहीं होते, अपितु ब्रह्मा, इंद्र, रुद्र, दोनों अश्विनी कुमार, सूर्य, अग्नि, अष्टवसु, वायु, विश्वेदेव, ऋषि, मनुष्य, पशु-पक्षी और सरीसृप आदि समस्त भूत प्राणी भी तृप्त होते हैं। संतुष्ट होकर पितर मनुष्यों के लिए आयु, पुत्र, यश, स्वर्ग, कीर्ति, पुष्टि, बल, वैभव, पशु, सुख, धन और धान्य देते हैं।

तर्पण कर्म के प्रकार : पुराणों में तर्पण को छह भागों में विभक्त किया गया है:-

1. देव-तर्पण।
2. ऋषि-तर्पण।
3. दिव्य-मानव-तर्पण।
4. दिव्य-पितृ-तर्पण।
5. यम-तर्पण।
6. मनुष्य-पितृ-तर्पण।

कविता: श्राद्ध विधान

आश्विन माह कृष्ण पक्ष आता है एक बार,
15 दिनों के लिए पितृ आते हैं घर द्वार॥

सूर्य कन्या राशि में करता है प्रवेश ,
हमारे पितृ आते हैं धर देवता भेष॥

देह त्याग तिथि पर पितृ श्राद्ध आता है,
श्राद्ध विधान से तृप्त हो वापस लौट जाता है॥

कन्या राशि में सूर्य का प्रवेश जब हो जाता है,
इस समय पितृ श्राद्ध कर्म नहीं हो पाता है॥

पूरा कार्तिक मास पितृ इंतजार करता रहता है
फिर भी कोई पितृ ऋण नहीं चुका पाता है॥

जब सूर्य देव वृश्चिक राशि में आ जाता है,
तो पितृ निराश हो अपने स्थान लौट जाता है॥

पुराणों में पितरों को दो श्रेणियों में बांटा जाता हैं,
दिव्य पितर, मनुष्य पितर नाम से जाना जाता है॥

अग्रिष्वात्त, बर्हिषद आज्यप, सोमेप, रश्मिप, उपदूत, आयन्तुन ,
श्राद्धभुक व नान्दीमुख ,ये नौ दिव्य पितर कहलाते हैं॥

कर्मों के कारण मृत्यु बाद जो सजा पाते हैं,
पितरों की गणना में आने वाले प्रधान यमराज कहलाते हैं॥

अग्रिषवात, बहिरषद, आज्यप, सोमेप, रश्मिप, उपदूत,
आयंतुन, श्राद्धभुक, नांदीमुख ये नौ दिव्य पितर कहलाते हैं॥

अर्यमा, किरण इस समय पृथ्वी पर आ जाते हैं,
मार्कंडेय पुराण में ये पितर देव कहलाते हैं॥

पितरों के श्राद्ध से हम ऋण मुक्त हो जाते हैं,
वंशानुगत, शारीरिक, मानसिक तनाव मुक्त हो जाते हैं॥

धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित कर सकारात्मक भाव पाते हैं, कृष्ण भगवान गीता का श्लोक अर्जुन को सुनाते हैं —

अनन्तश्चास्मि नागानां वरुणो यादसामहम्।
पितृणामर्यमा चास्मि यमः संयमतामहम्॥29॥-गीता

भावार्थ : हे धनंजय! नागों में मैं शेषनाग और जलचरों में वरुण हूं, पितरों में अर्यमा तथा नियमन करने वालों में यमराज हूं।

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

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  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए; इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की हैं — वेदों अनुसार इससे पितृऋण चुकता होता है। पुराणों के अनुसार श्रद्धायुक्त होकर श्राद्धकर्म करने से पितृगण ही तृप्त नहीं होते, अपितु ब्रह्मा, इंद्र, रुद्र, दोनों अश्विनी कुमार, सूर्य, अग्नि, अष्टवसु, वायु, विश्वेदेव, ऋषि, मनुष्य, पशु-पक्षी और सरीसृप आदि समस्त भूत प्राणी भी तृप्त होते हैं। संतुष्ट होकर पितर मनुष्यों के लिए आयु, पुत्र, यश, स्वर्ग, कीर्ति, पुष्टि, बल, वैभव, पशु, सुख, धन और धान्य देते हैं।

