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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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kavi sukhmangal singh poems

योग दिवस – 21 जून

Kmsraj51 की कलम से…..

Yog Divas June 21 | योग दिवस – 21 जून

आज 21 जून के अंक
अखिल संस्कृति के मनस – प्रवाह।
योग का यह सुंदर उद्देश्य,
जगाया जन चेतन मन चाह।

प्रेरणा का पावन उद्गार,
योग से होते सभी निरोग।
यही सम्यक संत विचार,
विश्व महिमा मंडित उद्योग।

पिलाते कटुता कूट स्नेह,
पढ़ाते मानवता का पाठ।
यही सम मिश्र अहिंसा सत्य,
काछते सब सेवा का ठाट।

राग – रंग संगम ‘मंगल’ भाव,
सुझा देते सबको यह राह।
योग का यह सुंदर उद्देश्य,
जगाया जन चेतन मन चाह।

♦ सुख मंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुख मंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — हर रोज़ सुबह के समय योग करने के फायदे अनमोल है – यह हमारी पहली सांस को पुन: चक्रित करता है। योग का अभ्यास करने से शरीर किक-स्टार्ट होता है। ह्रदय रोग से बचाव करता है योग। दिमाग सदैव ही रहता है एक्टिव। बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता। योग के द्वारा सांसों को साध कर परमानन्द की अनुभूति किया जा सकता है। तन और मन को निरोग रखने के लिए प्रतिदिन योग करे।

—————

यह कविता (योग दिवस – 21 जून) “सुख मंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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ज्ञानसेनी।

Kmsraj51 की कलम से…..

GyanaSeni | ज्ञानसेनी।

“ज्ञानसेनी”
अधरों का पुष्प,
उम्मीदों का सूरज,
करें संकट दूर रघुवर,
ज्ञानसेनी सजाया है।

रिश्तों का मिठास,
हैं स्वप्नों में आप।
चलो फिर गीत गाएं,
ज्ञान दर्पण लाया हूं।

भोला का डिम डिम डमरू,
काशी की मस्ती भरी।
धनुष वाण में श्री राम,
ज्ञानसेनी भरत से मिलाया है।

स्मृतियों में अयोध्या धाम,
चक्रवर्ती साम्राज्य है नाम।
प्रकृति का आलिंगन,
ज्ञान सेनी ने दिखाया है।

ज्ञानसेनी …
ज्ञान की छोटी थाली,
नक्काशीदार थाली।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — अपने भारत देश में प्राचीन काल से ही हर रिश्तों का अपना – अपना महत्व व सम्मान है। श्री राम व उनके भाइयो लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न से हमे सीख़ मिलती है की भाई का भाई से कैसा प्रेम व व्यवहार होना चाहिए आपस में और माता-पिता का आदेश व सम्मान सर्वोपरि हैं। हमे गर्व है अपने प्राचीन काल से चली आ रही भारतीय संस्कृति, संस्कार व सभ्यता पर, “गर्व से कहो हम सनातनी है, जय जय श्री राम!” जैसे – जैसे समय बदला वैसे – वैसे इंसान के सोचने व समझने की छमता ख़त्म होती जा रही है, अपने प्राचीन महत्वपूर्ण संस्कारों को भूलता जा रहा है, जिसके परिणाम स्वरूप कई तरह के समस्याओं से परेशान है। हे मानव अब भी समय है सुधर जाओ वर्ना ये पृथ्वी रहने लायक नहीं रहेगी। याद रखें की – जिस देश के लोग अपनी प्राचीन संस्कृति, संस्कार व सभ्यता को भूल जाते है, उनको विलुप्त होने से कोई भी नहीं बचा पायेगा। इसलिए अपने अंदरऔर वर्तमान पीढ़ी व आने वाली नई पीढ़ी को प्राचीन भारतीय संस्कृति, संस्कार व सभ्यता का पूर्ण ज्ञान दो, और उन्हें अनुसरण करना भी सिखाओ।

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यह कविता (ज्ञानसेनी।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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ऑनलाइन पाँव पसारो।

Kmsraj51 की कलम से…..

