• Skip to main content
  • Skip to primary sidebar
  • Skip to footer
  • HOME
  • ABOUT
    • Authors Intro
  • QUOTES
  • POETRY
    • ग़ज़ल व शायरी
  • STORIES
  • निबंध व जीवनी
  • Health Tips
  • CAREER DEVELOPMENT
  • EXAM TIPS
  • योग व ध्यान
  • Privacy Policy
  • CONTACT US
  • Disclaimer

KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

Check out Namecheap’s best Promotions!

You are here: Home / Archives for सुख मंगल सिंह की रचनाएँ

सुख मंगल सिंह की रचनाएँ

गुरु – शिष्य परम्परा की शुरुआत कब और कैसे?

Kmsraj51 की कलम से…..

Beginning of Guru Shishya tradition when and how | गुरु–शिष्य परंपरा की शुरुआत कब और कैसे हुई?

वैदिक युग के साहित्य अध्ययन की सुविधा से पूर्व वैदिक काल जो 1500 ई. पूर्व से लेकर 1000 ई. पूर्व तक तथा उत्तर वैदिक काल 1000 ई. पूर्व से लेकर 500 ई. पूर्व तक में विभक्त किया गया। ऋग्वेद से हमें पूर्णरूपेण ऋग्वैदिक काल का इतिहास ज्ञात होता है। उत्तर वैदिक काल का विकास संस्कृति का उत्थान ऋग्वेद से ही हुआ। इस काल का इतिहास संहिता अख्यक ग्रंथ ब्राह्मण एवं उपनिषदों से प्राप्त हुआ है। आर्य सभ्यता को फैलाव ऋग्वैदिक काल तक पंजाब एवं सिंध तक सीमित रहा, परंतु उत्तर वैदिक काल में आर्यों का प्रसार व्यापक क्षेत्र में हो गया। आर्य सभ्यता का केन्द्र सरस्वती से गंगा तक दोआब में विकसित-विस्तृत था। आध्यात्मिक तत्वों की विशाल राशि वेद है। इन तत्वों का अनुगमन ही धर्म है। धर्म का स्त्रोत वेद है।

वैदिक काल का जीवन दर्शन

वेद प्रत्यक्ष या अनुमान द्वारा अगम्य औषधि तत्वों का सुगमता से बोध अनुभव कराता है। अलौकिक तत्वों के रहस्य जानने के लिये वेद का अध्ययन जरूरी है। इसे जानने हेतु दर्शन एवं चिंतन की आवश्यता है। चिंतन से नवीन दार्शनिक आयाम प्राप्त होते है। वैदिक काल का जीवन दर्शन, निष्ठा, आस्था एवं अनुराग था। उक्त काल में कर्मठता, एकनिष्ठा, के आधार पर समन्वय अनुशासन अनुकरण करते रहे। वेदों के सूक्त, सरल, सुबोध, सुविधाजनक तथा देवताओं को प्रसन्न करने हेतु है। अथर्ववेद में वरुणा नदी का उल्लेख से कुछ विद्वान वाराणसी नाम की प्राचीनता का अनुमान करते हैं, तो भी यह नगर काशी की तुलना में जाती रही, परंतु मुख्य रूप से संस्कृत विद्या पर विशेष वद दिया जाता था।

ऋग्वेद कालीन समाज में भौतिक की अपेक्षा बौद्धिक ज्ञान के महत्व का लोगों के ऊँचे विचार ज्ञान की महिमा आध्यात्मिक चिंतन और भौतिक आकर्षण के प्रति विरक्त मनुष्य की जीवन के मूल्य थे। यहाँ वेद में गायत्री मंत्र ज्ञान के उच्चतम आधार थे। मंच द्रष्टा ऋषियों में उच्चतम दार्शनिक चिंतन दिग्दर्शिका होता था। ऋग्वेद के अनुसार स्वाध्याय एवं प्रवचन के अनुगमन से मनुष्य एकाग्र-चीना होता है। लोग विविध विद्या का अध्ययन कर देवताओं को प्रसन्न करते थे और अपनी कामयाबी की पूर्ति करते थे। वैदिक काल में प्रमुख रूप से वेद अध्ययन होता था।

शिक्षा शास्त्र का निर्माण स्वरों के अनुशासन एवं शुद्धता के लिये किया गया। योद्धा को धर्म की शिक्षायें कंठस्थ करायी जाती, तो वहीं पुरोहितों को संस्कार के मंत्रों का, शिक्षाओं की विस्तृत व्याख्या बतायी जाती थी। गुरू-शिष्य परम्परा का निर्वहन काशी में होता था। ब्रह्माघाट पर ब्रह्मशाला को ब्रह्मा जी ने आकर ब्राह्मण वंश चलाया था, ऐसी काशी की मान्यता है। विद्या, श्रद्धा और योग से किया गया कर्म संयुक्त होने का प्रबल हो जाता है। शिक्षा से सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन का उत्कर्ष होता। ज्ञान शिक्षा से प्राप्त होता है, ज्ञान जीवन को प्रकाशवान बनाता है। मानव को संमार्ग अवलोकन कराता है। ज्ञान से जीवन का कठिनतम कठिनाइयों को दूर करने का सम्बल प्राप्त होता करने में शिक्षा का महत योगदान है। समाज को विकसित करने तथा जीवन को सात्विक और नैतिक निर्देशों का पालन करने का मार्ग शिक्षा द्वारा प्रदान होता है।

उपनयन संस्कार

व्यक्ति आत्मनिर्भर हो, बहुमूल्य शिक्षा का विकास करता है। पारिवारिक निर्वहन के साथ-साथ सामाजिक आर्थिक नैतिक, धार्मिक उत्थान करते हुये चरित्रवान बनकर उत्कृष्ट व्यक्तित्व के उत्तरदायित्वों के साथ सभ्य समाज का नवनिर्माण करता है। मौखिक शिक्षा का प्रचलन वैदिक काल में था। आगे चल कर कमल एवं भोजपत्र पर मयूर पंखों से लिखा जाने लगा। शिक्षा का आरम्भ ब्रह्मचर्य आश्रमों में उपनयन संस्कार के बाद ही होता था। विद्यारम्भ संस्कार के समय बालक गुरूवंदना कर गुरू के प्रति निष्ठा व्यक्त करता था। उपनयन उपरांत ब्रह्मचारी बालक को विद्यामय शरीर और ज्ञानमुक्ति मस्तिष्क प्राप्त होता था, जो माता-पिता से प्राप्त स्थल शरीर से भिन्न था। शिक्षा ग्रहण करने के काल का निर्धारण किया गया था, जो क्रमशः 8-10 वर्ष क्षत्रिय, 11-12 , वर्ष की आयु में शिक्षा प्रारम्भ करने का निर्धारण था। गुरूकुल की प्रथा थी कि गृह त्याग कर बालक गुरू आश्रमों में रहते और योग्यतानुसार शिक्षा प्रदान की जाती रही। उपनिषदों के गुरूकुल के स्थान आचार्य कुल का प्रयोग आते हैं। शिक्षा और विद्या के अद्धतीय अधिष्ठानों का उल्लेख महाकाव्य में गुरुकुल का उल्लेख मिलता है।

