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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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कवयित्री विजयलक्ष्मी की कविताएं

श्राद्ध विधान।

Kmsraj51 की कलम से…..

Shraddha Ritual | श्राद्ध विधान।

With faith one gets good children, longevity, health, immense wealth and desired things.श्रद्धया दीयते यस्मात् तच्छादम्॥

भावार्थ : श्रद्धा से श्रेष्ठ संतान, आयु, आरोग्य, अतुल ऐश्वर्य और इच्छित वस्तुओं की प्राप्ति होती है।

व्याख्या : वेदों अनुसार इससे पितृऋण चुकता होता है। पुराणों के अनुसार श्रद्धायुक्त होकर श्राद्धकर्म करने से पितृगण ही तृप्त नहीं होते, अपितु ब्रह्मा, इंद्र, रुद्र, दोनों अश्विनी कुमार, सूर्य, अग्नि, अष्टवसु, वायु, विश्वेदेव, ऋषि, मनुष्य, पशु-पक्षी और सरीसृप आदि समस्त भूत प्राणी भी तृप्त होते हैं। संतुष्ट होकर पितर मनुष्यों के लिए आयु, पुत्र, यश, स्वर्ग, कीर्ति, पुष्टि, बल, वैभव, पशु, सुख, धन और धान्य देते हैं।

तर्पण कर्म के प्रकार : पुराणों में तर्पण को छह भागों में विभक्त किया गया है:-

1. देव-तर्पण।
2. ऋषि-तर्पण।
3. दिव्य-मानव-तर्पण।
4. दिव्य-पितृ-तर्पण।
5. यम-तर्पण।
6. मनुष्य-पितृ-तर्पण।

कविता: श्राद्ध विधान

आश्विन माह कृष्ण पक्ष आता है एक बार,
15 दिनों के लिए पितृ आते हैं घर द्वार॥

सूर्य कन्या राशि में करता है प्रवेश ,
हमारे पितृ आते हैं धर देवता भेष॥

देह त्याग तिथि पर पितृ श्राद्ध आता है,
श्राद्ध विधान से तृप्त हो वापस लौट जाता है॥

कन्या राशि में सूर्य का प्रवेश जब हो जाता है,
इस समय पितृ श्राद्ध कर्म नहीं हो पाता है॥

पूरा कार्तिक मास पितृ इंतजार करता रहता है
फिर भी कोई पितृ ऋण नहीं चुका पाता है॥

जब सूर्य देव वृश्चिक राशि में आ जाता है,
तो पितृ निराश हो अपने स्थान लौट जाता है॥

पुराणों में पितरों को दो श्रेणियों में बांटा जाता हैं,
दिव्य पितर, मनुष्य पितर नाम से जाना जाता है॥

अग्रिष्वात्त, बर्हिषद आज्यप, सोमेप, रश्मिप, उपदूत, आयन्तुन ,
श्राद्धभुक व नान्दीमुख ,ये नौ दिव्य पितर कहलाते हैं॥

कर्मों के कारण मृत्यु बाद जो सजा पाते हैं,
पितरों की गणना में आने वाले प्रधान यमराज कहलाते हैं॥

अग्रिषवात, बहिरषद, आज्यप, सोमेप, रश्मिप, उपदूत,
आयंतुन, श्राद्धभुक, नांदीमुख ये नौ दिव्य पितर कहलाते हैं॥

अर्यमा, किरण इस समय पृथ्वी पर आ जाते हैं,
मार्कंडेय पुराण में ये पितर देव कहलाते हैं॥

पितरों के श्राद्ध से हम ऋण मुक्त हो जाते हैं,
वंशानुगत, शारीरिक, मानसिक तनाव मुक्त हो जाते हैं॥

धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित कर सकारात्मक भाव पाते हैं, कृष्ण भगवान गीता का श्लोक अर्जुन को सुनाते हैं —

