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Poem on Raksha Bandhan in Hindi

वो बंधन रक्षाबंधन कहलाता है।

Kmsraj51 की कलम से…..

Vo Bandhan Rakshabandhan Kehlata Hai | वो बंधन रक्षाबंधन कहलाता है।

Brother's wrist waits, sister's Rakhi fills him, Rakhi comes in the month of Saavan, it adds sweetness to relationships. That bond is called Rakshabandhan.

भाई बहन के प्यार को जो दर्शाता है,
वो बंधन सबसे प्यारा होता है,
भाई बहन की रक्षा की कसम खाता है,
वो बंधन रक्षाबंधन कहलाता है।

भाई की कलाई इंतजार करती है,
बहन की राखी उसको भरती है,
सावन के महीने में राखी आती है,
रिश्तों में मिठास घोल जाती है।

बहने बेसब्री से करतीं हैं इस दिन का इंतज़ार,
क्या – क्या देगा उसका भाई उपहार,
वर्षों से चली आ रही है ये परंपरा,
कितना सुंदर है देखो ये त्योहार।

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में कवि कहते है कि रक्षाबंधन का त्योहार भाई और बहन के बीच के प्रेम और स्नेह को दर्शाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है, और भाई उसकी रक्षा का वचन देता है। सावन के महीने में आने वाला यह त्योहार रिश्तों में मिठास भरता है और कई वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को बहुत ही सुंदर तरीके से मनाया जाता है। बहनें इस दिन का बेसब्री से इंतजार करती हैं और सोचती हैं कि उनके भाई उन्हें क्या उपहार देंगे। यह त्योहार भाई-बहन के अटूट रिश्ते का प्रतीक है।

—————

यह कविता (वो बंधन रक्षाबंधन कहलाता है।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, लघु कथा, सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल है। साहित्यिक नाम — डॉ• जय अनजान है। माता का नाम — श्रीमती कमला देवी महलवाल और पिता का नाम — श्री सुंदर राम महलवाल है। शिक्षा — पी• एच• डी•(गणित), एम• फिल•, बी• एड•। व्यवसाय — सहायक प्रोफेसर। धर्म पत्नी — श्रीमती संतोष महलवाल और संतान – शानवी एवम् रिशित।

  • रुचियां — लेखक, समीक्षक, आलोचक, लघुकथा, फीचर डेस्क, भ्रमण, कथाकार, व्यंग्यात्मक लेख।
  • लेखन भाषाएं — हिंदी, पहाड़ी (कहलूरी, कांगड़ी, मंडयाली) अंग्रेजी।
  • लिखित रचनाएं — हिंदी(50), पहाड़ी(50), अंग्रेजी(10)।
  • प्रेरणा स्त्रोत — माता एवम हालात।
  • पदभार निर्वहन — कार्यकारिणी सदस्य कल्याण कला मंच बिलासपुर, लेखक संघ बिलासपुर, सह सचिव राष्ट्रीय कवि संगम बिलासपुर इकाई, ज्वाइंट फाइनेंस सेक्रेटरी हिमाचल मलखंभ एसोसिएशन, सदस्य मंजूषा सहायता केंद्र।
  • सम्मान प्राप्त — श्रेष्ठ रचनाकार(देवभूमि हिम साहित्य मंच) — 2022
  • कल्याण शरद शिरोमणि सम्मान(कल्याण कला मंच) — 2022
  • काले बाबा उत्कृष्ट लेखक सम्मान — 2022
  • व्यास गौरव सम्मान — 2022
  • रक्त सेवा सम्मान (नेहा मानव सोसायटी)।
  • शारदा साहित्य संगम सम्मान — 2022
  • विशेष — 17 बार रक्तदान।
  • देश, प्रदेश के अग्रणी समाचार पत्रों एवम पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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रक्षाबंधन का संकल्प।

Kmsraj51 की कलम से…..