उच्चकोटि के गुरूकुल व आश्रम

पूर्वकाल में भारद्वाज एवं वाल्मीकि आश्रम उच्चकोटि के गुरूकुल थे। { महाभारत के द्वारा } मार्कण्डेय एवं कण ऋषि के आश्रम शिक्षा के प्रधान विद्या स्थल थे। वैदिक काल में गुरू के निम्न प्रकार बताये गये हैं। आचार्य, उपाध्याय, प्रवक्ता, अध्यापक, श्रोचिय, गुरू, ऋत्विक, चरक। उक्त गुरूओं का वैदिक काल एवं सूक्तयुग में वेद का ज्ञान स्मरण ! शक्ति पर आधारित था। वेद मंत्रों का कंठस्थ! किया जाता था। गुरूकुल में ज्ञान प्राप्त करने हेतु अध्ययन-अध्यापन कंठस्थ कर होता था। वैदिक युग में आचार्य और गुरू का स्थान देवता-सा था, जो आदरयुक्त, गरिमामय और प्रतिष्ठित था। अग्नि का आचार्य अंगिरा के रूप में अतवरण हुआ, इंद्र के गुरू के रूप में प्रतिष्ठा थी। ऋग्वैदिक आचार्य दिव्य और आलौकिक ज्ञान के प्रतीक थे।

शिक्षा केंद्रों द्वारा समाज को नई दिशा

दृष्टि के धनी होने और बुद्धि तीक्ष्ण होना! शिक्षा के कारण स्वभाविक हो सकता है। एक व्यक्ति से दूसरा अधिक विवेकशील तथा विद्वान हो सकता है। निरंतरता में त्रुटियों के बावजूद काशी की शिक्षा पद्धति ने समाज को एक नई दिशा प्रदान की। आज विश्वविद्यायल, काशी, कश्मीर, धारा, कनौज, उपहित्न पातन, कांची, नालंदा, विक्रमशीला, बल्लभी एवं त्रावस्ती जैसे शिक्षा केंद्रों द्वारा समाज को नई दिशा प्रदान करने का क्रम जारी है। काशी में छोटी-बड़ी वेदशालाओं में दर्जनों भर शिष्य वेद परम्पराओं का निर्वहन कर रहे हैं। ऋग्वेद की शाकल शाखा कृष्ण यजुर्वेद की तैत्तिरीय शाखा शुक्लर यजुर्वेद की माध्यंदिन शाखापूर्ण रूप से काशी में विद्यमान है। सामवेद की रमणीय शाखा में आंशिक गान करने वाले भी कुछ गुरू-शिष्य परम्परा काशी में दृष्टिगत होती है।

♦ सुख मंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुख मंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख में समझाने की कोशिश की है — वैदिक काल का जीवन दर्शन, निष्ठा, आस्था एवं अनुराग था। उक्त काल में कर्मठता, एकनिष्ठा, के आधार पर समन्वय अनुशासन अनुकरण करते रहे। वेदों के सूक्त, सरल, सुबोध, सुविधाजनक तथा देवताओं को प्रसन्न करने हेतु है। अथर्ववेद में वरुणा नदी का उल्लेख से कुछ विद्वान वाराणसी नाम की प्राचीनता का अनुमान करते हैं, तो भी यह नगर काशी की तुलना में जाती रही, परंतु मुख्य रूप से संस्कृत विद्या पर विशेष वद दिया जाता था। ऋग्वेद कालीन समाज में भौतिक की अपेक्षा बौद्धिक ज्ञान के महत्व का लोगों के ऊँचे विचार ज्ञान की महिमा आध्यात्मिक चिंतन और भौतिक आकर्षण के प्रति विरक्त मनुष्य की जीवन के मूल्य थे।

—————

यह लेख (गुरु – शिष्य परम्परा की शुरुआत कब और कैसे ?) “सुख मंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

ज़रूर पढ़ें — प्रातः उठ हरि हर को भज।

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari Etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____

Filed Under: हिन्दी साहित्य Tagged With: Sukhmangal Singh, sukhmangal singh articles, उच्चकोटि के गुरूकुल व आश्रम, उपनयन संस्कार, गुरु - शिष्य की परंपरा की शुरुआत कब और कैसे? - सुख मंगल सिंह, लेखक सुखमंगल सिंह, वैदिक काल का जीवन दर्शन, शिक्षा केंद्रों द्वारा समाज को नई दिशा, सुख मंगल सिंह, सुख मंगल सिंह की रचनाएँ, सुखमंगल सिंह, सुखमंगल सिंह की रचनाएँ

काशी कहां चली।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kashi Kahan Chali | काशी कहां चली।

काशी संसार सागर से पार उतारने वाली भक्ति भावन नगरी है। काशी समीचीन यथार्थ सुदृढ़ शोत्रसम्मत् सर्वसिद्धि तपोभूमि है। काशी में जहां मरणोपरांत भक्ति मुक्ति मिलती है वही काशी में किये पुण्य अथवा पाप कर्म भी अक्षुण्ण होते हैं। मानव यूं तो बुद्धिजीवी है, फिर काशी की गरिमा पर कहीं प्रश्नचिन्ह न लगे, आंच न आवे ऐसे कार्यो से भावुक हो लोग तमाम अनैतिक कार्यों में लिप्त नजर जाने क्यों लोग दिखते हैं। इससे साफ जाहिर है जन – जन में वैभव, पराक्रम मनस्विता और जीवट, ओजस् तेजस् की कमी कहीं न कहीं हमारे अंदर अवश्य ही प्रभावित कर रही है। फाल्गुन मास में बरसाने वृंदावन – मथुरा होली के माहौल में जब रंग विरंगे रंगों से सरावोर रहती है वहीं काशी, काशी में बाबा भोले भी इस सुअवसर से अछूते क्यों रह जायेंगे।

