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hindi diwas par kavita

हिन्दी किस्मत की मारी।

Kmsraj51 की कलम से…..

Hindi Kismat Ki Mari | हिन्दी किस्मत की मारी।

The foreign pomp and show is becoming too much, that is why Hindi could not become our national language. Speak foreign language but give priority to Hindi, Hindi is our mother, do not forget this.

मैं हूँ हिन्दी किस्मत की मारी,
मुझ पर विदेशी भाषा पड़ रही है भारी।
हर कोई विदेशी भाषा बोलना समझता है शान,
न जाने क्यों खो रहे हैं हम अपनी पहचान।

वर्ष में एक दिन है आता,
जब हर कोई हिन्दी दिवस है मनाता।
बड़ी बड़ी बातें हिन्दी पर है बोली जाती,
अगले ही दिन हर किसी के मुंह में विदेशी भाषा है आती।

जो भी हिन्दी में है बात करता,
वो विदेशी भाषा न बोलने का खामियाजा है भरता।
रोजगार नहीं मिलता, बात करने को कोई तैयार नहीं होता,
हिन्दी बोलने वाला शायद यूँ ही नहीं रोता।

विदेशी तड़क भड़क हो रही है भारी,
तभी तो हिन्दी नहीं बन पाई राष्ट्र भाषा हमारी।
विदेशी बोलो पर हिन्दी को प्राथमिकता दो,
हिन्दी हमारी जननी इस बात को मत भूलो।

नई पीढ़ी हिन्दी से अनभिज्ञ सी हो रही,
उन्हें तो विदेशी भाषा ही लगती है सही।
हिन्दी है हमारी जान इससे है हमारी पहचान,
कहीं यूँ ही न धूल जाए राष्ट्र भाषा बनाने के अरमान।

♦ विनोद वर्मा जी / जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवि ने हिंदी भाषा की वर्तमान स्थिति और उससे जुड़ी चिंताओं को व्यक्त किया है। हिंदी कहती है कि वह किस्मत की मारी है, क्योंकि विदेशी भाषाओं का प्रभाव उस पर भारी पड़ रहा है। लोग विदेशी भाषा बोलने को शान समझते हैं, जिससे अपनी पहचान खोती जा रही है। हिंदी दिवस पर लोग हिंदी की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन अगले ही दिन वे फिर से विदेशी भाषा बोलने लगते हैं। हिंदी में बात करने वालों को सामाजिक और व्यावसायिक जीवन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि उन्हें रोजगार और सम्मान नहीं मिलता। विदेशी संस्कृति और भाषा का प्रभाव बढ़ने से हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं बन पाई है। नई पीढ़ी हिंदी से दूर हो रही है और विदेशी भाषाओं को ही सही मान रही है। कवि इस बात पर जोर देता है कि हमें विदेशी भाषा का सम्मान करते हुए भी हिंदी को प्राथमिकता देनी चाहिए, क्योंकि हिंदी हमारी पहचान और आत्मा है।

—————

यह कविता (हिन्दी किस्मत की मारी।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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मैं हूं हिंदी।

Kmsraj51 की कलम से…..

Main Hoon Hindi | मैं हूं हिंदी।

I am the sharp edge of words, maybe I am the base? I am the source of soul and unity, I am the propagator of the country's culture, I teach the lessons of Tatsam Tadbhav, I decorate the alphabet. I am Hindi.

मैं हूं हिंदी,
कहने के लिए,
आपकी बिंदी,
सर का ताज हूं,
राज-काज का साधन,
भाषा की अभिव्यक्ति हूं।

पतंगों की डोर संग,
भावनाओं की उड़ान हूं,
देश की आन, बान-शान,
एकता की बुनियाद हूं,
अक्षर का कराती हूं ज्ञान,
ईश्वर ने जो दिया है वरदान।

शब्दों की तीखी धार हूं,
शायद मैं ही आधार हूं?
आत्मा एवं एकता का सूत्रधार,
देश की संस्कृति का प्रचारक हूं,
तत्सम तद्भव का पाठ पढ़ाती,
वर्णमाला का साज सजाती।

बापू ने जिसे किया वरण,
महादेवी वर्मा ने दिया शरण,
जो सबके दिलों को जोड़ती,
सबके अरमानों को घोलती,
फिर भी एक बात,
जो मेरे मन को है कचोटती।

जिससे है देश का मान,
जो है राष्ट्र की पहचान,
फिर क्यूं हो रहा उसका अपमान,
मिट रही मेरी मिली पहचान,
मेरे अस्तित्व पर ही लग रहा ग्रहण।

जिसे संविधान ने है अपनाया,
फिर दूसरी भाषा ने,
लोगों के दिलों में जगह कैसे बनाया?

