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“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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सुखमंगल सिंह जी की कविताएं।

अपने मत पर करो विचार!

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ अपने मत पर करो विचार! ♦

जगह – जगह छलियों का बढ़ रहा है रेला,
पूर्वांचल में आ आकर करना चाहते हैं खेला।
महाराष्ट्र में साधु के साथ क्या हुआ था देखा,
जगह जगह लग रहा है लोगों का बड़ा मेला।

यूक्रेन हालत देख वहां के राष्ट्रपति की सुनो बात,
सभी नागरिकों को लड़ने को क्यों बोल रहे आज!
पाकिस्तान और चीन आंख गड़ाए है आज,
कल तक थलसेना को मजबूत करता देश।

वर्तमान परिस्थिति वायुसेना मजबूत करना आज,
तुम्हारा एक वोट देश के लिए कीमती है आज।
देश को बचाने के लिए आप खड़े हैं क्या आज,
या जन विनाश के लिए आपका वोट है बताएं आप।

जगह जगह पर मेरे भाइयों का बढ़ रहा है प्रभाव,
पूर्वांचल में बुद्धिजीवी का क्या हो गया है अभाव।
जगह जगह सी उत्तर प्रदेश में आ रहे झमेले बाज,
आपकी शांति सद्भाव पर करना चाहते कुठाराघात।

पूर्वांचल के विकास पर करना चाहते हैं लोग प्रहार,
आपको करना चाहते हैं लोग यहां जार – जार!
बुद्धि शक्ति पहरा आप अपने में मस्त विकास,
सबको पहचान कर, आप अपना मत करो विचार।

आपके प्रदेश में इस बार फिर अगर अंधेरा आएगा,
सैकड़ों मुबारक तुंहारा अंधेरा नहीं छठ पाएगा।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — आपका वोट आपका सुरक्षित भविष्य निर्धारित करेगा, याद रखें अपना वोट सोच समझ कर प्रदेश हित और राष्ट्र हित को ध्यान में रख कर दे। कही ऐसा ना हो जाए की गलत व्यक्ति और गलत पार्टी को वोट देकर आपका भविष्य सदैव के लिए अंधकारमय और असुरक्षित हो जाए। वर्तमान की घटनाओं से सबक ले (अफगानिस्तान और तालिबान तथा यूक्रेन और रूस की घटना) याद रखें – राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोपरि है। वतन हमारी आन हमारा सम्मान है उस मां को हमारा सलाम वंदे मातरम् …वंदे मातरम् …वंदे मातरम्॥

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यह कविता (अपने मत पर करो विचार!) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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गणतंत्र दिवस।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ गणतंत्र दिवस। ♦

गणतंत्र दिवस के पावन पर्व पर तिरंगा फहराने वाले हम,
लोकतंत्र का ईमानदार असली रूप दिखाने वाले हम।
स्वाभिमान का फिर से जागरूकता लाने वाले हम,
गणतंत्र दिवस के पावन पर्व पर तिरंगा फहराने वाले हम॥

देशभक्ति का सुंदर दर्पण है पाठ पढ़ाने वाले हम,
दर्शन और काव्य समन्वय की रेखा खींचने वाले हम।
सपनों के बाजार में उपलब्ध सहायता लाने वाले हम,
गणतंत्र दिवस के पावन पर्व पर तिरंगा फहराने वाले हम॥

ग्राम जीवन के गौरव में निखार लाने वाले हम,
अंधेरी से लोगों को प्रकाश में लाने वाले हम।
वेद शास्त्र का मानव जीवन में पाठ पढ़ाने वाले हम,
गणतंत्र दिवस के पावन पर्व पर तिरंगा फहराने वाले हम॥

घृणा और भय का वह बाजार मिटाने वाले हम,
लोक संस्कृति लोक भाषा को स्थापित करने वाले हम।
राष्ट्रीयता से भरा पूरा समाज बनाने वाले हम,
गणतंत्र दिवस के पावन पर्व पर तिरंगा फहराने वाले हम॥

नौजवानों को तरह-तरह का हुनर सिखाने वाले हम,
भेदभाव रहित समाज का निर्माण करने वाले हम।
दुनिया के लिए सुंदर वैज्ञानिक देने वाले हम,
गणतंत्र दिवस के पावन पर्व पर तिरंगा फहराने वाले हम॥

