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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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meera bharti poems

योगासन में ध्यान।

Kmsraj51 की कलम से…..

Meditation in Yogasana | योगासन में ध्यान।

स्थिर रहें सुख आसनी में, योग सँग भगवान है,
यह नहीं व्यायाम भौतिक, आत्म अन्तः स्नान है।

चित चले संकल्प अनगिन, योग में संयम तपन,
अर्द्धमत्स्येन्द्रासनित हों, मेरु-कुल उमगान है।

बद्ध पद्मासन सु-शोभें, पाँच श्वासें लें, तजें,
यह लचक दे तन घटक में, सीखना विज्ञान है।

आसनित हो जब भुजंगी, चौकसी हो संतुलन,
रोग से यह दूर रखता, जाप में ही ध्यान है।

पीठ पहिये सी रहे जब, चक्र आसन गुण क-हन,
योग साधें राम सुमिरें, देश का उत्थान है।

साँस लय के सँग सजग हों, तन रखें सीमा परे,
यत्न कर विश्राम लें पुनि, आत्म में प्रभु भान है।

योग शिक्षण में सुमति लें, नित नियम अभ्यास धन,
कर्म दैनिक, कामना तज, शांति में इकतान है।

♦ प्रो• मीरा भारती जी – पुणे, महाराष्ट्र  ♦

—————

  • “प्रो• मीरा भारती जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से बताने की कोशिश की है — निरंतर अभ्यास के बाद मन को स्थिर किया जा सकता है और एक ही आसन में बैठने के अभ्यास से ये समस्या का समाधान हो जाता है। सदाचार, सद्विचार, यम, नियम का पालन और सात्विक भोजन से भी ध्यान में सरलता प्राप्त होती है। ध्यान का अभ्यास आगे बढ़ने के साथ मन शांत हो जाता है जिसको योग की भाषा में चित्तशुद्धि कहा जाता है।

—————

यह कविता (योगासन में ध्यान।) “प्रो• मीरा भारती जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं से नई पीढ़ी को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम मीरा भारती (मीरा मिश्रा/भारती) है। मैंने BRABU Muzaffarpur, Bihar, R.S College में प्राध्यापिका के रूप में 1979 से 2020 तक सक्रिय चिंतन और मनन, अध्यापन कार्य किया, आनलाइन शिक्षण कार्यक्रम से वर्तमान में भी जुड़ी हूं, मेरे द्वारा प्रशिक्षित बच्चे लेखनी का सुंदर उपयोग किया करते हैं। मैंने लगभग 130 कविताएं लिखी है, जिसमें अधिक प्रकाशित हैं, कई आलेख भी, लिखे हैं। दृढ़ संकल्प है, कि लेखन और अध्यापन से, अध्ययन के सामूहिक विस्तारण से समाज कल्याण – कार्य के कर्तृत्व बोध में वृद्धि हो सकती है। अधिक सकारात्मक परिणाम आ सकते हैं।

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आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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भारत संस्कृति में पिता।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ भारत संस्कृति में पिता। ♦

पंचतत्व आलेख हैं, पिता ईश आशीष।
संतति में सद्गुण रचें, जैसे पुष्प शिरीष।

शिल्प से माटी सजती, करती आतप-स्नान।
पुत्र चरित गुण गान में, देखें पितु अवदान।

पुत्र हित पुरुषार्थ करें, बनें ज्ञान साकार।
सिद्धि संतति लाभ मिले, पिता करें आचार।

अद्भुत मानव मूर्ति है, विधना का वरदान।
पितु चरणों की वंदना, करते धर्म महान।

पित्तृ-आत्म की ज्योति से, होता मनु कल्याण।
सूक्ष्म रूप निर्देश दें, कहते वेद पुराण।

♦ प्रो• मीरा भारती जी – पुणे, महाराष्ट्र  ♦

—————

  • “प्रो• मीरा भारती जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से बताने की कोशिश की है — मेरे जीवन के अमूल्य व्यक्ति मेरे पिताजी ने हमेशा मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उनकी दी हुई शिक्षा हर कठिन घड़ी में मेरा मार्ग प्रशस्त करती है। आज पितृ दिवस के शुभ अवसर पर मैं उनके चरणों में प्रणाम करती हूं।