Rakshabandhan Ka Sankalp | रक्षाबंधन का संकल्प।

प्रेम और विश्वास का प्रतीक,
स्नेह और दुलार बड़ा ही नीक।
अदभुत अनोखा अटूट बंधन,
मस्तक पर धारित तिल चंदन।
जैसे आकाश और गगन,
वैसे भाई और बहन।
जैसे धूप और छाया,
वैसे अदृश्य प्रेम की माया।

सारे जग में सबसे सच्चा,
धागा जिसमें सबसे कच्चा।
पर कच्चा है कमजोर नहीं,
और टूट जाए वो डोर नहीं।
रक्षा के सूत्र से जिसे पिरोया,
पावन धागों में जिसे संजोया।
रक्षा का संकल्प है जिसमें,
तोड़ दे वो दम है किसमें।

सावन का अनुपम त्योहार,
होता भाई बहन का प्यार।
हर भाई का आज है कहना,
खुश रहना वो मेरी बहना।
संकल्प आज दुहराते है,
तुझे सशक्त सबल बनाएंगे।
फौलाद जैसे जीवट बनाएंगे,
ताकि पकड़ न सके कोई तेरा हाथ।

ऐसे दूंगा सदा ही तेरा साथ,
मगर विपरीत परिस्थितियों में,
जब अपनी रक्षा तू खुद करेगी,
धरा तुझपे नाज करेगी।
संकल्प पूरा होगा हमारा,
देखेगा संसार ये सारा।
बहन का आशीष भाई का प्यार,
ऐसा अनुपम है यह त्योहार।
रक्षा का जिसमें गहरा बंधन,
कहलाता है वो रक्षाबंधन।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता रक्षाबंधन के त्योहार के महत्वपूर्ण आदर्शों और भाई-बहन के प्यार को सुंदरता से प्रकट करती है। इस कविता में रक्षाबंधन को प्रेम और विश्वास का प्रतीक कहकर वर्णित किया गया है, जो भाई-बहन के बीच एक सजीव और मजबूत बंधन को दर्शाता है। इसके साथ ही, यह उनके स्नेह और दुलार की महत्वपूर्णता को भी व्यक्त करता है। कविता में बड़े ही अद्भुत और अनोखे बंधन के बारे में बताया गया है, जिसका तिलक चंदन के तिल की तरह मस्तक पर है। इसके साथ ही, आकाश और गगन, धूप और छाया की तरह, भाई-बहन का रिश्ता भी अत्यधिक महत्वपूर्ण और अदृश्य होता है। कविता में दिखाया गया है कि भाई-बहन के रिश्ते में सच्चाई और विश्वास सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, जिसे किसी भी परिस्थिति में कमजोर नहीं होने दिया जा सकता है। रक्षाबंधन के सूत्र ने उन्हें मजबूत बनाया है और यह सुनिश्चित करता है कि उनका बंधन कभी नहीं टूटेगा। कविता आगामी वर्षों में भी भाई-बहन के प्यार के महत्वपूर्ण परिप्रेक्ष्य में उनकी आपसी समर्थन और आशीर्वाद की महत्वपूर्णता को दर्शाती है। कविता के अंत में, भाई का सदैव उसके साथ रहने का आश्वासन देते हुए, बहन को उसकी स्वयं रक्षा करने की साहस दी जाती है, जिससे धरती भी गर्वित होती है। कुल मिलाकर, यह कविता रक्षाबंधन के त्योहार के माध्यम से भाई-बहन के अदृश्य और अटूट प्रेम का संदेश देती है, जिसका रंग और महत्व हमारे संबंधों को बढ़ावा देने में आता है।

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यह कविता (रक्षाबंधन का संकल्प।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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रक्षाबंधन।

Kmsraj51 की कलम से…..