अनन्तश्चास्मि नागानां वरुणो यादसामहम्।
पितृणामर्यमा चास्मि यमः संयमतामहम्॥29॥-गीता

भावार्थ : हे धनंजय! नागों में मैं शेषनाग और जलचरों में वरुण हूं, पितरों में अर्यमा तथा नियमन करने वालों में यमराज हूं।

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

—————

  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए; इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की हैं — वेदों अनुसार इससे पितृऋण चुकता होता है। पुराणों के अनुसार श्रद्धायुक्त होकर श्राद्धकर्म करने से पितृगण ही तृप्त नहीं होते, अपितु ब्रह्मा, इंद्र, रुद्र, दोनों अश्विनी कुमार, सूर्य, अग्नि, अष्टवसु, वायु, विश्वेदेव, ऋषि, मनुष्य, पशु-पक्षी और सरीसृप आदि समस्त भूत प्राणी भी तृप्त होते हैं। संतुष्ट होकर पितर मनुष्यों के लिए आयु, पुत्र, यश, स्वर्ग, कीर्ति, पुष्टि, बल, वैभव, पशु, सुख, धन और धान्य देते हैं।

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यह कविता (श्राद्ध विधान।) “विजयलक्ष्मी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विजयलक्ष्मी है। मैं राजकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय, छारा – 2, ब्लॉक – बहादुरगढ़, जिला – झज्जर, हरियाणा में मुख्य शिक्षिका पद पर कार्यरत हूँ। मैं पढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा, व समय-समय पर “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ” और भ्रूण हत्या पर Parents मीटिंग लेकर उनको समझाती हूँ। स्कूल शिक्षा में सुधार करते हुए बच्चों में मानसिक मजबूती को बढ़ावा देना। कोविड – 19 महामारी में भी बच्चों को व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाना, वीडियो और वर्क शीट बनाकर भेजना, प्रश्नोत्तरी कराना, बच्चों को साप्ताहिक प्रतियोगिता कराकर सर्टिफिकेट देना। Dance Classes प्रतियोगिता का Online आयोजन कराना। स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर कार्य करना। इन सभी कार्यों के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी द्वारा और कई Society द्वारा बार-बार सम्मानित किया गया।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: Shraddha ritual in Hindi, vijaylaxmi, vijaylaxmi poems, कवयित्री विजयलक्ष्मी की कविताएं, विजयलक्ष्मी, श्राद्ध कर्म, श्राद्ध विधान, श्राद्ध विधान - विजयलक्ष्मी, श्राद्ध विधि हिंदी में

मजदूर दिवस का इतिहास।

Kmsraj51 की कलम से…..

History of Labor Day | मजदूर दिवस का इतिहास।

देखो मजदूर दिवस है आया,
1 मई 1886 का दिन याद है आया।
अमेरिका का मजदूर सड़कों पर उतर आया,
15-16 घंटे काम न करने का बीड़ा उठाया।

वहां की सरकार ने मजदूर पर कहर था ढाया,
पुलिस वालों की गोलियों से मजदूरों को भूनवाया।
बहुतों की जान गई 100 के करीबों को घायल पाया,
3 साल बाद इतिहास मे एक बदलाव आया।

1889 में अंतरराष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन बुलाया,
8 घंटे काम करने का फैसला सम्मेलन में सुनाया।
1 मई को श्रमिक दिवस और छुट्टी का ऐलान करवाया,
फिर क्या था कई देशों ने इसे अपनाया।

भारत में इसके 34 साल बाद ये दिवस मनाया,
लेबल किसान पार्टी आफ हिंदुस्तान ने बीड़ा उठाया।
1 मई 1923 को चेन्नई में मजदूर दिवस मनाया,
ऐसा करके मजदूरों की उपलब्धियों का ज्ञान कराया।

शोषण को रोक उनके अधिकारों को बतलाया,
झोपड़ी से लेकर महलों तक मजदूरों ने है सजाया।
खुद कच्चे में रहा लोगों को महलों में बैठाया,
दुनिया के हर पहलू में मजदूर को है पाया,
क्या जीवन और क्या मृत्यु? सबमें मजदूर को पाया।