अब क्या होगा मेरे भाई?
क्या फिर मिल सकेगी?
मेरी पुरानी खोई पहचान,
क्या मिल पाएंगे?
खोए सभी ओहदे तमाम।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवि ने हिंदी भाषा को एक जीवंत रूप में प्रस्तुत किया है, जिसमें हिंदी स्वयं अपनी कहानी बता रही है। हिंदी कहती है कि वह न केवल अभिव्यक्ति का साधन है, बल्कि राष्ट्र की आन, बान, और शान का प्रतीक है। यह भाषा भावनाओं को उड़ान देती है, एकता की नींव रखती है, और देश की संस्कृति का प्रचार करती है। हिंदी को बापू और महादेवी वर्मा ने अपनाया, और यह भाषा सभी को जोड़ती है। लेकिन हिंदी यह भी कहती है कि वर्तमान में उसका अपमान हो रहा है और उसकी पहचान धुंधली पड़ रही है। वह प्रश्न करती है कि जब उसे संविधान ने अपनाया है, तो दूसरी भाषाओं ने लोगों के दिलों में जगह कैसे बना ली। कविता के अंत में हिंदी अपनी पुरानी खोई हुई पहचान और सम्मान को वापस पाने की उम्मीद करती है, और अपने अस्तित्व को बचाने के लिए चिंतित है।

—————

यह कविता (मैं हूं हिंदी।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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हिंदी का मान बढ़ाएंगे।

Kmsraj51 की कलम से…..

Hindi Ka Maan Badhayenge | हिंदी का मान बढ़ाएंगे।

The poet tells that Hindi is the language that is learned from the mother and gets respect all over the world.

जो भाषा मां से सीखी जाती,
जग में सबका मान बढ़ाती,
एकता का प्रतीक बन जाती,
उसकी गाथा जन-जन को बतलाएंगे,
उस हिंदी का मान बढ़ाएंगे।

हिंदी की बिंदी जिसके भाल,
प्रकृति भी बिन पूछें न चलती चाल,
संस्कृति की जिससे होती पहचान,
उसकी गाथा जन-जन को बतलाएंगे,
उस हिंदी का मान बढ़ाएंगे।

हिंदी ही है सुर संगीत और तान,
इसीलिए मेरा देश कहलाता महान,
सरल सौम्य स्वभाव है जिनका,
उसकी गाथा जन-जन को बतलाएंगे,
उस हिंदी का मान बढ़ाएंगे।

जो है देश की आन बान और शान,
जिससे बढ़ता है देश का मान,
जिस भाषा पर हमसभी को है नाज,
उसकी गाथा जन-जन को बतलाएंगे,
उस हिंदी का मान बढ़ाएंगे।

अक्षर से अक्षर का ज्ञान कराती,
उच्चारण में जिसके स्पष्टता है होती,
जो प्रभावमयी और गतिशील है होती,
उसकी गाथा जन-जन को बतलाएंगे,
उस हिंदी का मान बढ़ाएंगे।

हिंदी हिंदुस्तान की पहचान है,
इस हिंदी के बिना जीवन वीरान है,
जिससे ही मिला जग में सम्मान है,
वो कोई और नहीं हिंदी हिंदुस्तान हैं,
उस हिंदी का मान बढ़ाएंगे।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता हिंदी भाषा के महत्व और गौरव को दर्शाती है। कवि बताता है कि हिंदी वह भाषा है जो मां से सीखी जाती है और पूरे संसार में सम्मान दिलाती है। यह एकता का प्रतीक बनती है और लोगों को जोड़ने का काम करती है। हिंदी हमारी संस्कृति और पहचान का स्रोत है, और इसके बिना जीवन अधूरा है। यह सरल, सौम्य, और स्पष्ट भाषा है जो हमारे देश की आन, बान और शान है। इस कविता के माध्यम से कवि यह प्रतिज्ञा करता है कि वह जन-जन तक हिंदी की महानता को पहुंचाएगा और हिंदी का मान बढ़ाएगा।

—————

यह कविता (हिंदी का मान बढ़ाएंगे।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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प्यारी हिंदी।

Kmsraj51 की कलम से…..

Pyari Hindi | प्यारी हिंदी।

Hindi Day is celebrated in India to commemorate the date 14 September 1949 on which a compromise was reached—during the drafting of the Constitution of India—on the languages that were to have official status in the Republic of India.

