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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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कविता हिंदी में

बात वक्त की।

Kmsraj51 की कलम से…..

Baat Waqt Ki | बात वक्त की।

ये लगे हैं बुझाने लौ चिरागों की जलने से पहले ही,
फिर मचा रहे हैं शोर कि चिराग जलते क्यों नहीं हैं?
अंधेरा तो छटा नहीं फिर चिरागों का क्या फायदा?
पर हिम्मत तो देखिए इनकी साहब!
हर अमावस को करते हैं पूनम का वायदा।

क्या फायदा दीवारें खड़ी करने से,
तूफान आ जाने के बाद।
अब समेटने का नाटक कर रहे हैं,
जब आंधियां सब उड़ाकर ले गई।

यूं नहीं कहते हैं बुजुर्ग ,
कि नालियां साफ आसमा में निकाला करो।
बेकार है कुरेदना उन्हें भारी बरसात आने के बाद।
उर्वरकों से फैलते, फलते – फूलते हैं पौधे सभी,
पर कुछ भी असर नहीं करती है बेमौसमी खाद।

हर बात वक्त की ही होती है अच्छी साहब,
बेवक्ता तो भोजन भी जहर बन जाता है।
आज का दौर हो गया है कुछ ऐसा हजूर,
अपना अजीज भी मौके पर जहर उगलवाता है।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता समय की महत्ता और अवसर चूकने के दुष्परिणामों पर केंद्रित है। कवि उन लोगों की आलोचना करते हैं जो समस्याओं को समय रहते हल करने के बजाय पहले ही उम्मीदों की लौ बुझा देते हैं और बाद में शोर मचाते हैं कि प्रकाश क्यों नहीं हुआ।

    कवि बताते हैं कि जब अंधेरा छंटा ही नहीं, तो चिराग जलाने का लाभ भी नहीं मिलता, फिर भी लोग हर अमावस्या को पूर्णिमा का वादा करते रहते हैं। यह उन झूठे आश्वासनों का प्रतीक है जो बिना वास्तविक प्रयास के दिए जाते हैं।

    आगे कविता समझाती है कि तूफान के बाद दीवारें खड़ी करना या बाढ़ के बाद नालियां साफ करना व्यर्थ है। अर्थात, काम हमेशा सही समय पर ही प्रभावी होता है; देर से किया गया प्रयास अक्सर निष्फल रहता है।

    कवि यह भी कहते हैं कि हर कार्य का अपना उचित समय होता है—जैसे बेमौसम खाद का पौधों पर असर नहीं होता, वैसे ही अनुचित समय पर किया गया कार्य परिणाम नहीं देता।

    अंततः कविता वर्तमान समाज की विडंबना दिखाती है कि समय पर साथ देने के बजाय अपने ही लोग अवसर आने पर हानि पहुंचाते हैं। संदेश यह है कि जीवन में सफलता और संबंधों की स्थिरता के लिए समय की समझ, सही निर्णय और समय पर कार्य करना अत्यंत आवश्यक है।

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यह कविता (बात वक्त की।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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बाल विवाह – एक अभिशाप।

Kmsraj51 की कलम से…..

Baal Vivaah Ek Abhishaap | बाल विवाह – एक अभिशाप।

बाल विवाह के खिलाफ कविता | बेटी की आवाज़, समाज के नाम संदेश

“बेटी बोझ नहीं, भविष्य है — उसे सपने पूरे करने का अधिकार दो।”

बेटी ने पूछा बापू से —
“इतनी ब्याह की क्या जल्दी?”
थोड़ी तो बढ़ जाने दो,
अभी तो मैं नादान हूँ,
थोड़ी तो ढल जाने दो।
अनजान डगर पर चलने से पहले,
जीवन को तो समझ लेने दो।

अभी तो बचपन भी न जिया,
थोड़ा तो जी जाने दो।
खेलों की किलकारी बाकी है,
किताबों से दोस्ती बाकी है,
सपनों की उड़ान अधूरी है,
आँखों में आस अभी बाकी है।

माँग में सिंदूर भरने से पहले,
हाथों में कलम थमा लेने दो,
घर की ज़िम्मेदारी से पहले,
मुझे खुद को पहचान लेने दो।

मैं बोझ नहीं, उम्मीद हूँ पापा,
कल का उजाला हूँ पापा,
आज अगर मुरझा दी गई,
तो कैसे खिल पाऊँ पापा?