आमल एकादशी 

आमल एकादशी को भोले भी भाव विह्वल हो स्नान करते हैं, सप्रेम भरी होली-रंगभरी के रंग से सराबोर होते हैं साथ ही अतिविशिष्ट शृंगार भी कराते हैं। इन्हीं दिनों सिद्धि चक विधानानुसार धर्म के अष्ट चिन्ह के पूजा विधान में भी लिखा गया है—

कार्तिक फाल्गुन अषाढ़ के अंत अठ दिन माहि।
नन्दीश्वर श्वर जात है, हम पूजे इह ठाहिं॥

अर्थात् — जैन श्रावक उक्त मास के अंतम आठ दिन शुक्ल पक्ष की अष्टमी से पूर्णिमा तक काल्पनिक रूप में इन्द्र इन्द्राणी देवता का विधानपूर्वक पूजन, भजन भी होता है। जब काशी का वर्णन हम कर रहे हों, वहां शिवलिंग का वर्णन न हो तो काशी का वर्णन संभवतः अधूरा प्रतीत होता है। वैगे तो मनुष्यों द्वारा कुछ भी पूर्ण कर पाना समीचीन नहीं हैं।

निराकार पार ब्रह्म परमेश्वर

पूर्ण तो मात्र ब्रह्म है जो निराकार पार ब्रह्म है जो निराकार पार ब्रह्मपरमेश्वर ही है। हम जिस ज्योतिर्लिंग का वर्णन यहां करने जा रहे हैं वह वही है जो आपकी आत्मा का स्वरूप है। जब बच्चा मां के गर्भ में आता है तो वही अंडाकार रूप धारण करता है जिस आकार में शिवलिंग होता है। मरणोपरांत अग्नि दहन के समय भी शनैः शनैः पुनः उन्हीं स्वरूप में ही, यह मानवीय रूपाकाया पंच भूतात्मा पंचतत्व में विलीन हो जाता है। शिव आनन्ददाता हैं। जिस दिन आप शिव में लीन होंगे और गंगा के पावन जल से परिपूर्ण हो जायेंगे उस दिन से कुछ शेष नहीं बचा। द्वंद नहीं निर्द्वद हो जायेंगे। विलक्षणता की अनुभूति होनी स्वभावतः हो जायेगी।

काशी में स्त्रैण और नगरी पुरुष को खोजते फिरते रहते हैं शायद उन्हें ज्ञात नहीं शिव अर्धनारीश्वर है। बांवले से सड़कों गलियों ऐसे में देखते ही होगें। आप में भी द्वंद्व होना स्वाभाविक है ही, क्योकि यह जगत ही द्वंद्व से निर्मित है। तो आप भी दो होंगे ही। इतना तो अवश्य ही है। द्वैत से अद्वैत में पहुंचने के मार्ग की आकांक्षा में आपको उस शिवलिंग की अपने घर में उपासना करनी होगी। जिसके द्वारा आप निर्द्वद्व हो जाय। वह तभी संभव होगी जब मेक्सिमम ६ अंगुल की ही मूर्ति विधान सहित स्थापित करने परांत आप के अन्दर ध्यान योग प्राणायाम अथवा अन्यान्य विधाओं से विह्वल विकल अति आतुरता आनन्द हो, जिस समय उस अलौकिक बोध गुदगुदाहट आलिंगन सा परम आनंद मिल जाये आप अनुभूति करें, काशी की एक रेखा तक पहुंच रहा हूँ।

प्रथम पूज्य देवाधिदेव – भोले के सुपुत्र गौरी के लाल गणेश जी

हमें काशी का वर्णन करते समय प्रथम पूज्य देवाधिदेव भोले के सुपुत्र गौरी के लाल गणेश जी को नहीं भूलना होगा जिसकी प्रतिमूर्ति बड़ा गणेश में प्रतिष्ठापित है। बड़ा गणेश जी को भी हमें हर शुभ कार्य में प्रथम सादर याद करना चाहिए। यहां गणेश चतुर्थी के दिन सैलानियों की भीड़ स्वाभाविक हर्षानुभूति कराता है। गणेश जी के लिए यह भी कहना अतिशयोक्ति न होगी—

सुख समृद्धि का जब आयेगा नया दौर।
गणपति गजबदना को पूजेंगे लोग॥

यहीं; मंगल ने कहा है—

  • मांगो न और काहू से याचक बन काशी में चातुर्मास बिताय रहतु ना एकै द्वार लेत न हाय वहां सव तीरथराज देवगण चरवन लेत चबाय चहु और महिमा काशी में।
  • पंचाक्षरी मंत्र पढ़ महिमा तन की काशी त्रिलोचन लोचन कर्णघंटा घंटा बजत गिरजानन्दन शिवयाचक वनि हो काशी में।

आज हम अध्यात्म, नैतिकता, संस्कृति पश्चिम से लेते जा रहे हैं। हमें याद करना होगा स्वामी विवेकानन्द जी के मुख, मुखार परमार्थ तप, सेवा को भी, हमें याद करना होगा, स्वामी रामकृष्ण परमहंस जी के उपदेशों को, कबीरदास के कर्मयोग, राजर्षि विश्वामित्र के ‘तप’ को, मीरा का प्रेम, राजा मान्धाता के ‘त्याग’ और राजा हरिश्चंद्र का ‘सत्य’, लक्ष्मीबाई के शौर्य को भी हमें नहीं भूलना होगा। आज काशी में ही क्या सारी पृथ्वी बोझ से दबी जा रही है। हमें मिटाना है काशी के साथ सारी धरती के क्लेश को?

गंगा में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है—

सद्भावना पूर्ण वातावरण का हम सब जन मिल निर्माण करें। काशी के हाथीघाट, शिवाला घाट वह स्थान है जहां राजा विजयानगरम् का हाथी आता था। इस घाट की बनावट ऐसी थी कि जो लोग तैरना नहीं जानते थे वे इस घाट पर कमर भर पानी में नहा सकते थे परंतु आज यहां कीचड़ का अम्बार रहता है इसलिए नहीं कि गंगा का बालू एकत्र हो गया है। बलात गंगा में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। चूंकि अंग्रेजों के समय में कस्साई बाड़ा के जो जानवरों का खून पहले गंगा जी में नहीं आता था आज खून शाम होते ही रंग बिरंगे रंगों में कभी लाल, कभी हरा, कभी बैगनी, कभी काला एवं मटमैले कलर की धार बन कर सम्वत् २०४६ से गंगा में अनवरत आ रहा है।