भारतवासियों के जुबान की मिठास है ये।
अपनेपन में एक प्यारा सा अहसास है ये।

हमारी सभ्यता की एक परिचायक है।
यही तो हमारी संस्कृति की संवाहक है।

ये तो देती, हर रिश्ते को इतना मान है।
फिर क्यूँ हो रहा, हर जगह अपमान है।

ये हिंदी तो दिलों को, बहुत प्यारी होती थी।
अपने लोगों की बोली ही, न्यारी होती थी।

पता ही नही लग पाया कि, कब हमसे ये जुदा हो गयी।
आओं, खुद में झांके, कि क्यूँ ये हमसे खफा हो गयी?

हमने किस भाषा के मोहपाश में खुद को बांध लिया।
क्यूँ, इस का प्रिय स्थान किसी और को दे ही दिया।

हिंदी-भाषी लोगों को वंदन करने का, समय आ गया।
फिर हमसब में धीरे-धीरे, हिंदी का मोह समा गया।

ये भाषा तो इतनी सहज, सरल होती,
अपना कर इसको जीवन जाता फूल सा खिल।
अपनी हिंदी जैसा इस जहां में और कोई नहीं काबिल।

हमारी हिंदी अपनी है, हमको बहुत ही प्यारी है।
जिसने अपनाया इसको, इसने उसकी ही तकदीर सँवारी है।

सदैव ममत्व लुटाने वाली, हम तो रहेंगे सदैव तेरे ही आभारी।
तू ही थी, तू ही है, बस जन्नत हमारी।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में कवयित्री हिंदी भाषा की महत्ता और महत्व को बयां कर रही हैं। वे कह रही हैं कि हिंदी भाषा भारतवासियों की जुबान की मिठास है और इसमें एक प्यारा सा अहसास होता है। हिंदी भाषा हमारी सभ्यता की पहचान है और हमारी संस्कृति का संरक्षक है। इसके बावजूद, कवयित्री यह सोचती हैं कि हिंदी का अपमान क्यों हो रहा है और इसे छोड़ने के लिए हमने किसी और भाषा के मोहपाश में अपने को बांध लिया है। कवयित्री का संदेश है कि हमें अपनी हिंदी को महत्व देना चाहिए और इसे अपने जीवन में सजीव रूप से अपनाना चाहिए। इसके माध्यम से हम अपनी भाषा का सम्मान करेंगे और उसे अपनी तकदीर सँवारेंगे। क्योंकि हिंदी हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

—————

यह कविता (प्यारी हिंदी।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
    {International Internship University and Swarn Bharat Parivar}
  • Teacher’s Icon Award — 2023
  • राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान — 2021
  • सावित्रीबाई फुले ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड — 2022
  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शक्ति संचेतना अवार्ड — 2022
  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
  • 50 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित (राष्ट्रीय स्तर पर)।
  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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हिन्दी हिन्द का गौरव है।

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Hindi Hind Ka Gaurav Hai | हिन्दी हिन्द का गौरव है।

हिन्दी हैं हम हिंदुस्तानी, न कि अंग्रेजों की संताने हैं।
हिन्दी सीखो, हिन्दी लिखो, अंग्रेजी आखर बेगाने हैं।

हिन्दी हिन्द का गौरव है, हिन्दी से सबकी पहचाने हैं।
हिन्दी छोड़ के अंग्रेजी में, क्या लाल, फन्नेखा बनाने हैं?

मां की ममता, पिता की क्षमता, है हिन्दी के दरीखाने में।
फिर भी न जाने क्यों होड़ लगी है, अंग्रेजी की जमाने में?

सदियों का ज्ञान छुपा है, हिन्दी की पढ़ाई – लिखाई में।
हम है कि लगे पड़े हैं, नित दिन अंग्रेजी की ही बड़ाई में।

लग जाओ अभी भी आओ, हिन्दी की पढ़ाई लिखाई में।
वरना फिर तो वक्त लगेगा, हुए नुकसान की भरपाई में।

मां के दूध से भूख न मिटे, क्या मिटेगी मौंसी के पिलाने से?
दूध का बिगड़ा फिर कहां सुधरेगा, दाल रोटी के खिलाने से।

अंग्रेजी आज की जरूरत है जी, कुछ न होगा हिले बहाने से।
घर को बिगड़ने के बाद क्या होगा, फिर रूठी बहु मनाने से?