शांति और शक्ति का नया विधान लाने वाले हम,
सारी दुनिया को शांति का पाठ पढ़ाने वाले हम।
गणतंत्र दिवस और आजादी का तिरंगा लहराने वाले हम।
गणतंत्र दिवस के पावन पर्व पर तिरंगा फहराने वाले हम॥

गुलामी की मानसिकता वाले जंजीरों को तोड़ने वाले हम,
आजादी के लिए वीर ​मरने – मिटने वाले हम।
क्रांतिकारियों से भरा है भारत गणतंत्र मनाने वाले हम,
गणतंत्र दिवस के पावन पर्व पर तिरंगा लहराने वाले हम॥

राजनीति को खूंटी पर टांग कर संग्राम में कूदने वाले हम,
भगत आजाद का भारत देश कहीं ना झुकने वाले हम।
जाति धर्म से ऊपर उठकर समानता लाने वाले हम,
गणतंत्र दिवस के पावन पर्व पर तिरंगा फहराने वाले हम॥

दुनिया में सबसे ऊपर तिरंगा लहराने वाले हम,
गणतंत्र दिवस की शुभ बेला में वंदे मातरम कहने वाले हम।
सेना की अनुपम वीरता की गाथा गाने वाले हम,
गणतंत्र दिवस के पावन पर्व पर तिरंगा फहराने वाले हम॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

मेरे प्रिय पाठकों आपको सपरिवार गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं।-KMSRAJ51

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— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — यह राष्ट्रीय पर्व हमें देश की एकता और गौरव को बनाये रखने की प्रेरणा देता है। हम सभी को संविधान के सभी नियमों का पालन करना चाहिए। 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान पूर्ण रूप से लागू हो गया था। भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। 26 जनवरी के दिन ही भारत को गणराज्य का सर्वोत्तम दर्जा प्राप्त हुआ। 26 जनवरी के दिन दिल्ली में इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन तक परेड निकाली जाती है। जिस वतन ने हमें देशभक्ति, प्यार, मां का आंचल, समरसता, रंग रूप भेष भाषा सभी को मिलता मान दिया उस वतन पे हमें नाज है। जिस वतन का सबसे बड़ा संविधान लोकतंत्र जिसकी शान वो भारत देश महान वो भारत देश महान। वतन हमारी आन हमारा सम्मान है उस मां को हमारा सलाम वंदे मातरम् …वंदे मातरम् …वंदे मातरम्॥

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यह कविता (गणतंत्र दिवस।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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चरण स्पर्श।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ चरण स्पर्श। ♦

पिता ही ईश्वर समान होता है,
वह जगत में महान होता है।
चरण अपने पिता का जो छूता है,
वह व्यक्ति सदैव धनवान होता है।

माता सृष्टि की रचना करती है,
गर्भ में नौ माह अपने पालती है।
जो व्यक्ति मां का चरण छूता है,
वह व्यक्ति शक्तिहीन नहीं होता है।

बहन छोटी हो या बड़ी उसका,
भाई जो उसका सम्मान करता है।
मुख्य समय में उसका चरण छूता,
वह भाई कभी चरित्रहीन नहीं होता है।

गुरु सृष्टि में बड़ा महान होता है,
गुरु बहुत आध्यात्मिक होता है।
उनमें सूक्ष्म ज्ञान का भंडार होता है,
गुरु गोविंद तक पहुंचाता कर्ता है।

जो व्यक्ति गुरु का चरण छूता है,
वह कभी भी ज्ञानहीन नहीं होता है।
चरण स्पर्श की महिमा बड़ी निराली
वहीं करती सृष्टि की रखवाली है।

