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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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2017-Kmsraj51 की कलम से…..

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

∗ दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं ∗

• आप सभी को तहे दिल से दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं •

इस महाप्रकाशपर्व पर आप सभी के जीवन में
सकारात्मक उर्जा, सुख-समृद्धि, मन की शांति और सौभाग्य का संचार हो।
• शुभ दीपावली॥ •

KMSRAJ51.COM के सभी पाठकाें काे तहे दिल से दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।

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सच्ची दोस्ती के गुण।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ सच्ची दोस्ती के गुण। ϒ

प्यारे दोस्तों,

प्रख्यात उद्योगपति हेनरी फोर्ड ने अपने जीवन में वह सब कुछ प्राप्त किया, जिसका सपना हर व्यक्ति की आंखों में पलता है। धन, दौलत, सुख समृद्धि, ऐश्वर्य की विराटता और अपार यश। ये सब हेनरी फोर्ड की कमाई थी। जब वे अपने समृद्धि और कीर्ति के शिखर पर थे, तब एक दिन एक पत्रकार ने उनसे पुछा – महोदय! आपने अपने जीवन में प्रचुर धन संपत्ति के साथ यश और गौरव कमाया है। आपके साैजन्य से अनेक महान कार्यो का संपादन हुआ है। सारी दुनिया आपकी सफलता को सलाम करती है। इतना सब कुछ होने के बाद क्या आपको अब भी जीवन में किसी कमी का अनुभव होता है ? हेनरी फोर्ड तत्काल बोले – हां, मेरे जीवन में सच्चे मित्र की कमी मुझे रह-रह कर सताती है। यदि मुझे फिर से जीवन आरम्भ करना हो तो मैं सच्चे मित्र की तलाश करूँगा। भले ही इसके लिए मुझे अपना सारा धन क्यों न खोना पड़े।

यह सुनकर पत्रकार ने कहा – यदि आप ऐसा करें तो आपको मित्र ही मित्र मिल जायेंगे, किन्तु सच्चा मित्र तब भी नहीं मिलेगा। फोर्ड द्वारा कारन पूछे जाने पर वह बोले – क्योंकि आप केवल धन के बल पर मित्रों की तलाश करना चाहते हैं। धन से सच्चे मित्र नहीं मिलते, उसके लिए अहंकार को गलाना पड़ता है, समर्पित होना होता है। धन से संसार की हर चीज खरीदी जा सकती है, किन्तु सच्चा मित्र नहीं। फोर्ड को अपनी भूल का अहसास हुआ।

सीख – इस रियल कहानी का सार यह है की – सच्ची मित्रता (True friendship) सात्विक हृदय की शुद्ध भावनाओं पर टिकी होती है। अतः सच्चा मित्र पाने के लिए जेब नहीं, दिल को संपन्न और उदार रखें। इसे कहते है सच्ची मित्रता।

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आप सभी का प्रिय दोस्त

Krishna Mohan Singh(KMS)
Editor in Chief, Founder & CEO
of,,  https://kmsraj51.com/

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।~Kmsraj51

———– © Best of Luck ® ———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@hotmail.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to become themselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAJ51

 

 

 

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मेरी अपनी है मंजिले।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ मेरी अपनी है मंजिले। ϒ

प्यारे दोस्तों,

एक घर के पास काफी दिन से एक बड़ी इमारत का काम चल रहा था। वहा रोज मजदूरों के छोटे-छोटे बच्चें एक – दूसरे की शर्ट पकड़कर रेल – रेल का खेल खेलते थे।

रोज कोई बच्चा इंजन बनता और बाकी बच्चे डिब्बे बनते थे। इंजन और डिब्बे वाले बच्चे रोज बदल जाते, पर केवल चड्ढी पहना एक छोटा बच्चा हाथ में रखा कपड़ा घुमाते हुए रोज गार्ड बनता था। एक दिन उन बच्चो को खेलते हुए रोज देखने वाले एक व्यक्ति ने काैतुहल से गार्ड बनने वाले बच्चें को पास बुलाकर पूछा … बच्चें तुम रोज गार्ड बनते हो। तुम्हे कभी इंजन कभी डिब्बा बनने की इच्छा नहीं होती ?

