• Skip to main content
  • Skip to primary sidebar
  • Skip to footer
  • HOME
  • ABOUT
    • Authors Intro
  • QUOTES
  • POETRY
    • ग़ज़ल व शायरी
  • STORIES
  • निबंध व जीवनी
  • Health Tips
  • CAREER DEVELOPMENT
  • EXAM TIPS
  • योग व ध्यान
  • Privacy Policy
  • CONTACT US
  • Disclaimer

KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

Check out Namecheap’s best Promotions!

You are here: Home / Archives for विनोद वर्मा जी की कविताएं

विनोद वर्मा जी की कविताएं

मोह।

Kmsraj51 की कलम से…..

Moh | मोह।

“मोह से मुक्ति ही सच्चे सुख और शांति का मार्ग है।”

मोह और भ्रम पर कविता | सुख–दुःख का कारण बना मोह

मोह भ्रम है पालता
खोने का डर है दिखाता ।
हर वक्त करीब करीब रहते
कहीं खो न जाए बस यही है कहते।

सबसे दूर हो जाते
पर मन की चाह पर काबू नहीं पाते।
डरावना सा मुहाल बना रहता
दूरी बढ़े तो खोने का डर है लगता।

जिसकी चाह मन में पालते
बस उसी के साथ की तमन्ना जताते।
विवेक बस में नहीं हो पाता
वही दुःख का कारण बन जाता।

मन स्वार्थ से भरा होता
फिर क्या चिंता और बेचैनी ही पाता।

मोह जहां जहां है पलता
वहीं गलतफहमियों का जन्म है होता।
इस जाल से बाहर जो है निकलता
उसका जीवन ख़ुशी ख़ुशी है बीतता।

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

मोह कैसे दुःख का कारण बनता है

जब किसी एक व्यक्ति या भावना से अत्यधिक जुड़ाव हो जाता है, तब दूरी असहनीय लगने लगती है। यही आसक्ति मानसिक तनाव और रिश्तों में टकराव को जन्म देती है।

—————

  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में मोह  को एक भ्रम के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो मन में किसी को खो देने का निरंतर भय पैदा करता है। व्यक्ति हर समय अपने प्रिय के पास रहना चाहता है और दूरी बढ़ने पर बेचैनी व असुरक्षा महसूस करता है। चाह इतनी प्रबल हो जाती है कि विवेक पर नियंत्रण नहीं रह पाता और वही चाह आगे चलकर दुःख का कारण बनती है।

    कविता यह भी बताती है कि मोह स्वार्थ को जन्म देता है, जिससे चिंता, डर और मानसिक अशांति बढ़ती है। जहां मोह पनपता है, वहीं गलतफहमियाँ जन्म लेती हैं और रिश्तों में तनाव आता है। अंत में कवि संदेश देता है कि जो व्यक्ति इस मोह-जाल से मुक्त हो जाता है, उसका जीवन शांत, संतुलित और प्रसन्नता से भर जाता है।

    👉 कविता में मोह को भ्रम और दुःख का कारण बताया गया है। मोह से खोने का डर, चिंता और गलतफहमियाँ जन्म लेती हैं। विवेक कमजोर पड़ जाता है और मन अशांत रहता है। जो व्यक्ति मोह से मुक्त हो जाता है, उसका जीवन सुख और शांति से भर जाता है।

    👉 मोह को समझना और उससे ऊपर उठना ही सच्चे सुख की कुंजी है। यह कविता हमें भावनाओं पर नियंत्रण और विवेकपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा देती है।          👉 मोह मनुष्य के जीवन में सबसे सूक्ष्म लेकिन प्रभावशाली भावनाओं में से एक है। यह प्रेम के रूप में प्रवेश करता है, लेकिन धीरे-धीरे भय, स्वार्थ और मानसिक अशांति का कारण बन जाता है। यह कविता मोह के इसी भ्रम और उससे मुक्ति के आध्यात्मिक संदेश को सरल शब्दों में प्रस्तुत करती है।

—————

यह कविता (मोह।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free!!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ® ———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari Etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____

Filed Under: 2025 - KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: Vinod Verma, vinod verma poems, आत्मबोध, आत्मबोध कविता, आध्यात्मिक कविता, आध्यात्मिक हिंदी कविता, गलतफहमियाँ, जीवन दर्शन, जीवन दर्शन कविता, जीवन दर्शन हिंदी कविता, दुःख और सुख, भावनात्मक हिंदी कविता, भ्रम, भ्रम पर कविता, भ्रम पर हिंदी कविता, मन और भावनाएँ, मानसिक शांति, मानसिक शांति कविता, मोह, मोह और दुःख, मोह पर कविता, विनोद वर्मा, विनोद वर्मा जी की कविताएं, हिंदी कविता

दीपों का त्योहार।

Kmsraj51 की कलम से…..