यही नहीं रंगाई के कारखानों का रंग एवं हजारों लीटर केमिकल तथा लगभग सौ लीटर खून डायरेक्ट गंगा में प्रतिदिन अनवरत बहाया जाता है। प्रतिदिन लोहता भिटारी के बीच बने नाले से भी केमिकल निरर्थक वरुणा नाले से होकर अनवरत वरुणा नदी में बहाया जा रहा है। वरुणा नदी भी उसे बेहिचक गंगा को अर्पित कर देती है। आज गंगा जी के दंडी घाट से गुलेरी घाट तक मनुष्य क्या बन्दर व गाय भी पानी पीने से दूर नहा सकने में भी हिचकिचाहट कर रहे हैं। इन घाटों को भैंसा घाट कहा जाय तो भी अतिशयोक्ति न होगी।

इस प्रकार वाराणसी के छः घाट उक्त प्रदूषण से जहां प्रभावित हैं वही राजेंद्र प्रसाद घाट, मर्णिकर्णिका घाट भी प्रदूषण से क्यों अछूता रह जाय। अस्सी घाट का पूछना ही क्या है। नाला द्वारा हजारों लीटर गन्दा पानी गंगा में बहाने से नगर निगम आखिर क्यों नहीं बाज आता। इससे साफ जाहिर होता है कि केंद्र अथवा राज्य द्वारा चलाई गई सफाई निर्मलीकरण योजना सफेद हाथी का सा रूप धारण कर रखा है। मणिकर्णिका, हरिश्चंद्र घाट से आज भी अधजले शव गंगा में बहाकर ही नहीं अपितु पशुओं के शव को गंगा में प्रवाह कर गंगा में हम सड़ान्ध क्यों पैदा कर रहे हैं? पुलिस प्रशासन भी मूक दर्शक आखिर क्यों बनी रहती है? ऐसे में अधिक अपराध के युग का श्रीगणेश भी इस दशक को कहने से लेखक नहीं चुकेगा। बशर्ते नाबालिग बच्चों का शव धार्मिक परम्परानुसार जल प्रवाह की अवधारणा जब तक नहीं बदलेगी। हम धार्मिक परम्परा का जिक्र कर रहे हैं तो धर्माचार्य का जो सत्य निष्ठा से आज का मानव जीव कल्यार्णाथ यज्ञ, हवन, पूजन, प्रवचन, हरिभजन, शिवअर्चन, चण्डी जाप, नाम जपन, भजन पर भी हमें जिक्र करना मुनासिब होगा। आप काशी में कम नहीं पायेंगे।

ज्ञान, भक्ति, अध्यात्म तीर्थों का भी तीर्थस्थल काशी है।

ज्ञान, भक्ति, अध्यात्म और सर्व प्रेम का प्रतीक यह तीर्थों का भी तीर्थ है। आध्यात्मिक, धार्मिक तथा भक्तिभाव प्रेरक धार्मिक सांस्कृतक लोक उन्नायक आयोजनों का यह तीर्थस्थल काशी है। काशी में नास्तिक विचारधारा से युक्त जो प्राणी आता है रमण भ्रमण करने, वह भी शिवमय हो रम जाता है। भोला भूदेवी, भवानी, भगवती, जगदम्बा में कारण शास्त्रों में वर्णित है।

भोला काशी परिक्षेत्र चौदह कोश में आने वाले प्राणी को रमणीय कर देते हैं। कारण स्पष्ट है। यहां प्रतिदिन गंगा में मणिकर्णिका घाट पर दो घड़ी उपरान्त दोपहर में समस्त देव गण देवलोक से स्नान करने आते ही रहते हैं। काशी में देवताओं का आना अनवरत समस्त युगों से रहा है तो क्या हिंदू/सिक्ख/इसाई अथवा मुसलमान जिनमें एक सा पंच तत्वों से बनी बुद्धि विवेक प्रभु ने दे रखी है, हम उस गंगा मां को जिसने देवलोक से हाहाकार कर हमारे पूर्वजों का तारंतार किया, कर रही है, हम पवित्र क्यों नहीं रख सकते हैं?

♦ सुख मंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुख मंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख में समझाने की कोशिश की है — काशी जहां स्वयंभू भोलेनाथ माता पार्वती व गणपति सहित अनंत काल से विराजमान है। पतित पावनि माँ गंगा को अपनी जटाओ से धीरे-धीरे मध्यम जल धारा के रूप में मानव कल्याण के लिए छोड़ा है, लेकिन आज का मानव पतित पावनि माँ गंगा को बहुत ज्यादा प्रदूषित कर रखा है। अब भी सुधर जाओ और पतित पावनि माँ गंगा को स्वच्छ करो, इसे प्रदूषित करना बंद करो। ज्ञान, भक्ति, अध्यात्म और सर्व प्रेम का प्रतीक यह तीर्थों का भी तीर्थ है। आध्यात्मिक, धार्मिक तथा भक्तिभाव प्रेरक धार्मिक सांस्कृतक लोक उन्नायक आयोजनों का यह तीर्थस्थल काशी है। काशी में नास्तिक विचारधारा से युक्त जो प्राणी आता है रमण भ्रमण करने, वह भी शिवमय हो रम जाता है। भोला भूदेवी, भवानी, भगवती, जगदम्बा में कारण शास्त्रों में वर्णित है।

—————

यह लेख (काशी कहां चली।) “सुख मंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

ज़रूर पढ़ें — प्रातः उठ हरि हर को भज।

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari Etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिन्दी साहित्य Tagged With: Kashi Kahan Chali, Sukhmangal Singh, sukhmangal singh articles, काशी इतना शक्तिशाली क्यों है?, काशी कहां चली, काशी कहां चली - सुखमंगल सिंह, काशी का महत्व क्या है?, काशी की क्या विशेषता?, काशी पर निबंध, काशी में कौन सी नदी बहती है?, काशी से क्या तात्पर्य है?, वाराणसी पर निबंध – Essay On Varanasi in Hindi, सुख मंगल सिंह, सुख मंगल सिंह की रचनाएँ

काशी का समन्वयात्मक स्वरूप।

Kmsraj51 की कलम से…..