Raksha Bandhan | रक्षाबंधन।

भाई-बहन का प्यार,
लेकर आया राखी का त्योहार।
राजा बलि ने रखी, रक्षा सूत्र की मान,
लक्ष्मी जी के खातिर,
विष्णु जी को विदा किया स सम्मान।

भाई के सुख के लिए,
बहन कष्ठ से लड़ जाती है।
कच्चे होते रेशम धागे,
मजबूत डोर बन जाती है।

बहन-भाई के रिश्ते जैसा,
कोई न दूजा रिश्ता होता।
कष्ठ में गर बहन हो,
सिसक-सिसक कर दुख में भाई रोता।

बहन प्यारी तू सबसे न्यारी,
कभी न आए आंसू तेरी आँखों में।
मांगू मैं यह वरदान,
मेरी बहन छुए आसमाँ।
यही है मेरे दिल का अरमान,
बाँधा है धागा, बहन ने तुझको,
वचन दो रक्षा करने का।

मुँह कराया मीठा तेरा,
रिश्तों में मिठास रखने का।
“भोला” भैया का है कहना,
राखी बांधो मेरी प्यारी बहना,
हमेशा खुश रहना मेरी बहना।

इस भाई को राखी बाँधना भूल न जाना,
भगवान सबको बहन दे।
राखी का त्योहार मनाने को,
हर बहन को भाई मिले,
रक्षा का वचन निभाने को।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150 / नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

—————

  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में राखी के त्योहार के माध्यम से भाई-बहन के प्यार और आपसी संबंधों का महत्व दर्शाया गया है। कविता में बताया गया है कि राजा बलि ने राखी बांधकर अपने सम्मान का प्रकटीकरण किया था और विष्णु जी को स सम्मान विदा किया। कविता दर्शाती है कि भाई के सुख के लिए बहन कठिनाइयों का सामना करती है और उसका साथ देती है। राखी के माध्यम से भाई-बहन के प्यार का अद्भुत महत्व और अनमोलता प्रकट होती है और इस रिश्ते की मित्रता और समर्पण की महत्वपूर्णता पर भी ध्यान दिलाती है। कविता के अंत में यह कहा गया है कि भाई को राखी बांधने की परंपरा को भूलने नहीं चाहिए और भगवान से सभी को बहन की प्राप्ति हो।

—————

यह कविता (रक्षाबंधन।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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रेशम की डोर बेजोड़।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ रेशम की डोर बेजोड़। ♦

अटूट प्रेम की पक्की डोर,
टूटे कभी न इसका जोड़।
इस रिश्ते का न कोई तोड़,
माथे तिलक, रोरी और चंदन,
बहन ने किया भाई का वंदन।

रक्षासूत्र बांध बहना ने,
लिया भाई से एक वचन।
रक्षक नहीं रक्षा का गुर,
गुरु बन ऐसी शिक्षा दो,
डर का मन में न हो डेरा।

मजबूत और फौलाद बनूं,
खुद की रक्षा सहज कर सकूं।
हमारी मनोदशा ऐसी बने,
न कभी डिगू न कभी झुकूं,
हर बहना का हो यह कहना।

भाई तुम हो मेरा गहना,
भाई बहन का प्यार अनूठा।
इस रिश्ते से न कोई रूठा,
दिल के रिश्तों का यह जोड़,
रेशम की डोर, न होगी कमजोर।

बहन का प्यार, भाई का विश्वास,
इस पर्व को बनाता खास।
सावन पूर्णिमा के दिन है आता,
स्नेह और विश्वास है लाता।
रक्षाबंधन है कहलाता,
रेशम की डोर है बेजोड़।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — रक्षाबंधन का त्योहार भाई बहन के पवित्र प्यार का प्रतिक है, जिसे राखी का त्योहार भी कहा जाता है। रक्षा बंधन पर बहन, भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसके दीर्घायु व सुखी जीवन की प्रार्थना करती है। इसके साथ ही बहन अपने भाई से अपनी सुरक्षा का वचन लेती है, की जीवन में जब भी उस पर कोई मुसीबत आएगा उसका भाई उसकी मदद के ली आ जायेगा। एक दूजे के चेहरे को देख मुसीबतें भाप लेते हैं, ऐसा होता है भाई बहन का रिश्ता। रक्षाबंधन हिन्दुओं का प्रमुख त्योहार है, जिसे पूरे भारत समेत अन्य देशों में भी मनाया जाता है।

