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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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Vidushi Sharma

ढाई अक्षर।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

♦ ढाई अक्षर। ♦

शिवम् शरणम् गच्छामि॥
शिवो वेदा वेदो शिवम्॥

अक्षर ढाई – जिसमें बहुत कुछ बन्धु मेरे भाई॥

ज्ञान मार्ग जब खोजने निकला।
मार्ग मिला – अलबेला जहां भी जाऊं।
जिधर भी देखूं – मिले ढाई अक्षर का मेला॥

सोचा इक पल – ध्यान लगा कर।
क्या होता है – अक्षर ढाई।
आया मेरी समझ में जो।
बतलाता हूं मैं वो बन्धु / भाई॥

रह जाता सब ज्ञान अधूरा।
जो ना मिलता – उत्तर बन्धु / भाई॥

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ढाई अक्षर का वक्र और ढाई अक्षर का तुण्ड।
ढाई अक्षर की रिद्धि और ढाई अक्षर की सिद्धि॥

ढाई अक्षर का शंभु और ढाई अक्षर की अम्बा।
ढाई अक्षर का ब्रम्हा और ढाई अक्षर की सृष्टि॥

ढाई अक्षर का विष्णु और ढाई अक्षर की लक्ष्मी।
ढाई अक्षर का कृष्ण और ढाई अक्षर की कांता॥
(* कांता – राधा रानी का दूसरा नाम)

ढाई अक्षर की दुर्गा और ढाई अक्षर की शक्ति।
ढाई अक्षर की श्रद्धा और ढाई अक्षर की भक्ति॥

ढाई अक्षर का त्याग और ढाई अक्षर का ध्यान।
ढाई अक्षर की तृप्ति और ढाई अक्षर की तृष्णा॥

ढाई अक्षर का धर्म और ढाई अक्षर का कर्म।
ढाई अक्षर का भाग्य और ढाई अक्षर की व्यथा॥

ढाई अक्षर का ग्रन्थ और ढाई अक्षर का संत।
ढाई अक्षर का शब्द और ढाई अक्षर का अर्थ॥

ढाई अक्षर का सत्य और ढाई अक्षर का मिथ्या।
ढाई अक्षर की श्रुति और ढाई अक्षर की ध्वनि॥

ढाई अक्षर की अग्नि और ढाई अक्षर का कुण्ड।
ढाई अक्षर का मंत्र और ढाई अक्षर का यंत्र॥

ढाई अक्षर का प्यार और ढाई अक्षर का स्वार्थ।
ढाई अक्षर की सांस और ढाई अक्षर के प्राण॥

ढाई अक्षर का मित्र और ढाई अक्षर का शत्रु।
ढाई अक्षर का प्रेम और ढाई अक्षर की घृणा॥

ढाई अक्षर का जन्म ढाई अक्षर की मृत्यु।
ढाई अक्षर की अस्थि और ढाई अक्षर की अर्थी॥

जन्म से लेकर मृत्यु तक, हम बंधे हैं ढाई अक्षर में।
हैं ढाई अक्षर ही वक़्त में और ढाई अक्षर ही अंत में।
समझ ना पाया कोई भी है रहस्य क्या ढाई अक्षर में॥॥

♦ डॉ• विदुषी शर्मा – नई दिल्ली ♦
_____
हम दिल से आभारी हैं डॉ• विदुषी शर्मा जी के प्रेरणादायक लेख (ढाई अक्षर) हिन्दी में Share करने के लिए।
About – डॉ• विदुषी शर्मा जी,
आप अभी कार्यरत हैं – दिल्ली स्टेट की जनरल सेक्रेटरी इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स आर्गेनाईजेशन. (You are currently working – Delhi State General Secretary International Human Rights Organization.)
Email ID: neerjasharma98@gmail.com & Blog: http://educationalvidushi.blogspot.com/
 —™—

विदुषी शर्मा जी के लिए मेरे विचार:

♣ 🙂 “विदुषी शर्मा जी” ने बहुत ही सरल शब्दों में “ढाई अक्षर” के गुणों का प्यार भरा संयोजित मनोरम वर्णन किया है। हर एक शब्द में अलाैकिक सार भरा हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। “ढाई अक्षर” के गुण और प्यार, सागर के गहराई से भी ज्यादा हैं। सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान गहराई से हर शब्दाे का सार समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें। ढाई अक्षर के शब्दों को एक ही लय में कविता के रूप में पीरो दिया, जनमानस के लिए। बहुत ही अच्छा आपकी लेखनी का कमाल है ये। आपकी लेखनी यूं ही चलती रहे, लोगों के कल्याण के लिए।