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यह कविता (श्राद्ध विधान।) “विजयलक्ष्मी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विजयलक्ष्मी है। मैं राजकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय, छारा – 2, ब्लॉक – बहादुरगढ़, जिला – झज्जर, हरियाणा में मुख्य शिक्षिका पद पर कार्यरत हूँ। मैं पढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा, व समय-समय पर “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ” और भ्रूण हत्या पर Parents मीटिंग लेकर उनको समझाती हूँ। स्कूल शिक्षा में सुधार करते हुए बच्चों में मानसिक मजबूती को बढ़ावा देना। कोविड – 19 महामारी में भी बच्चों को व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाना, वीडियो और वर्क शीट बनाकर भेजना, प्रश्नोत्तरी कराना, बच्चों को साप्ताहिक प्रतियोगिता कराकर सर्टिफिकेट देना। Dance Classes प्रतियोगिता का Online आयोजन कराना। स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर कार्य करना। इन सभी कार्यों के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी द्वारा और कई Society द्वारा बार-बार सम्मानित किया गया।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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योग ही जीवन है।

Kmsraj51 की कलम से…..

Yog Hi Jeevan Hai | योग ही जीवन है।

12 जनवरी 1863 को जन्मे नरेन्द्र दत्त,
कलकत्ता श्री विश्वनाथ दत्त जी के घर,
अंग्रेजी पढ़ाकर इनको,
पाश्चात्य सभ्यता में ढालना चाहा पर,
इन बातों से जीवन पर गहरा हुआ असर।

बचपन से ही तीव्र बुद्धि के कारण,
इनके जीवन पर हुआ ये असर,
परमात्मा को पाने की लालसा,
मन में कर गई घर,
इन बातों से जीवन पर गहरा हुआ असर।

ब्रह्म समाज में पहूंच गए,
वहां भी शांति न आई नज़र।
1884 में पिता की मृत्यु का हुआ ये असर,
अपने कंधों पर संभाला अब सारा घर,
इन बातों से जीवन पर गहरा हुआ असर।

शादी नहीं की इन्होने,
अतिथि सेवा करते थे ये,
स्वयं भूखे प्यासे रहकर,
परमहंस जी के पास गए सोच विचार कर,
इन बातों से जीवन पर गहरा हुआ असर।

परमहंस जी की कृपा से,
इनका हुआ आत्म सत्कार,
संन्यास लेने के बाद हुआ,
विवेकानंद जी नाम प्रखर,
इन बातों से जीवन पर गहरा हुआ असर।

अंत समय गुरुदेव जी,
कैंसर से हुए ग्रस्त,
उनकी सेवा में लग गए,
घर, भूख प्यास को त्याग कर,
इन बातों से जीवन पर गहरा हुआ असर।

25 वर्ष की आयु में गेरुआ वस्त्र धारण किया,
पुरे भारत को पैदल यात्रा कर नाप दिया,
1893 में शिकागो (अमेरिका) पंहूचे,
भारत के प्रतिनिधित्व बनकर,
इन बातों से जीवन पर गहरा हुआ असर।

उनकी बातों से यूरोप अमेरिका पर,
गहरा हुआ असर,
अध्यात्म विद्या, भारतीय दर्शन करवाया,
रामकृष्ण मिशन की शाखाएं फैलाकर,
इन बातों से जीवन पर गहरा हुआ असर।

देश देशांतरो में भारत का नाम किया,
योग गुरु की उपाधि पाकर,
दीन दुखियों की सेवा कर,
4 जुलाई 1902 को अमर हो गए,
अपनी देह त्याग कर,
इन बातों से जीवन पर गहरा हुआ असर।

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

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  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए; इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की हैं — जब तक कोई बात स्वयं प्रत्यक्ष न कर सको, तब तक उस पर विश्वास न करो–राजयोग यही शिक्षा देता है। सत्य को प्रतिष्ठित करने के लिए अन्य किसी सहायता की आवश्यकता नहीं।” स्वामी विवेकानंद का मत है कि योग का अनुशीलन भी ज्ञान की भाँति व्यवस्थित तरीक़े से होना चाहिए और इसमें तर्कशीलता का अवलम्बन करना चाहिए।

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यह कविता (योग ही जीवन है।) “विजयलक्ष्मी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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मजदूर दिवस का इतिहास।

Kmsraj51 की कलम से…..

