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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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माँ पर कुछ लाइन्स

वो माँ ही तो है।

Kmsraj51 की कलम से…..

Vo Maa Hi Toh Hai | वो माँ ही तो है।

लाती जो अपने सन्तान की होठों पर मुस्कान है।
माँ की ममता में मुस्कराता ये जहान है।
वो माँ ही तो है॥

खुद गीले में सोकर बच्चें को सूखा देती बिछोना।
जिसको कभी पसंद न आये अपने बच्चों का रोना।
वो माँ ही तो है॥

संतान की खातिर टकरा जाए जो भगवान से।
सुखों का कोहिनूर ढूंढ लाये हीरों की खान से।
वो माँ ही तो है॥

जिसके आंचल का साया पाना चाहे भगवान भी।
जिसकी गोद में खेलने का रखे अरमान भी।
वो माँ ही तो है॥

जिसके त्याग, तप से ब्रह्मांड भी गुंजायमान है।
जिसकी ममता के आगे तो झुकता भी भगवान है।
वो माँ ही तो है॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — माँ से ही इस संसार का अस्तित्व है। माँ को धन्यवाद देने और आदर के लिये हर साल 5 मई को मातृ दिवस के रुप में मनाया जाता है। माँ वह है जो हमें जन्म देती है, यहीं कारण है कि संसार में हर जीवनदायनी वस्तु को माँ की संज्ञा दी गयी है। यदि हमारे जीवन के शुरुआती समय में कोई हमारे सुख-दुख में हमारा सदैव ही ध्यान रखती है तो वो माँ ही तो है। मां हमारा पालन-पोषण करके हमें सक्षम बनाती है, हमारे शरीर को बल देती है जिससे हम अपने भविष्य को संवारने की क्षमता प्राप्त करते हैं। जब कभी हम उदास और हतास होते हैं तो मां ब्रह्मांड की उस ऊर्जा की तरह काम करती है जो प्रत्यक्ष रूप से हमारे अंदर आकर बस तो नहीं सकती पर हमें ऊर्जावान अवश्य बना देती है। भगवान से भी बढ़कर। माँ वह शक्ति है जिसके गर्भ से स्वयं भगवान भी जन्म लेकर माँ की गोद में खेलना चाहते है। इस संसार में अगर आपसे कोई निस्वार्थ प्रेम करता है तो वो माँ ही तो है। हर बच्चे को सच्चे तन मन से अपने माता – पिता का सदैव आदर, सम्मान व सेवा करनी चाहिए इस धरा पर माता – पिता ही भगवान है इस बात को भूल ना जाए आप सभी। जय माता दी!

—————

यह कविता (वो माँ ही तो है।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
    {International Internship University and Swarn Bharat Parivar}
  • Teacher’s Icon Award — 2023
  • राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान — 2021
  • सावित्रीबाई फुले ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड — 2022
  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शक्ति संचेतना अवार्ड — 2022
  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
  • 50 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित (राष्ट्रीय स्तर पर)।
  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: Maa Status in Hindi, sushila devi, sushila devi poems, माँ पर कविता इन हिंदी, माँ पर कविता और शायरी, माँ पर कुछ पंक्तियाँ, माँ पर कुछ लाइन्स, मां पर बेस्ट कविता, वो माँ ही तो है, वो माँ ही तो है - सुशीला देवी, सुशीला देवी, सुशीला देवी की कविताएं

माँ की जय हो।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ माँ की जय हो। ♦

तूने अपना नूर गवाया,
तब जा के हमें सृजाया।
पीड़ा सह कर हमें उत्पाया,
अपना दर्द सब अंदर छुपाया।
तेरी जय हो मां!

मल – मूत्र से हमें बचाया,
अपने मुंह का हमें खिलाया।
उंगली पकड़ कर चलना सिखाया,
तोतली जुबां को बतियाना बताया,
अपना दर्द सब अंदर छुपाया।
तेरी जय हो मां!

पाला – पोसा बड़ा बनाया,
सर्दी में गर्मी दी, धूप में छाया।
लकड़ी सी सूखा दी अपनी काया,
अरमान कुचल निज हमें पढ़ाया।
हमारी गलती पर भी हमें न सताया,
अपना दर्द सब अंदर छुपाया।
तेरी जय हो मां!

हांफते – कांपते तुझे वृद्धा -आश्रम पहुंचाया,
हमने जोरू संग गुलछर्रे उड़ाया।
बलिदान तेरा कभी याद न आया,
कितना कर खाती वह बूढ़ी काया?
तुझमें तो है करूणा सिंधु समाया,
सब के बाबजूद भी कुछ न बताया,
अपना दर्द सब अंदर छुपाया।
तेरी जय हो मां!

हम ढीठ है, एहसान फरामोश,
हमें रही न बचपन की होश।
तूने कैसे बड़ा किया था, हमें पाल-पोष,
कोई हमें गड़ाता निगाहें था तो,
दिखाती थी तू कैसा जोश?
जोरू की तिरेरी से ही डर गए हम,
है बड़ा ही यह अफसोस।
तू है कि अपने दर्द को,
रही है अंदर ही अंदर मां मसोस।
तेरी जय हो मां!