Coordinating Nature Of Kashi | काशी का समन्वयात्मक स्वरूप।

काशी विश्व की प्राचीन नगरी है। बुद्ध की उपदेश स्थली, जैन तीर्थंकर महावीर की धर्म देशना स्थली तथा सुपार्श्वनाथ और जैन पार्श्वनाथ तीर्थंकरो की जन्मस्थली होने के साथ ही काशी रामानन्द, आदि शंकराचार्य, कबीर, रैदास, तुलसीदास विवेकानन्द जैसे महान धर्माचार्यों एवं चिंतकों की कर्म भूमि भी रही है।

विभिन्न पुराणों से विदित होता है कि काशी पहले विष्णुतीर्थ था जो बाद में शिवतीर्थ के रूप में प्रसिद्ध हुआ। यह प्रधानतः शिव की नगरी रही है। यहाँ के 17वीं से 20वीं शताब्दी ई० के लगभग सभी मंदिर भोलेनाथ शिव को समर्पित हैं। इन मंदिरों में गर्भगृह में शिवलिंग और चारो ओर की भित्तियों पर शक्ति, विष्णु, सूर्य एवं गणेश मूर्तियाँ हैं जो समन्वयात्मक धार्मिक आस्था की साक्षात साक्षी है। इतना ही नहीं काशी में लोक धर्म से सम्बन्धित पक्ष, नाग, वृक्षपूजन की परम्परा रही है। इसे न केवल शिव वरन् काशी में जन्में सुपार्श्वनाथ और पार्श्वनाथ के मस्तकों पर दिखाये जाने वाले सर्वफलों के रूप में भी देखे जा सकते हैं।

17वीं से 19वीं शताब्दी ई0 के बीच काशी की धार्मिक एवं सांस्कृति समन्वय की भंगिकी आदि केशव से अस्सी तक फैले हुए घाटों की अनवरत श्रृंखला में देखी जा सकती है। घाटों के मंदिरों, मठों और अन्य अवशेषों में पूरे भारतवर्ष का धार्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप मूर्तिमान हो उठा है।

यदि कहा जाय कि काशी में सम्पूर्ण विश्व सूक्ष्म रूप से विद्यमान है तो अतिश्योक्ति नहीं। मान्यता के अनुसार देश की सभी नदिया, पवित्र स्थल और देवता काशी में निवास करते हैं। मत्स्यपुराण में काशी को अविमुक्त क्षेत्र कहा गया है जिसे शिव कभी नहीं छोड़ते। इसे महाश्मसान, आनन्दकानन और मोक्षदा अर्थात् मोक्ष देने वाली सप्तपुरियों में एक माना गया है। काशी का महात्म्य कुछ ज्यादा ही है तभी तो जब कभी ग्रहण लगता है तो काशी में बहुत भीड़ उमड़ पड़ती है। यद्यपि सूर्यग्रहण में सबसे बड़ा मेला कुरुक्षेत्र का होता है पर चन्द्रग्रहण में काशी में ही यात्रीगण देश के विभिन्न भागों से आने हैं। भविष्यपुराण में लिखा है :

कुरुक्षेत्रसमा गंगा यत्र कुत्रावगाहिता।
कुरुक्षेत्राहशगुणा यत्र विन्धेन संगता॥

काशी प्रधान तीर्थं स्थान है। यह शुद्ध रूप से तपोभूमि है। देवदर्शनल, मंदिरों की रचना और यहाँ के घाटों की छटा ही मुख्य दर्शनीय हैं। यहाँ गंगास्नान की महिमा अवर्णनीय मानी गई है। सर्वत्र गंगा स्नान पूण्यजनक है। वाराणसी (काशी) में गंगा स्नान बारहो मास नेमी लोग करते हैं। काशी की उत्तरवाहिनी गंगा की महिमा काशी यात्रा में सप्तभाग उल्लिखित है। पंचगंगा और परिसर के घाटों, मर्णिकर्णिका घाट एवं दशाश्वमेघ घाट पर प्रातः 3 बजे से ही स्नानार्थी आने लगते हैं। बाबा विश्वनाथ की नगरी में मरने का कोई डर नहीं होता क्योंकि यहाँ तो सभी मृत्यु को अपने पाहुन (अतिथि) की तरह जोहते ही रहते हैं।

यह सत्य है कि काशी वास करने में जो सुख यहाँ पर होता है वह समस्त ब्रह्मांड मंडप में कहीं भी उपलब्ध नहीं है। काशी में धर्म अपने चारो पैरों पर खड़ा है। अर्थ भी काशी में अनेक प्रकार से वर्तमान है। यही कारण है कि पाप-विनाशिनी देवगणों को भी दुर्लभ सतत गंगा-संगता, संसार पाशच्छेदिनी शिव-पार्वती से अविमुक्त, त्रिभुवन से अतीत मोक्षजननी काशी पुरी को मुक्त पुरुषगण कभी परित्याग नहीं करते। तभी तो जगत प्रसिद्ध जाबालि ऋषि ने कहा है। हे आरुणे ! असी नदी इड़ा नाड़ी और वरुणा नदी पिंगलानाड़ी कही गई है इन्हीं दोनों के मध्य में वह अविमुक्त क्षेत्र काशी है। यही काशी सुषुम्ना नाड़ी है। इन्हीं तीनों नदियों की यह वाराणसी है।

हर हर महादेव! ॐ नमः शिवाय।

♦ सुख मंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुख मंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख में समझाने की कोशिश की है — यह सत्य है कि काशी वास करने में जो सुख यहाँ पर होता है वह समस्त ब्रह्मांड मंडप में कहीं भी उपलब्ध नहीं है। काशी में धर्म अपने चारो पैरों पर खड़ा है। अर्थ भी काशी में अनेक प्रकार से वर्तमान है। यही कारण है कि पाप-विनाशिनी देवगणों को भी दुर्लभ सतत गंगा-संगता, संसार पाशच्छेदिनी शिव-पार्वती से अविमुक्त, त्रिभुवन से अतीत मोक्षजननी काशी पुरी को मुक्त पुरुषगण कभी परित्याग नहीं करते। तभी तो जगत प्रसिद्ध जाबालि ऋषि ने कहा है। हे आरुणे ! असी नदी इड़ा नाड़ी और वरुणा नदी पिंगलानाड़ी कही गई है इन्हीं दोनों के मध्य में वह अविमुक्त क्षेत्र काशी है। यही काशी सुषुम्ना नाड़ी है। इन्हीं तीनों नदियों की यह वाराणसी है। काशी सनातन सत्य एवं समस्त सत्यों की भी सत्य है, सनातन चिंतन धारा में – काशी को तीनों लोकों से परे न्यारी काशी कहा गया है। संसार-सागर में जो मनुष्य सदैव कलिकाल में भी डूबे पड़े हों और निरंतर आवागमन के कारण खेदित हो रहे हों, जिनके कण्ठ कर्मपाश में जकड़े हों, उन जीवों की मुक्ति का भी एक मात्र साधन काशी धाम ही है। काशी ममता ‘माँ’ है यद्यपि माता महान है। गर्भ में जन्मधारण करने की निमित्त बनकर गर्भ धारण का दुःख उठाती है। जो दुःख मात्र कुछ दिन का होता है जबकि काशी सदा सर्वदा के लिये गर्भ दुख से छुड़ा देती है। यह आवागमन की मुक्तिदात्री है।