Spread Your Feet Online | ऑनलाइन पाँव पसारो।

जमा न पाया पांव धरा पर,
पर उड़ते आकाश।
घास उखाड़ने कूबत नहीं,
धरा धर्म फैलाने की आस।

पवन की पूजा करते सभी,
छा जाते हैं बादल कभी-कभी।
धूल गुबार अंधड़ कभी भी,
इस डाल से उस डाल पर,
कूदते रहते हैं बंदर सभी।

मानव कितना भोला भाला,
बरसों से आया है सहता।
सहता है अपनों का झमेला,
धरा धर्म और समाज का।
आक्षादित विश्वासों का मेला,
मानों चारो तरफ घेरा खेला।

लोगों संग कुनबे का रेला,
से ऑनलाइन में बढ़ रहा खेला।
फिल्म समीक्षा में ठेलम ठेला,
होती है भारत में वर्षों से ही सही।
लगभग डेढ़ सौ मिलियन से खरीद,
धरती पर पांव जमा लुटते हैं शरीर।

ऑस्ट्रेलिया, शॉपिंग में आया उछाल,
सत्य छिपा है कहीं भूल में।
मूल छिपा है कहीं भूल में,
पांव जमाने को खोजना मुश्किल,
पांव पसारने को जमीन आवंटित।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — जिस तरह से ऑनलाइन लोगों को बेवकूफ बनाकर लुटा जा रहा हैं, चाहे वह फर्जी फिल्म समीक्षा करके हो, अन्य ऑनलाइन शॉपिंग का लोभ दिखाकर लूटना हो, आजकल विदेशी कंपनियां बहुत तेजी से अपने देश में ऑनलाइन पाँव पसार रही है, और अपने भारत देश का पैसा विदेश लेकर जा रही है। जरा सोचों और कोशिश करों की अपने देश का पैसा अपने देश में रहे। अपने भारत में बने भारतीय वस्तुओं को अपने भारतीय भाई – बहनों खरीदों, जिससे भारत का पैसा भारत में रहे।

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यह कविता (ऑनलाइन पाँव पसारो।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ब्रह्मचारिणी माता।

Kmsraj51 की कलम से…..

Brahmacharini Mata | ब्रह्मचारिणी माता।

“ब्रह्मचारिणी”

लाल रंग अति प्रिय माता को,
चीनी का भोग लगाते हैं।
तप की चारणी ब्रह्मचारिणी में
तप से ध्यान लगाए हैं॥

शास्त्र ज्ञान सर्वज्ञ संपन्न मां,
गुड़हल – कमल दल चढ़ाते हैं।
दूध युक्त चीजों का भोग,
घी – कपूर से दीपक जलाते हैं॥

श्रद्धा सुमन अर्पित करते,
ब्रह्मचारिणी की आरती पढ़ते हैं।
वर्षों शिव भक्ति में लगे,
विल्व पत्र केवल मां खाती थी॥

आंधी गर्मी बहुत थी झेलीं,
तप में मां का कोई न शानी है।
श्वेत वस्त्र में लपेट शरीर को
सृष्टि में सक्षम ऊर्जा भरती हैं॥

एक हाथ में अष्टदल माला,
दूजे में कमंडल धारण करती हैं।
आंतरिक शक्ति विस्तार करती,
पथ विचलित नहीं करने वाली हैं॥

जो शक्ति आराधना करे मन से,
उसके कठिन काम बन जाते हैं।
माता से कृपा आशीष मिलने पर,
बड़े संकट दूर भाग जाते हैं॥

नारद जी के उपदेश से माता,
कठिन तपस्या खुद कर डाली थी।
तप से मिलेंगे भोला शंकर,
मिलने वाली उसने मन में ठानी थी॥