History of Labor Day | मजदूर दिवस का इतिहास।

देखो मजदूर दिवस है आया,
1 मई 1886 का दिन याद है आया।
अमेरिका का मजदूर सड़कों पर उतर आया,
15-16 घंटे काम न करने का बीड़ा उठाया।

वहां की सरकार ने मजदूर पर कहर था ढाया,
पुलिस वालों की गोलियों से मजदूरों को भूनवाया।
बहुतों की जान गई 100 के करीबों को घायल पाया,
3 साल बाद इतिहास मे एक बदलाव आया।

1889 में अंतरराष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन बुलाया,
8 घंटे काम करने का फैसला सम्मेलन में सुनाया।
1 मई को श्रमिक दिवस और छुट्टी का ऐलान करवाया,
फिर क्या था कई देशों ने इसे अपनाया।

भारत में इसके 34 साल बाद ये दिवस मनाया,
लेबल किसान पार्टी आफ हिंदुस्तान ने बीड़ा उठाया।
1 मई 1923 को चेन्नई में मजदूर दिवस मनाया,
ऐसा करके मजदूरों की उपलब्धियों का ज्ञान कराया।

शोषण को रोक उनके अधिकारों को बतलाया,
झोपड़ी से लेकर महलों तक मजदूरों ने है सजाया।
खुद कच्चे में रहा लोगों को महलों में बैठाया,
दुनिया के हर पहलू में मजदूर को है पाया,
क्या जीवन और क्या मृत्यु? सबमें मजदूर को पाया।

विजय, ने मजदूर दिवस पर लिखने को कलम को उठाया।
पर लिखते हुए श्रमिकों में खो गई खुदको निशब्द पाया।

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

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  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए; इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की हैं — मजदूरों के नाम समर्पित यह दिन 1 मई है। मजदूर दिवस को लेबर डे, श्रमिक दिवस या मई डे के नाम से भी जाना जाता है। श्रमिकों के सम्मान के साथ ही मजदूरों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने के उद्देश्य से भी इस दिन को मनाते हैं, ताकि मजदूरों की स्थिति समाज में मजबूत हो सके। मजदूर किसी भी देश के विकास के लिए अहम भूमिका में होते हैं। मजदूरों के नाम समर्पित आंदोलन के तीन साल बाद 1889 में अंतरराष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन की बैठक हुई। जिसमे तय हुआ कि हर मजदूर से केवल दिन के 8 घंटे ही काम लिया जाएगा। इस सम्मेलन में ही 1 मई को मजदूर दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा गया, साथ ही हर साल 1 मई को छुट्टी देने का भी फैसला लिया गया।

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यह कविता (मजदूर दिवस का इतिहास।) “विजयलक्ष्मी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मेरा नाम विजयलक्ष्मी है। मैं राजकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय, छारा – 2, ब्लॉक – बहादुरगढ़, जिला – झज्जर, हरियाणा में मुख्य शिक्षिका पद पर कार्यरत हूँ। मैं पढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा, व समय-समय पर “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ” और भ्रूण हत्या पर Parents मीटिंग लेकर उनको समझाती हूँ। स्कूल शिक्षा में सुधार करते हुए बच्चों में मानसिक मजबूती को बढ़ावा देना। कोविड – 19 महामारी में भी बच्चों को व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाना, वीडियो और वर्क शीट बनाकर भेजना, प्रश्नोत्तरी कराना, बच्चों को साप्ताहिक प्रतियोगिता कराकर सर्टिफिकेट देना। Dance Classes प्रतियोगिता का Online आयोजन कराना। स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर कार्य करना। इन सभी कार्यों के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी द्वारा और कई Society द्वारा बार-बार सम्मानित किया गया।

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होली से होलिका।

Kmsraj51 की कलम से…..