कुड़वी रस्मों की बेड़ियाँ,
मेरे पाँव से हटा लेने दो,
बेटी हूँ, इंसान हूँ मैं,
मुझे भी जीने का हक़ दो पापा।

जो आज पढ़ेगी, वही कल
घर को रोशन करेगी,
अधपकी उम्र में ब्याही गई
किस्मत से ही हारेगी।

इस अभिशाप से समाज को
आज ही बचा लेने दो,
बेटी को बेटी रहने दो,
उसे जबरन बहू मत बन जाने दो।

बापू, मेरी एक बात सुन लो —
ये परंपरा नहीं, अपराध है,
जो कलियों को रौंद दे,
वो संस्कृति नहीं, अभिशाप है।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता बेटी की पीड़ा, चेतना और अधिकारों की सशक्त अभिव्यक्ति है। बेटी अपने पिता से कम उम्र में विवाह न करने की विनती करती है और कहती है कि वह अभी जीवन, शिक्षा और अपने सपनों को समझना चाहती है। वह बताती है कि बचपन, खेल, पढ़ाई और आत्म-परिचय अभी अधूरे हैं, जिन्हें पूरा करने का उसे अवसर मिलना चाहिए।

    कविता में बेटी स्वयं को बोझ नहीं, बल्कि भविष्य की उम्मीद और उजाले के रूप में प्रस्तुत करती है। वह समाज की कड़वी परंपराओं और बाल विवाह जैसी प्रथाओं को अपराध और अभिशाप बताती है। कवि का संदेश स्पष्ट है कि बेटी को पढ़ने, जीने और स्वयं निर्णय लेने का अधिकार मिलना चाहिए, क्योंकि शिक्षित बेटी ही परिवार और समाज को उज्ज्वल बना सकती है।

—————

यह कविता (बाल विवाह – एक अभिशाप।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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बज गया जीत का डंका।

Kmsraj51 की कलम से…..

Baj Gaya Jeet Ka Danka | बज गया जीत का डंका।

In that period a savior emerged from Madwan, the drowning man found a straw and the boat crossed the sea. The trumpet of victory was sounded.

बज गया, आज जीत का डंका,
जलने वाली है, भ्रष्टाचार की लंका।
फिर हुआ कलयुग में कृष्णावतार,
बंशी की धुन से तिरहुत का हुआ नैया पार।
शिक्षकों की बात अब सड़क से सदन तक,
पहुंचाने आए सूबे के कर्णधार रखकर सबकुछ ताक।

जीत नहीं स्वाभिमान की जंग छिड़ी है,
जुल्म ढाने वालों की होनी किरकिरी है।
कहा जाता शिक्षक समाज का दर्पण होता,
मगर यहां उसे ही है सताया जाता।
याद कीजिए वो दिन जब हम शिक्षामित्र हुआ करते थे,
वेतन के लिए मुखिया जी की जी हुजूरी किया करते थे।

उस दौर में उदय हुआ मड़वन से एक तारणहार,
डूबते को मिला तिनके का साथ हुआ बेड़ा पार।
शिक्षामित्र से नियोजित बने लिए हाथ में हाथ,
संघर्ष का कारवां आगे बढ़ा।
जुझारू अग्रदर्शी बंशी की बजी धुन,
मिला चाइनीज वेतनमान ताना बाना बुन।

जिसके बारे में सोचा न था उसे दिलाया,
शिक्षकों को वेतनमान का स्वाद चखाया।
पूर्ण वेतनमान की चली लंबी लड़ाई के थे सूत्रधार,
मोगैंबो के खौफ से सब थे सन्न लगाई दहाड़ पाया पार।
विखंडित शिक्षक समाज को लाया एक मंच,
शिक्षकों की एकता पर जिसने कसा तंज,
बंशीधर का पड़ा उसपर तगड़ा पंच।