पूर्व जन्म में दक्ष की पुत्री,
हवन कुंड में कूद शरीर गवाई हैं।
दूजे जन्म में ब्रह्मचारिणी रूप,
धर कर माता शक्ति स्वरूपा आई है॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — माँ दुर्गाजी का यह दूसरा स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनन्तफल देने वाला है। इनकी उपासना से मनुष्य में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है। जीवन के कठिन संघर्षों में भी उसका मन कर्तव्य-पथ से विचलित नहीं होता। माँ ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से उसे सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है। प्रात: स्नान के बाद मां ब्रह्मचारिणी की मूर्ति स्थापित करें। फिर उनकी पूजा करें, मां ब्रह्मचारिणी को अक्षत्, फूल, कुमकुम, गंध, धूप, दीप, नैवेद्य, फल आदि चढ़ाते हैं। यदि संभव हो तो आप उनको चमेली के फूलों की माला अर्पित करें।

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यह कविता (ब्रह्मचारिणी माता।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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योग निद्रा कीं दुष्ट संहार।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ योग निद्रा कीं दुष्ट संहार। ♦

योग निद्रा का कर ध्यान,
मधु कैटभ किया संधान।
धरा पे जो कुटिल कामी,
चुनक मारती कल्यानी?

खल कामी खड्योत पर,
कर लो जी अनुसंधान।
चक्र सुदर्शन विष्णु का
बोल रे जय श्री राम।

दुष्टों से धरा खाली हो,
शिव शक्ति बहाली हो।
भारत मां की रखवाली,
शास्त्र समस्त संधान।

दुष्ट दमन श्री राम किये,
प्रेम ने बोला जय श्री राम।
बानर – भालू संग लिया,
रावण ऊपर प्रहार किया।

खर दूषण त्रिसरा मारा,
बाली मुक्तिधाम सिधारा।
सुग्रीव का साथ निभाया,
सेनापति जामवंत बनाया।

तीर समुद्र जब सेना आई,
तब समझ नहीं, आंख दिखाई।
समुद्री तंहा रघनाथ तप कीना,
अनसुनी, श्रीराम क्रोध दुना।

धनुष बाण का किया संधान,
समुद्र कांपते आया मान।
रघुनंदन आगे शीश झुकाया,
राम सेना लंका भिजवाया।

महामाया देवी मोह स्वरूपा,
जो दुष्टों की रहती है भूखा।
सिंह वाहिनी की है गर्जना,
विश्व में हलचल बढ़ तीखा।

समुद्र का पूछता जल युग,
धरा पर हलचल भय मुक्त।
महामाया ने दुष्ट को मारा,
दैत्य को जिसे नहीं सहारा।

असिलोमा नामक दैत्य सेना,
बिडाल! राक्षस दौड़ा आया।
सिन्हनाद ओर लक्ष्य कराया,
महिषासुर को मां दौड़ आई।

महिषासुर दौड़ा दौड़ा आया,
भगवती पर अस्त्र चलाया।
संग्राम में तैयार दैत्य की हार,
आसुरों पर परमेश्वरी संहार।

देवी शक्ति का खडग प्रहार,
महा दैत्यों का किया संहार।
संग्राम महोत्सव में बदल गया,
ढोल नगाड़ा ताशा बज रहा।

देवी दैत्यों की कमर तोड़ी,
कितनों की गर्दन मरोड़ डाली।
जगदंबा का करो मन से ध्यान,
संतुष्ट हो जाएगा सारा जहान।

देवी करती है सबका कल्याण,
देवताओं पर है उसका ध्यान।
कहता मंगल देवी सबसे महान,
जगत का मां करती कल्याण।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — इतिहास इस बात का साक्षी है, दुष्ट कभी सुधरते नहीं, दुष्टों का संहार करना ही पड़ता है दुनिया व समाज में शांति और खुशहाली के लिए, फिर चाहे युग (समय) कोई भी हो। अगर रावण सुधरने वाला होता तो प्रभु श्री राम उसका वध कभी भी नहीं करते, माना की रावण बुद्धिमान था लेकिन था तो दुष्ट, अपनी दुष्टता के कारण ही रावण मारा गया। अगर महिषासुर सुधर जाता तो माँ दुर्गा को उसका वध नहीं करना पड़ता। इसलिए युग चाहे कोई भी हो दुष्ट की एकमात्र सजा है, उसका वध, अगर दुष्ट का वध नहीं किया गया तो अपने देश, समाज और पूरी दुनिया के लिया नासूर बन जायेगा।

