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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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Vinod Verma

ये है धर्मशाला।

Kmsraj51 की कलम से…..

Yeh Hai Dharamshala | ये है धर्मशाला।

The natural beauty, especially the rains, the Buddhist Guru's abode in McLeod Ganj, and the Bhagsu Falls, are all captivating.

धौलाधार है जहाँ की पहचान।
इन्द्रुनाग देव है वहाँ की शान॥

वर्षा हर किसी पल हो जाती है शुरू वहाँ।
इससे सुंदर शहर हो सकता है और कहाँ॥

मैकलोड़गंज में बौध गुरु का है वास।
भागसू जलप्रपात है वहाँ से थोड़ा ही पास॥

करेरी झील की सुंदरता मनमोहक है बड़ी।
पर सड़कों की चढा़ई है भी थोड़ी खड़ी॥

शहीद स्मारक शहीदों की याद है दिलाता।
दुश्मनों को कैसे खदेड़ा होगा ये अहसास है कराता॥

विश्व में बन रही है जिसकी पहचान।
वो क्रिकेट मैदान है यहाँ की जान॥

शिक्षक महाविद्यालय ने अपनी अलग सी पहचान है बनाई।
वहीं केन्द्रीय विश्वविद्यालय ने भी शिक्षा की अलख है जगाई॥

सैलानी उत्सुक है आने को यहाँ।
उनके लिए शायद यह है अलग सा जहाँ॥

जिसको भी मौका मिलता है यहाँ आने का।
वो नाम ही नहीं लेता यहाँ से वापिस जाने का॥

♦ विनोद वर्मा जी / जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवि एक ऐसे स्थान की सुंदरता और विशेषताओं का वर्णन कर रहे हैं, जिसकी पहचान धौलाधार पर्वतमाला और इन्द्रुनाग देव से है। वहाँ की प्राकृतिक सुंदरता, विशेषकर बारिश, मैकलोडगंज में बौद्ध गुरु का वास, और भागसू जलप्रपात, सभी मनमोहक हैं। करेरी झील की सुंदरता भी उल्लेखनीय है, हालांकि उसकी चढ़ाई थोड़ी कठिन है। शहीद स्मारक वीरों की शहादत की याद दिलाता है और दुश्मनों के खिलाफ उनकी बहादुरी का अहसास कराता है। विश्व प्रसिद्ध क्रिकेट मैदान भी यहाँ की पहचान है। शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक महाविद्यालय और केन्द्रीय विश्वविद्यालय ने अपनी विशेष पहचान बनाई है। सैलानियों के लिए यह जगह एक अद्वितीय अनुभव है, और जो भी यहाँ आता है, वह इस जगह को छोड़कर जाना नहीं चाहता।

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यह कविता (ये है धर्मशाला।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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हिन्दी किस्मत की मारी।

Kmsraj51 की कलम से…..

Hindi Kismat Ki Mari | हिन्दी किस्मत की मारी।

The foreign pomp and show is becoming too much, that is why Hindi could not become our national language. Speak foreign language but give priority to Hindi, Hindi is our mother, do not forget this.

मैं हूँ हिन्दी किस्मत की मारी,
मुझ पर विदेशी भाषा पड़ रही है भारी।
हर कोई विदेशी भाषा बोलना समझता है शान,
न जाने क्यों खो रहे हैं हम अपनी पहचान।

वर्ष में एक दिन है आता,
जब हर कोई हिन्दी दिवस है मनाता।
बड़ी बड़ी बातें हिन्दी पर है बोली जाती,
अगले ही दिन हर किसी के मुंह में विदेशी भाषा है आती।

जो भी हिन्दी में है बात करता,
वो विदेशी भाषा न बोलने का खामियाजा है भरता।
रोजगार नहीं मिलता, बात करने को कोई तैयार नहीं होता,
हिन्दी बोलने वाला शायद यूँ ही नहीं रोता।

विदेशी तड़क भड़क हो रही है भारी,
तभी तो हिन्दी नहीं बन पाई राष्ट्र भाषा हमारी।
विदेशी बोलो पर हिन्दी को प्राथमिकता दो,
हिन्दी हमारी जननी इस बात को मत भूलो।