Festival of Lights | दीपों का त्योहार।

दीपों का त्योहार दीपावली है आई
सबके मन में खुशियां है छाई।
घर को रंग रोगन कर होती है तैयारी
इससे घर की शोभा लगती है न्यारी।

दो दिन पहले धनतेरस है आती
कोई नई वस्तु भी खरीदी है जाती।
मिट्टी के दीपक सबको है भाते
जगमग जगमग जलकर घर की शोभा है बढ़ाते।

पटाखे फूलझड़ियां व आतिशबाजी खूब है चलते
आसमान को रंग बिरंगी रोशनी से है भरते।
रिश्तेदार व मित्रों को मेहमान है बुलाते
मिलजुलकर खुशियां खूब है मनाते।

घर पर पारम्परिक पकवान है बनाते
मिठाईयां भी एक दूसरे को खूब है बांटते।
दिनभर बधाई संदेशों का आना जाना लगा रहता
कोई हैपी दिवाली तो कोई शुभ दीपावली है कहता।

रात को मां लक्ष्मी की पूजा भी है होती
जलती रहती है मां की अखंड ज्योति।
भगवान् राम चौदह वर्ष बाद अयोध्या लौटे थे आज
उनकी पितृ भक्ति और भातृ प्रेम पर हमें है नाज़।

रात का दृश्य बड़ा मनमोहक है लगता
घर, गांव, शहर दुल्हन सा है सजता।
खुशियों का त्योहार है खूब खुशियां मनाओ
आपसी प्रेम भाव भी खूब बढ़ाओ।

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता दीपावली के पावन पर्व की खुशियों, परंपराओं और सांस्कृतिक महत्ता का सुंदर चित्रण करती है। इसमें बताया गया है कि दीपावली के आगमन पर लोगों के मन में उल्लास छा जाता है। घरों की सफाई, रंगाई-पुताई और सजावट से वातावरण नया और पवित्र हो उठता है। धनतेरस के दिन लोग नई वस्तुएं खरीदते हैं और मिट्टी के दीपक जलाकर अपने घरों को रोशनी से भर देते हैं। पटाखे, फूलझड़ियाँ और आतिशबाज़ी से आसमान रंग-बिरंगा हो जाता है। रिश्तेदारों और मित्रों के साथ मिलजुलकर मिठाइयाँ बांटने, शुभकामनाएँ देने और खुशियाँ मनाने का यह त्योहार लोगों को एकता और प्रेम का संदेश देता है। रात को माँ लक्ष्मी की पूजा की जाती है और उनकी अखंड ज्योति से घर में समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। यह भी स्मरण कराया गया है कि इसी दिन भगवान राम चौदह वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे, इसलिए यह पर्व सत्य, निष्ठा और परिवार-प्रेम का प्रतीक है।
  • अंत में, कवि ने संदेश दिया है कि दीपावली केवल दीपों का त्योहार नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, एकता और खुशियों को बाँटने का अवसर है — जिससे जीवन में उजाला, सुख और सद्भावना बनी रहे।

—————

यह कविता (दीपों का त्योहार।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free!!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ® ———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari Etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____

Filed Under: 2025 - KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: Festival of Lights, Festival of Lights Hindi Poem, Festival of Lights Poem in Hindi, hindi poem, vinod verma poems, दीपों का त्योहार, विनोद वर्मा, विनोद वर्मा जी की कविताएं

श्राद्ध।

Kmsraj51 की कलम से…..