विजय, ने मजदूर दिवस पर लिखने को कलम को उठाया।
पर लिखते हुए श्रमिकों में खो गई खुदको निशब्द पाया।

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

—————

  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए; इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की हैं — मजदूरों के नाम समर्पित यह दिन 1 मई है। मजदूर दिवस को लेबर डे, श्रमिक दिवस या मई डे के नाम से भी जाना जाता है। श्रमिकों के सम्मान के साथ ही मजदूरों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने के उद्देश्य से भी इस दिन को मनाते हैं, ताकि मजदूरों की स्थिति समाज में मजबूत हो सके। मजदूर किसी भी देश के विकास के लिए अहम भूमिका में होते हैं। मजदूरों के नाम समर्पित आंदोलन के तीन साल बाद 1889 में अंतरराष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन की बैठक हुई। जिसमे तय हुआ कि हर मजदूर से केवल दिन के 8 घंटे ही काम लिया जाएगा। इस सम्मेलन में ही 1 मई को मजदूर दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा गया, साथ ही हर साल 1 मई को छुट्टी देने का भी फैसला लिया गया।

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यह कविता (मजदूर दिवस का इतिहास।) “विजयलक्ष्मी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मेरा नाम विजयलक्ष्मी है। मैं राजकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय, छारा – 2, ब्लॉक – बहादुरगढ़, जिला – झज्जर, हरियाणा में मुख्य शिक्षिका पद पर कार्यरत हूँ। मैं पढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा, व समय-समय पर “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ” और भ्रूण हत्या पर Parents मीटिंग लेकर उनको समझाती हूँ। स्कूल शिक्षा में सुधार करते हुए बच्चों में मानसिक मजबूती को बढ़ावा देना। कोविड – 19 महामारी में भी बच्चों को व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाना, वीडियो और वर्क शीट बनाकर भेजना, प्रश्नोत्तरी कराना, बच्चों को साप्ताहिक प्रतियोगिता कराकर सर्टिफिकेट देना। Dance Classes प्रतियोगिता का Online आयोजन कराना। स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर कार्य करना। इन सभी कार्यों के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी द्वारा और कई Society द्वारा बार-बार सम्मानित किया गया।

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रह गई आस्था मन में।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ रह गई आस्था मन में। ♦

विधा – नववर्ष।

लिए हुए रह गई मैं अपनी आस्थाएं मन में,
पुरातन वर्ष जाने और नववर्ष के आगमन में।

आवरण तो तोड़ना था संकल्प लें सृजन मन में,
पुरातन भी कुछ संजोना है नववर्ष के संग में।

कुछ नया करने के लिए सोचती रह गई भीड़ में,
हसरतों के दीप जलते रहे महामारी के दौर में।

कुछ अपने बिछुडे कुछ नए दोस्त आए जीवन में,
आनलाइन से जुड़ करके नाते निभाए हमने।

प्रगति, समाजवाद के नारे रह गए कागज़ों में,
नजाने विकास कहां खो गया देखिए जमाने में।

सभी लगे हैं अपनी-अपनी झोलिया भरने में,
कोई ठिठुरती रात में ताउम्र के लिए सो गया दो गज कफन में।

देश और समाज में क्यूं और क्या देखूं मैं ?
कोई महज हसरत लिए ढह गया दो वक्त की रोटी में।

हौसले थे उसके मन में भी नव वर्ष के आगमन में,
पर वो बेचारा क्या करता आस्थाएं धरी रह गई मन में।

एकबार फिर नई हसरतों के दीप जलाए उसने मन में,
पुरातन में जो रह गई तमन्नाएं नववर्ष में पूरी करेंगे संकल्प लिया मन में।

विजयलक्ष्मी है कहती नई आशाओं को लेकर आगे बढ़ो जीवन में,
आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं नववर्ष के आगमन में।

