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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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Dr. Jaichand Mahalwal

आफता औली बरखा।

Kmsraj51 की कलम से…..

Afta Auli Barkha | आफता औली बरखा।

घरा रेयो जुगती ने,
राती दहां सौंदे दुबकी ने,
रहयो थोड़े से चुस्त,
नही ता बड़ा कुछ पई जाना पौने पुगत।

अंबरा ते बरने लगीरी आफत,
रूड़ने लगीरे सा बरखा ते।
डाल रुख कन्ने फाट,
कल्ले दहाँ जांदे किती खा जो,
कने जरूर लई जाएंओ अपने जागत।

एबकी बार पता नी क्या सोचीरा परमेसरे,
एड़ा दड़ा दड़ लाइरा बरखा रा दड़कया,
एड़ा लगीरा तियां जे एकी कडछियां,
बाटिए देने सारे निपटा।

कर रहम ओ परमेसर हूण,
तेरे सारे बच्चे, तेरी रची री सृष्टि सारी।
कैं लाईरे तरसाने तैं हूण,
करी दो ए आफता औली बरखा बंद हूण।
सब लोक रहो सुखी फेरी,
तायीं गाने सारेयां लोका तेरे गुण।

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — ये बदरा तेज कड़क-कड़क कर बिजली तड़कने के साथ जोरदार मूसलाधार बारिश से तबाही मचा है सब ओर। ये जो आफत की बारिश आयी है चारों तरफ पानी ही पानी भरा है तेज वर्षा के कारण हे प्रभु अब इसे बंद करो तुम पर ही हम सबको विश्वास है। हम जानते है की ये मानवों के कुकर्मों और प्रकृति से खिलवाल का ही नतीज़ा है। तेज मूसलाधार वर्षा से पूरा जलमग्न हो गया ये पहाड़ी प्रदेश, सभी दुखी व परेशान है। हमसब तेरे ही बच्चें है प्रभु हम पर रहम करो और अब इस तेज वर्षा को बंद करो प्रभु, जिससे जनजीवन सामान्य हो सके।

—————

यह कविता (आफता औली बरखा।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, लघु कथा, सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल है। साहित्यिक नाम — डॉ• जय अनजान है। माता का नाम — श्रीमती कमला देवी महलवाल और पिता का नाम — श्री सुंदर राम महलवाल है। शिक्षा — पी• एच• डी•(गणित), एम• फिल•, बी• एड•। व्यवसाय — सहायक प्रोफेसर। धर्म पत्नी — श्रीमती संतोष महलवाल और संतान – शानवी एवम् रिशित।

  • रुचियां — लेखक, समीक्षक, आलोचक, लघुकथा, फीचर डेस्क, भ्रमण, कथाकार, व्यंग्यात्मक लेख।
  • लेखन भाषाएं — हिंदी, पहाड़ी (कहलूरी, कांगड़ी, मंडयाली) अंग्रेजी।
  • लिखित रचनाएं — हिंदी(50), पहाड़ी(50), अंग्रेजी(10)।
  • प्रेरणा स्त्रोत — माता एवम हालात।
  • पदभार निर्वहन — कार्यकारिणी सदस्य कल्याण कला मंच बिलासपुर, लेखक संघ बिलासपुर, सह सचिव राष्ट्रीय कवि संगम बिलासपुर इकाई, ज्वाइंट फाइनेंस सेक्रेटरी हिमाचल मलखंभ एसोसिएशन, सदस्य मंजूषा सहायता केंद्र।
  • सम्मान प्राप्त — श्रेष्ठ रचनाकार(देवभूमि हिम साहित्य मंच) — 2022
  • कल्याण शरद शिरोमणि सम्मान(कल्याण कला मंच) — 2022
  • काले बाबा उत्कृष्ट लेखक सम्मान — 2022
  • व्यास गौरव सम्मान — 2022
  • रक्त सेवा सम्मान (नेहा मानव सोसायटी)।
  • शारदा साहित्य संगम सम्मान — 2022
  • विशेष — 17 बार रक्तदान।
  • देश, प्रदेश के अग्रणी समाचार पत्रों एवम पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

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©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari, etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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क्या भरोसा।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kya Bharosa | क्या भरोसा।

मानव मानव को मार सकता है,
मानव मानव का नरसंहार कर सकता है।
मानव मानव को डुबो सकता है,
पर मानव मानव का बेड़ा सिर्फ,
ऊपर वाला ही पार कर सकता है।