चरण स्पर्श से संस्कार पलता है,
संस्कार में संस्कृति विकास होता।
संस्कृति से ही यह संसार चलता है,
संसार में समाज का विकास होता है।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — कड़वा है मगर सत्य है, इस संसार में पिता ही ईश्वर समान होता है, जो इंसान चरण अपने पिता का छूता है, वह व्यक्ति सदैव ही धनवान होता है। माता सृष्टि की रचना करती है, गर्भ में अपने नौ माह वह पालती है, जो भी व्यक्ति मां का चरण छूता है, वह कभी भी शक्तिहीन नहीं होता है। बहन छोटी हो या बड़ी जो भाई उसका सदैव सम्मान करता है। मुख्य समय में उसका चरण छूता, वह भाई कभी भी जीवन में चरित्रहीन नहीं होता है। गुरु सृष्टि में बड़ा महान होता है, उनमें अद्भुत ज्ञान का भंडार होता है, सच्चा गुरु सदैव ही गोविंद तक पहुंचने का मार्ग सरल करता है। जो भी व्यक्ति गुरु का चरण छूता है, वह कभी भी ज्ञानहीन नहीं होता है। अपने भारत देश में प्राचीन काल से ही चरण स्पर्श की महिमा बड़ी निराली, वहीं करती सृष्टि की रखवाली है। चरण स्पर्श से संस्कार पलता है, संस्कार में संस्कृति का विकास होता। संस्कृति से ही यह संसार चलता है, संसार में समाज का विकास होता है।

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यह कविता (चरण स्पर्श।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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वर्ष 2022 की हार्दिक शुभकामनाएं।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ वर्ष 2022 की हार्दिक शुभकामनाएं। ♦

गुलाब खिलते रहे सदा आपकी जिंदगी की राहों में,
हंसी चमकती रहे हमेशा आपकी निगाहों में!
खुशियों की लहर मिलती रहे हर कदम पर आपको,
देता है हमारा यह दिल दुआ बार – बार आपको।

गुलों की शाख से हमने खुशबू चुरा के लाया है,
और गगन के पांव से घुंघरू चुरा के लाया है।
थिरकते कदमों से आया है सुनहरा नया साल,
आपके लिए यह वर्ष खुशियां चुरा के लाया है।

नया साल आता रहे जीवन में बनके नवीन उजाला,
खुल जाए आपका जिससे किस्मत का बंद ताला।
हमेशा आप पर रहें मेहरबान कल्याण करने वाला,
ईश्वर से यही दुआ करता है आपका यह चाहने वाला।

कैलेंडर बदल जाएंगे आने वाले नए साल में,
कपड़े भी बदल लिए होंगे आप नए साल में!
संस्कार को बदलने की यदि कोशिश करेंगे आप,
संस्कृति बदल जाएगी इतना तो लो मान आप।

आया है नया साल मन के मैल को भी निकालने,
बाबा विश्वनाथ के दरबार में शंखनाद को बजाने।
विश्व प्रसिद्ध माँ गंगा आरती दुनिया को उजाला करने,
मानवता और करुणा से संवेदना को जन्म देने।

स्वच्छता की ओर और बढ़ाएगा कदम नया साल,
गरीबों का हक दिलाने वाला हो यह नया साल।
अब तक जिसने मारा है गरीबों का अपने देश में,
गरीबों का हक मारने वालों को देगा जेल नया साल।

चावल का उत्पादन देश में बढ़ाएगा नया साल,
बेरोजगारों को रोजगार दिलाएगा यह नया साल।
पर्यावरण की रक्षा में कदम बढ़ाएगा नया साल,
विकास की यात्रा में खुशियां लाएगा नया साल।

राम जन्मभूमि से शांति सद्भाव फैलाएगा नया साल,
दशरथ जी का महल सुख की सिहरन है नया साल।
न्याय पूर्ण उत्तम समाज बनाएगा यह नया साल,
आतंकवादियों पर कहर बनकर आया है नया साल।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — ये नया वर्ष खुशियां लेकर आया, मानवता और करुणा से संवेदना फैलाएगा। आइए हम सब मिलकर स्वच्छता की ओर कदम बढ़ाएं। पर्यावरण की रक्षा में आइए हम सब मिलकर ये संकल्प ले, प्रत्येक व्यक्ति एक – एक पेड़ जरूर लगाएंगे, और जब तक पेड़ अपना स्व खुराक न लेने लगे तब तक उसका देख रेख पूर्ण मन से करेंगे। राम जन्मभूमि से शांति सद्भाव फैलाएगा ये नया साल। आइए हम सब मिलकर भारत भूमि के पूर्ण विकास में अपना अमूल्य योगदान दे, सच्चे तन मन से। न्याय पूर्ण उत्तम समाज बनाने में सभी सहयोग करें। गरीबों का हक दिलाने वाला हो यह नया साल। अब तक जिसने भी मारा है गरीबों का हक़ अपने देश में, गरीबों का हक मारने वालों को देगा जेल ये नया साल। मन के मैल को भी निकाल कर, बाबा विश्वनाथ के दरबार में शंखनाद को बजाने आया है ये नया साल। विश्व प्रसिद्ध माँ गंगा आरती दुनिया को उजाला करने, मानवता और करुणा से संवेदना को जन्म देने।