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में हिन्दी भाषा के महत्व को उजागर किया गया है। लेखक ने अंग्रेजी भाषा के प्रति लोगों के मनोबल की कमी को दिखाया है और हिन्दी के महत्व की बढ़ती हुई आवश्यकता पर चिंता व्यक्त की है। कविता में हिन्दी की महत्वपूर्ण भूमिका और उसके लोगों के जीवन में क्यों बनी रहनी चाहिए, इसे प्रकट किया गया है। व्यक्ति को हिन्दी भाषा के प्रति समर्पित रहने की आवश्यकता को उत्कृष्ट ढंग से प्रस्तुत किया गया है, जिससे वह आगामी भविष्य के लिए भी अपनी मातृभाषा का सम्मान कर सके।

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यह कविता (हिन्दी हिन्द का गौरव है।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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हिंदी हमारी शान है।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ हिंदी हमारी शान है। ♦

आओ 14 सितंबर 1953 का वो दिन याद करें हम,
जब हिंदी दिवस मनाया था सबका उत्साह बढ़ाया था॥

आओ इस दिन को स्कूल, कालेजों, शिक्षण संस्थाओं में मनाएं हम,
नवयुवाओं में चेतना भर जश्न के साथ त्यौहारों की तरह मनाया था॥

आज भी हम नए – नए आयामों से हिन्दी दिवस मनाते हैं,
अपने और अपनों के लिए शुभ संदेश पहुंचाते हैं॥

हिन्दी है हमारी राष्ट्रभाषा लगती सुरीली बड़ी प्यारी है,
हिन्दी भाषा नहीं है भावों की अभिव्यक्ति, ये तो बड़ी निराली है॥

मातृभूमि पर मर मिटने की ये है भक्ति इससे हमारी पहचान है,
आओ हिन्दी का मान बढ़ाकर विश्व में करानी पहचान है॥

आज हमने अपनेपन को झुठला दिया, बाहरी चमक धमक पर फिदा हुए हम,
कर दिया खड़ा हाशिए पर अब सबने मुझे झुठला दिया॥

सोचती है आज विजयलक्ष्मी दूसरी को घर में ला कर बिठा दिया,
अपनी तहजीब और संस्कृति को क्यों हम लोगों ने गुमा दिया॥

सोचती है आज विजयलक्ष्मी दूसरी को घर में ला कर बिठा दिया,
अपनी तहजीब और संस्कृति को क्यों हम लोगों ने गुमा दिया॥

हिन्दी हमारी शान है, पहचान है, हम सबका स्वाभिमान है,
इसका हमें परचम लहराना है नवयुवाओं में उत्साह जगाना है॥

आओ हम सब मिलकर अपनी पहचान को वापस लाए,
हिन्दी दिवस मनाना तभी होगा सफल विश्व में फिर से हिन्दी का डंका बजाएं॥
जय हिन्द – जय भारत!

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

मेरे सभी प्रिय पाठकों आप सभी को — KMSRAJ51.COM — की तरफ से तहे दिल से हिन्दी दिवस की शुभकामनाएं।

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  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से — हिन्दी राष्ट्रभाषा के महत्व, गुणों और प्रभाव को बताया है। हिन्दी हर भारतीय के दिल से निकलने वाली भाषा हैं। हिन्दी भाषा दिल को दिल से जोड़ने का कार्य करती है। एकलौती हिन्दी भाषा ही है जिसमे अपनापन है दुनिया की किसी भी अन्य भाषा अपनापन का स्थान नहीं। आओ हम सब मिलकर अपनी राष्ट्रभाषा हिन्दी को जन जन तक पहुचाये, हर बच्चा – बच्चा हिन्दी भाषा के महत्व को समझते हुए पढ़े, पढ़ाये, लिखे और अपनी भावनाओं को प्रकट करें।

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यह कविता (हिंदी हमारी शान है।) “विजयलक्ष्मी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विजयलक्ष्मी है। मैं राजकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय, छारा – 2, ब्लॉक – बहादुरगढ़, जिला – झज्जर, हरियाणा में मुख्य शिक्षिका पद पर कार्यरत हूँ। मैं पढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा, व समय-समय पर “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ” और भ्रूण हत्या पर Parents मीटिंग लेकर उनको समझाती हूँ। स्कूल शिक्षा में सुधार करते हुए बच्चों में मानसिक मजबूती को बढ़ावा देना। कोविड – 19 महामारी में भी बच्चों को व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाना, वीडियो और वर्क शीट बनाकर भेजना, प्रश्नोत्तरी कराना, बच्चों को साप्ताहिक प्रतियोगिता कराकर सर्टिफिकेट देना। Dance Classes प्रतियोगिता का Online आयोजन कराना। स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर कार्य करना। इन सभी कार्यों के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी द्वारा और कई Society द्वारा बार-बार सम्मानित किया गया।

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