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

—————

  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए; इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की हैं — कुछ पुरानी खट्टी-मीठी यादें मन में संजोए बिट गया पुराना वर्ष २०२२, अब नव वर्ष 2023 का सुभारम्भ हुआ, नए संकल्पों व उमंग उत्साह के साथ । जो गलतिया किया हम सभी ने अब तक, उन गलतियों को पुनः दोहराये नहीं। 2020 से ही अब तक कोरोना काल ने बहुत कुछ सिखाया इंसान को, इंसानियत से बढ़कर कुछ भी नहीं है इस संसार में, मानव सेवा ही प्रभु सेवा है। सब मिलजुलकर समाज में सुधार लेन की कोशिश करें, सुधार अपने आप से व अपने परिवार से शुरू करें। जहां तक हो सके जरूरतमंदो की मदद करें, अपनी स्व रक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर शस्त्र भी उठाएं। नए उमंग व उत्साह के साथ जीवन में आगे बढ़े, प्रकृति की रक्षा करें अच्छे स्वास्थ्य के लिए। विजयलक्ष्मी है कहती नई आशाओं को लेकर आगे बढ़ो जीवन में, आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं नववर्ष के आगमन में।

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यह कविता (रह गई आस्था मन में।) “विजयलक्ष्मी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विजयलक्ष्मी है। मैं राजकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय, छारा – 2, ब्लॉक – बहादुरगढ़, जिला – झज्जर, हरियाणा में मुख्य शिक्षिका पद पर कार्यरत हूँ। मैं पढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा, व समय-समय पर “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ” और भ्रूण हत्या पर Parents मीटिंग लेकर उनको समझाती हूँ। स्कूल शिक्षा में सुधार करते हुए बच्चों में मानसिक मजबूती को बढ़ावा देना। कोविड – 19 महामारी में भी बच्चों को व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाना, वीडियो और वर्क शीट बनाकर भेजना, प्रश्नोत्तरी कराना, बच्चों को साप्ताहिक प्रतियोगिता कराकर सर्टिफिकेट देना। Dance Classes प्रतियोगिता का Online आयोजन कराना। स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर कार्य करना। इन सभी कार्यों के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी द्वारा और कई Society द्वारा बार-बार सम्मानित किया गया।

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मां के नौ रूप।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ मां के नौ रूप। ♦

विधा : भक्ति।

नवरात्रों के पावन पर्व पर मां को याद करते हैं,
उनके नौ रुपों का हम बखान करते हैं॥

पहली शैलपुत्री हैं तो दूसरी है ब्रह्माचारिणी,
भवसागर से सब लोगों को पार उतारनी॥

तीनों लोक मैया की जय जयकार करते हैं,
नवरात्रों के पावन पर्व पर मां को याद करते हैं॥
उनके नौ रुपों………

तीसरी चंद्रघंटा, चौथी कूष्माण्डा का रुप निराला है,
भक्त जनों की हर विपदा को मां ने टाला हैं॥

सभी भक्त जन मां के स्वरूप का श्रृंगार करते हैं,
नवरात्रों के पावन पर्व पर मां को याद करते हैं॥
उनके नौ रुपों………

पांचवीं स्कंदमाता, छठी कात्यायनी का भवन निराला है,
सारे भक्तो को प्यार करे सबकी बुरी नजरो से टाला है॥

मां के भवन में जाकर भक्त जन उनका श्रृंगार करते हैं,
नवरात्रों के पावन पर्व पर मां को याद करते हैं॥
उनके नौ रुपों………

सातवीं कालरात्रि, आठवीं महागौरी की पूजा करो सारे,
एकपल भी न लगाएं पापी दुष्टजनो को खड्ग से संहारे॥

जो सच्चे मन से मां को सुमरे उनके भाग जाग जाते हैं,
नवरात्रों के पावन पर्व पर मां को याद करते हैं॥
उनके नौ रुपों………