नई पीढ़ी हिन्दी से अनभिज्ञ सी हो रही,
उन्हें तो विदेशी भाषा ही लगती है सही।
हिन्दी है हमारी जान इससे है हमारी पहचान,
कहीं यूँ ही न धूल जाए राष्ट्र भाषा बनाने के अरमान।

♦ विनोद वर्मा जी / जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवि ने हिंदी भाषा की वर्तमान स्थिति और उससे जुड़ी चिंताओं को व्यक्त किया है। हिंदी कहती है कि वह किस्मत की मारी है, क्योंकि विदेशी भाषाओं का प्रभाव उस पर भारी पड़ रहा है। लोग विदेशी भाषा बोलने को शान समझते हैं, जिससे अपनी पहचान खोती जा रही है। हिंदी दिवस पर लोग हिंदी की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन अगले ही दिन वे फिर से विदेशी भाषा बोलने लगते हैं। हिंदी में बात करने वालों को सामाजिक और व्यावसायिक जीवन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि उन्हें रोजगार और सम्मान नहीं मिलता। विदेशी संस्कृति और भाषा का प्रभाव बढ़ने से हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं बन पाई है। नई पीढ़ी हिंदी से दूर हो रही है और विदेशी भाषाओं को ही सही मान रही है। कवि इस बात पर जोर देता है कि हमें विदेशी भाषा का सम्मान करते हुए भी हिंदी को प्राथमिकता देनी चाहिए, क्योंकि हिंदी हमारी पहचान और आत्मा है।

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यह कविता (हिन्दी किस्मत की मारी।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

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गुरु।

Kmsraj51 की कलम से…..

Guru | गुरु।

They teach us to set goals. They also tell us the mantra to achieve our goals. Whenever happiness and sorrow come, they also ignite the flame to face them.

गुरु शब्द है छोटा पर महत्व है बड़ा।
गर न हो गुरु तो समझो जीवन अधूरा पड़ा॥

सबसे पहले गुरु माँ बाप है होते।
जो अपनी संतान को संस्कारों की शिक्षा है देते॥

द्वितीय गुरु पाठशाला में शिक्षक है होते।
शाब्दिक और व्यावहारिक ज्ञान जो है देते॥

हमें लक्ष्य निर्धारित करना है सिखाते।
लक्ष्य भेदने का मंत्र भी जरूर है बताते॥

सुख – दुःख जब भी आए।
उनका सामना करने की लौ भी जगाए॥

आत्मसम्मान और आत्मबल का भी बोध हैं करवाते।
अभिमान न कभी आए इसका भी एहसास जरूर दिलाते॥

बड़ों का आदर सम्मान करना है सिखाते।
छोटों से प्यार करना भी जरूर बताते॥

गुरु का सम्मान जहाँ भी है होता।
जीवन उनका सफल हो जाता॥

आज गुरु को उतना सम्मान नहीं मिल पाता।
गुरु अपने आप को कोसता हुआ नजर है आता॥

गुरु का आदर सम्मान है जरूरी।
इनके अभाव में समझो सृष्टि है अधूरी॥

♦ विनोद वर्मा जी / जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में कवि गुरु के महत्व को बताते हुए कहते हैं कि गुरु का स्थान जीवन में बेहद महत्वपूर्ण होता है। सबसे पहले माता-पिता को गुरु माना जाता है, जो बच्चों को संस्कारों की शिक्षा देते हैं। फिर शिक्षक विद्यालय में ज्ञान प्रदान करते हैं, जो शाब्दिक और व्यावहारिक होता है। गुरु हमें जीवन में लक्ष्य तय करना और उसे प्राप्त करने के तरीके सिखाते हैं। वे हमें आत्मसम्मान, आत्मबल, और विनम्रता का पाठ पढ़ाते हैं, साथ ही यह भी सिखाते हैं कि बड़ों का सम्मान और छोटों से प्यार कैसे करना चाहिए। कवि इस बात पर भी ध्यान दिलाते हैं कि आज के समय में गुरु को उतना सम्मान नहीं मिल रहा, जितना मिलना चाहिए। गुरु का आदर करना आवश्यक है, क्योंकि उनके बिना जीवन और सृष्टि अधूरी है।

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यह कविता (गुरु।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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भाद्रो रा महीना।

Kmsraj51 की कलम से…..

Bhadro Ra Mahina | भाद्रो रा महीना।

The poem mentions festivals ranging from the festival of Rakhi to Janmashtami, Guga Naumi, Avansa Dugansa, and Sairi.