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यह कविता (रेशम की डोर बेजोड़।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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रक्षा बंधन।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ रक्षा बंधन। ♦

धागा प्रेम का है यह बहना! राखी जिसको कहते है।
सृष्टि स्रष्टा विष्णु स्वयं भी, इसके बन्धन में रहते है।

भाई-बहन के पवित्र प्रेम का, सदियों से सम्बाहक रहा।
भारत वर्ष का बच्चा – बच्चा, इसका हमेशा चाहक रहा।

कब आए यह पर्व धरा पर? देव भी प्रतीक्षा में रहते हैं।
करती है दुआ खैर की बहना, तो सुरक्षा में भाई रहते हैं।

उदगार निराला भाव निराला, वरना धागे में क्या रखा है?
विश्वाश-प्रेम की नीव में जहां, रिश्तों का पत्थर रखा है।

ढहती नहीं है ईमारत कभी भी, भाई- बहन के रिश्तों की।
दुआ दे बहना और भाई सहारा, क्या जरूरत है फरिश्तों की?

बिखर जाए चाहे जमाना बहना! पर तुम यूं ही आती रहना।
आन पड़े कोई मुसीबत तो बहना! भैया से जरू कह देना।

राखी नहीं है महज इक धागा, यह प्रेम का प्यारा बन्धन है।
रक्षा बंधन के इस पावन पर्व का, दिल से आज अभिनंदन है।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — रक्षाबंधन का त्योहार भाई बहन के पवित्र प्यार का प्रतिक है, जिसे राखी का त्योहार भी कहा जाता है। रक्षा बंधन पर बहन, भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसके दीर्घायु व सुखी जीवन की प्रार्थना करती है। इसके साथ ही बहन अपने भाई से अपनी सुरक्षा का वचन लेती है, की जीवन में जब भी उस पर कोई मुसीबत आएगा उसका भाई उसकी मदद के ली आ जायेगा। एक दूजे के चेहरे को देख मुसीबतें भाप लेते हैं, ऐसा होता है भाई बहन का रिश्ता। रक्षाबंधन हिन्दुओं का प्रमुख त्योहार है, जिसे पूरे भारत समेत अन्य देशों में भी मनाया जाता है।

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यह कविता (रक्षा बंधन।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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भाई बहन का प्यार।

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♦ भाई बहन का प्यार। ♦

विधा: अटूट बंधन।

बहन भाई के लिए एक अच्छी दोस्त भी होती हैं। बहन को माँ का भी दर्जा दिया गया हैं, क्योंकि बहन भाइयों को बहुत ही ज्यादा प्रवाह ख्याल रखती हैं। इनका रिश्ता ऐसा होता हैं की यह एक दुसरे का चेहरा देखकर ही समस्याओं को पहचान लेते हैं…

भाई का प्यार होती है बहना,
इनका प्यार दुनिया में सबसे मंहगा है गहना॥

रिश्ते में बड़ी होती है बहना,
एहसासों का होती है गहना।
कभी बच्चों की शरारत,
कभी मां का प्यार है बहना।
भाई का प्यार……॥

रूठ जाए तो मना लेती है बहना,
हर उलझन को सुलझा देती है बहना।
जादू की छड़ी चला,
हर उलझन सुलझाती है बहना।
भाई का प्यार……॥

मुसीबत में एक दूसरे की दवा होते हैं दोनों,
एक दूसरे की खुशी के लिए,
हर मुसीबत भुला देते हैं दोनों।
चुलबुली सी बड़ी प्यारी लगती है बहना,
भाई का प्यार……॥