नवीं सिद्धिदात्री मां को सच्चे मन से जिसने धाया है,
मन के मन्दिर में मां का दरबार सजाया है॥

मां के सभी नौ रूप बड़े प्यारे- प्यारे लगते हैं,
नवरात्रों के पावन पर्व पर मां को याद करते हैं॥
उनके नौ रुपों का हम बखान करते हैं।
हम बखान करते हैं………

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

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  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए; इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की हैं — आज हम बात कर रहे हैं हमारे देश के सनातन धर्म (हिन्दू धर्म) द्वारा मनाये जाने वाले नवरात्रि त्यौहार की, इस त्यौहार को बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। नवरात्रि में लोग 9 दिन व्रत रखते हैं और आखिरी दिन मां की पूजा करके नौ कन्याओं को भोजन कराते हैं। यह त्यौहार अलग-अलग जगह पर अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। काफी जगह इस दिन लोग गरबा और डांडिया भी खेलते हैं। यह त्यौहार असत्य पर सत्य की जीत को दर्शाता है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि साल में दो बार मनाया जाता है। नवरात्रि नौ दिनों के लिए निरंतर चलता है जिसमे देवी माँ के अलग-अलग स्वरूपों की लोग भक्ति और निष्ठा के साथ पूजा करते है। भारत में नवरात्रि अलग-अलग राज्यों में विभिन्न तरीको और विधियों के संग मनाई जाती है।

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यह कविता (मां के नौ रूप।) “विजयलक्ष्मी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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शिक्षक और समाज।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ शिक्षक और समाज। ♦

विधा: शिक्षक दिवस।

कच्ची मिट्टी को अपने हाथों से सोना बनाते हो आप,
बुद्धि विवेक से सींच कर हमको आसमानों की ऊंचाईयों पर पहुंचाते हो आप।

करते नहीं हो किसी से भेदभाव सबको ज्ञान का पाठ पढ़ाते हो आप,
जाति-धर्म पर लड़े न कोई सबको एकता का पाठ पढ़ाते हो आप।

आदर्शों की मिसाल बनकर बाल जीवन को निखारते हो आप,
सदाबहार के फूल खिलाकर प्रेरक आयामों से भव्य संसार बनाते हो आप।

संचित ज्ञान का धन देकर हमें खुशियां खूब मनाते हो आप,
डूबती कश्तियों के नाविक बन कच्ची ईंटों से चांद पर ताज बनाते हो आप।

ढूंढ कर मजहब किताबों में गीता और कुरान पढ़ाते हो आप,
अपनी मेहनत की कलम से आने वाले कल को आज बनाते हो आप।

कलम हाथ में लिए विजयलक्ष्मी शिक्षक की भूमिका सोचती हैं आज,
एक शिक्षक को शिक्षक की भूमिका से हटाकर सर्व भू-पर सर्वे सर्वा बना दिया है आज।

जिन अधिकारियों को गरिमामयी पद पर पहुंचाया आपने,
वो भूलाकर गुरुजनों का सम्मान नित नए सरकारी कार्यों के फरमान पहुंचाते हैं आप।

आइए आज हम सभी मिलकर अपने गुरुजनों को शीश नवाएं,
जो खोती जा रही है गुरु की महिमा उसको वापस लाए आज।
जय हिन्द! जय भारत!

शिक्षक दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं!
शिक्षक करता देश का उद्धार है,
पैदा करता ये हर तरह के कलाकार हैं।