सौणा ते बाद भाद्रो गया आई।
हुण भान्ति भान्ति रे तवाहर लैणे मनाई॥

सबणी ते पैहले राखड़िया रा तवाहर गया आई।
ता बैहणी अपणे भाई जो राखड़ी लैंईं पैहनाई॥

गूगे री मण्डलियां घरा घरा जांई आई।
गूगे री गाथा सुणाई कने सबणी जो निहाल करी जाईं॥

तेते बाद चनण षष्ठी जाईं आई।
कोई व्रत कराएं ता कोई व्रत छिद्री कने भट्टी लैं ख्वाई॥

ऐते बाद जन्माष्टमी रा ध्याड़ा जां आई।
दिना जो व्रत रखी ने राती जो कृष्ण महिमा लैं गाई॥

गूगा नौमीं जो गूगे री मण्डलियां फिरना करी देईं बंद।
गूगे जो रोट चढ़ाई कने रोट खाई कने लैं बड़ी नंद॥

फेरी अवांसा डुगांसा जाईं आई।
घोघड़ा रिया धारा देवतेया कने डैणी च खूब हुईं लड़ाई॥

दूज कने तृतीया रे ध्याड़े मुनियां कने जनाना व्रत करी लईं।
जनाना सदा सुहागण कने मुनियां बांके लाड़े जो पाणे री आस लगाई जाईं॥

पत्थर चौथा रा डर सबणी जो लगां।
झूठा लांछण नी लगो इदी डरा ते तयाड़े घरा आंदर रैहणा ही बांका लगां॥

हलावे बजौए री पूजा भी हुई जाईं।
हुण नौईं फसल बाहणे री तयारी भी हुई जाईं॥

सैरी रा तवाहर भी जां आईं।
नौईं लाड़िया हुण अपणे सौरया चली जाईं॥

♦ विनोद वर्मा जी / जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता का सारांश है कि इसमें विभिन्न त्योहारों और धार्मिक अनुष्ठानों का वर्णन किया गया है, जो भाद्रपद महीने में मनाए जाते हैं। कविता में राखी के त्योहार से लेकर जन्माष्टमी, गूगा नौमी, अवांसा डुगांसा, और सैरी जैसे त्योहारों का जिक्र किया गया है।
  • राखी: बहनें अपने भाइयों को राखी बांधती हैं।
  • गूगा नौमी: गूगा की मंडलियां घर-घर जाकर गाथाएं सुनाती हैं, और लोग गूगे के रोट चढ़ाकर प्रसाद ग्रहण करते हैं।
  • जन्माष्टमी: लोग दिन में व्रत रखते हैं और रात में भगवान कृष्ण की महिमा गाते हैं।
  • अवांसा डुगांसा: इस त्योहार में देवताओं के बीच युद्ध की कहानी सुनाई जाती है।
  • सैरी: यह एक पारिवारिक त्योहार है, जिसमें नई बहुएं अपने ससुराल जाती हैं।
  • कविता में इस महीने के त्योहारों और अनुष्ठानों के महत्व को दर्शाया गया है, जो समाज में रिश्तों और परंपराओं को मजबूत करते हैं।

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यह कविता (भाद्रो रा महीना।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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वो है मुरली वाला।

Kmsraj51 की कलम से…..

Vo Hai Murli Wala | वो है मुरली वाला।

The one who wears the peacock crown .He charmed the milkmaids with the sweet tune of his flute. He is the flute player.

देवकी के गर्भ से जन्म लेने वाला,
यशोदा ने है जिसे पाला
वो है मुरली वाला।

माखन को है चुराने वाला,
ग्वालों का ही नाम ले डाला,
वो है मुरली वाला।

गोपियों संग रास है रचाने वाला
रूप है जिसका सांवला सांवला
वो है मुरली वाला।

गोवर्धन पर्वत को एक ऊंगली पर उठाने वाला
लीला यह देख दंग रह गया हर एक गवाला
वो है मुरली वाला।

मोर मुकुट है पहनने वाला,
बांसुरी की मधुर धुन से गोपियों को मोह डाला,
वो है मुरली वाला।

गेंद के बहाने यमुना में छलांग लगाने वाला,
कालिया नाग के फनों पर नाच कर डाला,
वो है मुरली वाला।