Holi to Holika | होली से होलिका।

होली रंगोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं।

आओ मिलकर रंगोत्सव मनाते हैं,
खोई हुई संस्कृति को वापस लाते हैं।

फाल्गुन मास, कृष्ण पक्ष, प्रतिपदा तिथि आई है,
पुरातन समय की बातें यादें साथ लाई है,
कृष्ण राधा की वो बरसाने वाली होली मन में समाई है।

होलिका दहन की परंपरा की कथा मन में समाई है,
भगत प्रहलाद(प्रह्लाद) की निष्ठा भक्ति सबके मन में समाई है।
कृष्ण राधा की वो……

हिरण्यकश्यप ने तप करके खुद को भगवान कहता भाई है,
भगत प्रहलाद की भक्ति भी बाधित करवाता भाई है।
कृष्ण राधा की वो……

बुआ होलिका के हाथों प्रहलाद को मरवाने की करता ढिठाई है,
भगत प्रहलाद को गोद में ले होलिका अग्नि बीच समाई है।
कृष्ण राधा की वो……

भगत प्रहलाद ने अग्नि के बीच भी विष्णु भगवान की माला जपाई है,
भगवान विष्णु की लीला से होलिका की चुनरी प्रहलाद के तन पर आई है।
कृष्ण राधा की वो……

भगत प्रहलाद बच गए होलिका अग्नि में समाई हैं,
उस दिन से आज तक हम होलिका दहन की परंपरा निभाते भाई है।
कृष्ण राधा की वो……

इतिहास से जुड़ी ये कहानी फिर से दोहराई है,
भगत प्रहलाद जैसी भक्ति किसी ने नहीं पाई है,
कृष्ण राधा की वो बरसाने वाली होली मन में समाई है।

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

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  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए; इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की हैं — हिरण्यकश्यप का सबसे बड़ा पुत्र प्रह्लाद, भगवान विष्णु का उपासक था और यातना एवं प्रताड़ना के बावजूद वह विष्णु की पूजा करता रहा। क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका से कहा कि वह अपनी गोद में प्रह्लाद को लेकर प्रज्ज्वलित अग्नि में चली जाय क्योंकि होलिका को वरदान था कि वह अग्नि में नहीं जलेगी। भगत प्रहलाद बच गए होलिका अग्नि में समाई हैं, उस दिन से आज तक हम होलिका दहन की परंपरा निभाते भाई है। भक्त प्रह्लाद विष्णु के भक्त थे। हिरण्यकश्यप के वध के बाद वे ही असुरों के सम्राज्य के राजा बने थे। प्रहलाद के महान पुत्र विरोचन हुए और विरोचन से महान राजा बलि का जन्म हुआ जो महाबलीपुरम के राजा बने। इन बलि से ही श्री विष्णु ने वामन बनकर तीन पग धरती मांग ली थी।

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यह कविता (होली से होलिका।) “विजयलक्ष्मी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मेरा नाम विजयलक्ष्मी है। मैं राजकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय, छारा – 2, ब्लॉक – बहादुरगढ़, जिला – झज्जर, हरियाणा में मुख्य शिक्षिका पद पर कार्यरत हूँ। मैं पढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा, व समय-समय पर “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ” और भ्रूण हत्या पर Parents मीटिंग लेकर उनको समझाती हूँ। स्कूल शिक्षा में सुधार करते हुए बच्चों में मानसिक मजबूती को बढ़ावा देना। कोविड – 19 महामारी में भी बच्चों को व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाना, वीडियो और वर्क शीट बनाकर भेजना, प्रश्नोत्तरी कराना, बच्चों को साप्ताहिक प्रतियोगिता कराकर सर्टिफिकेट देना। Dance Classes प्रतियोगिता का Online आयोजन कराना। स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर कार्य करना। इन सभी कार्यों के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी द्वारा और कई Society द्वारा बार-बार सम्मानित किया गया।

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शिव शंभू और नंदी।

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Shiva Shambhu and Nandi | शिव शंभू और नंदी।

विद्या : चित्रलेखा।

जय जय भोले भंडारी,
जय जय भोले भंडारी,
करते हो सदा नंदी पे सवारी,
जय जय भोले भंडारी,
जय जय भोले भंडारी॥

सबके रखवाले हो शिवा,
डमरू वाले हो शिवा,
कैलाश पर है डेरा,
जय जय भोले भंडारी,
जय जय भोले भंडारी॥

सर पे तेरे बहती है गंगा,
काम सभी का करते हो चंगा,
हाथों में त्रिशूल विराजे,
सिर पर अर्ध चंद्रमा साजे,
जय जय भोले भंडारी,
जय जय भोले भंडारी॥

