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“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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विदुषी शर्मा जी

ढाई अक्षर।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

♦ ढाई अक्षर। ♦

शिवम् शरणम् गच्छामि॥
शिवो वेदा वेदो शिवम्॥

अक्षर ढाई – जिसमें बहुत कुछ बन्धु मेरे भाई॥

ज्ञान मार्ग जब खोजने निकला।
मार्ग मिला – अलबेला जहां भी जाऊं।
जिधर भी देखूं – मिले ढाई अक्षर का मेला॥

सोचा इक पल – ध्यान लगा कर।
क्या होता है – अक्षर ढाई।
आया मेरी समझ में जो।
बतलाता हूं मैं वो बन्धु / भाई॥

रह जाता सब ज्ञान अधूरा।
जो ना मिलता – उत्तर बन्धु / भाई॥

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ढाई अक्षर का वक्र और ढाई अक्षर का तुण्ड।
ढाई अक्षर की रिद्धि और ढाई अक्षर की सिद्धि॥

ढाई अक्षर का शंभु और ढाई अक्षर की अम्बा।
ढाई अक्षर का ब्रम्हा और ढाई अक्षर की सृष्टि॥

ढाई अक्षर का विष्णु और ढाई अक्षर की लक्ष्मी।
ढाई अक्षर का कृष्ण और ढाई अक्षर की कांता॥
(* कांता – राधा रानी का दूसरा नाम)

ढाई अक्षर की दुर्गा और ढाई अक्षर की शक्ति।
ढाई अक्षर की श्रद्धा और ढाई अक्षर की भक्ति॥

ढाई अक्षर का त्याग और ढाई अक्षर का ध्यान।
ढाई अक्षर की तृप्ति और ढाई अक्षर की तृष्णा॥

ढाई अक्षर का धर्म और ढाई अक्षर का कर्म।
ढाई अक्षर का भाग्य और ढाई अक्षर की व्यथा॥

ढाई अक्षर का ग्रन्थ और ढाई अक्षर का संत।
ढाई अक्षर का शब्द और ढाई अक्षर का अर्थ॥

ढाई अक्षर का सत्य और ढाई अक्षर का मिथ्या।
ढाई अक्षर की श्रुति और ढाई अक्षर की ध्वनि॥

ढाई अक्षर की अग्नि और ढाई अक्षर का कुण्ड।
ढाई अक्षर का मंत्र और ढाई अक्षर का यंत्र॥

ढाई अक्षर का प्यार और ढाई अक्षर का स्वार्थ।
ढाई अक्षर की सांस और ढाई अक्षर के प्राण॥

ढाई अक्षर का मित्र और ढाई अक्षर का शत्रु।
ढाई अक्षर का प्रेम और ढाई अक्षर की घृणा॥

ढाई अक्षर का जन्म ढाई अक्षर की मृत्यु।
ढाई अक्षर की अस्थि और ढाई अक्षर की अर्थी॥

जन्म से लेकर मृत्यु तक, हम बंधे हैं ढाई अक्षर में।
हैं ढाई अक्षर ही वक़्त में और ढाई अक्षर ही अंत में।
समझ ना पाया कोई भी है रहस्य क्या ढाई अक्षर में॥॥

♦ डॉ• विदुषी शर्मा – नई दिल्ली ♦
_____
हम दिल से आभारी हैं डॉ• विदुषी शर्मा जी के प्रेरणादायक लेख (ढाई अक्षर) हिन्दी में Share करने के लिए।
About – डॉ• विदुषी शर्मा जी,
आप अभी कार्यरत हैं – दिल्ली स्टेट की जनरल सेक्रेटरी इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स आर्गेनाईजेशन. (You are currently working – Delhi State General Secretary International Human Rights Organization.)
Email ID: neerjasharma98@gmail.com & Blog: http://educationalvidushi.blogspot.com/
 —™—

विदुषी शर्मा जी के लिए मेरे विचार:

♣ 🙂 “विदुषी शर्मा जी” ने बहुत ही सरल शब्दों में “ढाई अक्षर” के गुणों का प्यार भरा संयोजित मनोरम वर्णन किया है। हर एक शब्द में अलाैकिक सार भरा हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। “ढाई अक्षर” के गुण और प्यार, सागर के गहराई से भी ज्यादा हैं। सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान गहराई से हर शब्दाे का सार समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें। ढाई अक्षर के शब्दों को एक ही लय में कविता के रूप में पीरो दिया, जनमानस के लिए। बहुत ही अच्छा आपकी लेखनी का कमाल है ये। आपकी लेखनी यूं ही चलती रहे, लोगों के कल्याण के लिए।

जरूर पढ़े:〉 दिल से कागज में उतर ही जाती है।

जरूर पढ़े:〉 हम दोनों की दो-दो आंखें।

♥⇔♥

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAJ51

 

 

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वर्तमान समय में एक शिक्षक की भूमिका।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ वर्तमान समय में एक शिक्षक की भूमिका। ♦

(विद्यार्थियों के संदर्भ में)

वर्तमान युग है आधुनिकता का, वैज्ञानिकता का, व्यस्तता का, अस्थिरता का, जल्दबाजी का। आज का विद्यार्थी जीवन भी इन्ही समस्याओं से ग्रसित है। आज का विद्यार्थी जीवन पहले की तरह सहज, शांत और धैर्यवान नहीं ही रह गया है। क्योंकि आगे बढ़ना और तेजी से बढ़ना उसकी नियति, मजबूरी बन गई है। वह इसलिए कि यदि वह ऐसा नहीं करेगा तो ज़िंदगी की दौड़ में वह पीछे रह जायगा। तो यह वक्त का तकाजा है। ऐसे समय में विद्यार्थी जीवन को एक सही, उचित, कल्याणकारी एवं दूरदर्शी दिशा निर्देश देना एक शिक्षक का पावन कर्तव्य है। वैसे तो शिक्षक की भूमिका सदैव ही अग्रगण्य रही है क्योंकि —

“राष्ट्र निर्माता है वह जो, सबसे बड़ा इंसान है, किसमें कितना ज्ञान है, बस इसको ही पहचान है”।

एक राष्ट्र को बनाने में एक शिक्षक का जितना सहयोग है, योगदान है, उतना शायद किसी और का हो ही नहीं सकता। क्योंकि एक राष्ट्र को उन्नति के चरम शिखर पर ले जाते हैं उसके राजनेता, डॉक्टर, इंजीनियर, उद्योगपति, लेखक, अभिनेता, खिलाड़ी आदि और परोक्ष रूप से इन सबको बनाने वाला कौन है ? एक शिक्षक।

वर्तमान समय में विद्यार्थियों के संदर्भ में एक शिक्षक की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है। उसके अनेक कारण हो सकते हैं। जैसे आज-कल विद्यार्थी बहुत ही सजग, कुशल, अद्यतन (Updated) होने के साथ-साथ बहुत अस्थिर और अविश्वासी भी होते जा रहे हैं। इसके कारण चाहे जो कुछ भी हो परंतु एक शिक्षक को आज के ऐसे ही विद्यार्थियों को उचित प्रशिक्षण, सदुपयोगी शिक्षण और सटीक कल्याणकारी, दूरगामी मार्गदर्शन प्रदान करते हुए उन्हें भावी देश के कर्णधार, जिम्मेदार देशभक्त नागरिकों में परिणित करना है। एक शिक्षक की जिम्मेदारी बहुत अधिक होती है। क्योंकि उसे ना केवल बच्चों का बौद्धिक, नैतिक, मनोवैज्ञानिक ,शारीरिक विकास करना है अपितु सामाजिक, चारित्रिक, एवं सांवेगिक विकास करना भी आज शिक्षक का ही कर्तव्य है।