देख हालात हिमाचल के,
जय क्यों तू इतना इतराता है।
क्या भरोसा है इस जीवन का,
सिर्फ ऊपर वाला ही जाने,
इन सांसों के पल पल का कितना नाता है।

सच में ही यह कलयुग है,
जो सोचा ही नहीं अब वह हो सकता है।
किसने सोचा था हमारा पहाड़ी राज्य भी,
एक दिन जलमग्न हो सकता है।

जय भी कर रहा अरदास प्रभु से दिन-रात,
अब तू ही हमको बचा सकता है।
डर के मारे दिन रात सहम रहे अब लोग,
प्रकृति की भयंकर मार को,
अब सहन नहीं कर पा रहे लोग।
अब सिर्फ तुझ पर ही है एक भरोसा,
तू ही डर को भगाकर ,
अच्छे दिन ला सकता है अच्छे दिन ला सकता है।

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — सच में ही यह घनघोर कलयुग है, जो सोचा ही नहीं था अब वह हो रहा है, किसने सोचा था हमारा पहाड़ी राज्य हिमाचल भी एक दिन जलमग्न हो सकता है। आखिर मानव ने जो प्रकृति से छेड़छाड़ की उसका दंड तो मिलना ही था उसे किसी न किसी आपदा रूप में, कर्म का फल तो मिलेगा ही। अब तो केवल प्रभु पर ही विश्वास है हम सबको अरदास प्रभु से दिन-रात करते हमसब अब तू ही हमको बचा सकता है। डर के मारे दिन रात सहम रहे अब लोग। प्रकृति की भयंकर मार को अब सहन नहीं कर पा रहे लोग। अब सिर्फ तुझ पर ही है एक भरोसा, तू ही डर को भगाकर, अच्छे दिन ला सकता है प्रभु।

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यह कविता (क्या भरोसा।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, लघु कथा, सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल है। साहित्यिक नाम — डॉ• जय अनजान है। माता का नाम — श्रीमती कमला देवी महलवाल और पिता का नाम — श्री सुंदर राम महलवाल है। शिक्षा — पी• एच• डी•(गणित), एम• फिल•, बी• एड•। व्यवसाय — सहायक प्रोफेसर। धर्म पत्नी — श्रीमती संतोष महलवाल और संतान – शानवी एवम् रिशित।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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सोच।

Kmsraj51 की कलम से…..

Thinking | सोच।

उस दिन राम किसी लंबी यात्रा से अपने घर लौटा था। राम ने जैसे ही दरवाजा खटखटाया बेटा जल्दी से दरवाजा खोलने आया और एकदम से अपने पापा के बैग से अपने लिए मिठाई ढूंढने लगा। बेटे ने ना तो पापा के चरण स्पर्श किए और ना ही हाल-चाल पूछा। क्योंकि बेटा अभी 5 साल का है इसलिए पापा ने भी ज्यादा परवाह न की। घर के अंदर बेटी ने भी पापा को नमस्ते की और कहा पापा मेरे लिए क्या लाए हैं? पापा ने भी बैग खोलते हुए उसको बताया कि उसके लिए कपड़े लाए हैं। पापा ने अपनी मां के चरण स्पर्श किए और मां ने आशीर्वाद देते हुए कहा कि शाबाश मुझे तुम पर गर्व है।

इसके बाद राम की धर्मपत्नी ने ना तो राम को पानी के लिए पूछा, ना चाय के लिए पूछा, क्योंकि शाम को लगभग 8:00 का समय था, राम अभी अपने कपड़े बदल ही रहा था कि उसकी पत्नी ने उसे कहा थोड़ी सी सब्जी बची है, बाकी अगर खाना, खाना है तो खाना बना लो, बाकियों के लिए भी खाना बना लो, मैं खाना नहीं बनाऊंगी। राम को एकदम से गुस्सा आया और उसने कहा कि मैं इतनी दूर से आया हूं ना तो तुम मेरे लिए चाय के लिए पूछ रही हो, ना पानी के लिए। सीधे ही हुक्म लगा रही हो कि अपने लिए खाना बना लो, बाकी के लिए भी खाना बना लो, यह कहां का न्याय है?