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — कड़वा है मगर सत्य यही है इस संसार में माँ की जगह कोई और नहीं ले सकता हैं। माँ जब से गर्भवती होती हैं तभी से अपने बच्चे का ख्याल रखती है। जब जन्म होता है तभी से उसके लिए दिन रात एक कर उसका पूरा ख्याल रखती है, उसे पाल-पोष बड़ा करती हैं। कोई भी दुःख आये वह अपने बच्चे तक उस दुःख को पहुंचने भी नहीं देती हैं। माँ तो माँ होती है, एहसान फरामोश आज की पीढ़ी अपने माँ बाप का ख्याल ही नहीं रखती है। आजकल के युवा अपने जोरू का गुलाम इस कदर हो गए है की उसके कहने पर माँ बाप को वृद्धाआश्रम छोड़ आते है, वो ये भूल जाते है की माँ ने ही हमे जन्म दिया है और पाल-पोष कर बड़ा किया हैं। माँ की स्नेह भरी ममता को भूल जाते है।

—————

यह कविता (माँ की जय हो।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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Filed Under: 2022-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता, हेमराज ठाकुर जी की कविताएं। Tagged With: kavi hemraj thakur poems, motivational poem in hindi, poem on mother in hindi, poet hemraj thakur, प्रेरणादायक हिन्दी कविताएँ, माँ की ममता पर गजल, माँ की ममता पर शायरी, माँ की ममता स्टेटस, माँ की महिमा पर कविता, माँ पर कविता, माँ पर कविता और शायरी, माँ पर कुछ लाइन्स, माँ पर दो लाइन कविता, मोटिवेशनल कविता हिंदी में, हिंदी कविता संग्रह, हेमराज ठाकुर, हेमराज ठाकुर की कविताएं

माँ मेरी प्यारी माँ।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ माँ मेरी प्यारी माँ। ♦

मेरी प्यारी माँ भगवान की अनमोल कृति है,
मेरी प्यारी माँ प्यार और त्याग की मूर्ति है।

सृष्टि का आधार मेरी प्यारी माँ है।
प्रकृति का अनुपम तोहफा माँ होती है।

माँ की आँचल छाया में हम सकूँन पाते है,
माँ शक्ति का अवतार और रूप है।

ममता और प्यार की अनवरत धारा,
मेरी प्यारी माँ है स्नेह और कोमल स्पर्श से थपकी।

देती मेरी प्यारी माँ है,
माँ ही हमें संघर्षों से लड़ना सिखाती है।

माँ हम आपके ऋणी है आपने हमें जन्म दिया है,
पाल पोसकर पढ़ाया, लिखाया, संस्कार दिए है।

माँ तुम रूप हो भगवान का जिसने ह्दय में स्थान दिया,
मेरी प्यारी माँ मातृत्व की अनमोल धरोहर है।

माँ जैसा अटूट रिश्ता संसार मे कोई नहीं है,
माँ के चरणों मे हम वंदन और अर्चन करते है।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

—————

  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — माता शब्द में ‘मा’ का अर्थ है ममतामयी तथा ‘ता’ का अर्थ है तारक अर्थात तारनेवाली। माँ इस संसार रूपी भंवर से रक्षा करनेवाली होती है। माँ के स्मरण मात्र से ही एक भावभीनी सुगंध से मन का हर कोना-कोना महक उठता है, सुवासित हो उठता है। माँ के समान कोई भी प्रिय नहीं होता। माँ के कई रूप हैं – वह जननी है मातृ शक्ति है, अम्मा, माई भी है तो आई भी हैं। माँ का महत्व जीवन में क्या हैं उनसे पूछो जिनकी माँ नही हैं।

—————

यह कविता (माँ मेरी प्यारी माँ।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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Filed Under: 2022-KMSRAJ51 की कलम से, पूनम गुप्ता जी की कविताएं।, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: poet poonam gupta, poonam gupta poems, पूनम गुप्ता, पूनम गुप्ता की कविताएं, माँ का महत्व, माँ की ममता पर कविता, माँ की ममता पर लेख, माँ के बिना जीवन, माँ पर कुछ लाइन्स, माँ पर दो लाइन

माँ।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ माँ। ♦

माँ अपने बच्चों को अपने,
आँचल में छिपा ले इस कदर।

काला टीका भी लगाती है,
कहीं लग न जाये नज़र।

माँ का जब बालक रोता है,
तब माँ का दिल भी रोता है।

इतना विशाल ह्रदय दिया है,
मालिक ने माँ को।

खुद अपने मुख से जो चाहे कह दे,
पर कुछ न कहने दे जहाँ को।

कुछ भरे ऐसे प्यार भरे मोती,
खुदा ने इसकी सीरत में।

जिनका स्वाद होता ऐसा,
जैसा अमृत में।

माँ जैसा इस जहां में कोई,
नही मिलेगा कभी तुम्हें।

देव भी इच्छा रखते है,
माँ के आँचल की पनाह पाने की।

मत भूलों माँ के वंदन को,
शक्ति रखती है, ये इतनी,
हर भूल माफ़ कर दे ज़माने की।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, कविता के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – माँ के गुणों को, प्यार को, निस्वार्थ स्नेह को, कैसी भी विपरीत हालात हो, माँ ने तुम्हारा ख्याल रखा है। माँ का प्यार ऐसा है की माँ की आँचल के लिए देवी – देवता भी तरसते हैं। इसलिए सदैव ही माँ के सेवा व आदर सम्मान और वंदन करो। माँ का प्यार उनसे पूछो जिनके माँ नही है।

—————

यह कविता (माँ।) “श्रीमती सुशीला देवी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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