आज उसे अपने आदर्शों के द्वारा, अपने चरित्र के द्वारा बच्चों के मानस पटल पर अपनी ऐसी छाप छोड़नी पड़ेगी कि जिससे भविष्य में यह बच्चे जब —

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्‍वरः।
गुरु साक्षात्‌ परब्रह्म तस्मै श्रीगुरुवे नमः॥

…का उच्चारण करें तो बंद आंखों के सामने हमारा चेहरा यानि एक शिक्षक का चेहरा उन्हें दिखाई दे। यह एक चुनौती भरा कार्य है। परंतु सच्चा शिक्षक वही है जिसे उसके विद्यार्थी जीवन भर अपना गुरु मानते रहें न कि सिर्फ विद्यालय प्रांगण के अंदर तक यह सीमा शेष रह जाए। ऐसा करने के लिए सबसे पहले एक शिक्षक को स्वयं को अनुशासित करते हुए चारित्रिक, नैतिक ,धार्मिक आदि गुणों का विकास करना होगा। क्योंकि इन सब के बिना हमारी आंतरिक भावनाओं का उदय नहीं हो सकता।

शिक्षक को अधिक से अधिक बच्चों के साथ इंटरेक्शन (Interaction) यानि वार्तालाप करना चाहिए ताकि उनके व्यक्तित्व पर यथासंभव अपना प्रभाव डाल सके। अपने अनुभव, अपनी शिक्षा, अपने प्रेम, समर्पण अपनी सृजन शक्ति, अपने त्याग, अपने धैर्य आदि का पूर्ण प्रदर्शन करते हुए बच्चों के भी अनुभव, उनके मूल विचार, उनकी भावनाओं आदि को जानने का प्रयास करें और यथासंभव उन्हें अभिप्रेरित करने का प्रयास करें। क्योंकि इन्ही सब विद्यार्थियों में से ही भविष्य में हमारे देश का नाम रोशन करने वाले कई नागरिक पैदा होंगे।

आदर्श शिक्षक का कार्य बहुत ही महत्वपूर्ण है। एक बात और कि जिस प्रकार शिक्षा एक अंतहीन प्रक्रिया है Education is an Endless Process. उसी प्रकार शिक्षण भी अंतहीन प्रक्रिया है।

ऐसा मैं मानती हूं। Teaching and Learning Both are Endless क्योंकि कोई भी इंसान जैसे पूरी जिंदगी सीखता रहता है, सिखाता रहता है। उसी प्रकार एक शिक्षक का कार्य भी शिक्षा देना है जो कि वह निरंतर देता रहता है। इसलिए उसे किसी विशेष प्रांगण (Campus) किसी विषय, किसी विशेष समय अंतराल, किसी विशेष सहायक सामग्री की आवश्यकता नहीं होती। यह मेरे मूल विचार हैं।

क्योंकि एक अध्यापक जब अध्यापकीय अहर्ताओं, योग्यताओं से पूर्ण हो जाता है, तब वह शिक्षा देना प्रारंभ करता है। मैं यहां यह पूछना चाहती हूं कि जिन शिक्षको को नौकरी नहीं मिल पाती तो क्या वह शिक्षा प्रदान नहीं करते? और जो शिक्षक रिटायर हो जाते हैं तो क्या वे रिटायरमेंट के बाद शिक्षा प्रदान नहीं करते? क्या वह कहते कि अब हम रिटायर हो चुके हैं अब हम शिक्षा प्रदान नहीं करेंगे, शिक्षण प्रदान नहीं करेंगे? ऐसा करने में हम सक्षम नहीं है।