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यह कविता (योग निद्रा कीं दुष्ट संहार।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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रूसी महाबली।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ रूसी महाबली। ♦

समय बहुत रूस दिया यूक्रेन को,
अमेरिका नाटो के चढ़ाने में चढ़ा।
ब्रिटेन नाटो के हथियारों से लड़ा,
हॉस्पिटल स्कूल में सेना उतार दिया॥

ग्रामीण शहरी नागरिकों को दिया हथियार,
ड्रोन और मिसाइल से लगातार किया प्रहार।
फिर भी यूक्रेन के सैनिक कर रहे सरेंडर बार-बार,
रूसी सेना जगह बदल कर कर रही है पलटवार॥

रूस ने यस – 500 महा युद्ध में दिया उतार,
अमेरिका यूरोप नाटो में मचा भारी हाहाकार।
पुतिन ने महायुद्ध में अपना पराक्रम दिखाया,
विनाशक हथियार से दुश्मन को पहले कंपाया॥

S – 500 का किसी भी देश में तोड़ नहीं,
उसके सामने दुश्मन का कोई वेपन दिखेगा नहीं।
दुश्मन को खोज खोज एस – 500 मार गिराएगा,
दूर दूर तक कहीं भी दुश्मन नहीं दिखलाएगा॥

लेजर गाइडेड बम से भी रूस करेगा प्रहार,
दुश्मन के रडार सिस्टम को जो करेगा बर्बाद।
मिसाइल और विमान पर करेगा भारी वार,
दुश्मन के खेमे में मच जाएगा भारी हाहाकार॥

अमेरिका का मिनट मैन हो जाएगा बेकार,
अमेरिका – यूरोपीय देश का रूस लाया काल।
10 बैलिस्टिक मिसाइल पर एक साथ प्रहार,
अमेरिका का बाम्बा भी दिखने लगेगा निस्सहाय॥

सरमट मिसाइल से अमेरिका यूक्रेन पर प्रहार,
जो बाइडन की कोशिश की चौधराहट पर वार।
यूक्रेन रूस महायुद्ध पर मंगल कर रहा विचार,
दुनिया में दुनिया देख रही भीषण युद्ध हाहाकार॥

रूस के पुतिन, यूरोप पर करेंगे वार,
क्रीमिया जामिया फिनलैंड को बेकार।
टर्की, नार्थ कोरिया, चीन, रूस तैयार,
यूरोप अमेरिका हो जाएगा लाचार॥

रूस और टर्की करेगा चारों तरफ वार,
फिनलैंड का मंसूबा हो जाएगा बेकार।
चीन करेगा ताइवान पर भीषण प्रहार,
अमेरिका पर सभी घेरकर करेंगे वार॥

चक्रव्यूह चारों तरफ से पूरा पूरा तैयार,
चार यार मिल कर अमेरिका पर वार।
चारों यार नाटो खात्मे की कसम खाई,
नाटो के अस्तित्व खत्म करेंगे भाई॥

फिनलैंड – यूक्रेन साथ की कसम खाई,
नाटो से मिलने के लिए आवेदन लगाई।
दक्षिणकोरिया यूक्रेन ताइवान घबराए,
चारों यार मिलकर एक बिगुल बजाया॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — समय बहुत रूस दिया यूक्रेन को, अमेरिका नाटो के चढ़ाने में चढ़ा। ब्रिटेन नाटो के हथियारों से लड़ा, हॉस्पिटल स्कूल में सेना उतार दिया। अब तो रूस ने यस – 500 महायुद्ध में दिया उतार है अमेरिका यूरोप नाटो में मचा है भारी हाहाकार। पुतिन ने महायुद्ध में अपना पराक्रम दिखाया, विनाशक हथियार से दुश्मन को पहले कंपाया। S – 500 का किसी भी देश में अब तक तोड़ नहीं, उसके सामने दुश्मन का कोई भी वेपन दिखेगा नहीं। अब तो दुश्मन को खोज-खोज कर एस – 500 मार गिराएगा, दूर दूर तक कहीं भी दुश्मन नहीं दिखलाएगा।

—————

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यह कविता (रूसी महाबली।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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विकास मार्ग पर चलें!