भूत पिसाच निकट नहीं आते,
जब आप अघोरी रुप में हो आते,
योगी आदि हो कहलाते,
श्मशान में हो धूणी रमाते,
जय जय भोले भंडारी,
जय जय भोले भंडारी॥

नंदी संग में रहते हैं,
मां पार्वती के बेटे हैं,
जब शिव डमरू बजाते हैं,
नंदी भी नाच दिखाते हैं,
जय जय भोले भंडारी,
जय जय भोले भंडारी,
करते हैं नंदी की सवारी॥

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

—————

  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए; इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की हैं — महाशिवरात्र‍ि भगवान भोलेनाथ की आराधना का ही पर्व है, जब धर्मप्रेमी लोग महादेव का विधि-विधान के साथ पूजन-अर्चन करते हैं और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस दिन शिव मंदिरों में बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ती है, जो शिव के दर्शन-पूजन कर खुद को सौभाग्यशाली मानते है। भक्तों के सब संकट हरते शिव ही महाकाल है। शिव ही संहार करते शिव शक्ति का रूप है। कोटि कोटि वंदन करूँ शिव ही तारणहार है। नंदी संग में रहते हैं, मां पार्वती के बेटे हैं, जब शिव डमरू बजाते हैं, नंदी भी नाच दिखाते हैं, जय जय भोले भंडारी, जय जय भोले भंडारी, करते हैं नंदी की सवारी।

—————

यह कविता (शिव शंभू और नंदी।) “विजयलक्ष्मी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विजयलक्ष्मी है। मैं राजकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय, छारा – 2, ब्लॉक – बहादुरगढ़, जिला – झज्जर, हरियाणा में मुख्य शिक्षिका पद पर कार्यरत हूँ। मैं पढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा, व समय-समय पर “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ” और भ्रूण हत्या पर Parents मीटिंग लेकर उनको समझाती हूँ। स्कूल शिक्षा में सुधार करते हुए बच्चों में मानसिक मजबूती को बढ़ावा देना। कोविड – 19 महामारी में भी बच्चों को व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाना, वीडियो और वर्क शीट बनाकर भेजना, प्रश्नोत्तरी कराना, बच्चों को साप्ताहिक प्रतियोगिता कराकर सर्टिफिकेट देना। Dance Classes प्रतियोगिता का Online आयोजन कराना। स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर कार्य करना। इन सभी कार्यों के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी द्वारा और कई Society द्वारा बार-बार सम्मानित किया गया।

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पहले और अब – गणतंत्र दिवस।

Kmsraj51 की कलम से…..

Earlier and Now – Republic Day – पहले और अब – गणतंत्र दिवस।

वो जमीन न रही, वो आसमां न रहा,
गणतंत्र दिवस मना रहें हैं हम।
वो गण न रहे वो तंत्र न रहा,
वो जमीन न रही वो आसमां न रहा।

संविधान हम सब पूजते हैं,
हर जन के मन में विधान न रहा।
न्याय है किताबों में हकीकत में न रहा,
वो जमीन न रही वो आसमां न रहा।

बात जब आती है अधिकारों पर,
तरिका-ए-कार न रहा।
वो मानव अधिकार न रहा,
वो जमीन न रही वो आसमां न रहा।

प्रस्तावना को उद्देशिका कहा जाता रहा,
संविधान निर्माता राष्ट्र निर्माण सजाता रहा।
संपूर्ण प्रभुता के साथ संपन्नता दिखाता रहा,
वो जमीन न रही वो आसमां न रहा।

समाजवाद, पंथनिरपेक्षता को 42वें,
संशोधन से जोड़ा गया।
लोकतंत्रात्मक जनता का शासन बताते रहे,
वो जमीन न रही वो आसमां न रहा।

गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को हम मनाते रहे,
सामाजिक, आर्थिक न्याय की गुहार लगाते रहे।
न्यूनतम और अधिकतम आयु हमें दर्शात रहा,
वो जमीन न रही वो आसमां न रहा।

राजनीति, विचार अभिव्यक्ति बताते रहे,
अध्याय 19(1) जनमत निर्माण हमें बताते रहे।
विश्वास, धर्म उपासना का अधिकार भी बताता रहा,
वो जमीन न रही वो आसमां न रहा।