नहीं, ऐसा कदापि नहीं है। इसके विपरीत एक शिक्षक तो बिना किसी मांग के, बिना कहे अपना सर्वस्व ज्ञान अनुभव में डुबोकर प्रदान करने के लिए सदैव समाज के सामने तत्पर रहता है। वास्तव में एक शिक्षक की वर्तमान संदर्भ में भूमिका यह है कि जो एक विद्यार्थी के लिए उचित हो, कल्याणकारी हो, दूरगामी हो, प्रायोगिक ( Practical) हो, धनोपार्जन में सहायक हो ऐसी शिक्षा को निरंतर प्रदान करते रहना।
अंत में मैं यही कहना चाहती हूँ कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए एक सजग, उदात्त चरित्र, धार्मिक नैतिकता परिपूर्ण शिक्षक की आवश्यकता है ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी को हम ऐसे भारतीय नागरिक बनाने में सफल हो सकें जो विश्व में भारत का नाम रोशन कर सकें और पुनः भारत को ‘जगतगुरु’ की उपाधि प्राप्त करवा सके। हम सब की भी यही अभिलाषा है।

हमारा साहित्य समाज को न केवल ज्ञान, बोध और मूल्य प्रदान करता है अपितु एक चिंतन की दिशा भी प्रदान करता है ताकि हम सभी यथासंभव प्रयास कर सके जिससे कि भारतीय मूल्य, भारतीय सभ्यता एवम संस्कृति, भारतीय साहित्य का विश्व में सदैव उच्चस्थ स्थान बना रहे तथा भारत पुन: “जगदगुरु” (विश्वगुरु) की उपाधि ग्रहण करे वो भी अपने अक्षय साहित्य, विशुद्ध सभ्यता एवं अलौकिक संस्कृति के बल पर।

इन्ही शुभकामनाओं के साथ — शुभमस्तु।

ज़रूर पढ़ें — साहित्य समाज और संस्कृति।

♦ डॉ विदुषी शर्मा जी – नई दिल्ली ♦

—————

  • ” लेखिका डॉ विदुषी शर्मा जी“ ने अपने इस लेख से, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है — आज के समय में शिक्षक का क्या कर्तव्य होना चाहिए? उन्हें बच्चों के साथ कैसे व्यवहार करना चाहिए, जिससे बच्चों को बुरा भी ना लगे और अच्छे से पढ़े।

—————

यह लेख (वर्तमान समय में एक शिक्षक की भूमिका।) “डॉ विदुषी शर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख / कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम डॉ विदुषी शर्मा, (वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर) है। अकादमिक काउंसलर, IGNOU OSD (Officer on Special Duty), NIOS (National Institute of Open Schooling) विशेषज्ञ, केंद्रीय हिंदी निदेशालय, उच्चतर शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार।

ग्रंथानुक्रमणिका —

  1. डॉ राधेश्याम द्विवेदी — भारतीय संस्कृति।
  2. प्राचीन भारत की सभ्यता और संस्कृति — दामोदर धर्मानंद कोसांबी।
  3. आधुनिक भारत — सुमित सरकार।
  4. प्राचीन भारत — प्रशांत गौरव।
  5. प्राचीन भारत — राधा कुमुद मुखर्जी।
  6. सभ्यता, संस्कृति, विज्ञान और आध्यात्मिक प्रगति — श्री आनंदमूर्ति।
  7. भारतीय मूल्य एवं सभ्यता तथा संस्कृति — स्वामी अवधेशानंद गिरी (प्रवचन)।
  8. नवभारत टाइम्स — स्पीकिंग ट्री।
  9. इंटरनेट साइट्स।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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पर्यावरण दिवस और हमारा भारत।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ पर्यावरण दिवस और हमारा भारत। ϒ