जरूर पढ़े:〉 दिल से कागज में उतर ही जाती है।

जरूर पढ़े:〉 हम दोनों की दो-दो आंखें।

♥⇔♥

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आप सभी का प्रिय दोस्त

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।~Kmsraj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAJ51

 

 

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Filed Under: 2020-KMSRAJ51 की कलम से, ढाई अक्षर।, हिन्दी साहित्य Tagged With: dhaee akshar par kots, Vidushi Sharma, ढाई अक्षर का अर्थ, ढाई अक्षर का त्याग, ढाई अक्षर का प्यार, ढाई अक्षर का मंत्र, ढाई अक्षर की राशि, ढाई अक्षर के शब्द, ढाई अक्षर पर कविता, ढाई अक्षर पर कोट्स, ढाई अक्षर प्रेम का, ढाई अक्षर प्रेम के दोहा, ढाई अक्षर वाले शब्द, ढाई अक्षर।, विदुषी शर्मा जी

प्रथम गुरु माता।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ प्रथम गुरु माता। ϒ

प्रथम गुरु माता – Pratham Guru Mata

महर्षि वेदव्यास जी के अनुसार …..

“पितुरप्यधिका माता   
गर्भधारणपोषणात् ।
अतो हि त्रिषु लोकेषु 
नास्ति मातृसमो गुरुः”॥
गर्भ को धारण करने और पालनपोषण करने के कारण माता का स्थान पिता से भी बढकर है। इसलिए तीनों लोकों में माता के समान कोई गुरु नहीं अर्थात् माता परमगुरु है।
“नास्ति गङ्गासमं तीर्थं 
नास्ति विष्णुसमः प्रभुः।
नास्ति शम्भुसमः पूज्यो
नास्ति मातृसमो गुरुः”॥
गंगाजी के समान कोई तीर्थ नहीं, विष्णु के समान प्रभु नहीं और शिव के समान कोई पूज्य नहीं और माता के समान कोई गुरु नहीं।
निर्माण यानी “सृजन”। सृजन की शक्ति प्रकृति ने केवल नारी जाति को ही प्रदान की है। (हालांकि बीज तत्व की महिमा को नकारा नहीं जा सकता।) नारी वह है जो निर्माण करती है, सृष्टि का पोषण करती है, संरक्षण करती है, पुष्पित-पल्लवित करती है। नारी जाति के बिना पुरुष का, इस विश्व का अस्तित्व संभव नहीं है। नारी हर रूप में पूजनीय है। जब एक मां बनती है तो उसके ऊपर बहुत अधिक जिम्मेदारी आ जाती है। मां वह है जो अपने बच्चे को हर तरह से, हर हर दृष्टि से सुरक्षित, संरक्षित करती है। और गर्भ (गर्भाधान) से लेकर जब तक बच्चे माँ की बात सुने, तब तक वह केवल उचित संस्कार और उचित शिक्षा ही प्रदान करती है। मां के द्वारा प्रदान संस्कार व्यक्ति के मानस पटल पर आजीवन रहते हैं। हमारा इतिहास ऐसी घटनाओं से भरा पड़ा है जिसमें बचपन में जिन महापुरुषों ने अपनी मां से वीर रस की कविताएं, कहानी सुनी और देश के लिए अपनी जान गवा दी। एक मां अपने बच्चे को हर प्रकार से समाज उपयोगी, मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण इंसान बनाना चाहती है। इसलिए अपने पूरे तन, मन, धन से इस बात का प्रयास करती है कि उसका बच्चा एक अच्छा सभ्य नागरिक बन सके एवं मानवता के लिए, समाज के लिए, देश के लिए वह कुछ भी करने के लिए सदैव तत्पर रहे। इस संदर्भ में मैं अपनी स्वरचित कविता की  पंक्तियां कहना चाहूंगी जिसमें एक माँ की महिमा का वर्णन है __
♥ माँ ♥

माँ है तो श्री है, आधार है क्योंकि,
प्रकृति, धरती एक माँ का ही तो प्रकार है।
                    
माँ है तो आसक्ति है क्योंकि,
माँ में ही तो असीम शक्ति है।
                     
माँ है तो त्याग है, बलिदान हैं क्योंकि,
                                  माँ में सिमटा एक बच्चे का पूरा जहान है।                              
                       