हर चीज पे भाई का हक जताती है बहना,
भाई से अलग होने की सोच,
आंखें नम कर लेती है बहना।
भाई का दर्द अपना कर,
सपना देखने की इजाजत देती है बहना।
भाई का प्यार……॥

फरियाद पूरी हो उम्मीदो की,
आंखों में चमक लिए खड़ी रहती है बहना।
भाई की कामयाबी पर बड़ी खुश होती है बहना,
राखी के धागे का प्यार निभाती है बहना।
भाई का प्यार …….॥

मुसीबत में भाई को पुकारती है बहना,
दोनो में ममतामई प्यार का है गहना।
दुनिया में ये रिश्ता होता है बड़ा गहरा,
ये ‘विजयलक्ष्मी’ का है कहना।
भाई का प्यार होती है बहना,
इनका प्यार दुनिया में सबसे मंहगा है गहना॥

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

—————

  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए; इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की हैं — रक्षाबंधन का त्योहार भाई बहन के पवित्र प्यार का प्रतिक है, जिसे राखी का त्योहार भी कहा जाता है। एक दूजे के चेहरे को देख मुसीबतें भाप लेते हैं, ऐसा होता है भाई बहन का रिश्ता। रक्षा बंधन पर बहन, भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसके दीर्घायु व सुखी जीवन की प्रार्थना करती है। इसके साथ ही बहन अपने भाई से अपनी सुरक्षा का वचन लेती है, की जीवन में जब भी उस पर कोई मुसीबत आएगा उसका भाई उसकी मदद के ली आ जायेगा। रक्षाबंधन हिन्दुओं का प्रमुख त्योहार है, जिसे पूरे भारत समेत अन्य देशों में भी मनाया जाता है।

—————

यह कविता (भाई बहन का प्यार।) “विजयलक्ष्मी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विजयलक्ष्मी है। मैं राजकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय, छारा – 2, ब्लॉक – बहादुरगढ़, जिला – झज्जर, हरियाणा में मुख्य शिक्षिका पद पर कार्यरत हूँ। मैं पढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा, व समय-समय पर “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ” और भ्रूण हत्या पर Parents मीटिंग लेकर उनको समझाती हूँ। स्कूल शिक्षा में सुधार करते हुए बच्चों में मानसिक मजबूती को बढ़ावा देना। कोविड – 19 महामारी में भी बच्चों को व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाना, वीडियो और वर्क शीट बनाकर भेजना, प्रश्नोत्तरी कराना, बच्चों को साप्ताहिक प्रतियोगिता कराकर सर्टिफिकेट देना। Dance Classes प्रतियोगिता का Online आयोजन कराना। स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर कार्य करना। इन सभी कार्यों के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी द्वारा और कई Society द्वारा बार-बार सम्मानित किया गया।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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राखी-साखी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ राखी-साखी। ♦

काव्य : अनुराग उल्लास।

आती है अब तो सज कर बाजार में राखी,
सजकर बड़े प्रीति से बुलाती है मन साखी।
सुनहली पीली लाल बैंगनी अनार सी राखी,
रेवती रोहिणी की बनी अनुपम अनोखी है राखी,
सलोनी सुंदर-सुंदर-सी अनूठी मनोरम है राखी।

उज्जवलित है, कुसुमाकर हेमा और निहार भी,
इतराती मुस्कुराती जाती मुक्तामणि और रेशम भी।
खेल तमाशा कोलाहल कलरव में हर्षित होकर,
वेदना व्यथा पीड़ा को भुला दुआ छागे का देखती,
इंदुरत्नों में पिरोयी प्रीति के तार की राखी।

अनुराग से भरी सावन की पूर्ण-करी ये पावन,
इंदिरा के बहार के कर सजाने ढूंढती फिरती साखी।
घूम-घूम फिरे बाजार-बाजार खोजे नयन बार-बार,
ढूढ़े नजर हर तार के बाजार सुनहरी पीली संसार,
बांधे भैया के हाथों ममता दुलार राखी।