ये मात्र जीत नहीं आगाज है,
अभी तो शुरुआत है अंजाम का इंतजार है।
ये जीत नहीं मिशाल है आलाधिकारियों के लिए काल है,
बज गया आज जीत का डंका,
जलने वाली है भ्रष्टाचार की लंका।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

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• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है —कविता में शिक्षक समाज के संघर्ष और उनकी जीत का वर्णन किया गया है। भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ लड़ाई को रावण की लंका के जलने से तुलना की गई है। शिक्षक समुदाय को जागरूक और संगठित करने में एक नेता, जिसे “मड़वन से तारणहार” कहा गया है, की भूमिका महत्वपूर्ण मानी गई है। इस संघर्ष में शिक्षकों को उनकी मेहनत का उचित वेतनमान और सम्मान दिलाने की दिशा में कई सफलताएं हासिल की गईं। कविता शिक्षक समुदाय की एकता, उनकी संघर्षशीलता और उनके अधिकारों की प्राप्ति की कहानी बयां करती है। यह जीत सिर्फ एक शुरुआत है, और इसे अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक बताया गया है। कविता अंततः यह संदेश देती है कि शिक्षक समाज जब संगठित होकर प्रयास करता है, तो वह बदलाव और जीत का परचम लहरा सकता है।

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यह कविता (बज गया जीत का डंका।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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बरसात का मौसम।

Kmsraj51 की कलम से…..

Rainy Season | Barasat Ka Mausam | बरसात का मौसम।

'rainy season', describing the arrival of the rainy season and its effects. The rain showers bring greenery all around and the clouds start touching the ground.

वर्षा की बौछारें अब लगी है आने।
चहुँ ओर हरियाली सी लगी है छाने॥

बादल मानों जमीं को लगे है छुने।
झमाझम वर्षा अब लगी है होने॥

किसान खेतों में फसल लगे हैं बोने।
धान की रोपाई भी लगी है होने॥

बच्चे भी छुट्टियों का आनंद लगे हैं लेने।
सुबह शाम पढ़ाई करते दिन भर अनेकों खेल खेले॥

वर्षा की फुहारें जब भी लगे पड़ने।
मोर भी नाच कर स्वागत लगे हैं करने॥

वर्षा ऋतु में पानी भी होने लगता है प्रदूषित।
छानकर व उबाल कर पीने से फायदे हैं अदभुत॥

हैजा, पेचिस व मलेरिया फैलाते हैं अपना जाल।
सावधानी न बरतने पर कर देते हैं बेहाल॥

नदी नालों के पास जाने से बचें।
तभी तो बरसात के दिन निकलेगें अच्छे॥

♦ विनोद वर्मा जी / जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता ‘बरसात का मौसम’ के बारे में है, जिसमें वर्षा ऋतु के आगमन और इसके प्रभावों का वर्णन किया गया है। वर्षा की बौछारों से चारों ओर हरियाली छा जाती है और बादल ज़मीन को छूने लगते हैं। किसान खेतों में फसलें बोने लगते हैं, विशेषकर धान की रोपाई की जाती है। बच्चे छुट्टियों का आनंद लेते हैं, दिन भर खेलते हैं और सुबह-शाम पढ़ाई करते हैं। मोर भी बारिश की फुहारों का स्वागत नाच कर करते हैं। हालांकि, वर्षा ऋतु में पानी प्रदूषित हो जाता है, इसलिए उसे छानकर और उबालकर पीना चाहिए। इसके अलावा, हैजा, पेचिस और मलेरिया जैसी बीमारियाँ फैलती हैं, जिससे सावधानी न बरतने पर लोग परेशान हो सकते हैं। अंत में, कवि सलाह देते हैं कि नदी-नालों के पास जाने से बचना चाहिए ताकि बरसात के दिन अच्छे से बिताए जा सकें।

—————

यह कविता (बरसात का मौसम।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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अमृत महोत्सव।

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Amrit Mahotsav | अमृत महोत्सव।