राम की पत्नी तपाक से बोली तुमने कहा मेरा हाल चाल पूछ लिया मैं बीमार हूं, मेरे बारे में कोई नहीं सोचता है, जबकि ऐसा नहीं था वह पता नहीं किस बात के लिए नाराज थी। राम ने कपड़े बदल कर कुर्सी पर बैठकर सोचा कि आखिर आदमी किसके लिए कमाता है, किसके लिए वह दिन भर इधर-उधर दौड़ भाग करता है और अगर आदमी कमा भी लेता है तो अपने साथ क्या लेकर जाएगा?

आखिरकार राम ने अपने मन को शांत किया और चुपचाप रसोई घर में जाकर बहुत सारे प्रश्न लेकर खाना बनाने की तैयारी करने लग पड़ा। तभी राम की बीवी रसोई में आती है और अपनी आंखों से आंसू टपकाते हुए आटा गूंथने में लग जाती है जबकि राम ने कहा कि कोई बात नहीं, तुम अगर बीमार हो तो तुम आराम करो, मैं खाना बना लूंगा। लेकिन राम की बीवी ने आनन-फानन में आटा गूथ ली और चपाती भी बना दी। उधर राम ने सब्जी बना दी और सबने खाना खाया और थोड़ा माहौल शांत हुआ लेकिन राम के मन में उठे प्रश्नों का जवाब राम को कहीं नहीं मिल पाया?

एक तरफ राम की मां थी जो राम को आशीर्वाद देते हुए कहा कि शाबाश बेटा मुझे तुम पर गर्व है और दूसरी तरफ राम की धर्मपत्नी थी जिसने मुबारकबाद देने की बजाय हुकुम चलाना शुरु कर दिया कि तुम यह करो, तुम वह करो, तुम ऐसा नहीं करते हो, तुम वैसा नहीं करते हो? या औरत ही है जो मन भी है और बीवी भी है लेकिन सच में दिन-रात का फर्क है। कोई मां अपने परिवार के लिए दिन रात ही सोचती रहती है तो कोई मां ऐसी भी है जो सिर्फ और सिर्फ अपने तक ही सीमित है? सब सोच-सोच का फर्क है।

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लघु कथा के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — “एक मां ही है जो अपने परिवार के लिए दिन रात ही सोचती रहती है” तो कोई मां ऐसी भी है जो सिर्फ और सिर्फ अपने तक ही सीमित है? ये सब सोच-सोच का फर्क है। भारतीय संस्कृति में माँ सदैव ही अपनों का हित चाहती है, और एक माँ ही है जो बिना किसी स्वार्थ के सबका ध्यान रखती है, भले ही खुद कितना भी कष्ट झेलती है फिर भी गुस्सा नही करती है, लेकिन आजकल की कुछ लड़कियों को क्या हो गया है जो अपनी निज संस्कार व फर्ज को भूलती जा रही है, ये कैसी सोच है इनकी? खैर एक बात याद रखे की मानव जीवन की तीन मुख्य जरूरतें है, अच्छा खाना, अच्छा पहनने को कपडा और रहने के लिए मकान, इन्हीं जरूरतों के लिए आदमी कार्य करता है जिससे उसके परिवार का जरुरत पूर्ण होता रहे। इसके बदले वह सिर्फ दिल का प्रेम व सहानुभूति के दो शब्द चाहता है अपनों से।

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यह लघु कथा (सोच।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, लघु कथा, सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मेरा नाम लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल है। साहित्यिक नाम — डॉ• जय अनजान है। माता का नाम — श्रीमती कमला देवी महलवाल और पिता का नाम — श्री सुंदर राम महलवाल है। शिक्षा — पी• एच• डी•(गणित), एम• फिल•, बी• एड•। व्यवसाय — सहायक प्रोफेसर। धर्म पत्नी — श्रीमती संतोष महलवाल और संतान – शानवी एवम् रिशित।

  • रुचियां — लेखक, समीक्षक, आलोचक, लघुकथा, फीचर डेस्क, भ्रमण, कथाकार, व्यंग्यात्मक लेख।
  • लेखन भाषाएं — हिंदी, पहाड़ी (कहलूरी, कांगड़ी, मंडयाली) अंग्रेजी।
  • लिखित रचनाएं — हिंदी(50), पहाड़ी(50), अंग्रेजी(10)।
  • प्रेरणा स्त्रोत — माता एवम हालात।
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