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ विकास मार्ग पर चलें! ♦

उसने आगे आकर हमें सुनाया,
उत्तर देने के लिए मंगल आया।
हम शांति प्रदर्शक सबको भाया,
सद्भाव की हमने अलख जगाया।

वह कहता है पूराने संबंध छोड़ो,
हम हैं हमसे ही नया नाता जोड़ो।
भारत सदा बैलेंस करके चलता है,
शांतिदूत बन सबकी रक्षा करता।

रक्षा हजारों पर अपनी निर्भरता,
खत्म करने की वह हमसे कहा।
यह पता वह कितना साथ देगा,
वह तो अपनी देखी देखा करता।

तेल और हथियार देने को बोला,
दुनिया पर भरोसा करने से रोका?
खुद उकसा वे पर विश्वास करता,
अपने आप विचार किया करता।

एक अपने मंच से सचिव ने कहा,
ऊर्जा व वस्तुएं हमारे हित ने नहीं।
अपनी आवश्यकता है नहीं छोड़ा,
हमने तो सबसे अच्छा नाता जोड़ा।

मित्र देश के संबंध बिगाड़ने की कहा,
पुराने समझौते को टालने को कहा।
खुद ही महान नई मित्रता बनाता रहा,
आगे आकर चौध राणा चलाता रहा।

भारत संयुक्त राष्ट्र संघ में भी अपना,
निष्पक्ष बयान दुनिया को दे डाला।
मानव के लिए जांच की कह डाला,
अमन चैन की राह सुझाव दे डाला।

उसके गले नहीं उतरती बात हमारी,
भला सबका, यही हमने बता डाला।
दोनों पक्षों को शांति संदेश सुनाया,
संयम बरतने के लिए हमने बताया।

सुंदर सुगम मार्ग प्रशस्त किया जाता,
उपदेशों की तरफ ध्यान दिया जाता।
दुनिया में प्रदूषण पर रोक लग जाता,
विकास मार्ग का रास्ता खुल जाता।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — दोस्त वही अच्छा जो अच्छे समय के साथ – साथ बुरे समय में भी साथ ना छोड़े। ऐसी दोस्ती का क्या करना? जो मात्र अपना ही फायदा देखे सदैव? ऐसे दोस्त से अच्छा है की, दोस्ती ही ना हो, हमे तो वही दोस्त चाहिए जो सदैव हमारा साथ दे ऐसे दोस्त के साथ ही कंधे से कन्धा मिलाकर चले। ऐसे दोस्त से दुरी ही भली है जो जरूरत पर साथ ही ना दे, उम्मीद पर कभी खरा ही ना उतरे, जो सदैव ही केवल अपने बारे में सोचे। हमारे लिए ऐसा ही दोस्त सही है जो सुख – दुःख में सदैव ही हमारे साथ खड़ा रहे।

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यह कविता (विकास मार्ग पर चलें!) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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यूक्रेन की तबाही!

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ यूक्रेन की तबाही! ♦

रूसी सेना का सैन्य ऑपरेशन यूक्रेन में है जारी,
शहर शहर पर रूसी सेना कर रही है बमबारी।

क्रोमाटोस्क पर रूस ने मिसाइल गिरा दी भारी,
रूस के टैंक पर बम बरसा रहा यूक्रेन करारे।

यूरोपीय संसद ने रूस पर बैन लगाया करारी,
युद्ध यूक्रेन में जिसे बंद करने के लिए चेताया।

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय से रूस पहले से ही बाहर,
फिर भी न्यायालय में भारी उस पर लगाया पावर।

संयुक्त राष्ट्र की बड़की अदालत का ऐसा तेवर,
सैन्य अभियान तत्काल रुकने का फैसला सर!