प्रतिष्ठा और अवसर की समानता भी बताता रहा,
व्यक्ति की गरिमा न रही फिर भी गिनवाता रहा।
राष्ट्र की एकता अखंडता सलामत रही,
भाई से भाई को मरवाता रहा,
वो जमीन न रही वो आसमां न रहा।

आओ हम सब सच्चाई का रूख अपनाएं,
26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाए।
हर जन में मानव व मानवीयता बनी रहे,
वो जमीन भी उजागर हो आसमां भी उजागर रहे।
जय हिन्द – जय भारत॥

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

—————

  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए; इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की हैं — आज प्रश्न है तो वह यह है कि आखिर भारत में कब पूर्ण गणतंत्र मनाया जाएगा? जब हर आदमी को उसका पूरा अधिकार मात्र कागजों में ही नहीं बल्कि असल में मिलेगा। जिन पूर्वजों ने अपना बलिदान देकर भारत को यह सपना देख कर आजाद करवाया था, कि भारत की जनता को पूर्ण गणतंत्रता प्राप्त हो। उनके दिलों पर आज क्या बीतती होगी, यदि वे किसी लोक या दुनियां से आज भारत का दृश्य देखते होंगे। वे तो अंग्रेज थे, जो भारतीयों का काम कभी भी समय पर नहीं करते थे। फिर करते भी थे तो पूरी खुशामद करवा कर ही करवाते थे। पर आज तो काम करवाने वाला भी भारतीय है और काम करने वाला भी भारतीय ही है। आज हालत उससे भी बदतर है। बिना रिश्वत या चाटुकारिता के कोई काम करने को राजी नहीं है। शायद ऐसे भारत की कल्पना तो कभी हमारे पुरखों ने न की हो।

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यह कविता (पहले और अब – गणतंत्र दिवस।) “विजयलक्ष्मी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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रह गई आस्था मन में।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ रह गई आस्था मन में। ♦

विधा – नववर्ष।

लिए हुए रह गई मैं अपनी आस्थाएं मन में,
पुरातन वर्ष जाने और नववर्ष के आगमन में।

आवरण तो तोड़ना था संकल्प लें सृजन मन में,
पुरातन भी कुछ संजोना है नववर्ष के संग में।

कुछ नया करने के लिए सोचती रह गई भीड़ में,
हसरतों के दीप जलते रहे महामारी के दौर में।

कुछ अपने बिछुडे कुछ नए दोस्त आए जीवन में,
आनलाइन से जुड़ करके नाते निभाए हमने।

प्रगति, समाजवाद के नारे रह गए कागज़ों में,
नजाने विकास कहां खो गया देखिए जमाने में।

सभी लगे हैं अपनी-अपनी झोलिया भरने में,
कोई ठिठुरती रात में ताउम्र के लिए सो गया दो गज कफन में।

देश और समाज में क्यूं और क्या देखूं मैं ?
कोई महज हसरत लिए ढह गया दो वक्त की रोटी में।

हौसले थे उसके मन में भी नव वर्ष के आगमन में,
पर वो बेचारा क्या करता आस्थाएं धरी रह गई मन में।

एकबार फिर नई हसरतों के दीप जलाए उसने मन में,
पुरातन में जो रह गई तमन्नाएं नववर्ष में पूरी करेंगे संकल्प लिया मन में।

विजयलक्ष्मी है कहती नई आशाओं को लेकर आगे बढ़ो जीवन में,
आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं नववर्ष के आगमन में।

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

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  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए; इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की हैं — कुछ पुरानी खट्टी-मीठी यादें मन में संजोए बिट गया पुराना वर्ष २०२२, अब नव वर्ष 2023 का सुभारम्भ हुआ, नए संकल्पों व उमंग उत्साह के साथ । जो गलतिया किया हम सभी ने अब तक, उन गलतियों को पुनः दोहराये नहीं। 2020 से ही अब तक कोरोना काल ने बहुत कुछ सिखाया इंसान को, इंसानियत से बढ़कर कुछ भी नहीं है इस संसार में, मानव सेवा ही प्रभु सेवा है। सब मिलजुलकर समाज में सुधार लेन की कोशिश करें, सुधार अपने आप से व अपने परिवार से शुरू करें। जहां तक हो सके जरूरतमंदो की मदद करें, अपनी स्व रक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर शस्त्र भी उठाएं। नए उमंग व उत्साह के साथ जीवन में आगे बढ़े, प्रकृति की रक्षा करें अच्छे स्वास्थ्य के लिए। विजयलक्ष्मी है कहती नई आशाओं को लेकर आगे बढ़ो जीवन में, आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं नववर्ष के आगमन में।