Shraddh | श्राद्ध।

श्राद्धों में जिनकी होती है पूजा
उन पित्रों से बढ़कर नहीं है कोई दूजा।

श्राद्धों में धरती पर हैं वे आते
पता नहीं किस रूप में आशीर्वाद दे जाते।

हर कोई तर्पण है करता
कोई जाता गया तो कोई घर पर ही पिंड भरता।

भान्ति भान्ति के पकवान है बनाते
पित्र ये सब देख खुश हो जाते।

कौओं को खाना खिलाए
पित्र रूप उनमें नजर आए।

ब्राह्मणों को कोई खाना खिलाते
उन्हें ख़ुश देख पित्रों को प्रसन्न मानते।

श्राद्धों में तो खूब होती है पेट भराई
जीते जी जिनसे दूरियां भी खूब है बनाई।

बुजुर्गों की पूजा जीते जी भी की जाए
उनको अपनेपन के लिए न तड़फाएं।

बुजुर्ग जब तक है तब तक उनको दुख देते हैं भारी
श्राद्धों में स्वादिष्ट खाने से पूजा की करते हैं तैयारी।

जिसने जीते जागते बुजुर्गों की है सेवा
श्राद्धों में क्षमता न हो फिर भी मिलेगा मेवा।

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता श्राद्ध और पितरों की पूजा के महत्व को उजागर करती है। इसमें बताया गया है कि श्राद्ध के अवसर पर पितर धरती पर आते हैं और अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं, हालांकि वे किस रूप में आते हैं, यह कोई नहीं जानता। लोग तर्पण और पिंडदान के माध्यम से उनका स्मरण करते हैं, भिन्न-भिन्न पकवान बनाते हैं, कौओं को भोजन कराते हैं और ब्राह्मणों को भोजन करवाकर उन्हें प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। श्राद्ध केवल दिखावा न बनकर रहे, बल्कि बुजुर्गों और माता-पिता की सेवा और सम्मान उनके जीवित रहते हुए भी किया जाना चाहिए। अक्सर लोग अपने बुजुर्गों को जीवनकाल में उपेक्षित करते हैं और उन्हें दुख पहुंचाते हैं, लेकिन उनके निधन के बाद श्राद्ध में बढ़-चढ़कर पूजा-पाठ और भोजन की व्यवस्था करते हैं। कविता इस विरोधाभास को उजागर करती है और संदेश देती है कि असली पुण्य तो बुजुर्गों की सेवा, सम्मान और स्नेह में है, न कि केवल मृत्यु के बाद किए जाने वाले कर्मकांडों में।
  • अंततः, यह कविता बताती है कि जिसने अपने बुजुर्गों की सच्चे मन से सेवा की है, वह व्यक्ति श्राद्ध में बड़े आयोजन न कर पाने पर भी पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करता है। असली धर्म और कर्तव्य है जीवित संबंधों को महत्व देना और उनके साथ आत्मीयता का व्यवहार करना।

—————

यह कविता (श्राद्ध।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ® ———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari Etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____

Filed Under: 2025 - KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: Poems of Vinod Verma, Vinod Verma, विनोद वर्मा, विनोद वर्मा जी की कविताएं, श्राद्ध, श्राद्ध - विनोद वर्मा, श्राद्ध व तर्पण - कविता

वो मस्ती भरी बरसात।

Kmsraj51 की कलम से…..