अपना घर हम अपना ही कहते अपना अपनाना है।
रसिया ने भी ठाना है यूक्रेन को संदेश निभाना है।

खेरसन के रेलवे ट्रैक को पार करते दिखा रूसी टैंक,
सेना कर रही है जगह – जगह से भारी भरकम खर्च।

ला त विया में यूक्रेन सेना कर रही है पलटवार,
उधर बुल्गेरिया का रूस राजदूत को संदेश।

24 घंटे में उसके राजदूत छोड़ दें मेरा पूरा देश,
रूस के यूक्रेन की मदद करने वालों को कड़ा संदेश।

पुतिन ने यूक्रेन में जैविक लैब के किया दावा,
यू एन एस सी से चीन ने लैब जांच की मांग की!

आठ देशों का संगठन यूक्रेन के समर्थन में आया,
रूसी अरबपति की संपत्ति जप्त करने का फैसला सुनाया।

पुतिन ने tv पर आकर देश को किया संबोधित,
पश्चिमी देशों के समर्थक गद्दारों को यूक्रेन से निकाले!

सुमी में रूसी सेना ने किया भारी बमबारी,
ना जी को मेरे सामने लाओ पुतिन की है तैयारी।

यूक्रेन हमारा है हम उसमें जनता को बचाएंगे,
जलेस्की अपने हो अपने ही साथ तुम आओ।

आस्ट्रेलिया – स्वीडन की तर्ज पर कर्तव्य निभाओ,
अपनी बुद्धि का प्रयोग करके युक्रेन बचाओ।

उत्तर कोरिया ने शस्त्रागार आधुनिक कर रहा,
दक्षिण कोरिया उसे हवा ने विस्फोटों पर देखा।

उसका प्रक्षेपण नाकाम होने का दावा है ठोंका,
10 माह प्रक्षेपण उतर कोरिया दुनिया के सामने किया।

अमरीकी राष्ट्रपति जाे बाईडेन ने चीन को क्या चेताया,
ताइवान को लेकर चीन ने भी बिगुल बजाया।

ईरान हाल में इराक स्थित अमरीकी दूतावास,
पर सेना ने भारी मिसाइल दना दन गिराया।

कीव एयरपोर्ट पर हुई रूस की ओर से बमबारी,
कहां जाता है वहां अब तक सुरक्षित रहें अधिकारी।

रूस बम बस ऐसे बालक की जय हो खेल जैसी,
कालिया नाग पर जैसे ही देखें कूदे कृष्ण कन्हैया।

ओडिशा में एयरफोर्स विमान की होती थी मरम्मत,
रूसी सेना माइन बम गिराया यूक्रेन में दना दन।

सुखोई लड़ाकू विमान से रूस कर रहा है प्रहार,
यूक्रेनी सेना का शहर – शहर हो रहा है संहार!

यूक्रेनी सेना प्रमुख रूप से जगह जगह पलटवार,
कहीं कहीं रूसी सेना को खदेड़ने के समाचार।

रूसी सेना ने यूक्रेन के ड्रोन सेंटर पर बम बरपाया,
जिस से रूस पे हमले उसे नष्ट कर ने आया।

जेलेस्की ने नाटो में शामिल होने की झुठलाया,
हमारी इच्छा पुरी नहीं हो सकी सबको सुनाया।

यूक्रेन तात्कालिक स्थित देखकर मांग में आया,
अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा गारंटी स्वीकार की बात दोहराया।

रूस ने कहा यूक्रेन आपने सेना वाला देश बनेगा,
दोनों देशों की प्राइवेट सेना का मदद करेगा।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — अत्यधिक घमंड चाहे व्यक्तिगत हो या राष्ट्रीय सदैव ही सर्वनाश का कारण बनता है। अभी जो माहौल रूस यूक्रेन संघर्ष युद्ध का चल रहा है, यह युद्ध पूरी दुनिया के लिए हानिकारक है। संस्कृत का बहुत प्रसिद्ध लघु सूत्र है “अति सर्वत्र वर्जयेत्” जिसका हिंदी शब्दार्थ है कि “अति करने से हमेशा बचना चाहिए”, अति का परिणाम हमेशा हानिकारक होता है। वास्तव में अति किसी भी चीज की अच्छी नही होती। “लेकिन प्रश्न यहां पर यह है की – मासूम जनता की क्या गलती है?” कुछ भी बनाने में वर्षों का समय लग जाता है, लेकिन बर्बाद यूँ ही मिनटों में हो जाता है। जो कल तक लाखो – करोड़ों, घर दूकान, मकान, कार के मालिक थे, वो आज भिखारी बन गए। उन्हें तो समझ में ही नही आ रहा की आखिर किस गलती का भुगतान हम कर रहे है, गलती कौन करें – भरे कौन ? क्या ज़ेलेंस्की के द्वारा भड़काऊ भाषण यूक्रेन को पूर्ण रूपेण खंडहर में तब्दील करके ही छोड़ेगा?