इस पर वो बच्चा बोला… बाबू जी मेरे पास पहनने के लिए कोई शर्ट नहीं है। तो मेरे पीछे वाले बच्चे मुझे कैसे पकड़ेंगे … और मेरे पीछे कौन खड़ा रहेगा …? इसलिए मै रोज गार्ड बनकर ही खेल में हिस्सा लेता हूँ। ये बोलते समय मुझे उसकी आँखों में पानी दिखाई दिया।

वो बच्चा जीवन का एक बड़ा पाठ पढ़ा गया…। अपना जीवन कभी भी परिपूर्ण नहीं होता। उसमे कोई न कोई कमी जरूर रहेगी …। वो बच्चा माँ – बाप से गुस्सा होकर रोते हुए बैठ सकता था। परन्तु ऐसा न करते हुए उसने परिस्थितियों का समाधान ढूंढा।

हम कितना रोते हैं ? कभी अपने सांवले रंग के लिए, कभी छोटे कद के लिए, कभी पैसे के लिए, कभी पड़ोसी की बड़ी कार, कभी पड़ोसन के गले का हार, कभी अपने कम marks, कभी English, कभी Personality, कभी नौकरी की मार तो कभी धंधे में मार …। हमे इससे बाहर आना पड़ता हैं … ये जीवन है… इसे ऐसे ही जीना पड़ता हैं।

चील की ऊँची उड़ान देखकर चिड़िया कभी depression में नहीं आती, वो अपने आस्तित्व में मस्त रहती है। मगर इंसान – इंसान की ऊँची उड़ान देखकर बहुत जल्द चिंता में आ जाता है। तुलना से बचें और खुश रहें। न किसी से ईर्ष्या, ना किसी से कोई होड़, मेरी अपनी है मंजिले, मेरी अपनी दौड़ …।

सीख – परिस्थितियां कभी समस्या नहीं बनती, समस्या इसलिए बनती है, क्योंकि हमें उन परिस्थितियों से लड़ना नहीं आता। यह सृष्टि एक रंगमंच है और सभी मनुष्य आत्मा Actor व Actress है सभी को अपना- अपना पार्ट पूरा करना चाहिए। हर इंसान के अंदर असीमित शक्तियां निहित है – बस जरूरत है इन शक्तियों को जागृत कर – उसे सही तरीके से Use करना। जिससे जीवन में सरलता पूर्वक सुख व शांति मिले।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

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गुजरते वक्त की ये शान।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ गुजरते वक्त की ये शान। ϒ

गुजरते वक्त की ये शान,
समेटे है जिन्दगी।

गुमराह है जो आप,
लपेटे है जिन्दगी।

कहा सभी को मिला सब कुछ,
हुए अरमान पूरे।

किसी को ताज तो किसी को,
समेटे है जिन्दगी।

खुदा भी आज यहां –
बटता दिखे लकीरों में।

लकीर ही मिटाना सभी,
सीखें हैं जिन्दगी।

गुजरे वक्त की ये शान
समेटे है जिन्दगी।

©- अशोक सिह, – आजमगढ़, उत्तर प्रदेश। ∇

ashok-singh-kmsraj51

हम दिल से आभारी हैं अशोक सिह जी के प्रेरणादायक हिन्दी Ghazal साझा करने के लिए। About Ashok Singh – अशोक जी के शब्दाें में – अभी मैं IAS की तैयारी कर रहा हूँ। दिल मे समाज सेवा की लौ जलाये हुए कुछ बेहतर करने को प्रयासरत हूँ और अपना सत प्रतिशत देने को तत्पर। मेरा HOBBY कविताएं लिखना, दक्षिण भारत की फिल्में देखना, क्रिकेट खेलना ,समाज से जुङे रहना, संगीत सुनना(खासकर पुराने) शामिल है।