राष्ट्रधर्म का गौरव प्यारा, आज हम हैं देखो बढ़ाने चले।
आजादी का प्रतीक तिरंगा, आज घर -घर में हैं फहराने चले।

उत्तुंग शिखर हिमालय से लेकर, हिन्द महासागर तक फैला है।
अरुणाचल से गुजरात कच्छ तक, यह भारत देश ही फैला है।

दसों दिशाएं आलोकित जिसकी, है वीरता जिसके जर्रे- जर्रे में।
पुरुषार्थ छिपा है राष्ट्रप्रेम का, यहां जीवन यापन के हर ढर्रे में।

तिरंगा है यह खिलौना नहीं, हर रंग का लहदा भाव निराला है।
शौर्य, वीरता, शान्ति, समृद्धि, मध्य चक्र प्रतीक समय का डाला है।

वीर बलिदानियों की कुर्बानी की कहानी, तिरंगा याद दिलाता है।
इतिहास पढ़ा देता है वह बंदा, जो घर – घर तिरंगा फहराता है।

आजादी के दीवानों ने प्रणाहुतियों से, यज्ञ को सफल बनाया था।
गुलामी की बेडौल जंजीरों से, भारत को आजाद करवाया था।

इसे संभालना, जश्न मनाना, अब तो हमारे ही हिस्से में आया है।
मिलजुल कर देश को बढ़ाने का, गुर पुरखों ने हमें सिखाया है।

आजादी के अमृत महोत्सव की, पावन बेला भारत में आई है।
बच्चे से बूढ़े, अमीर – गरीब ने, यह बेला सबने ही तो मनाई हैं।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कविता में भारत की भूगोलिक विशालता को हिमालय से लेकर हिन्द महासागर तक का संकेत दिया गया है, और अरुणाचल से लेकर गुजरात-कच्छ तक का भारतीय देश का विस्तार दिखाया गया है। कविता में दिशाओं की प्रकारों को प्रकाशित करते हुए यह कहा गया है कि वीरता हर जगह है, और राष्ट्रप्रेम की भावना हर व्यक्ति के जीवन में छिपी होती है। तिरंगे को खिलौना नहीं मानने के साथ ही, इसके हर रंग के पीछे भावनाओं की गहराई दिखाई गई है। यह शौर्य, वीरता, शान्ति, समृद्धि को प्रतिष्ठित करता है और समय के चक्र का प्रतीक होता है। कविता में वीर बलिदानियों की कहानी और उनकी कुर्बानियों का स्मरण कराया गया है, और तिरंगे के द्वारा उनकी यादें ताजगी देती है। जो व्यक्ति अपने घर में तिरंगा फहराता है, वह इतिहास को पढ़ता है और विशेष बनता है। कविता में स्वतंत्रता संग्राम के दीवानों ने यज्ञ को सफलता प्राप्त की थी, और उन्होंने गुलामी की बेडौल जंजीरों को तोड़कर भारत को आजादी दिलाई थी। कविता में इसे संभालने और मनाने की जिम्मेदारी को उठाने की बात की गई है, और गुरु पुरुषों द्वारा दिए गए सिखाने के उपदेश का उल्लेख किया गया है। कविता आजादी के अमृत महोत्सव की पवित्र अवधि का स्वागत करती है, जिसमें बच्चे से बूढ़े, अमीर से गरीब, सभी ने इस महत्वपूर्ण घटना का आयोजन किया है।

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यह कविता (अमृत महोत्सव।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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कहानी पूर्वोत्तर की।

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Story of Northeast | कहानी पूर्वोत्तर की।

पूर्वोत्तर के जवानों को देखो, क्या से क्या होने आए हैं?
जिन हाथों में किताबें होनी थी, उन्होंने हथियार उठाए हैं।

यह समुदायों की जाति दुश्मनी है, या किसी ने ये लड़ाए हैं?
बेखौफ दरिंदगी दिखाते हैं, निर्वस्त्र घुमाई जाती बेटी मांएं हैं।

सीमा गांव की सरहद बनी है, गभरु हिफाजत में लगाए हैं।
आगजनी और मारधाड़ ने, नागा, मैतेई, कूकी सभी डराए हैं।

दहशत है चारों ओर वहां पर, सुख – चैन सभी का छीना है।
ऐसे भयावह वातावरण में, बड़ा मुश्किल किसी का जीना है।

यहां सियासत घनी है, वहां आक्रोशित बेबस आगजनी है।
मीडिया में नीरे सवाल उठे हैं, आखिर सरकारें क्यों बनी है?