हुई है शोभित सुंदरता और भरपूर हो राखी में,
किन्तु तुमसे अब चैतन्य है कुसुम फूले वो कुछ राखी।
अनुरागी बबूले देख ललिता लगी चुनने तिनके,
सजी हाथों में मेंहदी ने अँगुलियों से नाखूनों तक,
फुलवारी उपवन की बगिया हरियाली की राखी।

अंदाज़ से हाथ उठने में फूल राखी के जो हिलते हैं,
देखने वालों के उर में न जाने कितने फूल खिलते हैं।
यह पहुँचे कहाँ ये कोमल रंग कहाँ मिलते हैं,
सावन की साख पर चमन के हर्ष फूल खिलते हैं,
सद्गुण है चंचल सुमन के कपोल से हैं राखी।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

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  • “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल`“ जी ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — रक्षाबंधन का त्योहार भाई बहन के पवित्र प्यार का प्रतिक है, जिसे राखी का त्योहार भी कहा जाता है। रक्षा बंधन पर बहन, भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसके दीर्घायु व सुखी जीवन की प्रार्थना करती है। इसके साथ ही बहन अपने भाई से अपनी सुरक्षा का वचन लेती है, की जीवन में जब भी उस पर कोई मुसीबत आएगा उसका भाई उसकी मदद के लिए आ जायेगा। कृष्ण ने फर्ज निभाया भाई का, द्रोपदी बहन की लाज बचाने को। राखी की शक्ति देखो, कृष्ण दौड़े, दुष्टों को मजा चखाने को। रक्षाबंधन हिन्दुओं का प्रमुख त्योहार है, जिसे पूरे भारत समेत अन्य देशों में भी मनाया जाता है।

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यह कविता (राखी-साखी।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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रक्षा सूत्रों का।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ रक्षा सूत्रों का। ♦

काव्य : हिंदुत्व की राखी।

संसर्ग उर हिय कुसुमित सुमन-सुमन,
तत्वज्ञ आलोक विवुध अंतस् रहे।
बस इक साध्य इष्ट हमारा भरतखंड रहे,
जयध्वनि से निनादित शून्य महालय रहे।

स्कन्ध अनुगत नव्य आलय में,
स्तुत्य-प्रशस्त सम्पूर्ण समस्त जगत रहे।
इसके निमित्त ढलते चलते हम,
स्वस्ति अभिप्रणयन अंत:करण रहे।

ममतामयी दुर्लभ प्रवाहमयी इस माटी की,
वेदित्व मधु पा सब लीन रहे।
बस इक साध्य इष्ट हमारा भरतखंड रहे,
जयध्वनि से निनादित शून्य महालय रहे।

सुगमता के लिये ऐसा करें साधन,
विपत्ति में भी सदैव तत्पर बने।
लक्षित अंतस् साधना बने अनुष्ठान हमारी,
उपासक सेवक बन चले गिरि शेखर बने।

आत्म-अभिमान में भ्रमण करे,
डोले उसे देखे सदा ये संसार।
बस इक साध्य इष्ट हमारा भरतखंड रहे,
जयध्वनि से निनादित शून्य महालय रहे।

नव्य-नूतन मंगल कल्याण बदलाव को,
अंत:पुर से हो सबको स्वीकार।
कैसी भी हो कठिन चुनौती या ललकार,
आर्यधर्म रहे विश्वजनीय नेत्री अपना संस्कार।

वह सुसुप्त है जिनके मन में राष्ट्रधर्म प्यार नहीं,
जो रहे क्रियाशील वो सब करे वैभव-वंदन।
बस इक साध्य इष्ट हमारा भरतखंड रहे,
जयध्वनि से निनादित शून्य महालय रहे।