अशोक सिह जी के लिए मेरे विचार:

♣ “अशोक सिह जी” की Ghazals के हर एक शब्द में प्राकृतिक सौंदर्य का अलाैकिक सार भरा हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। Ghazals छोटी और सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन Ghazals काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

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 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

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भारती के अंचलों में हो रही ठिठोलिया।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ भारती के अंचलों में हो रही ठिठोलिया। ϒ

भारती के अँचलो में हो रही ठिठोलिया।
रहते हैं माँ के अँचलो में बोले विरोधी बोलियाँ॥

माँ भारती के ये वसिंदे होश मे जीते नही।
बोले हमेशा बोल तीखे राष्ट्र को संजोते नहीं।
कहीं पत्थरों की होती बारिश चलती कहीं है गोलियाँ।
रहते हैं माँ के अंचलों मे बोले विरोधी बोलियाँ॥

मिट्टी से लेकर जन्म वे मिट्टी को ही दहला दिये।
लेकर विद्रोही शस्त्र वे मानवता को झुठला दिये।
जिस देश के रहमों करम उनको मिली थी खोलियाँ।
आज उनका ही अपमान कर बरसा रहे हैं गोलियाँ।
रहते है माँ के अँचलों मे बोले विरोधी बोलियाँ॥

यहाँ राष्ट्र भक्ति रूपी चोला गलियों मे बिकता दिखे।
चोले को धारण कर यहाँ इँसान भी बिकता दिखे।
यहाँ धर्म-जाति से सनी लगती हैं नित्य बोलियाँ।
रहते हैं माँ के अँचलों में बोलें विरोधी बोलियाँ॥

©- अशोक सिह, – आजमगढ़, उत्तर प्रदेश। ∇

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हम दिल से आभारी हैं अशोक सिह जी के प्रेरणादायक हिन्दी कविता साझा करने के लिए। About Ashok Singh – अशोक जी के शब्दाें में – अभी मैं IAS की तैयारी कर रहा हूँ। दिल मे समाज सेवा की लौ जलाये हुए कुछ बेहतर करने को प्रयासरत हूँ और अपना सत प्रतिशत देने को तत्पर। मेरा HOBBY कविताएं लिखना, दक्षिण भारत की फिल्में देखना, क्रिकेट खेलना ,समाज से जुङे रहना, संगीत सुनना(खासकर पुराने) शामिल है।

अशोक सिह जी के लिए मेरे विचार:

♣ “अशोक सिह जी” की कविताआे के हर एक शब्द में प्राकृतिक सौंदर्य का अलाैकिक सार भरा हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। कविताऐं छोटी और सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन कविताओं काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

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 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

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खूबसूरती को चुरा लेते है।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ खूबसूरती को चुरा लेते है। ϒ

•

बीते कल का अफसोस और आने वाले कल की चिंता।
दो ऐसे चोर है जो हमारे आज की खूबसूरती को चुरा लेते है॥

•

ना रख रिश्तों की बुनियादों में कोई झूठ का पत्थर।
लहर जब तेज़ आती है तो अक्सर घरौंदे टूट ही जाते है॥

• 

दुनिया की कोई भी चीज़ इतनी जल्दी नहीं बदलती।
जितनी जल्दी इंसान की नीयत बदल जाती है।
किसी की भी नियत बदलते देर नहीं लगती॥

• 

एक बात सदैव ही याद रखें कि – आपको सफल होने से केवल एक ही व्यक्ति रोक रहा है, जानते है वो व्यक्ति कौन है??? वह व्यक्ति कोई और नहीं आप स्वयं है। अगर सचमुच सफल होना चाहते है तो – अपने Comfort Zone से बाहर निकले।

सुख के सब साथी, दुःख में ना कोई।
दुख मे तो अपना साया भी साथ छोड़ देता है।
तो इंसान क्यों नहीं।