Wo Masti Bhari Barsaat | वो मस्ती भरी बरसात।

वो मस्ती भरी बरसात
अब कहां
जिसमें आनंद होता
था बेपनाह।

बेफ्रिक हो कर
खड्डों में नहाते
रास्ते में आए पानी
तो कागज की किस्तियां
भी बहाते।

पानी के डैम बनाना
फिर पानी छोड़कर
आंनद भी खूब लेना।

झूला झूलने पींगे डालते
फिर झूल झूल कर
मस्ती भरे गीत गाते।

अब न वैसा बचपन रहा
न ही वैसी बरसात
जिसमें हर रोज़ दिखती
थी कोई नई शरारत।

खेतों से छलियां चुराते
छुप छुप कर फिर
उन्हें खाते।

किसी आंगन में
कहीं ककड़ी देखते
उसे चुराकर ही सांस भरते।

अब तो पानी की जगह
दलदल आता
दिन रात बड़ा है डराता।

वो मस्ती भरी बरसात
अब कहां।

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता बचपन की बीती हुई मासूम, मस्ती भरी बारिश की यादों को संजोती है। कवि उन दिनों की बारिश को याद करता है, जब बरसात केवल पानी नहीं, बल्कि खुशियों और शरारतों की सौगात लेकर आती थी। कविता में बताया गया है कि पहले बच्चे बेफिक्र होकर खड्डों में नहाते, कागज की नावें बहाते, पानी से डैम बनाते, और पिंग झूला डालकर गीत गाते थे। खेतों से चुपके से छलियां चुराना, किसी के आंगन से ककड़ी उठाना, और फिर छुपकर खाना, ये सब बचपन की मासूम शरारतें थीं। लेकिन अब न वो बचपन रहा, न वैसी बरसात। आज की बारिश में मस्ती की जगह डर और दलदल है। अब बरसात का आनंद खो गया है, और बचपन की वो खुली, निश्छल दुनिया कहीं पीछे छूट गई है। कुल मिलाकर, यह कविता एक नॉस्टेल्जिक भाव को उजागर करती है — बचपन की बारिश की मस्ती, आज की यथार्थपूर्ण स्थिति में एक मीठी कड़वाहट के साथ याद आती है।

—————

यह कविता (वो मस्ती भरी बरसात।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ® ———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari Etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____

Filed Under: 2025 - KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: Vinod Verma, vinod verma poems, बरसात पर हिंदी कविता, बादल और बारिश पर कविता, बारिश पर कविता, वर्षा ऋतु पर गीत, विनोद वर्मा, विनोद वर्मा जी की कविताएं, वो मस्ती भरी बरसात, वो मस्ती भरी बरसात - विनोद वर्मा, हिंदी साहित्य में वर्षा ऋतु

पिता।

Kmsraj51 की कलम से…..

Father| पिता।

पिता होते है
घर की शान,
इनकी छत्र छाया में
हंसता खिलता है जहांन।

शाम को थके हारे जब
घर में प्रवेश करते,
सारे घर को
खुशियों से भर देते।

घर में कोई समस्या
जब है आती,
हल ढूंढने तक चैन
भी चली जाती।

संतान की पढ़ाई लिखाई के
खातिर करता मेहनत मजदूरी,
उनकी हर ख्वाहिश को
करता जैसे तैसे पूरी।

संतान तो उनके लिए
संतान है होती,
चाहे वो खुशियां लाती
या दुःख है देती।

संतान के पालन पोषण में
नहीं छोड़ता कोई कसर,
अपने स्वास्थ्य पर क्यों न
पड़ जाए चाहे विपरीत असर।

इतना कुछ करने पर पिता
को कई बार खरी खोटी सुनना है पड़ता,
बस यही बातें उन्हें
जल्दी बुढ़ापे में है जकड़ती।

संतान कई बार पिता के
त्याग को भूल है जाती,
इन्हीं बातों पर पिता को
वृद्धाश्रम की राह नज़र है आती।

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता पिता के त्याग, संघर्ष और परिवार के प्रति उनके अटूट प्रेम को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करती है। कवि बताते हैं कि पिता घर की शान होते हैं, जिनकी छाया में पूरा परिवार सुकून और खुशियों से भर जाता है। पिता दिनभर मेहनत करने के बाद जब शाम को घर लौटते हैं, तो अपने साथ मुस्कान और ऊर्जा लेकर आते हैं। वे परिवार की हर समस्या का समाधान ढूंढ़ने में लगे रहते हैं, और विशेष रूप से अपनी संतान की पढ़ाई, ज़रूरतों और ख्वाहिशों को पूरा करने के लिए हर प्रकार की मेहनत और त्याग करते हैं — भले ही इसका असर उनके अपने स्वास्थ्य पर क्यों न पड़े। फिर भी, कई बार उन्हें संतानों से तिरस्कार या कठोर बातें सुननी पड़ती हैं। यह उपेक्षा और अपमान उन्हें भीतर से तोड़ देती है और उन्हें जल्दी बुढ़ापे की ओर धकेल देती है। कविता अंत में एक दर्दनाक सच्चाई को उजागर करती है — कि अक्सर संतान अपने पिता के बलिदानों को भूल जाती है, और यही उपेक्षा उन्हें वृद्धाश्रम तक पहुँचा देती है।

—————

यह कविता (पिता।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ® ———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari Etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____

Filed Under: 2025 - KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: Father, short poem on father's day in hindi, Vinod Verma, vinod verma poems, पिता - विनोद वर्मा, विनोद वर्मा, विनोद वर्मा जी की कविताएं

ये कैसी यात्रा।

Kmsraj51 की कलम से…..