अटल निश्चय है हमारा,
उद्देश्य निमित्त पथ हम न छोड़ेगें।
इस नूतन युग के हम महीपाल,
आशुतोष उमेश भी साथ निभाऐगें।

आओ मिलकर बाँधें सूत्र राखी का हम,
प्रकृति के इस कर कमलों में।
शुभ मंगलमय हो राष्ट्र हमारा,
दिन-रात इसी में लगे रहें।

संसर्ग उर हिय कुसुमित सुमन-सुमन,
तत्वज्ञ आलोक विवुध अंतस् रहे।
बस इक साध्य इष्ट हमारा भरतखंड रहे,
जयध्वनि से निनादित शून्य महालय रहे।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

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  • “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल`“ जी ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — वह सुसुप्त है जिनके मन में राष्ट्रधर्म प्यार नहीं, जो रहे क्रियाशील वो सब करे वैभव-वंदन। बस इक साध्य इष्ट हमारा भरतखंड रहे, जयध्वनि से निनादित शून्य महालय रहे। रक्षाबंधन का त्योहार भाई बहन के पवित्र प्यार का प्रतिक है, जिसे राखी का त्योहार भी कहा जाता है। रक्षा बंधन पर बहन, भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसके दीर्घायु व सुखी जीवन की प्रार्थना करती है। इसके साथ ही बहन अपने भाई से अपनी सुरक्षा का वचन लेती है, की जीवन में जब भी उस पर कोई मुसीबत आएगा उसका भाई उसकी मदद के लिए आ जायेगा। कृष्ण ने फर्ज निभाया भाई का, द्रोपदी बहन की लाज बचाने को। राखी की शक्ति देखो, कृष्ण दौड़े, दुष्टों को मजा चखाने को। रक्षाबंधन हिन्दुओं का प्रमुख त्योहार है, जिसे पूरे भारत समेत अन्य देशों में भी मनाया जाता है।

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यह कविता (रक्षा सूत्रों का।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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राखी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ राखी। ♦

यमुना ने यम को बांधी राखी,
राखी बनाया अमर, यम को मौत कभी न आती।

बहन भाईयों को दिल से दुआ दे जाती,
अमर रहना मेरे भाई, मन की बात कह जाती।

भरी सभा में किया था नग्न,
द्रोपदी को दुर्योधन की पापी टोली ने।

लाज बचाने आ गए, कृष्ण कन्हैया,
लेके वस्त्र अपनी झोली में।

कृष्ण ने फर्ज निभाया भाई का,
द्रोपदी बहन की लाज बचाने को।

राखी की शक्ति देखो, कृष्ण दौड़े,
दुष्टों को मजा चखाने को।

भाई बहन को भूल न जाए,
ये राखी याद दिलाती है।

जिस भाई को बहन नहीं,
उसको राखी बहुत रुलाती है।

भाई नहीं तो क्या हुआ,
यह भाई से भरा संसार है।

मानो तो सब भाई हैं,
नहीं तो सब बेकार है।

राम भी तरस गए,
बहन का प्यार पाने को।

शांता बिछड़ गई बचपन में,
तड़प उठे राम राखी बंधवाने को।

हर किसी को बहन हो प्रभु,
राखी का त्योहार मनाने को।

हर बहन को भाई मिले,
रक्षा का वचन निभाने को।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150/नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

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  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — रक्षाबंधन का त्योहार भाई बहन के पवित्र प्यार का प्रतिक है, जिसे राखी का त्योहार भी कहा जाता है। रक्षा बंधन पर बहन, भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसके दीर्घायु व सुखी जीवन की प्रार्थना करती है। इसके साथ ही बहन अपने भाई से अपनी सुरक्षा का वचन लेती है, की जीवन में जब भी उस पर कोई मुसीबत आएगा उसका भाई उसकी मदद के लिए आ जायेगा। कृष्ण ने फर्ज निभाया भाई का, द्रोपदी बहन की लाज बचाने को। राखी की शक्ति देखो, कृष्ण दौड़े, दुष्टों को मजा चखाने को। रक्षाबंधन हिन्दुओं का प्रमुख त्योहार है, जिसे पूरे भारत समेत अन्य देशों में भी मनाया जाता है।