इस्तीफे की मांग है, पक्ष – विपक्ष में हो रही है बस थिपाथोपी।
झुलसती हमेशा जनता है, सियासतदान तो सेंकेंगे ही रोटी।

यह आज नहीं कई बार हुआ है, हर राज में होता आया है।
इतिहास गवाह है, दो के झगड़े में, तीसरे ने लाभ उठाया है।

आओ मिलकर बैठे हम सब, प्यार प्रेम से बात सुलझाते हैं।
सम्पत्ति विवाद में औरों को घुसाना, वे तो बात उलझाते हैं।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — मणिपुर में मुख्य रूप से मैतई, कुकी और नगा जाति रहते हैं। नगा और कुकी को पहले से ही आदिवासी का दर्जा मिला हुआ है, लेकिन 1949 में मैतेई से यह दर्जा छीन लिया गया था। इसके बाद से ही मैतेई समुदाय के लोग इसकी मांग कर रहे थे। जिसे लेकर दोनों समुदायों के बीच हिंसक झड़प हो रही है। यह आज नहीं कई बार हुआ है, हर राज में होता आया है। इतिहास गवाह है, दो के झगड़े में, तीसरे ने लाभ उठाया है। आओ मिलकर बैठे हम सब, प्यार प्रेम से बात सुलझाते हैं, सम्पत्ति विवाद में औरों को घुसाना, वे तो बात उलझाते हैं।

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यह कविता (कहानी पूर्वोत्तर की।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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आफता औली बरखा।

Kmsraj51 की कलम से…..

Afta Auli Barkha | आफता औली बरखा।

घरा रेयो जुगती ने,
राती दहां सौंदे दुबकी ने,
रहयो थोड़े से चुस्त,
नही ता बड़ा कुछ पई जाना पौने पुगत।

अंबरा ते बरने लगीरी आफत,
रूड़ने लगीरे सा बरखा ते।
डाल रुख कन्ने फाट,
कल्ले दहाँ जांदे किती खा जो,
कने जरूर लई जाएंओ अपने जागत।

एबकी बार पता नी क्या सोचीरा परमेसरे,
एड़ा दड़ा दड़ लाइरा बरखा रा दड़कया,
एड़ा लगीरा तियां जे एकी कडछियां,
बाटिए देने सारे निपटा।

कर रहम ओ परमेसर हूण,
तेरे सारे बच्चे, तेरी रची री सृष्टि सारी।
कैं लाईरे तरसाने तैं हूण,
करी दो ए आफता औली बरखा बंद हूण।
सब लोक रहो सुखी फेरी,
तायीं गाने सारेयां लोका तेरे गुण।

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — ये बदरा तेज कड़क-कड़क कर बिजली तड़कने के साथ जोरदार मूसलाधार बारिश से तबाही मचा है सब ओर। ये जो आफत की बारिश आयी है चारों तरफ पानी ही पानी भरा है तेज वर्षा के कारण हे प्रभु अब इसे बंद करो तुम पर ही हम सबको विश्वास है। हम जानते है की ये मानवों के कुकर्मों और प्रकृति से खिलवाल का ही नतीज़ा है। तेज मूसलाधार वर्षा से पूरा जलमग्न हो गया ये पहाड़ी प्रदेश, सभी दुखी व परेशान है। हमसब तेरे ही बच्चें है प्रभु हम पर रहम करो और अब इस तेज वर्षा को बंद करो प्रभु, जिससे जनजीवन सामान्य हो सके।

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यह कविता (आफता औली बरखा।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, लघु कथा, सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल है। साहित्यिक नाम — डॉ• जय अनजान है। माता का नाम — श्रीमती कमला देवी महलवाल और पिता का नाम — श्री सुंदर राम महलवाल है। शिक्षा — पी• एच• डी•(गणित), एम• फिल•, बी• एड•। व्यवसाय — सहायक प्रोफेसर। धर्म पत्नी — श्रीमती संतोष महलवाल और संतान – शानवी एवम् रिशित।