Ye Kaisi Yatra | ये कैसी यात्रा।

कोई चला अपनों से मिलने,
तो कोई अपनों से मिलकर चला आया,
न मिलने वाला मिल पाया,
न मिलकर गया वापिस आ पाया।

कोई अपना व्यवसाय विदेश करने चला,
तो कोई परिवार सहित घूमने निकला।

न ही व्यवसाय हो पाया,
न ही घूमने का आनंद ले पाया,
मन में अपनों से मिलने के सपने लगे थे आने,
पता नहीं था मौत आज आ बैठी है सिरहाने।

प्रशिक्षु चिकित्सक कर रहे थे खाने की तैयारी,
मालूम न था कि खाना किस्मत में नहीं है हमारी,
एक ने अपने आप को न जाने कैसे बचाया,
लगा ऐसे मानों मौत के मुंह से वापिस आया।

जिंदगी कौन सा खेल कब खेल जाए,
आज तक ये रहस्य कोई जान न पाए।
दोस्तो गुमान किस बात का करना,
पता नहीं अगले पल किसे है मरना।

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता जीवन की अनिश्चितता और मृत्यु की अकस्मात उपस्थिति को मार्मिक ढंग से व्यक्त करती है। इसमें बताया गया है कि कुछ लोग अपनों से मिलने निकले थे, कुछ घूमने या व्यवसाय के लिए, लेकिन न वे मिल पाए, न लौट पाए — क्योंकि अचानक आई मौत ने सब कुछ छीन लिया। कविता में एक दुखद दृश्य चित्रित किया गया है जहाँ प्रशिक्षु चिकित्सक भोजन की तैयारी कर रहे थे, पर उन्हें यह ज्ञात नहीं था कि उनकी किस्मत में वह भोजन नहीं लिखा था। उनमें से एक किसी तरह बच गया, मानो मौत के मुंह से लौट आया हो। अंत में कवि एक गहरी सीख देता है कि जीवन बहुत अस्थिर और अनिश्चित है — न जाने कौन सा पल आखिरी हो। इसलिए घमंड, लालच या अभिमान करने का कोई अर्थ नहीं है, क्योंकि अगले ही पल क्या हो जाए, यह कोई नहीं जानता।

—————

यह कविता (ये कैसी यात्रा।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ® ———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari Etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____

Filed Under: 2025 - KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: hindi poem, Vinod Verma, vinod verma poems, अहमदाबाद विमान दुर्घटना पर कविता, ये कैसी यात्रा, ये कैसी यात्रा - विनोद वर्मा, विनोद वर्मा, विनोद वर्मा जी की कविताएं, हिंदी कविता

हमारा क्या कसूर।

Kmsraj51 की कलम से…..

Hamara Kya Kasoor | हमारा क्या कसूर।

खुशी खुशी घूमने पहुंचे पहलगाम,
क्या पता था कि यहाँ हो जाएगा काम तमाम।
कोई विदेश से आया तो कोई अपने ही देश से,
हसीन वादियों का आनंद ले रहे थे बड़े शौक से।

एकाएक सन्नाटा सा छा है जाता,
किसी को कुछ भी समझ नहीं आ पाता।
गोलियों की आवाज़ जोर से है आती,
किसी से धर्म की तो किसी से कलमा पढ़ने की बात पूछी जाती।

हिन्दू शब्द जैसे ही सुनाई देता,
सीने में गोली दाग जान ले लेता।
कलमा पढ़ने में जो नहीं हुआ पास,
उसे भी जीने की नहीं रही थी आस।

हाथों से अभी मेहंदी का रंग भी नहीं था उतरा,
सुहाग उजाड़ कर जिन्दगी कर दी कतरा – कतरा।
आखिर कसूर क्या था जो गोलियों से उड़ाए,
अपने ही देश के तो थे हम कहाँ थे पराए।