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

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  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए; इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की हैं — एक शिक्षक ही होते है जो हमे अच्छी और बुरी आदतों का पहचान करवाते है और वो हमारी बुरी आदतों को छोड़वाने का दिल से पूर्ण प्रयास भी करते हैं। हमें अच्छी आदतों को अपनाने के लिए प्रेरित करते है, सदैव ही आगे बढ़ने का सही ज्ञान देते है। वो शिक्षक ही होते है जो हमें ईर्ष्या, हिंसा, अधर्म, चोरी जैसी बुरी आदतों से दूर रखते है। शिक्षक ही, सही आचरण, नैतिकता का पाठ पढ़ाते है, कर्तव्य, संयम और धैर्य से सही पथ पर चलना सिखाते है। भारत में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्ण के जन्म दिवस अर्थात 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। उन्होंने अपने छात्रों से अपने जन्म दिवस पर शिक्षक दिवस मनाने की इच्छा जताई थी। पूर्व राष्‍ट्रपति डॉ राधाकृष्‍णन का जन्म 5 सितंबर, 1888 को तमिलनाडु के तिरुमनी गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था।

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यह कविता (शिक्षक और समाज।) “विजयलक्ष्मी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विजयलक्ष्मी है। मैं राजकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय, छारा – 2, ब्लॉक – बहादुरगढ़, जिला – झज्जर, हरियाणा में मुख्य शिक्षिका पद पर कार्यरत हूँ। मैं पढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा, व समय-समय पर “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ” और भ्रूण हत्या पर Parents मीटिंग लेकर उनको समझाती हूँ। स्कूल शिक्षा में सुधार करते हुए बच्चों में मानसिक मजबूती को बढ़ावा देना। कोविड – 19 महामारी में भी बच्चों को व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाना, वीडियो और वर्क शीट बनाकर भेजना, प्रश्नोत्तरी कराना, बच्चों को साप्ताहिक प्रतियोगिता कराकर सर्टिफिकेट देना। Dance Classes प्रतियोगिता का Online आयोजन कराना। स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर कार्य करना। इन सभी कार्यों के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी द्वारा और कई Society द्वारा बार-बार सम्मानित किया गया।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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भाई बहन का प्यार।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ भाई बहन का प्यार। ♦

विधा: अटूट बंधन।

बहन भाई के लिए एक अच्छी दोस्त भी होती हैं। बहन को माँ का भी दर्जा दिया गया हैं, क्योंकि बहन भाइयों को बहुत ही ज्यादा प्रवाह ख्याल रखती हैं। इनका रिश्ता ऐसा होता हैं की यह एक दुसरे का चेहरा देखकर ही समस्याओं को पहचान लेते हैं…

भाई का प्यार होती है बहना,
इनका प्यार दुनिया में सबसे मंहगा है गहना॥

रिश्ते में बड़ी होती है बहना,
एहसासों का होती है गहना।
कभी बच्चों की शरारत,
कभी मां का प्यार है बहना।
भाई का प्यार……॥

रूठ जाए तो मना लेती है बहना,
हर उलझन को सुलझा देती है बहना।
जादू की छड़ी चला,
हर उलझन सुलझाती है बहना।
भाई का प्यार……॥

मुसीबत में एक दूसरे की दवा होते हैं दोनों,
एक दूसरे की खुशी के लिए,
हर मुसीबत भुला देते हैं दोनों।
चुलबुली सी बड़ी प्यारी लगती है बहना,
भाई का प्यार……॥

हर चीज पे भाई का हक जताती है बहना,
भाई से अलग होने की सोच,
आंखें नम कर लेती है बहना।
भाई का दर्द अपना कर,
सपना देखने की इजाजत देती है बहना।
भाई का प्यार……॥

फरियाद पूरी हो उम्मीदो की,
आंखों में चमक लिए खड़ी रहती है बहना।
भाई की कामयाबी पर बड़ी खुश होती है बहना,
राखी के धागे का प्यार निभाती है बहना।
भाई का प्यार …….॥

मुसीबत में भाई को पुकारती है बहना,
दोनो में ममतामई प्यार का है गहना।
दुनिया में ये रिश्ता होता है बड़ा गहरा,
ये ‘विजयलक्ष्मी’ का है कहना।
भाई का प्यार होती है बहना,
इनका प्यार दुनिया में सबसे मंहगा है गहना॥