  • रुचियां — लेखक, समीक्षक, आलोचक, लघुकथा, फीचर डेस्क, भ्रमण, कथाकार, व्यंग्यात्मक लेख।
  • लेखन भाषाएं — हिंदी, पहाड़ी (कहलूरी, कांगड़ी, मंडयाली) अंग्रेजी।
  • लिखित रचनाएं — हिंदी(50), पहाड़ी(50), अंग्रेजी(10)।
  • प्रेरणा स्त्रोत — माता एवम हालात।
  • पदभार निर्वहन — कार्यकारिणी सदस्य कल्याण कला मंच बिलासपुर, लेखक संघ बिलासपुर, सह सचिव राष्ट्रीय कवि संगम बिलासपुर इकाई, ज्वाइंट फाइनेंस सेक्रेटरी हिमाचल मलखंभ एसोसिएशन, सदस्य मंजूषा सहायता केंद्र।
  • सम्मान प्राप्त — श्रेष्ठ रचनाकार(देवभूमि हिम साहित्य मंच) — 2022
  • कल्याण शरद शिरोमणि सम्मान(कल्याण कला मंच) — 2022
  • काले बाबा उत्कृष्ट लेखक सम्मान — 2022
  • व्यास गौरव सम्मान — 2022
  • रक्त सेवा सम्मान (नेहा मानव सोसायटी)।
  • शारदा साहित्य संगम सम्मान — 2022
  • विशेष — 17 बार रक्तदान।
  • देश, प्रदेश के अग्रणी समाचार पत्रों एवम पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।

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क्या भरोसा।

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Kya Bharosa | क्या भरोसा।

मानव मानव को मार सकता है,
मानव मानव का नरसंहार कर सकता है।
मानव मानव को डुबो सकता है,
पर मानव मानव का बेड़ा सिर्फ,
ऊपर वाला ही पार कर सकता है।

देख हालात हिमाचल के,
जय क्यों तू इतना इतराता है।
क्या भरोसा है इस जीवन का,
सिर्फ ऊपर वाला ही जाने,
इन सांसों के पल पल का कितना नाता है।

सच में ही यह कलयुग है,
जो सोचा ही नहीं अब वह हो सकता है।
किसने सोचा था हमारा पहाड़ी राज्य भी,
एक दिन जलमग्न हो सकता है।

जय भी कर रहा अरदास प्रभु से दिन-रात,
अब तू ही हमको बचा सकता है।
डर के मारे दिन रात सहम रहे अब लोग,
प्रकृति की भयंकर मार को,
अब सहन नहीं कर पा रहे लोग।
अब सिर्फ तुझ पर ही है एक भरोसा,
तू ही डर को भगाकर ,
अच्छे दिन ला सकता है अच्छे दिन ला सकता है।

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — सच में ही यह घनघोर कलयुग है, जो सोचा ही नहीं था अब वह हो रहा है, किसने सोचा था हमारा पहाड़ी राज्य हिमाचल भी एक दिन जलमग्न हो सकता है। आखिर मानव ने जो प्रकृति से छेड़छाड़ की उसका दंड तो मिलना ही था उसे किसी न किसी आपदा रूप में, कर्म का फल तो मिलेगा ही। अब तो केवल प्रभु पर ही विश्वास है हम सबको अरदास प्रभु से दिन-रात करते हमसब अब तू ही हमको बचा सकता है। डर के मारे दिन रात सहम रहे अब लोग। प्रकृति की भयंकर मार को अब सहन नहीं कर पा रहे लोग। अब सिर्फ तुझ पर ही है एक भरोसा, तू ही डर को भगाकर, अच्छे दिन ला सकता है प्रभु।