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यह कविता (भारत संस्कृति में पिता।) “प्रो• मीरा भारती जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं से नई पीढ़ी को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मेरा नाम मीरा भारती (मीरा मिश्रा/भारती) है। मैंने BRABU Muzaffarpur, Bihar, R.S College में प्राध्यापिका के रूप में 1979 से 2020 तक सक्रिय चिंतन और मनन, अध्यापन कार्य किया, आनलाइन शिक्षण कार्यक्रम से वर्तमान में भी जुड़ी हूं, मेरे द्वारा प्रशिक्षित बच्चे लेखनी का सुंदर उपयोग किया करते हैं। मैंने लगभग 130 कविताएं लिखी है, जिसमें अधिक प्रकाशित हैं, कई आलेख भी, लिखे हैं। दृढ़ संकल्प है, कि लेखन और अध्यापन से, अध्ययन के सामूहिक विस्तारण से समाज कल्याण – कार्य के कर्तृत्व बोध में वृद्धि हो सकती है। अधिक सकारात्मक परिणाम आ सकते हैं।

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वाणी वंदना।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ वाणी वंदना। ♦

शारदा मां, हंसासिनी,
मन वाणी शुभ कर्म।
अवसर सेवा देना,
मां सत्य ज्योति देना।

देवांगना सुहासिनी,
ध्वनि रस मनोभाव।
कला का विन्यास देना,
त्याग सत वृत्ति देना।

ध्यायिनी वीणा वादिनी,
अर्थ रमणीयता में।
दृश्य का विधान देना,
प्रीति सुकाज देना।

सत्यज्ञानी सुभाषिनी,
देश सेवा मंत्र देना।
भाव कला शब्द शैली,
नीति संगति देना।

♦ प्रो• मीरा भारती जी – पुणे, महाराष्ट्र  ♦

—————

  • “प्रो• मीरा भारती जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से बताने की कोशिश की है — शारदा मां के गुणों और शक्तियों का वर्णन किया है। मां से प्रार्थना कर रही है मन, वाणी व सुबह कर्म करने की शक्ति देना, मन में हो सदैव सेवा भाव, सत्य की ज्योति सदैव ही जलती रहे मन में मां। वाणी में मधुरता देना व कला का गन विन्यास देना, त्याग सत वृत्ति देना मां मुझे। मेरी आँखे हमेशा कल्याणकारी शुभ ही देखे ऐसी शक्ति देना मां। मेरे मन के अंदर सदैव ही अपनी जननी मातृभूमि की सेवा का भाव देना मां। मेरी संगती अच्छी हो, नियमित व संयमित जीवन हो मेरा ऐसा आशीर्वाद देना मां।

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ध्यान – साधना करवा चौथ में।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ ध्यान – साधना करवा चौथ में। ♦

विचार के मुक्ताकाश विचरण में,
मैं और तुम सदा समभाव संगी।
हम एक हृदय, आत्म-भावी पथिक,
हैं ज्ञात तुम्हें है, प्रेयसी तुम्हारी।

क्षीणकाय, जा रही बार्धक्य दिश,
बोले डाक्टर,” गुर्दे तुम्हारे अस्वस्थ।
निर्जल – व्रत है शत्रु वत् उसके हित,”
धर्म की परिभाषा बदल रही सतत।

परंपरा होती परिशोधित पर्यावरण से,
मेरा आज है मानस का ध्यान – व्रत।
प्रार्थना तुम्हारे दीर्घ जीवन की, हर,
क्षण, तुम्हारी आत्मोन्नति ही एक।

नव अनुभूति है, न होना तुम,
म्लान-मुख, सम्यक् ध्यान, प्रार्थना।
की शक्ति उच्चतर है, हूं, अव्रती,
मैं आज, निज स्वास्थ्य हित में।

ध्यान ध्वनि से परम प्रबुद्ध तुम,
शुभकामना करवा चौथ की।

♦ प्रो• मीरा भारती जी – पुणे, महाराष्ट्र  ♦

—————

  • “प्रो• मीरा भारती जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से बताने की कोशिश की है — करवा चौथ व्रत के दौरान अपनी अंतर साधना के लिए उपयुक्त समय होता है। करवा चौथ के व्रत को एक सामान्य व्रत की जगह साधनामय दिन की तरह व्यतीत करें। अपने आंतरिक सुषुप्त आंतरिक शक्तियों का स्मरण कर उन्हें जागृत करें। इन आंतरिक शक्तियों का उपयोग कर जीवन के हर क्षेत्र में विकास करें।

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यह कविता (ध्यान – साधना करवा चौथ में।) “प्रो• मीरा भारती जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं से नई पीढ़ी को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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