चिलचिलाती धूप में तो साया साथ साथ चलता है।
लेकिन अंधेरा हो तो साथ नहीं चलता साथ छोड़ देता है।

अँधेरा हो जीवन मे तो अकेले ही चलना पड़ता है।
फिर क्यों करे उम्मीद भला किसी से॥

• 

दुख से मत घबराना पंछी, ये जग दुख का मेला है।
चाहे भीड़ बहुत है जंगल मे, उड़ना तुझे अकेला है॥

•

 मासूमियत की कोई उम्र नहीं होती।
वो हर उम्र मे हमारे साथ रहती है।
चाहे बचपन हो, जवानी हो या बुढ़ापा॥

• 

दूसरों के हिसाब से जीने से तो अच्छा है कि –
जिंदगी जियो तो ऐसे जियो जैसे खुद को पसंद आये।
दूसरों की पसंद तो हर पल बदलती रहती है॥

• 

वक्त हमेशा एक सा नहीं रहता।
वो भी रो जाते है जो दूसरों को हंसाते थे कभी।

उनका भी मजाक बन सकता है जो –
बनाते है मजाक हर किसी का हर घड़ी यही॥

• 

बदलना है तो खुद को बदलो।
ज़माने को बदलने जायेंगे तो –
अपना वक्त गँवायेंगे।
अच्छा सोचो और अच्छा ही करो॥

• 

जीवन मे दो काम कभी ना करना।
एक तो झूठे इंसान से प्रेम।
दूसरा किसी सच्चे इंसान से गेम॥

• 

विश्वास एक छोटा शब्द है।
जिसे पढ़ने में तो सिर्फ एक सेकंड लगता है।
सोचो तो एक मिनट लगता है।
समझो तो एक दिन लगता है।
पर साबित करने मे जिंदगी लगती है॥

• 

किसी को किसी गलती के लिये –
माफ़ कर देना कुछ हद तक सही है।

लेकिन एक बार उसे माफ़ कर देने पर –
वापस उस पर ही विश्वास करना बेवकूफी है॥

•

अपनों के साथ ही हम रूठ सकते है।
परायो के साथ नहीं।
क्योंकि परायो के साथ तो हमेशा –
जबरदस्ती मुस्कुराना पड़ता है॥

•

रिश्ते कम बनाइये लेकिन – उन्हे दिल से निभाना चाहिये।
अक्सर लोग बेहतर की तलाश मे – बेहतरीन खो देते है॥

•

माँ
भूलकर भी कभी माँ को मत सताओ।
माँ की मुस्कान पर अपना सर्वस्व लुटा।

माँ के आशीर्वाद में है बहुत ताकत।
जो कोई भी माँ के आशीर्वाद ले कर काम करता है।
वह हमेशा हर कार्य मे सफलता पाता है॥

©- विमल गांधी जी। ♦

Vimal Gandhi-kmsraj51
विमल गांधी जी।

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विमल गांधी जी के लिए मेरे विचार:

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उछलकर वापस आना।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ उछलकर वापस आना। ϒ

bounce back…

मेरे प्यारे दोस्तों,

एक बात सदैव ही याद रखें कि – आपको सफल होने से केवल एक ही व्यक्ति रोक रहा है, जानते है वो व्यक्ति कौन है? वह व्यक्ति कोई और नहीं आप स्वयं है। अगर सचमुच सफल होना चाहते है तो – अपने Comfort Zone से बाहर निकले।

  • इंसान को असफलता जो सीखा जाती है वो दुनिया की कोई भी UNIVERSITY नही सीखा सकती।
  • आप तब तक नही हारते जब तक कि आप खुद मैदान छोड़ कर भागते नही है। इसलिए अगर सफलता चाहते है तो मैदान छोड़ कर(कार्य बीच में ही ना छोड़े) कभी भी ना भागे।