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता पहलगाम जैसी सुंदर और शांत जगह पर हुई एक दर्दनाक घटना को दर्शाती है। कवि बताता है कि लोग खुशी-खुशी वहाँ घूमने आए थे, कोई विदेश से तो कोई देश के अन्य हिस्सों से, पर उन्हें क्या पता था कि यह यात्रा उनकी आखिरी बन जाएगी। अचानक वहाँ अफरा-तफरी मच जाती है, गोलियों की आवाजें गूंजने लगती हैं। कुछ लोग धर्म पूछकर जान लेने लगते हैं — अगर कोई हिन्दू निकले तो उसे गोली मार दी जाती है, और जो कलमा नहीं पढ़ पाते, उनकी भी जान नहीं बख्शी जाती। कविता उस दर्द को भी दर्शाती है जब नवविवाहित दुल्हनों की हाथों से मेहंदी का रंग भी नहीं उतरा था, और उनका सुहाग उजड़ गया। सवाल उठाया गया है कि आखिर उनका कसूर क्या था? वे तो अपने ही देश के नागरिक थे, फिर भी उन्हें पराया समझकर मारा गया। कुल मिलाकर, यह कविता धार्मिक असहिष्णुता और आतंक की भयावहता को उजागर करती है, साथ ही यह सवाल उठाती है कि जब अपने ही देश में लोग सुरक्षित नहीं हैं, तो इंसानियत कहाँ बची है?

—————

यह कविता (हमारा क्या कसूर।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ® ———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari Etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____

Filed Under: 2025 - KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: Hindi Poems, pahalgam terror attack 2025, Vinod Verma, vinod verma poems, पहलगाम नरसंहार पर कविता, विनोद वर्मा, विनोद वर्मा जी की कविताएं, हमारा क्या कसूर, हमारा क्या कसूर - विनोद वर्मा, हिंदी पोयम्स

मोबाइल फोन का असर।

Kmsraj51 की कलम से…..

Effect of Mobile Phone | मोबाइल फोन का असर।

There is no shame, no respect, seeing all this the common people are getting upset. While making reels they speak dirty words, it seems as if the values ​​have vanished. Effect of mobile phone.

नई पीढ़ी का है ये हाल,
फेसबुक, इंस्टाग्राम पर मचा रखी है धमाल।
मोबाइल फोन का एक जादू सा है छाया
जिसको देखो, जहाँ देखो हरदम इसमें है खोया।

न शर्म, न इज्जत का है कोई ध्यान,
देख ये सब आमजन हो रहा है परेशान।
रील बनाते समय निकालते हैं गन्दे बोल,
संस्कारों का निकल गया है मानो झोल।

मर्यादा का नहीं रहा है कोई नाम,
सिर्फ फौलोवर्स बढ़ाना बन गया है काम।
लाईक व कमेंट देख खुश हो जाते,
मात्र इसी को ही प्रसिद्धि बतलाते।

संस्कार भूल रही है नई पीढ़ी,
शायद इसी को ही समझते हैं आधुनिकता की सीढ़ी।
जिसको देखो वो मोबाइल पर है व्यस्त,
बच्चा, नौजवान और बूढ़ा सब है इसमें मस्त।

मोबाइल फोन का बड़ा नशा है आज,
खाना खाते, उठते बैठते इसका प्रयोग बन गया सबका काज।
मोबाइल फोन के बच्चे हो गए हैं आदि,
गर न मिले तो जान की बाजी तक लगा दी।

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में नई पीढ़ी की मोबाइल और सोशल मीडिया पर बढ़ती निर्भरता पर चिंता व्यक्त की गई है। कवि दर्शाते हैं कि युवा फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसी सोशल मीडिया साइट्स पर अत्यधिक सक्रिय हैं और मर्यादा, संस्कार व इज्जत की परवाह किए बिना सिर्फ लाइक्स और फॉलोअर्स बढ़ाने में लगे हुए हैं। मोबाइल फोन का नशा इतना बढ़ गया है कि बच्चे, युवा और बूढ़े सभी इसके आदि हो चुके हैं। यह आदत उनके आचरण, संस्कृति और जीवनशैली को प्रभावित कर रही है, जिससे समाज में एक नई समस्या उत्पन्न हो रही है।

—————

यह कविता (मोबाइल फोन का असर।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ® ———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari Etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____

Filed Under: 2025 - KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: Effect of Mobile Phone, Unhealthy Effects of Mobile, Vinod Verma, vinod verma poems, मोबाइल फोन का असर, मोबाइल फोन का असर - विनोद वर्मा, मोबाइल फोन के इस्तेमाल से होने वाले नुकसान, विनोद वर्मा, विनोद वर्मा जी की कविताएं

माँ बाप।

Kmsraj51 की कलम से…..