माँ वो है जो खुद मिटकर एक बच्चे को बनाती है
क्योंकि – पत्थर पर पिसकर ही हिना रंग लाती है।
                       
माँ है तो परिवार है, संस्कार है, क्योंकि,
केवल माँ में ही तो ममता है, प्यार है, दुलार है।

                      
माँ है तो जन्म है, बचपन है, लोरी है क्योंकि, 
माँ की ममता एक रेशम की डोरी है। 

                      
माँ है तो कृष्ण है, राम है, बलराम भी है क्योंकि,
माँ के बिना असम्भव इन्सान तो क्या भगवान भी है। 

                       
माँ है तो दादी है, नानी है और, 
एक बालक के बिना, माँ भी एक अधूरी कहानी है।

माँ है तो सबका बचपन अनूठा, निराला है, क्योंकि माँ ही तो हर बच्चे की प्रथम पाठशाला है।
 🙂 जरूर पढ़े – प्रसन्नता बाहर से नहीं अंदर से आती है।
इस कविता के माध्यम से हमने देखा कि मां व्यक्ति के जीवन में क्या कर सकती है और मां के बिना यह जीवन ही नहीं है। उसकी शिक्षा के बिना हमारा कोई अस्तित्व ही नहीं बन पाएगा क्योंकि मां प्रथम गुरु है। वह गर्भस्थ शिशु से लेकर अपने जीवन के अंत तक, अपने बच्चे को केवल अच्छे संस्कार, अच्छी शिक्षा, किसी प्रतिफल की इच्छा किए बिना, प्रेम, ममता और दुलार के साथ प्रदान करती है। उसमें उसका कोई भी स्वार्थ, कोई भी लाभ निहित नहीं होता। इस दुनिया में कोई भी व्यक्ति यदि कुछ भी प्रदान करता है तो उसमें प्रतिफल पाने का (किसी न किसी तरीके से, प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से) उसका लक्ष्य होता है। एक माता-पिता ही होते हैं जिनमें कभी भी किसी भी प्रकार का प्रतिफल पाने की कोई इच्छा नहीं होती। वह सदैव अपने बच्चों का केवल कल्याण और कल्याण ही चाहते हैं और यह चाहते हैं कि उनके बच्चे सदा प्रगति के पथ पर अग्रसर रहें और सदा खुश रहें। इससे ज्यादा मां के बारे में और क्या कहा जा सकता है। मां केवल मां है। प्रथम गुरु है, आदरणीय है। दुनिया में सभी का ऋण चुकाया जा सकता है परंतु एक मां के ऋण से कभी भी उऋण नहीं हुआ जा सकता। इसीलिए कहा भी है सबसे पहले “मातृ देवो भव”आता है। मां चाहे कोई भी हो सदैव आदरणीय हैं। अतः अंत में बस यही कहना चाहूंगी कि __
एक माँ की बस यही कहानी है,
उसके आँचल में दूध और पाँव में जिंदगानी है,
माँ और माटी का सदियों पुराना नाता है, इन दोनों की हस्ती को चाहकर भी भला कौन मिटा पाता है, 
एक जननी है तो दूसरी मातृभूमि भारत माता है।
♦ डॉ• विदुषी शर्मा – नई दिल्ली ♦
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विदुषी शर्मा जी के लिए मेरे विचार:

♣ 🙂 “विदुषी शर्मा जी” ने बहुत ही सरल शब्दों में माँ के गुणों और प्यार का मनोरम वर्णन किया है। हर एक शब्द में अलाैकिक सार भरा हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। माँ के गुण और प्यार सागर के गहराई से भी ज्यादा हैं। सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान गहराई से हर शब्दाे का सार समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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पर्यावरण दिवस और हमारा भारत।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ पर्यावरण दिवस और हमारा भारत। ϒ

पिछले दिनो हमनें विश्व पर्यावरण दिवस (५ जून)  को मनाया। अगर मीडिया की तरफ देखें तो हमने यह पर्यावरण दिवस बहुत ही रुचि, सार्थकता, कर्तव्यपरायणता के साथ सम्पन्न किया। परंतु क्या वास्तव में ही ऐसा हो पाया है ? हम सब में से कितने ही लोग ऐसे हैं जो सब कुछ जानते हुए भी पर्यावरण संरक्षण की तरफ ध्यान नहीं देते। जो लोग इन सबसे अनभिज्ञ हैं शायद वो प्रकृति को इतना नुकसान नहीं पहुंचाते होंगे जितना हम शिक्षित और अभिजात्य वर्ग प्रकृति का दोहन कर रहें हैं। वास्तव में ही ये चिंताजनक है। इस ओर उचित जागरूकता, प्रकृति प्रेम, संस्कार, प्राकृतिक समीपता, पर्यावरण संरक्षण की भावनाएँ ही इस समस्या का निदान प्रस्तुत कर सकती हैं।