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चिरायता अमृत आयुर्वेदिक औषधि।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ चिरायता अमृत आयुर्वेदिक औषधि। ♦

दुनिया की सबसे पुरानी औषधि को,
मंगल कामनाओं हेतु बताता हूं!
वैकल्पिकता से सीधे दूर ले जाता हूं,
मुख्य चिकित्सा प्रणाली समझाता हूं।

चिरायता मधुमेह जड़ से खत्म करे,
नीम के काढे से भी कडवा यह लगे।
इसमें कालमेघ का गुण है मिलता,
खून से संबंधित विकार दूर करता।

चिरायता का स्वाद होता है तीखा,
रक्त पित्त विकार के रामबाण सरीखा,
खुजली बवासीर में प्रयोग में लाएं,
कैंसर जैसे रोग में भी इसे अपनाएं।

लीवर में जब कभी सूजन आ जाए,
सोठ और चिरायता के साथ-साथ-
पुनर्नवा काढा बराबर प्रयोग में लाए,
वैद्य ने (से) संपर्क कर मरीज को पिलाएं।

नई कहानी गर जीवन में बनाने हो,
तुम्हें पुराने ज्वर से मुक्ति पानी हो!
शक्ति रूप में फिर शरीर दिखानी हो,
चिरायता के घूट लेकर सयाने हों।

जीभ पर मिलता न कोई स्वाद हो,
अपना मन जब कभी उदास हो!
उसी समय आप कीचन के द्वार हों,
तभी काढे से आपका सरोकार हो।

यदि मुख में बनती नहीं लार हो,
मुख से निकले दुर्गंध की बयार हो!
कुछ भी खाने से मन घबराता हो,
एक कप भर काढ़ा लाभ दिलाता है।

लीवर में जब निगेटिव कीटाणु हों,
काढ़े पीते ही नहीं नामो निशान हों!
मन पर नियंत्रण प्रसन्नता छा जाती,
दो चुटकी चिरायता जवानी लाती।

इसके अलावा अनिद्रा दूर करने वाला,
खुजली होने पर फायदा पहुंचाने वाला!
खांसी और हरात मे लाभदायक होता,
आधा कप काढ़ा सबको फायदा देता।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — मधुमेह रोगी चिरायता के सूखे पत्तों का काढ़ा पीकर डायबिटीज से राहत प्राप्त कर सकते हैं। संक्रमण से लड़ने व बचाव के लिए चिरायता का सेवन काफी पुराने समय से किया जाता रहा है। इसमें मौजूद एंटीवायरल, एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण काफी मजबूत होते हैं, यह सामान्य सर्दी-जुकाम से राहत देने में काफी कारगर साबित होता है। चिरायता एक आयुर्वेदिक औषधि है, चिरायता का उपयोग आयुर्वेद में जड़ी-बूटी के तौर पर किया जाता है। यह शरीर को खून की कमी से भी बचा सकता है। इसकी पत्तियों में मौजूद विटामिन और खनिज हेमाटिनिक (Haematinic) का प्रभाव होता है। यह प्रभाव शरीर में खून को बनाने में सहायक हो सकता है, इसलिए एनीमिया के घरेलू उपचार में चिरायता का उपयोग प्राचीन काल से ही किया जा रहा है।

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यह कविता (चिरायता अमृत आयुर्वेदिक औषधि।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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विश्व महिला दिवस।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ विश्व महिला दिवस। ♦

विविधता भरे विचारों में समाधान मिलते हैं,
चुनौतियों से ही आगे बढ़ने की ताकत मिलती है।