♥ अच्छी आदतें कैसे डालें।….. जरूर पढ़े।

  • सच कहु तो – असली मजा उस काम को करने में आता है – जिसके लिए दुनिया के लोग कहते है तेरे बस की नही ये कार्य, तू नही कर सकता।
  • किसी कार्य को fast गति से करने के लिए जोश(उत्साह) जरूरी है – लेकिन होश के साथ। ज्यादा जोश में कभी होश ना खो दे।
  • इस संसार में आज तक कोई ऐसा नही हुआ जो नशा ना करता हो – बस उसके नशे का प्रकार अलग-अलग हो सकता है। जैसे – Spiritual, Study, Sex, Money or Any Other Physical Nasha.
  • बड़ी सफलता कोई एक दिन के यात्रा कर लेने भर से नही मिल जाता – बड़ी सफलता तो कई वर्षों के निरंतर कार्य के उपरांत ही प्राप्त होता है।

♥ जानते तो बहुत है….. जरूर पढ़े।

  • सफलता प्राप्त करने के लिए – तन, मन, धन व समय का स्वाहा करना पड़ता है। अर्थात : सफलता प्राप्त करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दे, सफलता जरूर आपके कदम चूमेगी।
  • इतिहास इस बात का साक्षी है कि – जो बार-बार गिरकर फिर से उठकर चल पड़ा उसी ने इतिहास रचा।
  • मैं रहू या ना रहू – लेकिन ऐसा कर्म कर के जाऊंगा की 5100 सालो तक मेरे कर्म मुझे जीवित रखेंगे। अर्थात: आपके कर्म ही आपको अमर बनाते है।
  • गलतियां करो लेकिन गलतियों से सीखते हुए आगे बढ़ो, और एक ही गलती को पुनः (बार-बार) ना करो।
  • जीवन में परिवर्तन को accept करना सीखे – समय के साथ-साथ परिवर्तन जरूरी है। बिना परिवर्तन के आप अपने Comfort Zone से बाहर नहीं निकलेंगे, इसलिए परिवर्तन जरूरी है जीवन में।

♥ सफलता के लिए – ब्लूप्रिंट जरूर बनाये।….. जरूर पढ़े।

  • अपने बोलने और करने (कथनी और करनी) में पूर्ण सत्यता व Confidence बनाये रखे।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

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सच्चे गुरु का सच्चा शिष्य।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ सच्चे गुरु का सच्चा शिष्य। ϒ

ऐसी हो सच्चे गुरु में निष्ठा – तो जीवन सवर जाये।

प्राचीनकाल में गोदावरी नदी के किनारे वेदधर्म मुनि के आश्रम में उनके शिष्य वेद-शास्त्रादि का अध्ययन करते थे।

एक दिन गुरु ने अपने शिष्यों की गुरुभक्ति की परीक्षा लेने का विचार किया। सत्शिष्यों में गुरु के प्रति इतनी अटूट श्रद्धा होती है कि उस श्रद्धा को नापने के लिए गुरुओं को कभी-कभी योगबल का भी उपयोग करना पड़ता है।

वेदधर्म मुनि ने शिष्यों से कहा – “हे शिष्यो ! अब प्रारब्धवश मुझे कोढ़ निकलेगा, मैं अंधा हो जाऊँगा इसलिए काशी में जाकर रहूँगा, है कोई हरि का लाल, जो मेरे साथ रहकर सेवा करने के लिए तैयार हो?

शिष्य पहले तो कहा करते थे – ʹगुरुदेव ! आपके चरणों में हमारा जीवन न्यौछावर हो जाए मेरे प्रभु !ʹ अब सब चुप हो गये।

उनमें संदीपक नाम का शिष्य खूब गुरु सेवापरायण, सच्चा गुरुभक्त था। उसने कहा – “गुरुदेव ! यह दास आपकी सेवा में रहेगा।”

गुरुदेव – “इक्कीस वर्ष तक सेवा के लिए रहना होगा।”

संदीपक – “इक्कीस वर्ष तो क्या मेरा पूरा जीवन ही अर्पित है, गुरुसेवा में ही इस जीवन की सार्थकता है।” वेदधर्म मुनि एवं संदीपक काशी में मणिकर्णिका घाट से कुछ दूर रहने लगे।