Maa Baap | माँ बाप।

In this poem, the poet has depicted the sacrifice, dedication of parents and their status in changing times. He says that many relationships are formed in life, but no one can take the place of parents. They are like God and shape our personality.

जीवन में हर रिश्ता बन है जाता।
माँ बाप कोई और नहीं बन पाता॥

माँ बाप होते हैं भगवान् का रूप।
उनसे ही बनता हमारा स्वरूप॥

माँ बाप के त्याग व समर्पण को भुलाया नहीं जाता।
कोई इन्हें ठुकराता तो कोई इन्हें गले है लगाता॥

माँ बाप आज सिसकियां है भरते।
अपने ही घर में खुलकर जी नहीं सकते॥

जब होते हैं बच्चे छोटे तो माँ बाप लगते बड़े प्यारे।
जब बच्चे हुए बड़े तो माँ बाप फिरते बेसहारे॥

पोता – पोती से प्यार भी खूब जताते।
पर खुलकर उनसे बात भी नहीं कर पाते॥

यूँ तो पोता पोती होते इन्हें बड़े प्यारे।
क्या करे अब बदल गई दुनियाँ और इसके नजारे॥

आज श्रवण कुमार बड़ी मुश्किल से है मिलता।
जिन माँ बाप को है मिलता उनका बुढ़ापा सुख में है बीतता॥

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवि ने इस कविता में माता-पिता के त्याग, समर्पण और बदलते समय में उनकी स्थिति को दर्शाया है। वह कहते हैं कि जीवन में कई रिश्ते बनते हैं, लेकिन माता-पिता का स्थान कोई और नहीं ले सकता। वे भगवान के समान होते हैं और हमारे व्यक्तित्व को आकार देते हैं। माता-पिता के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता, लेकिन समाज में कुछ लोग उन्हें ठुकरा देते हैं, तो कुछ उन्हें सम्मान और प्रेम देते हैं। आजकल माता-पिता अपने ही घर में सिसकते हैं और खुलकर जी नहीं पाते। जब बच्चे छोटे होते हैं, तब माता-पिता उन्हें बहुत प्रिय लगते हैं, लेकिन जैसे-जैसे वे बड़े होते हैं, माता-पिता उपेक्षित महसूस करने लगते हैं। वे अपने पोते-पोतियों से प्रेम तो करते हैं, लेकिन उनसे खुलकर बात नहीं कर पाते, क्योंकि समय के साथ समाज और परिस्थितियाँ बदल गई हैं। आज के समय में श्रवण कुमार जैसे आदर्श पुत्र बहुत कम मिलते हैं। जिन माता-पिता को अच्छे और संस्कारी बच्चे मिलते हैं, उनका बुढ़ापा सुखमय बीतता है। इस प्रकार, कविता माता-पिता के महत्व को समझने और उनका सम्मान करने की प्रेरणा देती है।

—————

यह कविता (माँ बाप।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ® ———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari Etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____

Filed Under: 2025 - KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: Poems by Vinod Verma, Vinod Verma, पिता के लिए एक कविता, माँ बाप, माँ बाप - विनोद वर्मा, माता पिता के लिए कविता, माता पिता के लिए कविता हिंदी में, माता पिता के लिए शायरी, माता-पिता के लिए दो शब्द, विनोद वर्मा, विनोद वर्मा जी की कविताएं

सास बहू।

Kmsraj51 की कलम से…..

Saas Bahu | सास बहू।

Earlier mothers-in-law forced their daughters-in-law to wear veils and follow traditions, but now times have changed. Today's mother-in-law treats her daughter-in-law like a daughter, and both share each other's joys and sorrows like friends.