अगर चुप बैठेंगे घर पर तो, दिल कमजोर होते हैं,
मुकाबले में खड़े रहोगे तो जीतने की संभावना अधिक है।

सभी क्षेत्रों में लड़कियां अपने सपने को मरने नहीं देती हैं।
जब शिक्षा में सशक्त भूमिका लड़कियां निभाएंगी।

तो अपने अधिकार के तहत सदा ही लड़ पाएगी।
महिलाओं ने सेना में भी अपना नाम दर्ज कराया है।

भारी भरकम हथियारों को उसने सीने से लगाया है।
अमरीकी सैनिक महिलाएं पुरुषों में कदम मिलाकर चलती है।

भारतीय सेना की महिलाएं लड़ाकू विमान उड़ाती हैं।
ट्रेन चलाने के साथ उपग्रह में आसमान में जाती हैं।

शक्ति और मनोबल की बेजोड़ मिसाल दिखाती हैं।
देश की रक्षा और सुरक्षा में वह आगे बढ़कर आती हैं।

संतति को बढ़ाने के लिए अपना मातृ धर्म निभाती हैं।
लोकतंत्र निर्माण में अपने अधिकार का प्रयोग करती हैं।

बच्चों को हुनर वान बनाकर जीवन सवारा करती हैं।
प्रभु की कथा सुनाती आत्म शुद्धि के ईश्वर का गुण गाती हैं।

न्यायालय में नारी न्यायप्रिय रानी के जैसी दिखती हैं।
चिकित्सालय में महिलाएं सेवा भाव रूप में आती हैं।

अच्छे करतब दिखाकर जन-जन को जागरूक करती है।
स्वस्थ समाज की धुरी बनकर महिलाएं आगे आती हैं।

पावन बगिया वगैरह में तरह-तरह की फूल खिलाती हैं।
देश का विघटन करने वालों को जाने क्यों वह भाती हैं।

दो परिवारों में रहकर, सबको साथ लेकर अपना कर्तव्य निभाती हैं।
कलम और कागज से वह दुनिया को जागरूक कर जाती है।
सुंदर परिधान और घुघराले बालों से इंद्र को छकाती हैं।

समृद्ध परंपराओं का पालन करने में आगे आती हैं,
लोरी गाती है वह पारिवारिक संबंध स्थापित करती हैं।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — आज के समय में नारी हर क्षेत्र में अपना योगदान दे रही हैं, चाहे वह आसमान हो, या समुद्र हर जगह अपना सम्पूर्ण योगदान दे रही हैं। माँ बन कर जीवन में पूर्णता पा लेती है नारी, सर्वस्व अपना सौंप कर, बच्चों को महान बनाती हैं नारी। जैसे प्रकृति धरती सदैव ही देना जानती है, उसी की तरह, बस देना ही जानती है नारी, प्रेम, भाव, इज्जत, बस यही तो मांगती हैं नारी। जीवन के हर पड़ाव में, बस आलंबन चाहती है नारी, वरना तो वो स्वयं शक्ति है, और हर किसी पर भारी है नारी। नारी को सरल समझने की भूल न करो, ईश्वरत्व का मिश्रण है नारी, हम खुद अपना सम्मान करें, और मान करें हम हैं नारी। ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ पर साहस व शौर्य की प्रतिमूर्ति नारी शक्ति को नमन। नारी सशक्तिकरण के बिना मानवता का विकास अधूरा है।

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  • सुबह का संदेश।
  • चलो दिवाली मनाएं।
  • दीपों का त्योहार।
  • नरेंद्र मोदी के कार्यकाल और उनके कार्य पर प्रकाश।

KMSRAJ51: Motivational Speaker

https://www.youtube.com/watch?v=0XYeLGPGmII

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एक सफर।

बाल विवाह – एक अभिशाप।

क्या बदलाव लायेगा नया साल।

है तो नववर्ष।

मोह।

अपना धर्म सबसे उत्तम।

ठंडी व्यार।

रिश्तों को निभाना सीखो।

तंत्र, मंत्र और तत्व ज्ञान में अंतर।

मित्र।

आखिर क्यों।

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