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यह कविता (राखी।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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धागे का प्रेम।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ धागे का प्रेम। ♦

ऐसे पावन देश में जन्में हम, करते हैं इस पर गर्व।
देवों की भूमि ये, जहाँ हर माह आते हैं हर्ष भरें पर्व॥

बारह मासों में पावन श्रावण मास तो सदैव ही, हर आयु-वर्ग को हर्षाता रहा।
शिव-स्तुति, हरियाली तीज व रक्षाबंधन जैसा पर्व जीवन को आनंदित बनाता रहा॥

रक्षा-सूत्र का ये पावन पर्व, श्रावण माह की पूर्णिमा को अपना संकल्पभाव ले आएँ।
निश्छल प्रेम, रक्षा-कवच, मर्यादा-बंधन दो आत्माओं को दे जाएँ॥

प्राचीनकाल की ओर मुड़कर देखें, तो एक बात समझ में आये।
जीवनदायिनी वृक्ष भी, बहनों के प्रेम के कच्चे धागे में बंध जाएँ॥

जब इंद्राणी ने अपने सुहाग इंद्र की विजय की झोली फैलाई, भगवान विष्णु के आगे।
दिया आशीष उन्होंने विजयी भव का, कहा, जाकर उनकी कलाई पर बांधे धागें॥

तदोपरांत युद्धक्षेत्र के लिए कोई नरेश जाता, महल के द्वार खोल।
उससे पहले ही रानी तिलक कर, विजय-सूत्र का धागा बांधे अनमोल॥

जब से आँचल का कोना, रक्तरंजित श्रीकृष्ण की उँगली पर बांधा था।
तब से ही इस कर्ज को सूद समेत चुकाने, द्रोपदी को बहन माना था॥

इतिहास गवाह है कि श्रीकृष्ण ने कृष्णा को सूद समेत, चुकाया था ये कर्ज।
वसन का अंबार लगा, रोका चीर-हरण को, निभाया एक धर्म भाई का फर्ज॥

ऐसा ही होता है ये मांगलिक पल, जो सबको घने नेह से भर जायें।
अक्षत-रोली से तिलक कर, कच्चे धागे से स्नेह की उम्र दराज कर जायें॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — रक्षाबंधन का त्योहार भाई बहन के पवित्र प्यार का प्रतिक है, जिसे राखी का त्योहार भी कहा जाता है। रक्षा बंधन पर बहन, भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसके दीर्घायु व सुखी जीवन की प्रार्थना करती है। इसके साथ ही बहन अपने भाई से अपनी सुरक्षा का वचन लेती है, की जीवन में जब भी उस पर कोई मुसीबत आएगा उसका भाई उसकी मदद के ली आ जायेगा। रक्षाबंधन हिन्दुओं का प्रमुख त्योहार है, जिसे पूरे भारत समेत अन्य देशों में भी मनाया जाता है।

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यह कविता (धागे का प्रेम।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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Filed Under: 2022-KMSRAJ51 की कलम से, सुशीला देवी जी की कविताएं।, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: dhaage ka prem, Poem on Raksha Bandhan in Hindi, poet sushila devi poems, Raksha Bandhan in Hindi, sushila devi, sushila devi poems, कवयित्री सुशीला देवी की कविताएं, रक्षा बंधन क्या है इन हिंदी?, रक्षाबंधन का पर्व, रक्षाबंधन पर कविता, रक्षाबंधन पर कविताएँ, रक्षाबंधन पर कुछ कविताएँ, रक्षाबन्धन, राखी का त्यौहार, सुशीला देवी

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