कुछ दिन बाद गुरु के पूरे शरीर में कोढ़ निकला और अंधत्व भी आ गया। शरीर कुरूप और स्वभाव चिड़चिड़ा हो गया। संदीपक के मन में लेशमात्र भी क्षोभ नहीं हुआ। वह दिन रात गुरु जी की सेवा में तत्पर रहने लगा। वह कोढ़ के घावों को धोता, साफ करता, दवाई लगाता, गुरु को नहलाता, कपड़े धोता, आँगन बुहारता, भिक्षा माँगकर लाता और गुरुजी को भोजन कराता।

गुरुजी गाली देते, डाँटते, तमाचा मार देते, डंडे से मारपीट करते और विविध प्रकार से परीक्षा लेते।

किंतु संदीपक की गुरुसेवा में तत्परता व गुरु के प्रति भक्तिभाव अधिकाधिक गहरा और प्रगाढ़ होता गया।

काशी के अधिष्ठाता देव भगवान विश्वनाथ संदीपक के समक्ष प्रकट हो गये और बोले –

“तेरी गुरुभक्ति एवं गुरुसेवा देखकर हम प्रसन्न हैं…

जो गुरु की सेवा करता है वह मानो मेरी ही सेवा करता है। जो गुरु को संतुष्ट करता है वह मुझे ही संतुष्ट करता है।”

बेटा ! कुछ वरदान माँग ले। संदीपक गुरु से आज्ञा लेने गया और बोला…

“शिवजी वरदान देना चाहते हैं आप आज्ञा दें तो वरदान माँग लूँ कि आपका रोग एवं अंधेपन का प्रारब्ध समाप्त हो जाय।”

गुरु ने डांटा – “वरदान इसलिए माँगता है कि मैं अच्छा हो जाऊँ और सेवा से तेरी जान छूटे। अरे मूर्ख ! मेरा कर्म कभी न कभी तो मुझे भोगना ही पड़ेगा।”

संदीपक ने शिवजी को वरदान के लिए मना कर दिया। शिवजी आश्चर्यचकित हो गये कि कैसा निष्ठावान शिष्य है। शिवजी गये विष्णुलोक में और भगवान विष्णु से सारा वृत्तान्त कहा। विष्णु भी संतुष्ट हो संदीपक के पास वरदान देने प्रकटे।

संदीपक ने कहा – “प्रभु ! मुझे कुछ नहीं चाहिए।”

भगवान ने आग्रह किया तो बोला – “आप मुझे यही वरदान दें कि गुरु में मेरी अटल श्रद्धा बनी रहे। गुरुदेव की सेवा में निरंतर प्रीति रहे, गुरुचरणों में दिन प्रतिदिन भक्ति दृढ़ होती रहे।”

भगवान विष्णु ने संदीपक को गले लगा लिया।

संदीपक ने जाकर देखा तो वेदधर्म मुनि स्वस्थ बैठे थे। न कोढ़, न कोई अँधापन। शिवस्वरूप सदगुरु ने संदीपक को अपनी तात्त्विक दृष्टि एवं उपदेश से पूर्णत्व में प्रतिष्ठित कर दिया।

वे बोले – “वत्स ! धन्य है तेरी निष्ठा और सेवा, पुत्र – तुम धन्य हो ! तुम सच्चिदानंद स्वरूप हो।”

गुरु के संतोष से संदीपक गुरु-तत्त्व में जग गया, गुरुस्वरूप हो गया।

अपनी श्रद्धा को कभी भी, कैसी भी परिस्थिति में सदगुरु पर से तनिक भी कम नहीं करना चाहिए। वे परीक्षा लेने के लिए कैसी भी लीला कर सकते हैं। गुरु आत्मा में अचल होते हैं, स्वरूप में अचल होते हैं। जो हमको संसार-सागर से तारकर परमात्मा में मिला दें, जिनका एक हाथ परमात्मा में हो और दूसरा हाथ जीव की परिस्थितियों में हो, उन महापुरुषों का नाम सदगुरु है।

सीख – 

“सच्चा गुरु कौन ?”