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यह कविता (रह गई आस्था मन में।) “विजयलक्ष्मी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मेरा नाम विजयलक्ष्मी है। मैं राजकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय, छारा – 2, ब्लॉक – बहादुरगढ़, जिला – झज्जर, हरियाणा में मुख्य शिक्षिका पद पर कार्यरत हूँ। मैं पढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा, व समय-समय पर “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ” और भ्रूण हत्या पर Parents मीटिंग लेकर उनको समझाती हूँ। स्कूल शिक्षा में सुधार करते हुए बच्चों में मानसिक मजबूती को बढ़ावा देना। कोविड – 19 महामारी में भी बच्चों को व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाना, वीडियो और वर्क शीट बनाकर भेजना, प्रश्नोत्तरी कराना, बच्चों को साप्ताहिक प्रतियोगिता कराकर सर्टिफिकेट देना। Dance Classes प्रतियोगिता का Online आयोजन कराना। स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर कार्य करना। इन सभी कार्यों के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी द्वारा और कई Society द्वारा बार-बार सम्मानित किया गया।

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न जाने क्यों?

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ न जाने क्यों? ♦

न जाने क्यों लोग बुराई के साथ मन का दरिया पार कर जाते हैं,
लंका पति रावण का पुतला दहन कर इंसान न जाने क्यों इतराता है॥

सियासत भी मुश्किलों से घिरी है इंसान की गोद में आकर,
बचाती हूं कारोबार तो न जाने क्यों ईमान बीच में आ जाता है॥

बहना के प्यार में रावण ने धोखे से मां सीता का हरण कर डाला,
चारों वेदों का ज्ञाता वो न जाने क्यों मां सीता को वह हाथ लगा नहीं पाता है॥

दस-दस हाथियों का बल था उसमें तीनों लोकों का स्वामी था,
इतना बलशाली होकर भी न जाने क्यों मां सीता को छू नहीं पाता है॥

इसे मैं नाम से रावण की मासूमियत कहूं या कहूं चालाकियां,
उस ज्ञानी रावण के चरित्र के आगे न जाने क्यों मन भ्रमित हो जाता है॥

कभी सोचती है विजय आज के इंसान के बारे में तो वक्त ठहरा हुआ सा नजर आता है,
मुझे तो हर गली नुक्कड़ चौराहे पर न जाने क्यों हर मोड़ पर रावण नजर आता है॥

देखती आ रही हूं कई युगों से उस रावण का पुतला इंसान जलाते आ रहे हैं,
मन में दुर्भावना लेकर न जाने क्यों रावण का पुतला दहन कर इतराता हैं॥

अरे! समझो समाज के ठेकेदारों अपने मन के रावण को मारते क्यों नहीं हो?
ज्ञानी रावण के जैसा संयम रख अपना चरित्र संवारते क्यों नहीं हो॥

मैं देखती हूं हर रोज कितनी ही लड़कियों का इंसान हनन कर रहा है,
कागज का पुतला जलाने की बजाए न जाने क्यों लोग अपने मन का रावण मारते क्यों नहीं है॥

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

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  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए; इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की हैं — मैं देखती हूं हर रोज कितनी ही लड़कियों का इंसान हनन कर रहा है, कागज का पुतला जलाने की बजाए न जाने क्यों लोग अपने मन का रावण मारते क्यों नहीं है। केवल रावण का पुतला प्रत्येक वर्ष जलाने से कुछ भी नहीं होगा, जब तक अपने मन के अंदर के रावण को हर इंसान नहीं जलाता हैं। इसलिए आओ हमसब मिलकर ये प्रण ले की अपने मन के अंदर के रावण को सदैव के लिए जलाएंगे, तभी एक सच्चे और अच्छे समाज की नींव पड़ेगी। तभी आने वाली पीढ़ी ख़ुशी-ख़ुशी अपना योगदान मानव कल्याण के लिए दे पायेगी। याद रखें – अच्छा संस्कार, अच्छा आचरण, अच्छा व्यवहार, अच्छा चरित्र, से ही एक अच्छे समाज का निर्माण होता हैं।