सास बहू का रिश्ता है बड़ा पुराना,
इसकी चर्चा करता है सारा जमाना।
नई नवेली बहू जब घर में है आती,
सास रिश्तेदारों से मुलाकात है करवाती।

बहू आने की खुशी भी खूब है जताती,
आपस में हंंसी खुशी से समय बिताती।
समय की गति सदा एक जैसी नहीं रह पाती,
कभी – कभी आपस में तकरार भी हो जाती।

सास बहू को दहेज न लाने के ताने भी लगाती,
बहू माँ बाप की लाज बचाने में चुपचाप सह जाती।
वक्त बदलने में देर नहीं लगती,
अब बहू बिन दहेज खूब है जचती।

जब मैं थी बहू ये कहानी सास सुनाती,
सास के सामने हमेशा घूंघट में ही नजर आती।
अब सास, वो सास कहाँ रही,
जिनकी बहूओं ने लाख परेशानियां है सही।

आज बहू सास को माता है कहती,
सास भी बहू को बेटी की तरह है सहलाती।
सहेलियों की तरह आपस में है रहती,
अपने सुख दुःख एक दूसरे से हैं कहती।

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता सास और बहू के रिश्ते के बदलाव को दर्शाती है। पहले सास-बहू का रिश्ता औपचारिकता और कई बार तकरार से भरा होता था, लेकिन समय के साथ इसमें सकारात्मक परिवर्तन आया है। शुरुआत में, जब नई बहू घर में आती है, तो सास उसे अपनाने का दिखावा करती है और रिश्तेदारों से परिचय करवाती है। हालांकि, समय के साथ कुछ मतभेद भी उभर आते हैं, जैसे दहेज को लेकर कटाक्ष। बहू इन तानों को सहती है, लेकिन धीरे-धीरे समाज में बदलाव आता है, और बिना दहेज वाली बहुएँ भी घर में स्वीकार की जाने लगती हैं। पहले की सासें अपनी बहुओं को घूंघट में रहने और परंपराओं का पालन करने के लिए मजबूर करती थीं, लेकिन अब समय बदल चुका है। आज की सास अपनी बहू को बेटी की तरह मानती है, और दोनों सहेलियों की तरह एक-दूसरे के सुख-दुःख में सहभागी होती हैं। कविता इस रिश्ते में आई सकारात्मकता को दर्शाती है, जहाँ अब सास-बहू का संबंध प्रेम और आपसी समझदारी पर आधारित हो गया है।

—————

यह कविता (सास बहू।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ® ———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari Etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____

Filed Under: 2025 - KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: Vinod Verma, आज की सास-बहू, रिश्ता सास बहू का, विनोद वर्मा, विनोद वर्मा जी की कविताएं, सास बहू, सास बहू - विनोद वर्मा, सास बहू की कविता, सास बहू के रिश्ते पर कविता

Next Page »

Primary Sidebar

Recent Posts

  • एक सफर।
  • बाल विवाह – एक अभिशाप।
  • क्या बदलाव लायेगा नया साल।
  • है तो नववर्ष।
  • मोह।
  • अपना धर्म सबसे उत्तम।
  • ठंडी व्यार।
  • रिश्तों को निभाना सीखो।
  • तंत्र, मंत्र और तत्व ज्ञान में अंतर।
  • मित्र।
  • आखिर क्यों।
  • समय।
  • काले बादल।
  • सुबह का संदेश।
  • चलो दिवाली मनाएं।
  • दीपों का त्योहार।
  • नरेंद्र मोदी के कार्यकाल और उनके कार्य पर प्रकाश।

KMSRAJ51: Motivational Speaker

https://www.youtube.com/watch?v=0XYeLGPGmII

BEST OF KMSRAJ51.COM

एक सफर।

बाल विवाह – एक अभिशाप।

क्या बदलाव लायेगा नया साल।

है तो नववर्ष।

मोह।

अपना धर्म सबसे उत्तम।

ठंडी व्यार।

रिश्तों को निभाना सीखो।

तंत्र, मंत्र और तत्व ज्ञान में अंतर।

मित्र।

आखिर क्यों।

Footer

Protected by Copyscape

KMSRAJ51

DMCA.com Protection Status

Disclaimer

Copyright © 2013 - 2026 KMSRAJ51.COM - All Rights Reserved. KMSRAJ51® is a registered trademark.