अभी हाल ही में UNITED NATION द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट चाैकाने वाली है जिसमें कुछ देशों के आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार प्रस्तुत देशों की कुल जनसंख्या और कुल पेड़ों की संख्या का अनुपात निकाल कर प्रति व्यक्ति पेड़ों की संख्या निकाली गई है जो इस प्रकार है – …..
कनाडा –    8953   ( पेड़, प्रति व्यक्ति )
रशिया –    4461   ( पेड़, प्रति व्यक्ति )
अमेरिका –   716   ( पेड़, प्रति व्यक्ति )
चीन     –  102   ( पेड़, प्रति व्यक्ति )
भारत    –   28   ( पेड़, प्रति व्यक्ति )

यानि एक व्यक्ति के लिए इन देशो के पास इतनी संख्या में पेड़ मौजूद हैं। इस संदर्भ में हमारे भारत की दशा बहुत ही दयनीय और  चिंताजनक है। PER HEAD TREES IN OUR COUNTRY IS LOWEST IN THE WORLD. प्रत्येक 5 वर्ष में हमारे वातावरण के तापमान में 1`C का इजाफा हो रहा है जो पूरी तरह से मानवजाति के लिए हानिकारक है। सूर्य के बढ़ते ताप का सही प्रयोग करने के लिए अमेरिका के एलेन मास्क ELEN MASK ने एक कंपनी बनाई है जिसका नाम है TESLA टेस्ला जो धरती को बचाने और एनवायरनमेंट को सुधारने की चाहत में यह कंपनी ऐसे कई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है जो पूरी दुनियां को बदलने का माद्दा रखते हैं जैसे सोलर एनर्जी से चलने वाली कारें, स्पेसशिप, एनर्जी सोल्यूशन आदि। हालांकि इस ओर अब जागरूकता बढ़ती जा रही है। परंतु जब तक हर प्राणी सक्रियता से और पूर्ण तन्मयता से प्रकृति संरक्षण की ओर ध्यान नहीं देगा तब तक परिणाम संतोषजनक नहीं प्राप्त होंगे क्योंकि हम जितना प्राकृतिक संरक्षण कर पाते हैं दूसरे हिस्से में उससे अधिक प्रकृति का दोहन हो जाता है। अत: इस ओर ध्यान देना प्रत्येक प्राणी मात्र का पावन कर्तव्य है।

तो आओ आज हम सब ये प्रण लें कि –
पर्यावरण बचाएं हम, अधिक पेड़ लगाएँ हम।
और
ये संदेश निभाना है, हम सबको पेड़ लगाना है॥

©- विदुषी शर्मा जी, दिल्ली ∇

ID : neerjasharma98@gmail.com

विदुषी शर्मा जी।

हम दिल से आभारी हैं विदुषी शर्मा जी के प्रेरणादायक हिन्दी Article “पर्यावरण दिवस और हमारा भारत” साझा करने के लिए।

विदुषी शर्मा जी के लिए मेरे विचार:

♣ “विदुषी शर्मा जी” ने बहुत ही सरल शब्दो में “पर्यावरण दिवस और हमारा भारत” पर अपने विचार प्रस्तुत किये है – जो विचार करने योग्य है।

पढ़ें – विमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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Krishna Mohan Singh(KMS)
Editor in Chief, Founder & CEO
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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति–(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

∗ निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

* क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

* KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to become them selves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

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आ जाओ मेरे साजन। 

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ आ जाओ मेरे साजन। ϒ

आ जाओ मेरे साजन – बनके करार।
दिल के रिश्ते हैं यह तन मन के।
आओ निभाएं मिलके।
आ जाओ मेरे साजन – बनके करार दिल के॥०॥

मुझको बनाके अपना – लाए जब अपने अंगना।
हर नाता मेरा छूटा – जब तुम बने हो सजना।
रिश्ता नया बना है – बजते सितार दिल के।
रिश्ते हैं यह तन मन के – आओ निभाएँ मिलके।
आ जाओ मेरे साजन, बनकर करार दिल के ॥१॥