पिछले दिनो हमनें विश्व पर्यावरण दिवस (५ जून)  को मनाया। अगर मीडिया की तरफ देखें तो हमने यह पर्यावरण दिवस बहुत ही रुचि, सार्थकता, कर्तव्यपरायणता के साथ सम्पन्न किया। परंतु क्या वास्तव में ही ऐसा हो पाया है ? हम सब में से कितने ही लोग ऐसे हैं जो सब कुछ जानते हुए भी पर्यावरण संरक्षण की तरफ ध्यान नहीं देते। जो लोग इन सबसे अनभिज्ञ हैं शायद वो प्रकृति को इतना नुकसान नहीं पहुंचाते होंगे जितना हम शिक्षित और अभिजात्य वर्ग प्रकृति का दोहन कर रहें हैं। वास्तव में ही ये चिंताजनक है। इस ओर उचित जागरूकता, प्रकृति प्रेम, संस्कार, प्राकृतिक समीपता, पर्यावरण संरक्षण की भावनाएँ ही इस समस्या का निदान प्रस्तुत कर सकती हैं।

अभी हाल ही में UNITED NATION द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट चाैकाने वाली है जिसमें कुछ देशों के आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार प्रस्तुत देशों की कुल जनसंख्या और कुल पेड़ों की संख्या का अनुपात निकाल कर प्रति व्यक्ति पेड़ों की संख्या निकाली गई है जो इस प्रकार है – …..
कनाडा –    8953   ( पेड़, प्रति व्यक्ति )
रशिया –    4461   ( पेड़, प्रति व्यक्ति )
अमेरिका –   716   ( पेड़, प्रति व्यक्ति )
चीन     –  102   ( पेड़, प्रति व्यक्ति )
भारत    –   28   ( पेड़, प्रति व्यक्ति )

यानि एक व्यक्ति के लिए इन देशो के पास इतनी संख्या में पेड़ मौजूद हैं। इस संदर्भ में हमारे भारत की दशा बहुत ही दयनीय और  चिंताजनक है। PER HEAD TREES IN OUR COUNTRY IS LOWEST IN THE WORLD. प्रत्येक 5 वर्ष में हमारे वातावरण के तापमान में 1`C का इजाफा हो रहा है जो पूरी तरह से मानवजाति के लिए हानिकारक है। सूर्य के बढ़ते ताप का सही प्रयोग करने के लिए अमेरिका के एलेन मास्क ELEN MASK ने एक कंपनी बनाई है जिसका नाम है TESLA टेस्ला जो धरती को बचाने और एनवायरनमेंट को सुधारने की चाहत में यह कंपनी ऐसे कई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है जो पूरी दुनियां को बदलने का माद्दा रखते हैं जैसे सोलर एनर्जी से चलने वाली कारें, स्पेसशिप, एनर्जी सोल्यूशन आदि। हालांकि इस ओर अब जागरूकता बढ़ती जा रही है। परंतु जब तक हर प्राणी सक्रियता से और पूर्ण तन्मयता से प्रकृति संरक्षण की ओर ध्यान नहीं देगा तब तक परिणाम संतोषजनक नहीं प्राप्त होंगे क्योंकि हम जितना प्राकृतिक संरक्षण कर पाते हैं दूसरे हिस्से में उससे अधिक प्रकृति का दोहन हो जाता है। अत: इस ओर ध्यान देना प्रत्येक प्राणी मात्र का पावन कर्तव्य है।

तो आओ आज हम सब ये प्रण लें कि –
पर्यावरण बचाएं हम, अधिक पेड़ लगाएँ हम।
और
ये संदेश निभाना है, हम सबको पेड़ लगाना है॥

©- विदुषी शर्मा जी, दिल्ली ∇

ID : neerjasharma98@gmail.com

विदुषी शर्मा जी।

हम दिल से आभारी हैं विदुषी शर्मा जी के प्रेरणादायक हिन्दी Article “पर्यावरण दिवस और हमारा भारत” साझा करने के लिए।

विदुषी शर्मा जी के लिए मेरे विचार:

♣ “विदुषी शर्मा जी” ने बहुत ही सरल शब्दो में “पर्यावरण दिवस और हमारा भारत” पर अपने विचार प्रस्तुत किये है – जो विचार करने योग्य है।

पढ़ें – विमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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Editor in Chief, Founder & CEO
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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति–(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

∗ निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

* क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

* KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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In English

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