कंश मामा को संदेश दे डाला,
जन्म ले चुका है तेरा वध करने वाला,
वो है मुरली वाला।

♦ विनोद वर्मा जी / जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में कवि भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप और उनकी अद्भुत लीलाओं का वर्णन करते है। कविता में श्रीकृष्ण को “मुरली वाला” कहा गया है, जो देवकी के गर्भ से जन्म लेने के बाद यशोदा द्वारा पाले गए। वह माखन चुराने वाले, गोपियों के संग रास रचाने वाले, और गोवर्धन पर्वत को एक ऊंगली पर उठाने वाले के रूप में वर्णित हैं। श्रीकृष्ण की लीलाओं में यमुना नदी में कालिया नाग के फनों पर नाचने और कंस का वध करने के संकेत भी शामिल हैं। कविता भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और उनके चमत्कारों को समर्पित है।

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यह कविता (वो है मुरली वाला।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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बरसात का मौसम।

Kmsraj51 की कलम से…..

Rainy Season | Barasat Ka Mausam | बरसात का मौसम।

'rainy season', describing the arrival of the rainy season and its effects. The rain showers bring greenery all around and the clouds start touching the ground.

वर्षा की बौछारें अब लगी है आने।
चहुँ ओर हरियाली सी लगी है छाने॥

बादल मानों जमीं को लगे है छुने।
झमाझम वर्षा अब लगी है होने॥

किसान खेतों में फसल लगे हैं बोने।
धान की रोपाई भी लगी है होने॥

बच्चे भी छुट्टियों का आनंद लगे हैं लेने।
सुबह शाम पढ़ाई करते दिन भर अनेकों खेल खेले॥

वर्षा की फुहारें जब भी लगे पड़ने।
मोर भी नाच कर स्वागत लगे हैं करने॥

वर्षा ऋतु में पानी भी होने लगता है प्रदूषित।
छानकर व उबाल कर पीने से फायदे हैं अदभुत॥

हैजा, पेचिस व मलेरिया फैलाते हैं अपना जाल।
सावधानी न बरतने पर कर देते हैं बेहाल॥

नदी नालों के पास जाने से बचें।
तभी तो बरसात के दिन निकलेगें अच्छे॥

♦ विनोद वर्मा जी / जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता ‘बरसात का मौसम’ के बारे में है, जिसमें वर्षा ऋतु के आगमन और इसके प्रभावों का वर्णन किया गया है। वर्षा की बौछारों से चारों ओर हरियाली छा जाती है और बादल ज़मीन को छूने लगते हैं। किसान खेतों में फसलें बोने लगते हैं, विशेषकर धान की रोपाई की जाती है। बच्चे छुट्टियों का आनंद लेते हैं, दिन भर खेलते हैं और सुबह-शाम पढ़ाई करते हैं। मोर भी बारिश की फुहारों का स्वागत नाच कर करते हैं। हालांकि, वर्षा ऋतु में पानी प्रदूषित हो जाता है, इसलिए उसे छानकर और उबालकर पीना चाहिए। इसके अलावा, हैजा, पेचिस और मलेरिया जैसी बीमारियाँ फैलती हैं, जिससे सावधानी न बरतने पर लोग परेशान हो सकते हैं। अंत में, कवि सलाह देते हैं कि नदी-नालों के पास जाने से बचना चाहिए ताकि बरसात के दिन अच्छे से बिताए जा सकें।

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यह कविता (बरसात का मौसम।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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बचपन।

Kmsraj51 की कलम से…..

Bachpan / Childhood | बचपन।

Childhood provides the foundation for all future learning, behavior and health.

न कोई अपना न कोई पराया,
हर किसी को लगे जो प्यारा,
यही बचपन है, यही बचपन है।
तोतली तोतली आवाज सबको है सुहाती,
जिसने भी दुलारा उसी की ओर नजर है जाती,
यही बचपन है, यही बचपन है।

न कोई खुशी न कोई गम,
जब भी देखो अपने आप में है मग्न,
यही बचपन है, यही बचपन है।
न कोई हार न कोई जीत,
सब लगते हैं अपने मीत,
यही बचपन है, यही बचपन है।

न वर्तमान की चिंता न भविष्य का डर,
हर वक़्त रहते हैं मस्त व निडर,
यही बचपन है, यही बचपन है।
माँ की ममता बाप का प्यार,
मिला है मानो उपहार,
यही बचपन है, यही बचपन है।