—————

यह लेख (काशी का समन्वयात्मक स्वरूप।) “सुख मंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

ज़रूर पढ़ें — प्रातः उठ हरि हर को भज।

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari Etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिन्दी साहित्य Tagged With: Essay on Kashi Vishwanath Mandir, history of kashi vishwanath, Sukhmangal Singh, sukhmangal singh articles, काशी का समन्वयात्मक स्वरूप - सुख मंगल सिंह, काशी पर निबंध, काशी विश्वनाथ का रहस्य, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, काशी विश्वनाथ पर निबंध, काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास क्या है?, काशी विश्वनाथ मंदिर पर निबंध, काशी विश्वनाथ मंदिर में कितना सोना लगा है, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी उत्तर प्रदेश, सत्यों की सत्य संजीवनी काशी - सुख मंगल सिंह, सुख मंगल सिंह, सुख मंगल सिंह की रचनाएँ, सुखमंगल सिंह जी की रचनाएँ

10 हजार करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ 10 हजार करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण। ♦

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश से – दिनांक 6 दिसंबर, 2021 काे आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा।

नव भारत का नया उत्तर प्रदेश धीरे-धीरे हो रहा है जवान। उत्तर प्रदेश बना रहा है बड़ा नया कीर्तिमान। दुनियां में बढ़ रहा प्रदेश का नाम। उत्तर प्रदेश की जनता का बढ़ रहा सम्मान। देश में उत्तर प्रदेश सरकार का कार्य गुणगान। नए मान सम्मान के साथ आगे बढ़ रहा है यह अनोखा क्षेत्र। इंसानियत की मिसाल बनकर सामने रहा है उत्तर प्रदेश। माथे पर लगे मेघा कालिख को साफ़ कर रहा है राज्य। विकसित संसाधनों के साथ धरा को सजा रहा है योगी आदित्यनाथ जी का शासन।

ऐतिहासिक धरोहरों, धर्मशाला, कुंड, यात्रियों के लिए विश्रामालय और पेड़-पौधे लगवा रहा है उत्तर प्रदेश। गोरखपुर से मोदी जी, उत्तर प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी आजमगढ़ के तहसील – सगडी आजमगढ़ से 32 परियोजनायें उत्तर देश को लोकार्पण और शिलान्यास द्वारा दी। वही तहसील – लालगंज, आजमगढ़ में 37 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास 6 दिसंबर 2021 को किया। एक रचना प्रस्तुत —

सजने लगा है आजमगढ़,
सावन जस हो जाएगा गांव।
योगी आदित्यनाथ ने दे दी,
कुछ ऐसी ही भारी सौगात।
सोशल मीडिया सक्रिय हुआ॥

देखकर देश हो गया खुश प्रदेश।
लाइव प्रसारण हुआ बहुत ख़ूब,
बच्चा – बूढ़ा हो रहा है खुश।
200 करोड़ का तोहफा आया,
गांव शहर खुशियां भर लाया॥

उत्तर प्रदेश में तत्कालीन गोरखपुर के महंत अवैद्यनाथ जी के श्री चरणों में समर्पित होकर उनके द्वारा अपनाए गए ज्ञान और जन कल्याण की योजनाएं को आगे बढ़ाने का काम किया, गोरखपुर पीठ के महंत और उत्तर प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने। उत्तर प्रदेश को महान प्रदेश बनाने का उठा लिया है बीड़ा। जिसे पूरा करने के लिए अपने कार्यकाल में हर संभव प्रयास कर रहे हैं बाबा योगी जी। इन्होंने पूरब से पश्चिम, उत्तर से दक्षिण तक विकास की लहर घर – घर दौड़ा दिया है। सर्वांगीण विकास करना संभव है। जिसे लोग असंभव मानते थे। उत्तर प्रदेश का विकास संभव है योगी जी ने कर दिखाया। उन्होंने लोगों को बता दिया, दिखा दिया है।

बुराइयों को भष्म करने की ताकत संतो में होती,
जिसे उन्होंने दिखा कर सिखा दिया लोगों को।
बदल रहा प्रदेश यही लोगों का अपना विचार,
होने लगा है चारो तरफ से प्रदेश का विकास॥

रक्षा पर दिया जा रहा है शासन का पूरा ध्यान,
किसानों का रखा जा रहा है प्रदेश में मान।
व्यापारियों को मिल रहा है उचित सम्मान,
पूर्व विरासत का कराया जा रहा है कल्याण॥

परंपरा सत्य के साथ खड़े हो रहे हैं संदेश,
मोदी और योगी का यही है उन्नत उपदेश।

योगीराज में प्रदेश का हो रहा चहुंमुखी विकास,
गरीबों को मिल रहा है खाने के लिए अनाज।
पक्के घरों में ही जा रहे हैं सब लोग आज,
संतोष और शांति पूर्ण हो रहा है समाज॥

— योगी जी के ड्रीम प्रोजेक्ट का मोदी जी ने किया लोकार्पण —

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 हजार करोड़ की लागत से उतर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ जी के ड्रीम प्रोजेक्ट खाद कारखाना, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान और बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज के रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर का किया लोकार्पण, दिनांक 6 दिसंबर 2021 को। सन 2016 में प्रधानमंत्री मोदी जी ने खाद कारखाने और AIIMS का शिलान्यास किया था। जिसे जनता को समर्पित किया।

— खाद कारखाने से लाभ —

यह कारखाना विगत 30 वर्षों से बंद पड़ा था। 30 वर्षों तक किसी भी सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। जिस पर योगी आदित्यनाथ जी की सरकार ने विशेष ध्यान दिया। उसका शिलान्यास 2016 में पुनः प्रधानमंत्री के हाथ से किया था। यद्यपि गोरखपुर की जनता लगातार उस कारखाने को चालू करने की मांग पूर्ववर्ती सरकारों से करती रही परंतु सर्व कल्याणकारी गोरक्षनाथ पीठ के महंत योगी आदित्यनाथ जी ने अपने कार्यकाल में उसे पूर्ण करने का संकल्प लिया और प्रयास किया। जिसकी सफलता प्राप्त होती दिखाई दी। सौभाग्य से उत्तर प्रदेश के माननीय जनता की बहु प्रतीक्षित मांग पूरी हुई। लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई।