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यह कविता (क्या भरोसा।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, लघु कथा, सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल है। साहित्यिक नाम — डॉ• जय अनजान है। माता का नाम — श्रीमती कमला देवी महलवाल और पिता का नाम — श्री सुंदर राम महलवाल है। शिक्षा — पी• एच• डी•(गणित), एम• फिल•, बी• एड•। व्यवसाय — सहायक प्रोफेसर। धर्म पत्नी — श्रीमती संतोष महलवाल और संतान – शानवी एवम् रिशित।

  • रुचियां — लेखक, समीक्षक, आलोचक, लघुकथा, फीचर डेस्क, भ्रमण, कथाकार, व्यंग्यात्मक लेख।
  • लेखन भाषाएं — हिंदी, पहाड़ी (कहलूरी, कांगड़ी, मंडयाली) अंग्रेजी।
  • लिखित रचनाएं — हिंदी(50), पहाड़ी(50), अंग्रेजी(10)।
  • प्रेरणा स्त्रोत — माता एवम हालात।
  • पदभार निर्वहन — कार्यकारिणी सदस्य कल्याण कला मंच बिलासपुर, लेखक संघ बिलासपुर, सह सचिव राष्ट्रीय कवि संगम बिलासपुर इकाई, ज्वाइंट फाइनेंस सेक्रेटरी हिमाचल मलखंभ एसोसिएशन, सदस्य मंजूषा सहायता केंद्र।
  • सम्मान प्राप्त — श्रेष्ठ रचनाकार(देवभूमि हिम साहित्य मंच) — 2022
  • कल्याण शरद शिरोमणि सम्मान(कल्याण कला मंच) — 2022
  • काले बाबा उत्कृष्ट लेखक सम्मान — 2022
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  • शारदा साहित्य संगम सम्मान — 2022
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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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डिजिटल जमाना।

Kmsraj51 की कलम से…..

Digital Era | डिजिटल जमाना।

अब डिजिटल जमाना हो गया,
सब कुछ फोन में ही खो गया।

सुबह से शाम तक, दिन से रात तक,
चाय की चुस्की से लेकर,
रात के खाने की बात तक।

अब फोन साथी हमारा प्यारा हो गया,
इसने न जाने कितनों का चैन खोया,
इसे देखते रहने की चाह में दिन-रैन रोया।

क्या करे, हम सब की एक मजबूरी,
फोन से ही सारे काम आसान हो गये,
माना कि फोन बहुत ही जरूरी है।

इसके बिना जिन्दगी अधूरी है,
पर इसको अपनी उँगलियों पर नचाना है।

बनानी इक दूरी है, क्योंकि…
अधिकता हर चीज की बुरी है।

समय की जरूरत है,
चलना है समय के साथ,
पर इसके इशारों पर चले,
ना बाँधों इतने, अपने हाथ।