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यह कविता (न जाने क्यों?) “विजयलक्ष्मी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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शिक्षक और समाज।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ शिक्षक और समाज। ♦

विधा: शिक्षक दिवस।

कच्ची मिट्टी को अपने हाथों से सोना बनाते हो आप,
बुद्धि विवेक से सींच कर हमको आसमानों की ऊंचाईयों पर पहुंचाते हो आप।

करते नहीं हो किसी से भेदभाव सबको ज्ञान का पाठ पढ़ाते हो आप,
जाति-धर्म पर लड़े न कोई सबको एकता का पाठ पढ़ाते हो आप।

आदर्शों की मिसाल बनकर बाल जीवन को निखारते हो आप,
सदाबहार के फूल खिलाकर प्रेरक आयामों से भव्य संसार बनाते हो आप।

संचित ज्ञान का धन देकर हमें खुशियां खूब मनाते हो आप,
डूबती कश्तियों के नाविक बन कच्ची ईंटों से चांद पर ताज बनाते हो आप।

ढूंढ कर मजहब किताबों में गीता और कुरान पढ़ाते हो आप,
अपनी मेहनत की कलम से आने वाले कल को आज बनाते हो आप।

कलम हाथ में लिए विजयलक्ष्मी शिक्षक की भूमिका सोचती हैं आज,
एक शिक्षक को शिक्षक की भूमिका से हटाकर सर्व भू-पर सर्वे सर्वा बना दिया है आज।

जिन अधिकारियों को गरिमामयी पद पर पहुंचाया आपने,
वो भूलाकर गुरुजनों का सम्मान नित नए सरकारी कार्यों के फरमान पहुंचाते हैं आप।

आइए आज हम सभी मिलकर अपने गुरुजनों को शीश नवाएं,
जो खोती जा रही है गुरु की महिमा उसको वापस लाए आज।
जय हिन्द! जय भारत!

शिक्षक दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं!
शिक्षक करता देश का उद्धार है,
पैदा करता ये हर तरह के कलाकार हैं।

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

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  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए; इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की हैं — एक शिक्षक ही होते है जो हमे अच्छी और बुरी आदतों का पहचान करवाते है और वो हमारी बुरी आदतों को छोड़वाने का दिल से पूर्ण प्रयास भी करते हैं। हमें अच्छी आदतों को अपनाने के लिए प्रेरित करते है, सदैव ही आगे बढ़ने का सही ज्ञान देते है। वो शिक्षक ही होते है जो हमें ईर्ष्या, हिंसा, अधर्म, चोरी जैसी बुरी आदतों से दूर रखते है। शिक्षक ही, सही आचरण, नैतिकता का पाठ पढ़ाते है, कर्तव्य, संयम और धैर्य से सही पथ पर चलना सिखाते है। भारत में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्ण के जन्म दिवस अर्थात 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। उन्होंने अपने छात्रों से अपने जन्म दिवस पर शिक्षक दिवस मनाने की इच्छा जताई थी। पूर्व राष्‍ट्रपति डॉ राधाकृष्‍णन का जन्म 5 सितंबर, 1888 को तमिलनाडु के तिरुमनी गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था।

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यह कविता (शिक्षक और समाज।) “विजयलक्ष्मी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मेरा नाम विजयलक्ष्मी है। मैं राजकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय, छारा – 2, ब्लॉक – बहादुरगढ़, जिला – झज्जर, हरियाणा में मुख्य शिक्षिका पद पर कार्यरत हूँ। मैं पढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा, व समय-समय पर “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ” और भ्रूण हत्या पर Parents मीटिंग लेकर उनको समझाती हूँ। स्कूल शिक्षा में सुधार करते हुए बच्चों में मानसिक मजबूती को बढ़ावा देना। कोविड – 19 महामारी में भी बच्चों को व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाना, वीडियो और वर्क शीट बनाकर भेजना, प्रश्नोत्तरी कराना, बच्चों को साप्ताहिक प्रतियोगिता कराकर सर्टिफिकेट देना। Dance Classes प्रतियोगिता का Online आयोजन कराना। स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर कार्य करना। इन सभी कार्यों के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी द्वारा और कई Society द्वारा बार-बार सम्मानित किया गया।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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