मेरे साथी मेरे हमदम – चलना हमेशा आगे।
अनुगामिनी बनू मैं – दिल में है भाव जागे।
आशीष मिले सबका – सुख-दुख सहेंगे मिलके।
रिश्ते हैं यह तन मन के – आओ निभाएं मिलके।
आ जाओ मेरे साजन – बनके करार दिल के के॥२॥

वादा करो ये मुझसे – वफा करोगे दिल से।
हर गम मुझे कहोगे – तन्हा न कुछ सहोगे।
हर जनम यूं ही मिलना – मेरा सिंगार बन के।
रिश्ते हैं यह तन मन के – आओ निभाएं मिलके।
आजा ओ मेरे साजन – बनके करार दिल के के॥३॥

©- विदुषी शर्मा जी, दिल्ली ∇

ID : neerjasharma98@gmail.com

विदुषी शर्मा जी।

हम दिल से आभारी हैं विदुषी शर्मा जी के प्रेरणादायक हिन्दी Poem साझा करने के लिए।

विदुषी शर्मा जी के लिए मेरे विचार:

♣ “विदुषी शर्मा जी” की कविताआे के हर एक शब्द में अलाैकिक सार भरा हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। कविताऐं छोटी और सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन कविताओं काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

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In English

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Filed Under: 2017-Kmsraj51 की कलम से….., विदुषी शर्मा की कवितायें हिंदी में।, हिंदी कविता, हिन्दी साहित्य, हिन्दी-कविता Tagged With: Vidushi Sharma, आ जाओ मेरे साजन, कवितायें हिंदी में।, कवितावों का संग्रह, गजल, गीत, गीत और ग़ज़ल, गीत और गजल हिंदी में।, गीत ग़ज़ल, गीत ग़ज़ल कविता, पढ़ें - कविताओं का विशाल संग्रह।, पढ़े - शिक्षाप्रद कहानियों का विशाल संग्रह।, पढ़ें प्रेरणादायक कविताओं का विशाल संग्रह।, पढ़े प्रेरणादायक कविताओं का सबसे बड़ा संग्रह हिंदी में।, पढ़े हिन्दी कविताओं का सबसे बड़ा संग्रह।, पोएट्री इन हिंदी, पोयम्स, प्रेरणादायक हिंदी कविताओं का संग्रह, बच्चों के लिए कविता हिंदी में।, विदुषी शर्मा, विमल गांधी जी - हिन्दी कविताओं का संग्रह।, शार्ट हिंदी कविताये, शार्ट हिंदी पोयम्स, हिंदी कविता का संग्रह

आओ धरती को सजाये हम।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ आओ धरती को सजाये हम। ϒ

आओ धरती को सजाये हम – एक उपवन की तरह।
इसके हर अंश को महकाये हम – मधुबन की तरह।
आओ धरती को सजाये हम – एक उपवन की तरह॥०॥

एक धरती है जो बिन – मांगे अपना सब देती है।
हमने छलनी किया सीना – चुप कर सब सहती।
रात दिन सजदा करो – चरणाें मे भगवन के भक्तजन की तरह।
आओ धरती को सजाये हम – एक उपवन की तरह॥१॥

अपनी एक श्वास भी ले पाए – हममें इतना दम नहीं।
बिन तेरे भूख मिटा पाए – ऐसा एक भी जन नहीं।
सदा एक साथ रहो – सीने में धड़कन की तरह।
आओ धरती को सजाये हम – एक उपवन की तरह॥२॥

यदि धरती रहेगी तो – अपना कल भी होगा।
वर्ना हम सबकी जिंदगी का – यही अंतिम पल होगा।
पूजे हम रज इसकी – माथे पे चन्दन की तरह।
आओ धरती को सजाये हम – एक उपवन की तरह॥३॥

©- विदुषी शर्मा जी, दिल्ली ∇

ID : neerjasharma98@gmail.com

विदुषी शर्मा जी।

हम दिल से आभारी हैं विदुषी शर्मा जी के प्रेरणादायक हिन्दी Poem साझा करने के लिए।

विदुषी शर्मा जी के लिए मेरे विचार:

♣ “विदुषी शर्मा जी” की कविताआे के हर एक शब्द में अलाैकिक सार भरा हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। कविताऐं छोटी और सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन कविताओं काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

पढ़ें – विमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति–(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

∗ निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

* क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

* KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to become them selves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAJ51

 

 

 

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