जिसको देखो वही दुलारता,
हर कोई अपनी ओर पुकारता,
यही बचपन है, यही बचपन है।

♦ विनोद वर्मा जी / जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में बचपन की खुशियों और सरलता का सुंदर चित्रण किया गया है। कविता में यह बताया गया है कि बचपन में हर कोई सादगी और मासूमियत के साथ जीता है। बचपन का सुंदर माहौल और सबको प्यार देने की भावना को व्यक्त किया गया है। कविता में बचपन के अनमोल लम्हों की महत्वपूर्ण भूमिका है, जो हर किसी के जीवन में अद्वितीय होती है।

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यह कविता (बचपन।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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हिन्दी भाषा।

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Hindi Bhasha | हिन्दी भाषा।

Hindi Day is celebrated in India to commemorate the date 14 September 1949 on which a compromise was reached—during the drafting of the Constitution of India—on the languages that were to have official status in the Republic of India.

जो हिन्दी भाषा से नहीं होगा परिचित।
उसके लिए नहीं है हमारे पास कोई इज्जत।
हैलो हाय कहने वालो एक बार फिर सुन लो।
अपने मन में हिन्दी भाषा के विचार बुन लो।

हमने सुना था कि बच्चों को हिन्दी भाषा पढ़ाई जाती है।
मगर आज पैदा होते ही विदेशी भाषा सिखाई जाती है।
विदेशी भाषा पढ़ने वालों ने कर दिया एक नया काम।
थोड़ी बहुत हिन्दी भाषा बोलने वालों का जीना हो गया हराम।

आज हिन्दी भाषा का नहीं है उतना स्थान।
फिर भी लोगों के दिल में है कुछ अरमान।
आज विदेशों में भी लोग हिन्दी बोला करते हैं।
फिर हम हिन्दी बोलने से क्यों शरमाते है।

♦ विनोद वर्मा जी / जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कविता में लेखक हिन्दी भाषा के महत्व को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहे हैं। वे इसके लिए यह कह रहे हैं कि हिन्दी भाषा को बढ़ावा देना आवश्यक है, और लोगों को यह बदलाव लाने के लिए अपने मन में हिन्दी के विचार बुनने की आवश्यकता है। कविता में यह भी कहा गया है कि विदेशी भाषा की पढ़ाई के बावजूद हिन्दी भाषा के प्रति लोगों की आकर्षण और समर्थन बढ़ गए हैं, और इसका सबसे बड़ा उदाहरण है कि अब विदेशों में भी लोग हिन्दी बोलते हैं, जबकि भारत में ही हिन्दी का महत्व कम हो गया है। आखिर में, कविता लोगों को हिन्दी का समर्थन देने की ओर प्रोत्साहित कर रही है और उन्हें शरम करने की जरूरत नहीं है।

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यह कविता (हिन्दी भाषा।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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चंद्र विजय।

Kmsraj51 की कलम से…..

Chandra Vijay | चंद्र विजय।

आज विक्रम चंद्रमा पर,
सुरक्षित उतर आया।
भारत का चंद्रयान मिशन 3
सफल हो पाया।

जिस मिशन को पूरा करने में,
बड़ी-बड़ी शक्तियां रही असफल।
भारतीय वैज्ञानिकों ने आज तिरंगा,
फहराकर किया सफल।

चंद्रमा के अब
भारत जान पाएगा राज।
खुशियों का माहौल
बना है पुरे भारत में आज।

♦ विनोद वर्मा जी / जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में व्यक्त किया गया है कि चंद्रमा के स्पेस मिशन के माध्यम से भारतवासियों ने अपने वैज्ञानिक और तकनीकी योगदान के साथ दुनिया के स्तर पर अपनी महत्वपूर्ण पहचान बनाई है। वे चार देशों को संदर्भित कर रहे हैं, जो चंद्रमा पर मानव अभियान का आयोजन कर रहे हैं। हम संसार के उस देश के गौरवशाली नागरिक हैं, जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सबसे पहले पहुंचे है। कविता का समापन भारत के वैज्ञानिक प्रगति को और उनके अंतरिक्ष मिशन को संकेतित करता है, जो दुनिया भर के लोगों की नजरों में होगा।

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