रोजगार का अवसर प्राप्त होगा। जिन राज्यों को लाभ होगा वह पड़ोसी राज्य बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, हरियाणा और मध्य प्रदेश के किसानों को, लगभग 20,000 लोगों को इससे रोजगार मिलेगा। इस खाद कारखाने से प्रतिदिन 3850 मीट्रिक टन नीम कोटेड यूरिया की निर्वाह उपलब्धता होगी। जिसका लाभ उत्तर प्रदेश सहित पूरेे देश को मिल सकेगा। यूरिया खाद के लिए उत्तर प्रदेश की जनता बहुत ज्यादा हलकाना होती रही। इसके बाद लोग जगह जगह से इसकी खेती किसानी में प्रयोग करने के लिए दर-दर की ठोकरें खाते रहते थे किसान। बहुत कमी थी। अवने – पवने दामों पर स्टॉकिईस्ट द्वारा इण्डिया में यूरिया खाद उपलब्ध कराया जाता रहा। अलग-अलग जिलों से लोग यूरिया को क़िसी तरह प्राप्त करते, लेकर अपने गांव आते थे। किसान समितियां भी पूर्ण रुप से किसानों को यूरिया खाद उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं थी। बहुत कुछ समितियां तो घोटाले बाजी में भी लगी रहती थीं। किसान समितियों में शेयर लगाता परंतु उसे उसका उचित सम्मान नहीं मिल पाता था।

सचिव की जी हुजूरी करनी पड़ती थी। किसान सचिव के घर तक जाने के लिए उनके अनुयायियों के घर तक अपनी पहुंच बढ़ाने वाले होते तभी उनको कुछ अंश रूप खाद मिल पाता था। परंतु योगी सरकार उत्तर प्रदेश की जनता के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के सफल प्रयासों से नीम कोटेड यूरिया का निर्वाध उपलब्धता कराने का सफर, सफल प्रयास किया गया। किसानों का आत्मविश्वास बढ़ाने की योजना बनाई गई।

शासन – प्रशासन ने कार्यालयों के सहकर्मियों और कर्मचारियों को जिम्मेदारी दी। किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए समस्याओं के निवारण करने की योजना बनी। बदले हुए परिवेश के साथ लोग एडजस्ट करने की कोशिश करने लगे। वातावरण सामान्य होने लगा। निदान का आधार मिल गया। इस समस्या का निदान उत्तर प्रदेश सरकार ने निकाल लिया। दलदल में फंसी हुए किसानी राहत की सांस ली। रोज भोर में अपने घरों से निकल कर दुकान – दुकान और समितियों का चक्कर लगाने से किसानों को योगी सरकार में राहत की सांस मिली।

यूरिया खाद की उपलब्धता होने लगी।
चप्पे चप्पे पर सी. सी. टी. वी. कैमरा से,
किया जा रहा है निगरानी।
सुरक्षा के मामले में रखी जा रही है सावधानी।
मंदिरों में भक्तों को करना नहीं पड़ेगा इंतजार।
ऑनलाइन से हो जाएगा बहुत सारा कारोबार।
सेंसर किट का हो गया है अब आविष्कार।
चोरी पर लग जाएगी फागी वाली लगाम।
जल जीवन मिशन का सरकार ने चलाया अभियान।
विद्युत व्यवस्था से किसान हो गया है खुशहाल।
बूढ़ी – बूढ़ा को पेंशन योजना, प्रदेश हुआ गुजार।

— अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर —

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर क्षेत्र में अखिल भारती आयुर्विज्ञान संस्थान 300 बेड का हॉस्पिटल खुल जाने से पूर्वांचल ही नहीं उसके साथ साथ नेपाल, बिहार आदि जगहों के मरीज भी उत्कृष्ट चिकित्सा की सुविधाएं प्राप्त कर सकेंगे। इस आयुर्विज्ञान संस्थान से इलाज के लिए बड़े-बड़े शहरों पर निर्भरता में कमी आएगी। इस हॉस्पिटल में ऑपरेशन थिएटर, आयुष ब्लॉक, मेडिकल ब्लॉक और नर्सिंग कॉलेज का निर्माण कार्य पूर्ण होने वाला है।

— हॉस्पिटल में सुविधाएं —

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में सी टी स्कैन, एम आर आई और अल्ट्रासाउंड जैसी अन्य तमाम सुविधाएं उपलब्ध होंगी। भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में 125 एम बी बी एस की सीट उपलब्ध होगी। इस संस्थान द्वारा विविध तरह के रोगों पर शोध का कार्य भी होगा।

— रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर गोरखपुर —

रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर गोरखपुर में वायरस रिसर्च और परीक्षा लैब बना है। जापानी जापानी इंसेफेलाइटिस पर भी विचार होगा। यहां शोध किया जाएगा। इसके रोकथाम के लिए उच्च गुणवत्ता पूर्ण जांच की सुविधा है। जापानी इंसेफेलाइटिस के निदान के लिए रिसर्च फेकल्टी बनाई गई है। अन्य विषाणु जनित बीमारियों पर भी शोध होगा। इस मेडिकल रिसर्च सेंटर से पूर्वांचल के सभी जनपदों को विशेष लाभ मिल सकेगा।

खाद का कारखाना गोरखपुर का छेत्रफल 600 एकड़ में फैला है। जिसकी लागत रुपया 8603 करोड। अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान का क्षेत्रफल 112 एकड़ जमीन पर मौजूद है जिसकी लागत रुपए 1011 करोड़। रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर गोरखपुर के साथ 10,000 करोड़ की तीन परियोजनाओं का लोकार्पण समर्पित किया, राष्ट्र को, भारतीय संस्कृति रक्षक माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गोरखपुर क्षेत्र में।

इस कार्यक्रम में गरिमामय उपस्थिति दर्ज की, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उत्तर प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मोर्य, डॉ दिनेश शर्मा, डॉ भारती प्रवीण पवार, राज्य मंत्री, स्वास्थ एवं परिवार कल्याण, भारत सरकार, पंकज चौधरी, राज्य मंत्री, वित्त, भारत सरकार, जय प्रताप सिंह, मंत्री, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं मातृ – शिशु कल्याण, उत्तर प्रदेश।

रवि किशन शुक्ला, सांसद, गोरखपुर, कमलेश पासवान, सांसद, बांसगांव, शिव प्रताप शुक्ल, सांसद, राज्यसभा। जगदंबिका पाल, सांसद, डुमरियागंज। प्रवीण कुमार निषाद, सांसद, संत कबीर नगर। डॉक्टर रमा पति राम त्रिपाठी, सांसद देवरिया। जयप्रकाश निषाद, सांसद, राज्यसभा। हरीश दिवेदी, सांसद, बस्ती। विजय कुमार दुबे, सांसद, कुशीनगर। रविंद्र कुशवाहा, सांसद, सलेमपुर। और स्वतंत्र देव सिंह, सदस्य, विधान परिषद उत्तर प्रदेश सहित गणमान्य अतिथि उपस्थित रहें।

