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“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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vivek kumar poems

मिट्टी का दिया।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ मिट्टी का दिया। ♦

अरमानों की साज सजा लो,
हर घर को तुम सजा धजा लो।
अपने मन मंदिर में एक दीप जला लो,
सुकून का एक ज्योत जगा लो।
धैर्य का तुम आस जगा लो,
मिट्टी के तुम दिए जला लो।
मिट्टी के तुम दिए जला लो॥

त्याग का प्रतीक है दीप,
सत्य की मशाल है दीप।
खुद जलकर औरों को करता रौशन,
खुशहाली का राग है दीप।
दिलवालों का प्यार है दीप,
मन मंदिर में इसे बसा लो।
मिट्टी के तुम दिए जला लो॥

ईमानदारी का झंडा दो गाड़,
इसके लिए एक दीप जला लो।
भाईचारे की कर लो बात,
चुपके से एक दीप जला लो।
इंसानियत का जब हो भान,
इसके लिए भी दीप जला लो।
मिट्टी के तुम दिए जला लो॥

मन का तमस आज भगा लो,
भाग दौड़ भरी जिंदगी में,
सुकून के एक दीप जला लो,
संस्कारों को तुम अपना लो।
सुख शांति जीवन में आएं,
सबके लिए एक दीप जला लो।
मिट्टी के तुम दीए जला लो॥

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — संस्कारों का, धैर्य का, इंसानियत, ईमानदारी व भाईचारे के लिए भी एक ज्योत जगा लो। हम सब जानते है की सदैव से ही त्याग का प्रतीक है दीप और सत्य की मशाल है दीप। अपने मन मंदिर में एक दीप जला लो, सुकून का एक ज्योत जगा लो। मिट्टी के तुम दिए जला लो।

—————

यह कविता (मिट्टी का दिया।) “विवेक कुमार जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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सरदार वल्लभभाई पटेल।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ सरदार वल्लभभाई पटेल। ♦

सन 1857 में जन्म लिया,
किसान परिवार के घर का लाल।
चमत्कारी बालक था, भूपटल को किया निहाल,
अपना करतब दिखला राष्ट्र का किया कल्याण।

समाज सुधार का बीड़ा उठाकर,
किया देश का उद्धार।
जिन्हें जग पुकारता लौह पुरुष महान,
जिसकी महानता के हम करते गुणगान।

मिशाल देता जग समान,
राजनीति के प्रबुद्ध महान।
देश कर रहा उनका जयगान,
अग्रणी भूमिका निभा थामा था कमान।

बने देश के अभिमान,
जिसपर जनवासियों को है गुमान।
देशप्रेम की पराकाष्ठा है महान,
उस महात्मन को कोटिबद्ध प्रणाम।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — राष्ट्रीय एकता दिवस 2014 से हर साल 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभ भाई पटेल जी के जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। सरदार वल्लभ भाई पटेल जी के द्वारा देश की एकता के लिए किए गए योगदान को याद करते हुए राष्ट्रीय एकता दिवस हर भारतीय दिल से मनाता है। देश की एकता के लिए सरदार वल्लभ भाई पटेल जी के द्वारा किए गए कार्य को समझाया है।

—————

यह कविता (सरदार वल्लभभाई पटेल।) “विवेक कुमार जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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