वास्तविक गुरु वह हाेता है जाे अपने अनुयाइयाें काे परमात्म मिलन का सच्चा मार्ग दिखाये, ना की स्वयं की पूजा-अर्चना करवायें। जाे गुरु स्वयं की पूजा-अर्चना करवाता हैं वह गुरु नहीं राक्षस(दैत्य) है, वह आपकाे परमात्मा से विमुख(दुर) कर रहा हैं। जबकी एक सच्चा गुरु ऐसा कभी नहीं करता।

मनुष्य कभी किसी मनुष्य का उद्धार(निर्वाण या मोक्ष) नहीं कर सकता, यहा तक कि साधु-संताे का भी उद्धार करने के लिए स्वयं परमात्मा काे आना पड़ता हैं। अर्थात: मनुष्य कभी किसी मनुष्य का उद्धार नहीं कर सकता।

सभी मनुष्याें का सच्चा गुरु परमात्मा(GOD) ही हैं।

यह बात “श्रीमत भागवत गीता” के चौथे अध्याय के श्लोक संख्या “८” से:

परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे॥

अर्थात: साधु पुरुषोंका उद्धार करने के लिये, पापकर्म करनेवालाेंका विनाश करने के लिये और धर्मकी अच्छी तरह से स्थापना करने के लिये मैं युग-युगमें(संगमयुग में) प्रकट(किसी सतपुरुष शरीर का माध्यम लेकर) हुआ करता हूँ॥८॥

ध्यान दें,

संगमयुग : वह समय जब कलियुग(कलयुग) का आखिरी कुछ वर्ष शेष रह जाये, जिसके बाद सतयुग आने वाला हाे। यहीं समय संगमयुग कहलाता हैं।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।~Kmsraj51

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Happy Dussehra

• Happy Dussehra •

आज दशहरा है। आज ही के दिन भगवान राम ने रावण रुपी बुराई का अंत कर इस जग में अच्छाई का परचम लहराया था।

Kmsraj51.Com के सभी पाठकों को दशहरा महापर्व की तहे दिल से शुभकामनाएं।

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जीने का मज़ा क्या है।

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CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ जीने का मज़ा क्या है। ϒ

आँखों में कोई –
सुंदर ख्वाब ना हो

तो जीने का –
मज़ा क्या है ?

जीवन मे कुछ करके –
ना दिखाया तो…
जीने का मज़ा कया है।

यूँ तो दर्द मे हर कोई –
आँसू बहाता है।

मगर दर्द मे भी –
जो मुस्कुरा दे।
तो वो बहुत बड़ी बात है॥

♦—♦

जो क़िस्मत से बिना ठोकर खाए।
मंजिल तक पहुँच जाते है॥

उनके हाथ अनुभव से खाली रह जाते है।
ठोकरें खाने से ही अनुभव प्राप्त होता है॥

♦—♦

टेढ़े के साथ टेढ़ा हो जाना –
तो जगत मे सभी को आता है…
और यह तो स्वभाविक ही है।

लेकिन टेढ़े इंसान के साथ –
अच्छा रहने का चमत्कार…
तो …
केवल ज्ञानी व्यक्ति ही –
कर सकता है।

©- विमल गांधी जी। ∇

Vimal Gandhi-kmsraj51
विमल गांधी जी।

हम दिल से आभारी हैं विमल गांधी जी के प्रेरणादायक हिन्दी कविता साझा करने के लिए।

विमल गांधी जी के लिए मेरे विचार:

♣ “विमल गांधी जी” की कविताआे के हर एक शब्द में अलाैकिक सार भरा हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। कविताऐं छोटी और सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन कविताओं काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

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In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiya ensolar radiation, and encourage good solar radiation to become them selves.

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAJ51

 

 

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