सोचो इसके साथ रहते हमने,
कितना खोया, कितना पाया है।

फोन की तलब लगी इतनी,
फोन हमें किस मोड़ पर ले आया है।

अब डिजिटल जमाना हो गया,
सब कुछ फोन में ही खो गया।

फन्नी वीडियो देखकर,
अब हँसी नहीं, चिंता होती है।

फोन के साथ रहते,
दूसरे कामों की क्या दुर्दशा होती है।

माँ फोन करती-2 जब,
अपने बच्चे को ही उल्टा
लटका कर पकड़ती है।

अब सोचो! मंथन करो,
उस मासूम बच्चे की
जुबां से क्या दुआ निकलती है।

न खाने-पीने की,
ना जागने सोने की खबर।

जहाँ देखों वही पर,
इसके ज्यादा दुष्प्रभावों की नजर।

हाय रे !
डिजीटल होने की दौड़ ने,
हमें कहाँ लाकर छोड़ा है।

नांदान बच्चे सीखें ना जाने क्या क्या,
इसके अच्छे गुणों से मुँह मोड़ा हैं।

अंत में रखना ध्यान इक छोटी सी बात,
चाहें फोन का दिन-रात रखो साथ।

इसमें कभी इतना ना होना व्यस्त,
कि छूट जाएँ अनमोल रिश्तों का हाथ।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — आधुनिकता और डिजिटल उपकरण, स्मार्टफोन इत्यादि का उपयोग अच्छे कार्यों के लिए ही करें, याद रखें — डिजिटल उपकरण के कही आप या आपके बच्चें गुलाम ना बन जाए। माना की डिजिटल उपकरण, स्मार्टफोन इत्यादि जरुरी है लेकिन इनका दुरुपयोग करना ठीक नहीं है। सोचने और जानने की शक्ति प्रभावित करता है स्मार्टफोन, बच्चों में किसी चीज़ को सीखने की ललक बहुत ज्यादा होती है, तो अधिक जिज्ञासा के कारण वह गलत चीज़ें भी सीख सकते हैं। इसके अलावा मेंटल हेल्थ पर भी नकारात्मक प्रभाव होता है अवसाद, नींद पूरी न होना जैसी समस्या होती है। बच्चें मोबाइल का प्रयोग जितना कम समय के लिए करेंगे उतना बेहतर है। स्मार्टफोन के प्रयोग से आजकल के बच्चें ज्यादा गुस्से वाले व चिड़चिड़े हो गए है।

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यह कविता (डिजिटल जमाना।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
    {International Internship University and Swarn Bharat Parivar}
  • Teacher’s Icon Award — 2023
  • राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान — 2021
  • सावित्रीबाई फुले ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड — 2022
  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शक्ति संचेतना अवार्ड — 2022
  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
  • 50 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित (राष्ट्रीय स्तर पर)।
  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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निर्जीव से मोह।

Kmsraj51 की कलम से…..

Nirjeev Se Moh | निर्जीव से मोह।

समय की जरूरतों के हिसाब से,
एक निर्जीव चीज ने हर घर में,
प्रवेश ले लिया।

कुछ न होते हुए भी वो,
वो सब कुछ बन गया वो,
ऐसा मोहपाश दे दिया।

खा गया जो लोगों की भूख – प्यास,
अपनों से मिलने का प्यारा अहसास,
खुद से रिश्ता खास दे गया।

अखबार की उस खबर ने खो दिया होश,
जिसमें प्यारी बहना को भाई ने भर कर जोश,
मौत का ग्रास दे गया।

ये यंत्र जो आजकल की दुनिया पर हुआ भारी,
हर व्यक्ति को लगी इसकी भयानक बीमारी,
अपना नाम हर श्वास पर दे गया।

माना कि आधुनिकता की दौड़ में,
जरुरत इसकी जिंदगी के हर मोड़ पे,
ऐसा ये जोकर का ताश दे गया।

हम सजीवों पर क्यों हो रहा है इसका पहरा,
क्यों ज्यादा वक्त दिल निर्जीव मोबाइल पर ही ठहरा,
ये तन~मन का नाश दे गया।

निर्जीव को निर्जीव ही रहने दे हम,
प्यार सजीव रिश्तों से होने न पाए कम,
सजीवो से प्रेम ही जीने की आस दे गया।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — जो जिवंत (सजीव) है प्यार उससे कभी भी कम ना हो ऐसा आदत होना चाहिए सदैव ही हम सबका। निर्जीव से मोह ठीक नही है, निर्जीव का उपयोग मात्र जरूरत तक ही सीमित रखें, निर्जीव के गुलाम ना बन जाये। आधुनिक युग में किसी भी टेक्नोलॉजी का उपयोग केवल अच्छे कार्य को करने के लिए करे। उसका कभी भी शैतानो की तरह दुरुपयोग ना करो। याद रखें – हर निर्जीव वस्तु के फायदे है तो उनसे नुकसान भी है, आप केवल फायदे के लिए सही तरीके से उपयोग करें, उसके गुलाम बनकर शैतान की तरह काम मत करो। इन निर्जीव वस्तुओं की वजह से आपसी प्रेम कम ना हो।

—————

यह कविता (निर्जीव से मोह।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
    {International Internship University and Swarn Bharat Parivar}
  • Teacher’s Icon Award — 2023
  • राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान — 2021
  • सावित्रीबाई फुले ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड — 2022
  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शक्ति संचेतना अवार्ड — 2022
  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
  • 50 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित (राष्ट्रीय स्तर पर)।
  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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