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

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  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए; इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की हैं — रक्षाबंधन का त्योहार भाई बहन के पवित्र प्यार का प्रतिक है, जिसे राखी का त्योहार भी कहा जाता है। एक दूजे के चेहरे को देख मुसीबतें भाप लेते हैं, ऐसा होता है भाई बहन का रिश्ता। रक्षा बंधन पर बहन, भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसके दीर्घायु व सुखी जीवन की प्रार्थना करती है। इसके साथ ही बहन अपने भाई से अपनी सुरक्षा का वचन लेती है, की जीवन में जब भी उस पर कोई मुसीबत आएगा उसका भाई उसकी मदद के ली आ जायेगा। रक्षाबंधन हिन्दुओं का प्रमुख त्योहार है, जिसे पूरे भारत समेत अन्य देशों में भी मनाया जाता है।

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यह कविता (भाई बहन का प्यार।) “विजयलक्ष्मी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मेरा नाम विजयलक्ष्मी है। मैं राजकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय, छारा – 2, ब्लॉक – बहादुरगढ़, जिला – झज्जर, हरियाणा में मुख्य शिक्षिका पद पर कार्यरत हूँ। मैं पढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा, व समय-समय पर “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ” और भ्रूण हत्या पर Parents मीटिंग लेकर उनको समझाती हूँ। स्कूल शिक्षा में सुधार करते हुए बच्चों में मानसिक मजबूती को बढ़ावा देना। कोविड – 19 महामारी में भी बच्चों को व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाना, वीडियो और वर्क शीट बनाकर भेजना, प्रश्नोत्तरी कराना, बच्चों को साप्ताहिक प्रतियोगिता कराकर सर्टिफिकेट देना। Dance Classes प्रतियोगिता का Online आयोजन कराना। स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर कार्य करना। इन सभी कार्यों के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी द्वारा और कई Society द्वारा बार-बार सम्मानित किया गया।

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तपन।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ तपन। ♦

उसकी मुस्कान में तपन थी कितनी प्यारी सी,
भीड़ भरे जहां में लगने लगी फरिश्ता सी।

इक नई कशमकश से हम गुजरते रहे,
खिल गए फूल चमन में उनके प्यार की तपन से।

प्यार भरी बयार बहने लगी महक उठी फूलवारी तपन में,
उनके मधुर स्वरों से बह उठी सद्भावों की धाराएं सी।

तपन की अग्न लगे तो रोशन हो जाए संसार सारा,
लगने लगे माधव बंशी वाला प्यारा जब लग्न हो मीरा सी।

हर समस्या का हल निकलता है बुजुर्गो के अनुभवों से,
आचरणों को बल मिलता है संस्कारों की तपन से।

सोना जब कुंदन बन बाहर आता है आग की तपन से,
रत्न जड़ित आभूषणों में चार चांद लग जाते हैं तपन से।

भावों का उड़ता पंछी महके तपन में स्नेह की वर्षा से,
भारत धरा का कण-कण महके त्याग तपस्या के भावों से।

थोड़ा सा दुलार स्नेह उसे दो जिसका दुनिया में कोई नहीं,
जीवन औरों का भी संवार दो तुम स्नेह भरी तपन से।

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

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  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए; इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की हैं — भगवान महावीर स्वामी त्याग तपस्या और उनके गुणों के कारण आज भी हमारे बीच मौजूद हैं, या और भी जितने महापुरुषों को समझे तो सभी ने त्याग व तपस्या से जीवन में सफलता को बताया है। माया की चकाचौंध में हम प्रभु को भूल जाते हैं मनुष्य का मन बेलगाम है इसलिए मन पर संयम रखना बहुत जरूरी है। महापुरुषों में सबसे महत्वपूर्ण गुण मन पर नियंत्रण ही है। सच्चे मन से किये गए कार्य में जब त्याग व तपस्या का बल हो तो जीवन में सफलता जरूर मिलती हैं।

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यह कविता (तपन।) “विजयलक्ष्मी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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