— प्रगतिशील उत्तर प्रदेश नई ऊंचाइयों को छूने के लिए आगे बढ़ रहा है। —

प्रगतिशील उत्तर प्रदेश नई ऊंचाइयों को छूने के लिए आगे बढ़ रहा है। रिश्तों की प्रकाश का और निरंतरता सड़कों के माध्यम से, नदियों पर पुलों के निर्माण से, बुजुर्गों और बच्चों की सहूलियत का ध्यान रखने से, बस, रेल और हवाई अड्डे निर्माण कार्य से, गांव-गांव, शहर-शहर शौचालय की निर्माण से, प्रधानमंत्री आवास वितरण से, दलित समाज, वंचित तबकों का ध्यान देने से, कल कारखानों के विकास, कोरोना वायरस की फ्री वैक्सीन देने से, धार्मिक उन्माद पर नियंत्रण करने से, दंगा-फसाद पर रोक लगाने से, किसानों की खुशहाली की कामना करते होने से, कृषि विकास के लिए आधुनिक तकनीक पर विचार, छात्रों पर विशेष ध्यान देने से, वाहन की चोरी को रोकने के लिए एच एस आर सी लगाया जाना, शासन प्रशासन पर निगरानी रखने से, उत्तर प्रदेश की अमेठी में 300 मीटर लक्ष वाली ए के- २०३ राइफल निर्माण कारखाने के यह परियोजना 5000 करोड़ की है के पहल से, शहरों – नगरों में ड़कों के निर्माण, ई – बसों के संचालन प्रसार, ई- रिक्सा वितरण, दिव्यांगों को लाभ, डाक घरों का विस्तार सुधार, हस्त शिल्प और हस्त शिल्पियों का विशेष ध्यान देना, रेल पटरियों का विस्तार, रेलवे स्टेशन का पुनर्निर्माण और सुंदरी करण, बस का विस्तार, बस स्टेशन का पुनर्निर्माण सुंदरीकरण। स्वतंत्रता सेनानी का सम्मान, वीर शहीदों का सम्मान, मनरेगा मजदूरों का मजदूरी बढ़ाई जाना, आधुनिक खेती पर बल देना, जैविक खेती को बढ़ावा देना, रोपवे की शहरों में सौगात।

मेट्रो रेल का विकास विस्तार, जन्म – मृत्यु प्रमाण पत्र का तत्कालीन निवारण, योजनाओं का धरातल पर करने का संकल्प, परिषदीय विद्यालय में छात्रों के अभिभाव को छात्र के ड्रेस का पैसा खाते में डालना, छात्रवृत्ति योजना का मेधावी छात्र को लाभ पहुंचाना, छात्र छात्राओं की सुरक्षा के लिए योजनाबद्ध जैसी काम करना, नारी के सम्मान का ध्यान रखना, गैंग वॉर पर अंकुश लगाना, आतंकवाद नक्सलवाद को नष्ट करना,, राजनीति में पारदर्शिता का आना, खिलाडियों को उचित सम्मान देना, जनता को लाइन लगने से बचाने के लिए ATM का विस्तार। ऑनलाइन पैसा ट्रांसफर करने की सुविधा व्यवस्था। बरेका इंजन की विदेश में भी बढ़ी मांग 111 देश में भेजे जा चुके 171 रेल कारखाना से रेल इंजन। केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार के प्रयास से सराहनीय क़दम उठाए गए हैं।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख में समझाने की कोशिश की है — जब इरादे हो नेक, तो चहुँ ओर विकास होता है। इसी का प्रमाण है प्रगतिशील उत्तर प्रदेश नई ऊंचाइयों को छूने के लिए आगे बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 हजार करोड़ की लागत से उतर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ जी के ड्रीम प्रोजेक्ट खाद कारखाना, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान और बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज के रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर का किया लोकार्पण, दिनांक 6 दिसंबर 2021 को। सन 2016 में प्रधानमंत्री मोदी जी ने खाद कारखाने और AIIMS का शिलान्यास किया था। जिसे जनता को समर्पित किया।

—————

sukhmangal-singh-ji-kmsraj51.png

यह लेख (10 हजार करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

ज़रूर पढ़ें — प्रातः उठ हरि हर को भज।

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____Copyright ©Kmsraj51.com All Rights Reserved.____

Filed Under: 2021-KMSRAJ51 की कलम से, सुखमंगल सिंह जी की रचनाएँ, हिन्दी साहित्य Tagged With: 10 हजार करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण।, author sukhmangal singh, poet sukhmangal singh, sukhmangal singh article, गोरखपुर उत्तर प्रदेश में 10 हजार करोड़ की परियोजनाओं का उद्घाटन, गोरखपुर एम्स, रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर गोरखपुर, सुख मंगल सिंह, सुख मंगल सिंह की रचनाएँ, सुखमंगल सिंह का लेख

Primary Sidebar

Recent Posts

  • निरर्थक रील्स की आरी – गुमराह होती नारी।
  • बात वक्त की।
  • तिरंगा का करें सम्मान।
  • एक सफर।
  • बाल विवाह – एक अभिशाप।
  • क्या बदलाव लायेगा नया साल।
  • है तो नववर्ष।
  • मोह।
  • अपना धर्म सबसे उत्तम।
  • ठंडी व्यार।
  • रिश्तों को निभाना सीखो।
  • तंत्र, मंत्र और तत्व ज्ञान में अंतर।
  • मित्र।
  • आखिर क्यों।
  • समय।
  • काले बादल।
  • सुबह का संदेश।

KMSRAJ51: Motivational Speaker

https://www.youtube.com/watch?v=0XYeLGPGmII

BEST OF KMSRAJ51.COM

निरर्थक रील्स की आरी – गुमराह होती नारी।

बात वक्त की।

तिरंगा का करें सम्मान।

एक सफर।

बाल विवाह – एक अभिशाप।

क्या बदलाव लायेगा नया साल।

है तो नववर्ष।

मोह।

अपना धर्म सबसे उत्तम।

ठंडी व्यार।

रिश्तों को निभाना सीखो।

Footer

Protected by Copyscape

KMSRAJ51

DMCA.com Protection Status

Disclaimer

Copyright © 2013 - 2026 KMSRAJ51.COM - All Rights Reserved. KMSRAJ51® is a registered trademark.