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यह कविता (वर्ष 2022 की हार्दिक शुभकामनाएं।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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नारी है।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ नारी है। ♦

पुरुष की बराबरी में सीमा पर जाती,
फिर भी दहेज की बलि चढ़ जाती।
कड़वा सत्य है समाज में नहीं आती,
नारी पुरुष से कम क्यों दिखाई जाती?

भिन्न – भिन्न रंगों के गाने गाते जाती,
बुरी नजर वालों को राख में मिलाती।
वक्त पर फूल और कांटा बन जाती है,
लक्ष्मी दुर्गा और काली कहलाती है।

बहन स्वरुप में स्नेह प्यार लुटाती है,
माता के रूप में ममता दिखाती है।
शोभित आभूषण युक्त होकर शिवाली,
युद्ध क्षेत्र में महाकाल पीर घरवाली।

प्रीति करने में सक्षम वहराधा रानी,
गृहस्थ करने में भी एक खानदानी है।
सम्मान की रक्षा के लिए वह काली,
दुश्मनों के लिए विकराल रूप वाली।

औरत है समस्याएं आती – जाती हैं,
सहती है, भावनाओं में नहीं बहती!
टूटती और बिखरती सहती जाती है,
कड़वी सच्ची, सच्चाई स्वीकारती है।

देवी का दर्जा मिला, उसने मांगा नहीं,
कितनी सशक्त है वह, यह जाना नहीं।
हर जीत में उसका जलवा, माना नहीं,
महान बल पर खास जिद, ठाना नहीं।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — कड़वा है मगर सत्य है ये नारी तू नारायणी, जननी तू, माँ के रूप में प्यार ममता, स्नेह, लालन-पालन, जीवन के अंतिम पल तक दिखाती है। बहन स्वरुप में स्नेह प्यार सदैव लुटाती है। बुरी नजर वालों को राख में मिलाती तू, वक्त पर फूल और कांटा बन जाती है, लक्ष्मी, दुर्गा और काली कहलाती है। सदैव ही पुरुष की बराबरी में सीमा पर जाती, फिर भी दहेज की बलि क्यों चढ़ जाती। ये नारी है समस्याएं आती – जाती हैं, सहती है, भावनाओं में नहीं बहती! टूटती और बिखरती सहती जाती है, कड़वी सच्ची, सच्चाई स्वीकारती है। देवी का दर्जा मिला उसे, उसने कभी मांगा नहीं, कितनी सशक्त है वह, यह जाना नहीं। हर जीत में उसका जलवा, माना नहीं, महान बल पर खास जिद, ठाना नहीं कभी। नारी तू नारायणी।

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  • क्या बदलाव लायेगा नया साल।
  • है तो नववर्ष।
  • मोह।
  • अपना धर्म सबसे उत्तम।
  • ठंडी व्यार।
  • रिश्तों को निभाना सीखो।
  • तंत्र, मंत्र और तत्व ज्ञान में अंतर।
  • मित्र।
  • आखिर क्यों।
  • समय।
  • काले बादल।
  • सुबह का संदेश।

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निरर्थक रील्स की आरी – गुमराह होती नारी।

बात वक्त की।

तिरंगा का करें सम्मान।

एक सफर।

बाल विवाह – एक अभिशाप।

क्या बदलाव लायेगा नया साल।

है तो नववर्ष।

मोह।

अपना धर्म सबसे उत्तम।

ठंडी व्यार।

रिश्तों को निभाना सीखो।

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